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मंगलवार, 21 मई 2013

स्पॉट फ़िक्सिंग : चंद हाईप्रोफ़ाइल ब्लॉगर और लेखक भी शामिल .. ब्‍लॉग4वार्ता .. संगीता पुरी

आप सबों को संगीता पुरी का नमस्‍कार , कांग्रेस ने आज इस बात को खारिज कर दिया कि घपले और घोटाले कल चार साल पूरा करने जा रही संप्रग-दो की कमियां रही हैं। संप्रग कल सत्ता में लगातार नौ साल भी पूरा करेगी। जब पत्रकारों ने यह सवाल किया कि क्या पार्टी मानती है कि घोटाले संप्रग-दो की कमी है, इस पर पार्टी प्रवक्ता राज बब्बर ने कहा, ‘‘नहीं मैं ऐसा नहीं मानता। क्या नौ साल पहले भ्रष्टाचार नहीं होता था?’’ बब्बर ने कहा कि कांग्रेस की अगुवाई वाली सरकार ने जनता को सूचना का अधिकार जैसा औजार दिया है जिससे कोई भी किसी ताकतवर शख्स की ओर से किए गए गलत काम को उजागर कर सकता है। अब चलते हैं आज की वार्ता पर .....

शिमला कालका रेल यात्रा इस यात्रा वृत्तान्त को शुरू से पढने के लिये यहां क्लिक करें। 27 अप्रैल 2013 सुबह सराहन में साढे पांच बजे उठा और अविलम्ब बैग उठाकर बस अड्डे की ओर चल दिया। तीन बसें खडी थीं, लेकिन चलने के लिये तैयार कोई नहीं दिखी। एक से पूछा कि कितने बजे बस जायेगी, उसने बताया कि अभी पांच मिनट पहले चण्डीगढ की बस गई है। अगली बस साढे छह बजे रामपुर वाली जायेगी। चाय की एक दुकान खुल गई थी, चाय पी और साढे छह बजे वाली बस की प्रतीक्षा करने लगा। बिना किसी खास बात के आठ बजे तक रामपुर पहुंच गया। यहां से शिमला की बसों की भला क्या कमी? कुछ ऐसी पुस्तके जो बदल देगी आपकी आने वाली जिन्दगी को मेरी पिछली पोस्ट में आपने शेयर मार्किट से जुडी पुस्तक देखी थी आज की पोस्ट में आप लोगो के बीच ऐसी पुस्तके ला रहा हु जिन्हें पढ़कर आपकी जिन्दगी में जरुर बदलाव आयेंगे इन पुस्तको को पढ़कर आप अपनी आने वाली जिन्दगी को बहुत ही मस्त रूप से जी सकते हो तो चलिए आपको लेकर चलता हु उन पुस्तको की दुनिया में जो आपकी जिन्दगी में बदलाव लाएगी। मुँबई से बैंगलोर तक भाषा का सफ़र एवं अनुभव.. करीबन ढ़ाई वर्ष पहल मुँबई से बैंगलोर आये थे तो हम सभी को भाषा की समस्या का सामना करना पड़ा, हालांकि यहाँ अधिकतर लोग हिन्दी समझ भी लेते हैं और बोल भी लेते हैं, परंतु कुछ लोग ऐसे हैं जो हिन्दी समझते हुए जानते हुए भी हिन्दी में संवाद स्थापित नहीं करते हैं, वे लोग हमेशा कन्नड़ का ही उपयोग करते हैं, कुछ लोग ऐसे होते हैं जो हिन्दीभाषी जरूर हैं परंतु दिन रात इंपोर्टेड अंग्रेजी भाषा का उपयोग करते हैं, इसी में संवाद करते हैं। जब मुँबई गया था तब लगता था कि सारे लोग अंग्रेजी ही बोलते हैं, परंतु बैंगलोर में आकर अपना भ्रम टूट गया ।

पराजय-बोध से ग्रस्त भाजपा कर्नाटक चुनाव के नतीजे आने के बाद पिछले हफ्ते लालकृष्ण आडवाणी ने अपने ब्लॉग में लिखा कि यह हार न होती तो मुझे आश्चर्य होता। पूर्व मुख्यमंत्री बीएस येद्दियुरप्पा के प्रति उनकी कुढ़न का पता इस बात से लगता है कि उन्होंने उनका पूरा नाम लिखने के बजाय सिर्फ येद्दी लिखा है। वे इतना क्यों नाराज़ हैं? उनके विश्वस्त अनंत कुमार ने घोषणा की है कि येद्दियुरप्पा की वापसी पार्टी में संभव नहीं है। स्पॉट फ़िक्सिंग : चंद हाईप्रोफ़ाइल ब्लॉगर और लेखक भी शामिल! स्पॉट फ़िक्सिंग क्या क्रिकेटरों और बॉलीवुड सेलिब्रिटीज़ की ही बपौती है? कतई नहीं. पता चला है कि चंद हाईप्रोफ़ाइल ब्लॉगर और लेखक भी अब स्पॉट फ़िक्सिंग में शामिल हो गए हैं. सीबीआई जो वाकई में तोता नहीं हो, उससे जाँच करवाई जाए तो और राज निकल सकते हैं. बहरहाल हाल ही में एक फ़ोन टेपिंग में यह खुलासा हुआ है. टेलिफ़ोन टेपिंग की आधी-अधूरी ट्रांसस्क्रिप्ट जो हासिल होते होते रह गई है, वो कुछ इस तरह है - - भाई, अब तो पंगा हो गया हे ना. क्रिकेट में तो मामला जमेगा नहीं. आत्ममुग्धता का संसार *-गणेश पाण्डेय* सोचा है नत हो बार-बार - ‘‘ यह हिंदी का स्नेहोपहार है नहीं हार मेरी, भास्वर यह रत्नहार लोकोत्तर वर’’ - अन्यथा, जहाँ है भाव शुद्ध साहित्य कला-कौशल प्रबुद्ध हैं दिये हुए मेरे प्रमाण कुछ नहीं, प्राप्ति को समाधान पार्श्व में अन्य रख कुशल हस्त गद्य में पद्य में समाभ्यस्त। ‘सरोज-स्मृति’ का यह अंश पता नहीं क्यों मेरे भीतर उमड़-घुमड़ रहा है। निराला क्यों कहते हैं कि मेरे समय के दिग्गजों का काम मेरे काम से मिला कर देख लो।

जैसे उडी जहाज को पंछी . कुछ देर वो लोग उस आलीशान होटल के कमरे में अंगरेजी में बातें करते रहे और बातें करते हुए ही कमरे से जुड़े शानदार छज्जे में जा खड़े हुए |मै अपने चारों और विस्फरित नेत्रों से देख रहा था ‘’क्या ये कमरा भी इसी प्रथ्वी का कोई हिस्सा होगा ?’’मैंने अपने अनदेखे सपनों की तरफ एक प्रश्न उछाला (जो लौटकर फिर मेरे जेहन में आ गिरा )|अद्भुत अभूतपूर्व द्रश्य क्रमशः प्रकट हो रहे थे उसी क्रम में अब एक होटल कर्मचारी जिसकी सफ़ेद चमचमाती वर्दी मेरे मैले कुचैले कपड़ों से कई गुना व्यवस्थित और साफ़ सुथरी थी मेरे सामने कुछ इस्त्री किये तहशुदा कपडे लेकर खड़ा था बिना कुछ बोले बुत की तरह |शिकायतों की चिट्ठी भी .... हप्रेम ने कब भाषा का लिबास पहना हैं, इसने तो बस मन का गहना पहना है । कभी तकरार कहाँ हुई इसकी बोलियों से, कहता है कह लो जिसको जो भी कहना है । लाख दूरियाँ वक्‍त ले आये परवाह नहीं, हमको तो एक दूसरे के दिल में रहना है । दिखावट का आईना नहीं होता प्रेम कभी, हकीकत की धरा पर इसको तो बहना है । शिकायतों की चिट्ठी भी हँस के बाँचता, प्रेम विश्‍वास का *सदा *अनुपम गहना है ।किताबों की दुनिया - 82 कहती है ज़िन्दगी कि मुझे अम्न चाहिए ओ' वक्त कह रहा है मुझे इन्कलाब दो इस युग में दोस्ती की, मुहब्बत की आरज़ू जैसे कोई बबूल से मांगे गुलाब दो जो मानते हैं आज की ग़ज़लों को बेअसर पढने के वास्ते उन्हें मेरी किताब दो आज हमारी किताबों की दुनिया श्रृंखला में हम उसी किताब "*ख़याल के फूल* " की बात करेंगे जिसका जिक्र उसके शायर जनाब "*मेयार सनेही* " साहब ने अपनी ऊपर दी गयी ग़ज़ल के शेर में किया है. मेयार सनेही साहब 7 मार्च 1936 को बाराबंकी (उ प्र ) में पैदा हुए. साहित्यरत्न तक शिक्षा प्राप्त करने बाद उन्होंने ग़ज़ल लेखन का एक अटूट सिलसिला कायम किया।

गर्मी की छुट्टियाँ वाह, गर्मी की छुट्टियाँ। कितने बेसब्री से इंतजार रहता है इसका। 11 मई से हमारे स्कूल बन्द और अब धमाल और मस्ती। सोच रही हूँ कि इन हालिड़ेज़ में पूरा इलाहाबाद घूमूं। यहाँ पर कई हिस्टोरिकल प्लेसेज़ हैं, मुझे उनके बारे में जानना है। पर गर्मी इतनी ज्यादा है की दिन में घर से बाहर निकलने की हिम्मत ही नहीं पड़ती। सारा दिन घर में बीतता है और शाम को पार्क, मॉल, मार्केटिंग और मूवी। इन हालिड़ेज़ में हमने दो मूवी देखी - 'छोटा भीम एंड थार्न आफ दि बाली' और 'गिप्पी'. छोटा भीम तो मेरा फेवरेट सीरियल भी है, इसका कोई पार्ट नहीं छोड़ती, फिर मूवी कैसे छोड़ देती। पत्ते, आँगन, तुलसी माँ ...चौंका, बर्तन, पूजा, मंदिर, पत्ते, आँगन, तुलसी माँ, सब्जी, रोटी, मिर्च, मसाला, मीठे में फिर बरफी माँ, बिस्तर, दातुन, खाना, पीना, एक टांग पे खड़ी हुई, वर्दी, टाई, बस्ता, जूते, रिब्बन, चोटी, कसती माँ, दादा दादी, बापू, चाचा, भईया, दीदी, पिंकी, मैं, बहु सुनो तो, अजी सुनो तो, उसकी मेरी सुनती माँ, धूप, हवा, बरसात, अंधेरा, सुख, दुख, छाया, जीवन में, नीव, दिवारें, सोफा, कुर्सी, छत, दरवाजे, खिड़की माँ, मन की आशा, मीठे सपने, हवन समिग्री जीवन की, चिंतन, मंथन, लक्ष्य निरंतर, दीप-शिखा सी जलती माँ, कितना कुछ देखा जीवन में, घर की देहरी के भीतर, इन सब से अंजान कहीं कितना नीरस होता एक हथोड़ा व एक बांसुरी एक साथ रहते जीवन कितना गुजर गया यह तक नहीं सोचते | था हथोड़ा कर्मयोगी महनतकश पर हट योगी सदा भाव शून्य रहता खुद को बहुत समझता | थी बांसुरी स्वप्न सुन्दरी कौमलांगिनी भावों से भरी मदिर मुस्कान बिखेरती स्वप्नों में खोई रहती | जब भी ठकठक सुनती तंद्रा उसकी भंग होती आघात मन पर होता तभी वह विचार करती | क्या कोइ स्थान नहीं उसका उस कर्मठ के जीवन में पर शायद वह सही न थी भावनाएं सब कुछ न थीं जीवन ऐसे नहीं चलता ना ही केवल कर्मठता से |

प्रेम ही है ईश्वर सितम्बर २००४ *इस* सृष्टि का आधार प्रेम ही है, प्रभु की कृपा से जब किसी के पुण्य जग जाते हैं, तो इस प्रेम की प्राप्ति होती है, यह एक ऐसा धन है जिसे पाकर संसार के सभी धन फीके लगते हैं, जो घटता नहीं सदा बढ़ता रहता है. जन्मों-जन्मों से संसार को चाहता मन उसके चरणों में टिकना चाहता है, अब उसे अपना घर मिल गया है. जगत तो क्रीड़ास्थली है जहाँ कुछ देर अपना कर्तव्य निभाना है, और फिर भीतर लौट आना है. जगत में उसका व्यवहार अब प्रेम से संचालित होता है न कि लोभ अथवा स्वार्थ से. परमात्मा ही इस प्रेम का स्रोत है. हम जो इसकी झलक पाकर ही संतुष्ट हो जाते हैं, 'समर' के इस समर में 'समर' के इस समर में संभल संभल के चलना है सर पे टोपी या अंगोछा साथ मे पानी पीते रहना है यह मौसम है लू का तपती धूप का मेरे लिये घर की ठंडक में दुबक कर हर दुपहर को सोना है बस आज निकला जो घर से बाहर तो हर 'अक्सर' की तरह देखा मजदूर के बच्चों को तो अंगारों पे ही रहना है मेरे पैरों मे पड जाते हैं चलते चलते छाले पैरों में 'कुशन' की चप्पल पहन कर के ही निकलना है 'समर' के इस समर में संभल संभल के चलना है कहीं तर बतर गले हैं कहीं सूखते हलक को जीना है।सही मायनों में जी भरके कहते हैं सब रहिमन की पंक्तियाँ - "रहिमन निज मन की व्यथा, मन ही राखो गोय। सुनि इठिलैहें लोग सब, बाटि न लैहैं कोय।।" तो व्यथा की चीख मन में रख हो जाओ बीमार डॉक्टर के खर्चे उठाओ नींद की दवा लेकर सुस्त हो जाओ !!!!!!!!!!!!!!! रहीम का मन इठलानेवाला नहीं था न व्यथित रहा होगा मन तो एहसासों को लिखा होगा .... जो सच में व्यथित है - वह कैसे इठलायेगा तो ........ कहीं तो होगा ऐसा कोई रहीम जिससे मैं जी भर बातें कर सकूँ सूखी आँखें उसकी भी उफन पड़े मैं भी रो लूँ जी भर के

