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सोमवार, 1 अप्रैल 2013

आज की एतिहासिक वार्ता में कोई भी ब्लागर बचा नहीं सब के चिट्ठे दर्ज़ हैं यहां..

सवाल : दो माइक क्यों
जवाब : जब सियासी मामला हो तो मुंह दो जाते हैं


    समीरलाल समीर ने एक लम्बी ज़द्दो-ज़हद के बाद ब्लागर्स की एक सियासी पार्ती की घोषणा अंतत: आज़ जबलपुर आकर कर ही दी . उनका अचानक जबलपुर आगमन हुआ.आज़ अल्ल सुबह 5:30 बजे उड़न-रक़ाबी ने जबलपुर के रामपुर एम.पी.ई.बी. की पहाड़ियों जैसे ही लैण्ड किया वैसे ही उधर मौज़ूद जबलपुरिया ब्लागर्स   सह फ़ेसबुकिये क्रमश: विजय तिवारी, बवाल, राजेश दुबे अनूप शुक्ल जी ने सुबह सवेरे टाइप का स्वागत किया. किसी के हाथ में लोटा और पानी से लबालब बाल्टी लिये था, तो कोई नीमिया दातून लिये था. बवाल चाय खौलाते पाए गए.
पोण्ड में नहाने के इरादा था पर मुईं
गाजरघासों से डरे डरे शुक्ला जी

बवाल ने जब प्रात: कालीन औपचारिकाओं के निपटान के बाद चाय पेश की तो समीर लाल यह कहते पाए गये- "कौन टाइप की चाय बनाने लगे ?"- समीर का यह स्टेटमेंट सुन बवाल ने कहा-"जौन टाइप की चाय चाह रहे हो बो शाम को मिलेगी !" इस वाक्य को सुन कर अनूप शुकल जी दूर तलछटी में पानी परे पौंड में  खड़े खड़े मंद-मंद मुस्कान बिखेरेते हुए मौज लेने लगे. यूं तो वे विद्योत्तमा की तलाश में बावरे कालिदासों.  को लेकर भी चिंतित थे पर समीरलाल को लेकर कुछ अधिक भावुक भी लगे जैसा समीरलाल के लिये उनका आदि काल से रवैया रहा है...  इस बीच  उनके सेल पर एक फ़ोन आया जो सम्भवत: दिल्ली से था कालर थे सोचने वाले गधों के मित्र अविनाश वाचस्पति अविनाश जी को  पता नहीं किधर से समीरलाल के अत्यंत गोपनीय दौरे की भनक लगी कि बस वे लगे कि कोई जबलपुर से कन्फ़र्म कर दे कि समीर आ गये तो वे हर गोपनीय को ओपनीय करने का कारोबार आरम्भ करें. किंतु जबलपुरिया हैं कि माई नरबदा की कसम खाए बैठे है कोऊ कछु बतातई नईं आंय .. उनके दिल की हालत ... बहुत अजीब सी थी तभी हमाए फ़ोन पे फ़ोन आया रायपुर से कि हम चंगोरा भाटा से लौटकर ………… सीधे जबलईपुर आवेंगे. व्यवस्था ठीक ठाक रखना . 
सुबह सकारे काफ़िला समीर जी को घर छोड़ आया आज शाम एक प्रेस कांफ़्रेंस हुई जिसकी विस्तृत रिपोर्ट यानी  आगे का भया ये जानने मिसफ़िट पे आना पड़ेगा  
  तब तक आप लोग खुदके लिंक खोजिये... 
bhanuprakashsharma
           कुछ ब्लाग जो हमको पसंद आये उनको भी पढ़ा 
·                   ब्लॉग बुलेटिन




मंगलवार, 17 जुलाई 2012

बाज़ार पॉर्न बेचता है क्योंकि लोग खरीदते हैं सांप से बतियाते हैं अवध भाई ...

