शनिवार, 10 मार्च 2012

ई कइसन होली…सुतलऽ न सुत्ते दिहलऽ ……ब्लॉग4वार्ता……ललित शर्मा

ललित शर्मा का नमस्कार, ब्लॉग4वार्ता का सफ़र दो साला 10 मार्च को पूरा होने वाला  है। दो बरसों में ब्लॉग4वार्ता के 300 फ़ालोवर पूरे हुए। थोड़ा समय अवश्य लगा, लेकिन खिरामा-खिरामा 300 लोगों तक पहुच गए, जिन तक वार्ता की फ़ीड जा रही है। पुरब के इलाके में आज रंग खेला  जा रहा है। होली मनाई जा रही है। हम तो कल ही खेल लिए थे। रंग और भंग दोनो का मजा लिया। लेकिन इस बीच संगीतकार रवि (रविशंकर) हमारे बीच नहीं रहे। एक बड़ी हस्ती के संसार से चले जाने का समाचार होली के धमाल में दब कर रह गया ………उन्हे हमारी विनम्र श्रद्धांजलि………अब चलते हैं आज की वार्ता पर………पढते हैं कुछ उम्दा चिट्ठे………
खिड़की पे बंदर

संघर्षों में जो निखरी,वो औरत है......... - *संघर्षों में जो निखरी,वो औरत है खुशबू बनके जो बिखरी, वो औरत है.. कब तक कोई रोक सका है बहता जल* * वह तो आगे बढ़ता है केवल कल-कल औरत भी निर्मल जल, गंगाधारा ह...'व्‍यंग्‍य का शून्‍यकाल' की अब अगले सप्‍ताह से ई प्रति उपलब्‍ध होगी - मैं आगामी सप्‍ताह में ई बुक्‍स का रूप धर कर आ रही हूं आप सबसे मिलने *प्रकाशक मेरे तुझे होगा अपने प्रकाशक होने पर शक**नित नई तकनीक देखकर अब निकलेगी तेरी च. "होली " वेदों-पुराणों में इससे सम्बंधित अनेक कथाएं मिलती हैं। - पर इतने उल्लास, खुशी, उमंग, वैमन्सय निवारक त्यौहार का स्वरूप आज विकृत होता या किया जा रहा है। हंसी-मजाक की जगह अश्लील गाने, फूहड़ नाच, कुत्सित विचार, द्वि... 
एक ब्लॉगर हुलियारिनों के फ़ंदे में

बेटियाँ (क्षणिकाएं) - *(१) * सुबह सुबह कँवल की पांखुरी पर थिरकती... शबनम की वह बूँद कितनी खुश... कितनी प्यारी लग रही है.... उसे कहाँ पता है.. अभी कुछ ही देर में सूरज की कि...  नाम एक है लेकिन फर्क देखिये ...... - *नाम एक है लेकिन फर्क देखिये * *किसका बेडा पार हुआ ,* *किसका हुआ है **गर्क देखिये .*...... *पहले के लिए ....*......... *टीम* की करारी हार शर्मनाक पराजय ...फागुन महराज अब के गए ले कब अईहव - फागुन महराज, फागुन महराज अब के गए ले कब अईहव ! अरे अब के गए ले कब अईहव, अरे अब के गए ले कब अईहव अरे अब के गए ले कब अईहव, अब के गए ले कब अईहव !! अरे कउन महि... 
एक जबरपुरिया ब्लॉगर भजन गाते हुए 

एक अजन्मे बच्चे की चीख ! - *ये कैसा नीम सन्नाटा है,* *मेरे आने के पहले ही * *चला गया मुझे लाने वाला !* *क़ातिलों के हाथ * *ज़रा भी नहीं कांपे,* *उन्हें अपने बच्चों के * *चेहरे नहीं दि... एक पत्र होली के नाम - प्यारी होली सादर रंगस्ते! उस दिन ड्यूटी समाप्त कर घर वापस लौट रहा था कि अचानक पीठ पर पानी का गुब्बारा किसी ने दे मारा. पीछे मुड़कर देखा तो एक छोटा... औरत होना..! - औरत होना एक अनुभव है, एक एडवेंचर, एक चैलेंज.. हालांकि यहां क्विट करने का ऑप्शन बचता नहीं हमारे पास लेकिन आदत हो जाती है लड़ने की खुद से, परिवार से समाज से.. ... 
डब्बु मिश्रा  की होली

