सोमवार, 7 मार्च 2011

बचें खांसी की फांसी से... त्‍वमेव माताश्‍च पिता त्‍वमेव .. ब्‍लॉग4वार्ता .. संगीता पुरी

आप सबों को संगीता पुरी का नमस्‍कार , 7 मार्च 2011 को आसमान में बृहस्‍पति और चंद्र की युति बनेगी। अभी न तो बृहस्‍पति और न ही चंद्रमा के दर्शन हो सकते हैं , क्‍यूंकि ये दोनो ग्रह सूर्य के आसपास है और सूर्य के साथ ही उदय और अस्‍त होते हैं , इसलिए सूर्य की चमक में इसे देख पाना संभव नहीं होता। इस समय 'गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष' के हिसाब से इसकी शक्ति भी कम होती है , इसलिए यह अधिक प्रभावी नहीं हो पाता है। फिर भी पृथ्‍वी के जड चेतन पर इसके आंशिक प्रभाव से इंकार नहीं किया जा सकता। वैसे बृहस्‍पति के कारण पिछले वर्ष मई या जून से जिन लोगों को परेशानी बनी हुई है , उसका अब अंतिम दौर ही चल रहा है। बस आज सूर्यास्‍त के आसपास कुछ सावधान रहने की जरूरत है। उसके  दो चार घंटे बाद से ही राहत मिलने की उम्‍मीद की जा सकती है। इस सुखद सूचना के बाद नए चिट्ठों की ब्‍लॉग4वार्ता पर चलते हैं ....




शुरुआत हुई थी कुछ ऐसे

की तुझ तक आने से रोका था मैंने उसको -
या-
उस दिन जब मैंने तुझको पहली बार सुना?
या-
उस दिन जब पहली बार तुझको अपने साथ सुना?
पता नहीं,
या तब जब तेरी गहरी आँखें देखी या,
जब तुझको कुछ मैंने कहता देखा या,
जब तेरे मुख पर निश्छल मुस्कान खिली या,
जब पहली बार तुझको अपने पास मिला और जब कोमल स्पर्श का एहसास हुआ या,
शायद जब स्वपनो में पाया तुझको, और तेरा जब आभास हुआ?
पता नहीं,

खांसी यूं तो अपने आप में कोई बीमारी नहीं है, पर यह शरीर के अंदर पनप रही या पनपने की कोशिश कर रही दूसरी बीमारियों का लक्षण जरूर है। वैसे, आम इलाजों से खांसी ठीक भी हो जाती है, पर कई बार यह किसी गंभीर बीमारी की ओर भी इशारा कर सकती है, इसलिए इसे नजरअंदाज करना ठीक नहीं है। एक्सपर्ट्स से बात करके खांसी के बारे में पूरी जानकारी दे रहे हैं नरेश तनेजा : 

आज मै अपने बड़े भाई श्री कृष्ण सिंह के बारे में आपलोगों को कुछ बताना चाहता हूँ.यह कि एक जीवन में भाई का कितना बड़ा रोल होता है.मैं चार भाइयों में सबसे छोटा हूँ.पिताजी के मरने के समय हम सभी छोटे थे.वह कोल माईन्स में माईनिंग सरदार के रूप में कम करते थे.बम्पिंग के दौरान मजदूरों को बचाने में उनकी जान चली गई थी.उस समय बड़े भाई इंटर की पढाई करने कालेज गए थे .पिताजी के मरने के बाद उन्हें पढाई छोड़नी पड़ी. माँ के साथ मिलकर परिवार के आठ सदस्यों की जिम्मेदारी उन्होंने बड़ी क़ाबलियत से और संजीदगी के साथ निभाई.

संचार की एक परिभाषा में कहा गया है कि विचारों का आदान-प्रदान ही संचार है, प्यार भी एक तरह का आजीवन संचार है। वह भी देना और पाना है, लेकिन वह लघु और दीर्घ आवृत्ति का भी होता है। कहतें हैं पहली नजर में प्यार हो गया, सच यह है कि देखने का एक प्रभाव है ठीक उसी तरह जैसे हर एक इनसान दूसरे को प्रभावित करता है, या तो दूसरे के अनुकूल या फिर रिझाने के लिए उसके अनुरूप बनने का स्वांग रचा जाता है। लेकिन पहली नजर के प्यार के संदर्भ में महज सूरत यानि छवि और डील डौल यानि फिजिकल एपीरियंस को पसंद करते हुए आधार मान लिया जाता है। उसे साझेदारी को कसौटी पर कसा नहीं जाता इसीलिए कामयाबी या शेयरिंग अस्थाई हो सकती है।.........कुछ लोग बाद में कहते हैं, कि विचार नहीं मिलते। मोटे तौर पर इसका कारण फिजिकल अट्रेक्शन को महत्व दिया जाना है।


