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शनिवार, 25 फ़रवरी 2012

चांदनी चंचल चंचल..... ब्लाग 4 वार्ता.......संध्या शर्मा

संध्या शर्मा का नमस्कार... आज कल ब्लॉग पोस्ट कम ही लिखी जा रही है इसलिए फ़ीड भी कम आ रही है। जिस एग्रीग्रेटर पर 600 ब्लॉग लिंक है वहाँ 25-30 पोस्ट फ़ीड आ गयी तो बहुत है। कहने को तो 50000 ब्लॉग हैं। फ़ेसबुक का असर ब्लॉगिंग पर स्पष्ट दिखाई दे रहा है। ब्लॉग पर पाठकों की संख्या भी कम होते जा रही है। अलेक्सा रैंकिग में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है। ऐसी ही स्थिति रही तो गुगल भी अपनी मुफ़्त की इस सेवा को बंद कर सकता है। जैसे उसने पहले ही अपनी कई सेवाएं बंद कर ली। ब्लॉग जगत के लिए यह कठिन समय है अपने अस्तित्व को बचाने के  लिए जद्दोजहद करनी पड़ रही है। क्या ब्लॉगिंग के अवसान का समय आ गया है?…………अब चलते हैं वार्ता पर………प्रस्तुत हैं मेरी पसंद के कुछ लिंक………
 
निराले रिश्ते ...
भंवरे जैसा मन है उसका डोलता है वह गली-गली हर पुष्प से प्यार उसको पर समझी नहीं उसे पगली फ़ितरत उसकी बेवफ़ाई थी वो क्या किसी से वफ़ा करे दोस्त बनकर आया है तो दोस्ती का हक भी अदा करे आँसुओं का दर्द नही समझा ...
देर तक देखती रही...दूर तक देखती रही.....!!!
*यूँ ही इक दिन खिड़की से जाने किसे जाते,* *देर तक देखती रही....दूर तक देखती रही......* * * *ख्यालो में खोई थी या,* *खुद के अन्दर उठे सवालों में उलझी थी* *मन आवाज़ दे रहा था,* *पर मौन **खड़ी **अपलक खिड़की से...
लोग समय के साथ बदल जाते हैं...!
.कुछ एक ऐसे विम्बों को याद करते हुए जो वक़्त के साथ बदल गए कुछ इस तरह कि विश्वास की जड़ें हिल गयी... आहत मन से लिखी एक पुरानी कविता स्वयं को ही सांत्वना देने के लिए सहेज लेते हैं यहाँ...! लोग समय के साथ बदल...
.......कि बगल की कुर्सी पर
कैसी है ये यात्रा, कैसा है ये सफ़र, इधर और उधर, सिर्फ़ नए,अपरिचित चेहरे. कहीं बच्चों की कतार, कहीं सरदारजी सपरिवार, कोई खा रहा 'चौकलेट' कोई पी रहा सिगार, किसे दिखाऊँ उस औरत का जूड़ा, किसे दिखाऊँ उन महाशय की...
बादशाह मछेरा !
*मछेरे, तुमने * *अपना मत्स्य जाल,* *गुरुकाय व्हेल के ऊपर* *डाला क्यों था? * * * *जिन्न की रिहायश* *बोतल में होती है,* *यवसुरा* की शीशी से (*बीयर) * *निकाला क्यों था? * *बुजुर्ग फरमा गए * *कर्म के...
क्या कहूँ ......
स्नेह प्यार या कहूँ छलकता बरसता दुलार नदिया की लहरों सी मन बहकाती उमंगें हैं लाल हो या गुलाबी बड़ी हो या फिर छोटी ये बिंदिया तो बस तुम्हारी साँसों को ही निरख-निरख कर बस यूँ ही निखरती हैं सम्मोहक बि...
चंदन की चांदनी ...
*चंदन की चांदनी चंचल चंचल चमकीली ,चहूँ दिशायें नखरीली चौकाएं चरू लताएं चाहें चन्दन संग चिन्मय हो जाएँ चेह्चहाएं चुनिंदा चातक जब चकोर संग मिल जाएँ चुस्की लेती रात चाँद चाशनी उसकी ल...
मृत्यु के पहले अवश्य जी ले.....!!
** * * *मेरे प्रिय मित्रों ;* *नमस्कार !* *जब हम मृत्यु को प्राप्त होंगे , तब सिर्फ तीन ही प्रश्न विचारणीय होंगे :* * * *१. क्या हमने जीवन जिया * *२. क्या हमने प्रेम किया * *३. क्या हमने इस संसार कोकुछ वापस ...
मैं तेरे शह्र में बिलकुल नया नया हूं अभी, तेरे वादों के हवालात में बंधा हूं अभी। चराग़ों के लिये मंज़ूर है मुझे मरना, मुकद्दर आंधियों के तेग पर रखा हूं अभी। घिरी है बदज़नी से , हुस्न की गली गोया, लुटाने इश्क़ ...
विश्‍व पुस्‍तक मेले में ज्‍योतिपर्व प्रकाशन का हंगामा : प्रगति मैदान, नई दिल्‍ली में 27 फरवरी 2012 को 
आप आएंगे तो होगा नहीं आएंगे तो कैसे होगा कौन करेगा हंगामा करते हैं या तो पाठक या दर्शक लेखकों को करते हंगामा न देखा, न सुना हां, चाहेंगे जरूर और आएंगे जरूर सोमवार 27 फरवरी 2012 को सांय 3.00 बजे हॉल नंबर 6 ...
जीवन के इक मोड पर अच्छा हुआ तुम मिल गये कुछ कह लिया कुछ सुन लिया बोझ हल्का कर लिया यूँ ही साथ चलते चलते कुछ रास्ता भी कट गया पहचान क्या है मेरी पहचान क्या है तेरी तुम खुद ही गढो जानना ही चाहते हो तो मेरी आ...
कैसा रहेगा आपके लिए 24 , 25 और 26 फरवरी 2012 ?? 
मेष लग्नवालों के लिए 24 , 25 और 26 फरवरी 2012 को धन की स्थिति मजबूत होगी , इसे मजबूत बनाने के कार्यक्रम भी बनेंगे। संपन्न लोगों से विचार विमर्श होगा। ससुराल पक्ष का महत्व बढेगा , ससुराल पक्ष के किसी कार्...
उन दिनों तुम 
बहुत पहले इसी शीर्षक से एक कविता लिखी थी आज उसी कविता का दूसरा रूप प्रस्तुत कर रही हूँ http://kavita-verma.blogspot.in/2011/07/blog-post.html * * लौटते ही घर झांक आते थे हर कमरे , आँगन रसोई और छत पर मेरी...
अहसास, कि तुम मिलोगी, ये आभास, कि तुम मिलोगी, ये ख़याल, कि तुम होगी, और रोज़ की तरह, खिलखिलाती, मींच आँखे, सकुचाते, लजाते, यह कहोगी, नहीं थे आप, सूना था सब, फिर मन ही मन, खुश होना तुम्हारा , निहारना, और बिख...
* लंच की घंटी बजी, ** रमा ने सुरभि से पूछा आज टिफिन में क्या लाई है? * *सुरभि ने मुँह बनाकर कहा,"क्या होगा टिफिन में,वही रोज की तरह मम्मी ने घास-फूस रखा होगा. यार ऐसा खाना खाते-खाते मेरी तो भूख ही म...
चालाक कौन ?...
आज मैं बचपन में पढ़ी हुई एक बाल कथा प्रस्तुत कर रहा हूँ ।अक्सर हम यह सुनते हैं की लोमड़ी चालाक होती है मगर यह कहानी कुछ और ही कहती हैं । किसी जंगल में एक शेर और बहुत से जानवर रहते थे । एक दिन शेर ने बो.

अब लेते हैं आपसे विदा मिलते हैं, अगली वार्ता में, नमस्कार.....