आज आपका परिचय हम कराते हैं सिद्धार्थ जी से जो एक अच्छे एष्ट्रोलाज़र है उन्हीं के शब्दों में
"ज्‍येातिष की दुनिया में वर्ष 1997 से हूं। लेकिन कह सकता हूं कि पैदाइशी ज्‍योतिषी हूं। जोशी कभी जाति नहीं होती। भविष्‍य कथन करने वाले पुरोहितों को ज्‍योतिषी की उपाधि मिलती है। जोशी उसी का अपभ्रंश है। हो सकता 


है मेरे पूर्वजों ने कभी ज्‍योतिष का काम किया हो, लेकिन मेरे दादा महज एक चाय की दुकान करते थे और पिताजी 


चिकित्‍सक थे। दादाजी ने कभी पढ़ाई लिखाई में दिमाग नहीं लगाया लेकिन पिताजी न केवल आयुर्विज्ञान का 


अध्‍ययन किया बल्कि ज्‍योतिष में भी खासी रुचि रखी। जब मैं महज डेढ़ साल का था तब पिताजी का सड़क दुर्घटना 


में निधन हो गया था। उनकी डायरियों में कुण्‍डलियां बनी देखी तो समझता नहीं था कि ऐसे खाने क्‍यों बना रखे हैं। 


पहले सोचता था कोई टाइम मैनेजमेंट की ट्रिक होगी। कब ज्‍योतिष के करीब गया और कब इसे विषय के रूप में 


अध्‍ययन करने लगा पता ही नहीं चला। शुरूआत में यह चोरी छिपे था, लेकिन जिन लोगों के फलादेश सटीक पड़े 


उन्‍होंने घर में आकर राज खोल दिया। बाद में साइंस के पैरोकारों की कुण्‍डलियां भी देखी। एक समय ऐसा भी आया 


कि ज्‍योतिष का कार्यालय खोल दिया, फिर उसे बंद कर दिया। यह सोचकर ब्लॉग में लिखना शुरू किया कि 


चर्चाओं का दौर ज्‍योतिष को अधिक समृद्ध करेगा। अब तक ज्ञान देने वाले सभी गुरूओं को शत-शत नमन्। अब 


कुण्‍डली विश्‍लेषण करने के लिए एक वेबसाइट बनाई है। इसमें कई ज्‍योतिषियों को जोड़ा है। एक निश्चित फीस 


लेकर जातकों की कुण्‍डली का तार्किक विश्‍लेषण किया जाएगा। आप भी आमंत्रित है मेरी नई वेबसाइट पर इसका पता है

http://www.parasharas.org/

इसी वेबसाइट का हिन्‍दी वर्जन भी साथ ही तैयार किया गया है। यहां आपको दैनिक फलोदश नियमित 

रूप से मिलेंगे। मेरा मोबाइल नम्बर: 09413156400 है। सशुल्‍क फलादेश के लिए संपर्क किया जा 

