बुधवार, 23 जून 2010

ब्लागिंग का शौक--जिद्दी ख्वाब-एक झलक तेरी--ब्लाग4वार्ता----------ललित शर्मा

आपको ललित शर्मा का नमस्कार, जम्मु एवं काश्मीर सरकार ने वैष्णो देवी एवं अमरनाथ यात्रा करने वाले श्रध्दालुओं पर प्रति वाहन प्रतिदिन 2000रुपए का टैक्स लगा दिया है, अगर आप वहां एक सप्ताह तक रुकते हैं तो लगभग आपको 20,000रुपए का अतिरिक्त खर्च पड़ेगा। इसलिए अब यहां की यात्रा मंहगी होने वाली है। ऐसा भारत के किसी भी तीर्थ पर नहीं है। इसका पुरजोर विरोध होना चाहिए। जम्मु काश्मीर सरकार के तुगलगी फ़ैसले की पुरजोर मजम्मत करनी करनी चाहिए, अब मै आपको वार्ता पर ले चलता हूँ...और चलते हैं कुछ उम्दा चिट्ठों की यात्रा पर ...................एक बात कहना तो भूल ही रहा था कि ब्लाग4वार्ता पहला चर्चा मंच है जो कि प्रिंट मीडिया पर भी उपलब्ध है। यहां स्थान पाए चिट्ठों की चर्चा प्रति सप्ताह बुलंद छत्तीसगढ पर भी हो रही है.........

एंडरसन बडा बेशर्म है: दिल्ली से योगेश गुलाटी आज से 25 साल पहले 65 साल के एंडरसन को पूरे राजकीय सम्मान के साथ प्लेन में बैठा कर अमेरिका रवाना करते वक्त हमारी सरकार ने शायद यही सोचा होगा कि जब तक हमारी अदालत गैस कांड का फैसला सुनाएगी तब तक बूढा एंडरसन स्...इंकलाब री आंधी(राजस्थानी कवि रेवतदान की एक शानदार रचना) आज किताबें पलटते हुए मनीष सिंघवी की लिखी पुस्तक "धरती धोरां री"हाथ लगी पन्ने पलटने पर इस पुस्तक मे एक से बढकर एक राजस्थानी कविताएं पढने को मिली | इन्ही कविताओं में एक कविता 'इन्कलाब री आंधी ' जो राजस्थान क...

वो बड़े खुशनसीब होते हैं , जिनके आप जैसे दोस्त होते हैं --- सन १९७७ का जून महीना । दिल्ली के सात भावी डॉक्टर शिमला घूमने गए । अपना तो यह पहला अवसर था जब हमने दिल्ली से बाहर कदम रखा था । यहीं पैदा हुए , पले बढे , पढ़े । कोई रिश्तेदार भी दिल्ली से बाहर नहीं । आखिर दोस...अबकी बार गाँव जाने पर जब बिच्छू ने मुझे डंक मारा..........सतीश पंचम इस बार गाँव जाने पर मुझे एक बिच्छू ने डंक मार दिया....सनसनाता....फनफनाता डंक......। बिच्छू का डंक क्या होता है यह पहली बार जाना....पहली बार उस दर्द को महसूस किया और उस छटपटाहट से गुजरा। हुआ ...

ब्लॉगिंग का बुखार, दिल पे मत ले यार...खुशदीप क्या कहा नापसंद का चटका लगाना है...अरे कहां लगाऊं...ये चिट्ठा जगत, इंडली, ब्लॉग प्रहरी वालों ने ऑप्शन ही नहीं छोड़ रखा...यार ये तो अपुन को कहीं का नहीं छोड़ेंगे...एक वही उस्तरा तो हमारे हाथ लगा था, वो भी ...अगर यही आपके साथ हो तो क्या करेंगे आप ....?? अगर यही आपके साथ हो तो क्या करेंगे आप ....?? गुजरात के भुवा गांव के लोग रविवार, 20 जून को उस वक्त सकते में आ गए, जब शेर व्यस्त रहने वाली सड़क पर आ गया। गिर अभयारण्य से सटे इस गांव के लोगों के लिए यह एक अ...
 
एक झलक तेरी चूड़ियों की खनक , महंदी की महक , पैरों से पायल की छन छन, मन मैं मिश्री घोल रही , एक झलक पाने को तेरी , मन की कोयल बोल रही | मीठी मधुर हंसी तेरी , घूंघट से झांकती चितवन तेरी , क्यू बार बार खींचलातीमुझको , तेर...उनका ज़िक्र करना गाली देने समान है उदार बन, खुशमिज़ाज़ बन, क्षमावान बन, जिस तरह कि कुदरती मेहरबानियाँ तुझ पर बरसती हैं, तू औरों पर बरसा । -शेख सादी किसी आदमी को उसके प्रति की गई मेहरबानी की याद दिलाना और उनका ज़िक्र करना गाली ...
 
ब्लागवाणी बंद-ब्लागर तंग ब्लागवाणी पर न जाने क्यों कर 18 जून से ताला लग गया है। हम ज्यादा ब्लाग देख नहीं पाते हैं ऐसे में हमें इसका ठीक-ठीक कारण मालूम नहीं है। लेकिन हम इतना जरूर जानते हैं कि ब्लागवाणी के बंद होने से ब्लागर जरूर त...बंद होना ब्लोगवाणी का और खुश तथा मायूस होना अलग-अलग लोगों का सीता की दुविधा ....." पोस्ट पर ब्लोगवाणी का अटके रहने का आज चौथा दिन है। पहले दिन तो हमने यही अनुमान लगाया कि शायद ब्लोगवाणी का रख-रखाव होने के कारण ऐसा है। फिर जब दूसरे दिन भी हालत नहीं बदली तो सोचने लगे...
 