ब्राह्मणों का अनादरइस पोस्ट का आशय सिर्फ कुछ अतिवादियों को आइना दिखाना है न की जातिवाद को बढ़ावा देना .. गीता के चौथे अध्याय में कर्म से ब्राम्हण होने को कहा गया है देखते हैं कुछ कर्मयोगी ब्राम्हणों की गाथा ... आजकल ब्राह्मणों का अनादर करना हमारे हिन्दू धर्म में फैसन बन गया है । जबकि भारत के क्रान्तिकारियो मे 90% क्रान्तिकारी ब्राह्मण थे जरा देखो कुछ मशहूर ब्राह्मण क्रान्तिकारियो के नाम ब्राह्मण स्वतन्त्रता संग्राम सेनानी (१) चंद्रशेखर आजाद (२) सुखदेव (३) विनायक दामोदर सावरकर( वीर सावरकर ) (४) बाल गंगाधर तिलक (५) लाल बहाद्दुर शास्त्री (६) रानी लक्षमी बाई (७) डा. राजेन्द्र प्रसाद क्या है ताऊ का अस्तित्व और हकीकत श्री ज्ञानदत्त जी पांडे जो कि ब्लागजगत के सम्माननिय और प्रथम पीढी के ब्लागरों में से एक हैं, और जो अपनी नियमित और सारगर्भित पोस्ट्स के लिये जाने जाते हैं, ने शायद सबसे पहले 3 dec. 2008 को अपनी पोस्ट यह ताऊ कौन है के द्वारा जिज्ञासा प्रकट की. इसके पश्चात सभी ब्लागर्स में ताऊ शब्द एक पहेली बना रहा. मेरे ही शहर के सम्माननीय ब्लागर श्री दिलीप कवठेकर तो एक कदम और आगे जाते हुये हमारे शहर की उस पान की दूकान तक भी पहुंच गये जहां "कृपया यहां ज्ञान ना बांटे, यहां सभी ज्ञानी हैं" की तख्ती लगी है. चटाईयां पेड़ पर नहीं उगती ................कल एक बुढिया को चटाई बुनते देखा तब लगा चटाईयां बुनी जाती हैं पेड़ पर नहीं उगती पैसों के जोर पर वो खुशियाँ खरीदने निकल जाता है उसे ज्ञान नहीं खुशियाँ बाज़ार में नहीं मिलती सतह पर टिकने के लिए कुछ प्रयास सतही हो सकते हैं पर ग्रुत्वाकर्षण के सिद्धांत के बगैर कोई चीज सतह पर नहीं टिकती जन्म से मृत्यु तक सुख और दुःख के काल खंड पलटते रहतें हैं पूरा जीवन सुख या सिर्फ दुःख में नहीं गुजरती मै बुढिया से मूल्य कम करा लेता हूँ चटाई की वो मेरे चले जाने से डरती है और किसी नुकसान से नहीं डरती

जमाव रिश्तों का ...एक ज्योतिषी ने एक बार कहा था उसे वह मिलेगा सब जो भी वह चाहेगी दिल से उसने मांगा पिता की सेहत, पति की तरक्की, बेटे की नौकरी, बेटी का ब्याह, एक अदद छत. अब उसी छत पर अकेली खड़ी सोचती है वो क्या मिला उसे ? ये पंडित भी कितना झूठ बोलते हैं. ************************ चाहते हैं हम कि बन जाएँ रिश्ते जरा से प्रयास से थोड़ी सी गर्मी से और थोड़े से प्यार से पर रिश्ते दही तो नहीं जो जम जाए बस दूध में ज़रा सा जामन मिलाने से .बरगद हो जाना कोई आसान बात नहीं है श्रीगंगानगर-गजसिंहपुर के एक बड़ के पेड़ की धुंधली सी छाया है स्मृतियों मेँ। चारों तरफ फैला हुआ...खूब मोटा तना....भरा भरा...पता नहीं कितना पुराना था। उसके नीचे सब्जी वाला होता, राहगीर भी। बच्चे भी उसकी छाया मेँ गर्मी काटते। टहनियों पर अनेक प्रकार के परिंदों की आवा जाही। क्या मालूम उसे ऐसा बनने मेँ किता समय लगा। अपने आप को कितने दशकों तक धूप,गर्मी,आँधी,सर्दी,गहरी रात मेँ अपने आप को अचल रखा होगा तभी तो शान से खड़ा था वह बड़/बरगद का पेड़। रहबर नहीं है-
क्या कहा है आज तुमने ये तुम्हारा स्वर नहीं है- सोच लो बैठे जहाँ हो वो तुम्हारा घर नहीं है- खा रहे हो कसमें जिनकी वो कोई ईश्वर नहीं है - चल दिए हो हाथ पकडे, वो तेरा रहबर नहीं है- तुम तो डरते हो जिंदगी से उसे क़यामत से डर नहीं है- -- उदय वीर सिंह

आज के लिए बस इतना ही .. मिलते हैं एक ब्रेक के बाद .....

मंगलवार, 14 मई 2013

अहसासों के पंख...एक ब्लॉग नया सा ...ब्‍लॉग4वार्ता .. संगीता पुरी

आप सबों को संगीता पुरी का नमस्‍कार , कल बंबई शेयर बाजार का सेंसेक्स 430.65 अंक की भारी गिरावट के साथ 19,691.67 अंक पर आ गया। यह 27 फरवरी, 2012 के बाद सेंसेक्स की सबसे बड़ी गिरावट है। बंबई शेयर बाजार में चले भारी बिकवाली के दौर से निवेशकों की कुल पूंजी एक लाख करोड़ रुपये घट गई। प्रत्येक तीन में से दो शेयर नुकसान के साथ बंद हुए। सेंसेक्स की सभी 30 शेयर नुकसान दर्शाते बंद हुए। आईटीसी को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ। कंपनी के शेयर में 5 फीसद से अधिक की गिरावट आई। बिकवाली के दौर के बीच निवेशकों की बाजार हैसियत एक लाख करोड़ रुपये घटकर 67,03,388.59 करोड़ रुपये रह गई। भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था की इस खास खबर के बाद चलते हैं आज की वार्ता पर .....

विचलित मन !*हर घर से होकर गुजरती नियति की गली है, * *न हीं मुकद्दर के आगे,वहाँ किसी की चली है, * *नीरस लम्हों के सफ़र में,किंतु सकूं के दो पल, * *जो हंसकर गुजार दे , वही जिन्दगी भली है। * * **पिछले तकरीबन एक माह से जिन्दगी की रेल, बस यूं समझिये कि पटरी से उतरी हुई है। पहले कम उम्र में एक परिजन की असामयिक मृत्यु से अस्त-व्यस्त था , और अब अपना प्रिय श्वान जोकि पिछले १3 वर्षों से घर में घर के एक सदस्य की भांति था, पिछले ४-५ दिनों से अन्न-जल त्यागकर इस बेदर्द जहां से प्रस्थान की तैयारी में है। खैर, यही दुनिया का दस्तूर है सोचकर विचलित मन ने बहलने की कोशिश में कुछ टूटा-फूटा काव्य समेटा है, प्रस्त... अधिक »

बेल बर्फी ** आइए बनाए बेल की स्वादिष्ट बर्फी । * सामाग्री :-* - एक किलो बेल का पल्प - आधा किलो चीनी - 150 ग्राम देशी घी - इलायची पावडर एक छोटा चम्मच - मेवे इच्छानुसार - 100 ग्राम खोया (यदि मिलाना चाहें) - 50 ग्राम काजू के टुकड़े सजाने के लिए * कैसे बनाए *:- बेल को तोड़ कर पल्प निकाल लें और बीजे साफ कर दें । अब भारी पेंदे की कड़ाही आग पर चढ़ा दें इसमे खोया डाल कर भून लें हल्का सुनहरा होने पर उतार कर ठंडा होने के लिए रख दें अब घी डाल कर गरम करें , बेल डालें थोड़ा भून लें जब घी और बेल अच्छी तरह से एकसार हो जाए भुनने की महक आने लगे तब चीनी और ... अधिक »

Vaan village (Laatu Devta) वाण गाँव की सम्पूर्ण सैर (लाटू देवता मन्दिर सहित) ROOPKUND-TUNGNATH 07 SANDEEP PANWAR अंधेरा होते-होते हम वाण पहुँच चुके थे। मनु भाई का पोर्टर कम गाईड़ कुवर सिंह काफ़ी पहले ही आगे भेज दिया गया था। उसे सामान बचा हुआ सामान वापिस करने के लिये कह दिया था। जैसे ही हम पोस्ट मास्टर गोपाल बिष्ट जी के यहाँ पहुँचे तो देखा कि कुवर सिंह सारे सामान सहित वही जमा हुआ है। मनु भाई गोपाल जी के यहाँ एक रात रुककर रुपकुन्ड़ के लिये गये थे। गोपाल जी यहाँ के ड़ाकिया Postman भी है। इसके साथ वह एक दुकान स्वयं चलाते है जो वाण स्टेशन के कच्चे सड़क मार्ग के एकदम आखिरी में ही आती है। म... अधिक »

क्षणिकाएं ! (१) *सुख और दुःख* ऐसा वक्त कब आएगा जब हम खुशी में बचे रहेंगे सरल और दर्द में अविकल न खुशी में चहकेंगे और न ही दुःख में होंगे विह्वल क्या हमारे जीते जी ऐसा वक्त आएगा जब हम चीजों को एक नज़र से देखने लगेंगे ? * ** * * (२ ) कवि बनना स्थगित कर दिया है* दर्द को कितना बताएँ हर तरफ मौजूद है. समय नहीं मेरे पास कि इस पर महाकाव्य लिखूं ! तुम मेरे खुशी के गीतों में ही दर्द बांच लेना, अपने दर्द को मेरी खुशी में तिरोहित कर देना, ऐसे ही जब तुम खुशी के नगमे गाओगे, मैं तुम्हारा दर्द जान जाऊँगा ! फ़िलहाल,मैंने कवि बनना स्थगि... अधिक »

स्वर्ण रेखा नदी तेरा असली नाम क्या है, स्वर्ण रेखा नदी? तू उस देश में बहती है जिस देश को कभी ‘सोने की चिड़िया’ कहते थे, उस राज्य में बहती है जिसे ‘झारखंड’ कहते हैं, उस जिले में बहती है जिसे ‘घाटशिला’ कहते हैं। क्या महज इसलिए ‘स्वर्ण रेखा’ कहलाई कि पहाड़ियों के पीछे अस्त होने से पहले सूर्य की सुनहरी किरणें कुछ पल के लिए खींच देती है तेरे आर-पार एक स्वर्णिम रेखा! या इसलिए कि तू अपने साथ बहाकर लाई थी कभी ताँबे और सोने के भंडार? जाऊँगा बनारस तो नहीं बता पाउँगा ‘माँ गंगा’ से तेरा हाल! तेरी इतनी बुरी हालत सुनकर दुखी होगी और डर जायेगी बेचारी। बहेलिए जैसे कतरते रहते हैं हाथ आई सुनहरी चिड़िया के पंख, लोभी जैस...अधिक »

कामवाली बाई शादी के मौसम में व्यस्त सभी बाई रहतीं सहन उन्हें करना पड़ता बिना उनके रहना पड़ता उफ यह नखरा बाई का आये दिन होते नागों का चाहे जब धर बैठ जातीं नित नए बहाने बनातीं यदि वेतन की हो कटौती टाटा कर चली जातीं लगता है जैसे हम गरजू हैं उनके आश्रय में पल रहे हैं पर कुछ कर नहीं पाते मन मसोस कर रह जाते | आशा

जज्बात वही आशिकी नया 1990 में आयी महेश भट्ट निर्देशित रोमांटिक फिल्म ‘आशिकी’ अपने समय की सफल फिल्मों में से एक है. लगभग 23 साल बाद भट्ट कैंप एक बार फिर प्यार के उसी जज्बात को नये अंदाज में ‘आशिकी टू’ से परदे पर परिभाषित करने जा रहा है. आदित्य रॉय कपूर और र्शद्धा कपूर इस फिल्म में मुख्य भूमिका में हैं. इन सितारों का कहना है कि ‘आशिकी टू’ पुरानी ‘आशिकी’ से काफी अलग है. जैसे पीढ.ी में बदलाव आया है वैसे ही फिल्म की कहानी में भी कई परिवर्तन आये हैं. दोनों में कोई समानता है तो वह है खास प्रेम कहानी. आदित्य रॉय कपूर और र्शद्धा कपूर से इस फिल्म और उनके कैरियर पर हुई बातचीत के प्रमुख अंश राहुल रॉय औ... अधिक »

मामा भाँजा की रेल्वे कमाल : सुपर व्यंग “ कल्लू झाड़ूवाला पप्पू के कहने पर नौकरी के लिए रेल मंत्रालय पहुँचकर रेल्वे मंत्री से मिलने के लिए गया मगर वहाँ देखा तो बिलकुल रेल्वे के डिब्बो के माफिक ही लंबी लाइन लगी हुई थी जैसे देशभर से नौकरी के डिब्बे लेने कतार लगी हो सब के हाथ मे बक्से थे ओर इंतज़ार था .... मामा भाँजे की सुपर हीट जोड़ी से मिलने का ...मगर अंदर कुछ ओर चल रहा था ..... | “ ** सेमसंग फोनवालो पर कानूनी केस करो* “ भाँजे ,ये सेमसंग पर मस्त केस ठोक देते है “ बंसल जी ने कहा तो भाँजा बोला “ मगर क्यू ,उससे हमे क्या फायदा ? “ .... भाँजे ,ये सेमसंगवाले आजकल बहुत ही पैसा कमा रहे है वो भी हमारे ही ... अधिक »

.भृंगराज भृंगराज का नाम आप लोगों के लिए नया नहीं है। तमाम हेयर आयल के विज्ञापन रोज प्रकाशित होते हैं,उनमें भृंगराज की चर्चा बड़े जोर-शोर से की गयी होती है।केशों के लिए यह महत्वपूर्ण तो है ही लेकिन इसके अन्य औषधीय गुण शायद और ज्यादा महत्वपूर्ण लगते हैं मुझे। अकेले भृंगराज कायाकल्प करने में सक्षम है। अगर उसे सही तरीके से प्रयोग किया जाये तो।यहाँ तक कि कैंसर से आप इसके सहारे लड़ सकते हैं और जीत भी सकते हैं। भृंगराज के पौधे वर्षा के मौसम में खेतों के किनारे ,रेल लाइन के किनारे, खाली पड़ी जमीन पर ,बाग़ बगीचों में खुद ही उग जाते हैं। ये हमेशा हरे रहते हैं।इनके फूल पत्ते तने जड़ सब उ... अधिक »


अभिव्यक्तिमै नहीं जानती ये कविता कैसे बन कैसे बन गई ?एक क्षण कुछ महसूस किया और अगले एक मिनिट में यह रचना बन गई | घर में रखे पुराने सामान की तरह चमकाए जाते है, कभी कभी वो आज निर्जीव ही सही कभी जीवन्तता थी उनमे महकता था उनकी सांसो से घर चहकता था उनके बोलों से घर गूंजते थे अमृत वाणी से मंत्र सौंधी खुशबू से महकती थी रसोई भरे जाते थे कटोरदान ,पड़ोसियों के लिए किससे कहे ?कैसे कहे ? निर्जीव क्या बोलते है ? उनकी सारी खूबियों पर है प्रश्न चिन्ह ? बिताते है इस उक्ति के सहारे वो जीवन की शाम "कर लिया सो काम ,भज लिया सो राम "|

अहसासों के पंख...एक ब्लॉग नया सा ...एक परिचय शरद कुमार जी और उनके ब्लॉग से -- कुछ शेर बेटी के नाम एक मासूम सा ख्वाब और माँ ये रचनाएं हैं शरद कुमार जी के ब्लॉग *अहसासों के पंख* से ..