सकता है
आगत की आहट को लेकर सोच रहा था- मेरा मन भी इन आहटों को जरूर इन्होने ही बुलाया होगा !.. और हरियाली अमावस से डर सहमा मैं जाने कैसे  मुस्कराना सीख  गया . फ़िर सोचने लगा शब्द तो कुली हैं इन कुलियों को अकारण क्यों परेशान करूं. तभी एक बूढ़ा हँसता हुआ दिखाई दिया. जो हरजाई, हरफ़नमौला, हरकारा था. सच सावन का महीना  कितना मादक होता है.. आज़ समझ सका. पर ऐसे मादक महीने में ये क्या कुछ लोग जैसे अविनाश वाचस्‍पति जैसे लोग नारा लगा रहे हैं  दारू का बोलबाला : आप भी आकर भर लें प्‍याला - .. हम ब्लोगर हूँ..... कछू भी बोलूं तुमसे क्या….? होश आने के बाद करेंगे भूल-सुधार अभी तो बात टायगर की करते हैं.  टाइगर को पता लगी मीडिया की बेबसी,लाचारी को रंगमंच... पर  देखे लेते हैं. खेती में महिलाओं के योगदान का नीति को समझने समझाने की कोशिश में हूं.तब तक आप  सुबीर संवाद सेवा –के ज़रिये गज़ल-वज़ल सुनिये सुनवाईये.
http://www.bamulahija.com/
       अब पाबला जी की उमर क्या है बताएं तो ज़रा……. आप सोच रहे हैं कि बेहूदा सवाल है.. हां है.. क्यों कि पाबला जी का पुनर्ज़न्म हुआ दो बरस पहले ……
सांप से बतियाते हुए डा.अवध तिवारीजबलपुर 
.
                          कहानी किस किसकी  सुनाएं भाई.. भारत के प्रेसिडेंट कौन होंगे एल.बी.ए. अपने प्रेसीडेंट को चुन लिया हरदिल अज़ीज़ Dr. Mahfooz Ali  JBA/ABA/BBA/MBA/RBA वाले ब्लागर्स भी अपने अपने प्रेसीडेंट को चुनें.. ताकि सियासती लोग समझें हम ब्लागर कित्ते संज़ीदा और अच्छे हैं..प्रेसीडेंट चुनने में. 
                             जागरण जंक्सन  एवम फ़ेसबुक पर हिंदी-ब्लागर्स समूह को एक झलक देख तो आएं.. फ़िर पता लगाते हैं कि किसे दामाद चाहिये और किसे....लोकपाल........ 
                      





     मेरा मत -
Jagran Hindi Blogs


रविवार, 24 जून 2012

कुत्तों के बीच पली यह बच्ची आज बोलती नहीं बल्कि भौंकती है !!


                           कुत्तों के बीच पली यह बच्ची आज बोलती नहीं बल्कि भौंकती है !! शीर्षक देख अचम्भित हूं लोग अपने बारे में क्या क्या लिख जाते हैं.ये तो भाई लक्ष्मण रेखा का उल्लंघन वैसे ये तो सब करते है न लक्ष्मण रहे न रेखा में वो बात.. मां ने गीत गाया और टल गई बच्ची की मौत !! गीत बेशक असरदार होते हैं जी. जागरण जंकसन पर बेहतरीन ब्लाग्स मौज़ूद हैं उनमें से कुछ ताज़ातरीन ये रहे :- 

                              अपने स्लाग-ओव्हर वाले साहब बता रहे हैं कि मच्छर अब 
डाक्टर-ईंजीनियर बनेंगे मन्ने मन में एक सवाल आया बनेंगे क्या...... हैं........ हा हा डाक्टर बाबू 

लोग बुरा मत मानियो हम तो मसखरी कर रिये है. 
दो महत्वपूर्ण विषयाधारित लिंक अवश्य देखिये




 halchal

नई-पुरानी हलचल पर वार्ता चमक रही है.........
आभारी है वार्ता-टीम 
नव्या हिंदी साहित्य पर ये प्रेम कविताएं » बांच लीजिये जी क्योंकि शरद कोकास जी 1989 की कवितायें - संगीत की तलाश में हैं. मिली तो आपको पढ़वा देंगे हमारे जीजू..........................ज्ज्ज्ज्ज्ज्जूऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊ

काव्य मंजूषा पर अदाजी बोली अब कहाँ मिलते हैं, ऐसे भारत के लाल, ऐसे भाई, ऐसे शिष्य और ऐसे पुलिस वाले  एक और लिंक जो बेहद मह्त्वपूर्ण है दे रहा हूं व्याधि पर कविता या कविता की व्याधि 
विचारोत्तेजक आलेख अवश्य पढ़ने योग्य है.अगर आपका घर नहीं है तो आप बराए मेहरबानी "SUN_ASTRO"  पर जाएं बन जाएगा घर. 
   
अब गिरीश मुकुल को इज़ाज़त दीजिये पर इसे न भूलिये "बास इज़ आलवेज़ ..."

रविवार, 6 मई 2012

गुण्डा-पार्टी और माधवराज शर्मा की औरत...साथ में अशोक चक्रधर जी ...!!