मेरी "गंगा माँ" को बचा लो प्लीज मेरी ममतामयी माँ की जान संकट में है. वह तिल -तिलकर मर रही है और मैं ऐसा अभागा बेटा हूँ जो चाहकर भी कुछ नहीं कर सकता. दरअसल मेरी माँ की इस हालत के लिए सिर्फ मैं ही नहीं बल्कि आप सभी ज़िम्मेदार हैं. आप में ...गरीब देश के करोड़पति सांसद!  राज्यसभा में पहुँचने वाले 49 नए सांसदों में 38 करोड़पति हैं। महिला आरक्षण की बात करने वाले तमाम दल की बातें बेमानी निकलीं, क्योंकि राज्यसभा में केवल तीन महिलाएँ ही पहुँच पाई हैं। सबसे आश्च... 
 
कौमी एकता और तवायफ वो तवायफ कई मर्दों को पहचानती है शायद इसीलिये दुनिया को ज्यादा जानती है उसके कमरे में हर म$जहब के भगवान की एक-एक तस्वीर लटकी है ये तस्वीरें लीडरों की तकरीरों की तरह नुमाइशी नहीं उसका दरवाजा रात गए तक हिंदू...विरोधी समूह के द्वारा प्रशंसा और सम्‍मान .. इससे बडा सुख क्‍या हो सकता है ??अपने तो हमेशा प्रशंसक होते हैं , इसलिए उसकी प्रशंसा आपको उतना सुख नहीं दे सकती , जितना एक विरोधी के द्वारा आपकी प्रशंसा किए जाने पर होता है। एक विरोधी के द्वारा प्रशंसा किए जाने का अर्थ है कि आप सही राह चल...
 
जिद्दी ख्वाब ख्वाब हैं कि एक जिद्दी बच्चा , जितना मना करो उतने ही आ जाते हैं इन्हें नींद की भी दरकार नहीं खुली आँखों में ही समा जाते हैं...ब्लागिंग का शौक (पार्ट - १)बी" कंपनी का बॉस ... टी.व्ही. देखते देखते भडक उठा ... ये "गोली" इधर आ ... हां बॉस ... ये ब्लागिंग क्या है ... कोई नया गेंग बनेला है क्या बॉस ... अबे घोंचू ... बुला सबको जितने हाजिर हैं ... हां बॉस ... गें...अर्जुन के पेंतरे से घबराई कांग्रेस अंततः अर्जुन ने चला ही दिया ब्रम्हास्त्र* *भोपाल गैस कांड के वक्त मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे कुंवर अर्जुन सिह जो कि पिछले दो सालों से निर्वासित जीवन जी रहे ...
 
मेरा पिघलना अभी बाकी है.... ये कविता * *यहाँ** * *जब मैंने पढ़ी तो जो ख्याल मन में आये वो ये थे....* *मेरा पिघलना अभी बाकी है,* ** *तो भला क्या समझूंगा* *यूँ नदी की तरह बहने की बाते,* *भांप बन बन कर उड़ने की बाते,* *बर्फ से बादल होने क... बस मेरा है!!!सन्‍तुष्‍टता और खुशी साथ-साथ रहते हैं। हम जो हमें मिला है उससे कितने संतुष्ट रहते हैं? यह बात निर्विवाद सत्य है कि संतुष्टि ही हमें सच्ची प्रसन्नता देती है।...
 
चलते चलते आज का कार्टून

दस से अभी भी उम्मीद !!!!!!!!! !!!!!!!!!!!! 
 मस्तान सिंग  MASTAN TOONS - पर
अब देते हैं वार्ता को विराम --- आप सभी को ललित शर्मा का राम-राम

मंगलवार, 22 जून 2010

स्वर्ग-नर्क का फ़र्क, लिजलिजी व्यवस्था,यह कैसी गुस्ताखी ...? ब्लाग4वार्ता----ललित शर्मा

ब्लॉग4वार्ता ने एक शतक पूर्ण कर लिया, यह ब्लाग वार्ता की समर्पित टीम से संभव हुआ है। मै भी अकेला इन झंझावातों से कहां तक जुझता? लेकिन ब्लाग वार्ता टीम ने समर्पण से चर्चा का कार्य किया। जिस समय मैने ब्लाग लेखन बंद कर दिया था उस समय राजकुमार ग्वालानी जी ने लगभग एक माह चर्चा करके इसे जिंदा रखा। हम उन्हे साधुवाद देते हैं, जिनके पास ऐसे समर्पित साथी हों वहां निरंतर चर्चा होते रहेगी ऐसी आशा है। ब्लागवाणी बंद हो गयी है, इस समय चर्चा मंच का कार्य और भी महत्वपूर्ण हो जाता है कि पाठकों को उम्दा चिट्ठों के लिंक उपलब्ध कराए। कुछ समय पूर्व चर्चा के दूसरे मंचों पर कुछ कमेंट आए थे कि चिट्ठों का लिंक देने का कार्य तो ब्लागवाणी भी करती है ऐसे में इन चर्चाओं का क्या औचित्य है? जब एग्रीगेटर हड़ताल पर हो तो चर्चाओं का औचित्य सबकी समझ में आता है। कुछ मित्रों ने मुझे फ़ोन करके ज्यादा से ज्यादा लिंक देने का आग्रह किया है। जहां तक संभव हो सके मैं उनसे किया गया वादा निभाने की कोशिस करुंगा। अब मै ललित शर्मा आपको ले चलता हुँ आज की ब्लाग4वार्ता पर.................

