गुरुवार, 27 मई 2010

दिल्‍ली वालों का दिल लेकर फरार हुए ललित शर्मा, असली ज़लज़ला कौन?- ब्लाग 4 वार्ता राजकुमार ग्वालानी

ब्लाग 4 वार्ता  का आगाज करने से पहले सभी ब्लागर मित्रों को राजकुमार ग्वालानी का नमस्कार- आएं मिलकर बांटते चले सबको प्यार

ब्लाग जगत में इन दिनों दो ही नामों की चर्चा है। एक तरफ अपने छत्तीसगढ़ के लाड़ले ललित शर्मा की, जो पहले छत्तीसगढ़ से अचानक गायब होकर दिल्ली पहुंच गए और वहां पर ब्लागर सम्मेलन में लोगों का दिल लुटने के बाद ऐसे फरार हुए हैं कि उनको खोजने के लिए 111 मुल्कों की पुलिस को सुपारी दे दी गई है। इधर एक और नाम का जलजला आया हुआ है। अब ये जलजला कौन है कोई जलजला ही बता सकते हैं। लेकिन राजीव जी शायद इसके बारे में कुछ बता रहे हैं तो चलते हैं आज की चर्चा की तरफ- 
 
 
इंटरनेशनल दिल्‍ली हिन्‍दी सम्‍मेलन ब्‍लॉगर : दिल्‍ली वालों का दिल लेकर फरार हुए ललित शर्मा (भाग-3) पढ़ने तथा चित्र देखकर इनाम पाने के लिए प्रश्‍नों के उत्‍तर देने के लिए क्लिक कीजिए।
 
मैंने अपनी पोस्ट पर स्टार ब्लॉगर को न्योता देने का ज़िक्र तो किया था...लेकिन नाम नहीं खोला था...नाम *किशोर अजवाणी* भाई ने खुद ही पहले मेरी पोस्ट पर कमेंट के ज़रिए और फिर अपनी पोस्ट पर खोला...जी हां, वो स्ट...
 
26 मई 2010 को हरिभूमि, फरीदाबाद-दिल्ली संस्करण में पिछले रविवार *नांगलोई में हुए हिन्दी-ब्लॉगर्स सम्मेलन का समाचार*
 
 
तन का क्या विश्वास रे जोगी तन तो मन का दास रे जोगी भगवे में भगवान बसे हैं जटा-जूट विन्यास रे जोगी उर्मिल पूछ रही लछमन से कौन दोष मम् खास रे जोगी जाम-सुराही छूट गये सब छूट गया अभ्यास रे जोगी सूरज, चंदा, ...
 
(ईमेल से प्राप्त हुआ है यह आलेख..) बी.बी.सी. कहता है........... ताजमहल........... एक छुपा हुआ सत्य.......... कभी मत कहो कि......... यह एक मकबरा है.......... प्रो.पी. एन. ओक. को छोड़ कर किसी ने कभी भी इस 
 
  तारीख २६ दिन बुधवार. जिन्दगी के रोज के ढर्रे के मुताबिक भिलाई से कर्तव्यस्थली राजनांदगांव आगमन. दोपहर के डेढ़ बज रहे थे, बड़ी बड़ी मूंछों वाले जनाब, "शेर सिंह" के नाम से संबोधित किये जाने वाले, 
 
करण समस्तीपुरी गाँव-घर में एगो फकरा बड़ा प्रचलित है, 'कबीर दास के उलटे वाणी ! आँगन सूखा, भर घर पानी !!' लेकिन जो कहिये कबीर दास का सब बाते अजगुत (अद्भुत ) होता था। जो बोल दिए उका अर्थ अद्भुत ही होगा।...
 
 
पुलिस के ज़ुल्म के किस्से सबने ही सुने हैं। उनकी कार्यप्रणाली पर भी अक्सर सवाल उठते रहते हैं। पुलिस का काम क़ानून व्यवस्था को बनाए रखना है। वो ऐसा करती भी है पर फिर भी उसकी छवि कोई खास अच्छी नहीं है। इसके दर...
 