ताज़ा खबर :-सहोदर प्रदेश के  दो ब्लागर्स के बीच रंजिश इतनी गहरा गई कि एक ब्लागर अमरकंटक की जात्रा पर जा निकसे दूसरे ब्लागर साहब  ने घर का दुआरा बंद कर रक्खा है कि कहीं अगर अमरकंटक वाला बाबा बन गया तो उनके परिवार वाले जत्था लेकर हंगामा करते करते घर में न घुस जाएं..  

भडा़स4मीडियाhttp://news.bhadas4media.com/index.php/dekhsunpadh/57-2011-06-20-05-30-51  पर प्रकाशित स्टोरी वाक़ई सिहरन पैदा कर देती है. क्यों क्या अपने जीवन साथी का नाम का गुदना हाथ गुदवाना ग़लत है..? न आप अंग अंग पर लिखवाएं स्वतंत्रता है इससे हमें क्या..?


  दिव्य नर्मदा वाले आचार्य संजीव सलिलि जी जबलपुर से  "रायपुर में मनाई गई चित्रगुप्त जयंति" की झलक http://divyanarmada.blogspot.in/2012/05/2012.html

अपनी माटीhttp://www.apnimaati.com/ वेबपत्रिका एक अति महत्वपूर्ण पत्रिका बन चुकी है.. 

उद्धवजी पर http://uddhv-moon.blogspot.in/2011/08/blog-post_4760.html गुण्डापार्टी  का ज़िक्र कर इंदु-पुरी गोस्वामी जी स्कूल चलीं गई.. आप लोग ज़रा देखभाल आओ ..         
 महान कवि  अशोक चक्रधर जी को डाट काम हुए बरसों हो गये आप उनकी वेवसाइट पर रे देखो! खेतों में झूम रहीं बालियां!
अशोक जी के बाक़ी कारनामे इधरिच्च तो हैं
अशोक जी काका के साथ
चाय के इंतज़ार में

सोमवार, 30 अप्रैल 2012

चलते चलते ललितडॉट कॉम में गत्यात्मक ज्योतिष और मेरी कविताएं मिसफिट ... ब्‍लॉग4वार्ता .. पांच वार्ताकार

पाठकों को पठनीय लिंक उपलब्‍ध कराने के उद्देश्‍य से 10 मार्च 2010 से शुरू हुई ब्‍लॉग4वार्ता अपने लंबे सफर पर नियमित तौर पर अग्रसर है। हमारे अलावा समय समय पर  राजीव तनेजा जी, यशवंत मेहता जी, राजकुमार ग्वालानी जी , ताऊ जी, शिवम मिश्रा जी देवकुमार झा जी, अजयकुमार झा जी, रुद्राक्ष पाठक, सूर्यकांत गुप्ता जी ने सहयोग देते हुए वार्ता के प्रति अपनी जिम्‍मेदारी का वहन नि:स्‍वार्थ भाव से किया। अभी वार्ता में पांच वार्ताकार अपना सहयोग दे रहे हैं , जिनका परिचय देते हुए प्रस्‍तुत है आज की वार्ता ..