सम्बन्धों को अनुबन्धों को परिभाषाएँ देनी होंगी

होठों के संग नयनों को कुछ भाषाएँ देनी होंगी
हर विवश आँख के आँसू को
यूँ ही हँस हँस पीना होगा
मै कवि हूँ जब तक पीडा है
तब तक मुझको जीना होगा


विवरण खजुराहो भारत के मध्य प्रदेश प्रान्त, छतरपुर ज़िले में स्थित एक प्रमुख शहर है जो अपने प्राचीन एवं मध्यकालीन मंदिरों के लिये विश्वविख्यात है।


खजुराहो वैसे तो भारत के मध्य प्रदेश प्रान्त, छतरपुर ज़िले में स्थित एक छोटा सा क़स्बा है लेकिन फिर भी भारत में, ताजमहल के बाद, सबसे ज़्यादा देखे और घूमे जाने वाले पर्यटन स्थलों में अगर कोई दूसरा नाम आता है तो वह है, खजुराहो। खजुराहो, भारतीय आर्य स्थापत्य और वास्तुकला की एक नायाब मिसाल है। खजुराहो को इसके अलंकृत मंदिरों की वजह से जाना जाता है जो कि देश के सर्वोत्कृष्ठ मध्यकालीन स्मारक हैं। चंदेल शासकों ने इन मंदिरों की तामीर सन 900 से 1130 ईसवी के बीच करवाई थी। इतिहास में इन मंदिरों का सबसे पहला जो उल्लेख मिलता है,वह अबू रिहान अल बरूनी (1022 ईसवी) तथा अरब मुसाफ़िर इब्न बतूता का है। 



कहा धरा ने ये सूरज से ,प्रिय सूरज जी
बहुत सताते हो हमको ,तुम्हारी मरजी
जब तुम होते दूर मुझे कुछ नहीं सुहाता
साथ तुम्हारा पाने तरस तरस मन जाता
ग्रीष्म ऋतू में आकुल व्याकुल दिल होता है
तुम्हारी उष्मा सहना मुश्किल होता है
जब करीब आते हो ,तन जल जल जाता है

मगर दूर रहना भी मन को खल जाता है



फिल्म 'यमला पगला दीवाना' में धर्मेन्द्र जी ने एक गाना लिखा है. इस फिल्म के प्रचार के दौरान, हमारे रोमांटिक-एक्शन हीरो ने बताया कि वे कवितायेँ भी लिखते हैं और निकट भविष्य में अपना कविता संकलन प्रकाशित करेंगे. जब तक असली कवितायेँ छप कर ना आ जाएँ, तब तक आप इन नकली कविताओं से काम चलाइए:






#1
मैं जट यमला पगला दीवाना,
हो रब्बा, इतनी सी बात ना जाना,
कि राजनीति मेरे बस की बात नहीं है.
चुनाव जीतना तो बाएं हाथ का खेल था,
हो रब्बा, संसद में बैठ ना पाया,
कि अभिनेता से नेता बनना आसान नहीं है.



मिस्र में हालात अब तेजी से बदल रहे हैं। बीते एक पखवाड़े से काहिरा का तहरीर चौक लगातार अंतरराष्ट्रीय मीडिया में छाया हुआ है। तहरीर चौक पर राष्ट्रपति होस्नी मुबारक के खिलाफ इकट्ठे हुए प्रदर्शनकारियों में इस मुल्क की आधी आबादी यानी महिलाओं ने अपनी उल्लेखनीय भूमिका निभाई है। हाल में एक अखबार के पहले पन्ने पर तहरीर चौक पर थकी-मांदी सो रही एक बच्ची की तस्वीर छपीजिसके माथे पर अरबी में लिखा हुआ था मेरी आत्मामेरा दिल मिस्र है। वास्तविक लोकतंत्र को हासिल करने के इस अहिंसक संघर्ष में हर उम्र की महिलाओं का कारवां आगे बढ़ता नजर आया। इस संक्रमण दौर में उनकी भूमिका आगे की ओर बढ़ते हुए कदम हैंये मिस्र के इन ऐतिहासिक पलों की अत्यंत महत्वपूर्ण पात्र हैं। महिलाओं के ये बयान पढ़ने-सुनने को भी मिले कि वे मिस्र में बदलाव लाने के लिए पुरुषों के साथ मिलकर काम कर रही हैं। 



नया Microsoft Mathematics 4.0....में देखिए ....