गुरुवार, 23 फ़रवरी 2012

सूरज से बगावत और मैं धरती सी ……… ब्लाग 4 वार्ता....संध्या शर्मा

संध्या शर्मा का नमस्कार... वार्ता का सफ़र अरसे से मुसलसल जारी है,  देखने पर पता चला कि 602 वीं पोस्ट प्रकाशित हो चुकी है और आज 603 वीं पोस्ट है। इस खुशी के अवसर पर वार्ता की तरफ़ से आप सभी पाठकों, टिप्पणिकर्ताओं एवं वार्ता दल के सभी सहयोगियों को मेरी तरफ़ से हार्दिक शुभकामनाएं। सहयोग बनाए रखिए वार्ता का सफ़र जारी रहेगा…………अब चलते हैं आज की वार्ता पर…
 
साहित्य में संतई की राह... मेरे मनोभावों का अनवरत अथक प्रवाह बना रहता है. और फ़िर शुरू हो जाती है एक खोज - एक प्रयास - उन्हें बेहतरीन शब्दों का जामा पहनाने की. उन्हें कुछ इस तरह काग... 
मोहब्बत के रोजे हर किसी का नसीब नहीं होते ...........
जानती हूँ जीना चाहते हो तुम एक मुकद्दस ज़िन्दगी ख्वाबों की ज़िन्दगी हकीकत के धरातल पर सिर्फ़ और सिर्फ़ मेरे संग ………है ना लिखना चाहते हो सारी कायनात पर... 
खुशनसीब ..
*बैठती नहीं हर डालपर बुलबुल हर वृक्ष खुशनसीब नहीं होता करती नहीं कोलाहल हर बगीचे में बुलबुल हर बाग़ खुशनसीब नहीं होता खिलते नहीं हर गुंचे में गुल * * हर हार खुशनसीब नहीं होता मिलते नहीं नदिया के दो ...
आज के नेता...
आज के नेता... आज के नेता एक अरब लोगों को पागल बना रहे है अलग अलग पार्टी बनाकर हमे आपस में लडवाकर अपना मतलब निकाल रहे है, कर रहे है बड़े बड़े घोटाले रिश्तेदारों को टिकट दिला रहे है साले भ्रष्टाचार कर भर ...
ईश-व्यथा!
.दिखता भले नहीं, पर ईश्वर यहीं कहीं है! ये दृश्य का दोष नहीं... अगर हमारे पास दृष्टि ही नहीं है! एक भोली सी मुस्कान में वह है... कभी महसूस हुई थी जिसमें, उस ध्यान में वह है... ज़िन्दा है वह टूटती हुई सांसों...
ज़िंदगी के रंग .... हाइकु के संग
बच्चे का रोना खुशियों का खजाना मुबारक हो ********************* उनीदीं आँखे किलकारी उसकी सुकूं देती है . ***************** [image: Baby_walking : First steps Stock Photo] चलना सीखा हाथ थाम के ...
ऋतु फागुन की
आई मदमाती ऋतु फागुन की चली फागुनी बयार वृक्षों ने कियाश्रृंगार हरे पीले वसन पहन झूमते बयार संग थाप पर चांग की थिरकते कदम फाग की मधुर धुन कानों में घुलती जाए पिचकारी में रंग भर लिए साथ अबीर गुलाल ...
मै ना बांटूँ श्याम आधा आधा
यूँ तो वो सबके हैं मगर केवल मेरे हैं तभी कहता है इंसान जब पूरा उसमे डूब जाता है जैसे गोपियाँ … तुम केवल मेरे हो , आँखों के कोटर मे बंद कर लूंगी श्याम पलकों के किवाड लगा दूंगी ना खुद कुछ देखूंगी ना तोहे ...
ठहर गया उर ज्यों आकाश
ठहर गया उर ज्यों आकाश विरस हुआ जग से जब कोई स्वरस में डूबा उतराया, धीरे-धीरे उससे उबरारस कोई भी बांध न पाया !  जग से लौटा ठहरा खुद में स्वयं से भी फिर मुक्त हुआ, स्वयं ‘पर’ के बल पर ही टिकता मन इससे भी रि...
" गुनगुने आंसू ...."
बर्फ से गाल पे, लुढकी दो बूंदे, आंसुओं की, गुनगुनी सी | बन गई लकीर, नमक की | लोग कह उठे, चेहरे पे उसके, तो नमक है | मन की भाप, कितनी उठी होगी, कितनी सूखी होगी, तब शायद, बना होगा, नमक चेहरे पे | *गुनगुने आंस...
रंगीली दुनिया बेरंग क्यों लगती है ?
रंगीली दुनिया कभी बेरंग क्यों लगती है ? ज़िन्दगी इतनी छोटी है ,फ़िर लम्बी क्यों लगती है ? इंसान दयालु से हैवान कैसे बन जाता है ? कोई क्यों किसी को छोड़ कर चला जाता है ? .....अंत में सब शून्य ही क्यों दीखता ह...
सुखांतकी !
*इस रंगशाला के हम मज़ूर* *कोई कुशल, कोई अकुशल, * *कोई तन-मन से,* *कोई अनमन उकताया सा, * *निभा तो रहे किन्तु सब * *अपना-अपना किरदार !* *पर्दा उठते ही अभिनय शुरू * *और गिरने पर ख़त्म !!* *मगर कभी-कभी कम्व...
झाँक के देखो तो ज़रा
वक़्त की शाख से टूटे लम्हे टाँक के देखो तो ज़रा टूटी है कोई डोर झाँक के देखो तो ज़रा पीले पत्तों की खनक टोह के देखो तो ज़रा ठहर जाती है खिजाँ रोक के देखो तो ज़रा किस्मत को नकारा ढाँक के देखो तो ज़र...
वो सूरज से बगावत कर रहा है ...
कविता के दौर से निकल कर पेश है एक गज़ल ... आशा है आपको पसंद आएगी ... अंधेरों की हिफाज़त कर रहा है वो सूरज से बगावत कर रहा है अभी देखा हैं मैंने इक शिकारी परिंदों से शराफत कर रहा है खड़ा है आँधियों में...
किसी गांव में एक गरीब ब्राह्मण रहता था | ब्राह्मण गरीब होते हुए भी सच्चा और इमानदार था| परमात्मा में आस्था रखने वाला था | वह रोज सवेरे उठ कर गंगा में नहाने जाया करता था| नहा धो कर पूजा...
कहीं एक - २ आने का हिसाब मांग रही पैसा | कही खुद को संभाल पाने में असमर्थ है पैसा | कहीं भूखे बच्चे को रुलाकर सुला रही है पैसा | कहीं जश्ने जिंदगी पल - पल मना रही पैसा | कहीं झोलियाँ भर २ के खुशियां ...
मेष लग्नवालों के लिए 21 , 22 और 23 फरवरी 2012 बुद्धि ज्ञान के मामलों के लिए महत्वपूर्ण होंगे , संतान पक्ष के मामलों में महत्वपूर्ण निर्णय लिए जा सकते हैं। किसी सामाजिक कार्यक्रम में पिता पक्ष का महत्व दिख...
मैं धरती सी ……………… संध्या शर्मा  
जुगनु सा है जीवन मेरा क्षण में बुझती जलती हूँ मन भर प्रकाश फ़ैलाने नित जोत सी जलती हूँ सूरज ढलता पश्निम में ... 
ब्लॉगिंग का अपना एक *स्वभाव* है , उसकी अपनी एक* प्रकृति* है ( यह विषय फिर कभी ) इन सभी के बाबजूद ब्लॉगिंग करने के लिए कुछ बाते निर्धारित की जा सकती हैं .जिनके आधार पर हम *सफल और सार्थक *ब्लॉगिंग की और बढ...
 
अब लेते हैं आपसे विदा मिलते हैं, अगली वार्ता में, नमस्कार...

