बुधवार, 16 जून 2010

तीन टाँग का कौआ,बैल बाजार,थानों की हक़ीक़त,गाँव-गाँव गौशाला----ब्लाग4वार्ता

नमस्कार मित्रों, कल रात मानसून की पहली बरसात हुयी और हम जी भर के भीगे। शहर से घर के लिए चले थे तो आकाश में बस बादल छाए हुए थे। जब 5किलोमीटर चल लिए तब बरसात प्रारंभ हुयी फ़िर पूरे 22किलोमीटर भीगते हुए आए। बड़ा मजा आया, मानसून की पहली बरसात में भीगना आनंददायक रहा। आज से स्कूल भी प्रारंभ हो रहे हैं। बच्चों में भी स्कूल जाने के लिए उत्साह है, अब चहल-पहल प्रारंभ हो चुकी है। अब चलिए मेरे साथ आज की ब्लाग वार्ता पर, लेते हैं कुछ चिट्ठे...........

खुशदीप सहगल जी का मक्खन आज संगीता पूरी जी के ब्लाग पर पहुंच गया है, क्यों और कैसे ये आप देखिए खुशदीप सहगल जी का मक्‍खन .. आज मेरे ब्‍लॉग पे मक्‍खन पहली बार शहर जा रहा था , मक्‍खनी को भय था कि वहां मक्‍खन बेवकूफ न बन जाए, क्‍यूंकि उसने सुना था कि वहां के लोग गांववालों को बहुत बेवकूफ बनाते हैं' 'शहर से लौटकर मक्‍खन ने बताया कि वो खामख्‍वाह ही उ...राजकुमार सोनी जी को मिला है एक मुडा-तुडा नोट.. एक मुडा-तुडा पांच का नोट शायद आपके किसी काम न आए लेकिन मेरे लिए इसकी अहमियत थोड़ी ज्यादा है * *नौकरी को अपनी माशूका बनाने के लिए जब मैं भागता रहा एक दफ्तर से दूसरे दफ्तर तब..... तब एक मुडा-तुड़ा नोट ह...

कबाड़ खाना पर अशोक पांडे जी बता रहे हैं कि सारे पेड़ भागते हैं मेरे पीछे नंगे पांव ...आज सुबह आपने निज़ार क़ब्बानी की कुछ छोटी छोटी प्रेम कविताएं पढ़ीं. उसी क्रम को बढ़ाते हुए अब पेश हैं इसी कवि की प्रेम कविताओं की अगली किस्त. मैं उम्मीद करता हूं यह इन प्रेम कविताओं की आख़िरी किस्त नहीं होगी....संजय भास्कर जी कह रहे हैं छोटे मांगे तो भीख बड़ा मांगे तो चंदा है ........!! लोकल बस से उतरते ही जैसे हमने एक दोस्त से माचिस मांगी , हाथ बढ़कर , कर देख रहा था एक भिखारी उसने भी हाथ पसार दिए हमने भाषण झाड़ते हुए कहा *' भीख मांगते हुए शर्म नहीं आती ' ?* वह बोला .... मगर भिखमंगा ...

कौशल तिवारी जी खरी खरी कह रहे हैं वेदांता की दादागिरी,गैस त्रासदी पर न्याय? न्याय प्रणाली को लेकर इन दिनों पूरे देश में बहस चल पड़ी है। प्रक्रिया से विलंब होते फैसले ने नैसर्गिक न्याय के सिध्दांत को तो पीछे छोड़ा ही है आम लोगों का विश्वास भी तोड़ा है। पिछले दिनों न्यायालय के दो फैसले ऐ...कल अवधिया जी बहु्त खुश दिखाई दे रहे हैं क्योंकि कल हमारे नापसन्दीलाल छुट्टी पर थे जब कोई वस्तु अनायास ही उपलब्ध हो, और वह भी मुफ्त में, तो उस वस्तु का उपयोग करने की इच्छा जागृत हो ही जाया करती है। ब्लोगवाणी ने भी हम सभी को नापसन्द वाला बटन उपलब्ध करवाया हुआ है; और वह भी बिल्कुल मुफ्त मे...

अरविंद झा जी क्रांति दूत पर बता रहे हैं गुलामी. वह गुलाम है लेकिन उसकी मानसिकता नहीं. क्या हो गया जो उसने दो वक्त की रोटी के लिये ठाकुर से कुछ रुपये उधार ले लिये, इसके बदले में ठाकुर ने भी तो उसकी जमीन गिरवी रख ली थी.दो दिनों से उसका बेटा बीमार था कैसे ...उपदेश सक्सेना जी कह रहे हैं गैस ने बिगाड़ा महंगाई का हाज़मा. भोपाल गैस कांड पर आये फैसले ने एक और जहां देश भर की जनता जो उद्वेलित कर दिया है वहीँ केन्द्र सरकार को इसने एक बड़ी राहत भी दी है. देश में महंगाई ने एक बार फिर नई ऊँचाईयों छ...