नागपुर महाराष्‍ट्र से ब्‍लॉगिंग कर रही संध्‍या शर्मा जी (http://www.blogger.com/profile/06398860525249236121) अपना परिचय देते हुए लिखती है कि लिखने का शौक तो बचपन से था, ब्लॉग ने मेरी भावनाओं को आप तक पहुचाने की राह आसान कर दी. काफी भावुक और संवेदनशील हूँ. कभी अपने भीतर तो कभी अपने आस-पास जो घटित होते देखती हूँ, तो मन कुछ कहता है, बस उसे ही एक रचना का रूप दे देती हूँ. आपके आशीर्वाद और सराहना की आस रखती हूँ...मैं और मेरी कविताएं (http://sandhyakavyadhara.blogspot.in/) नामक ब्‍लॉग में उन्‍होने 17 अगस्‍त 2010 में अपनी पहली पोस्‍ट 'वक्‍त नहीं' (http://sandhyakavyadhara.blogspot.in/2010/08/waqt-nahi.html) से ब्‍लॉगिंग की शुरूआत की थी, उनके ब्‍लॉग में विचारों और भावों की विविधता लिए हर प्रकार की कविताएं मौजूद हैं , नवीनतम पोस्‍ट 'देहरी का दीया'  है ....
मैं...
सुबह सबेरे
द्वार पर
रंगोली सजाती
कभी चाँद सी
रोटियां गढ़ती
कभी बर्तनों से बतियाती
बिता देती हूँ सारा दिन
उलझी रहती हूँ
दिन भर
चौके- चूल्हे में
बिन संवरी 
उलझी लटें लेकर
फिर भी....!
साँझ ढले
जाग उठता है
देहरी का दीया 
मुझे देखकर....!

अभनपुर , छत्‍तीसगढ से ब्‍लॉगिंग कर रहे ललित शर्मा जी (http://www.blogger.com/profile/09784276654633707541) अपना परिचय देते हुए लिखते हैं कि परिचय क्या दूँ मैं तो अपना, नेह भरी जल की बदरी हूँ। किसी पथिक की प्यास बुझाने, कुँए पर बंधी हुई गगरी हूँ। मीत बनाने जग मे आया, मानवता का सजग प्रहरी हूँ। हर द्वार खुला जिसके घर का, सबका स्वागत करती नगरी हूँ। ललित डॉट कॉम  (http://lalitdotcom.blogspot.in/) नामक ब्‍लॉग में 15 सितंबर 2009 को हिंदी दिवस के दिन ही अपनी पहली पोस्‍ट लेकर आए , हमें प्रत्‍येक सांस को ही हिंदी दिवस समझना चाहिए (http://lalitdotcom.blogspot.in/2009/09/blog-post.html) । इन्‍होने जीवन के हर रंग को अपने आलेखों में समेटा है, कुछ दिनों से अपने यात्रा संस्‍मरण में पुरातात्विक जानकारियों को समेटते हुए इनके लेख विशेष पहचान बनाने की सामर्थ्‍य रखते हैं , इस ब्‍लॉग की नवीनतम पोस्‍ट 'नकटा मंदिर' के बारे में है ....
इस प्रकार मंदिर अधूरा रह गया। आज भी मंदिर परिसर में भीम और हाथी की खंडित प्रतिमा है। खंडित हाथी की प्रतिमा सीढियों के उपर लगी है।

हम विष्णु मंदिर के कुछ चित्र लेते हैं फ़िर हमारी सवारी चाम्पा की तरफ़ बढ चलती है। मुझे मड़वारानी होते हुए पटियापाली जाना है, बाबु साहब ने चाम्पा में एक नया सारथी तैयार कर रखा था जो मुझे मंड़वा रानी दर्शन करवा कर पटियापाली स्कूल तक पहुंचाता और बाबु साहब कुछ आवश्यक कार्य निपटा कर पटियापाली में मुझसे मिलते। चाम्पा स्टेशन पर पहुंचने पर यादव जी स्टेशन पर मिल गए। जाते ही उन्होने प्रणाम कर नारियल का प्रसाद दिया और हम कुछ फ़ल लेकर मड़वा रानी की तरफ़ चल पड़े। रास्ते को पहचानने में कुछ समय लगा। हम चाम्पा-कोरबा मार्ग पर जा रहे थे और इस मार्ग पर मै पहले भी आ चुका हूँ। मड़वारानी पहुंच कर दर्शन किए, यादव ने बताया कि  मड़वा रानी का स्थान पहाड़ी पर है और एक मंदिर नीचे भी बना हुआ है। लोग यहीं दर्शन करते हैं। मड़वारानी के पास ही जगदीश पनिका का गांव कोठारी है, जहां मै दो साल पूर्व आया था।
इसके अलावा शिल्‍पकार के मुख से  (http://shilpkarkemukhse.blogspot.in/) नामक ब्‍लॉग में इनकी कविताएं , चलती का नाम गाडी (http://yatra4all.blogspot.in/) में इनके यात्रावृतांत , NH30 में इससे जुडे समाचार तथा अहडा के गोठ (http://adahakegoth.blogspot.in/)में इनके छत्‍तीसगढी आलेख देखे जा सकते हैं।