लोक: भोजपुरी- 8: कस कसक मसक गई चोली(निराला) और सुतलऽ न सुत्ते दिहलऽ(लोक) - आज मदनोत्सव है - फागुन महीने की अंतिम तिथि। मदन जो कि अनंग है, जिसमें वह मद है जो मन को बहकाता है, जो देहाभाव की पूर्ति हर प्राणी के अंग अंग समा कर करता है... अंजानी (ब्लॉग) राहों पर चलना संभल के --- - होली के अवसर पर हर वर्ष डॉक्टर्स की विभिन्न संस्थाएं अपने अपने क्षेत्र में होली मनाती हैं । रात को होने वाले कार्यक्रम में कॉकटेल डिनर होता है । बात उससमय ...हमारे बसाये इस घर के सिवा मैं नहीं हूँ .... - हमारी कुंडलियों के ग्रह- नक्षत्रों ने मिलाया हमें लोंग कहते हैं इन्ही नक्षत्रों ने दिया है हमें एक संघर्षपूर्ण जीवन ... मैं हंसती हूँ अक्सर गृह की मजबूत... 
प्रज्ञा चक्षुओं के साथ होली-अशोक बजाज

हम जा कहाँ रहे हैं... - हम जा कहाँ रहे हैं... कांगो में हुआ भीषण विस्फोट एक नन्हें बच्चे को दिया अमानवीय दंड कांप जाता है समाचार पढ़ के मन ईरान चाहता है बम बनाना चीन सैन्य शक्ति को ...ले दे कुसुम रंग चूनरिया - फागुन का मदमस्त महीना नई-नवेली दुल्हन को, जिसे ब्याह के बाद मायके में लिवा लाया गया है, अपने सजन से मिलने के लिए आतुर कर रहा है। किन्तु विवशता यह है कि अब ... राष्ट्रवादी लेखकों के फेस-बुक अकाउंट बंद ! - धन्य हैं वे सभी फेसबुकिये, जिनके लेखन से डरकर 'चिम्पांजी सरकार' उनके अकाउंट बंद कर रही है । और लानत है उन सब पर जिनके खाते अभी तक चालू हैं। अरे सौभाग्य समझ... 
मुंगेरी लाल के हसीन सपने

मेरा वजूद (चोका) - हूँ भला कौन क्या वजूद है मेरा यही सवाल आ डाले मुझे घेरा टूटे सपने जब मुझे डराएँ मेरा वजूद कहीं गुम हो जाए दूर गगन चम... सपा पर आरोप - सरकार बनने से पहले ही जिस तरह से सपा पर राजनैतिक दुश्मनी निकालने के लिए आरोप लगने शुरू हो गए हैं उसके पीछे कहीं न कहीं कुछ गड़बड़ अवश्य है. ताज़ा घटना ... होली ठिठोली (व्यंग्य कविताएं) - घोटालों की होली यूपीए तोड़ रही है, भ्रष्टाचार के रिकार्ड सारे, क्या अफसर, क्या नेता, भष्ट यहां हैं सारे, सरकार के मंत्रियों पर चढ़ा घोटाले का ...कालू गरीब - दवे जी, ये "गे" क्या होता है। - साहब, यूरिया वाली चाय का लुफ़्त उठाते नुक्कड़ में हम खड़े थे कि कालू गरीब फ़िर पहुंच गया। हम तक पहुंचते ही सीधे उसने सवाल ठोका- "दवे जी ये "गे" क्या होता है... 