आज दिल्ली को प्रदूषण रहित व हर तरह से साफ - सुथरा बनाने की कवायद युद्धस्तर पर चल रही है । ऎसे में दिल्लीवासियों को विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से सीख दी जा रही है तथा उनसे सुधरने की अपील की जा रही है ...
 
उफ़ यह गर्मी , उफ़ यह पसीना ।कहते हैं गर्मी के बारे में सोचने से गर्मी कम नहीं होती और पसीने के बारे में सोचने से पसीना बहना कम नहीं होता ।मैंने भी एक बार पसीने के बारे में सोचने की कोशिश की थी और बन गई 
 

पी.सी.गोदियाल बता रहे हैं- 26/11 के अपराधी बनाम मलियाना हाशिमपुरा के दोषी" - क्या यही उच्च सोच है ?
एक तरफ २६/११ का मुंबई हमला, जिसे एक विदेशी मुल्क ने बड़े ही सुनियोजित ढंग से इस देश पर किया था! और एक तरफ मई १९८७ का मेरठ साम्प्रदायिक दंगा, जिसकी शुरुआत कैसे हुई थी, उसका वर्णन उन दंगो के दौरान दी गई रिप...
 
ईश्वर ने इस संसार में जिसे अकेला बनाया है, धन-वैभव नहीं दिया है, सुख में प्रसन्न होने वाला और दुःख में गले लगा कर रोने वाला साथी नहीं दिया है, संसार के शब्दों में जिसे उसने 'दुखिया' बनाया है, उसके ...

पैरों की तकलीफ से वो चलती बेहाल। किसी ने पीछे से कहा क्या मतवाली चाल।। बी०पी०एल० की बात कम आई०पी०एल० का शोर। रोटी को पैसा नहीं रन से पैसा जोड़।। दवा नहीं कोई मिले डाक्टर हुए फरार। अब बीमार जाए कहाँ अस्पताल...
 
अब आपसे लेते हैं हम विदा
 
 
 
 
 
 
 
 
 

बुधवार, 26 मई 2010

शेरसिंह के मैंने पसीने छुड़ाए, अथ ब्लॉगर जनगणना- ब्लाग 4 वार्ता राजकुमार ग्वालानी

ब्लाग 4 वार्ता  का आगाज करने से पहले सभी ब्लागर मित्रों को राजकुमार ग्वालानी का नमस्कार- आएं मिलकर बांटते चले सबको प्यार 

दो दिनों तक हम चर्चा नहीं कर पाएं क्योंकि हम बाहर गए थे। आज फिर हाजिर हैं चर्चा लेकर। तो चलिए देखें कौन क्या कहता है-
 
 कल बात की थी *इंटरनेशनल दिल्ली ब्लॉगर्स मीट* तक पहुंचने की...बैठक की बेटवींस द लाइंस की...हां इस मीट में पुराने अजीज तो मिले ही मिले, कई नए दोस्तों से भी पहली बार रू-ब-रू हुआ...इन सभी दोस्तों का कल अपनी पो...
 
'परम शान्ति' या 'zen' अवस्था में पहुँचने के लिए सबके अलग अलग तरीके हैं. मेरा भी अपना तरीका है, इश्वर को ढूँढने का, तन मन से शांत होने का. ये और बात है कि मैंने इसकी तलाश नहीं की कभी, अपितु परम ज्ञान की तरह ..

ख़ामख़्वाह  में किशोर बता रहे हैं- टीआरपी की एबीसी
मैंने सोचा था कभी टीआरपी की बात नहीं करूंगा। लेकिन इतने सारे लोगों को इसपर न जाने क्या-क्या बकते सुना तो अपनी सोच बदल दी। और सच बताऊं तो सोच बदली उन लोगों की वजह से जो हमारे बीच के ही हैं यानी टीवी न्यूज़ .
 
रोज-रोज की बिजली पानी की चकचक देखकर हालत खस्ता हो जाती है। अधिकारियों को फोन करो तो मोबाइल बजता ही रहता है पर कोई उठाता नहीं है। सारे अधिकारियों को आदेश हैं कि सरकारी मोबाइल बन्द न किये जायें सो वे बन्द.
 