बुधवार, 8 मई 2013

आजकल खबरें आपको परेशान नहीं करतीं..कोई जरूरत नहीं इस्तीफे की .. ब्‍लॉग4वार्ता .. संगीता पुरी

आप सबों को संगीता पुरी का नमस्‍कार , दस करोड़ रूपए की रिश्वतखोरी के मामले में केंद्रीय रेल मंत्री पी के बंसल के भांजे विजय सिंगला के करीबी और कथित बिचौलिया अजय गर्ग को दिल्ली की एक अदालत में आज आत्मसमर्पण करने के बाद गिरफ्तार कर लिया गया । अदालत ने उसे 9 मई तक के लिए सीबीआई हिरासत में भेज दिया। विशेष सीबीआई न्यायाधीश स्वर्ण कांता शर्मा ने गर्ग से हिरासत में पूछताछ की अनुमति दे दी। जब पच्‍चीस पच्‍चास साल पुराने घोटालों की असलियत अबतक नहीं खुल सकी है तो इस घोटाले का भी कुछ नहीं होना , आने वाले दिनों में भी जनता को नए नए घोटालों का तोहफा मिलता रहेगा , हम ब्‍लॉगर्स भी क्‍या करें , हम सिर्फ देख सकते हैं , सुन सकते हैं , लिख सकते हैं ।

इस मध्‍य ब्‍लॉग जगत की भी एक महत्‍वपूर्ण खबर है , फख्र की बात है हिन्दी के सर्प संसार ने दुनियां की दर्जन भर भाषाओं में से सबसे रचनात्मक और सृजनात्मक कटेगरी का बाब्स यूजर पुरस्कार जीत लिया है

 इस खास खबर के बाद देखिए ब्‍लॉग जगत के कुछ महत्‍वपूर्ण लिंक  ......

' जन गन मन ' के रचयिता , भारत माता के लाल , गुरुदेव रविंद्रनाथ टैगोर को उनकी १५२ वीं जंयती पर शत शत नमन |


आजकल खबरें आपको परेशान नहीं करतीं... वे अपनी शॉक-वैल्यू खो चुकी हैं... यह एक ऐसा दौर है जिसमें हमारे पतन की कोई सीमा नहीं है... कहीं भी, किसी के द्वारा भी, कैसा भी और कुछ भी संभव है... लगभग हर चीज बिकाऊ है और बिकाऊ दिख भी रही है...पवन बंसल जी यूपीए की सरकार में एक साफ और बेदाग छवि के भरोसेमंद और काबिल नेता के तौर पर जाने जाते रहे हैं... उनका भांजा रेल मंत्रालय से होने वाली नियुक्ति और प्रमोशन के बदले लंबी चौड़ी घूस लेते सीबीआई के हाथों पकड़ा गया है... पवन बंसल कसूरवार हो भी सकते हैं और यह भी हो सकता है कि जाँच के बाद यह पता चले कि पवन बंसल इस मामले में शामिल नहीं थे और उनके रिश्तेदारों ने केवल उनकी सदाशयता का अनुचित लाभ उठाया है...

हमारे जीवन में अध्यात्म का आना एक नियत समय पर होता है. इस ज्ञान को जिस क्षण हमने अपने हृदय में स्थापित कर लिया, उसी दिन से हमारे उद्धार की प्रक्रिया आरम्भ हो जाती है. ज्ञान का आश्रय लेकर हम अपने इर्द-गिर्द बने झूठे आश्रयों से किनारा करते चलते हैं. हम जिस जगत का सहारा लेकर खड़े थे, वह तो स्वयं ही डगमगा रहा है, तो हमें क्या संभालेगा.

केन्‍द्र सरकार जिस तरह से अपने भ्रष्ट मंत्रियों का बचाव करने में लगी है वह देश के लिए चिंता का विषय है. विद्रूपता ये है कि न केवल मंत्री बल्कि तमाम मंत्रालयों, विभागों में बैठे शीर्षस्थ पदाधिकारी भी मनमाने ढंग से अपने मंत्रियों की, अपनी कारगुजारियों को छिपाने का काम कर रहे हैं. बंसल के भांजे के रिश्वत काण्ड के साथ-साथ कोयला घोटाले की अनियमितता के सामने आने ने भविष्य की स्थिति की भयावहता को ही प्रकट किया है.

हमारे देश में सदियों से राजतन्त्र प्रणाली शासन प्रणाली चलती रही धीरे धीरे इस प्रणाली में संघ राज्य की शक्तियाँ क्षीण होती गयी और नतीजा छोटे छोटे स्वतंत्र राज्यों ने जन्म ले लिया, कई सारे स्वतंत्र राज्य होने, उन पर कई वंशानुगत अयोग्य शासकों के आसीन होने के चलते हमारी शासन प्रणाली में कई तरह के विकार उत्पन्न हो गए जो बाहरी आक्रान्ताओं खासकर मुगलों के आने बाद बढ़ते ही गये| मुगलों के आने से पहले हमारे यहाँ के शासक आम जनता से किसी तरह की दुरी नहीं रखते थे पर मुगलों के सम्पर्क में आने के बाद उनका अनुसरण करते हुए वे भी शानो-शौकत से रहने लगे, यहाँ के कई राजा मुगलों के सामंत बन गए तो अपना राज्य सुचारू रूप से चलाने को उन्होंने भी अपने अपने राज्यों में सामंतों की एक बड़ी श्रंखला पैदा कर दी| 
पेश है! फ्रेश है!
इस साल जनवरी के पहले सप्ताह में मैंने मुंडन करवाया था (क्यों?_वो छोडिये!)। मैं नए उगने वाले बालों के बारे में तरह-तरह के विचारों से जूझ रहा था। घर से बाहर निकलने में लाज आती थी! '...ऊंहूं..बेई, कोई देखतई तो का बोलतई ..!' गनीमत यह थी की सीजन जाड़े का था, जिसमें टोपी के इस्तेमाल से लाज-लगाने वाली बात को छिपाया जा सकता था। फ़ौरन उनी टोपी ने मेरे कंटीले चाँद पर अपना मुकाम बना लिया, और शक्ल को एक समझौता के लायक फ्रेम प्रदान किया! बाबूजी हमेशा कहा करते थे कि :'..बबुआ के ललाट बड़ी ऊँच बा!' अभी देखते तो यही कहते कि '...अंतहीन बा!!' ...अबकी बार लम्बे बाल रखने का खूब मन है। सच्ची!! अनुपम सिन्हा सर के जैसा!

ताऊ पहले लूटमार, चोरी उठाईगिरी करके अपना काम चलाता था. फ़िर कुछ समय बाद डकैतियां डालने लगा. फ़िर एक ऐसा दौर आया कि उसको डाकूगिरी से सरेंडर करना पडा क्योंकि एक अच्छी डील मिल गयी थी.सरेंडर के बाद खुली जेल में रहा जहां कुछ ब्लागरों से दोस्ती हो गई. जेल में रहने के दौरान ही वो ब्लागिंग के गुर सीख चुका था. सजा काटने के बाद उसने धमाकेदार ब्लागरी शुरू कर दी. जैसे कोई नशे का आदी हो जाता है उसी तरह ताऊ भी ब्लागरी का आदी हो गया.

जो होता है वह नजर आ ही जाता है ---------------------------------------- सूरज अपने प्रकाश का विज्ञापन नहीं देता चन्द्रमा के पास भी चांदनी का प्रमाणपत्र नहीं होता! बादल कुछ पल, कुछ घंटे , कुछ दिन ही ढक सकते हैं ,रोक सकते हैं प्रकाश को , चांदनी को ... बादल के छंटते ही नजर आ जाते हैं अपनी पूर्ण आभा के साथ पूर्ववत!

अभी दिन ही कितने हुए हैं। सवा साल ही तो। किसी इलाके में इतनी थोड़ी अवधि में किसी बड़े परिवर्तन की उम्मीद कैसे की जा सकती है। लेकिन उम्मीदों से परे भी घटित हुआ है कोंडागांव में। यदि इसे चमत्कार कह दें तो यह शब्द भी छोटा पड़ जाएगा। चमत्कार कहना उस वैज्ञानिक सोंच और दूरदृष्टि को नजरअंदाज कर देना भी होगा, जिसकी वजह से नक्सलवादियों से पीड़ित इस इलाके के लोग अब खुद को मुक्ति-पथ पर पा रहे हैं।

वह संगीतज्ञ कब से हमारे घर में घुसा बैठा था मुझे पता ही नहीं चला . वो तो रात में पहली झपकी के दौरान ही एक ऐसे तेज संगीत से नीद उचट गयी जिसके आगे जाज और बीटल्स सब फेल थे ....नींद टूटने के बाद अपने को संयत करते हुए ध्यान संगीत के स्रोत की और फोकस किया ...ऐसा लगा कि कर्कश संगीत लहरियां मेरे स्टडी रूम से आ रही हैं। भारी मन से उठा और ताकि देख सकूं यह बिन बुलाया मेहमान कब से चुपके से आ गया था मेरे स्टडी कक्ष में -जयशंकर प्रसाद की एक कविता भी अनायास याद आयी -

एक दिन गुबरैला गोबर से निकल कर घूमते घूमते काली चींटियों की बस्ती में जा पहुंचा . चींटियाँ उसके भारी भरकम शरीर को देखकर आश्चर्य चकित हो गई . कुछ ही दिन में गुबरैला चींटियों का राजा बन बैठा और वह बहुत ही अभिमानी हो गया .सारे चींटे उसके हर आदेश का पालन करते थे और अपने गुबरैला राजा को तरह तरह की खाने पीने की चींजे उपलब्ध कराते रहते थे .

मैं हांफता-कांपता गोंडा जाने के लिए नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पहुंचा, तो वहां पहले से मौजूद वरिष्ठ पत्रकार सुखहरण जी ने बताया कि हम दोनों में से किसी का भी टिकट कन्फर्म नहीं हो पाया है। मैं गुस्से से चीख पड़ा, ‘आपने तो कहा था, पीएमओ से हो जाएगा, रेलमंत्री कार्यालय से हो जाएगा। ये मंत्री करा देंगे, वे विधायक करा देंगे...अब क्या हुआ?’ सुखहरण जी ने झुंझलाते हुए कहा, ‘एक बात समझो, नहीं हो पाया...तो नहीं हो पाया। प्रधानमंत्री जी कनाडा गए हैं गिल्ली डंडा मैच का उद्घाटन करने, रेल मंत्री जी चार्ट तैयार होने तक छुट्टी पर थे। मंत्री-विधायक सभी टूर पर गए हुए हैं।’

बिना आँच के भट्टी सा सुलगता दर्द रूह पर फ़फ़ोले छोड गया आओ सहेजें इन फ़फ़ोलों में ठहरे पानी को रिसने से ………… कम से कम निशानियों की पहरेदारी में ही उम्र फ़ना हो जाये तो तुझ संग जीने की तलब शायद मिट जाये क्योंकि ……… साथ के लिये जरूरी नहीं चांद तारों का आसमान की धरती पर साथ साथ टहलना यूँ भी फ़ना होने के हर शहर के अपने रिवाज़ होते हैं …………

श्रीगंगानगर-कुछ ऐसी चीजें होती हैं जो दूर से ही सुहानी लगती है। ठीक ऐसे, जैसे अन्ना हज़ारे टीवी पर ही सजते हैं। ऊंचे मंच पर तिरंगा फहराते अन्ना हर किसी को मोहित,सम्मोहित करते हैं।  चेहरे पर आक्रोश ला जब वे वंदे मातरम का नारा लगाते हैं तो जन जन की उम्मीद दिखते हैं। वे अपने लगते हैं...जो इस उम्र में लाखों लोगों की आँखों  में एक नए भारत की तस्वीर दिखाते हैं। अनशन के दौरान मंच पर निढाल लेटे अन्ना युवाओं के दिलों में चिंता पैदा करते हैं....हर ओर एक ही बात अन्ना का क्या हुआ?

8 , 9 और 10 मई 2013 को सामान्‍य तौर पर ग्रहों की स्थिति शुभ फलदायक है , इसका असर शेयर बाजार और मौसम पर अनुकूल दिखेगा , वृश्चिक राशि वालों के लिए शुभ तथा कन्‍या रावालों के लिए अशुभ रहेगा .. तीनो ही दिन 2 बजे से 4 बजे दिन का समय कुछ अशुभ तथा 7 बजे से 9 बजे रात्रि का समय शुभ फलदायी रहेगा। विस्‍तार में अपने अपने लग्‍न से देखिए अपना अपना राशि फल , इस राशि फल में आपके लिए शुरूआती पंक्ति अधिक महत्‍वपूर्ण होगी , बाद की पंक्तियां कम महत्‍वपूर्ण होती जाएंगी ......