शनिवार, 4 फ़रवरी 2012

मिलना तो बस एक बहाना है...ब्लाग 4 वार्ता.......संध्या शर्मा

संध्या शर्मा का नमस्कार, पिछले एक माह से ब्लॉग4वार्ता पर मैने देखा है कि प्रतिदिन का ट्रैफ़िक 800 से 1200 हिट्स के बीच से चलता है।  लेकिन कमेंट बहुत कम आती है, जिनके लिंक लगाए जाते हैं वे भी कमेंट करने नहीं पहुचते। अपना लिंक देखकर चले जाते हैं। वार्ता के माडरेटर कहते है कि कमेंट की आवश्यकता नहीं, पर नए वार्ताकार के लिए तो कमेंट प्राणवायु का कार्य करते हैं। मेरी वार्ता पर कमेंट करने वालों के ही लिंक लगा करेगें। चाहे पाँच लिंक ही क्यों न लगे। अब चलते हैं आज वार्ता प्रस्तुत हैं कुछ मेरी पसंद के लिंक……………।

तुमसे मिलना तो बस एक बहाना है......
तुमसे मिलना तो बस एक बहाना है दिल के जख्मों को तुम्हें दिखाना है। कुछ इस कदर बिखरा है वजूद मेरा न कहीं ठौर और न कहीं ठिकाना है। ज़ज़्ब-ए-दुआ-ओ-ख़ैर कब की मर चुकी खंजर की नोक पे खड़ा ...
मेरा नाम
कभी कभी अन्दर से निकल कर जब मैं बाहर आ जाता हूँ तो स्वयं को पहचान ही नहीं पाता हूँ खो जाती है मेरी पहचान वो जो कभी तुमने कभी औरों ने दी मैं तो बस इसके उसके मुह को ताकता हूँ और गुजारिश ...
तुम श्याम देख लेना
*अँधेरे से जब मैं गुजरूँ तुम श्याम देख लेना ढूँढे से भी मैं पाऊँ जब कोई किरण कहीं ना तुम लाज मेरी रखना तपतीं हैं मेरी राहें साया न सिर पे पाऊँ जब घाम से मैं गुजरूँ तुम लाज मेरी रखना विरहन सी मैं...
कैना यानी कन्या। ध्यातव्य है कि छत्तीसगढ़ी कथा गीतों में स्त्री की उपस्थिति भरपूर है। स्त्री पात्रों को केंद्र में रखकर गाई जाने वाली गाथाओं में स्त्री की वेदना और पारिवारिक जीवन में उसकी दोयम दर्जे की ...
देह माटी की,* ** *दिल कांच का,* ** *दिमाग आक्षीर * ** *रबड़ का गुब्बारा,* ** *बनाने वाले ,* ** *कोई एक तो चीज * ** *फौलाद की बनाई होती ! * ** *xxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxx* ** *नयनों में मस्ती,* ** *नजरों..
आज कहानी सबको, अपने पल-पल की बतलाता हूं, कैसे मैं ज़िंदा रहता हूं, कैसे सब सह पाता हूं, रोज़ रात भर लेटा रहता हूं मैं, आंखें बंद किए, सुबह-सुबह सब जगते है, मैं बिस्तर से उठ जाता हूं.. फिर होके तैयार, नौकरी...
अभी बर्फ़ की बारिश का आनंद लेते हुए क्लास से लौटे... और खिड़की से उसी बारिश को निहारते हुए अपने घर की सैर पर निकल गया मन... फिर लौटा तो सोचा कि स्टाकहोम से ही बातें कर लें... कहीं वह उपेक्षित न महसूस करने ...
अनुराग अनंत के ब्लॉग पर उनकी रचना पढ़ कर जो मन में भाव उठे ..उनको आपके साथ बाँट रही हूँ ... बापू , बहुत पीड़ा होती है तुम्हारी मुस्कुराती तस्वीर चंद हरे पत्तों पर देख ...
यदि *मानव,* प्रकृति की संरचनात्मक-कृति का सबसे उत्कृष्ट, समृद्ध व आधुनिकतम रूप है तो *नारी* प्रकृति की सृजनात्मक-शक्ति का सर्वश्रेष्ठ व उच्चतम रूप है। इस संसार रूपी ईश्वरीय उद्यान ...
भीतर जल ताजा है माना कि जिंदगी संघर्ष है कई खतरनाक मोड़ अचानक आते हैं कभी इसको तो कभी उसको हम मनाते हैं भीतर कहीं गहराई में जिंदगी बहती है दू.....र टिमटिमाती गाँव की रोशनी की तरह.... ऊपर-ऊपर सब सूखा है, धु...
वो एक बेचैन सी सुबह थी, आस पास लोगों की भीड़... कई सारे अपने से चेहरे, जैसे सभी से एक न एक बार मिल चुका हूँ कहीं, बस अपने आप को नहीं देख पा रहा था मैं, फिर देखा तो कोई लेटा हुआ था सफ़ेद कपड़ों म...
*सूरज न मुख करियो मेरी ओर* * बसंती हो जाऊँगी...* * रंग बसंत ,राग बसंत ,रुत बसंत * * बसंत ही में ढल जाऊँगी * * फिर ओढ़ बसंती चुनरी * * मन ही मन इठलाऊँगी* * मुख पे बसंती झलक * * मन में फूल बसंत खिलाऊँगी * * ब...
मौत से ये दिल रज़ा है, और क़ातिल लापता है। वो समंदर ,मैं किनारा, उम्र भर का फ़ासला है। मैं चरागों का मुहाफ़िज़, वो हवाओं की ख़ुदा है। सब्र की जंज़ीरें मुझको, खुद हवस में मुब्तिला है। सांसें कब की थम चुकी हैं, ज़...
* **हमारा संगम *-* " 
३ समझ न पाता मानव क्यों जो बात बहुत पुरानी है दिमाग के बिना चले भी जिंदगी पर दिल के बिना बेमानी है आज नही है कल नही था पर एक दिन ऐसा आयेगा साथ में चलनेवाला साथी पल-पल में पछतायेगा बहुत मिलेंगे...
अश्रुपूरित नयनों से वह देखती अनवरत दूर उस पहाड़ी को जो ख्वाव गाह रही उसकी आज है वीरान कोहरे की चादर में लिपटी किसी उदास विरहनी सी वहाँ खेलता बचपन स्वप्नों में डूबा यौवन सजता रू...
अगर आपके पास बीएसएनल का ब्राडबैंड है तो आपके लिए एक खुशखबरी है 1 फरवरी से बीएसएनल ने हर प्लान की स्पीड दुगनी कर दी है जिनकी 256 केबी की स्पीड थी अब वो बढ़ कर 512 केबी हो गयी है और इसके लिए आपको कोई अलग स... 
तेरी... मेरी... हम सबकी तकदीर!
एक पुरानी गली है यादों की... जहां बचपन खुलकर गाता था दो बूंदें जमकर पिघली थीं हर रंग बड़ा सुहाता था फिर समय ने करवट ली... और गली वह पीछे छूट गयी पिरोई थी एक माला हमने वह मोती-मोती टूट गयी हर क्षण बदलते हैं...
* " ०३ फरवरी १९८८ "* * * * *गाय का नवजात बछड़ा जन्म के साथ ही ...
  
अब लेते हैं आपसे विदा मिलते हैं, अगली वार्ता में, नमस्कार... 
 

मंगलवार, 31 जनवरी 2012

मैने साथ निभाया अब तुम्हारी बारी है.... ब्लाग 4 वार्ता.......संध्या शर्मा

संध्या शर्मा का नमस्कार...प्रतिदिन लाखों विद्यार्थी आज भी बड़े भाव से गाते हैं "साथ दें तो धर्म का, चलें तो धर्म पर" कितना उदात्त और प्रेरणा से भरा है ना यह पद. इस एक पंक्ति में ही मनुष्य के कर्तव्य और ध्येय मार्ग का बोध हो जाता है. यही संस्कार उन्हें एक अच्छा इन्सान बनाते हैं, वेद कहते हैं "मनुर्भव:"। मनुष्य और पशु दोनो के जन्म लेनी की प्रक्रिया में साम्यता है। यदि मनुष्य को संस्कार न मिलें तो पशु और मनुष्य के आचरण में अंतर कर पाना कठिन है। इसलिए कहते हैं "संस्कारवानं लभते ज्ञानम्"। प्रस्तुत हैं आज की वार्ता में कुछ पोस्ट लिंक…………

गांधीजी की आकस्मिक हत्या न सिर्फ भारत को ही नहीं हिला दिया था बल्कि सम्पूर्ण विश्व इस घटना से स्तब्ध रह गया था । मानवता के पुजारी को खो कर सिर्फ हम नहीं रोये बल्कि स्वतंत्रता के और भी सेनानी रो पड़े । उनकी...  
तेरे गम को साझा किया मैने, अब तक न हिम्मत हारी है आज अभी अब दुखी हूँ मैं भी अब तुम्हारी बारी है। १ मेरे उर ने पढे हैं तेरे नैनों की की सब भाषा सागर तेरे पास है फिर भी तुम क्यों बैठे प्यासा ? म...

posted by गिरीश"मुकुल" at नुक्कड़

तो कुछ बात बने.. (Part-2)
जिसे बरसों से लहू देके, मैने सींचा है, वही इक फूल जो मुर्झाए, तो कुछ बात बने.. जो मेरे लाख बुलाने पे भी, नहीं आया, सिसक-सिसक मुझे बुलाए, तो कुछ बात बने.. जो मेरी याद पे काबिज़ है, वही शख़्स कभी, मुझे हर स...