चंबा , हिमाचल प्रदेश से ब्‍लॉगिंग कर रहे केवल राम जी  (http://www.blogger.com/profile/04943896768036367102) अपना परिचय देते हुए लिखते हैं कि क्या बताऊँ आपको अपने बारे में, जिंदगी में कुछ खास कहने के लिए नहीं है . बहुत सुहाना सफ़र रहा है आज तक जिंदगी का , पर कुछ खालीपन फिर भी महसूस होता रहा . दुनिया देखने ,सोचने और समझने में अलग है. क्या कुछ नहीं दिखाई देता हमें सुबह से शाम तक. कितना जोड़ पाते हैं हम खुद को उन स्थितियों और परिस्थितियों से, बस यही कुछ समझने और जानने की कोशिश रहती है कि हमेशा दुनिया में इंसान बन कर जी सकूँ। यह ब्लॉग लेखन के साथ साथ ब्लॉगिंग पर शोध भी कर रहे हैं।  चलते चलते (http://www.chalte-chalte.com/) नामक ब्‍लॉग से 15 जून 2010 को अपनी पहली पोस्‍ट  कुछ कहने का मतलब से ब्‍लॉग जगत में पदार्पण करनेवाले उनके ब्‍लॉग में विविधता भरे गजल , कविताएं , क्षणिकाएं और आलेख भरे पडे हैं , इस ब्‍लॉग की नवीनतम पोस्‍ट है 'बाबा मुझे निर्मल कर दो' .... 



एक भक्त की पुकार है "बाबा" मुझे "निर्मल" कर दो" लेकिन बाबा खुद ही मल (स्थूल ) और मैल ( स्थूल और सूक्ष्म) से मुक्त नहीं तो वह दूसरों को कैसे इससे मुक्ति दिलाएगा , "मल" से मुक्ति कोई आसान नहीं, और निर्मल होना तो और भी कठिन है, कठिन ही नहीं असंभव भी है . जब तक जीवन है व्यक्ति स्थूल और सूक्षम रूप से मल से जुड़ा है निर्मल होने का सवाल ही पैदा नहीं होता . हाँ हमारे यहाँ चिंतन के स्तर पर निर्मल होने की भाव सदा रहा है और निश्चित रूप से यह होता भी रहा है . चिंतन के स्तर पर व्यक्ति निर्मल हो सकता है और हमारे अध्यात्म में इसे सदा महता दी जाती रही है . आज हम जिस ऊंचाई पर खुद को महसूस करते हैं उसमें हमारे चिंतन का बहुत बड़ा हाथ है . क्योँकि व्यक्ति संसार में रहता है और संसार में रहते हुए उसे कई प्रकार की स्थितियों से जूझना पड़ता है और अगर व्यक्ति मानसिक रूप से उन स्थितियों का गुलाम बन जाता है तो फिर जीवन की नैसर्गिकता से वह पीछे हट जाता है और जीवन के वास्तविक अनुभवों को अनुभूत नहीं कर पाता .इसके अलावे केवलराम जी का धार्मिक और आध्‍यात्मिक चिंतन धर्म और दर्शन (http://mohalladharmordarshan.blogspot.in/) नामक ब्‍लॉग पर भी रहता है।