वार्ता को देते हैं विराम्……मिलते हैं ब्रेक के बाद…राम राम   
  

शुक्रवार, 9 मार्च 2012

होली के साथ घुल कर आया महिला दिवस .. ब्‍लॉग4वार्ता .. संगीता पुरी

नमस्‍कार .. देश में कुछ जगहों पर होली का त्‍यौहार मना लिया गया है और कुछ जगहों पर कल मनाया जाएगा , होली पर बहुत सक्रिय रहें हमारे ब्‍लोगर बंधु .. जमकर लिखा है .. क्‍या क्‍या लिखा देखिए इस स्‍पेशल वार्ता पर ....


प्रति वर्ष फाल्गुन पूर्णिमा के दिन होली पूजन- दहन तथा इससे अगले दिन गुलाल आदि रंगों से उल्लासपूर्ण उत्सव का चित्र भारत भर में कहीं भी देखा जा सकता है। होली दहनके पश्चात् तथा रंग खेलने में सभी परिचितों- अपरिचितों के प्रति सौहार्द एवं भ्रातृत्व का भाव इस पर्व की विलक्षणता को और अधिक विस्तृत छवि प्रदान करता है। मेरे घर में गोबर के उपले बना कर सामुदायिक होली की अग्नि द्वारा घर के आँगन में होली जलाना व उस अग्नि में गेहूँ- जौ के बालों को भूनना, अग्नि को अर्पित करने के पश्चात् घर के पास के परिवारों में उसे राम-राम कहते हुए वितरित करना, इस परम्परा का मैं साक्षी हूं। 


"होली " वेदों-पुराणों में इससे सम्बंधित अनेक कथाएं मिलती हैं।पर इतने उल्लास, खुशी, उमंग, वैमन्सय निवारक त्यौहार का स्वरूप आज विकृत होता या किया जा रहा है। हंसी-मजाक की जगह अश्लील गाने, फूहड़ नाच, कुत्सित विचार, द्विअर्थी संवाद, गंदी गालियों की भरमार, काले-नीले ना छूटने वाले रंगों के साथ-साथ वैर भुनाने के अवसर के रूप में इसका उपयोग कर इस त्यौहार की पावनता को नष्ट करने की जैसे साजिश चल पड़ी है। समय रहते कुछ नहीं हुआ तो धीरे-धीरे लोग इससे विमुख होते चले जायेंगे। होली का त्यौहार कबसे शुरू हुआ यह कहना बहुत ही मुश्किल है। वेदों-पुराणों में इससे सम्बंधित अनेक कथाएं मिलती हैं।


भारतीय परम्परा में अनेक उत्सव आते है | पर्व चाहे लोकिक हो या अलोकिक—एक साधक आत्म – अवेषणा हेतु प्रत्येक त्योंहार से अध्यात्म को ग्रहण कर सकता है | समग्रता से कहा जाये तो प्रतिक्रमण, षडावशयक, होली इत्यादि साधक को अनेक मार्गो से ले जाकर परमात्म-अवस्था की मंजिल को प्राप्त करवाने में अपनी विशेष भूमिका निभाते है |जहाँ एक और चातुर्मासिक पाक्षिक की दृष्टी से होली आत्मालोचन करने का एक विशिष्ठ अवसर है, वहीं दूसरी और रंगों से मनाया जाने वाला वह पर्व हमें इन्ही रंगों के द्वारा आत्म-भूमिकाओं की सर्वश्रेष्ठ अवस्था—-सिद्ध अवस्था में भी प्रस्थापित कर सकता है | किंतु प्रश्न यह है कि क्या मात्र एक दिन के लिए रंगों से खेलना पर्याप्त है ? क्यों न हम जीवन-पर्यन्त इन रंगों का उपयोग करें | हम जीवन भर इन रंगों का उपयोग कैसे करे कि जिससे आत्म-विशोधि की राह पर आगे बढ़ते रह सके |