जीवन के पदचिन्ह में सुधीर कर रहे हैं- मृत्यु से अनुरोध
शरणाकांक्षी अंतर्मन आहात देह खंडित दीप च्युत नेह रह रहकर गिरता मन ज्योति दण्डित तम सघन नयन स्थिल मेधा विकल प्रतीक्षारत विभा रवि विह्वल आलंबनाकांक्षा अलिंगनानुरोध श्वांस समर्पण जीवन प्रतिरोध पाप-...
 
उमड़त घुमड़त विचार में सूर्यकान्त गुप्ता बता रहे हैं- गिरना
गिरना गिर कर सम्हलना, सम्हल के उठना नामुमकिन नहीं है मगर गिर गए कहीं दुनिया की नजरों से ऐसे गिरे हुए को उठाना मुमकिन नहीं है यदि सोचते हैं, दुनिया से उठ जाना बेहतर होगा तो उठ तो जाओगे, मिलेगी जन्नत या ...
 
जैसा कि कल की पोस्ट में बता चुका हूं कि बहुत से साथी ब्लोग्गर्स ने ब्लोग्गर्स के किसी भी संगठन को लेकर उपस्थित बहुत से साथी ब्लोग्गर्स ने अपनी बातों को बेबाकी से रखा और ये बात सामने आई कि बिना उद्दे...
 
गीताश्रीपिल का खेल सबको समझ में आ गया है। इनका बहुत बड़ा बाजार है। इसने औरतों को टारगेट किया। पुरुषो ने अपने स्पर्श के आनंद के लिए औरतो को गोली ठुंसाई। वे कंडोम को अपनी राह का रोड़ा मानते हैं। इसीलिए औरतो को...
 
दुल्हे को कार चाहिए थी..लेकिन उसकी डिमांड पूरी नहीं हुयी तो वह उस समय फरार हो गया जब उसकी बारात जानी थी... अब लड़की वाले मुसीबत में फस गए..वे न तो दुल्हे की मांग को पूरा कर सकते थे और न ही शादी केंसिल कर स...
 
आज हमारे गाँव में जनगणना का प्रथम चक्र प्रारम्भ हुआ। नए प्रावधान के अनुसार हम 4 प्राणियों को फॉर्म 2 में प्रवेश दे सदा सदा के लिए हमारी जड़ काट दी गई। मुझे आज दुहरा दु:ख है - जड़ से कट जाने का कम और गाँव ज...
 
आपको नहीं लगता कि हमारे प्रधानमंत्री के पास अब बोलने के लिए भी कुछ नहीं बचा? जो इंसान खुद दूसरों की कृपा पर निर्भर हो , वह देश को क्या ख़ाक आत्मनिर्भर बनाने के सपने दिखाएगा? वे कहते है कि मैं तो रिटायर नहीं...
  
मन व्याकुल हो रहा क्या होगा नाथ !जुए में जब हारे पत्नी आई बेलन ले साथ !! दुशासन बोला क्षमा करो हमको,यह कलयुगी द्रौपदी हो मुबारक तुमको ! पत्नी बोली पीछा नहीं छोड़ूंगी भइए,लौटाओ सब इनसे जीते हुए रुपइए !! ********************************************अगर
   
एक आदमी नशे की झोंक में रास्ते में एक भैस से टकरा गया और धीरे से बोला " माफ़ करना देवी जी गलती हो गई " . राहगीरों ने कहा - भाई तुम भैस से टकरा गए थे . थोड़ी देर बाद वह शराबी एक मोटी औरत से टकरा गया फिर वह जोरो से बोला - माफ़ करना लोग न जाने क्यों भैसों को
  
एक दिन अचानक कप्तान साहब गुस्से-गुस्से में सरप्राईस चेक हेतु एक थाने में गुस गये और "सरप्राईस चेकिंग" करने लगे, थानेदार भौंचक्का रह गया ... सोचने लगा आज तो नौकरी गई ... फ़ाईल-पे-फ़ाईल ... पेंडिग-पे-पेंडिग ... शिकायत-पे-शिकायत ... कप्तान साहब भडकने लगे ...
  