तोहमत
कुछ न निकला दिल में दाग- ए-हसरते-दिल के सिवा हाय ! क्या-क्या तोहमतें थी आदमी के नाम पर, अब ये आलम है कि हर पत्थर से टकराता हूँ सिर मार डाला एक बुत ने बंदगी के नाम पर, कुछ इलाज उनका भी सोचा तुमने ए ! ...
वैसे तो कविता और आशा का गहरा रिश्ता है बात निराशा से शरू हो सकती है पर आशा की किरण अंत में अवश्य जगमगाती है! कविता और ख़ुशी भी पर्याय हो सकते हैं पर ऐसा क्यूँ है कि दुःख की रागिनी ही कविता में अक्सर गाती है...
मन अभिमन्यु मैंने तुम्हें हर बार रोका पृष्ठ खोल महाभारत का दृश्य दिखाया पर तुमने चक्रव्यूह से पलायन नहीं किया ... तुमने हर बार कहा बन्द दरवाज़े की घुटन न हो तो कोई रास्ते नहीं खुलते ना ही बनते हैं ! ...
बेगानी है हरी दूब भी मरुथल बियाबान के वासीफूलों से रहते अनजाने, बूंद-बूंद को जो तरसे हैं नदियों से रहते बेगाने ! स्वप्न सरीखे उनको लगते उपवन, सरवर, झरने, पंछी, जिसने मीलों रेत ही देखी बेगानी है हरी दूब भी !...
*गांधीजी की पुण्य तिथि पर प्रस्तुत हैं मम्मी की लिखी कुछ पंक्तियाँ ---* (चित्र साभार: गूगल इमेज सर्च ) बापू गांधी को टांग दीवार पर श्रद्धांजलि देने का स्वांग करते 30 जनवरी पर चलते नहीं उनकी लीक लकीर पर...
सरोगेट के केस से, बच्चे लेते सीख । पालक धोखे खा रहे, नया ट्रेंड इक दीख । नया ट्रेंड इक दीख, टाल शादी का प्रेसर । हायर जोड़ीदार, करें शादी ठेके पर । टोओबो डट कॉम, चाइना में खुब छाए । नया भिड़ाए जोड़, जान...
*अपनी इक पुरानी ग़ज़ल को झाड़-पौंछ कर फिर से प्रस्तुत कर रहा हूँ , उम्मीद है पसंद आएगी* खौफ का खंजर जिगर में जैसे हो उतरा हुआ आज कल इंसान है कुछ इस तरह सहमा हुआ चाहते हैं आप खुश रहना अगर, तो लीजिये, हाथ ...
खुली आँखों से जब देखा जिंदगी भुरभुरा रेत का एक टीला सा लगी जो कभी बहुत गर्म तो कभी ठंडी हो जाती कभी लहरें बहा ले जाती तो कभी तेज आंधियां अपने संग उड़ा ले जाती उस रेगिस्तान कि तरह जहां सिर्फ धसना और सिर्फ ...

मंगल उवाच।  
देखो, वह चूहा मर चुका है। उससे डरना मूर्खता है। **************** कॉकरोच मटर की फली के कीड़े जैसा ही जीव है। यूँ हाय तौबा मचाने और भागने की आवश्यकता नहीं।... 
"नमस्कार लिख्खाड़ानन्द जी!" "नमस्काऽऽर! आइये, आइये टिप्पण्यानन्द जी!" "लिख्खाड़ानन्द जी, टिप्पणी तो हम करते ही रहते हैं, पर कभी-कभी एकाध पोस्ट लिखने की भी इ. 
स्वाधीनता के 62 बरस बाद लोकतंत्र का सच क्या गणतंत्र दिवस के मौके पर कोई यह कहने की हिम्मत कर सकता है कि दुनिया का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश बनना भारत के ल... 
सदा श्वेत वस्त्रम, खुंसे अंग शस्त्रम, च वाहन विशालादि सत्ता सुखम ... चमचा कृपालम, विरोधस्य कालम, सुवांगी श्रुतमचैव लारम भजे... नमो भ्रष्ट पोषी, च स्विस ब...   

फिर नैनों ने चाल चली है.... (गीत)  
फिर नैनों ने चाल चली है, हो सके तो बचना. तू ना फंसना चालों में दिल तू ना फंसना... तू ना फंसना धोखे में दिल तू ना फंसना.... १. हल्की- हल्की बूंदा-बांदी, भ... 

प्रतीक्षा .....................
*प्रतीक्षा * *हम तो इंतज़ार में बैठे रहे यूँ ही ,दिन भर वो आए तो करीब मेरे ,पर बिन देखे कि मेरी आँखों में इंतज़ार के आँसू भी हैं उसने ना आने के सौ बहाने ब...   

सारे तीज - त्यौहार एक तरफ, लोकतंत्र का त्यौहार एक तरफ ....  
आहाहा ...कैसी अनुपम छटा है | अभूतपूर्व रौनक है | सारे तीज - त्यौहार एक तरफ, लोकतंत्र का त्यौहार एक तरफ | अभी कल ही की तो बात थी जब धड़ाधड़ करके जब सरकारी... 

अब लेते हैं आपसे विदा मिलते हैं, अगली वार्ता में, नमस्कार... 

सोमवार, 30 जनवरी 2012

मुस्कुराओ, मुझे अच्छा लगेगा.... ब्लाग 4 वार्ता.......संध्या शर्मा

संध्या शर्मा का नमस्कार...हम जीवन को अपार मुल्य की वस्तु मानते हैं। हमें जीवन का संवर्धन, पोषण एवं आदर करना चाहिए, यदि इन आस्थाओं को वास्तविक बनाना है तो हमें एक दूसरे के प्रति एवं आने वाली पीढी के प्रति कर्तव्य स्वीकारने होगें। हमारा कर्तव्य है कि पृथ्वी पर जीवन को उदात्त बनाएं और उसे आक्रमण, अपमान, अन्याय, भेदभाव बीमारी और दुरुपयोग से बचाएं। हमारा कर्तव्य है कि हम मानव-अस्तित्व के लिए आवश्यक परिस्थितियों को सुरक्षित रखें। तभी कल्याण हो सकता है। अब प्रस्तुत हैं  मेरी पसंद के कुछ ब्लॉग लिंक आशा  है कि पाठकों को पसंद आएगें।

क्षमा चाहता हूँ कि कल रात को शहीदी दिवस यानि ३० जनवरी हेतु एक कविता लिखने बैठा था और गलती से सेव करते हुए पब्लिश का बटन क्लिक कर गया था ! खैर, वेइसे तो रविवार को वक्त कम ही मिलता है लेकिन आज मेरे पास वक्त...

 जमीन से निकलनेवाले पेड-पौधो,कीडे-मकौडो की कही कोई बात नही होती कहाँ से आती है हरियाली और कहाँ कहाँ है सुंदरतम चीजे इसकी जानकारी कही कोई नही होती रोज धरती अपने जगह से थोडा थोडा खिसक रही है कही कोई च...

कोई जो मुझको समझ पाए, तो कुछ बात बने समझ के मुझको भी समझाए, तो कुछ बात बने.. यूंही कब तक, तुम्हारी हाँ में हाँ, भरता रहूं मैं, ज़रा यकीं सा भी आ जाए, तो कुछ बात बने.. मैं तन्हा रात के आलम में, तन्हा लेटा...