गणित के सूत्रों और समस्याओं को हल करने और भौतिकी तथा रस्सायन के सूत्रों को हल करने के लिए माइक्रोसॉफ्ट ने एक सॉफ्टवेयर विकसित किया था Microsoft Math जिसके उपयोग के लिए इसे खरीदना पड़ता था पर अब माइक्रोसॉफ्ट ने इसे और बेहतर कर इसका नया संस्करण जारी किया है Microsoft Mathematics 4.0 जो कि बिलकुल मुफ्त है ।


ये प्रोग्राम शिक्षको, विद्यार्थियों और प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे लोगो के लिए विशेष तौर पर उपयोगी है ।


माहौल में बेहद गरमा गर्मी, दुनिया भर के जूते इंसानी अंदाज़ में महागोष्ठी करने के मूड में इक्कठा हुए थे , सारे जूते आपस में चपर चपर कर रहे थे , कि फटे जूते कि शक्ल वाला माइक खरखराया, और सबसे ज्यादा चलने वाली कोल्हापुरी चप्पल ने कहा...

यहाँ यहाँ वहां से पधारे सारे चप्पल, जूतों का बहुत बहुत स्वागत, आज की ये महागोष्ठी क्यों बुलवाई गयी हैं, ये जाने को आप भी बहुत इच्छुक होंगे तो अभी के अभी सारे सवालों के जवाब मिल जायेंगे, तो ज़रा लेस फडफडा के स्वागत कीजिये इनका, ये पहले बुश पे चले फिर पूरी दुनिया पे चले.....
जूतों और चप्पल  के लेस की आवाज़ों के बीच एक आवाज़ गूंजी...
हाँ तो भई.. आप सब यहाँ आयें, धन्यवाद् , अभी ये बड़ी चिंता का विषय है..


इंटरव्यू देने के लिए जैसे ही वह उम्मीदवार कमरे में दाखिल हुआ मैंने उसे पहचान लिया। यह वही लड़का था जिसे मैं अकसर आफिस आते हुए बस में देखा करता था। उसे देखते ही मन चिढ़ जाता। 

उसका गंदा व्यक्तित्व, ओछी हरकतें और  भिखारियों सा पहनावा देख अजीब सी घृणा  भर गई थी मेरे अंदर। एक दिन जब वह बस में चतुर्थ श्रेणी के घटिया लिबास में मेरे साथ बैठा तो मन में आया कि उठकर कहीं और बैठ जाऊं। लेकिन थोड़ी देर बाद वो अपनी आदत के मुताबिक स्वयं उठ गया और महिलाओं के लिए आरक्षित सीटों के पास जाकर खड़ा हो गया। फिर उसकी नजरें नजदीक की सीट पर आंखों पर चश्मा डाले बैठी एक लड़की के चेहरे पर रह-रह की फिरने लगीं। एक दिन की बात हो तो कोई बात नहीं, लेकिन ये उसका रोज का पेशा था। वह कनाट प्लेस में कहीं काम करता था क्योंकि मैंने उसे हमेशा वहीं उतरते देखा।



आज इन्टरनेट का नाम सभी जानते है, ये नाम हमारे लिए नया नहीं रह गया है! आज ये हमारे जीवन का एक हिस्सा बन चुका है! इन्टरनेट से हमारा जीवन कितना सरल हो गया है!



लेकिन सवाल ये उठता है कि इन्टरनेट कहते किसे है?


सूचनाओ और दस्तावेजों के आदान-प्रदान के लिए टी सी पी /आई पी प्रोटोकॉल का उपयोग कर के बनाया गया नेटवर्क जो वर्ल्ड वाइड नेटवर्क के सिद्धांत पर कार्य करता है उसे इन्टरनेट कहते है!