सबसे पहले चिट्ठा लेते हैं प्रेमरस..दिल्ली ब्लॉगर्स सम्मेलन: मेरी नज़र से दिल्ली और बाहर से आए हुए ब्लॉगर्स के मिलन से शुरू हुए दिल्ली ब्लॉगर्स सम्मेलन का अंत एक बहुत ही महत्त्वपूर्ण मोड पर समाप्त हुआ। जहां सारे ब्लॉगर्स श्री अविनाश वाचस्पति और श्री जय कुमार झा की इस राय पर एक म..दिल्ली की ब्लॉगर्स मीट, ब्लॉग जगत में छा गई! - Kavita दिल्ली की ब्लॉगर्स मीट* *ब्लॉगर सम्मलेन की हर बात निराली है, मैं रात भर ख्वाब में भी वहीं था, पत्नी बोली...... उठो सुबह होने वाली है. सुबह कार्यालय जाना था, वर्ना सम्मलेन में ही खोया रहता, सम्मलेन का ..

यह कैसी गुस्ताखी ...? रचना को चोरी करते तो सुना था लेकिन कोई रचना को अपने ढंग से सुधारकर यह कहे कि भाइयों वैसा नहीं ऐसा लिखा जाना चाहिए तो इसे आप क्या कहेंगे। देश के प्रसिद्ध कवि एवं ब्लागजगत के हरदिल अजीज रूपचंद शास्त्री के स...ब्लाग जगत पर देव बाबा की सौवी पोस्ट :-) बोलो देव बाबा की जयलाईव रिपोर्ट :- वाराणसी-सूरत एक्सप्रेस* *(बारात इस ट्रेन से भुसावल उतरेगी, फ़िर औरंगाबाद के लिए सडक मार्ग से जाना होगा)* * * यार शादी के दिन दुल्हा किसी कठपुतली से कम थोडे ही होता है, कोई कहेगा उठो.. कोई ...

बहुत याद आते हैं बाबूजी बहुत याद आती है कच्चे बांस की पतली छड़ी और अपनी पीठ पर उधडे उनके निशान जब अपने बेटे को ईडिएट बाक्स के आगे से उठाने में रहता हूँ असफल अनुशासन की पहली सीख उसी छड़ी ने थी सिखाई और आज भी साथ है पिताजी के नहीं रहन... घुरुवा के दिन घलो बहुरथे घुरुवा के दिन घलो बहुरथे * ऊपर दिखत हे तउन फ़ोटू माँ दू ठन हा "घुरुवा" के आय अउ एक ठन हा अइसे बस्ती के, जेन ला "घुरुवा" च केहे जा सकथे. हमन देखे होबो अउ अनुभव घलो करे होबो के गाँव मा "घुरुवा" के का मह...

क्या तुम मेरी बैसाखी बनोगी भावुकता से भरा हुआ मैं , अपनी सुधबुध खो बैठा , आगा पीछा कुछ न देखा , जीवन संग्राम में कूद पड़ा , मेरे आहत मन की पीड़ा की , क्या तुम गवाह बन पाओगी , मेरी उखड़ी सांसों का , कैसे हिसाब रख पाओगी | जीवन का सफर काँटो... जरा सा बखान, कुछ तस्वीरें और एक लघु कथा पारिवारिक व्यस्तताओं के बीच नेट पर आना न के बराबर चल रहा है और इस बीच देख रहा हूँ कि ब्लॉगवाणी भी किन्हीं तकनिकी समस्यायों के तहत नई पोस्ट नहीं दिखा रहा है. आज हालांकि एक नई पोस्ट लगाने का मन था किन्तु...

वफ़ा के नाम पर तुम क्यों संभल कर बैठ गए.... नीतीश के बहाने * *माँ* जैसी कालजयी कृती के रचयिता *गोर्की* अक्सर कहा करते थे ,*मित्रता ऐसी करनी चाहिए जो आगे चलकर बाधक न बने*.लेकिन बहुधा लोग भूल जाते हैं.अब देखिये न राज्यसभा के लिए संपन्न कुछ सदस्यों.. .अपने पिता के योगदान को विस्मृत न करेंअंतर्राष्ट्रीय पिता दिवस पर विशेष ------------- ----------------------- **अपने पिता को विस्मृत न करें * *दिव्या गुप्ता जैन ----------------- ------- * ** * माता-पिता का किसी भी व्यक्ति के जीवन में क्या महत...

चटकों का एक सच ये भी है। *चटकों का एक सच ये भी है* अज मुझे अपनी कहानी बीच मे छोद कर ये पोस्ट डालनी पडी। जो मेरी आत्मा को कई दिन से मथ रही थी। जब से मुझे अपनी गलती का एहसास हुया तब से। मगर इस गलती को मै एक ही पोस्ट मे कई बार नही क...जब तक ब्लॉगवाणी कॉमा में है, स्वर्ग-नर्क का फ़र्क समझिए...खुशदीपब्लॉगवाणी* कॉमा में है, सीता जी की दुविधा को लेकर ऐसी अटकी है कि सुलझने का नाम ही नहीं ले रही है...डॉक्टर भी नहीं बता पा रहे हैं कि आखिर मर्ज़ क्या है...चलो देर-सबेर डायग्नोस हो ही जाएगा...फिलहाल तो चिट्ठ...

जरूरी थोड़े ही है कि हर कोई मुझे पढ़ेमैं लिखता हूँ क्योंकि मेरा ब्लोग है। अब जब लिखता हूँ तो मेरी अपेक्षा भी यही रहती है कि अधिक से अधिक लोग मुझे पढ़ें। पर क्या यह जरूरी है कि हर कोई मुझे पढ़े? मेरे विचार से तो यह बिल्कुल ही जरूरी नहीं है क्यों...एंडरसन को लिजलिजी व्यवस्था ने भगाया एंडरसन तो भोपाल में 15 हजार हत्याएँ करके 25 वर्ष पहले ही भाग गया। लोग बेवजह ही आरोप-प्रत्यारोप लगा रहे हैं। हर कोई अपने को बचाना चाहता है। हर कोई दूसरे को दागदार बनाना चाहता है। बचाने और ..