आज .. किस राह निकल आयी मैं . वो गुज़रे दिन और रातें वो कही - अनकही बातें कहाँ पहुँच गयी मैं. कितना रोका मैंने खुद को कि न पलट के देखूं इनको . पर.............. देखो, न अब वापस आना चाहती हूँ पर, एक गलत कद...

फेसबुक की आलोचना करने वालों सावधान हो जाओ हर चीज में अच्‍छाई और बुराई का संगम होता है बुराई अपनाने पर गम होता है अच्‍छाई का संग सदा उत्‍तम होता है अच्‍छाई का अगर ...

खिल गयी क्यारी क्यारी
वसंतागमन हो चुका, खिल गयी क्यारी क्यारी। चलने लगी बयार दोधारी। प्रकृति का अदभुत सौंदर्य देखते ही बनता है, आँखो में भी नहीं समाता। कैमरे की आँख भी उसे सहेज नहीं पाती है। इस मधुर अवसर पर जब मधुकर का गुंजन ...

मैं
*अहं की * *अभिव्यक्ति* *मैं से शुरू* *मैं से इति* *मैं बेहतर* *तू कमतर * *मैं आकाश * *तू थलचर* *मैं रसना* *मैं श्रुति* *मैं दृष्टा* *मैं श्रृष्टि * *तू आलोचक* *मैं कृति* *सब पराये* *मेरा दुर्योधन* *मैं स्वी...

सरस्वती माँ को सादर वन्दन अभिनन्दन
सरस्वती माँ को सादर वन्दन अभिनन्दन करो माँ हर ह्र्दय मे प्रेम का मधुर स्पन्दन तम का नाश कर दो अज्ञानता का ह्रास कर दो ज्ञान उजियारे से माँ जीवन उल्लसित कर दो तन मन प्रफुल्लित हो सदा नित करें तुम्हें व...

फिर से ................. 
जुस्तजू सी उभर गयी फिर से शाम भी कुछ निखर गयी फिर से तेरा पैगाम क्या मिला जालिम जैसे धड़कन ठहर गयी फिर से तेरी बातों की बात ही क्या है कोई खुशबू बिखर गयी फिर से जिंदगी! होश में भी है, या कहीं म...

है इंसा कि शिकायत कि मुझको कुछ नहीं मिला 
हर बज्म में बैठे और खुदको साबित भी कर लिया | फिर भी रही शिकायत की हमको कुछ नहीं मिला | चोखट को अपनी छोड़कर अरमान दिल में ले चले | पर इतने बड़े जहां में भी कोई अपना सा न मिला | दिल थाम कश्ती को तूफान के ...

मुझे अच्छा लगेगा
सुबह की रोशनी की तरह मुस्कुराओ सदा, जिंदगी की महफ़िल में साथ दो मेरा, मुझे अच्छा लगेगा । ना हो खफा बस खिलखिलाओं सदा, दिल में प्यार जगाओ, तुम मुझे अपना बनाओ, मुझे अच्छा लगेगा । दिल में मेरे बस भी जाओ, ...

*गोवा का नाम लेते ही बेशुमार रंगों से भरे समुद्र तटों की छवि ज़हन में उभरने लगती है। लेकिन सूरज, रेत और समंदर का मेल ही गोवा की तस्वीर मुकम्मल करने... 
उस दिन एक ठो सहकर्मी दोस कहे कि चलिए एक ठो नयका मॉडल का मोबाइल दिलवाइए , हम कहे कि तो ई में हमको काहे ले जा रहे हैं महाराज , हम तो टेक्नीकली एतना ... 

कविता चंचल मन यूं ही बैठे-बैठे मैं खुद से बात करती हूं की क्‍या सोचता रहता है ये मन क्‍या चाहता है पर जवाब नहीं मिलता। वक्‍त वेवक्‍त क्‍यों आंखों में नींद ...  

परिपाटियों को बदलने के लिए छलनी का होना भी जरूरी होता है ना ............  
आखिर कब तक सब पर दोषारोपण करूँ तालाब की हर मछली तो ख़राब नहीं ना फिर भी हर पल हर जगह जब भी मौका मिला मैंने तुम्हारी पूरी जाति को कटघरे में खड़ा किया जबकि ...   

मुनिया का बचपन  
माँ........माँ .....देखो न !! इस मोटे कालू को समझा लो .........मुझे कुछ भी कह कर बुलाते रहता है..उं..हूं....उं.... ---अपनी माँ से कहा रोते-रोते मुनिया ने... 

हम वो परिंदे हैं ! 
*उनकी याद भी अब उनकी तरह नहीं आती,* *कोई खुशी अब खुशी की तरह नहीं आती !(१ )* * * *हमने मौसम की तरह,उनका इंतज़ार किया,* *पतझर के बाद भी ,बासंती-हवा नहीं आती ..

अब इतना तो मालुम ही था कि इंटरनेटसे कहीं भी कुछ भी मंगा या या भेजा जा सकता है। पर अभी तक ऐसा मौका या सुयोग नहींमिल पाया था या यूं कह लें कि हासिल करने क... 

अब लेते हैं आपसे विदा मिलते हैं, अगली वार्ता में, नमस्कार...   

बुधवार, 25 जनवरी 2012

आखिर कब बदलोगे ??????.... ब्लाग 4 वार्ता.......संध्या शर्मा

संध्या शर्मा का नमस्कार... एक तरफ देश में शीत लहर का कहर जारी है, वहीं दूसरी तरफ चुनावी मोर्चाबंदी शुरू हो गयी है. टिकिट की मारामारी है. लेकिन सही परीक्षा तो जनता की होनी है. किसे जिताए किसे नहीं.चुनावी वादे शुरू होंगे, जनता को बरगलाने की कोशिश की जाएगी. इस हालत में जनता को, मतदाताओं को सजग रहना होगा, कौन इसके काबिल है इसके अवलोकन के बाद ही मताधिकार का प्रयोग करना होगा.महंगाई ने देश की कमर तोड़ रखी है, समस्याएं रुकने का नाम नहीं ले रही हैं, ऐसे वक़्त चुनावों के माध्यम से हमें खुद का ही परीक्षण करना होगा. शहर से राज्य और राज्य से देश की स्थिति मज़बूत होती है. शुरुआत हमें अपने घर से करनी होगी. तभी सही मायनों में सुशासन की आशा की जा सकती है.आखिर लोकतंत्र है. आप भी ऐसा ही सोचते हैं ना... 
कुछ इन्ही विचारों से भरी और कुछ भिन्न - भिन्न विचारों और भावों से भरी चुनिन्दा लिंक्स के साथ प्रस्तुत है आज की वार्ता....       


मेरे मेज पर सजी तुम्हारी उस खुबसूरत तस्वीर ने कल मुझसे एक सवाल किया " बहुत दिन हो गए तुमने मुझसे कुछ कहा नहीं " मैं स्तब्ध ... सोचता रहा उस सवाल को ......! मुझे निरुतर देख फिर उसने कहा " बहुत दिन ...

लोथल (લોથલ) : हड़प्पा कालीन नगर -- भाग 1 --- ललित शर्मा
लोथल के प्रवेश द्वार पर विनोद गुप्ता जी और लेखक प्राथमिक पाठशाला में पढते थे तो एक पाठ *सिंधुघाटी की सभ्यता* पर था। पाठ के आलेख में *मोहन जोदड़ो* एवं *हड़प्पा*, से प्राप्त खिलौने में चक्के वाली चिड़िया, मुहर...

अपेक्षा
हूँ स्वतंत्र ,मेरा मन स्वतंत्र नहीं स्वीकार कोइ बंधन जहां चाहता वहीं पहुंचता उन्मुक्त भाव से जीता नियंत्रण ना कोइ उस पर निर्वाध गति से सोचता जब मन स्वतंत्र ना ही नियंत्रण सोच पर फिर अभिव्यक्ति पर ..