फ़िलहाल ये मेरी आखरी पोस्ट है। लौट कर आऊँगी लेकिन कब आऊँगी मालूम नहीं। आज ही निकल रही हूँ होलैंड और उसके बाद भारत के लिए। शायद आ पाऊं ब्लॉग पर या शायद न भी आ पाऊं। जो भी है आप सभी को हैपी-हैपी ब्लॉग्गिंग। कोई टंकी-वंकी पर नहीं चढ़ रही हूँ, बस एक बार फिर बीजी होने वाली हूँ। तो मिलते हैं एक छोटे/लम्बे ब्रेक के बाद :):)
जब भी लौट कर आऊँगी यहीं आऊँगी :)
मिला जब वो प्यार से, तो गुलाब जैसा है
आँखों में जब उतर गया, शराब जैसा है
खामोशियाँ उसकी मगर, हसीन लग गईं
कहने पे जब वो आया तो, अज़ाब जैसा है

"नासिर" क्या कहता फिरता है कुछ न सुनो तो बेहतर है
दीवाना है दीवाने के मुँह न लगो तो बेहतर है
कल जो था वो आज नहीं जो आज है कल मिट जायेगा
रूखी-सूखी जो मिल जाये शुक्र करो तो बेहतर है 

प्रभु  ने  हम  दोनों  की , किस्मत  एक  बनाई ! 


दुनिया  में  हम  दोनों  को , ज़िंदा  मारा  जाता ,
 मुझे  गर्भ  के भीतर ,तुमको बाहर  काटा जाता  !

हर ख़ुशी है लोगों के दामन में ,
पर एक हंसी के लिए वक़्त नहीं .
दिन रात दौड़ती दुनिया में ,
ज़िन्दगी के लिए ही वक़्त नहीं .
माँ की लोरी का एहसास तो है ,
पर माँ को माँ कहने का वक़्त नहीं .
सारे रिश्तों को तो हम मार चुके ,
अब उन्हें दफ़नाने का भी वक़्त नहीं .


मेरी फैली हुयी बाहें....
ये मेरी –
फैली हुयी बाहें दो –
शाख़ पेड़ की हो,
कब से मुंतज़िर हैं तेरी.....
पतझड़ है तो क्या हुआ –




आज के लिए बस इतना ही ... मिलते हैं एक ब्रेक के बाद .....

रविवार, 5 मई 2013

अंतर्राष्ट्रीय ब्लागर सम्मेलन में बाबाश्री का ब्लागिंग नशा मुक्ति शिविर .. ब्‍लॉग4वार्ता .. संगीता पुरी


आप सबों को संगीता पुरी का नमस्‍कार , यूपीए-2 की मुसीबतें कम होने का नाम नहीं ले रहीं है। ऐसे में रेलमंत्री पवन बंसल ने भी उनकी मुसीबते बढ़ा दी है। सीबीआई का आरोप है कि महेश कुमार नाम के रेलवे अधिकारी को रेलवे बोर्ड का मेंबर बनाने के लिए पवन कुमार बंसल के भांजे विजय सिंगला ने 10 करोड़ रुपये की डील हुई। महेश ने बंसल के भांजे को 2 करोड़ रुपये की पहली किस्त दे भी दी। सीबीआई विजय सिंगला के पास से 90 लाख रुपये बरामद भी कर चुका है। 6 लोगों को सीबीआई ने गिरफ्तार कर लिया है, 2 लोग फरार हैं।ऐसे में सवाल उठता है कि क्या नैतिकता के आधार पर रेलमंत्री को इस्तीफा दे देना चाहिए। पार्टी रेलमंत्री के बचाव में उतर आई है। पार्टी के बड़े नेता कह रहे हैं कि बंसल को इस्तीफे की कोई जरूरत नहीं है। सत्ता में रहने वाले किसी मंत्री का रिश्तेदार अगर रिश्वत ले ले तो क्या मंत्री की जिम्मेदारी बनती है ??

इस खास खबर के साथ चलते हैं आज की वार्ता पर ....

रे मन!... - तन की तल्लिनता को तौल कर मत निहार मन की मलिनता को मौन हो मत स्वीकार घन की घनिष्ठता का सुन तू घोर घर्षण छन-छन छनकती पायल का मत रख आकर्षण धन की धौंस से न धर...अनमोल जीवन - विश्व वंचित कर रहा है, है सकल संवाद स्थिर, दृष्टि में दिखती उपेक्षा, भाव तम एकांत में घिर। मान लो संकेत है यह, कर्म एकल, श्वेत है यह, आत्म की राहें ...आनंद कुछ और ही होता - तारों भरे आकाश में ले ज्योत्सना साथ में मयंक चला भ्रमण करने अनंत व्योम के विस्तार में सभी चांदनी में नहाए ज्योतिर्मय हुए क्या पृथ्वी क्या आकाश पर पास...मात्र देह नहीं है नारी .. 5 - उसने कहा लड़के - लड़कियों का ध्यान इस तरफ हो यह बात तो समझ में आती है , लेकिन इन मैगजीनों को तो 50-60 साल तक के स्त्री - पुरुष भी पढ़ते हैं . फिर हम कहते है...याद दिलाता है हर मंजर - याद दिलाता है हर मंजर सूना-सूना घर तकता है मालिक घर के कहाँ गये, खाली कमरा दिक् करता है जल्दी लौटें जहाँ गये ! हर इतवार को जिसे संवारा पूजा क...

भारतीय शेयर बाजार : कैसा रहेगा अगला सप्‍ताह ??2 मई की पोस्‍ट में मैने जानकारी दी थी भारतीय शेयर बाजार से संबंधित अनुसंधान भी हमारे द्वारा किया गया है , जिसके आधार पर इसके भविष्‍य की जानकारी प्राप्‍त की जा सकती है। इस विषय में हमारे रिसर्च की शुरूआत जनवरी 2008 में तब हुई थी , जब शेयर बाजार दिन प्रतिदिन बडे बडे कदम नाप रहा था। सौ साल पुरानी विरासत, लेकिन रख रखाव के लिये पैसे नहीं - हम लोग मुक्तेश्वर में इंडियन वेर्टनिटी रिसर्च इंस्टीट्यूट देखने गये वहां डा.शर्मा ने हमें घुमाया। इस चिट्ठी में,उनके बारे में और डीएनए से फिंगर प्रिटिंग के...त्रिपुरी के कलचुरि - त्रिपुर सुंदरी तेवर आज का दिन भी पूरा ही था हमारे पास। रात 9 बजे रायपुर के लिए मेरी ट्रेन थी। मोहर्रम के दौरान हुए हुड़दंग के कारण कुछ थाना क्षेत्रों में कर...ये छत्तीसगढ़ है मेरी जान - - * केवल कृष्ण* गेंद उछली और धारणाओं के कोहरे को चीरती हुई निकल गई। बल्ले ने घूमकर ऐसा शाट लगाया कि अफवाहें, गलतफहमियां शीशे की तरह चूर-चूर होकर बिखर ...

वो सुपरवूमैन कहलाती हैं - वो सुपरवूमैन कहलाती हैं वो शक्तिशाली कहलाते हैं मेगज़ीनों में शीर्ष पर छाते हैं तभी तो हमारे सैनिकों के सिर काट लिए जाते हैं सच्चाई की आवाज़ को दबाया ...सरबजीतों को यों मरने न दें - सरबजीतों को यों मरने न दें - डॉ. वेद प्रताप वैदिक सरबजीत सिंह अगर भारतीय जासूस होता या आतंकवादी होता तो क्या हमारी सरकार को पता नहीं होता? सरकार को सरबजीत...आजादी के बाद से ही हम कूटनीतिक तौर पर विफल साबित हुए हैं !! - भारत को जब से आजादी मिली है तब से लेकर आज तक हम कूटनीतिक तौर पर विफल साबित होते आ रहें हैं जिसका नतीजा यह हुआ कि हमारे कुछ भूभाग पर चीन १९६२ से काबिज है त...जय हिन्द.... संध्या शर्मा -टूट चुका बाँध तबाही मची है सब कुछ बह गया कब तक सहोगे अन्याय - अत्याचार स्वाभिमान पर प्रहार प्रतीक्षा कैसी??? पानी के बुलबुलों के आगे तुम गंगा की जलध...

जब पहली बार हमें एक अपराधी जैसा होना महसूस हुआ -- ऐ विजिट टू दिल्ली एयरपोर्ट। - एक समय था जब दिल्ली एयरपोर्ट तभी जाना होता था जब *कनाडा* में रहने वाले हमारे मित्र साल दो साल में एक बार दिल्ली आते थे। उन्हें लेने जाते तो आधी रात तक बेस...जंगल जलेबी, स्लेटी रुमाल, नकचढ़ी लड़की और पहाड़ी लड़का - बचपन की कुछ बातें ऐसी होती हैं, जिनका मतलब उस समय समझ में नहीं आता है. जब हम बड़े हो जाते हैं, तब समझ में आता है कि अमुक काम को करने से, किसी विशेष व्यक्ति .ऊसर भारतीय आत्माएं (कविता ) -*आजकल फिजाएँ कोयल की कूक से गूँज रही है. रोज सुबह कभी लम्बी, कभी बहुत तेज तो कभी धीमी सी कूक सुनाई दे जाती है, कभी-कभी तो पेड़ के नीचे खड़ी हो कोयल को ढू...सुधा की कहानी उसकी ज़ुबानी (2) -(चित्र गूगल के सौजन्य से) सुधा अपने आप को अपनों में भी अकेला महसूस करती है इसलिए अपने परिचय को बेनामी के अँधेरों में छिपा रहने देना चाहती है.... मुझे दी...

दीदार होता है, - दीदार होता है, शाम होते ही इन्तजार उनका होता है, प्यार में नोक-झोक तकरार होता है ! नीचे झुका लेते है ,हम अपनी नजरें, जब उनसे हमारा दीदार ...ख्‍वाब़ और याद.... - 1. गए लम्‍हों की बारि‍श में डूब गई अरमानों की छोटी-छोटी कि‍श्‍ति‍यां कच्‍ची उमर की धूप में पके ख्‍वाब़ गुम हुई आवाजों का पता मांगते हैं 2.यादें कहती हैं ...एक लोटा पानी और दो मुट्ठी चावल- थोडा रूक कर सोचे तो देखेंगे कि हम इस तरह भी तो भगवद सेवा कर सकते है!हम मानव तो अपनी जरुरत की चीजो का संग्रह कर के रख ही लेते है और जितनी जरुरत होती है उस...अंतर्राष्ट्रीय ब्लागर सम्मेलन में बाबाश्री का ब्लागिंग नशा मुक्ति शिविर- अंतर्राष्ट्रीय ब्लागर सम्मेलन पर प्रथम पोस्ट, अंतर्राष्ट्रीय ब्लागर सम्मेलन पर द्वितीय पोस्ट अंतर्राष्ट्रीय ब्लागर सम्मेलन के ब्रह्म-कालीन सत्र में आ...नशे में सीमा लांघना 'राष्ट्रीय बहादुरी' है !...खुशदीप -सरबजीत का उसके गांव भिखिविंड में शुक्रवार को राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार हो गया...सरबजीत को पाकिस्तान की जेल में 22-23 साल नारकीय परिस्थितियों मे...

रे मन!... - तन की तल्लिनता को तौल कर मत निहार मन की मलिनता को मौन हो मत स्वीकार घन की घनिष्ठता का सुन तू घोर घर्षण छन-छन छनकती पायल का मत रख आकर्षण धन की धौंस से न धर...आँचल तिरंगा...... -*सरफरोशी जन्म लेती है , * *हमारे गाँव में ......* *सरफ़रोश हम हो गए ,* *रह के उसकी छाँव में-* * **मत दे कभी तूं खौफ को, * *मौत से डरते नहीं* *हम वतन की ...शेर - ए - मैसूर टीपू सुल्तान की २१४ वीं पुण्यतिथि - *शेर - ए - मैसूर टीपू सुल्तान को सलाम !!* *भारत माता के इस 'शेर' को उनकी पुण्यतिथि पर शत शत नमन !*“अंतिम यात्रा का ब्रांडेड पैकेज” - *इंसान के जन्म लेते ही बाजार उसे हाथों-हाथ लेने लगा है और उसकी क्षण-क्षण की प्रगति को पग-पग पर भुनाना शुरु कर दिया है तो उसकी अंतिम यात्रा, उसके निर्वांण...फ्लाईओवर पर तेजी से दौड़ता हुआ शहर -- संजय भास्कर - *( चित्र - गूगल से साभार )* फ्लाईओवर पर तेजी से दौड़ता हुआ शहर यह वह शहर नहीं रहा अब जिस शहर में '' मैं कई वर्षो पहले आया था '' अब तो यह शहर हर समय भ...



अब लेते हैं विदा .. मिलते हैं एक ब्रेक के बाद ...



शनिवार, 9 फ़रवरी 2013

स्‍वागत वसंत .. ब्‍लॉग4वार्ता .. संगीता पुरी

आप सबों को संगीता पुरी का नमस्‍कार , बॉलीवुड फिल्मों के चर्चित अभिनेता कादर खान की सेहत बिल्कुल ठीक है। उनका कहना है कि सोशल नेटवर्किंग साइटों पर उनके निधन की अफवाह फैलाए जाने से वह और उनका परिवार बहुत परेशान हैं। 77 वर्षीय अभिनेता ने गप्पबाजी के सौदागरों से अपील की है कि वे अफवाह फैलाना बंद करें। हास्य अभिनेता कादर खान ने कहा कि अफवाह से मेरा परिवार बहुत परेशान और चिंतित है। इन सब ने मेरे परिवार को हिलाकर रख दिया है। जिस किसी ने भी ऐसी अफवाह फैलाई हो, कृपया यह सब बंद करें। उन्होंने कहा कि एक दिन तो सब को जाना है और मैं आप सबकी दुआएं लेकर जाऊंगा। अभी मैं पूरी तरह ठीक हूं। ईश्‍वर से उनके अच्‍छे स्‍वास्‍थ्‍य की कामना करती हूं , अब देखते हैं ब्‍लॉग जगत की कुछ महत्‍वपूर्ण पोस्‍ट ........