ऋतुराज का मदमाता यौवन...! सोलह शृंगार सजी पीतवसना प्रकृति रानी...!! अलस मधुमास....!!! आज पुनः मुझे खींचे लिए जाता है मेरे गाँव। वैसे तो मेरे संसार का श्री गणेश ही मेरे गाँव से होता है। स्नातक की शिक्षा तक तो मुझे पता भी नहीं था कि गाँव से अलग भी कोई दुनिया होती है। मैं समझता था लोग दूर शहरों में रहते भले हैं मगर घर सब का गाँव में ही होता है। पता नहीं शायद अभी भी मैं ऐसा ही समझता हूँ। मैं ने पर्व-त्योहार, हाट-बाजार, मेला-मंडप, रीति-व्यवहार सब-कुछ गाँव में ही देखा। सभी पर्वों का उल्लास न्यूनाधिक एक-सा ही होता है। होली में उस उल्लास की उद्दाम अभिव्यक्ति भी होती है या होती थी गाँवों में। बसंत-पंचमी के दिन देवताओं को गुलाल चढ़ाने के बाद फ़गुआ आ जाता था। 

हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी महीने भर से ही हिंदी ब्‍लोगरों को होली का इंतजार था , अबतक साथ साथ मनाते और आनंद लेते जो आ रहे थे। इस साल की होली में धूम कैसे मचायी जाए , कार्यक्रम की रूप रेखा बनाने के लिए कुछ दिन पूर्व ही सभी हिंदी ब्‍लॉगर इकट्ठे हुए थे । जाति , धर्म , विचार , नारी पुरूष के मामले , जो कि अक्‍सर हमारे संबंधों में दरार डालते हैं , को दरकिनार करते हुए उल्‍लासपूर्ण वातावरण में होली मनाने के लिए आभासी दुनिया को वास्‍तविक दुनिया से दूर होना आवश्‍यक था। इसलिए सबसे पहला काम कार्यक्रम के लिए ऐसे स्‍थल का चुनाव करना था , जहां दुनियादारी का कोई मुद्दा रोडा न बने। इसी कारण होली के अवसर पर हिंदी ब्‍लॉग जगत के सभी सदस्‍यों का सर्वसम्‍मति पृथ्‍वी से बाहर जाने का कार्यक्रम बना।


अपनी पारंपरिक सुंदरता और खुशियों के मिश्रण का विहंगम संगम, होली आज बदरंग हो चुकी है। अगर कुछ बचा है तो वह है परम्पराओं के नाम पर रिवाजों को ढोने की मज़बूरी और धार्मिक आस्था, जिसे मानव समाज छोड़ नहीं सकता। एक वह समय होता था, जब होली की खुमारी फागुन के पूरे महीने रहती थी। फाग गाने से लेकर एक दूसरे को अबीर गुलाल लगाने की औपचारिकता तो अभी भी है लेकिन वो चीजें नहीं दिखती जब होली के सामाजिक मायने होते थे। होली का मतलब पुरानी दुश्मनी को भुलाकर एक नये रिश्ते की शुरुआत होती थी। मुझे अभी भी याद है गाँव की गलियों में हुल्लड़ मचाती युवकों की टोली और रंग से बचने के लिए भागते लोग। उस समय मैं बच्चों की श्रेणी में आता था जिसकी अलग टोली होती थी।

होली के साथ घुल कर आए इस महिला दिवस में गुलाल का एक टीका उस औरत के नाम पर भी लगाइएगा जिसमें अदम्य शक्ति है, लय, ताल और संगीत है। दुख के विराट मरूस्थल बनाकर देते पुरूष को स्त्री का इससे बड़ा जवाब क्या होगा कि मारे जाने की तमाम कोशिशों के बावजूद वह मुस्कुरा कर कह दे - थी. हूं.. रहूंगी...।


