सोमवार, 14 जून 2010

टन्न और चियर्स --प्रियतम होते पास अगर----ब्लॉग 4 वार्ता---ललित शर्मा

दो दिनों की यात्रा के कारण वार्ता लिखने में चूक हो गई, अभी समय मिलते ही कुछ चिट्ठों के लिंक आप तक पहुचाते हैं. चलते हैं आपके साथ ब्लॉग 4 वार्ता पर तथा पेश करते हैं कुछ चिट्ठे.........

पहला चिटठा लेते हैं क्या आपने कभी देखा है ऐसा सम्मलेन ? कवि सम्मलेन और लोकतंत्र, हर बार लोगों को ठगने के बावजूद अपनी लोकप्रियता और आम जन की आस्था के कारण अस्तित्व में बने रहते हैं | शहर में विराट कवि सम्मलेन का आयोजन होने जा रहा है इसे कई दिनों से प्रचारित औ...झप्पी से जुड़ते हैं दिल संजय दत्त ने मुन्नाभाई एमबीबीएस में हिंदुस्तानियों को कुछ नए शब्द दिये हैं. एक है-जादू की झप्पी, हमारे यहाँ किसी के स्वागत में उससे गले मिलने की रवायत पुरानी है, अब विज्ञान ने इस बात पर ...

औजार के प्रति लगाव  JAPANI MAUSI KI बात कल जापान के वैज्ञानिक उपग्रह, क्षुद्रघह अंवेषी, हायाबुसा 7 सालों के बाद अंतरि क्ष से वापस आया। सालों अनेक काम करके आखिर वायुमंडल में आकर जल गया। इस हायबुसा को भूरि प्रशांसा करते आवाज़ जापान में भरा था। ज़र... अम्माजी का लचीलापन (लघु कथा ) अम्माजी की तीखी आवाज़ घर से सटे छोटे से किचन गार्डेन से पार होती हुई पूजा करती हुए शुभी के कानों तक पहुंची । कल ही गाँव से आई है अम्माजी और आज सुबह सुबह पूरे घर की व्यवस्थाओं का जायजा लेते हुए किचन गार...

प्रियतम होते पास अगरप्रियतम होते पास अगर मिट जाती है प्यास जिगर ढ़ूँढ़ रहा हूँ मैं बर्षों से प्यार भरी वो खास नजर टूटे दिल की तस्वीरों का देता है आभास अधर गिरकर रोज सम्भल जाएं तो बढ़ता है विश्वास मगर तंत्र कैद है शीतल घर म...पहली बार दारु.. मैगी, सुट्टे के बाद(झाँसी के किस्से... हास्य से)--------->>>दीपक 'मशाल'  . अब जब मैगी और सुट्टे के प्रथम पान की कथा आपसे बिन पूछे ही कह सुनाई तो सोचता हूँ कि मदिरापान पुराण क्यों छोड़ा जाए??? वैसे भी इस मामले में मैं मोतीलाल नेहरु जी को ठीक मानता हूँ कि जब गांधी जी ने उनसे एक बा...

भारत में कुपोषण चिन्ता ही नहीं चिन्तन भी कीजिये श्रद्धा मंडलोई की रिपोर्ट में वे कहतीं हैं "यूनिसेफ के मुताबिक विकसित देशों में 150 मिलियन (15 करोड़) बच्चे कुपोषण का शिकार हैं। जैसाकि हम सभी जानते हैं भारत दक्षिण एशिया में बसा हुआ है, जहां करीब 78 मिलि... ताऊ पहेली - 78 (Hazarduari Palace Museum, Murshidabad ) विजेता श्री Smart Indian - स्मार्ट इंडियन  प्रिय भाईयो और बहणों, भतीजों और भतीजियों आप सबको घणी रामराम ! हम आपकी सेवा में हाजिर हैं ताऊ पहेली 78 का जवाब लेकर. कल की ताऊ पहेली का सही उत्तर है Hazarduari Palace Museum, Murshidabad (West Bengal) और इ...

जीवन..... पुनर्निर्माण के दौराहे पर पिछली पोस्ट से लगातार (५) खट्टी मीठी जिंदगी के टेढ़े मेढ़े रास्तों पर, मीठे मीठे सपनो की बात ही न्यारी है/ जिंदगी के साथ साथ जनम लेते हैं सपने, सपनो ... घर में जगह ए़क घर बनाया है हमने भी रख कर सपनो को गिरवी घर में जुटाई जरुरत और गैर जरुरत के सामान कुछ सुविधाएँ और कुछ देखा देखी ख्याल रखा घर कैसा लगेगा दोस्तों की नजरों में फिक्र की कैसा लगेगा घर पडोसी की नजरों में ब...

टन्न और चियर्स ! एक साथ ऊपर उठकर हवा में छलकते पैमाने, मदयम 'टन्न' की स्वर लहरी, चेहरे पे मंद-मंद बिखरती सारे दुःख-दर्द , ग़मों पर मानो कोई विजयी मुस्कराहट , और मटकती आँखों का वो नशीला अंदाज ! मुद्दत से, सोचता हूँ पता नहीं क्...तू तो यशोदा है मगर मैं कृष्ण न बना...जब भी मैं गिरा आँख से आँसू तेरे गिरा... मुझको जो सदा थामता आँचल का वो सिरा... शीत मे छाती से वो चिपका हुआ बचपन... वो गोद मे तेरी कहीं दुबका हुआ बचपन... मैं चल रहा समेटते यादें यूँ अनमना... तू तो यशोदा है ...

जन जन तक ज्‍योतिष के ज्ञान को ले जाने का प्रयास - ३ आज एक बार फिर से शीर्षक में परिवर्तन करते हुए पिछली कडी को आगे बढा रही हूं। हमारा सामना अक्‍सर कुछ वैसे लोगों से होता है , जो ऐसे तो कभी ग्रहों या ज्‍योतिष पर विश्‍वास नहीं करते , पर जब कभी लंबे समय तक चलन...शहरोज़ भाई को समर्पित एक कविता...खुशदीप दो दिन से मेरठ था...आज आकर नेट खोला तो *सतीश सक्सेना* भाई की पोस्ट और *अविनाश वाचस्पति* भाई की ईमेल...*शहरोज़* भाई को लेकर पढ़ीं...तब से मन इतना खट्टा है कि बता नहीं सकता...देश के सिस्टम पर क्रोध भी बड़ा आ...

सेटिंग और दलाली का मजा... राज्य बनने के पहले भोपाल के पत्रकारों और पत्रकारिता की स्थिति को लेक रायपुर में अक्सर निंदा की जाती थी कि वहां किस तरह की पत्रकारिता होती है कैसे पत्रकार दो-पांच के लिए मंत्रियों और अधिकारियों से सेटिंग कर ...अब आया ऊँट पहाड़ के नीचे अब आया ऊँट पहाड़ के नीचे* हमें क्या मालूम था, लोगों के आशीर्वाद मिल रहते थे वे थे सब "छद्म" और थे हम आँख मीचे अब न रहेगा बांस ना रहेगी बांसुरी "*घुरुवा" *हट जाएगा हम तो लेते हैं विदा इस ब्लॉग की दुनिया से, ...