स्वागत बसन्त... - *१* *स्वागत तेरा* *आँगन आँगन में* *मेरे बसन्त ...* *२* *पीली सरसों * *और लाल पलाश* *केशरिया मैं...* *३* *प्रीत उमगे* *उर में साजन के * *मैं शरमाउँ...* *४* *ब...उत्सव के परिणाम अपने नज़रिए से दें- कृपया उत्सव के परिणाम अपने नज़रिए से दें .......... शुभकामनायें बहुत मिलीं सुझाव भी चाहिए अपनी पसंद को जाहिर कीजिये एक वोट टिप्पणी से अधिक कारगर होगी ...एक दिन पुस्तक मेले के नाम …………2013 - दिल गुलशन गुलशन हो गया जब दोस्तों का साथ मिल गया किताबों से नाता जुड गया यूँ मन का कँवल खिल गया कल पुस्तक मेले के सफ़र में सबसे पहले अन्दर कदम रखते ही आन...पुस्तकें और पाठक - संवाद स्थापित करना प्राणी की अनिवार्य और महत्वपूर्ण आवश्यकता है. अगर हम यह कल्पना करें कि जब संवाद स्थापित करने के साधन नहीं थे तो जीवन कैसा रहा होगा ? स...

बीमारी - सुयश जॉगिंग करते हुए लगातार ऋचा के बारे में सोच रहा था. पिछले कुछ दिनों से वो बीमार सी दिख रही थी. हमेशा खिले-खिले चेहरे वाली तेज-तर्रार लड़की अचानक से निश...आठवा ख़त .......Valentine special.......... - कभी उगते सूरज को तुम्हारे साथ देखना चाहती हूँ...... तो कभी ढलती शाम को तुम संग गुजारना चाहती हूँ...... कभी रात का लम्बा सफ़र.......तुम्हारी गोद में सर रख कर...विदेशी शब्दों की बाढ़ - हमारे साहित्य के प्रत्येक युग में विदेशी शब्दों की एक बाढ़ सी हमारे यहाँ आई है। हमारा अपना युग भी इस का अपवाद नहीं है। और यह एक ऐसी चीज है जिस का जल्दी ...आज एक छोटा सा गीत- मिथ्याबोध ! -*कभी हमसे भी कोई बेरहमी न होती, * *ऐ अहबाब अगर तुम बहमी न होती। * * * *ये प्रेम कहानी अश्रु -पिपासा न होती,* *दिल में उलझी कोई दिलासा न होती, * *...


ग़ज़ल सम्राट स्व ॰ जगजीत सिंह साहब की जयंती पर विशेष - *जगमोहन सिंह (**जगजीत सिंह - *८ फ़रवरी १९४१ - १० अक्टूबर, २०११) का नाम बेहद लोकप्रिय ग़ज़ल गायकों में शुमार हैं। उनका संगीत अंत्यंत मधुर है, और उनकी आवाज़...फिल्‍म समीक्षा : एबीसीडी - [image: ABCD anybody can dance movie review]-अजय ब्रह्मात्मज एक डांसर क्या करता है? वह दर्शकों को अपनी अदाओं से इम्प्रेस करता है या अपनी भंगिमाओं से कुछ एक्...अनिरुद्ध उमट की नौ कविताएं - आज कई महीने बाद अपने उचाट सूनेपन में मेरे क़दम अब तक स्‍थगित रखे गए फेसबुक की ओर बढ़ गए और वहां वो मिला, जिसकी मुझे कुछ सुकून दिया। वहां अपने स्‍टेटस में ...मन - 1. स्वार्थी मन तोड़ देता सम्बन्ध जानबूझकर ........ 2. व्याकुल मन निस्तब्ध निशा आत्मविस्मृति के क्षण ...... 3. युगों की भटकन मन क... "बांछैं" शब्द का अर्थ पूछियेगा तो अच्छे अच्छों के होश उड़ जाते हैं . अर्थ तो हमको भी नहीं मालूम हमारे मित्र मनीष शर्मा भी नहीं जानते कि बाछैं शरीर के किस भाग में पाई जातीं हैं. पर इस बात से सहमत नज़र आते हैं कि बाछैं खिलती अवश्य हैं. यानी कि जब वो नहीं जानते तो किसी और के जानने का सवाल ही नहीं खड़ा होता .

कारोबार की तरह धर्म की भी होती है मार्केटिंग -श्रीगंगानगर-जमाना मार्केटिंग का है। किसी भी कारोबार की मार्केटिंग के बिना कल्पना भी नहीं की जा सकती। अब तो रिश्तों की भी मार्केटिंग होने लगी है...वो फलां...निरुद्देश्य - सुरेन्द्रनाथ झा गुडगाँव में ३०० गज के एक प्लाट में बंगला बनाकर रह रहे हैं. वे देश के एक नामी कपड़ा उद्योग के स्पेशल डाइरेक्टर के पद से करीब दस साल पहले रि...-'Lower drinking age leads to binge drinking later - सेहतनामा (1) नियमित दोनों समय पर भोजन (दोपहर और रात का )और सुबह का नास्ता करें .जो लोग कभी दोपहर का भोजन नहीं करते कभी रात का वह अपने लिए सिरदर्द ...देश की पुकार है, बचाओ बेटियां -*हरेश कुमार* देश की पुकार है ये बचाओ बेटियां। गर्भ से लेकर, हर जगह, क्यों मारी जाती हैं बेटियां। हैं, बेटियां पुकारती। क्यों हो रहा ये अत्याचार। ...

Goa- Last trekking point at Tambdisurla ancient Temple, गोवा ट्रेकिंग समापन स्थल एक प्राचीन महादेव मन्दिर। - गोवा यात्रा-20 नदी किनारे वाले बारा भूमि मन्दिर से यह ताम्बडी सुरला नाम का शिव मन्दिर लगभग चार किमी दूरी पर है। एक घन्टे में हमने यह दूरी आसानी से तय कर ली ...निठल्लाई माने सदा सप्ताहांत -सप्ताहांत याने संडे का दूनिया को बड़ी बेसब्री से इंतजार रहता है। शनिवार से ही सप्ताहांत मनाने की तैयारी शुरु हो जाती हैं। पश्चिमी देश चाहे नाच-गा कर मस्ती...वीआईपी सुरक्षा और जनता ?- देश में जिस तरह से सामान्य प्रशासनिक कार्यों में मूर्छा की स्थिति उत्पन्न होती जा रही है वह कहीं न कहीं से देश के लिए...जवाब रखे थे - - शायद अब सांप बनने लगे हैं फूल, वरना हमने जेब में गुलाब रखे थे - कमाल है पढ़े जाने लगे हैं धर्म-ग्रन्थ वरना जेलों में तो कसाब रखे थे - मशगुल थ...

अब दीजिए इजाजत .. मिलते हैं एक ब्रेक के बाद ......

बुधवार, 23 जनवरी 2013

गुलाबी नगरी, में गुलाबी मौसम में ... ब्‍लॉग4वार्ता .. संगीता पुरी

नमस्‍कार ,  रोहिणी स्थित केंद्रीय जांच ब्यूरो (सी.बी.आई.) की विशेष अदालत ने हरियाणा के बहुचचिंत शिक्षक भर्ती घोटाले में पूर्व मुख्यमंत्री एवं इंडियन नैशनल लोकदल (इनैलो) सुप्रीमो ओम प्रकाश चौटाला एवं उनके पुत्र अजय चौटाला तथा आई.ए.एस. के 2 अधिकारियों प्राथमिक शिक्षा के तत्कालीन निदेशक संजीव कुमार एवं चौटाला के साथ विशेष सेवा पर तैनात पूर्व अधिकारी विद्याधर तथा चौटाला के तत्कालीन राजनीतिक सलाहकार व विधायक शेर सिंह बड़शामी सहित 10 को आज 10-10 साल की जेल की सजा सुनाई। आज की इस खबर के साथ चलते हैं आज की वार्ता में ....


प्रेमकथा जारी है ...... - *हम किनारे लग भी सकते थे * * * ** राम जन्म पाठक* आधुनिक प्रेमकथा का पूर्वार्ध अब मध्य भाग ......... लेकिन, जब इतिहास लिखा जाएगा तो इतिहासकार लिखे...गुलाबी नगरी, में गुलाबी मौसम में, गुलाबी गाल वालों की, कुछ गुलाबी - गुलाबी सी गप्पें इस प्रकार हैं .... -गुलाबी नगरी, में गुलाबी मौसम में, गुलाबी गाल वालों की, कुछ गुलाबी - गुलाबी सी गप्पें इस प्रकार हैं ............. साथियों, जब चुनाव होते हैं तो हमारा कार्यक...पधार रहे है ......... - *खबरदार होशियार सियारों के सरदार ऐय्यारों के ऐय्यार करने बंटाधार पधार रहे है ....... * *बहरूपिये हज़ार रंगे सियार लूटने को बेकरार फिर एक बार पधार...ओस से भीगी एक रात - : *ओस से भीगी एक रात* : अभी उसने बोरी के नीचे से सर निकाला ही था कि कोहरे भरी अँधेरी घनेरी रात में चल रही हवाओं की सरसराहट ने फिर दुबकने पर मजबूर कर द...तुझको चलना होगा, तुझको चलना होगा...खुशदीप - दूध के कलेक्शन सेंटर में एक मोटा और एक छोटा चूहा धमा-चौकड़ी मचा रहे थे...इसी उछल-कूद के दौरान दोनों ताजा दूध के एक टब में जा गिरे...दोनों बाहर निकलने की को...

विक्डलीक का वैमी टाइटन फैबलेट – गैलैक्सी नोट २ का सस्ता देसी संस्करण, स्टायलस सहित @ ₹१३,०००- मुम्बई की विक्डलीक नामक हैंडसैट निर्माता कम्पनी ने वैमी टाइटन नाम से एक ५.५ इंची फैबलेट निकाला है। यह सम्भवतः पहला भारतीय फैबलेट है जिसमें स्टायलस शामिल है...ठहराव बिलकुल अच्छा नहीं - कोई पाँच बरस पहले ब्लागिरी शुरु हुई थी। पहले ब्लाग तीसरा खंबा आरंभ हुआ और लगभग एक माह बाद अनवरत। धीरे धीरे गति बढ़ी और हर तीन दिन में कम से कम दो पोस्टें ल..." दिल..है कि मानता....नहीं..." राहुल जी को P.M. ...!!??? - * दिल की बात मानने वाले सभी मित्रों को मेरा हार्दिक नमस्कार !!* * जयपुर के " चिंतन-शिविर " में कांग्रेस के भावी प्रधानमंत्री पद...जरय पेट के अंठुली - बचपन में मुझे मेरी दादी एक छत्तीसगढ़ी कहानी सुनाया करती थीं जिसका आरम्भ होता था "कहिनी कहय कंठुली, जरय पेट के अंठुली" से। इसके की कहानी क्या थी मुझे याद नही...

गणतंत्र दिवस - * * हुए स्वतंत्र सन सैतालिस में सन पचास में गणतंत्र बना स्वतंत्र देश में पालनार्थ संविधान लागू हुआ | वह दिन था छ्ब्बीस जनवरी इस दिन को याद किया जाता है...अच्छी शुरुआत का आशावाद - जब आप अपनी कमजोरियाँ और कमियाँ सार्वजनिक रूप से स्वीकार करते हैं, वह भी तब, जब आप किसी पद पर आने के बाद पहली बार ऐसा कर रहे हों, तब कुछ बातें अपने आप ह...बस्तर फतह के लिए भाजपाई तिकड़म शुरू ! - मसीही समाज पर दर्जन भर हमले ! राÓयपाल को ज्ञापन ! वैसे तो हिन्दुत्व का मुद्दा गरम कर चुनाव जीतने का भाजपा का पुराना शगल है । चुनाव जीतने के बलए वह कभी राम का...काश ! हम जी रहे होते.... - काश ! हम जी रहे होते सबके आंशू, पी रहे होते गूंजती, देखते गर, हवाओं में चीखें कुछ रिश्ते पिरो रहे होते बात होती रही , सदियों से, संस्कारों की बिखरते रिश...

नए ज़माने की परियां ............ -जिंदगी आगे बढ़ने का नाम है पर पुरानी बातों से सबक लेना भी जरूरी है तभी तो जिंदगी की कहानी आगे बढ़ेगी.कहानी से याद आया हम सबने बचपने में एक परी ...देखो न मुझे ... - एक छोटी-सी कोठरी का अँधेरा देखो कैसे बाहर निकल आया है जैसे ही कोई जलता दीया इस बुझे दीये के बेहद करीब आया है ... एक गहरे-काले घोल की-सी रात दहककर पिघलने लग...उसके बाद ?- मैं .... और मैं वार्तालाप,प्रलाप प्रश्न,प्रश्नोत्तर,निरुत्तर .... सत्य-असत्य पाप-पुण्य स्वाभिमान,अभिमान सुकर्म,कुकर्म .... सबकी दिशाएं मैं के बिंदु ...सदी के महानायक - तुम थे उस सदी के महानायक तुमने जानी थी आज़ादी की सही कीमत मुफ्त में या भीक में मिली चीज़ की कोई महत्ता नही होती तुम्हें पता था । इसी लिये तो तुम चाहते थे ...

मेरी प्रकाशित कवितायेँ (English)- मेरी दो अंग्रेज़ी की कवितायेँ Inklinks नाम की पुस्तक में प्रकाशित हुई हैं. डॉक्टर ए पी जे अब्दुल कलाम. गुलज़ार साहब, इरशाद कामिल, इब्राहीम अश्क, नीदा फाज़...तुकबंदियां मेरे मन की- 1 - *[image: angry-man-03]* *बिसात इश्क की आज फिर.......................मैंने बिछा दी भाइयों ने उसके रोली चन्दन के साथ अर्थी मेरी सजा दी* ******************...देशव्यापी महिला हेल्पलाइन १८१ - संचार मंत्री कपिल सिब्बल ने केंद्र सरकार की इस मंशा को सभी राज्यों से अवगत करा दिया है कि दूर संचार विभाग द्वारा सभी राज्यों...ख्वाबों में तुम थे... - * **सजाई पलक थी करीने से हमने* *छलक गए हंजू बताऊँ मैं कैसे -* * **इरादों में तुम थे ख्वाबों में तुम थे* *टुर गए दिल से बताऊँ मैं कैस...