दिल्ली उच्च न्यायालय ने 2जी स्पेक्ट्रम की ब्रिकी में केंद्रीय संचार मंत्री ए राजा की कथित भूमिका की सीबीआई द्वारा की जा रही जांच पर निगरानी करने से मंगलवार को इनकार कर दिया। अदालत ने इस संबंध में दायर आग्रह याचिका को खारिज कर दिया है।यह मामला 2008 में
  
आज शाम भारत से एक फोन आया जिसने अन्दर तक हिला दिया. उम्मीद नहीं थी कि अपने ही परिवार के कुछ करीबी रिश्ते इस मोड़ पर आ जाएँगे जहाँ दर्द ही दर्द है. रिश्ते तोड़ने जितने आसान होते हैं उतना ही मुश्किल होता है उन्हें बनाए रखना. पल नहीं लगता और परिवार बिखर
 
अब आपसे लेते हैं हम विदा
 लेकिन दिलों से नहीं होंगे जुदा 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 

रविवार, 23 मई 2010

ब्लागर मिलन-अच्छा है चलन- ब्लाग 4 वार्ता राजकुमार ग्वालानी

वार्ता का करने से पहले आगाज- सबको राजकुमार ग्वालानी का नमस्कार
 
अपने ब्लाग जगत में एक अच्छी बात है कि अब लगातार ब्लागर  मिलन होने लगे हैं। आज दिल्ली में ब्लागर मिलन हो रहा है तो ब्लाग इसकी खबरों से अटे पड़े हैं। तो इससे पहले की ब्लागर मिलन में क्या हो रहा है कि खबरें आएं देखें कि इसके पहले किसने क्या फरमाया है।

[image: image] एक छोटी सी ब्लागर मीटिंग आज भी हुई उसी स्थान पर जहाँ कल हमें मिलना है मैं यानि कौन? (मैं तो रहूँगा मौन) संगीता पुरी और राजीव तनेजा मिले, मिलते ही हम खिले. आपको भी निमंत्रण है चलि...
 
इस नोटों की गड्डियों को हटाकर आयोजन स्‍थल की तैयारी की जानी है। इन सभी को लादकर रेलवे वैगन तक पहुंचाने के लिए ट्रक आमंत्रित हैं। अपने अपने ट्रक लेकर सुबह ही पहुंच जायें। एक कार भरके नोट बतौर पारिश्रमिक द..

आज भारी मन के साथ ये पोस्ट लिखनी पड़ रही है...दिल्ली में पहले भी ब्लॉगर्स मीट हुई हैं...*अजय कुमार झा और अविनाश वाचस्पति जी *के अथक प्रयासों से हर बार जमकर दिलों की महफ़िल जमीं...औरों की कह नहीं सकता, मैंन...
 
बिगुल - में राजकुमार सोनी  बता रहे हैं- विवाद के बाद दिल्ली का ब्लागर सम्मेलन
दिल्ली में होने वाले ब्लागर सम्मेलन ने सबकी जिज्ञासाएं बढ़ा दी है। सम्मेलन की जवाबदारी अविनाश जी ने ली है। ब्लाग जगत के जितने भी मूर्धन्य है वे सभी अविनाशजी का बड़ा आदर सम्मान करते हैं इसलिए यह भी माना जा ...
 
Bhaskar.Com कर्नाटक में शनिवार की सुबह हुए विमान हादसे में कई लोग काल के ग्रास बन गए। करीब 160 से अधिक लोग मारे गए हैं। अब जांच होंगी, रिपोर्ट आएगी और किसी को जिम्मेदार ठहरा कर सब भूला दिया जाएगा। लेकिन ...
 
तमाम लोग हवाओं से बात करने लगे वे कल्पना के परिंदों को मात करने लगे जो शत्रु थे, वो लड़े युद्घ सामने आकर हमारे दोस्त ही, पीछे से घात करने लगे* छत्तीसगढ़ की राजनीति में कभी शुक्ल बंधुओं का दबदबा था कहा जाता ...
 
पहले मुर्गी आई कि अंड़ा यह सवाल वर्षों से लोगों को सर खुजलाने पर मजबूर करता रहा है। अपन इस पचड़े में ना पड़ आज सिर्फ अंड़ों की बात करते हैं जो अपने-आप में बहुत सारे अजूबे समेटे रहते हैं। कुछ सालों पहले एक वै...
 