श्रीमद् भागवत गीता का अपमान! ठाकुर की ठकुराई या मूणत की मुर्खताई स्व. ठाकुर विघ्नहरण सिंह की तस्वीर वाली गीता वितरित इसे सत्ता का दंभ कहें या व्यवस्था की मुर्खता लेकिन डॉ. रमन सिंह के पिताजी के तेरहवीं कार्यक्रम में जिस तरह से हिन्दुओं...रात में सूरज को तरसता हूँ,दिन में धुप से तड़पता हूँ! गत मई मास की हिन्दी युग्म प्रतियोगिता में हिस्सा लेने का मुझे भी अवसर मिला!इसमें मेरी निम्न कविता त्रितय स्थान तक के सफ़र को पूरा कर के आई है!वैसे तो हिन्दी युग्म ने इसे प्रकाशित कर दिया था,पर मुझे लगा कि...

मत कहना,हर शहर में एक बदनाम औरत है!यह लेख सबलोक(संपादक-किशन कालजयी) पत्रिका में छपा है। पाठको को पसंद आ रहा है...खूब सकारात्मक प्रतिक्रियाएं आ रही हैं...कि बिना वैचारिक बोझ और भाषाई आडंबर के कथ्य स्पष्ट है...सोचा आप दोस्तो को भी पढा दूं... -ग...गरमी की भीषणता के बीच एक रात और दिनगर्मी का भीषण प्रकोप चल रहा है। सोचा था इस बार बरसात जल्दी आ जाएगी। पर मौसम का अनुमान है कि अभी एक सप्ताह और लगेगा। पारा फिर से 48 के नजदीक पहुँच रहा है। कल रात सोने के भी लाले पड़ गए। कूलर बिलकुल असफल हो...

जन जन तक ज्‍योतिष के ज्ञान को पहुंचाने का प्रयास - 7 पिछले आलेख में हमने जाना कि पृथ्‍वी की घूर्णन गति के फलस्‍वरूप सूर्य 24 घंटों में एक बार आसमान के चारो ओर घूमता नजर आता है। इस कारण सूर्य की स्थिति को देखते हुए किसी भी लग्‍नकुंडली के द्वारा बच्‍चे के जन्‍...महिला पार्षद के साथ अमानवीय मारपीटमहिला पार्षद के साथ अमानवीय मारपीट चित्तौड़गढ़ नगर पालिका की महिला पार्षद रविना लढ़ा के साथ मारपीट करने की घटना राजस्थान की राजनीति में बाहुबल की बढती भूमिका का संकेत है। मारपीट करने वाले आरोपी के विरूद...


चलते चलते एक कार्टून बाय मस्तान सिंग



  बाकि कुच्छ बच्या ते गर्मी मार गई ....


ब्लागवार्ता को देते है विराम--आप सभी को ललित शर्मा का राम राम---मिलते हैं ब्रेक के बाद

सोमवार, 21 जून 2010

डैड , आई वांट टू बी जस्ट लाईक यू डैड .. ब्‍लॉग4वार्ता ... संगीता पुरी

आप सबों को संगीता पुरी का नमस्‍कार , उम्‍मीद है , रविवार को पोस्‍ट किए गए महत्‍वपूर्ण चिट्ठों की चर्चा आप सबों को अवश्‍य पसंद आएगी।


कल फादर्स डे था , इस खास मौके पर ब्‍लॉग जगत में बहुत सारे पोस्‍ट हुए , डॉ सुभाष रॉय जी ने बहुत ही बढिया लेख लिखा है , हे पिता मनुष्‍य को बचा लो । खुशदीप सहगल जी ने भी फादर्स डे के इतिहास की चर्चा की है। अनुराधाजी ने भी यादों के फ्रेम में जड़ी तस्वीरें पोस्‍ट की हैं। डैड , आई वांट टू बी जस्ट लाईक यू डैड ! यह कह रहे हैं अजय कुमार झा जी
इस अवसर पर बी एस पाबला जी की पोस्‍ट भी ध्‍यान देने योग्‍य है। के सी वर्मा जी लिखते हैं ....

पिता बिना नही मिलता जीवन,  मिलती पहचान ,
पिर्तु बिना ना मिलती जग में ,आन-बान और शान 

पिता हमारे- तुम्हारे दोष- गुणों का परमाण होता है ,
तुम सगुणी तो पिता है पारस ,नही वो पाषाण होता है 


डॉ अजमल हुसैन खान की रचना पर भी एक नजर ......
पिता वो हैं जो जीवन
राह पे चलना सिखाते हैं ।
डगर कैसी भी हो हर
हाल में बढ़ना सिखाते हैं ।
जो हम गिरते संभलते हैं
वो बढ़कर थाम लेते हैं 



कल दिन था पिता का जादू ने तो पिता को हैप्‍पी फादर्स डे कहा , माधव ने भी अपने पापा के लिए एक पोस्‍ट लिखा , पर जाकर तो देखिए आदित्‍य मां का राजदुलारा बना हुआ है


जून महीने में भी गरमी चरम पर है , तभी तो धीरज शाह जी ने पोस्‍ट किया है , गरमी में इंसान ही नहीं जानवर भी प्‍यासा है, इसके साथ ही पढिए बेचैन आत्‍मा क्‍या कह सही है । अब गर्मी है तो लोग दही भी खाएंगे , दही की परिभाषा यहां पढें। मुल्‍ला नसरूद्दीन की 72वीं रचना को लेकर आए है गजेन्‍द्र सिंह जी। जींस की महिमा के बारे में जानकारी दे रहे हैं विनोद कुमार पांडेय जी


कुमारेन्‍द्र सेंगर जी ने पहली पॉडकास्टिंग के रूप में हास्‍य कविता पोस्‍ट की है ,आप भी आनंद लें। देव बाबू ने आज अपने ब्‍लॉग पर 100 वीं पोस्‍ट की है , उन्‍हें हमारी बधाई !आचार्य वाग्‍भट्ट के बारे में जानकारी देते हुए  काब्‍य शास्‍त्र का 19 वां भाग लेकर आए हैं मनोज कुमार जी