वेलसर गाँव का हर्रा टोला - भोजन के वक्त विष्णु सिंह से शंकर गढ के समीप अन्य पुरातात्विक स्थानों के विषय में जानकारी ली तो उन्होने शंकरगढ के समीप ही स्थित हर्रा टोला बेलसर का जिक्र कि...गोवा ट्रेकिंग, मीरामार बीच Goa trekking, Miramar beach -गोवा यात्रा- यह तो हमें पहले से पता था कि आज हमारा ग्रुप चार-पाँच किमी की ट्रेकिंग करने दोना-पोला बीच तक जाने वाला है। जिसमें सबको अपने बैग साथ ले जाने है,..ई बी व्हाईट : प्राकृतिक इतिहास - *अमेरिकी लेखक ई. बी. व्हाईट (1899 -- 1985) ने कहा है, "एक बार आप मकड़ों को देखना शुरू कर दें तो आपके पास कुछ और करने के लिए समय नहीं रह जाता". यहाँ प्रस्तु...तो फिर विन्ध्यप्रदेश क्यों नहीं! - तो क्या यह तय मान लिया जाए कि सरकार नजरों में वहीं मांगे जायज हैं, जिनको लेकर जनता सड़कों पर उतरे, आगजनी, नाकाबंदी कर कुछ लाशें बिछें, रेलगाड़ियां जलें सा...

आज के लिए बस इतना ही .. मिलती हूं एक ब्रेक के बाद .....


शुक्रवार, 18 जनवरी 2013

झटका कीजिए न हलाल क्‍यों ... ब्‍लॉग4वार्ता .. संगीता पुरी

नमस्‍कार, बढ़ते बजट घाटे का रोना रोती केंद्र सरकार ने आखिरकार विष का प्याला पी लिया, डीजल के दामों को बाजार के हवाले कर दिया। डीजल अब हर महीने 50 पैसे महंगा हो जाएगा। सरकार ने इसकी इजाजत दे दी है। महंगा डीजल इस देश के अधमरे किसान को और मार देगा, जबकि महंगी डीजल गाड़ियां दौड़ाने वालों की जेब से कुछ नोट और निकल जाएंगे। हालांकि, रसोई गैस और मिट्टी के तेल पर सरकार ने रहम किया। रियायत वाली रसोई गैस सिलेंडरों की संख्या 6 से बढ़ाकर 9 कर दी है। दरअसल तेल की धार को अब सरकार ने तेल कंपनियों के हवाले कर दिया है। देखना है आगे आगे और क्‍या क्‍या होता है ?
चलते हैं आज की वार्ता पर .......

अनोखी समरूपता ! - *हिन्द-पाक को लाख अलग दिखलाने की कोशिश कर भी लो,* *फिर भी ये देखिये कि कितनी समरूपता है बीच दोनों के। * *गर फ़र्क ढूंढना **भी **चाहो तो तुम्हें बस इतना...केवल हिन्दू बचेंगे और प्रेम से रहेंगे- गुरु-- "चेला, हिन्दू-मुसलमान एक साथ नहीं रह सकते।" चेला-- "क्यों गुरुदेव?" गुरु-- "दोनों में बड़ा अन्तर है।" चेला-- "क्या अन्तर है?" गुरु-- "उनकी भाषा अलग ह..." दुनिया में रहना है तो, काम करो प्यारे "..." चिंतन नहीं "...!!?? - * " काम " करने वाले सभी मित्रों को मेरा हार्दिक नमस्कार !!* * जब सरकार हमारी " जनहित " के कार्य कर-कर थक गयी ......तब उसे चिंतन करने ...पाकिस्तान ने वादा किया है की वो तमीज से रहेगा - पाक ने बारूदी सुरंगें बिछा रखी हैं ! भारत ने जब सबूत सौपें तो उन्होंने लेने से इनकार कर दिया ! 16 दिनों में 20 बार नियंत्रण रेखा पर युद्ध-विराम का उल्लंघन ...पाक की नीति - भारतीय सैनिकों के साथ अमानवीय व्यवहार किये जाने की पाकिस्तानी सेना की बर्बर हरकत के बाद जिस तरह से देश में पाकिस्तान के ख़...


यादों का अंकुश - मन की गलियों में भटकते कई बातें याद आती है तो कभी ऐसा कुछ घटित होता है की उसके बहाने कोई पुरानी बात याद आ जाती है तो कभी किसी पुरानी बात के बहाने कोई का...बे-सबब अपनी आशिकी ठहरी..... - बे-सबब अपनी आशिकी ठहरी. बात यह इश्क की भली ठहरी. हो मुहब्बत में यह पता सबको. कशमकश उम्र भर बनी ठहरी. शुक्रिया ज़िन्दगी! कदम दर कदम, तू मेरे साथ ही चली, ठहर...गीत: आओ! आँख मिचौली खेलें... संजीव 'सलिल' -चित्र पर कविता रचें: गीत: आओ! आँख मिचौली खेलें... संजीव 'सलिल' * जीवन की आपाधापी में, बहुत थक गए, ऊब गए हम। भूल हँसी, मस्ती, खुशियों को, व्यर्थ फ़िक्र में ड...तेल का खेल - *तेल कीमत बढने से महंगाई बढेगी। महंगाई बढने से आम आदमी का तेल निकलेगा और आम आदमी जब तेल देने लगेगा तो महंगाई खुद कम हो जाएगी :- राहुल गांधी*


उनके घरों में शायद न होती हैं बेटियाँ -लेने से ज़न्म पहले ही मरती हैं बेटियाँ, सब बोझ भेद भाव का ढ़ोती हैं बेटियाँ. फ़िरते हैं गुनहगार खुले आम सड़क पर, उनका गुनाह उम्र भर ढ़ोती हैं बेटियाँ. ...शब्द सहम के सो जाते हैं सन्नाटे में - *"शब्द सहम के सो जाते हैं सन्नाटे में , पदचाप सुनायी देती हैं कातिल सी कुछ अंगारे जो सूरज से छलके थे कुछ कहते थे और अगरबत्ती कुछ सहमी सी जलती थी मेरे आँगन मे...अहिरन और '' नींद का समय.'' -अहिरन नदी का रूपान्तरण अकेला या इकहरा नहीं है। बल्कि, वहाँ सेंवधरा में जहां नदी के पानी से बिजली बनाई जाने वाली है, वहाँ गाँव का भी रूपान्तरण हो रहा है...फिजां कह रही है .... -* ****फिजां कह रही है, देख ! कैसे वक्त* *करवट ले रहा है* *ब्रह्मवेत्ता , छद्म - वेत्ता की राह में ,* *ज्ञानी कर वसूल रहा है-* *सन्यासी धर...

ओह ! मेरे किसी जन्म के बिछड़े प्रियतम - मैं राख का अंतिम श्वास बन जाती .......जो तुम होते मैं मुखाग्नि का अंतिम कर्म बन जाती .......जो तुम होते मैं कच्चे घड़े संग चेनाब पार कर जाती .......जो तुम...हर क्षण मन से झरतीं क्षणिकाएं.... - (कुछ बिखरे जज्बातों को समेत कर रख दिया है, बस .......)स्नेह की मृगतृष्णा मिटती नहीं... रिश्तों का मायाजाल कभी सुलझता नहीं. तो मत रखो कोई रिश्ता मुझसे मत बुल...सेनापति वीरु हाथी और डाकू नाटा गीदड़ (बाल कहानी) -मीठे पानी के विशालकाय झरने के किनारे बसा तथा बड़े-बड़े फलदार वृक्षों और अत्यंत सुंदर, रंग-बिरंगे, सुगंधित फूलों के प्यारे-प्यारे पौधों से भरपूर एक हरा-भर...

फेसबुक ने कर डाला ब्लॉगर्स का ब्रेन ड्रेन --- -आजकल एक पुराना हिंदी फ़िल्मी गाना बहुत याद आता है -- *मैं ढूंढता हूँ जिनको , रातों को ख्यालों में * *वो मुझको मिल सके ना , सुबह के उजालों में। * कुछ यही ...नई प्रतिभाओं के लिए सुनहरा अवसर .......... - नवोदित कवियों / कवयित्रियों को उनकी काव्य-प्रतिभा की चमक दिखाने का एक बड़ा अवसर देने के लिए एक शानदार *ऑडियो एल्बम काव्य-कुम्भ * का निर्माण तीव्र गत...ये कटहल है - ये कटहल है इसकी जड़, छाल और पत्ते दवा के तौर पर प्रयोग किये जाते हैं जबकि फल कच्चे पक्के दोनों तरह खाएं जाते हैं। कच्चे कटहल की सब्जी बडे शौक स...खुराक को संतुलित रखने के लिए - खुराक को संतुलित रखने के लिए Colour your plate right विविध रूपा बहुरंगी बनाइए अपनी खुराख को .फल और तरकारियाँ तमाम किस्म के रंजक (Pigments)ही नहीं लिए ह...



अब लेते हैं विदा .. मिलते हैं एक ब्रेक के बाद ......

शनिवार, 12 जनवरी 2013

ना काहू से दोस्ती, ना काहू से बैर...ब्‍लॉग4वार्ता .. संगीता पुरी

आप सबों को संगीता पुरी का नमस्‍कार , काफी समय से लोग देखते व सुनते आ रहे हैं , समय बहुत महत्‍वपूर्ण होता है , कभी हमें एक एक सफलता की सीढियां चढाता है तो कभी धूल धूसरित करने में भी कोई कसर नहीं छोडता। इसी समय को समझने के लिए ज्‍योतिष का अध्‍ययन किया जाता है , सिर्फ जन्‍मकाल के ही नहीं , अभी चल रहे यानि गोचर के ग्रह भी लोगों को खासा प्रभावित करते हैं। 'गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष' इसे समझने का पूरा प्रयास करता आया है। इन्‍हीं ग्रहों के आधार पर मेरे ब्‍लॉग में ढाई ढाई दिनों में लग्‍न आधारित राशिफल प्रकाशित किए जाते हैं , वर्ष और महीने नहीं , दिन तथा घंटे तक की अलग अलग स्थिति में ग्रहों का हमपर भिन्‍न भिन्‍न तरह प्रभाव पडता है, इसका भी खुलासा हुआ है। सूक्ष्‍म तौर पर ग्रहों की स्थिति पर ध्‍यान दिया गया तो महसूस हुआ कि 12 और 13 जनवरी 2013 का शुभ समय शाम साढे सात से 10 बजे तक , अशुभ समय 3 बजे से साढे पांच बजे शाम तथा महत्‍वपूर्ण समय साढे छह से 9 बजे सुबह तक होगा , महत्‍वपूर्ण समय किसी के लिए अच्‍छा तो किसी के लिए बुरा हो सकता है . जबकि शुभ समय अधिकांश के लिए अच्‍छा तथा अशुभ अधिकांश के लिए बुरा होगा। इस जानकारी के बाद चलते हैं आज की वार्ता पर .........

सर्दी देखूँ या सर्दी का बाज़ार देखूँ ....... - *सर्दी देखूँ या सर्दी का बाज़ार देखूँ ....... रंग - बिरंगे स्वेटर टोपी, जैकेट, मफलर शाल, मोज़े, दस्ताने गरम इनर, पायजामे जूते और कोट से जगह जगह पटा हुआ ब...हाय! कैसी है ये प्रेम के बाजूबंद की अठखेलियाँ………… - धडकनों के मौन आकाश पर गुंजित तुम्हारा प्रेमराग स्पन्दित कर नव चेतना भर गया और शब्द झंकृत हो गये भाव निर्झर बह गये हाय! कैसी है ये प्रेम के बाजूबंद की अठखेल...शाकाहार (निरामिष) ही क्यों ? - *शान्ति का समुचित उपाय, अहिंसा* सम्पूर्ण जगत में प्रत्येक जीव के लिए सुख का आधार शान्ति ही है। शान्ति का लक्ष्य अहिंसा से ही सिद्ध किया जा सकता है। संसा...सिंघा धुरवा का गुमशुदा - बोरिद पहुंचकर भूख लगने लगी थी पर हमारे पास भोजन का कोई साधन नहीं था। स्कूल के समीप हैंडपंप पर पानी पीने के लिए रुकना पड़ा। मैं मंगतु यादव की परछी में जाकर ...नाम की महिमा - नाम से ही मनुष्य की पहचान होती है. होना तो यह चाहिए कि यथा नाम तथा गुण हो, पर ऐसा कम ही हो पाता है. हास्य कवि काका हाथरसी ने ऐसे विरोधाभाषी नाम-गुणों की फ...

फिल्‍म रिव्‍यू : मटरू की बिजली का मन्‍डोला - [image: matru ki bijlee ka mandola film review] मुद्दे का हिंडोला -अजय ब्रह्मात्‍मज देश के सामाजिक और राजनीतिक मुद्दे संवेदनशील फिल्मकारों को झकझोर रहे हैं...एक खिड़की - (मौसम बदले, न बदले... हमें उम्मीद की कम-से-कम एक खिड़की तो खुली रखनी ही चाहिए. अशोक वाजपेयी की कविता, ऑनरी मातीस की कलाकृति 'द ओपन विंडो' के साथ) मौसम ब...शहीद के मन की - कैसे तुझे बताऊँ माँ हूँ मैं कितना खुश किस्मत जब तक जिया कर्तव्य से पीछे न हटा सर्दी से कम्पित न हुआ गर्मी से मुंह ना मोड़ा अंत तक हार नहीं मानी की सर...हुन धीयां दी लोहड़ी मनाइए - लोहड़ी मनाने के साथ कोई पौराणिक परंपरा नहीं जुड़ी हुई है,पर इस से जुड़ी प्रमुख लोककथा दुल्ला भट्टी की है जो मुगलों के समय का बहादुर योद्धा था |कहा जाता हा...

पैमाने में भरकर अलसाये दर्द को, इस तरह न छलकाया करो... - *दरिया-ऐ-इश्क,प्रीत दर्शाने की फरमाइश मुझे अच्छी नही लगती,* *दिल की बात लव पे लाने की सिफारिश मुझे अच्छी नहीं लगती। * * * *मंजूर वही हमको,बे-गरज ज...मेरा नौकरीपेशा जीवन-2 - मेरा नौकरीपेशा जीवन-1 मैं और रोहित ट्रेन से दोपहर होने तक कुरुक्षेत्र पहुंचे। यहां एक प्लेसमेंट एजेंसी है जिसके मैसेज हमारे मोबाइल पर अक्सर आते रहते थे। जब...डाक्टर अच्छा मिले , तो और बात है --- कहते हैं , हँसना और गाल फुलाना एक साथ नहीं होता। लेकिन लगता है कवियों के जीवन में ये प्रक्रियाएं साथ साथ ही चलती हैं। तभी तो ख़ुशी हो या ग़म, एक कवि का धर...वक्त की टूटी घड़ी दीवार पर अब भी धड़कती है -*"वक्त की टूटी घड़ी दीवार पर अब भी धड़कती है , और रिश्ते मर गए हैं सच के सदमें से बोझिल सी रातों में सर्द से हालात सा मेरा वजूद छल चुके अहसास को ओढ़े है इक ...