आज, 22 मई को ना जादू ना टोना, पास पड़ोस, पुरातत्ववेत्ता , आलोचक वाले शरद कोकास की 22वीं वैवाहिक वर्षगांठ है। कोकास दम्पत्ति को बधाई व शुभकामनाएँ वैसे, आज आज अरूण अरोरा 'पंगेबाज' का जनमदिन भी है *आने...
 
दुर्योधन को यज्ञ में सब ब्राह्मण दुष्ट ही दुष्ट दिखाई दिए और धर्मराज को सब भले ही भले, यही अंतर था दोनों में........... - हरिभाऊ उपाध्याय 
 
जी हाँ, मेरे द्वारा कही गयी अब तक की सबसे लम्बी ग़ज़ल.. इससे भी लम्बी ग़ज़ल किसी न किसी ने ज़रूर कही होगी. उसकी मुझे जानकारी नहीं है.न में कोई कीर्तमान ही रचने का दावा कर रहा हूँ. मैं तो केवल अपना एक सुख आप ...
 
आज सत्संग में तीन चार लोग ही बैठे है .गुरुदेव के आने पर सभी ने गुरुदेव को प्रणाम किया .ध्यान केंद्र बूढ़ापारा रायपुर में गुरुदेव की निवास की दूसरी मंजिल पर है . अभी यहाँ दूसरा कूलर लगने से गर्मी कम लग रही...
  
ब्लॉग में संवाद की बहुत बड़ी भूमिका है. ब्लॉग में संवाद को बढावा देने के लिए चेट बार का प्रयोग लिया जा सकता है. अब अपने ब्लॉग पर चेट बार लगाना बहुत आसान हो गया है. मैं भी चेट बार का प्रयोग करता हूँ. इससे आपके पाठक सीधे आपके संपर्क में आ जाते हैं.
  
 आज मैं बात करने जा रहा हूँ भारतीय चुनाव आयोग के सहयोग कि जो मुझे मिली है, और शायद ही किसी को इतनी आसानी से और मुफ्त में मिलती है. मैं बात कर रहा हूँ चुनाव आयोग के द्वारा दिए गाए पहचान पत्र की. बड़े ही अरमानों के साथ मैंने भी अपना नाम वोटरों की
  
 
  
भारत शासन अधिनियम की धारा 229 (1) में उच्च न्यायालय स्थापित करने की शक्ति प्रदान की गई थी। इस शक्ति का प्रयोग करते हुए मध्य प्रान्त के लिए नागपुर में उच्च न्यायलय स्थापित करने हेतु 2 जनवरी 1936 को लेटर्स पेटेंट जारी किया गया। नागपुर उच्च न्यायालय के गठन,
 
मैं पहले ब्लौगिंग की प्रकृति को समझना जरूरी समझता हूँ फिर हिंदी ब्लॉगिंग की बात करूंगा.. ब्लॉग लिखने वाले सभी व्यक्ति जानते होंगे कि ब्लॉग शब्द "वेब लॉग" को जोड़कर बनाया गया है, और इसमें आप जो चाहे वह लिख...
 
रिश्ता रिश्तों से घबराएविषबेल खेत को खाए हैबाहर से आकर क्यूं कोईमन बीज वहम के बोए हैतेरे अपने ना समझे जोजानेंगे पीर पराई वोचुग्गे संग जाल बिछा न होकंचन हिरण सी छलना न होमन की कोई कमजोरी क्यूंमजबूत नींव दरकाए हैबम से मरे एक बार मरेजीवित हर पल सौ बार
 
 अब आपसे लेते हैं हम विदा
 लेकिन दिलों से नहीं होंगे जुदा
 
 
 
 
 
 
 
 
 