मयंक भारद्वाज जी पी डी एफ फाइलों को जोडना सिखा रहे हैं। टाइटिल टैग्‍स से संबंधित टिप्‍स दे रहे हैं सुनील जी।  चंदन कुमार जी फ्री में वेबसाइट बनाने के बारे में जानकारी दे रहे हैं। सॉफ्टवेयर के रूप में पीरियोडिक टेबल को दिखा रहे हैं नवीन प्रकाश जी।


राजकुमार ग्‍वालानी जी जानकारी दे रहे हैं कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खासकर एशियाई देशों में बॉडी बिल्डिंग से महिलाओं को जोडऩे के लिए अंतरराष्ट्रीय महासंघ ने महिलाओं के लिए नियमों में बदलाव किए हैं। एंडरसन को भारत लाने के लिए केन्‍द्र सरकार के दबाब के बारे में जानकारी दे रही है कुसुम ठाकुर जी। अनुराग शर्मा जी  का कहानी प्रस्‍तुत करने का अंदाज ही गजब है , आज पढिए .. 'एक शाम बार में' । डॉक्‍टर गांव जाने के नाम से ही भागते हैं , ऐसे में सरकार ने गांव जानेवाले डॉक्‍टरों को बोनस अंक देने का फैसला किया है। 


इन दिनों विविधता से भरा है हिंदी ब्‍लॉग जगत , यहां कैरियर से जुडी खबरें भी हैं , तो जी के अवधिया जी के द्वारा हिन्दी की अंग्रेजी के प्रति दासता पर चिंतन भी हो रहा है। मनीष जी ने जीजा के प्रति उपजी शार्ट टाइम ईर्ष्या के कारण अपनी कलम चलायी है तो संजीव तिवारी जी के द्वारा केन्‍द्र सरकार के द्वारा जिंदल समूह के काम रोकने के साहसी कार्रवाई का भी पोस्‍ट है। यशवन्त कोठारी का व्यंग्य : मातमपुर्सी की साड़ी भी पढने को मिल रही है , वहीं सचिन अहीर बता रहे हैं कि अब मुंबई में भी फ्ल्‍ैट सस्‍ते मिलेंगे। धर्मेन गोयल जी ने जानकारी दी है कि किडनी ट्रांसप्‍लांट करना अब आसान होगा।  अजेय बताते है , बाढे पूत पिता के धर्में  , तो नितीश के बिहार में राहत के सच का खुलासा कर रहे हैं एस एन विनोद जी । यहां तक कि हिमांशु पांडेय जी ने 'रामायण' की आरती पोस्‍ट की है।

रविवार, 20 जून 2010

डबल ख़ुशी का दिन --- १००वी ब्लॉग वार्ता ,१००वा फादर्स डे



आज तो ख़ुशी का अवसर हैं! आप पूछेंगे क्यों? तो बता देते हैं! आज १००वा फादर्स डे मनाया जा रहा हैं और साथ ही ब्लॉग  वार्ता की यह १००वी ब्लॉग वार्ता हैं! तो हुआ न डबल ख़ुशी का दिन!!!!!!!













शुक्रवार, 18 जून 2010

चलो अब चलू ...बहुत हो गया .........छुट्टिया ख़तम--ब्लोग 4 वार्ता ----ललित शर्मा

बस्तर में सुबह के ८ बज रहे हैं और हम आगे घूमने जाने की तैयारी कर रहे हैं.लोटपोट का चूहा गायब है. लगता है सामने के मंदिर में मोदक का भोग लगाने गया है. उसके बिना बहुत ही कठिनाई हो रही रही है वार्ता लिखने में.चूहे के बिना ही काम चलाने की कोशिश हो रही है.अगर काम बन जाये to ठीक है.ब्लॉग जगत का भ्रमण करके कुछ लिंक आपके लिए लेकर आये हैं.मैं ललित शर्मा आपको ले चलता हूँ आज की ब्लोग 4 वार्ता पर.........  आज सिर्फ शीर्षक दे रहा हूँ............

ड्यूटी जाते समय कर्मचारी को ट्रक ने टक्कर मारा, मौत



अच्छे विचार : बुरे विचार


झांसा खाना, झांसा देना

गुज़री है आज मेरे पाँव छूकर.....


चलो अब चलू ...बहुत हो गया ..................छुट्टिया ख़तम..........



गुरुवार, 17 जून 2010

चलती का नाम गाड़ी-ब्‍लॉगिंग फिर से शुरू==बलॉग4वार्ता-----ललित शर्मा

नमस्कार मित्रों, मानसून की पहली बरसात हो रही है,इसे प्री मानसून की बरसात कहा जा रहा है। कल हमारे घर में बतर कीरी(पतंगा, शलभ) भरमार हो गयी थी। बतर कीरी इसलिए कहा जाता है कि पहली बरसात में यह अपने बिलों से निकल कर बाहर आ जाती है और कुछ देर बाद इसके पंख झड़ जाते हैं। छत्तीसगढी में बतर का अर्थ होता है खेतों की जुताई और बुआई का समय। इनके निकलने से किसान समझ जाता है कि बरसात होने वाली है और खेती किसानी का समय हो चुका है। इसलिए इसे खेती के लिए संकेत भी माना जाता है। चलिए मैं ललित शर्मा आपको ले चलता हुँ ब्लाग वार्ता पर.....