बस शर्म ही शर्म...और कोई न कर्म - मंत्रियों, सांसदों, विधायकों के भ्रष्टाचार -- शर्म, शर्म, शर्म . घोटालों की राशि का लगातार बढ़ते जाना -- शर्म, शर्म, शर्म . महिलाओं के विरुद्ध अपराधों में ल...प्रेमी प्रेमिका, दूध और शक्कर, डायबिटीज -*1.* *प्रेमी प्रेमिका* *दूध और शक्कर* *डायबिटीज* * * * * *2.* *पति व पत्नि* *होते ही बच्चे चार* *लठ्ठमलठ्ठा* * * * * *3.* *धणी लुगाई* *गाडी के दो पहिये*...गुलाबों के दरबार में...... - यूँ ही तो नहीं गुलाब को फूलों के राजा के रूप में नवाजा गया है। मौसम कोई भी हो कड़ाके के गर्मी हो या ठण्ड हर मौसम में राजसी शान-ओ-शौकत और ठाट-बाट के साथ अप...पुरुषों से दोस्ती करें अथवा ना करें ? - संत आसाराम बापू का कहना है की "पुरुषों से दोस्ती की जायेगी तो बलात्कार बढ़ेंगे " इस तरह की बचकानी बात पहले कभी नहीं सुनी ! सभी पुरुष एक जैसे नहीं होते, अतः..

'बिटिया है तो कल है'...इरफ़ान संदेश...खुशदीप - 5 से 7 जनवरी तक दिल्ली के निर्माण विहार मेट्रो स्टेशन के पास पूर्वा सांस्कृतिक केंद्र (पीएसके) में देश के प्रसिद्ध कार्टूनिस्ट इरफ़ान की 9वीं एकल कार्टून ...देहात की बात -[image: gaon] ग्रा मीण अंचल के लिए *गाँव-देहात* शब्दयुग्म का हिन्दी में खूब प्रयोग होता है । “वे दूर *देहात* से आए हैं,” “*देहात* में रहने के अपने फ़ायदे ह...ना काहू से दोस्ती, ना काहू से बैर.............! - *दो तरह के मानदंड क्यों?* *हरेश कुमार* बिहार के मुख्यमंत्री, नीतीश कुमार की पार्टी, जनता दल यूनाईटेड के द्वारा पटना के गांधी मैदान में आयोजित अधिकार रैली...भारत की पाक नीति - काफी दिनों से गोलीबारी की छुटपुट घटनाओं को अंजाम देने के बाद अब पाक सेना जिस तरह से बर्फ़बारी का लाभ उठाते हुए आतंकियों को भार...स्वामी विवेकानन्द -1- उठो, जागो और तब तक रुको नही जब तक मंजिल प्राप्त न हो जाये । ------------------------ 2- जो सत्य है, उसे साहसपूर्वक निर्भीक होकर लोगों से कहो–उससे किसी क...

अब दीजिए इजाजत .. मिलते हैं एक ब्रेक के बाद .....

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गुरुवार, 10 जनवरी 2013

आधा सच है दोनो ओर .. ब्‍लॉग4वार्ता .. संगीता पुरी

संगीता पुरी का नमस्‍कार , मेरे ब्‍लॉग पर प्रति वर्ष की तरह ही 2013 का वर्षफल भी प्रकाशित किया गया है।'गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष की मान्‍यता है कि अलग अलग वक्‍त पर आसमान में अलग अलग मौजूद सभी ग्रह घडी के कांटो की तरह विभिन्‍न संदर्भों के लिए हमारा अच्‍छा और बुरा समय निश्चित करते हैं , जिसे अपने अपने लग्‍न के आधार पर काफी हद तक समझा जा सकता है और अपने कार्यक्रमों को अंजाम दिया जा सकता है। जैसे आज 10 जनवरी और कल 11 जनवरी 2013 का दिन अधिकांश लोगों के बहुत शुभ है , सुबह 5 से 7  और शाम 6 से 8 बजे तक बहुत सुखद समय है , बहुत सारे लोगों के काम बनेंगे या यहां से शुरू होंगे। आप इसे भी देखें , वर्षफल को पढें और इसकी सटीकता को जांचें , वैसे लग्‍न के अलावे जन्‍मकुंडली में मौजूद अन्‍य ग्रहों के कारण भी प्रभाव में कहीं कहीं थोडी भिन्‍नता देखने को मिल सकती है , वैसे हमने 2013 के गोचर के ग्रहों के हिसाब से सॉफ्टवेयर को अपडेट कर लिया है और जन्‍मकुंडली में मौजूद सभी ग्रहों के हिसाब से भी वर्षफल निकाला जा सकता है। अब चलते हैं आज की वार्ता पर .......


सड़कों पर आन्दोलन सही पर देहरी के भीतर भी झांकें -दिल्ली में हुए वीभत्स हादसे ने पूरे देश को हिला दिया । इसके बारे में अब तक बहुत कुछ कहा और लिखा गया है । अनशन ,धरने और कैंडल मार्च सब हुआ और हो रहा है । ...भारत बनाम इंडिया - *भारत और इंडिया, तुलना अच्छी है, पर दोनों कभी एक दूसरे के विरोधी नहीं रहे। आप क्या कहते हैं? *देश का आक्रोश समाप्त और गुस्सा हुआ ठंडा -श्रीगंगानगर-छोटे कस्बे से लेकर महानगर तक के युवाओं के आक्रोश पर कोहरा पड़ गया। व्यवस्था परिवर्तन के लिए उनके दिलों में प्रज्जवलित आग ठंडी हो गई। देश भर ज...जख्म एक भरता नहीं, जख्म कई और दे जाते हैं लोग। -*इस बेदर्द जहां में न जाने क्यों इसकदर सताते हैं लोग, * *जख्म एक भरता नहीं, जख्म कई और दे जाते हैं लोग।* * * *मरहम लगाने के बहाने तल्ख़ लफ्जों से बिंधते है...क्या करेंगे अन्ना? - मीडिया की सुर्ख़ियों में आया है कि अजमेर, राजस्थान, के पुलिस एस.पी. को अपने क्षेत्र के थानों से ‘मासिक वसूली’ के पुख्ता प्रमाणों के आधार पर गिरफ्तार कर लि...

सघन वन में सिंघा धुरवा ………… ललित शर्मा - सुबह मदिरों का भ्रमण कर रहे थे तभी शैलेन्द्र दुबे पहुंच गए। 9 बज रहे थे और अभी हमें स्नान के साथ नाश्ता भी करना था। घर पहुंच कर फ़टाफ़ट तैयार हुए और होटल ...कुत्ते - मुझे जितना क्रोध अपने पड़ोसी के कुत्तों पर आता है उससे कम पड़ोसी पर नहीं आता ! उसे इन्हें रखना तो आता है संभालना नहीं आता। जब भी मैं ताजी हवा के लिए खिड़कि..मेरा नौकरीपेशा जीवन-1 - कुछ समय के लिये घुमक्कडी से फुरसत मिली तो आज याद कर रहा हूं अपने नौकरीपेशा जीवन के बारे में। कितना उतार-चढाव भरा रहा वो समय! बल्कि उतार ही ज्यादा कहना चाहि...केवल एक युक्ति है ... - मैंने अब धारा की उस प्रचंडता को पहचान लिया है व अपने अनुरूप ही हर ढाल का भी निर्माण किया है... ये भी माना कि प्रवाह-शक्ति बड़ी मद से भरी है पर सामने भी तो क...


नहीं लौटना चाहता हूँ दम तन्हा - उन दो मामूली लोगों के लिए जिनकी याद में कीमती लोगों के मुंह पर थूकने को जी चाहता है हाँ उनके ही लिए बहुत सारे दुख उठाने होंगे लोगों को हाँ उनके ही खातिर...डॉ. कौशलेन्द्र मिश्रा की एक कविता और एक कहानी - इस बार प्रस्तुत है डॉ. कौशलेन्द्र मिश्रा की एक कविता और एक कहानी : कविता भारत की धरा पर हर कोई लिखता सफ़रनामा / आया प्रेत 'माओ' का, यहाँ अब होश में चलना ...ये फ़ितूरों के जंगल हमेशा बियाबान ही क्यों होते हैं? -काश ! मौन के ताले की भी कोई चाबी होती तो जुबाँ ना यूँ बेबस होती कलम ना यूँ खामोश होती कोई आँधी जरूर उमडी होती इन बेबसी के कांटों का चुभना … मानो रूह का ज़िन्...नारी है माता कभी - मैं सबसे अच्छा सुमन, खतरनाक है रोग। हैं सुर्खी में आजकल, दो कौड़ी के लोग।। लाज बिना जो बोलते, हो करके बेबाक। समझे जाते हैं वही, आज सुमन चालाक।। चर्चा पूरे...


दिल छीछालेदर - जब गैंग्स ऑफ वासेपुर देखी थी तो बहुत ही नये तरह के गाने सुनने मिले थे, अन्य फिल्मों से सर्वथा भिन्न। मैं कोई फिल्म समीक्षक नहीं पर तीन विशेषतायें उसके सं...एक फैसले ने डुबोई लुटिया- पाकिस्तान के हाथों एक-दिनी सीरीज गंवाने के बाद शुरू हो गया परिणाम को लेकर आकलन, विशेषकर ब्रॉडकास्ट मीडिया में तो क्रिकेट पंडित और एंकर तमाम तरह की चर्चाओं...स्वयं में भी जीवन उगता है - स्वयं में भी जीवन उगता है सबको खुश करते करते ही हँसना हम स्वयं भूल गए, सबको अपने पास किया था खुद से ही दूर निकल गए ! भय ही एक सूत्र में बांध...बाबूजी की कमी खलती है- अमिताभ बच्चन - यह इंटरव्‍यू रघुवेन्‍द्र सिंह के ब्‍लॉग से लिया गया है चवन्‍नी के पाठ‍कों के लिए.... *अमिताभ बच्चन *ने दिल में अपने बाबूजी *हरिवंशराय बच्चन *की स्मृतिय...इंटैल लायेगा विण्डोज़ ८ टैबलेटों के लिये नया क्वाड कोर ऍटम प्रोसैसर - लास वेगास में चल रहे कंज्यूमर इलैक्ट्रॉनिक्स शो में इंटैल ने अपने नये क्वाड कोर ऍटम प्रोसैसर के बारे में जानकारी दी। इस प्रोसैसर का कोड नाम बे ट्रेल है तथा...


शोहरत - शोहरत मतलब पहले दिन तो फूलों का....... सहरा और साफ़ा ! दूसरे दिन उन फूलों से कूड़े में कुछ और इजाफा ! *- वी वी शिवालकर 'कुसुमाग्रज' * *अनुवाद - गुलजार *सुनसान रस्ते - डर सा लगता है अकेले चलने में अँधियारे और तन्हा से उन सुनसान रस्तों पर । जहाँ कोई नहीं गुजरता बस एक एहसास है मेरा जो विचरता है ठहरता है और फिर चल पड़...अमन की आशा को धिक्कार है, सौ बार? -*हरेश कुमार* * * * * राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर ने अपनी कविता के माध्यम से देशवासियों को संदेश देते हुए लिखा था – क्षमा शोभती उस भुजंग को जिसके पास गरल...पाक सेना का बर्बर रूप -पाकिस्तान की सेना ने एक बार फिर से अपनी घिनौनी हरकतों के चलते भारत को सोचने को मजबूर कर दिया है कि क्या पाक इस लायक भी है कि उसक...आधा सच है दोनों ओर - आधा सच है दोनों ओर शालिनी जी कौशिक ,आशा राम बापू जी हों ,या मोहन भागवत जी ,इसी विचार धारा के अन्य लोग हों जो ये सब लोग कह रहें हैं उसके निहितार्थ...







बुधवार, 2 जनवरी 2013

हर वर्ष नया ही होता है ... ब्‍लॉग4वार्ता .. संगीता पुरी

नमस्‍कार , रोजाना अरबों लोगों द्वारा उपयोग में लाए जाने वाले क्रांतिकारी संचार माध्यम इंटरनेट ने मंगलवार एक जनवरी 2013 को तीस वर्ष पूरे कर लिए। समाचार पत्र टेलीग्राफ के मुताबिक पुरानी नेटवर्किंग प्रणाली को पूरी तरह से हटाकर कंप्यूटर नेटवर्क ने औपचारिक रूप से एक जनवरी 1983 को काम करना शुरू किया था। उस दिन अमेरिका के रक्षा विभाग द्वारा संचालित अर्पानेट नेटवर्क की जगह संपूर्ण तौर पर इंटरनेट प्रोटोकॉल सूट (आईपीएस) संचार प्रणाली के उपयोग को अपना लिया गया। इसी से आगे चलकर वर्ल्ड वाइड वेव (डब्ल्यूडब्ल्यूडब्ल्यू) मार्ग प्रशस्त हुआ। अब चलते हैं आज के खास ब्‍लॉग पोस्‍टों की ओर .......

मेरी डायरी -गुज़रते वक्त का ध्यान कौन रखता है, बस ये घड़ी, और मेरी ये डायरी, एक एक दिन गिनती है, और ३६५ दिन पूरे होते ही कह देती है कि मेरा समय पूरा हुआ, तुम्हारा भी हो...- नववर्ष में आओ हाथ मिलाये साथ मिलकर चल पड़े नव उमंग की चाह में हम बढ़ चले हम चल पड़े । सूरज की रौशनी सा प्रेम भाव ले चले कदम से कदम मिला हम बढ़ चले ह...कहने से कुछ ना होगा अब- मैंनें तुमको शब्‍द दिये, समवेत स्‍वरों में गाना है। कहने से कुछ ना होगा अब, अमली जामा पहनाना है। सुन चुके बहुत, सह चुके बहुत, फि‍र ऐसे वक्‍़त न आने हैं...अइसन बहुरिया चटपट, खटिया ले उठे लटपट - इस छत्‍तीसगढ़ी लोकोक्ति का भावार्थ है आलसी व्‍यक्ति से तत्‍परता की उम्‍मीद नहीं की जा सकती. आइये अब इस लोकोक्ति में प्रयुक्‍त छत्‍तीसगढ़ी शब्‍दों का विश्‍...नारी - *मैं किसी बंधन में बंधना नहीं जानती*** *नदी के बहाव सी रुकना नहीं जानती*** *तेज हवा सी गुजर जाये जो सर्र से*** *मैं हूं वो मन जो ठहरना नहीं जानती।*** *वो स...