पुरूष प्रधान समाज में महिलाओं के साथ सदियों से दोयम दर्जे का बर्ताव किया जाता रहा है। इतिहास और संस्कृति की पडताल करेंगें तो पायेंगें कि इस भेदभाव की जडें बहुत गहरी हैं और ये जन मानस में इतनी मजबूती से जड पकड गयी हैं कि इनके विरूद्ध आवाज उठाने पर अनेक तरह की मुश्किलों का सामना करना पडता है। शोचनीय स्थिति यह है कि उत्पीडन का शिकार स्त्री वर्ग भी अपनी स्थिति से क्षुब्ध होने या उससे उभरने के प्रयास करने की अपेक्षा उसी में सन्तोष किये है और कई बार तो उसे ही अपना सम्मान और गौरव मान लेता है। उसके आदर्श हैं सीता,सावित्री,उर्मिला,तारा। इनमें क्या आदर्श है जीवन भर अपमान सहना और पति की मान रक्षा के लिये स्वयं को बलिदान कर देना। 

मित्रों,आपने भी किताबों में पढ़ा होगा कि होली उल्लास और सद्भाव का या फिर असत पर सत की विजय का पर्व है परन्तु आपने यह भी पाया होगा कि किताबों में लिखी बातें अक्सर सच्चाई के धरातल पर गलत निकलती हैं.यह बड़ा ही दुखद है कि आज उल्लास और सद्भाव का त्योहार होली पियक्कड़ई का पर्याय बनकर रह गयी है.अक्सर हमारे किशोर और युवा होली के नाम पर इस दिन इस नामाकुल शराब को मुँह से लगा लेते हैं और फिर यह इस तरह उनके गले पड़ जाती है कि पूरा जीवन कब नशे में बीत जाता है पता ही नहीं चलता. 

आज मदनोत्सव है - फागुन महीने की अंतिम तिथि। मदन जो कि अनंग है, जिसमें वह मद है जो मन को बहकाता है, जो देहाभाव की पूर्ति हर प्राणी के अंग अंग समा कर करता है और जिसके दमन हेतु समाज संहितायें गढ़ता रहा है। स्थान स्थान होली जला वसंत की बिगड़ी बयार शुद्ध कर दी गई है और हम नवरस का सन्देश ले एक पक्ष बाद आने वाले नवसंवत्सर का स्वागत करने को तैयार हैं। कल से चैत चढ़ रहा है, वही चैत जिसके बारे में कहा गया है – चुअत अन्हरवे अँजोर, देहियाँ टुटेले पोर पोर। वही चैत जिसमें हल बेच कर भी सजनी के लिये सजन हार गढ़वाता है। इस लास्य की भूमिका है फागुन माह की होली।


राशिफल -- होलियाना ... होली की ढेर सारी शुभकामनाएँ -----------------


1.मेष -- मेषवालों के लिए खुशखबरी हैं, उनके लिए होली का ये सप्ताह खुशियों से भरा होगा। दही की पोटलियां उनके माथे पर पच पच करने के लिए मचल रही है, यहीं नहीं दोनों हाथों में सालियों द्वारा मिले रसगुल्ले कमाल दिखायेंगे, ये रसगुल्ले स्वतः विस्फोट कर, आपको और आपकी शाली दोनों के गालों को लाल कर देंगे, ठीक उसी तरह जैसे यूपी में समाजवादी पार्टी के नेता और मुख्यमंत्री पद के प्रबल दावेदार अखिलेश यादव के गाल लाल हैं।




मन मटूकी प्रेम रंग भर आयो मोरो रंग रसिया ..
कैसे कैसे समझाउं जग को, है वो मोरा मनमोहन पिया.
अंग अंग मोरा भड़के, धक् धक् धड़के, गभराए मोरा जिया …
बसा है मेरे अंतर्मन में मोरा प्राणजीवन प्रेमसुंदरपिया…
मयूरपिंछ मुकुट धारी गिरधारी ने चुरा लिया मोरा जिया ….