जिंदगियाँ सँवारने वाला हो तलाक कानून डॉ. महेश परिमल* हिंदू विवाह कानून में संशोधन को केंद्र ने मंजूरी दे दी है। इसके अनुसार एक साथ रहते हुए दंपति को लगे कि अब साथ-साथ रहना मुश्किल है, तो उन्हें आराम से तलाक मिल जाएगा। देखा जाए, तो तलाक एक ऐ... हमें तो सिर उठाकर जीने की आदत है ~~~ माना कि आप कद में मुझसे बहुत बड़े हो* *पर मेरे सामने तो सिर झुकाये खड़े हो * *हमें तो सिर उठाकर जीने की आदत है* *रास्ता दीजिये मुझको, क्यूँ रास्ते में अड़े हो * **  गुगल सर्च से स...

ब्लोगर महान नहीं होता, महान होता है पोस्ट सीनियर ब्लोगर, जूनियर ब्लोगर, बड़े ब्लोगर, छोटे ब्लोगर, महान ब्लोगर .... आखिर क्या है यह? ब्लोगर महान होता है या उसका पोस्ट उसे महान बनाता है? हमारा तो मानना है कि सिर्फ रचना ही छोटी, बड़ी या महान होती है जो...ओह ले भाई, हम्बै, हरियाणवी मखौल आज की पोस्ट श्री ताऊ रामपुरिया जी, श्री ललित शर्मा जी, श्री राज भाटिया जी, श्री डाO टी एस दराल जी, श्री मो सम कौन जी, श्री नीरज जाट जी और हरियाणवी पसन्द करने और समझने वालों के लिये स्पेशली प्रकाशित की है। ...

अब लेते हैं विराम ---आप सभी को ललित शर्मा का राम राम

रविवार, 13 जून 2010

अचानकमार (अमरकंटक) के घने जंगलों में..ललकार रहे हैं अलबेला जी …चूहा तो महज़ प्राणी है

दोस्तों…आज बड़े दिनों बाद इस चर्चा के जरिये आप सबसे रूबरू होने का मौका मिला है …अपनी पसंद के कुछ लिंक दे रहा हूँ..उम्मीद है कि आपको भी पसंद आएंगे
 
ललकार रहे हैं अलबेला जी
बहुत घमण्ड है अपने रिकोर्ड पर बी एस पाबला को 

बता रहे हैं योगेन्द्र मौदगिल जी कि…
छोरियां क्या से क्या हो गई …


 maudgil
अतिथि तुम कब आओगे?
जूनियर ब्‍लाँगर एसोसिएशन इलाहाबाद मीट "आधिकारिक निमंत्रण पत्र"
देखिये…खेल-खेल में संगीता जी क्या देन का प्रयास कर रही हैं?
खेल खेल में ज्‍योतिष की जानकारी देने का प्रयास - 2sangita
पहली बार मैग्गी…पहली बार सूट्टा…सब सोच रहे होंगे ये सांड अकेला क्यूँ छुट्टा dipak हिन्दुस्तानी होने के फायदे बता रहे हैं योगेश शर्मा योगेश शर्मा

अचानकमार (अमरकंटक) के घने जंगलों में गुप्त ब्लॉगर मीट

Aviary maplandia-com Picture 1
कसाब के बैडलक के बारे में जानिए क्रितिश भट्ट के इस कार्टून से

cartoon01
 
हरिभूमि में प्रकाशित शाह नवाज़ का व्यंग्य पढ़िए
"चूहा तो महज़ प्राणी है"

Aviary blogvani-com Picture 1

शनिवार, 12 जून 2010

शनिश्चरी चर्चा गिरीश बिल्लोरे की ओर से

आदरणीय पाठिका एवम पाठक गण गिरीश का प्रणाम स्वीकारिये डाक्टर आशुतोष शुक्ला की पोस्ट :भोपाल मुद्दे से भटकाव..अर्चना जी के स्वरों में सुनिये शास्त्री जी का गीत एक गीत.....................पॉड्कास्ट.......उन्मुक्त पर यह सवाल भी   नाई की दाढ़ी को कौन बनाता है     हे पंगेच्छु ब्लागर! तुम्हारे अंतस का ब्लागर कीट ..नित्य नए पंगें का सृ्जन करता है..और करता है रूप बदल ...नित्य नईं बकवास.... पोस्ट हमको तो  पसंद आ  गई है आप भी  देखिये यहां . और आज़ की ख़बर से रूबरू होना चाहें तो आईये इधर   राजतन्त्र पर आई इस पोस्ट को तो प्रिन्ट-मीडिया को छापनी चाहिये  ? कथित आदरणीयों की नज़र इधर कब जायेगी ? महाशक्ति की पोस्ट ज़रूर देखिये यहां......पिताजी पर आई पोस्ट क्या कहने लाज़वाब इधर देखिये और इनके इन ब्लागस का तो ज़वाब नहीं....जो मैं हूं नुक्‍कड़ अविनाश वाचस्पति तेताला बगीची झकाझक टाइम्स...आज़कल बज़ पर भी कमाल हो रहा है इन्दु ताई नौ रत्नों की तलाश में हैं अकबर के दरबार में 'नवरत्न' थे . ये सभी अपने अपने क्षेत्र के सर्वश्रेष्ठ,माहिर और विद्वान थे यानि अद्वितीय. तानसेन ,बीरबल,अब्दुल रहीम खानखाना,राजा टोडरमल .............???????????? क्या आप में से कोई बता सकता है,प्लीज़.विष्णु प्रभाकर जी की कहानी हिन्द युग्म पर देखी ही होगी .पाबला जी ने बताया जुगाली जनसत्ता पर है पोस्ट प्रभावी है आप भी देखिये यहां ....[jugaali.jpg] ललित . काम पर ताज़ा मामला देखिये बुलन्द छत्तीसगढ़ के ब्लागर्स के लिये स्थान तय कर दिया है  https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEiJ2tGP1TypgywwjFNtMn_UExbnGSWN-MGrY-NeebezPSrOLwEXwLzuYKIZM_fwoGlE0Rd-sDViKOM5dlC7JwRud73SN-J9DFtM1JdbdZqCy4DBrkoUBTFAYGm6-ACruWkoHf0tYfGFgSoV/s1600/buland.JPG कर भी लो खुल कर बातैं अदा जी की पोस्ट पसन्द आई......!आज़ की चर्चा इधर ही खत्म करने की इज़ाज़त दीजिये शेष एग्रीगेटर्स पर तलाशते रहिये चलते चलते कल्पतरु का आलेख देखने योग्य है ज़रूर देखिये यहां 

मित्रो आज शनिवार है आस्था वश शनि मन्दिर जाईये तो आस पास देखिये कोई न कोई बुज़ुर्ग भिक्षु अवश्य मिलेगा ... बस आप को उसके लिये कुछ साथ ले जाना है शायद शनिदेव को आपका यह त्याग भा जाये... मैने ऐसा किया था मुझे कुछ नया ही हासिल हुआ आप भी देखिये यह प्रयोग करके ...............