- *सु -स्वागतम* * **देखो* *कैसे आ गया* *हौले से* *बिना आहट के..* *ना कोई नानुकुर* *ना कोई नखरा.* *कोई बुलाए ना बुलाए...* *चाहे न चाहे,* *चला आता है* *बिना दस्त...रविकर की कामना, चतुर्दिक प्रेम हर्ष हो-...!!! - रविकर की कामना, चतुर्दिक प्रेम हर्ष हो- नववर्ष की अनन्त शुभकामनाएं : चर्चामंच-1111 ** ** * मंगलमय नव वर्ष हो, फैले धवल उजास ।* *आस पूर्ण होवें सभी, बढ़े ...ज़िंदा कातिल पर भारी पड़ता है एक मुर्दा सन्नाटा - *"ज़िंदा कातिल पर भारी पड़ता है एक मुर्दा सन्नाटा काँप जाता है ज़िंदा आदमी तुम सूली पर चढ़ा सकते हो तो चढ़ा दो उसे ठोक दो कीलें उसके दिल दिमाग हाथ और पैरों पर क़त्...मीठा भी गप्प,कड़वा भी गप्प: क्या दुआ करूँ..... - मीठा भी गप्प,कड़वा भी गप्प: क्या दुआ करूँ.....: नए का आना , पुराने का जाना फ़िर वही तराना , फ़िर वही तराना कुछ सुन लूँ..... कुछ सुना लूँ गीत वही फ़िर स...वो बिटिया ! आज के दौर की रानी लक्ष्मीबाई...खुशदीप - *'बुंदेले हर बोलों के मुंह हमने सुनी कहानी थी, * *खूब लड़ी मर्दानी वह तो झांसी वाली रानी थी...* कवियत्री सुभद्रा कुमारी चौहान की ये पंक्तियां आज के हालात ...


सवारी अपने सामान की आप जिम्मेवार है......अथ रेप पुराण ....भाग 4 - एक मेंडक था ....frog .....वो एक कुए में रहता था ....well में .....यू नो वेल .....एक बड़ा सा गड्ढा होता है ....उसमे... *नववर्ष की हार्दिक शुभकामनायें अश्रुपूरित भी और संस्कारित होने के लिए भी * कविता के कापीराइट के लिये सम्पर्क करें (kushwansh@gmail.com)और शारदा महाराज खच्च खच्च खचा खच बाल काटने लगे बिना पानी मारे.... -भावना को रूप देती प्रकृती ...... -जीवन यात्रा अनवरत ...चलता चल ॥...रे मन ....!! आँख मूँद लेने से निशा नहीं होती ... न ही पलक खोलने से प्रात का दिव्य स्पर्श होता है .... समय के साथ ही हर रा...इस देश में अब कोई दामिनी ना हो ..... - जाते हुए पुराने वर्ष ने इस देश के माथे पर इंसानियत को शर्मसार करने वाला ऐसा बदनुमा दाग लगा दिया , जिसकी टीस वर्षों सालेगी . दादी की बात बार -बार याद आती...हलकट जवानी चिपकाले फ़ेवीकोल से …………ललित शर्मा - ऊंSSS अंSSSSअ अंSSSSअ अंSSSSअ अंगड़ाईयां लेती हूँ मैं जब जोर-जोर से, ऊ आह की आवाज आती है हरोर से, मैं तो चलुं इस कदर, मच जाए रे गदर, होश वाले भी मदहोश आए ...

सारी घड़ियाँ बीत गई -- संजय भास्कर -सारी घड़ियाँ बीत गई अब हर रोज होगी मुलाकातें कुछ तुम कहना कुछ हम कहेंगे अपने दिल की बातें कैसे कैसे सपने देखे कैसे बीती रातें बीता वर्ष 2012 चला गया ...मैं फिर जी उठी हूँ - उम्मीदों की पुडिया हर बार बाँधी मैंने और रख दी आस की टोकरी में ये सोच अब की बार जरूर एक नया रंग भरेगी मगर आस की टोकरी हमेशा सूखती रही और मुझमे एक चेतन...शुभकामना से शुभकर्म की ओर -भारतीय जन जीवन को जब देखते हैं तो यहाँ पर शुभकामनाओं की बड़ी महता नजर आती है । सोने से लेकर जागने तक, शाम से सुबह तक, मृत्यु से जीवन तक, जड़ से चेतन तक, युद...नये साल पर शुभ का मनाये ? - "बच्चन" जी कहते है कि जो* बीत गयी सो बात गयी *मै इससे ज्यादा इत्तेफाक नही रखता बीती बाते इतनी आसानी से भुला नही पाता या यो कहिये कि जेहन से जाती ही नही...हर वर्ष नया ही होता है - हर वर्ष नया ही होता है, नव आशा लेकर आता है. जो भी सोचा न कर पाया, होकर निराश वह जाता है. दे दिया कलंक जाते जाते, वहशी हत्यारों ने तुमको. अब यही सोच वह जाता...


हृदय के सितार पर - रात का दूसरा पहर, अंधकार भरे सन्नाटे के बीच अभिशप्त नारी क्रंदन मनको बोझिल बना देता है कोई कैसे दूर करे चारो ओर छाया यह कहर रात का दूसरा पहर सपनों के पर्वत ...…there was no one left to speak for me. - सच कहूँ तो इस मुद्दे पर मैंने कहीं कुछ नहीं लिखा, कोई पसंद नहीं, कोई टिप्पणी भी नहीं। इससे जुड़ी खबरें भी ठीक से नहीं पढ़ पाया। लोगों ने मुझसे कुछ कहना ...अहंकार - बंजर जमीन है (उत्सव समापन) - *अहंकार - एक बंजर जमीन के समान है . वह प्रकृति से सामंजस्य बैठने में पूर्णतया असफल होता है, प्रकृति भी अहंकार से दूर होती है . प्रकृति सत्य है शिव है सुन...अनायास मिली खुशी - यदि केलेण्डर बदलने के पहले दिन को नव वर्ष की शुरुआत मानी जाए तो मुझे वर्ष 2013 के पहले ही दिन अत्यधिक आह्लादकारी, सारस्वत भेंट मिली है। इस क्षण, दुनिया...इन्साफ का तराजू - अगर *गिरिजेश राव जी* का आह्वान नहीं होता त सायद हम ई पोस्ट नहीं लिख रहे होते. अभी साल २०१२ के जाते-जाते जउन घटना घटा है, उसके बाद नया साल का बधाई अऊर सुभक...

रविवार, 30 दिसंबर 2012

काला शनिवार .. हम रहे इंसान कितना .. ब्‍लॉग4वार्ता .. संगीता पुरी

आप सबों को संगीता पुरी का नमस्‍कार ,सिंगापुर के माउंट एलिजाबेथ अस्पताल में दम तोड़ने वाली दिल्ली दुष्कर्म पीड़िता के शव को लेकर विशेष विमान भारत के लिए रवाना हो चुका है। शव वाहन से उसके शव को हवाई अड्डा लाया गया, जहां से एयर इंडिया के एक चार्टर्ड विमान से शव को भारत लाया जा रहा है। इलाज के लिए 23 साल की लड़की को भारत से यहां लाया गया था। डॉक्टरों की कड़ी मेहनत के बावजूद उसे बचाया नहीं जा सका और शनिवार तड़के 2 बजकर 15 मिनट पर उसकी मौत हो गई। इस घटना से पूरे भारतवर्ष में शोक की लहर है , ब्‍लोगरों ने आज भी इस विषय पर लिखना जारी रखा है .....

काला शनिवार - आज इस साल ने जाते जाते, मुँह पे कालिख सी पोत डाली है. सर झुकाए हैं, शर्मसार हैं हम!! मुझे माफ़ करना कि मैं खुश हूँ तुम्हारे चले जाने से... - *पिछले बारह दिन अजीब से थे, दुःख अफ़सोस, गुस्सा... बस यूँ ही लिखता रहा फेसबुक पर, कुछ शब्दों को यहाँ सहेज कर रख ले रहा हूँ ताकि ताउम्र याद रहे ये आज का काल...ख़ामोशी की गूँज ऐसी होनी चाहिए - क्या कहूं सत्ता बीमार है या मानसिकता इंसानियत मर गयी या शर्मसार है मौत तो आनी है इक दिन मगर मौत से पहले हुयी मौत से कौन कौन शर्मसार है ? क्योंकि न इ...' नारी ' होने की सजा - [image: nasreen_victim_honor_killing.jpg] वेदना की सीमाओं से परे एक दबी चीख सुनी क्या ' निर्भया ' खामोश है अब क्या कहे ? कह चुकी सब यातनाओं से परे ...

बस ये आक्रोश....ये संवेदनशीलता जाया न होने पाए - हमारा देश आक्रोश, अविश्वास, बेबसी की आंच से सुलग रहा है। व्यवस्था के प्रति ये क्रोध हर तबके के लोगों में है पर युवाओं में ज्यादा मुखर है। सही भी है, द...दामिनी कि मौत समाज और सरकारों को शर्मसार करने के लिए काफी होनी चाहिए !! - कई दिनों से मौत से लड़ाई लड़ने के बाद आखिर जीने की इच्छा दिल में लिए दामिनी इस दुनिया से रुखसत हो गयी लेकिन उसकी मौत समाज और सरकारों के सामने सवाल छोड़ गयी...एक बेटी के जाने के बाद - साहसी बेटी के जाने के बाद अब सरकार की आलोचना करना वक्त बर्बाद करना है। वैसे भी आलोचना उसकी की जाती है जिसमें सुधरने की संभावना हो। सरकारें आसमान से नहीं आत...वधाई तुम्हे देशवासियों ! - *देखने में आया है कि * * दामिनी पर हुए जुल्म * *और उसकी मौत पर * *आंसू बहाने ही सही * *किन्तु शर्म इस देश में * *पुन: लौट आई है। * *बस, अब इतनी सी * * गुजा...'दामिनी' - 'दामिनी' 'तुम' चली गयी, जाना ही था तुम्हे, रुक भी जाती तो क्या? कहाँ जी पाती 'तुम' अपनी जिंदगी 'फिर से' , कहाँ से लाती जीने की वही चाह, वही उमंग, और...

# चिता की आग # - तुझको अग्नि के हवाले कर के .... मैं जड़- सी हो गई हूँ ..... कभी अपनी छाती का लहू पिलाया था मैने .. तेरी वो नटखट आँखें .. वो चेहरे का भोलापन . वो प्या...प्रीतनिया.... संध्या शर्मा -गीत नया क्या गाऊं साथी छेड़ूँ क्या वीणा पर तान क्रंदन उर की हर धडकन में पीड़ा होती प्रबल महान छूटी लय,ताल बिखरी है बिसरा सकल सुरों का भान मेरे मन के राग...मोमबत्तियाँ न जलाएं..खुद बने मशाल - 13 दिनों के कष्ट को सहने के बाद अन्ततः उस पीड़ित लड़की को सभी कष्टों से मुक्ति मिल गई। आज इस दुखद समाचार को सुनकर देशव्यापी शोक की लहर है। राजनेत...देश के ‘‘लोकतंत्र’’ में क्या ‘‘राजनीतिक तंत्र’’ ‘‘अप्रासंगिक’’ हो गया है? -*राजीव खण्डेलवाल:* Photo from:freethoughtblogs.com हमारा देश भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश है जहां लोकतंत्र को मजबू...

दामिनी के नाम - दामिनी ! तुम नेपथ्य में चली गयी, करोड़ों आँखों को नम कर गयी. देखो, मरना तो एक दिन सभी को है मगर जिस तरह तुमको जाना पड़ा उस पर पूरा देश शर्मिन्दा और घायल..." रह गयीं अब दुनिया में " नाम " की खुशियाँ , तेरे मेरे किस " काम " की खुशियाँ.....?? - * प्यारे दोस्तों,नमस्कार! आज मैं बहुत उदास हूँ !! जिंदगी साथ छोड़ गयी, मौत ने गले लगा लिया उसको , जो " जीना " चाहती थी !! लेकिन प्रश्न ये उठता है कि...खुद को आज़माने का... -हमारे दामनों पर खून के छींटे बहुत से हैं... है आया वक़्त अब अपने ज़मीरों को जगाने का... ये माँ का दूध, राखी हर बहन की हो नहीं ज़ाया... ये मौका है खुदी से आज...हम रहे इन्सान कितना......- हम रहे इन्सान कितना, कह नहीं सकते- गिर सकता है इन्सान कितना, कह नहीं सकते- मिट गयी है लक्षमण रेखा कायम कबूल थी बिक सकता है ईमान कितना, कह नह...

स्विफ्टकी ऍण्ड्रॉइड कीबोर्ड ३.१ में हिन्दी, हिंग्लिश समर्थन शामिल - स्विफ्टकी ऍण्ड्रॉइड स्मार्टफोन तथा टैबलेट के लिये एक प्रसिद्ध और लोकप्रिय कीबोर्ड ऍप्लिकेशन है। जैसे-जैसे आप टाइप करते जाते हैं यह सीखती जाती है ताकि आपको ...यार्ड में लेखन - वरिष्ठ अधिकारी का निरीक्षण है, यार्ड में नयी पिट लाइनों का निर्माण कार्य चल रहा है, पिट लाइनों का उपयोग यात्री ट्रेनों के नियमित रख रखाव के लिये किया जात...गाँव-शहर हर जगह ठण्डो रे ठण्डो! - सुदूर पहाड़ों पर बर्फवारी के चलते वहाँ से आने वाली सर्द हवाओं से जब देश के अधिकांश हिस्से ठिठुर रहे हों, ऐसे में वे अपनी हिमपूरित पहाड़ी हवाएं अपने शहर मे...अड़हा बईद परान घाती - यह कहावत हिन्दी कहावत नीम हकीम खतरे जान का समानार्थी है, जिसका अभिप्राय है : अनुभवहीन व्यक्ति के हाथों काम बिगड़ सकता है. अब आईये इस छत्तीसगढ़ी मुहावरे में..लवकुश का गर्भ-ज्ञान - माता, रोओ मत, इस सुनसान जंगल में तुम्हारे असहाय-क्रन्दन की आवाज सुनकर न मेरे पिता राम, नाही चाचा लक्ष्मण आएंगे देखो माता देखो कैसे बदल गए राजधर्म के अर्थ कुछ...




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