सम्वेदना ये कैसी?---(श्यामल सुमन)
सब जानते प्रभु तो है प्रार्थना ये कैसी? किस्मत की बात सच तो नित साधना ये कैसी? जितनी भी प्रार्थनाएं इक माँग-पत्र जैसा यदि फर्ज को निभाते फिर वन्दना ये कैसी? हम हैं तभी तो तुम हो रौनक तुम्हारे दर पे चढ़ते ह...

आखिर कब बदलोगे तुम ?????? 
बार बार हर बार , मैंने बात तुम्हारी मान ली तुमने सूरज को चाँद कहा मै उसमे भी तुम्हारे साथ चली तुमने जब भी चाहा तुम्हारी बाँहों में पिघल पिघल सी गयी , तुम्ही को पाकर जिवंत हुई तुम्ही को पाकर मर - म...

चांदनी कहां नहीं होगी...
मैं प्राग में नहीं हूं. न आइसलैंड की यात्रा पर. न ही मेरे साथ थोर्गियर जैसा कोई मित्र है, जो सामान्य यात्राओं को अपनी उपस्थिति से उम्मीद से ज्यादा खूबसूरत बना दे. लेकिन मैं हूं वहीं कहीं. निर्मल वर्मा के...

जानती हूँ...
बन कर मेरी छाया तुमने अनुराग से दुलराना चाहा पर उलझा सा बाबरा मन तुम्हें कहाँ समझ पाया... भूल मेरी ही है जो अपना इक जाल बनाया है तुम्हीं से खिले फूल को तुमसे ही छुपाया है..... चाहती तो हूँ कि प्रिय ! तुम्हा... 

बहुत यकीन है ...
मुझे बहुत यकीन है ....तुमपे और अपने प्यार पे भी . पर..... पता नहीं क्यूँ फिर भी.... जब कभी यह ख्याल भी मन में आ जाता है कि, तुम किसी और के साथ हो तुम किसी ...

उद्धतता !
*जनता की नजर में * *किरकिरी बनने की टीस,* *अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, * *अनुच्छेद उन्नीस,* *अंतर्मुखी, दमित-शोषित को * *सच लिखना भाने लगा था, * *भद्र,उजले वेश को अन्तर्जाल, * *यम नजर आने लगा था, * *सरकशपन 

आइये ख़त्म करे धर्म और जाति की राजनीती
एक बार फिर उत्तरप्रदेश में चुनावी बयार बहने लगी है, चुनावी महाभारत में कूदने वाले रणबांकुरे महासमर पर विजय प्राप्त करने के लिए सभी नीतियों को अपना रहे है. उन्हें इस बात की चिंता नहीं है की किस तरह क्षेत्र,... 

उनके चेहरों पर मानवीय चिंताएं क्यों नहीं दिखतीं
भाई शिव प्रसाद जोशी का आलेख - अण्णा ग्रुप का भ्रमणः काश पता होता लड़ाई किससे है जनलोकपाल आंदोलन के चार सिपहसालार जो स्वयंभू टीम अण्णा है, उसका उत्तराखंड द...  

नवाब की टोपी और गरीब की झोपड़ी से दूर है चुनावी लोकतंत्र - वोट डालने की खुशी से ज्यादा आक्रोश समाया है वोटरों में इस चुनाव ने नेताओं को साख दे दी और वोटरों को बेबसी में ढकेल दिया। याद कीजिए चुनाव से ऐन पहले राजनेता...  

स्वाभिमान जगाता एक समर्पित जन समूह--राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ--RSS  
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ एक राष्ट्रवादी संघ है जिसकी स्थापना १९२५ में नागपुर के डॉ केशव बलिराम हेडगेवार ने की थी। यह संघ निस्वार्थ रूप से देश की सेवा कर र...  

वोट मांगने की विविध शैलियां - दिनेश चन्द्र जोशी dcj_shi@rediffmail.com *0**9411382560 * जैसे गायकी की विविध शैलियां होती हैं,घराने होते हैं, वैसे ही वोट मांगने की भी विविध शैलियां और घ...  

चलिए ! मिल कर करें नेताओं का हिसाब ... - उत्तर प्रदेश में चल रहे सत्ता के संघर्ष एक छोटी सी भूमिका निभाने के लिए मैने भी अपना रुख कर दिया है यूपी की ओर। महीने भर से ज्यादा समय तक के लिए रविवार को...

आंख आ गई जबकि उम्र दिल आने की थी 
जी हज़ूर , इन आंखें आने दिनों के दौर में दुनियां कित्ती परेशान है आपको क्या मालूम आप को यह भी न मालूम होगा कि आज़ आपका यह ब्लागर भरी हुई आंख से पोस्ट लिख रहा है. खैर मुहल्ले के नये नये जवान हुए लड़के-... 

अब लेते हैं आपसे विदा मिलते हैं, अगली वार्ता में, नमस्कार...   

मंगलवार, 24 जनवरी 2012

लिख रहे हैं भोर की पहली किरण... ब्लाग 4 वार्ता.......संध्या शर्मा

संध्या शर्मा का नमस्कार...सर्वप्रथम आजादी के महानायक सुभाषचन्द्र बोस को हमारा शत-शत नमन... प्रस्तुत है मेरी पसंद के कुछ लिंक्स जिसमे से कोई ह्रदयस्पर्शी हैं, तो कुछ आंदोलित करती है, तो कोई आल्हादित कर जाती हैं, कुछ ऐसी प्रतीत होती हैं जैसे कोई आमने-सामने बैठकर बात कर रहा हो.  लीजिये यह है, आज की वार्ता...

श्रद्धांजली नेता जी को ! 
जैसा कि हम सभी जानते है कि आज नेताजी सुभाष चन्द्र बोष का जन्म दिवस है। २८ अप्रैल १९३९ जिस दिन वे कौंग्रेस के अध्यक्ष पद से इस्तीफा देकर उससे अलग हुए थे, उस... 

साबरमती, चरखा और ट्रैफ़िक ----- ललित शर्मा
सुबह उठा, तो देखा कबूतर अकेला था। प्रेम चोपड़ा के डर से कबूतरी नहीं आई। आज नामदेव जी की वापसी थी, वापसी की टिकिट हम दोनों की साथ ही थी पर मुझे तो अभी और घुमना था। सुबह कार्यक्रम बना कि साबरमती आश्रम चला जा...

शब्द चित्र-NH -30 से
posted by ब्लॉ.ललित शर्मा at NH-30 

बहुत यकीन है ...
मुझे बहुत यकीन है ....तुमपे और अपने प्यार पे भी . पर..... पता नहीं क्यूँ फिर भी.... जब कभी यह ख्याल भी मन में आ जाता है कि, तुम किसी और के साथ हो तुम किसी और के पास हो तो........ कुछ दरक सा जाता है दिल कसम...

तुम्हीं कहो मैं क्या लिखूँ..
 *तुम्हीं कहो मैं क्या लिखूँ* कुछ आस लिखूँ विश्वास लिखूँ या जीवन का परिहास लिखूँ भीगी सी वो रात लिखूँ या आँखों की बरसात लिखूँ तुम्हीं कहो मैं क्या लिखूँ तुम्हें दूर कहूँ या पास कहूँ प्यारा एक अहसास लि...

श्रद्धांजली नेता जी को !
 जैसा कि हम सभी जानते है कि आज नेताजी सुभाष चन्द्र बोष का जन्म दिवस है। २८ अप्रैल १९३९ जिस दिन वे कौंग्रेस के अध्यक्ष पद से इस्तीफा देकर उससे अलग हुए थे, उससे पहले के उनके कार्यों और उपलब्धियों और साथ ही इस...

"लोग समझते हैं मैं कवि हूँ"
मैं तो शब्दों के पीछे दौड़ता-भागता हूँ जैसे कोई बच्चा दौड़ता है रंग-बिरंगी तितलियों के पीछे. करता हूँ इन्तजार फूलों की डालियों पर उसके बैठने का, फिर करता हूँ सहज दिखने का सजग प्रयास. धीरे-धीरे चपल...

पूर्णता , अपूर्णता 
कोई व्यक्ति कोई जगह कोई प्रश्न कोई हल .... पूर्ण है क्या ? किसी चित्रकार के चित्र में क्या सारी रेखाएं सही होती हैं ? क्या संस्कारों का एक ही परिणाम होता है ? जो तुम सोच रहे वही हर परिवेश की पृष्ठभूम...