और दफ के शोर खडकते हों,तब देख बहारें होली की

परियों के रंग दमकते हों, तब देख बहारें होली की
खम शीशे जाम छलकते हों ,तब देख बहारें होली की 

होली के इस जश्न में अबीर भी मलंग हैं --
नीले -पीले और गुलाबी ----
रंग उडाए पिचकारियाँ ---
गालो को भी लाल करे ---
आज मतवालों की टोलियाँ ----
बुरा न मानो होली हैं भाई --
बुरा न मानो होली हैं ऐ ऐ ऐ ऐ ---



  • तुम्हारे बाल तुम्हारी संपत्ति नहीं हैं, ये तुम्हारी संतति की संपत्ति हैं। तुम इन्हें अपनी लापरवाही से हरगिज़ नहीं उड़ा सकते, इन्हें नोचने का हक़ सिर्फ तुम्हारे बच्चों-बीवी को है।
  • दूधवाले भैया, बहुत देर कर दी! आज देर से सो कर उठे क्या?
नहीं! मैं तो टाइम से ही उठ गया था...
फिर?
   वो...भैंस जरा देर से उठी।







गुरुवार, 8 मार्च 2012

भाभी बौरायी फिरे,साली भी दे ताल -- ब्लॉग4वार्ता -- ललित शर्मा

ललित शर्मा का नमस्कार, ब्लॉग की दूनिया में मची है होली  की धूम, कोई बढिया पोस्ट लिख रहे हैं। कोई आलस में काम चला रहे हैं। सिर्फ़ होली की बधाई चिपका रहे हैं। जब सिर्फ़ बधाई चिपकाने से 100 -200 कमेंट मिल जाते हैं तो  कौन पोस्ट लिखने की जहमत उठाए। पोस्ट लिखने वाले को तो सूखा ही निपटाएं। वाह रे ब्लॉग जगत की उल्टी चाल। काम की पोस्टों पर तो प्रतिक्रिया ही जाहिर नहीं होती। कविताओं का चलन अधिक है, कुछ लोग उधारी की कविता पर सौ पचास टिप्पणी पा जाते हैं। लाला जी की दूकान जैसा काम  है, आज मैने कुछ  नहीं लिखा, कोई दे दो चार लाईन की कविता तो चेप कर कमेंटाधिकारी तो बन जाऊं,  खैर ई तो ब्लॉग जगत है। चलता ही रहेगा, हम भी  क्या क्या लेकर बैठ गए। आप सभी को होली की बधाई। सूखी होली खेलें। सिंथेटिक रंगो से बचकर रहें, होली मनाएं, खांए, खिलाएं  एवं खिलखिलाएं, प्रस्तुत है कुछ ब्लॉग लिंक….…

कविजन खोज रहे अमराईअष्टभुजा शुक्ल के चंद पद प्रस्तुत हैं - कविजन खोज रहे अमराई। जनता मरे, मिटे या डूबे इनने ख्याति कमाई ॥ शब्दों का माठा मथ-मथकर कविता को खट्टाते। और प्रशंसा के मक्खन कवि चाट-चाट रह जाते॥ सोख रहीं गहरी मुषकै..वारेन हेस्टिंग का सांड़ और चाँद पर होली सुबह की फ़ेसबुकिया सैर पर मित्रों ने कहा कि - होली कैसे मनाएगें? मैने कहा - क्या हुआ? बोले - यार जब से चमन काका ने होटलों ढाबों में पीने पर प्रतिबंध लगाया है तब से होली का मजा ही किरकिरा हो गया । और तो को... .इस बार होली कुछ ऐसे ही खेलूंगी मैं.*इन रंगों से थोड़े रंग* *खुशियों के लेकर, * *सबके जीवन में घोलूँगी मैं.....* *इस बार होली कुछ ऐसे ही खेलूंगी मैं.....* * * *भूल से दुःख दिया हो जो किसी को,* *..