क्या यही न्याय है?--विशेष वार्ता--भोपाल गैस कांड पर-----ललित शर्मा

भोपाल गैस नरसंहार कांड पर आए फ़ैसले से पूरा भारत स्तब्ध है, इस विषय पर प्रिंट मीडिया के साथ-साथ ब्लाग जगत भी अपनी राय रख रहा है। आज हम सिर्फ़ चर्चा करेंगे भोपाल गैस कांड पर राय रखने वाले कुछ चुनिंदा ब्लागों की। आईए अब मै ललित शर्मा आपको आज की ब्लाग4वार्ता पर ले चलता हूँ.............

सबसे पहले चलते हैं सीधी खरी बात पर जहां डॉक्टर आशुतोष शुक्ला कह रहे हैं कि भोपाल कांड पर फैसले का दिन २/३ दिसंबर १९८४ की वह काली रात जो भोपाल वासियों के लिए मिथाइल आइसो साइनेट मौत का जो मंज़र लेकर आई थी उसकी काली यादें आज भी उनके में ताज़ा हैं. यूनियन कार्बाइड के कीटनाशक संयंत्र से निकली इस विषैली गैस ने सोते हुए बहुत से लोगों के लिए वह आख़िरी नींद साबित15,274 लोगों की मौत, 2 साल की सज़ा? भोपाल गैस त्रासदी, 15,274 लोगों की मौत, पीड़ित परिवारों ने लड़ी 25 साल तक लड़ाई, 25 साल बाद फैसला आता है, याद रहे फैसला अभी ज़िला अदालत का है। इस मामले के आठों आरोपियों को धारा 304(A) के तहत दोषी ठहराया गया है, जिसमें अधिकतम 2 साल की सज़ा अथवा पांच हज़ार--
  
क्या यही न्याय है ?? - शिवम् मिश्रा त्रासदी के 25 वर्ष बाद आया फैसला - भोपाल गैस कांड के सभी आरोपी दोषी करार भोपाल की यूनियन कार्बाइड गैस त्रासदी को 25 वर्ष से अधिक समय बीत जाने के बाद न्यायालय ने 23 साल की सुनवाई के बाद सोमवार को इस मामले में आठ लोगों को दोषी करार दिया और यह फैसला सुनाने--भोपाल गैस कांड के अभियुक्तों को इनाम ,वारेन एंडरसन को अमेरिका में सुरक्षित रहने का पुरस्कार -----? ख़ूनी टेंक नंबर-610जिससे गैस लिक हुआ था हमें शर्म आती है अपने आप को भारतीय कहते हुए ? क्योंकि यहाँ न्याय और जाँच कर दोषियों को सजा देने कि कोई भी प्रक्रियाख़ूनी टेंक नंबर-610जिससे गैस लिक हुआ था हमें शर्म आती है अपने आप को भारतीय कहते हुए ? क्योंकि यहाँ न्याय और जाँच कर दोषियों को सजा देने कि कोई भी प्रक्रिया--
  
यदि ये ही इन्साफ है तो मंजूर नहीं...कुछ तो विचार करो कानूनविदों भोपाल गैस काण्ड ................... आज हुई है सजा..............पूरे पच्चीस साल बाद................क्या इसी को इन्साफ कहते हैं?इन्साफ के लिए क्या इतने वर्षों का इंतज़ार सही है?यही लोकतंत्र की शक्ति कहलाएगी?क्या प्रभावित परिवार सुकून महसूस-दुनिया का सबसे बड़ा लूटतंत्र हिंदुस्तान हत्यारा है ये तंत्र किसको सज़ा दोगेन्याय का ढोंग है किसको सज़ा दोगेबच गया हजारों लोगों का हत्याराबीसियों साल लग गए ये जानने मेंदो-दो पैसे की जान है हमारीकौड़ी-कौड़ी में बिकता है न्यायकिसको सज़ा मिलेगी कौन सज़ा देगासोते हुए लोग चले गए मौत के मुंह--
  
अमेरिका को उम्मीद है कि फैसला दुर्घटना में शिकार लोगों के हित में होगा !! दुनिया के सबसे भयावह औद्योगिक आपदा भोपाल गैस त्रासदी के लिए यूनियन कार्बाइड कंपनी के खिलाफ किसी तरह की कार्रवाई किए जाने की मांग को अमेरिका ने सिरे से खारिज कर दिया।1984 में हुई इस त्रासदी में 15 हजार से ज्यादा लोगों ने दम तोड़ दिया था।अमेरिका ने उम्मीद--श्रवण जी! अब क्या बचा है? भरोसा तो उठ चुका है आज भास्कर में श्रवण गर्ग की विशेष टिप्पणी  "डर त्रासदी का नहीं भरोसा उठ जाने का है", मुखपृष्ठ पर प्रकाशित हुई है। आप इस टिप्पणी को उस के शीर्षक पर चटका लगा कर पूरा पढ़ सकते हैं। यहाँ उस का अंतिम चरण प्रस्तुत है--हकीकत तो यह है कि अपनी हिफाजत को लेकर--

गैस कांड पर जिम्‍मेदारी से भागती कांग्रेस गैस कांड पर कांग्रेस को तोडना होगा मौन!अब बढेगी अर्जुन सिंह की पूछ परखउपेक्षा से आहत अर्जुन उठा सकते हैं गांडीवउघडती जा रही हैं षणयंत्रों की परतेंबात निकली है तो दूर तलक जाएगी(लिमटी खरे)छब्बीस साल पहले जब देश के हृदय प्रदेश में दुनिया की सबसे बडी--इन्होंने बेच खाए गैस पीड़ितों के कफ़न... भोपाल गैस कांड पर हाल में आये फैसले के बाद बहुत लोगों ने इस बारे में काफी कुछ लिखा, अपना विरोध प्रगट किया, मगर मेरे नज़रिए से इस बारे में एक ऐसा मुद्दा अछूता रह गया है जिस पर भी गौर किया जाना बेहद ज़रूरी है. भोपाल के हज़ारों-लाखों गैस पीड़ितों-

चलते चलते एक कार्टून



आज की वार्ता को देते हैं विराम--आपको ललित शर्मा का राम राम

खुशखबरी-ब्लाग4वार्ता में सम्मिलित कुछ चिट्ठों की चर्चा बुलंद छत्तीसगढ के कालम ब्लाग4वार्ता में प्रति सोमवार की जाएगी।

शुक्रवार, 11 जून 2010

जूता-सास गारी देवे-न अगाड़ी न पिछाड़ी -ब्लाग4वार्ता------ललित शर्मा

आज ब्लाग वार्ता विलम्ब हो गयी क्योंकि कल से नेट खराब चल रहा था।एक ब्लागर मीट की चर्चा है अविनाश जी के ब्लाग पर। उन्हे हमारी शुभकामनाएं, ब्लागर मीट होनी चाहिए, ब्लागर मिलते रहने चाहिए। यह ब्लाग जगत के लिए अच्छा ही है। अब मै ललित शर्मा आपको फ़टाफ़ट कुछ लिंक दे रहा हुँ.............