दिलीप कह रहे हैं दिल की कलम से आसमान से टूटा तारा...आँख से टूटी पलक....और इंसान की फितरत... अक्सर सोचता हूँ जब भी तारा टूटता है या पलक का बाल टूट कर गिरता है...तो हम कुछ मांगते क्यूँ है...उसी सवाल का जवाब जो सोच पाया वही है ये रचना...पुरानी है...थोड़े संपादन के साथ... नभ के दामन से कल इक सिता... गोदियाल जी अंधड़ पर कह रहे हैं मन की ! बात, आप सुनिए,आजकल यात्रा एवं अत्यधिक व्यस्तता की वजह से अपने ब्लॉग के लिए कुछ लिख पाने में असमर्थ हूँ , फिर भी जब भी वक्त मिलता है कंप्यूटर खोल टिपियाने बैठ जाता हूँ ! इस टिपियाने और ब्लॉग जगत का विचरण करने का भी अपना ...

जापानी मौसी ले आई है तीन टाँग का कौआ अब दक्षिण अफ्रीका में FIFA (फ़ेडरेशान इंटरनेशनेल डी फुटबॉल एसेसिएशन) वार्ल्ड कप कल रहा है। फुटबॉल जापन में बेसबॉल के बाद सब से दूसरे लोकप्रिय खेल है। 2002 के वार्ल्ड कप, जापान और दक्षिण कोरिया, दोनों देशों ...कासे कहुं पर कविता जी महेश्वर यात्रा कर आई हैं, उनके अनुभव में आप भी शरीक हों,छुट्टियों में कही जाने का कार्यक्रम नहीं बन पाया तो सोचा चलो एक दो दिन के लिए महेश्वर ही हो आया जाये.वैसे मालवा की गर्मी छोड़ कर निमाड़ की गर्मी में जाना कोई बुध्धिमात्तापूर्ण फैसला तो नहीं कहा...

गि्रीश पंकज जी का गीत सुनिए हर घर में हो एक गाय और गाँव-गाँव गौशाला ... गाय... कहने को मनुष्येतर जीव है. लेकिन देखा जाये तो वह अपनी माँ से बढ़कर है. माँ का दूध हम दो साल तक पीते हैं लेकिन गाय कादूध जीवन भर. गाय से बनी चीज़ें भी हमारे साथ जीबव भी चलती है,. दही, मठा, छाछ, खीर, महिला थानों की हक़ीक़तबता रहे हैं डॉक्टर आशुतोष शुक्ला जीदेश में भ्रष्टाचार ने किस तरह से अपने पाँव पसार रखे हैं और किसी भी अच्छे काम को किस तरह से पलीता लगाया जाना है इसका ताज़ा उदाहरण सीतापुर जनपद मुख्यालय पर स्थापित महिला थाने में देखने को मिला. जनवरी माह में ...

देखिए-ब्लागर पहुंचे बैल बाजार जुन का माह किसानों के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण होता है। इस माह में किसान अपने खेतों को चौकस करते हैं, मेड़ सुधारते हैं। खेतों में बिखरे हुए कांटों को चुनकर जलाते हैं ताकि फ़सल लगाने के मौके पर पैरों में न चुभ...कौन थी आशा थी तुम्हारी कौन थी आशा थी तुम्हारी जो अभी पानी थी याद कैसी थी हमारी जो नहीं आनी थी हमने क्या दखल दिया ,आप खुद ही आ बैठे बचके जो निकल गए , राह को ही ले बैठे साथ होने में बुराई भी नहीं मानी थी || याद कैसी .... मन में जब...

अब चलते-चलते एक कार्टून

 

 
वार्ता को देते हैं विराम-आप सभी को ललित शर्मा का राम-राम

7 टिप्पणियाँ:

जाते जाते मार लूँ एक नजर। फिर पकडू अपनी डगर्। देख लिया। सन्क्षिप्त लिन्क सुन्दरता के साथ्। पढूँगा आराम से। जय जोहार्………॥

अच्छे लिंक्स के साथ अच्छी चर्चा

बहुत बढिया चर्चा .. आभार !!

बेहतरीन। लाजवाब।

बढ़िया चिट्ठाचर्चा

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