ललित शर्मा का नमस्कार, भ्रष्टाचार और अराजकता ही हद हो गयी, मंहगाई सभी सीमाएं तोड़कर बाहर निकल गयी। जीवनोपयोगी चीजें आम आदमी की पहुंच से बाहर हो रही हैं। जब से मनमोहन सरकार ने सत्ता संभाली तब से लेकर वर्तमान तक मंहगाई में 150 प्रतिशत की वृद्धि हो गयी है। पहले जो महीने का राशन दो हजार का आता था अब वह 5 हजार का आ रहा है। अब रही-सही कसर गैस के दामों ने पूरी कर दी। पार्लियामेंट में जनता अपने प्रतिनिधियों को चुनकर इसलिए भेजती है कि वह उनके दुख दर्द को संसद के सामने उनका प्रतिनिधि बन कर रखे। लेकिन चुने हुए जनप्रतिनिधि अपनी सुख सुविधाओं के लिए लालायित रहते हैं। जब - तब अपनी तनख्वाह और भत्ते बढाते रहते हैं। आम जनता की भूख से उन्हे कोई लेना देना नहीं। हालात तो यह हैं कि वर्तमान संसद में लगभग 300 सांसद ऐसे हैं जो करोड़पति हैं। जिसका पेट भरा हो वह आम आदमी की भूख को क्या समझेगा? आज गैस सिलेंडर का बढा हुआ मूल्य सीधे-सीधे आम आदमी के पेट पर चोट है। कमजोर विपक्ष होने का भी परिणाम भी झेलना पड़ रहा है। सारे ही चोर चोर मौसेरे भाई हैं, एक सांप नाथ और एक नाग नाथ। अगर विपक्ष मजबूत होता तो इस गैस एवं डीजल मूल्य वृद्धि का आधी रात को ही घरों से निकल कर सड़क पर विरोध होना चाहिए था। वैसे भी यह मूल्य वृद्धि कांग्रेस के ताबूत में आखरी कील साबित होगी॥
गैस सिलेंडर एवं डीजल के मूल्य बढने पर कुछ व्यंग्य चित्रकार मित्रों ने तूलिका से विचारों को अभिव्यक्त किया है। आज की पेसल वार्ता में कुछ व्यंग्य चित्रों का सैर कीजिए……… प्रस्तुत है आज की वार्ता ………