आज पहले एक नया चिट्ठा लेते हैं "चलती का नाम गाड़ी" इस पर आपको यात्रा वृतांत पढने के लिए मिलेंगे तथा आपके अवश्य ही काम आएगा इसकी पहली पोस्ट पढिए"चलती का नाम गाड़ी" से चलिए तुरतुरिया-लव कुश की जन्म भूमि मित्रों, पाठकों की मांग पर हमने 'चलती का नाम गाड़ी' नामक यह ब्लाग प्रारंभ किया है, आपको यहां यात्राओं से संबंधित वृतांत पढने मिलेंगें। इसी के शुभारंभ की कड़ी में चलिए आज तुरतुरिया चलते हैं.बरसात हुयी है, मौसम ठंडक है. ऐसे में इस प्राचीन स्थल का भ्रमण करनाएक नयी यात्रा के मंसूबे के साथ लौट आए---अचानकमार के जंगल गाड़ी में अवधिया जीहम बिलासपुर पहुंच कर कोटमी सोनार जाना चाहते थे जहां क्रोकोडायल पार्क बना हुआ है। उदय भाई को साथ लेकर हम पहुंचे अरविंद झा जी के पास, उन्हे साथ लिया और चर्चा हुयी कि अब किधर चलना है? तो बात-चीत से फ़ैसला हुआ कि कोटमी सोनार न जाकर, रतनपुर..

वैशाखनंदन सम्मान प्रतियोगिता का रिजल्ट काऊंट डाऊन शुरु प्रिय ब्लागर मित्रगणों,हमने वैशाखनंदन सम्मान प्रतियोगिता के आयोजन की घोषणा 16 मार्च 2010 को की थी. तब से इस में शामिल की गई रचनाओं का प्रकाशन ताऊजी डाट काम पर निरंतर जारी था. इस प्रतियोगिता मे हमें आशातीत रचनाएं प्राप्त हुई. इस प्रतियोगिता के सभी.. चाय बिन मांगे , पानी मांगे से हम पिलाने लगे ---एक ग़ज़लकहते हैं -- अतिथि देवो भव: । हमारे देश में अतिथि का आदर सत्कार करना परम कर्तव्य माना जाता है । लेकिन ऐसा लगता है कि बदलते ज़माने के साथ यह सोच भी बदल रही हैं । बोर्ड रूम में मीटिंग चल रही थी । अस्पताल की ग...

ब्‍लॉगिंग फिर से शुरू  .अमिताभ बच्‍चन एक दिन अविनाश वाचस्‍पति के घर आए आप क्‍यों मुस्‍कराए बिग बी तो थे खूब मुस्‍कराए कौन बनेगा करोड़पति मैं हुआ है/था इसी का प्रचार लेनोवो मुझे तो यही याद आता है हो सकता है गलत भी हो। पर गलत ...स्टेज पर मोहम्मद रफ़ी साहब को गाते हुये सुनिये और नौशाद साहब भी साथ में हैंएक बहुत सुन्दर गाना है "मधुबन में राधिका नाचे रे". स्वयं रफी साहब को गाते हुये देखिये, नौशाद साहब साथ में खड़े हैं. एक divine feeling है इस गीत में. object width="500" height="405"> रफी साहब के सबसे छोटे ...

सब मसालेदार है जी...सुबह के नाश्ते में मसालेदार पराठा, मसालेवाली चाय, हाथ में मसालेदार अख़बार में मसालेदार ख़बरों की चुस्की, मसालेदार लंच का डब्बा, मसालेदार स्कूटर को, मसालेदार किक लगा कर, मसालेदार ट्राफिक में, मस...थोड़ी पचक गई थी तोंद, उसे बढ़ाया आज हो गया हूँ "विचार शून्य" * कार्यालय से आते ही अपनी तोंद पे नजर दौड़ाया आवाज सुनाई दिया, भूख लगी है, भोजन बना नहीं था, पैकेट में रखी मूंगफल्ली चबाया. देर नहीं लगी भोजन ब...

भीख मांगता बचपन: दिल्ली से योगेश गुलाटी दिल्ली में मेट्रो ने जिधर का रुख किया उधर वैभव और विलासिता के नित नये नज़ारे उभर आये! या यों कहें कि उन्नति की प्रतीक अट्टालिकाओं की शोभा बढाने मेट्रो ट्रेन भी वहां जा पहुंची! पन्द्रह साल पहले तक नोएडा एक सुन... मैं अच्छा कैसे बन जाऊं, मैं अच्छाई से डरता हूँ.... इसमें कुछ प्रश्न छिपे हैं जो कभी बचपन में उठा करते थे...फिर आज की एक सोच दिखानी चाही...प्रश्न अभी भी मन में है...इसलिए आपसे उत्तर की आशा रखता हूँ..... मर्यादा जीवन भर पूजी, बदले मे वनवास मिला... बड़ी सत...

आनन्द और लक्ष्मी कहां वसते हैं ? सन्तुष्टो भार्यया भर्ता भर्त्रा भार्य्या तथैव च।* *यस्मिन्नेव कुले नित्यं कल्याणं तत्र वै ध्रुवम्* ।। मनु.।। *जिस कुल में स्त्री से पुरूष और पुरूष से स्त्री सदा प्रसन्न रहती है उसी कुल में आनन्द लक्ष्मी और...अब तो बस दे दे दरस, ओ सांवरे अब तो बस दे दे दरस, ओ सांवरे अब तो बस दे दे दरस, ओ सांवरे जग की ज्वाला में जला मन, ढूंढे तेरी छाँव रे अब तो बस............................................ एक तेरी प्यास तेरी आस, हर एक श्वास...

आखिर हम लोग नमक क्यों कम नहीं कर पाते ? यह तो शत-प्रतिशत सच ही है कि नमक का ज़्यादा इस्तेमाल करने से ब्लड-प्रेशर होता ही है---वही चोली दामन वाला साथ, कितनी बार हम लोग इस के बारे में बतिया चुके हैं। लेकिन फिर भी जब मैं अपने आस पास देखता हूं तो पाता...देसिल बयना - 34 : पूत सपूत तो का धन संचय.... करण समस्तीपुरी राम-राम ! अरे ई दुनिया का है ? वृथा मोह-माया है। आदमी भौतिक सुख-सुविधा के पाछे रन-रन करते रहता है। कौनो-कौनो आदमी के लिए तो धने संपत्ति सबस बड़का चीज होता है। मगर लालटेन प्रसाद ऐसन में स...