सबसे पहले लेते हैं रजनीश परिहार जी का चिट्ठा--दोष एंडरसन का नहीं हमारी व्यवस्था का है... भोपाल गैस काण्ड एक बार फिर चर्चा में है..मिडिया में एंडरसन के बारे में बहुत कुछ लिखा जा रहा है !अब तत्कालीन कलेक्टर मोती सिंह ने कई नयी बातें सामने रखी है!ये सच है की भोपाल गैस कांड का सबसे बड़ा गुनाहगार ...बाबूलाल दमदार,लाचार है सरकार!-ऐसे फैसलों से ही ईमानदार होते हैं हताश वैसे तो पहले से ही इस बात का अंदेशा था कि आईएएस बाबूलाल अग्रवाल साफ बच निकलेंगे। अपनी दमदारी का लोहा मनवा चुके पूर्व कृषि सचिव बाबूलाल को जिस तरह से निलंबित करने में सर...

बेतहाशा काम, बेशुमार दाम, इससे हुई मौतें तमाम *डॉ. महेश परिमल* एयर इंडिया एक्सप्रेस की दुबई से मेंगलोर आने वाली फ्लाइट दुर्घटनाग्रस्त हो गई। इसके कारणों की जाँच चल रही है। ब्लेक बॉक्स मिल गया है। अभी तक जो भी पता चला है, उससे यही लगता है कि यह दुर्घट... आया यौवन का ज्वार--एक गीत रामेश्वर शर्मा जी छत्तीसगढ एक जाने माने कवि एवं साहित्यकार हैं। इन्होने कई छत्तीसगढी फ़िल्मों के लिए गीत लिखे हैं। हिन्दी और छत्तीसगढी में निरंतर लेखन कार्य करते हैं। साथ ही साथ भोजपुरी में भी लिखते हैं। इ...

प्रीत का रंगप्रीत चदरिया ऐसी ओढ़ी हो गयी मैं बेगानी अपना पता खोजती डोलूं बन के मैं दीवानी बांसुरी की धुन पर वन -वन खोजूं बन के मैं मतवाली श्याम प्रीत की ओढनी ओढ़ के हो गयीं मैं अनजानी श्याम के रंग में ऐसी रंग गयी...आओ हुजुर तुमको सितारों में ले चलूँ आज हम ब्लोगोत्सव की सुनहरी यादों को आपके समक्ष रखने का विनम्र प्रयास कर रहे हैं , ताकि उन महत्वपूर्ण क्षणों को आप करीब से महसूस कर सकें जिससे आप वंचित रह गए थे . हम शुरुआत ब्लोगोत्सव के समापन समारोह से कर...

हताश और निराश लोगों.. शायद यह कविता आपके काम आ जाए जो कोई भी यह कहता है कि वह जीवन में कभी निराश नहीं हुआ तो शायद वह झूठ बोलता है। फरेब और मक्कारी का पंजा जब संवेदनशील आदमी को जकड़ता है तो आदमी मौत को भी गले लगाने के लिए आतुर हो जाता है। एक दिन ऐसे ही निरा... भोपाल गैस त्रासदी : उस दिन क्या हुआ था?-तब मैं पैदा भी नहीं हुआ था। मुझे आज तक यह नही पता था कि उस दिन आखिर क्या हुआ था? सामान्य ज्ञान की किताबों में थोड़ा सा लिखा रहता, ऐसी दर्दनाक घटना के बारे में सुन कर ज्यादा जानने की इच्छा होती लेकिन...

यह सड़क कहीं नहीं जाती... आज की पोस्ट सचित्र देने का मूड हुआ है. जीवन की आपाधापी में कई चित्र ऐसे सामने आ जाते हैं कि मुंह से बरबस वाह निकल जाता है, ऐसे ही कु छ फोटो मुझे मिले, जिन्हे मै आपसे साझा करने का लोभ रोक... क्यों नींद उनको सारी रात नहीं आती---- भाई तिलक राज कपूर जी का लेख पढ़कर ग़ज़ल लिखना सीखने का प्रयास किया है । इस में मत्ला और मक्ता सहित सिर्फ पांच शेर (अश`आर ) कहे हैं । इसमें काफिया --आत है जैसे गात , रात , बात आदि । रदीफ़ है --नहीं आती । पहले...

सास गारी देवे दिल्ली-6 पर मिली टिप्पणियों के बाद 'सास गारी ... ' पारंपरिक छत्तीसगढ़ी लोक गीत का मूलतः रिकार्डेड 'ऑडियो' और 'टेक्स्ट' देना जरूरी लगा, इसी दौरान एक छत्तीसगढ़ी फिल्म में फिर से यह गीत आया है। हबीब तनवीर जी की...जीवन पथ जीवन के छोटे से पथ पर कदमों के छोटे से रथ पर बढते हैं हम जीवन पथ पर पग-पग रखकर बढते हैं हम ऊंचे-नीचे जीवन पथ पर मिलते हैं कुछ ऎसे पत्थर देते हैं जो हमको टक्कर खाते ठोकर - देते ठोकर टक्कर देते बढते हैं हम जी...

जूता जूता पैरों में होता है सभी जानते हैं कोई नयी बात नहीं लेकिन जूता पैरो की ठोकरों में रहता है सदैव झेलता हुआ तिरस्कार अवहेलना हां मैं कर रहा हूं जूते की बात जो पैरों में नहीं हमारे बीच रहता है -- न अगाड़ी न पिछाड़ी ... उफ्फ !! ये नई गाड़ी (लघुकथा) *मार साले को .... अबे तेरे बाप की गाड़ी है जो खरोच मार दिया. पकड़ लो साले को ! * *और मैं भी नई चमचमाती गाड़ी को देखने लगा. खरोंच को भी देखने की जिज्ञासा हुई. पूरी गाड़ी देखा पर खरोंच नजर नही आई. * *उधर उस ...

भला नीबू में क्या खासियत सही कहा न मैंने.नीबू में तो एक ही गुण होता है - पानी, सलाद और भोजन के स्वाद में ज़रा सी मीठी-मीठी खटास पैदा करना और ये बात तो सब जानते हैं. ये कौन सी नयी बात है ? ज़रा याद कीजिए कि बचपन में दोपहर में जब माता...बचपन-शोभना 'शुभि' बहुत दिन हुए कवितायें लिखते हुए. आज सोचा एक और लिखू पर न जाने कैसे दिमाग में एक बात आ गयी. या यूँ कहो कुछ यादें दिमाग पर छा गयी. जून का महीना, गर्मी ने है सुख छीना, याद आई गयी वो बचपन की गर्मी की छुट्टियाँ...

खोटे सिक्के क्यों चलाता है स्वतन्त्र देश में लागू होता है हम पर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार चलती है लेखनी हमारी जिसमे होती नही धार आता नहीं है हमें किसी से लेना उधार प्रतिबिम्ब हमारा कहता है हमसे मालूम है तुझे स...और ऐसे शुरू होती है लड़ाई...खुशदीप  मेरे दोस्त पीटर और उसकी पत्नी रबैका के बीच लड़ाई की शुरुआत कैसे होती है... पीटर रबैका को कैंडल डिनर के लिए रेस्तरां ले गया... पीटर ने रेस्तरां में अपने लिए ऑर्डर दिया...*चिकन सूप, चिकन रोस्टेड, चिकन कोर...