शनिवार, 22 मई 2010

लैला, ओ ऐसी तू लैला..काली दुनिया का नंगा सचः- ब्लाग 4 वार्ता राजकुमार ग्वालानी

  सबको राजकुमार ग्वालानी का नमस्कार 

एक अपने फिरोज खान की लैला थी जीतन अमान जो कुर्बानी में नजर आई थीं और एक अपने ऋषि कपूर की लैला थीं रंजीता जो लैला-मंजून में दिखी थी, लेकिन अबकी बार आई लैला तो सबकी है। लेकिन यह ऐसी लैला है जो प्यार नहीं कहर बरसाती है। प्यार पाने के लिए भटकने वाले कैसे काली दुनिया में पहुंचते है इसका नंगा सच जानना होगा। तो चलिए देखें आज की वार्ता में कौन कैसा सच बता रहा है- 
वे सब प्रियंका,करीना, कैटरीना और दीपिका बनने के लिए ही घर से बाहर निकली थी, लेकिन लंपटों की फौज उनके पीछे लग गई। किसी ने कहा कि वह उसकी जिन्दगी संवार सकता है तो किसी ने यह कहकर फुसलाया कि बस एक एलबम कर लो...
इसे व्‍यक्तिगत बुलावे की मान्‍यता प्रदान करें। यह सिर्फ सूचना है। जिसमें ब्‍लॉगर समुदाय के सभी सक्रिय, निष्क्रिय, टंकी धारक, बेटंकी ब्‍लॉगर सभी आमंत्रित हैं। पूर्ण विवरण के लिए नुक्‍कड़ की पोस्‍टें दे...
सबसे पहले तो आदरणीय गुरुद्वय श्री समीरलाल जी "समीर" और डाँ. अमर कुमार जी को सादर परणाम, जिनके आशीर्वाद से आज यह पोस्ट लिखने का अवसर आया है. और उसके बाद प्रिय बहणों, भाईयों, भतिजियों और भतीजों को घणी रामराम...
वह दुबला पतला और एक पैर से अपाहिज था..लेकिन एक ऐसे शातिर गैंग का सदस्य था जो यूपी सहती पुरे एनसीआर में लूटपाट कि वारदातों को अंजाम देता था...इस गैंग में अपाहिज मनवीर उर्फ़ मुखिया का रोल भी मुख्य ही होता था...
 लैला,ऐसी लैला!!



पी.सी.गोदियाल कहते हैं- कल रात को मैं कुछ लिख न पाया !
*मुझको मेरी रहमदिली ने सताया, कल रात को मैं कुछ लिख न पाया ! धीमी- आहिस्ता शाम ढल रही थी, मेरे सामने इक शमा जल रही थी ! * *तभी फिर वहाँ एक परवाना आया, कल रात को मैं कुछ लिख न पाया ! पतंगा कोई एक गीत गा 
माओ के जमाने में 'किसान सैनिक' आदर्श हुआ करता था। माओ का उस जमाने में कहना था कि सीखना है तो कामरेड ली फेंग से सीखो। वही 'किसान सैनिक' का आदर्श था। इसी 'किसान सैनिक' को आधार बनाकर चीनी नैतिकता का सारा तामझ...
  
बस एक लफ़्ज़-ए-सदाक़त ज़बां से क्या निकलाहर एक हाथ का पत्थर मेरी तलाश में है...जो लोग बात-बात पर 'क़ुरआन' की बात करते हैं और इस्लाम की दुहाई देते हैं... वही लोग कितने गिर चुके हैं... इसकी मिसालें ब्लॉगवाणी पर दिखने वाली तथाकथित 'मुसलमानों' की पोस्टें
  
शेखपुरा- हत्यारे के पास यदि पैसा हो, बिहार की पुलिस उसे आराम से घर जाने दे सकती हैं। ऐसा ही एक नजारा देखने को मिल रहा है जिले के मेहूस गांव में। मेहूस गांव में डीलर रामानन्द सिंह जब अपने साथियों के साथ गांव के चौपाल पर बैठे थे तभी एक टरक तेज गति से
  