जबलपुर , म प्र से ब्‍लॉगिंग कर रहे गिरीश बिल्लोरे "मुकुल"  (https://plus.google.com/111178781293315643657/posts) ने हिंदी ब्लागिंग 2007 में प्रवेश  वाइस आफ़ इन्डिया के प्रतिभागी 17 वर्षीय आभास जोशी को प्रत्साहित करने एवम उसके पक्ष में अंतरजाल वातावरण बनाने के लिये किया. जो अब एक स्थापित गायक है.बावरे-फ़क़ीरा  ब्लाग पर प्रथम प्रकाशित प्रथम रचना दौर 
ब्लागिंग के लिए  प्रोत्साहित करने का श्रेय श्रीमति श्रद्धा जैन, डा.पूर्णिमा वर्मन, तथा समीर लाल को देते हैं. गिरीश मुकुल के नाम से फ़ेसबुक पर प्रसिद्ध गिरीश के मुख्य ब्लाग हैं 
  1. मिसफिट:सीधीबात
  2. इश्क-प्रीत-लव
  3. भारत-ब्रिगेड
  4. बावरे-फकीरा
  5. मेलोडी ऑफ़ लाइफ 
        विकलांग बच्चों की मदद के लिये इनका एलबम बावरे-फ़क़ीरा अब नेट पर उपलब्ध है . हिंदी ब्लाग जगत में वाइस और वीडियो ब्लागिंग (वेबकास्टिंग,पाडकास्टिंग) के लिये गिरीश बिल्लोरे का योगदान ब्लाग जगत का इतिहास में सदैव प्रथम ही माना जाएगा , मिसफिट पर इनकी नवीनतम पोस्‍ट  वीर तो शर शैया पर आराम की तलब रखतें हैं है .....

बेहद कुण्ठित लोगों के का जमवाड़ा सा नज़र आता है हमारे इर्द-गिर्द हमको.
हम लोग अकारण आक्रामक होते जा रहे हैं. वास्तव में हमारी धारण शक्ति का क्षय सतत जारी है. उसके मूल में केवल हमारी आत्म-केंद्रित सोच के अलावा और कुछ नहीं है. इस सोच को बदलना चाहें तो भी हम नहीं बदल सकते क्यों कि जो भी हमारे पास है उससे हम असंतुष्ट हैं.एक बात और है कि हमारी आक्रामकता में बहादुर होने का गुण दिखाई नहीं देता अक्सर हम पीछे से वार करतें हैं या छिप के वार करते हैं.यानी युद्ध के आदर्श स्वरूप हटकर हम छ्द्म रूप से युद्ध में बने रहते हैं. यानी हम सिर्फ़ पीठ पे वार करने को युद्ध मानते हैं. हां रण-कौशल में में "अश्वत्थामा-हतो हत:" की स्थिति कभी कभार ही आनी चाहिये पर हम हैं कि अक्सर "अश्वत्थामा-हतो हत:" का उदघोष करते हैं. वीर ऐसा करते हैं क्या ? न शायद नहीं न कभी भी नहीं. वीर तो शर शैया पर आराम की तलब रखतें हैं .पता नहीं दुनियां में ये क्या चल रहा है..ये क्यों चल रहा है..? कहीं इस युग की यही नियति तो नहीं..शायद हां ऐसा ही चलेगा लोग युद्ध रत रहेंगे अंतिम क्षण तक पर चोरी छिपे..! क्यों कि वे खुद से युद्ध कर पाने में अक्षम हैं अच्छे-बुरे का निर्णय वे अपने स्वार्थ एवम हित के साधने के आधार पर करते हैं तभी तो कुण्ठा-जन्य युद्ध मुसलसल जारी है..जहां वीर योद्धाओं का अभाव है.