नापसन्दी का जो चटका है हमारा ....(पैरोडी...ये जो चिलमन है दुश्मन है हमारी ) नापसन्दी का जो चटका है हमारा इतना तगड़ा ये फटका है हमारा दूसरा और कोई यहाँ क्यूँ रहे मेरी ही पोस्ट के दरमियां क्यूँ रहे हाँ यहाँ क्यूँ रहे ये यहाँ क्यूँ रहे हां जी हां क्यूँ रहे ये जो हाट लिस्ट है...बचपन (माँ की गोद में)खट्टी मीठी जिंदगी के टेढ़े मेढ़े रास्तों पर, मीठे मीठे सपनो की बात ही न्यारी है/ जिंदगी के साथ साथ जनम लेते हैं सपने, सपनो के साथ चलती जिंदगी हमारी है/ जीवन का पहला साल, सपनो से मालामाल, माँ की गोद मी...

सुनिए पत्नी म्हात्तम--ताऊ शेखावाटी द्वारा--------ललित शर्मा कई दिनों पहले ताऊ शेखावाटी ने मुझे फ़ोन पर बताया था कि वे रायपुर पहुंच रहे हैं 7 तारीख को प्रखर समाचार वालों ने धमतरी में कवि सम्मेलन में बुलाया है। हमें भी इंतजार था कि ताऊ जी से पुन: मुलाकात होगी। ताऊ जी...एक संपादक ने किया पत्रकारिता को शर्मसार पत्रकारिता जगत के इतिहास का कल का दिन एक काला दिन था। काला दिन इसलिए कि एक संपादक की करतूत के कारण सारा पत्रकारिता जगत शर्मसार हो गया है। कम से कम हमारे ढाई दशक की पत्रकारिता में तो हमने ऐसा न कभी देखा और ...


अब देते हैं वार्ता को विराम - सभी को ललित शर्मा का राम-राम
---------------

गुरुवार, 10 जून 2010

टूटी तो नींद है सपने नहीं--एक कविता बस छोटी सी--ब्लाग4वार्ता---ललित शर्मा

सरकार ने कहा है कि जनगणना के वक्त दी जाने वाली रसीद पर्ची को संभाल कर रखना है, बाद में इसका इस्तेमाल राष्ट्रिय जनगणना रजिस्टर एवं चेहरे एवं उंगलियों की फ़ोटो खींचने के समय की जाएगी। हमने भी जनगणना के बाद पर्ची को मात्र औपचारिकता समझ कर कूड़े दान में डाल दिया था। अब पर्ची का महत्व मंत्री द्वारा बताया जा रहा है। जनगणना करने वालों ने कहीं पर भी इस पर्ची को संभाल कर रखने के लिए नहीं कहा। यह जनगणना के बाद कहीं उपयोग में भी आएगी, नहीं बताया। खैर हमने तो पर्ची ढुंढ ली, लेकिन गांवों में क्या होगा? जब पर्ची पर नमक मि्र्च बांध कर बच्चों ने कैरियों से लगा कर खा लि्या होगा। मैं ललित शर्मा आपको ले चलता हुँ आज की ब्लाग4वार्ता पर.................


चेतावनी : इस पोस्ट को कृपया ब्लागर गण ना पढें. आदरणीय ब्लागर गणों, आज मैं आप सभी को यहीं से चेता देना चाहता हूं कि प्लिज...प्लिज...आप यह पोस्ट यहां से आगे मत पढिये. तो आप पूछेंगे* "प्यारे जी" * जब आपने ब्लाग पोस्ट लिखी है तो हम क्यूं नही पढेंगे? तो मैं ...विमोचन समारोह में काव्य पाठ एवं गिरीश पंकज जी का व्याख्यान--सुनिए कार्यक्रम स्थल पर हमारे पहुंचने के पश्चात कवि सम्मेलन का कार्यक्रम प्रारंभ हुआ। इस कवि सम्मेलन में श्री आरिफ़ जी गोंदिया वाले, अनिता कम्बोज, डॉक्टर शाहिद सिद्दकी, एवं एक अन्य कवि (उनका नाम भूल रहा हुं) कवि...

ब्लॉगवाणी, सुन ले अर्ज़ हमारी...खुशदीप ज़रा सामने तो आओ छलिए,* * * *छुप-छुप छलने में क्या राज़ है,* * * *यूं छुप न सकेगा परमात्मा,* * * *मेरी आत्मा की ये आवाज़ है...* सोच रहे होंगे, क्यों सुना रहा हूं आपको ये गाना...अब ये गाना न गाऊं तो और क्य...गुरुदेव के सदविचार और मेरा ब्लागरों से क्षमायाचना सहित एक निवेदन यदि दुर्गुणों को छोड़कर सदाशयता की रीति नीति को अपनाया जा सके तो समझाना चाहिए की मानवी गरिमा के अनु रूप मर्यादा पालन करना बन पड़ता है और हंसती- हँसाती, उठती- उठाती जिंदगी का रहस्य हाथ लग जाता है और ऐसे ह...

पहला चिट्ठा लेते हैं कहां गया कांग्रेस का चाणक्‍य हाशिए पर कांग्रेस का चाणक्य!* *गुमनामी के अंधेरे में जिंदगी बसर करने मजबूर हैं कुंवर साहेब* *अर्जुन सिंह की सेवाओं को दरकिनार किया कांग्रेस ने* *(लिमटी खरे)* * नई दिल्ली 08 जून। बीसवीं सदी के अंतिम क...हरियाणा में दलितों की शामतहरियाणा में दलितों की तो शामत आ गई लगती है. मिर्चपुर की घटना को हुये अभी लगभग एक महीना ही गुजर पाया था कि पलवल जिले के भिटुकी गांव में एक बार फिर दबंगों ने दलितों को पीटा और उनके घरों में आगजनी की. गांव मे...



आदमी में गधा, कुत्ता और बंदर...खुशदीप भगवान ने गधा बनाया और उससे कहा... *तुम गधे रहोगे...सूरज उगने से लेकर डूबने तक पीठ पर बोझ उठाने का काम करोगे...वो भी बिना थके...खाने में तुम्हे घास मिलेगी...तुम में बुद्धि जैसी कोई चीज़ नहीं होगी, इसलिए ...इति मूत्राभिषेक! वो रातें अभी भी मुझे याद हैं. सुस्सू वाली रात के बाद की सहर (सुबह), कहर बन कर टूटती थी मेरे कोमल मन पर. मेरी तरह आप भी तो बिस्तर पर सुस्सू करते बड़े हुए होंगे. अब सुस्सूआएगी तो करेंगे ही. कभी साफ टॉयलेट म...