जी ,सचमुच इंसान अब भगवान हो गया .वैज्ञनिकों ने प्रयोगशाला में जीव बना लिया .कुदरत के धंधे को अपनाकर उसे बेरोजगार करने की दिशा में बढ चला ...और यह कारनामा दिखाया है मानव जीनोम को अनावृत करने वाले क्रैग वेंटर की टीम ने ....विश्वप्रसिद्ध विज्ञान जर्नल साईंस
21 मई 2010 को डेली न्यूज़ एक्टिविस्ट के साप्ताहिक स्तंभ 'ब्लॉग गुरू' में स्वप्नलोक, यायावर, अमीर धरती गरीब लोग, बिगुल, जन गण मन, यारों की महफिल का उल्लेख करते हुए नक्सलवाद की समस्या पर एक लेख 
http://www.janatantra.com/news/2010/05/19/a-comment-on-hinduism-of-hindus/#comments छम्मकछल्लो की समझ में नहीं आता कि वह अपने ही धर्म के भाई लोगों को क्या कहे? भाई लोग कहते हैं कि वे सच्चे हिंदू हैं, नारे भ...
यकीन करो मुझे तुम्हारी बहुत याद आती है...कई बार तो इस बेतरह कि ऑफिस में बैठे आँखें भर आती हैं अचानक से. पर ये पिछली ऑफिस कि तरह नहीं है कि बाइक उठाये और मिलने चल दिए. ५ मिनट में तुम्हारे ऑफिस के नीचे खड़े है...
कल गुरुवार को सत्संग में गुरुदेव के साथ मै ,अतुल ,पिंकू सिर्फ तीन ही लोग थे .हम लोग रात में थोडा देर से ध्यान केंद्र पहुचे .सभी का वर्किंग डे होने के कारण सभी कम निपटा कर फ्री होने में थोडा जायदा समय लग...

शादी-विवाह का सीज़न चल रहा है आजकल। अक्षय तृतीया के रोज से ही खूब जोर शुरू हो गया है शादियों का। कहीं बारात ले जाने की तैयारी चल रही है तो कहीं बारात स्वागत् की। इन सबको देखकर याद आया कि चौंतीस साल पहले हम...
अब आपसे लेते हैं हम विदा

शुक्रवार, 21 मई 2010

‘बुलेट’ वाले ‘बैलेट’ से क्यों लड़ेंगे दिग्गी राजा?, वाह !! मर्दानगी...जिंदाबाद.- ब्लाग 4 वार्ता राजकुमार ग्वालानी .

 
 
ब्लाग 4 वार्ता  का आगाज करने से पहले सभी ब्लागर मित्रों को राजकुमार ग्वालानी का नमस्कार
 
आज सोच रहे हैं कि कुछ भी ज्यादा न लिखते हुए सीधे चलते हैं चर्चा की तरफ....
 
 
अमीर धरती गरीब लोग में अनिल पुसदकर कहते हैं-‘बुलेट’ वाले ‘बैलेट’ से क्यों लड़ेंगे दिग्गी राजा?
हरा - भरा बस्तर निर्दोष लोगों के खून से लाल हो रहा है और नेताओं में वाक्युद्ध चल रहा है। और इसमें बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहे हैं दिग्विजय सिंह उर्फ दिग्गी राजा! वही दिग्विजय सिंह, जो सालों बस्तर समेत पूरे छत्ती...
 
आलोक स्तम्भ में यही कहा जा सकता है कि उसने बहुतों की बलि दे दी
हम उपदेश सुनते हैं मन भर, देते हैं टन भर पर ग्रहण करते हैं कण भर - अलजर जो आदमी बिना आप पूरा हुए दूसरों को उपदेश देता है वह बहुतों का गला काटता है; पर जो आप पूरा होकर दूसरों को शिक्षा
 
हमारे मंत्र और श्लोक इत्यादि अपने में गुढार्थ लिए होते हैं। इनका उपयोग करने की शर्त होती है कि इनका उच्चारण शुद्ध और साफ होना साहिए। बहुत कम लोग ऐसे मिलते हैं जो उन्हें पढने या जाप करने के साथ-साथ उसका 
 
 
जानते हो !! वह घोषित चरित्रहीन है, क्योंकि : वो किसी को अपने पास फटकने नहीं देती, ईट का जवाब पत्थर से देती, तुम्हें आईना दिखा देती है, हर बार तुम हार जाते हो, अपनी ही नज़र में गिर जाते हो, फिर ऊपर उठने 
 
 गरमी की दुपहर की अपनी सुन्दरता होती है। आज मुझे एक गुजरा दौर याद आ गया। गाँव में तब संयुक्त परिवार थे और लोग डट कर खेती करते कराते थे। सिंचाई के लिए धनिक पट्टिदारों ने पक्की नालियों का जाल बनवाया था जो जमी...
 