बदल गया है विजय चौक का चरित्र
विजय चौक वैसे तो देश में सैकड़ो होंगे लेकिन देश का सबसे प्रतिष्ठित विजय चौक है संसद भवन के साथ राष्ट्रपति भवन के सामने उत्तरी और दक्षिणी ब्लाक के ठीक सामने जहाँ से शुरू

दीवाना राधे का..... 
*आज मेरी बिटिया ने फिर मेरा सिर गर्व से ऊंचा कर दिया। उसके स्‍कूल में रविवार को वार्षिक उत्‍सव का कार्यक्रम था। पिछले साल अपनी कक्षा में प्रथम आने के लिए उसे प्रमाण पत्र और मैडल मिला। जब वो स्‍टेज पर पुर...

प्रेम सरोवर
* ** **मैं फूल टाँक रहा हूँ तुम्हारे जूड़े़ में*** *** **तुम्हारी आँख मुसर्रत से झुकती जाती है*** * ** **न जाने आज मैं क्या बात कहने वाला हूँ*** * ** **ज़बान खुश्क है आवाज़ रुकती जाती है ।*** 

रामटेक-गोटेगांव, ब्राडगेज रेल लाइन को लेकर समवेत गुहार :
सिवनी। जिले के पंच परमेश्वरों की आवाज रामटेक गोटेगांव रेल लाइन के लिये बजट प्रावधान कराने के लिये देश की महापंचायत लोकसभा तक पहुचना शुरू हो गयी हैं।इस अभियान के दूसरे दौर में सिवनी विधायक नीता पटे...

कुछ पुराने पेड़ बाकी हैं अभी तक गाँव में 
*स*मस्त सम्माननीय सुधि मित्रों को सादर नमस्कार... पिछले पंद्रह दिनों से अत्यधिक व्यस्तता ने ब्लॉग पठन - पाठन से दूर कर रखा था. अब जल्द ही नियमितता स्थापित कर लूंगा. *इस दरमियान आप सभी से मिले स्नेह के लिए...

जिंदगी
१. हैं कुछ सवाल मन में, रहते हैं उमड़ते – घुमड़ते कभी – कभी छलक आते हैं आंसू बनकर आँखों के कोरों पर और कभी पसीने की बूंदो में चमक उठते हैं मेरी पेशानी पर.. २. क्षितिज पर जमीन-आसमां क्यूँ मिलते नहीं हैं

वह और हम 
वह और हम जब परमात्मा हमारे द्वार पर खड़ा होता है हम नजरें झुकाए भीतर उसे पत्र लिख रहे होते हैं भोर की पहली किरण के साथ हर सुबह जब वह हमें जगाने आता है करवट बदल कर हम मुँह ढक के सो जाते हैंजब किसी के अधरों स...

सभी के दिलों में हमेशा अमर रहेंगे महानायक - नेताजी सुभाषचन्द्र बोस
 जिन लोगों ने देश की स्वतन्त्रता के लिए अपना सर्वस्व यहाँ तक कि प्राण तक न्यौछावर कर दिया,नेताजी सुभाषचन्द्र बोस भी उन महान सच्चे स्वतन्त्रता संग्राम सेनानियों में से एक हैं जिनके बलिदान का इस देश में सही आ...

" वो महकते रहें,हम बहकते रहें ...."
* * *उनकी पसंद,* खुशबू, सबेरे के अखबार की, पहली बरसात की, पिसी मेहंदी की, जले दूध की, भीगे कोहरे की, तिल के पुए की, भीगी सड़क की, सावन की रात की, और नींबू के अचार की, *मेरी पसंद, * खुशबू, उनके साथ की, उन...

हमारे शहरों के रेल मार्ग सुन्दर क्यों नहीं हो सकते ?
अमेरिका की मशहूर टी वी होस्ट ओपरा विनफ्रे की आगरा यात्रा और इस शहर की साफ़ सफाई और रख रखाव पर उनकी प्रतिक्रिया ने आगरा शहर के अधिकारियों और ज़िम्मेदार संस्थाओं को चेताया हो या नहीं कम से कम मुझे तो बहुत विचल...

देव प्रकाश चौधरी को एनएफआई नेशनल मीडिया फेलोशिप
नुक्‍कड़ ब्‍लॉग समूह की महा बधाई युवा पत्रकार देव प्रकाश चौधरी को नेशनल फाउंडेशन ऑफ इंडिया की ओर से 17वें नेशनल मीडिया फैलोशिप का अवार्ड दिया गया है। मूलत: चित्रकार लेकिन पेशे से पत्रकार देव प्रकाश बीएजी, ...

Roshi: त्रासदी
त्रासदी: सुबह पेपर में पड़ाएक युवक ने की आत्महत्या दो दिन से था पेट खाली पोस्त्मर्तम रिपोर्ट ने यह बताया गरीबी का था आलम की पूरा परिवार समां जाता ...  

गुमान ... - हम न जाने कब, धीरे धीरे चट्टान से रेत के कण हो गए खबर न हुई ! चलो अच्छा ही हुआ हमें चट्टान होने का जो गुमान था टूट गया ! शायद अब हम टूटेंगे नहीं, ...  

नवाब की टोपी और गरीब की झोपड़ी से दूर है चुनावी लोकतंत्र - वोट डालने की खुशी से ज्यादा आक्रोश समाया है वोटरों में इस चुनाव ने नेताओं को साख दे दी और वोटरों को बेबसी में ढकेल दिया। याद कीजिए चुनाव से ऐन पहले राजनेता...  

कैसा रहेगा आपके लिए 23 और 24 जनवरी 2012 ?? - मेष लग्नवालों के लिए 23 और 24 जनवरी को बुद्धि ज्ञान के मामलों के लिए महत्वपूर्ण होंगे , संतान पक्ष के मामलों में महत्वपूर्ण निर्णय लिए जा सकते हैं। किसी स...  

कृष्ण लीला .........भाग 34 
कान्हा की वर्षगांठ का दिन था आया नन्द बाबा ने खूब उत्सव था मनाया गोप ग्वालों ने नन्द बाबा संग किया विचार यहाँ उपद्रव लगा है बढ़ने नित्य नया हुआ है उत्प...  

आज मदर्स डे नहीं है, फिर भी....  
*यही एक तस्वीर मिली जिसमे आपने मुझे पकड़ा हुआ है...* माँ, पता नहीं क्यूँ आज आपकी बहुत याद आ रही है, मुझे पता है आपसे मिलकर भी आपसे कुछ नहीं बोलूँगा...  

माटी भी मोक्ष पा जाती है ...!!  
कोमल और कठोर ... स्वप्न और यथार्थ ... दो पहलू जीवन के ... दो किनारे सरिता के ...!! कभी कोमल स्वप्न ... कठोर यथार्थ ... कभी कठोर स्वप्न ... कोमल यथार्थ ..... 

तुम आई हो - बहुत अन्धकार में  हाथ को न सूझे जहा हाथ  प्यार मेरा उसको थामता है  दबी हुई रुलाई  हंसी में बदल भौचक हो जायेजैसे  इस अकेले अँधेरे  में  तुम आई हो  ... 

मिलते हैं अगली वार्ता में, नमस्कार...  

रविवार, 22 जनवरी 2012

धूप ज़रा ठंडी लगती है...ब्लाग 4 वार्ता.......संध्या शर्मा

संध्या शर्मा का नमस्कार... मन की डाली पर कभी कोई फूल खिलता है, कभी दामन काँटों में उलझ जाता है. लेखक हो या कवि उसके मन का विश्वास कुछ करने की कुछ लिखने की इच्छा रखता है और भावनाओं की अभिव्यक्ति प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कर ही देता है. अधिक न कहकर इतना ही कहूँगी रचनाएं बोलती हैं, पाठकों को जोड़ती हैं आपस में.. तो आइये शुरू करते है, भावनाओं का सफ़र...         