मैं बादल की सहेली हवा है मेरा नाम मैं बादल की सहेली आकाश पे छा जाती हूँ मैं बनके पहेली आँधियों ने आ के मेरा घर बसाया आकाश के तारों ने उसे खूब सजाया चली जब गंगा की ठंडी पुरवैया धुप के आंगन में खिली बनके चमेली चुपके आ के कान ...टूटी तो नींद है सपने नहीं टुटा करते...!साथ छूटने से रिश्ते नहीं टुटा करते वक्त की धुंध से लम्हे नहीं टुटा करते लोग कहते है मेरा सपना टूट गया टूटी तो नींद है सपने नहीं टुटा करते | * *

मैं एक कविता बस छोटी सी मैं एक कविता बस छोटी सी हर दिल की तह में रहती हूँ. भावो से खिल जाऊं मैं शब्दों से निखर जाऊं मैं मन के अंतस से जो उपजे मोती सी यूँ रच उठती हूँ. मैं एक कविता बस छोटी सी हर दिल की तह में रहती हूँ....वो बूढी जाटणी दादी चेहरे पर झुर्रियां ,थोड़ी झुकी हुई कमर और लाठी के सहारे चलती , लेकिन कड़क आवाज वाली उस बूढी जाटणी दादी की छवि आज वर्षों बाद भी जेहन में ज्यों कि त्यों बनी हुई है | गांव से बाहर लगभग एक किलोमीटर की दूरी पर स्...


जड़ता मन की बहुत खोया ,थोड़ा पाया , खुद को बहुत अकेला पाया , सबने मुंह मोड़ लिया , नाता तुझसे तोड़ लिया , पीड़ा से दिल भर आया , फिर भी कोई प्रतिकार न किया , दरवाजा मन का बंद किया , बातें कई मन में आईं , पर अधरों तक आ कर लौट...कल रुत तुमको तरसाए नभ में उमड़े घन बड़े बिजली भी बिन बात लड़े तुम भी रूठे-रूठे से बोलो कैसे बात बढे बूंदे छेड़े जब मुझको हवा दिखाए रंग नए तुम्हे लगा मैं भूल गई तुम भी तो थे संग खड़े मेघ सदा बरसाए मद जब तुम मेर...

 भूल गया सारी कडुवाहट इतना ज्यादा प्यार मिला ग़ज़ल के हर शेर अपनी बात खुद बयाँ कर देते है. इसलिए उनके लिए कुछ लिखना ठीक नहीं, इसलिए बिना किसी लम्बी व्याख्या के, पेश है मेरी नई ग़ज़ल...* *जितना मुझको मिला सच कहूँ जी भरकर उपहार मिला* *भूल गया...संगीतप्रेमी श्वान बनाम हिज मास्टर्स व्हायस... संगीत... मेलॉडी... हारमोनी...  क्या आपको हिज मास्टर्स व्हायस के रेकॉर्ड्स याद हैं जिसमें संगीत का आनन्द लेते हुए श्वान महाशय का चित्र हुआ करता था? अवश्य ही याद होगा क्योंकि आप इन एसपी और एलपी रेकार्ड्स को अपने रेकॉर्ड प्लेयर पर सुना करत...

क्या तुम मुझसे शादी करोगी ? मुलाकात हुई तुमसे केवल इत्तेफाक से क्या पता था दिल में बस जाओगी पहली मुलाकात में दूर नहीं जाना अब मुझे छोड़कर , वरना क्या मिलेगा तुम्हे इक प्यार भरा दिल तोड़ कर आँखे बिछाये बैठा हूँ , मैं तेरी राहों म...मैं तुम्हारे बच्चे की मां बनने वाली हूं ..क्या आप जानते हैं कि एक हिन्दी फिल्म की कहानी कुल सौ संवादों के आसपास ही घूमती है। आज मैं जिन संवादों का जिक्र करने जा रहा हूं उन संवादों को आपने सैकड़ो बार सुना होगा। हालांकि अब वैसी फिल्में नहीं बन रही ...

दर्द की इक दुकाँ खोल ली मैंने ! झंझटों की पोटली मोल ली मैंने, ब्लोगिंग जीवन में घोल ली मैंने, गम खरीदता हूँ, खुशियाँ बेचता हूँ, दर्द की इक दुकाँ खोल ली मैंने ! सुबह-शाम कंप्यूटर पर जमे रहकर, वक्त कट जाता है,खुद में रमे रहकर, फुर्सत के हिस... इज्जतदार आम आदमी वह उदास और परेशान सा मेरे पास आया. उसके चेहरे पर घबराहट के चिन्ह स्पष्ट दिखलाई पड रहे थे. मैने पूछा "क्या हुआ! ये इतने घबराए हुए से क्यूं हो ?" बोला" देख नहीं रहे, चारों तरह क्या हो रहा है. हत्याएं, लूट-खसो...

तुम भी कभी जवान हुआ करती थी रचना ! आज तुम ढीली पड़ गई हो रचना ! इसलिए पीली पड़ गई हो रचना ! लेकिन वो भी दिन थे ........ जब तुम भी जवान हुआ करती थी तुम ! हाँ हाँ तुम ! तुम भी जब जवान हुआ करती थी तो जोश का तूफ़ान हुआ करती थी लोग रात-र..तुझको मजबूर समझ मै लौट आया.....मै कल तेरे दरवाजे तक गया* *और लौट आया,* *अन्दर जाना जी ने बहुत चाहा* *पर मै लौट आया,* *मन ही मन तेरा दर खटखटाया* *और मै लौट आया,* *लगा मुझे ऐसा कि* *देख लिया है तुमने मुझे कहीं से,* *तुमको भी अनदेखा कर...

मैं लड़की होने की सजा पा रही हूँ .....'इज्ज़त' 'आबरू' ये महज शब्द नहीं हैं नकेल हैं, जिनसे बंधा है मेरा वजूद ये कील हैं, जिनसे टंगा है मेरा मन ये रस्सी है जिससे बंधा है मेरा पेट और ये हथकड़ी हैं जिससे बंधे रहते हैं मेरे हाथ-पाँव.... ता-उम्र ...मैं अभी हारा नहीं हूँ. फैसला होने से पहले, मैं अभी क्यों हार मानूं,* *जग अभी जीता नहीं है, मैं अभी हारा नहीं हूँ.* कुछ इन्हीं पंक्तियों की तर्ज़ पर भोपाल गैस कांड के 26 बरस बाद आये फैसले ने म...