मनुष्य का ज्ञान सामाजिक व्यवहार से या बाहरी दुनिया में, उत्पादक–कार्य या भौतिक संम्पर्क के माध्यम से पैदा होता है। अपने आरम्भिक काल में हमें इन्द्रियबोधी ज्ञान होता है, जो कि हमारे इन्द्रियों द्वारा ग्रहण किया गया या वाह्य प्रभावों पर आधारित होता है। लेकिन यह प्रत्येक  मनुष्य में धीरे–धीरे चिन्तन-मनन एवं विचार–विमर्श के माध्यम से और तर्कसंगत ज्ञान के धरातल पर पूर्णतः विकसित होकर अनेकों सिद्धान्तों को जन्म देती है, और यह ज्ञान धीरे-धीरे तर्कसंगत ज्ञान की अवस्था में आ जाने पर वाह्य समाज व दुनिया के सुधार के लिए मनुष्य द्वारा व्यवहार में लाया जाता है, और लगातार इस प्रकार का प्रयास करते रहने से ज्ञान पहले से और अधिक सशक्त, समृध और प्रखर होकर सामने आता है।

14 फरवरी यानि वेलेंटाइन डेइसकी कल्पना करते ही दिल कीधड़कनें तेज हो जाती हैं। वैसे तो वेलेंटाइन डे का इतिहास काफीपुराना हैंलेकिन भारत में 165 साल पहले हमने वेलेंटाइन डे कानाम सुनाये जानकार आपको भी आश्चर्य होगा कि मसूरी के एकअंग्रेज ने अपनी बहन को लिखे खत में वेलेंटाइन डे का जिक्र कियाथा। वेलेंटाइन डे पर युवक-युवती सब कुछ भूलकर प्रेम में डूब जातेहैंउन्हें लगता है कि दुनिया में प्रेम से बढ़कर और कोई दूसरा कामनहीं है। मगर सच्चाई इससे विपरित होती है। होना तो यह चाहिए किइस वेलेंटाइन डे की तमाम अच्छाइयों को हम अपनी संस्कृति मेंमिलाएँ और फिर इसे मनाएँ तब देखिए जिंदगी कितनी खुशहाललगने लगेगी।



रघुवीर शर्माकरोड़ों का व्यापार, खनिज संपदा अपार, औद्योगिक स्तर पर गुलजार, कृषि की भरपूर पैदावार फिर भी नाम की दरकार यह कहानी है कोटा के रामगंजमंडी क्षेत्र की। रामगंजमंडी विशेषताएं तो अपने आप में खूब समेटे है, लेकिन वह नाम से दूसरों के जानी जाती है। रामगंजमंड़ी क्षेत्र में उत्पादित धनिया हो या लाइम स्टोन पसंद बहुत किये जाते है पर अपने नाम से नहीं पहचाने जाते, इसका कारण यहां के व्यापारी कमाई का गुण तो जानते हैं पर अपनी पहचान बनाने आज तक नहीं बना। 


स्टोन को मिला कोटा का नाम रामगंजमंड़ी क्षेत्र में लाइम स्टोन की अपार खनिज संपदा जमीन में दबी है। यहां निकलने वाला पत्थर पूरे देश ही नहीं वरन् विदेश में भी अपनी पहचान बना चुका है, लेकिन इसकी पहचान रामगंजमंड़ी के नाम से नहीं होकर कोटा स्टोन के नाम से है, जबकि कोटा शहर के समीप छोटे से गांव में मंडाना में निकलने वाला पत्थर अपना पहचान रेड मंडाना के नाम से बनाने में कामयाब रहा है। वहीं रामगंजमंड़ी से सटे खीमच ग्राम में निकलने वाले खनिज ने खीमच पट्टी के नाम से पहचान बनाई है। 
अब इजाजत दीजिए .. अगले सप्‍ताह फिर मिलती हूं ..

3 टिप्पणियाँ:

स्वस्थ्य और खजुराहो दौनों ही लेख बहुत अच्छे लगे |
वार्ता ४ के द्वारा दी गयी लिंक्स पढ़ना बहुत अच्छा लगता है |
अच्छी वार्ता के लिए बधाई |
आशा

उत्तम वार्ता के लिए आभार संगीता जी।

बहुत खूब संगीता जी , बहुत से अनुछुए अनदेखे पोस्ट मिले । शुभकामनाएं और आभार

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