बिगुल -  में राजकुमार सोनी बता रहे हैं- दो अनिवार्य कविताएं
*एक प्रार्थना* *शहर फट पड़ा बम के धमाकों से बाजूवाला शहर भी फटा* * फिर... बाजूवाला* * ईश्वर मुझे तुम्हारा नहीं बाजूवाले का साथ चाहिए* * * *बौने हाथ दिल की जमीं पर* *नफरत का यूरिया और फिर देखिए सांप-बिच्...
 
गिरीश पंकज  सुना रहे हैं- नई ग़ज़ल/ आंकड़ों में मुल्क ये खुशहाल लगता है
आंकड़ों में मुल्क ये खुशहाल लगता है * *पर हकीकत में बहुत कंगाल लगता है * *अब यहाँ आलोचनाएँ कौन सुनता है* *सच तनिक-सा बोलिए मुंह लाल लगता है* * * *झूठ की बुनियाद पर हैं कुरसियों के घर * *सत्य 
 
 
 
राजीव तनेजा*** [image: lathmar2] “ठक्क- ठक्क”…. “ठक्क……ठक्क- ठक्क”…. “आ जाओ भाई…आ जाओ…यहाँ तो खुला दरबार है…कोई भी आ जाओ"… “नमस्कार!…गुप्ता जी….कहिये अब तबियत कैसी है आपकी?”… “मेरी तबियत को क्या ...
 
"नमस्कार लिख्खाड़ानन्द जी!" "नमस्काऽर! आइये आइये टिप्पण्यानन्द जी!" "लिख्खाड़ानन्द जी! अभी हाल ही में हमने एक पोस्ट पढ़ी 'हिन्दी ब्लोगर्स - गूगल खोज परिणाम के अनुसार'। हमने सोचा कि लगे हाथों आपके भी गूगल खोज...
  
चल रहा प्रवचन वहांदिख रहा एक पंडाल घर सूना सूना पाके,खुश होवे चोर चंडाल  देखता हूँ बहुत बड़ा पांडाल लगा हुआ है.  प्रख्यात प्रवक्ता, संत शिरोमणि, धारा
  
बात देश की राजधानी दिल्ली की है... और कई साल पहले की है... एक मुस्लिम लड़की और एक हिन्दू लड़का विवाह करना चाहते थे, लेकिन मज़हब उनकी राह का रोड़ा बना हुआ था... लड़की के पिता के कुछ मुस्लिम दोस्त मदद को आगे आए... उन्होंने लड़के से कहा कि उसे लड़की से विवाह करना
  
वेशभूषा और पास पड़े बैग से वह कॉलेज की छात्रा प्रतीत होती थी। वह अपनी स्कूटी से गली से मुख्य सड़क पर पहुँची ही थी कि पीछे से तेजी से आने वाले मिनी ट्रक और एक सवारी बस की आगे निकल जाने की होड़ की शिकार बन गयी। बस के पिछले हिस्से से लगी सीधी [...]
  
उलझनें जिंदगी की बढ़ती ही जा रही हैं जैसे इनके बिना जीना दुश्वार हो उलझनें हों तभी प्रेम की कीमत सुलझन की कीमत पता चलती है क्यों इतने बेकाबू हो जाते हैं कुछ पल कुछ क्षण अपनी जिंदगी के कुछ बेहयाई भी छा जाती है पर फ़िर भी इम्तिहान खत्म नहीं होता कहीं झुरमुट
  
अब किसी पड़ोसी को इस बात की शिकायत नहीं होगी कि उसने छत पर सूखने के लिए टंगे कपड़ों को खींचकर ज़मीन पर गिरा दिया , कि उसने उनके कमरे के सामने पोटी या सुसु कर दी, अब किसी को छत पर जाने से भौंक-भौंककर कोई नहीं रोकेगा… अब मुझे भी रात में दो बजे [...]
 
 
 
 
 
 
 
अब आपसे लेते हैं हम विदा
 लेकिन दिलों से नहीं होंगे जुदा 
 
 
 
 
 

 
 

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