जब हम बादलों पर चले जब हम बादलों पर चले. जी हाँ सही पढ़ा आपने,बादलों पर भी और बादलों के बीच भी. एक सहेली ने अपने फ्रेंड के ऑर्कुट प्रोफाईल में किसी का स्क्रैप देखा ,जिसमे उसने अपने ट्रेकिंग के अनुभव लिखे थे, उसने जानकारी ली और पता चला, वह पहाड़ी हमारे घर से ज्यादा दूर नहीं.हां..! ये शाम उस शाम से जारी हर शाम पर भारी हां..! ये  शामउस शाम से  जारी हर शाम पर भारीजब हुई थी मुलाक़ातखनकती आवाज़ से.... ! आओ..फ़िर उस पहली शाम को याद करें रिक्तता में रंग भरें लौटें उस शाम की तरफ़ जो आज़ हर शाम पे भारी है...!*************************वो जो मुझे खींचता है उस ओर

हिन्दी विकिपिडिया की विकास यात्रा : ५५००० लेख आज हिन्दी विकिपिडिया ने ५५००० लेखों का आंकड़ा भी पार कर लिया। यह कम नहीं है ; फिर भी हमे अभी बहुत लम्बा रास्ता तय करना है। सभी लोग ठान लें कि दो-चार लेखों का योगदान अवश्य करेंगे तो इसे लाखों में पहुँचते देर नहीं लगेगी। आइये, अपने-अपने विशेषज्ञता के ...हिंदू वेदों को इतना अत्यधिक महत्त्व क्यों देते हैं? (लेख थोड़ा दीर्घ है किन्तु अतिरिक्त समय में पढ़े अवश्य विशेष तौर पर हिन्दू लोग क्योंकि उन्हें अपने धर्म के मूल को तो जानना चाहिये कम से कम.) हिंदू धर्म में वेदों का स्थान सबसे महत्वपूर्ण है. सभी हिंदू धार्मिक ग्रन्थ अपनी बातों को प्रमाणित करने के लिये..

बताओ भारतीयों ( Indians) तुम्हारे पास क्या है? मेरे पास ----- है।अमेरिका में प्रत्येक भारतीय की जुबान पर एक ही बात रहती है कि भारत में क्या है? यहाँ कितना चुस्त प्रशासन है, पुलिस कितनी रौबदार है, सड़कों का जाल बिछा है, साफ-सफाई इतनी कि चेहरे पर कभी गर्द जमे ही नहीं। भारत नहीं बोलकर हमेशा कहेंगे इण्डिया में क्या है? श्रीमान बबल्स कुमार की अदाएं बेटी ने जब पहली बार कुत्ता पालने की जिद की तो कुत्ते-बिल्ली से एलर्जिक माता-पिता ने बहला दिया. जब आग्रह की आवृत्ति और दवाब बढ़ने लगे तो यह तय हुआ कि बिटिया रानी एक महीन तक घर के अन्दर रखे पौधों को पानी देनी की ज़िम्मेदारी निभाकर यह सिद्ध करेंगी कि वे एक

चाँद: वो बचपन वाला!! बचपन में गर्मियों में छत पर सोया करते थे. देर रात तक चाँद देखते. उसमें दिखती कभी बुढ़िया की तस्वीर, कभी रुई के फाहे, कभी बर्फ के पहाड़, कभी छोटा होता चाँद और न जाने क्या क्या? एक कल्पना की उड़ान ही तो होती थी बालमन की. मेरे लिए एक खिलौना ही तो था बचपन का ......अब अपनी औकात में रहने लगी है वह ....अब वह कुछ नहीं कहतीचुप ही रहती हैया यूँ कहूँ किवह अब अपनी औकात में रहती है ...भीड़ भरे बाजार मेंसौदा सुलफ करतेटकराते हैं लोगचुन्नी संभालतीबच कर निकल लेती है ....ठसाठस भरी बस मेंधचके लगे बिना भीलड़खड़ाते खड़े मुसाफिरों सेअब वह कोईशिकायत नहीं करती है


चलते चलते एक कार्टुन
* हरियाणा के पूर्व डीजीपी एसपीएस राठौड़ का मामला * * अभी पूरी तरह शांत भी नहीं हुआ है कि प्रदेश के एक * * और पूर्व सीनियर पुलिस ऑफिसर के खिलाफ छेड़छाड़ * * का म...


वार्ता को अब देते है विराम--सभी को ललित शर्मा का राम राम

मंगलवार, 8 जून 2010

एक पैग और---अब तो बस करो--फिजूल खर्ची--ब्लाग4वार्ता-----ललित शर्मा

मानसून आने को है किसानों ने अपनी तैयारी कर रखी है, खेत जोतकर, खाद डाल कर अब इंतजार हो रहा है बरसात का। लेकिन मौसम के भविष्य वक्ताओं ने कहा है कि इस वर्ष बरसात कम होगी। याने फ़िर सूखे का सामना करना पड़ सकता है, अरे यार! जरा शुभ-शुभ बोलो, कहो कि वर्षा अच्छी होगी। सच्चे दिल से प्रार्थना करो भगवान भी सुनेंगे। अब मै ललित शर्मा ले चलता हुँ आपको कुछ उम्दा चिट्ठों की चर्चा पर.............

शुरुवात करते हैं क्रांतिदूत से.तेरा यौवन सुन्दर-वन सा मृग-नयनी सी आंखें तेरी होठ तुम्हारे कमल फ़ूल सा केश घने बादल के जैसा तेरा यौवन सुन्दर-वन सा. तेरा तन हो जैसे चंदन रंग तुम्हारा किरण सूर्य का तेरा मन है मलय पवन सा तेरा यौवन सुन्दर-वन सा. उद्यान-शिला से वक्ष...कारवां गुजर गया गुबार देखते रहे ---एक शाम वरिष्ठ कवि गोपाल दास नीरज जी के साथ --- २८ मई को दिल्ली के हिंदी भवन में सुप्रसिद्ध वरिष्ठ कवि एवम गीतकार श्री गोपाल दास नीरज का एकल काव्य पाठ सुनने का सौभाग्य प्राप्त हुआ । ८६ वर्ष की आयु में भी नीरज जी का कविता के प्रति उत्साह देखकर दंग रह जान...

बेवजह की शोध: फिजूल खर्ची!! एक समाचार पढ़ता था...अब आ गई सिगरेट छुड़ाने वाली मशीन दिल्ली के दो सरकारी अस्पतालों और इनके तंबाकू से निजात दिलाने वाली क्लिनिकों में कंपनयुक्त एक्यूप्रेशर तकनीकी की जल्द ही शुरुआत हो सकती है। जर्मन निर... एक रात अघोरियों के साथ @ अघोरवासा रात के बारह बज चुके थे । उस वातानुकूलित कमरे में मैं , नतालिया और सवेटा मौजूद थे । सवेटा नेट पर किसी फ़्रेंड से चैटिंग में व्यस्त थी । नतालिया बेड पर मेरे पास ही तीन तकियों के सहारे अधलेटी सी बैठी थी । हमने... 

मज़ा शीघ्र चला जाता है, परन्तु कलंक हमेशा लगा रहता है माना कि श्रेष्ठ कार्य में मेहनत पड़ती है, मेहनत शीघ्र समाप्त हो जाती है, परन्तु कीर्ति अमर रहती है; जब कि नीच काम में, चाहे उसके करने में मज़ा भी आता रहा हो, मज़ा शीघ्र चला जाता है, परन्तु कलंक हमेशा लगा ... धन्य है ब्लागदुनिया !!! ब्लागजगत में कदम रखते समय कभी नही सोचा था कि "ब्लागदुनिया" सचमुच इतनी मायावी व प्रभावी होगी ... सचमुच चमत्कार से कम नही है .... न जाने कितने महापुरुषों से परिचय करा दिया ... सचमुच धन्य है ब्लागजगत !!