अक्षरधाम मंदिर और फ़ोटो की दूकान --- ललित शर्मा
स्वामी नारायण संप्रदाय द्वारा संचालित कॉलेजगुजरात की राजधानी गांधी नगर में प्रवेश करने पर कीकर के पेड ही दिखाई दिए। हमारा उद्धेश्य था स्वामी नारायण सम्प्रदाय के अक्षरधाम मंदिर को देखना। हम 4 बजे मंदिर के ...


जीवन ही आग ....आग ही जीवन
जीवन ही आग ....आग ही जीवन रुग्ण मन व्याकुल ह्रदय नंगी पीठ पर बरसती जेठ की दुपहरी में दहकती आँखों के सामने सुर्ख लाल भट्टी पर तापित करों से यंत्रवत सा सेंकता है रोटियां रोटियों पे रोटियां..... उदरंतर में ती...

रेत के महल
नींद कभी आती है क्या नीद तो कही आसपास ही छुपी होती है और गाहे बगाहे आगोश में ले लेती है बिना तुमसे पूंछे तुम्हे सोना है क्या....? कोई और पूंछता है सो गए हो क्या ? और तुम खोल देते हो आँख नहीं मै ...

ब्लागिंग के इस प्रांगण में
यूँ तो हम सब भाई भाई, ब्लागिंग के इस प्रांगण में मगर सहजता की मँहगाई, ब्लागिंग के इस प्रांगण में नमन सभी रचनाकारों को, जो प्रायः ब्लागिंग करते बरसों उनसे प्रीत लगाई, ब्लागिंग के इस प्रांगण में जिस रचना मे...

Mera Bhopal ?
भोपाल की सुहानी शाम भोपाल की झील में सेलिंग भोपाल की झील का विंहगम दृश्य भोपाल नगरनिगम कार्यालय राजेशा का ब्लॉग - हैलो जि‍न्‍दगी

तुम्हारा आना !!!
*कल खलाओं से एक सदा आई कि ,** तुम आ रही हो... सुबह उस समय , जब जहांवाले , नींद की आगोश में हो; और सिर्फ़ मोहब्बत जाग रही हो.. मुझे बड़ी खुशी हुई ... कई सदियाँ बीत चुकी थी ,तुम्हे देखे हुए !!! मैंने आज सुबह ज...

कई शरीर जिंदा होते हैं ! ...
साँसों के जिंदा होने का सुकून बहुत बड़ा होता है यूँ जीना तो बस एक मुहर है - वो भी नकली ! आत्महत्या आसान नहीं गुनाह भी है तो जबरदस्ती जीना - क्या गुनाह नहीं ? जाने कितने लोग गुनहगार बन कतरा कतरा साँसें .

खिजाँ का मौसम
*टूटे हुए दिल से भला क्या पाओगे खिजाँ का मौसम किस तरह निभाओगे इक कदम भी भारी है बहुत जंजीरों में उलझ , न चल पाओगे रुका है वक्त क्या किसी के लिए सैलाब मगर ठहरा हुआ ही पाओगे ठण्डी साँसें हैं पुरवाई नह...
 
आज महीने भर बाद अपने ब्लॉग पर आना हुआ है । अपने देश, अपने घर जाकर वापस लौटी हूँ । इस बीच ब्लॉग्गिंग से पूरी तरह दूरी बने रहने के चलते एक ओर जहाँ कुछ खालीपन का लगा वहीँ अपनों का साथ पाकर मन नयी ऊर्जा से भर...
 
वेदों में उसी स्त्री को नारी कहा है जो पतिवल्लभा तथा पति का अनुगमन करने वाली है। ऐसी नारी ही सद-गृहिणी कहलाती है और ऐसी गृहिणी से संपन्न घर ही गृह कहलाता है। लकड़ी पत्थर आदि से निर्मित स्थ...

*कविता लिखना शायद ,* *होता है कीमोथीरेपी जैसा,* *दर्द और बहुत दर्द के बीच, * *झूलती ज़िन्दगी, * *पर हाँ ! उम्र मिल जाती है,* *थोड़ी साँसों को और,* *साथ ही साथ, * *उस "कैंसर" को भी ।* उनका मिलना, न मिलना, ब...

सर्द मौसम ( हाईकू)
घना कोहरा धूप चांदनी लगे ढूंढें तपिश सर्द रात में फुटपाथ आबाद जिंदा हैं लाशें .

 
 हे देव! तुम्हारी बाँसुरी में आखिर कैसा जादू है, मै हरदम सोई रहती हूँ,नशे में खोई रहती हूँ। जब भी तुम मेरे मन के उपवन में हौले से आते हो, और अपनी नटखट अदाओं से मुझे दिवाना बनाते हो। ऐसा लगता है कि मै कोई नही...
 
एक ही फरमा में भली-भांति कसकर कितनी कुशलता से सभी सम्पादित करते हैं दैनंदिन दैनिक-चर्या सेंटीमीटर , इंच से नाप - नाप कर.. कांटा - बटखरा से तौल - तौल कर.. रात को शुभरात्रि कहने से पहले ही करते हैं हिसाब-...
 
कैसी शय है यार मोहब्बत, बारिश सूखी लगती है... धूप ज़रा ठंडी लगती है, सर्दी गर्मी लगती है... कैसे कह दूं नाम तुम्हारा, और किसी से वाह सुनू... कुछ ग़ज़लें तो बस सीने मे, उलझी अच्छी लगती हैं... कहाँ मोहब्...
 
*आज एक बार पुनः पढ़िये मम्मी की 2 नवीनतम कविताएं ---* * * *खुशहाली* हाथ खाली,पेट खाली,थाली खाली। जेब खाली,आना खाली,जाना खाली। फिर क्यों करते हो गैरों की दलाली। फिर क्यों करते हो चोरों की रखवाली। क्यों...
 
आपको सुनकर आश्चर्य होगा कि अंडमान में बन्दर नहीं पाए जाते. कानपुर में तो हमारे लान में खूब सारे बन्दर आते थे और पेड़ों और फूलों की डाली पर खेलते और उन्हें तोड़कर भाग जाते थे. जब मैं यहाँ अंडमान में नई-नई आई ...

*छंट गया धरा से शिशिर का सघन कुहा ,* ** *सितारों से सजीला तिमिर में गगन हुआ।* *भेदता है मधुर कुहू-कुहू का गीत कर्ण, * *आतप मंदप्रभा का हो रहा अपसपर्ण।* *लाली ने छोड़ दी अब ओढ़नी पाख्ली, * *मधुकर * *ने...

छंट ही जाते हैं बादल तो हालात के ज़ख्म भरते नहीं दोस्तों बात के, अपनी तकदीर की प्यास बुझ न सकी छींटे हम तक भी आए थे बरसात के, साकी की नज़रें भी धोखा देने लगीं ख़त्म होने लगे साँस भी रात के, इस जफ...
 
सर्दी का मौसम: सर्दी का मौसम अमीरों को ही है भाया,बेचारे गरीब की तो वैसे ही लाचार है काया गर्मी की मार तो वो झेल ही जाता है ,गिरते छप्पर में टूटी झोपडी म...  
 
*मैं निष्पक्ष,निस्वार्थ हमेसा तुम्हारे साथ रहती हूँ..... * *इसलिए नही कि ...मैं तुमसे प्यार करती हूँ........* *बल्कि इसलिए....तुम पर **विश्वास ** करती हूँ....* * * *मैं तुम्हारी हर बात पर,* *तुम...
 
आज एक ख्याल ने जन्म लिया स्त्री मुक्ति को नया अर्थ दिया ना जाने ज़माना किन सोचो में भटक गया और स्त्री देह तक ही सिमट गया या फिर बराबरी के झांसे में फँस गया मगर किसी ने ना असली अर्थ जाना स्त्री मुक्ति के वा...

जज्बा-ए-दिल का हाल मत पूछो यारो एक बार उतरकर देखो मत सोचो यारो रात घिर आएगी तो कहाँ जाऊंगा फिर कोई पनाह-गाह हमारे लिए तो ढूड़ो यारो सर-ज़मीं पर मचा है तबाही का आलम चादर फेंककर अब तो तुम जागो यारो मु... 
 
मिलते हैं अगली वार्ता में, नमस्कार...

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