ब्लागरोत्थान की कोचिंग क्लास पार्क की एक बैन्च पर तीन मित्र बैठे है, मिश्रा, अनोखेलाल और चौबे----तीनों ही हिन्दी के ब्लागर. अब ये आपके सोचने पर है कि आप चाहे तो इसे किसी ब्लागर मीट का नाम दें या मित्रों की आपस की गुफ्तगू. अब इनमें मिश...दो खुशखबरियां, सिगरेट छोड़ने के नुस्खे के साथ आज आपको २ समाचार सुनाता हूँ.. पहली तो खुशखबरी है कि अंतर्राष्ट्रीय चिकित्सा समुदाय का आयुर्वेद में विश्वास बढ़ता ही जा रहा है.. खुद ही देख लीजिये, 'हाथ कंगन को आरसी क्या??(चित्र पर चटका लगा बड़ा कर ...

नेतागिरी हमारे छत्तीसगढ़ की छत्तीसगढ़ राज्य की स्थापना सन 2000 में की गई । बिना किसी प्रयास के आसानी से बन गया था यह राज्य । राज्य बनते ही राजनीति ने यहां नई करवट ली। दिल्ली से फ़रमान आया और अजीत जोगी मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैढ़ गए ।.जन जन तक ज्‍योतिष के ज्ञान को ले जाने का प्रयास -कल के आलेख से हमें जानकारी मिली कि आसमान के गोलाकार 360 डिग्री के 12 भाग कर 12 राशियां बना दी गयी है। अभी तक तो आपको इनके नाम भी याद हो गए होंगे। जन्‍मकुंडली में जिस खाने में 1 लिखा होता है , वह मेष राशि क...

ऐ जिन्दगी ! मैं संवारूं भी तुझे तो क्या सोचकर ! जख्म जो दिए, वो रखे है मैंने ज़िंदा खरोंचकर ! ऐ जिन्दगी ! मैं संवारूं भी तुझे तो क्या सोचकर !!* * मुरादें बही सब धार में, फंसा ही रहा मझधार में, अब लाभ है क्या, सैलाब के अवशेषों को पोंछकर ! ऐ जिन्दगी !...क्या हुआ जो ना चढा पोस्ट ब्लोगवाणी पर क्या हुआ जो ना चढा पोस्ट ब्लोगवाणी पर वाह-वाही ना मिली छोटी - बङी नादानी पर. मैने जो कविता कहा तुने वही कहानी लिखी कुछ ने चटका न भरा ब्लोग की दिवानी पर. उनकी झूठी , मामुली बातें चढी जो आसमां अपनी बातें रेत...

चलते चलते आज का कार्टून

 
 MASTAN TOONS --पर--फ़ुटबाल फ्लू ...

बस आज यहीं पर वार्ता को देते हैं विराम--आपको ललित शर्मा का राम राम

बुधवार, 16 जून 2010

तीन टाँग का कौआ,बैल बाजार,थानों की हक़ीक़त,गाँव-गाँव गौशाला----ब्लाग4वार्ता

नमस्कार मित्रों, कल रात मानसून की पहली बरसात हुयी और हम जी भर के भीगे। शहर से घर के लिए चले थे तो आकाश में बस बादल छाए हुए थे। जब 5किलोमीटर चल लिए तब बरसात प्रारंभ हुयी फ़िर पूरे 22किलोमीटर भीगते हुए आए। बड़ा मजा आया, मानसून की पहली बरसात में भीगना आनंददायक रहा। आज से स्कूल भी प्रारंभ हो रहे हैं। बच्चों में भी स्कूल जाने के लिए उत्साह है, अब चहल-पहल प्रारंभ हो चुकी है। अब चलिए मेरे साथ आज की ब्लाग वार्ता पर, लेते हैं कुछ चिट्ठे...........

खुशदीप सहगल जी का मक्खन आज संगीता पूरी जी के ब्लाग पर पहुंच गया है, क्यों और कैसे ये आप देखिए खुशदीप सहगल जी का मक्‍खन .. आज मेरे ब्‍लॉग पे मक्‍खन पहली बार शहर जा रहा था , मक्‍खनी को भय था कि वहां मक्‍खन बेवकूफ न बन जाए, क्‍यूंकि उसने सुना था कि वहां के लोग गांववालों को बहुत बेवकूफ बनाते हैं' 'शहर से लौटकर मक्‍खन ने बताया कि वो खामख्‍वाह ही उ...राजकुमार सोनी जी को मिला है एक मुडा-तुडा नोट.. एक मुडा-तुडा पांच का नोट शायद आपके किसी काम न आए लेकिन मेरे लिए इसकी अहमियत थोड़ी ज्यादा है * *नौकरी को अपनी माशूका बनाने के लिए जब मैं भागता रहा एक दफ्तर से दूसरे दफ्तर तब..... तब एक मुडा-तुड़ा नोट ह...

कबाड़ खाना पर अशोक पांडे जी बता रहे हैं कि सारे पेड़ भागते हैं मेरे पीछे नंगे पांव ...आज सुबह आपने निज़ार क़ब्बानी की कुछ छोटी छोटी प्रेम कविताएं पढ़ीं. उसी क्रम को बढ़ाते हुए अब पेश हैं इसी कवि की प्रेम कविताओं की अगली किस्त. मैं उम्मीद करता हूं यह इन प्रेम कविताओं की आख़िरी किस्त नहीं होगी....संजय भास्कर जी कह रहे हैं छोटे मांगे तो भीख बड़ा मांगे तो चंदा है ........!! लोकल बस से उतरते ही जैसे हमने एक दोस्त से माचिस मांगी , हाथ बढ़कर , कर देख रहा था एक भिखारी उसने भी हाथ पसार दिए हमने भाषण झाड़ते हुए कहा *' भीख मांगते हुए शर्म नहीं आती ' ?* वह बोला .... मगर भिखमंगा ...