आपको बुरा लगे तो लगे मगर यह जरूर कहूंगागाय-भैंस एक बार बहुत सारा चारा खा लेती हैं और बाद में आराम से बैठ कर जुगाली करती हैं। मेरी ये पोस्टें भी मेरी जुगाली ही है। पिछली ब्लागर मीट ने मेरे दिमाग में कुछ विचार भर दिये हैं। इस ब्लागर मीट में मुख्य...मेरठ ब्लागर्स मीटिंग, मज़ा आ गया... शनिवार रात तकरीबन दस-सवा दस बजे अविनाश जी का फोन आया कि रविवार को मेरठ चलना है, वहाँ ब्लोगर्स की एक बैठक रखी गई है, मैं नए शहरों की यात्रा ज़्यादा पसंद करता हूँ, सो मना करने का सवाल ही नहीं ...

तिकड़म से ही मिलती हैं टिप्पणियाँ टिप्पणियाँ पाना भला किसे अच्छा नहीं लगता? ऊपर-ऊपर से भले ही हम कहें कि हम टिप्पणियों की परवाह नहीं करते पर जब हम अपने भीतर झाँकते हैं तो लगता है कि हमें भी टिप्पणियाँ पाने में खुशी होती है। *हिन्दी ब्लोगिं...उत्तराखंड की महत्वपूर्ण परम्परा है भिटौली भिटौली शब्द भेंट से बना है जिसका शाब्दिक अर्थ स्थानीय भाषा में मिलने से होता हैए जहां तक इस त्योहार का समबन्ध है तो इसमें शादीशुदा लड़्की के मायके वाले अपनी बहनध्बेटी को उसके ससुराल में जाकर भेंट ;यहां पर ...

सरकती जाये है रुख से नकाब आहिस्ता आहिस्ता आज रविवार का दिन है. आज "*सन डे सत्संग*" का दिन है . आज ध्यान केंद्र में भोजन में खिचड़ी और आमलेट बनाना तय हुआ है .मै आवश्यक सामग्री लेकर ध्यान केंद्र पहुँच गया हूँ .मेरे बाद डाक्टर अनिल वास्ती आये . मैने... हिंसा की देवी,तुम सुन रही हो न..? हिंसा की देवी, तुम सुन रही हो न..? * * * *हिंसा की देवी, * *तुम सुन रही हो न..? * * * *जब तुम अपने कोमल होंठों से गाती हो * *हिंसा के गीत * *तब लगता है, एक सुन्दर फूल* *काँटों के सा...

बस आँखों में दिखता पानी सूखे खेत, सरोवर,झरने,बस आँखों में दिखता पानी हाहाकार मचा है जग में,छाए मेघ न बरसा पानी। भ्रष्टाचार के दलदल में अब,अपना देश धंसा है पूरा कौन उबारे, सबके तन में ठंडा खून रगों का पानी। अब रक्षक को भक...विरोधी समूह के द्वारा प्रशंसा और सम्‍मान .. इससे बडा सुख क्‍या हो सकता है ??अपने तो हमेशा प्रशंसक होते हैं , इसलिए उसकी प्रशंसा आपको उतना सुख नहीं दे सकती , जितना एक विरोधी के द्वारा आपकी प्रशंसा किए जाने पर होता है। एक विरोधी के द्वारा प्रशंसा किए जाने का अर्थ है कि आप सही राह चल...

दीनदयाल शर्मा की कविता - समय समय* गलत काम में गुस्सा आता, धीरज क्यों नहीं धरता मैं। उम्मीदें पालूं दूजों से, खुद करने से डरता मैं।। आलस बहुत बुरी चीज है, किसको कैसे बतलाऊं। आलस की नदिया में बैठा, अपनी गागर भरता मैं।। समय क...अब तो बस करो... सुन लो ये मौन-क्रंदन,* *उसका भी है* *कुछ कहने का मन!* *अभी चल रही थी* *तैयारी उसके आने की,* *अभी विचारो में तुम्हारे* *पनप रहा है उसका दमन,* *तब नहीं सोचा था* *अब सोच रहे हो...* *तब के अवसर को समस्या जा...

मोर लीलावती के लीला - बियंग कहां बोचक के जाबे तें। डोंगरी-पहाड़, अलीन-गलीन, जिहां हाबे, तिहां ले खोज के निकालिहौं। सात तरिया में बांस डारूंगा। केकंरा और मुसुवा के बिला मं हाथ डारहूं। अइसे काहत बइहाय गदहा कस किंजरे लगेंव। हुरहा पोस्टम... बात है कुछ रोज़ पहले की.....बात है कुछ रोज़ पहले की, टेढ़ी मेढी पगडंदियों से गुज़र रहा था... भोर होने वाली थी, पूरब से सूरज का मद्धम प्रकाश बिखर रहा था... पतझड़ के सताए, एक बूढ़े बरगद के नीचे, अचानक ठिठक गया... उन सूखी, बढ़ती उम्र की...

ए का जिनिस ए = यह क्या चीज है आनी बानी के बियन्जन अउ ओखर नाव। काला बचांव अउ काला खांव. एखरे ऊपर एक किस्सा के सुरता आगे. एक झन गवैंहा हा हलवाई के दुकान माँ जाथे अउ कई परकार के चीज माढ़े रथे ओमा ले एक मा इशारा करके पूछथे जी. ए का जिनिस ...क्या आसान, क्या मुश्किल-2...खुशदीप जीत की खुशी का इज़हार करना आसान होता है...* * * *हार को गरिमा के साथ स्वीकारना बहुत मुश्किल...* * * * * * * *हर रात सपना देखना आसान होता है...* * * *सपने को पूरा करने के लिए संघर्ष बहुत मुश्किल...* * * 

एक पैग और जिंदगी में जब भी कदम लडख़ड़ाए और आप गिर भी जाए तो डरना मत हिम्मत और हौसले से अपने को फिर से खड़ा करना और आवाज देना वैटर एक पैग और*  जो हमने दास्ताँ अपनी सुनाई आप क्यों रोये.....आवाज़ 'अदा' की.... आवाज़ 'अदा' की....* जो हमने दास्तां अपनी सुनाई, आप क्यों रोए तबाही तो हमारे दिल पे आई, आप क्यों रोए हमारा दर्द\-ए\-ग़म है ये, इसे क्यों आप सहते हैं ये क्यों आँसू हमारे, आपकी आँखों से बहते हैं ग़मों की ...चित्रावलियाँ-एक मुसाफ़िर के मोबाईल से.............!सूर्योदय हो गया है दूर जंगल में जुआ खेलते लोग (बस इतना ही जूम था मोबाईल में) इटारसी का प्लेट फ़ार्म इटारसी रेल्वे स्टेशन (यहां से मुम्बई एवं गुजरात -गोवा का रास्ता है) लहलहाते खेत सोने (कनक) के ...



चलते चलते एक कार्टून




 वार्ता को देते हैं विराम--सभी को ललित शर्मा का राम राम

Twitter Delicious Facebook Digg Stumbleupon Favorites More