बोकारो , झारखंड से ब्‍लॉगिंग कर रही संगीता पुरी (http://www.blogger.com/profile/04508740964075984362) अपना परिचय देते हुए लिखती हैं कि मास्‍टर डिग्री ली है अर्थशास्‍त्र में .. पर सारा जीवन समर्पित कर दिया ज्‍योतिष को .. अपने बारे में कुछ खास नहीं बताने को अभी तक .. ज्योतिष का गम्भीर अध्ययन-मनन करके उसमे से वैज्ञानिक तथ्यों को निकलने में सफ़लता पाते रहना .. बस सकारात्‍मक सोंच रखती हूं .. सकारात्‍मक काम करती हूं .. हर जगह सकारात्‍मक सोंच देखना चाहती हूं .. आकाश को छूने के सपने हैं मेरे .. और उसे हकीकत में बदलने को प्रयासरत हूं .. सफलता का इंतजार है। 7 सितंबर 2007 से वर्डप्रेस पर गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष नामक ब्‍लॉग पर ज्‍योतिष में प्रवेश नामक पहली पोस्‍ट से शुरूआत करने के बाद  7 अगस्‍त 2008 को  ब्‍लॉगस्‍पॉट (www.gatyatmakjyotish.com) पर लिखना आरंभ किया , इनके पोस्‍टों में जहां ज्‍योतिष से जुडे अंधविश्‍वासों पर चोट की गयी है , वहीं दूसरी इसके वैज्ञानिक पक्ष को भी सामने लाया गया है, इस ब्‍लॉग की नवीनतम पोस्‍ट है 'हमारे यहां पाठकों के लिए नि:शुल्‍क जानकारी उपलब्‍ध है' ...
1981 से अबतक पच्‍चीस तीस हजार जन्‍मकुंडलियों के विश्‍लेषण के बाद ‘गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष’ का दावा है कि समय समय पर आनेवाली मनुष्‍य की हर अच्‍छी भली परिस्थिति के पीछे उसके जन्‍मकालीन और गोचर के ग्रहों का हाथ होता है और इसे समझा और समझाया जा सकता है। जन्‍म के ग्रहों से उनके जीवन में आनेवाली विभिन्‍न संदर्भों की परिस्थितियों और उनके जीवन के उतार चढाव की जानकारी देने के लिए मैने नि:शुल्‍क सेवा शुरू की है , कोई भी व्‍यक्ति अपना जन्‍म विवरण (नाम , जन्‍म तिथि , जन्‍म समय और जन्‍म स्‍थान ) हमें मो नं +919835192280 पर एस एम एस कर सकता है , एक मोबाइल नं से एक ही डिटेल्‍स भेजे जा सकते हैं , ईमेल से भेजे जाने वाले विवरणों का जबाब नहीं दिया जाएगा।

जो विवरण भेजे जा चुके हैं , उनके बारे में प्रत्‍येक रविवार को हमारे यहां से दिन 11 बजे से 1 बजे के मध्‍य इसी फोन पर जानकारी ली जा सकती है , हम प्रकृति से प्राप्‍त सुख दुख के संदर्भों और उसकी जीवन यात्रा के बारे में उन्‍हें जानकारी देने की कोशिश करेंगे। जबाब देते हुए लिखने की तुलना में मौखिक तौर पर बताना आसान है , इसलिए पिछले सप्‍ताह बहुत सारे पाठकों को उनकी  ही जानकारी देने में कामयाबी मिली , अभी कुछ दिनों तक यह सुविधा चलती रहेगी। अपने विवरण एस एम एस करने से पहले पिछले लेख को अच्‍छी तरह पढ लें। इसके अलावा गत्‍यात्‍मक चिंतन  (http://chintan.gatyatmakjyotish.com/) नामक ब्‍लॉग में इनका चिंतन और हमारा जिला बोकारो  (http://bokarozila.blogspot.in/)में जिले से जुडी खबर लिखा करती हैं। सीखें गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष (http://sikhe.gatyatmakjyotish.com/)में बिल्‍कुल खगोलशास्‍त्रीय ढंग से ज्‍योतिष की तथा आज का राशिफल  (http://rashifal.gatyatmakjyotish.com/) नामक ब्‍लॉग में लग्‍न आधारित राशिफल की जानकारी दी जा रही है।
आज के लिए बस इतना ही .. देते हैं वार्ता को विराम .. मिलते हैं एक ब्रेक के बाद ....

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