कौशल तिवारी जी खरी खरी कह रहे हैं वेदांता की दादागिरी,गैस त्रासदी पर न्याय? न्याय प्रणाली को लेकर इन दिनों पूरे देश में बहस चल पड़ी है। प्रक्रिया से विलंब होते फैसले ने नैसर्गिक न्याय के सिध्दांत को तो पीछे छोड़ा ही है आम लोगों का विश्वास भी तोड़ा है। पिछले दिनों न्यायालय के दो फैसले ऐ...कल अवधिया जी बहु्त खुश दिखाई दे रहे हैं क्योंकि कल हमारे नापसन्दीलाल छुट्टी पर थे जब कोई वस्तु अनायास ही उपलब्ध हो, और वह भी मुफ्त में, तो उस वस्तु का उपयोग करने की इच्छा जागृत हो ही जाया करती है। ब्लोगवाणी ने भी हम सभी को नापसन्द वाला बटन उपलब्ध करवाया हुआ है; और वह भी बिल्कुल मुफ्त मे...

अरविंद झा जी क्रांति दूत पर बता रहे हैं गुलामी. वह गुलाम है लेकिन उसकी मानसिकता नहीं. क्या हो गया जो उसने दो वक्त की रोटी के लिये ठाकुर से कुछ रुपये उधार ले लिये, इसके बदले में ठाकुर ने भी तो उसकी जमीन गिरवी रख ली थी.दो दिनों से उसका बेटा बीमार था कैसे ...उपदेश सक्सेना जी कह रहे हैं गैस ने बिगाड़ा महंगाई का हाज़मा. भोपाल गैस कांड पर आये फैसले ने एक और जहां देश भर की जनता जो उद्वेलित कर दिया है वहीँ केन्द्र सरकार को इसने एक बड़ी राहत भी दी है. देश में महंगाई ने एक बार फिर नई ऊँचाईयों छ...

दिलीप कह रहे हैं दिल की कलम से आसमान से टूटा तारा...आँख से टूटी पलक....और इंसान की फितरत... अक्सर सोचता हूँ जब भी तारा टूटता है या पलक का बाल टूट कर गिरता है...तो हम कुछ मांगते क्यूँ है...उसी सवाल का जवाब जो सोच पाया वही है ये रचना...पुरानी है...थोड़े संपादन के साथ... नभ के दामन से कल इक सिता... गोदियाल जी अंधड़ पर कह रहे हैं मन की ! बात, आप सुनिए,आजकल यात्रा एवं अत्यधिक व्यस्तता की वजह से अपने ब्लॉग के लिए कुछ लिख पाने में असमर्थ हूँ , फिर भी जब भी वक्त मिलता है कंप्यूटर खोल टिपियाने बैठ जाता हूँ ! इस टिपियाने और ब्लॉग जगत का विचरण करने का भी अपना ...

जापानी मौसी ले आई है तीन टाँग का कौआ अब दक्षिण अफ्रीका में FIFA (फ़ेडरेशान इंटरनेशनेल डी फुटबॉल एसेसिएशन) वार्ल्ड कप कल रहा है। फुटबॉल जापन में बेसबॉल के बाद सब से दूसरे लोकप्रिय खेल है। 2002 के वार्ल्ड कप, जापान और दक्षिण कोरिया, दोनों देशों ...कासे कहुं पर कविता जी महेश्वर यात्रा कर आई हैं, उनके अनुभव में आप भी शरीक हों,छुट्टियों में कही जाने का कार्यक्रम नहीं बन पाया तो सोचा चलो एक दो दिन के लिए महेश्वर ही हो आया जाये.वैसे मालवा की गर्मी छोड़ कर निमाड़ की गर्मी में जाना कोई बुध्धिमात्तापूर्ण फैसला तो नहीं कहा...

गि्रीश पंकज जी का गीत सुनिए हर घर में हो एक गाय और गाँव-गाँव गौशाला ... गाय... कहने को मनुष्येतर जीव है. लेकिन देखा जाये तो वह अपनी माँ से बढ़कर है. माँ का दूध हम दो साल तक पीते हैं लेकिन गाय कादूध जीवन भर. गाय से बनी चीज़ें भी हमारे साथ जीबव भी चलती है,. दही, मठा, छाछ, खीर, महिला थानों की हक़ीक़तबता रहे हैं डॉक्टर आशुतोष शुक्ला जीदेश में भ्रष्टाचार ने किस तरह से अपने पाँव पसार रखे हैं और किसी भी अच्छे काम को किस तरह से पलीता लगाया जाना है इसका ताज़ा उदाहरण सीतापुर जनपद मुख्यालय पर स्थापित महिला थाने में देखने को मिला. जनवरी माह में ...

देखिए-ब्लागर पहुंचे बैल बाजार जुन का माह किसानों के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण होता है। इस माह में किसान अपने खेतों को चौकस करते हैं, मेड़ सुधारते हैं। खेतों में बिखरे हुए कांटों को चुनकर जलाते हैं ताकि फ़सल लगाने के मौके पर पैरों में न चुभ...कौन थी आशा थी तुम्हारी कौन थी आशा थी तुम्हारी जो अभी पानी थी याद कैसी थी हमारी जो नहीं आनी थी हमने क्या दखल दिया ,आप खुद ही आ बैठे बचके जो निकल गए , राह को ही ले बैठे साथ होने में बुराई भी नहीं मानी थी || याद कैसी .... मन में जब...

अब चलते-चलते एक कार्टून

 

 
वार्ता को देते हैं विराम-आप सभी को ललित शर्मा का राम-राम

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