आपके सानिध्य में दिन-रात जो रहने लगा हूँ.सुन हवा का मंद स्वर कुछ-कुछ थिरकने मैं लगा हूँ, आपके सानिध्य में दिन-रात जो रहने लगा हूँ. मैं सुबह की ओस में, म...अम्मा, गूगल और वेलु का पंजाबी ढाबामोबाइल में निरीक्षण रिपोर्ट रेलवे में निरीक्षण का कार्य अत्यन्त गहन होता है। आवश्यक भी है, यदि आपके संसाधन विस्तृत क्षेत्र में फैले हों। ट्रैक पर लगी एक एक क्लिप पर दैनिक रूप से दृष्टि बनाये रखनी पड़ती ह...विनम्रता वोटम् ददातिकहते हैं विरासत संभालने का भी एक सलीका होता है। उस सलीके का एक नियम यह भी है कि अपने सिपहसालारों पर चाहे जितना रौब गांठ लो, लेकिन उनसे अलग, आम-जनों पर रौब गांठते समय सतर्क रहना चाहिये क्योंकि उन... 

अबके होली में सांवरियाआप सब को सौहद्रतापूर्ण होली की हार्दिक शुभकामनाएं... स्नेह और आपसी भाईचारे का रंग छलकाएं..* *प्रकृति के हित को ध्यान में रखकर होली मनाएं ... * . अम्बर की मैं ओढूं चुनरिया गहरी नीली-नीली हरे-हरे मन में ...समय की यात्राएक थी युवा सुन्दरी प्रकाश से भी तीव्र थी उसकी गति कर गयी वह एक दिन सापेक्षता से प्रस्थान और आयी जब लौटकर वह जाने से पहले दिन का हुआ था अवसान।जर्रा-जर्रा गीत सुनायेजर्रा-जर्रा गीत सुनाये बौराया है आम रसीला, मधु लुटाता भर भर झोली फागुन मस्त हुआ सा डोले, लहराए फूलों की टोली कंचन फूला श्वेत गुलाबी, रूद्र पलाश आग लगाता मुग्ध पलाश करे तैयारी, होली का उत्सव जो आता खनक उठ... 

शुभ होली - कुछ गणमान्य ब्लॉगर्स के उद्गारहोलिका दहन के पावन अवसर पर निरामिष की ओर से आप सभी को हार्दिक शुभकामनायें। होली आसुरी संस्कारों और मनोविकारों को भस्म करने और हिंसा और क्रूरता के दम्भ के मान-मर्दन का पर्व है। आइये, इस शुभ अवसर पर शाकाहार ...फागुन की बतिया(1) सुन पिया भई बावरी टूटे काहे अंग चले हवा देह दुखे मुख मलिन ढंग बेढंग (2) ओ गोरी सुन बावरी सब फागुन का खेल भोर -सांझ में बने नहीं मौसम ये बेमेल (3) सुन पिया सखि काहे प्रीत की है ये चाल...भगोरिया ..एक प्रेम उत्सव... बसंत ऋतु की मदमाती बयार, लेकर आती है फागुनी फुहार और अनेक उत्सव...!! भगोरिया नाम है उत्सव का, जो भारत के सर्वप्रसिद्ध आदिवासी त्योहारों में गिना जाता है...यह होली का ही एक रूप है, और मध्य प्रदेश के मालवा अ...

अभी भी जलवा कायम है गोडफादर काफिल्मकारों के लिए सबसे चुनोती भरा और आकर्षक विषय 'अपराध' रहा है . अपराध आधारित कहानियों के फिल्मांकन में इस बात का डर हमेशा बना रहता है कि जरा सी चूक से पात्र का महिमा मंडन होते देर नहीं लगती.और ऐसा होता...ले दे कुसुम रंग चूनरियाफागुन का मदमस्त महीना नई-नवेली दुल्हन को, जिसे ब्याह के बाद मायके में लिवा लाया गया है, अपने सजन से मिलने के लिए आतुर कर रहा है। किन्तु विवशता यह है कि अब गौना होने पर ही उसे अपने प्रिय का संग मिल पायेगा। ...तुमरी राधा रह जाऊं सील संतोस से चन्दन घोर घोर ... केसर रंग पोर पोर ...... हियरा में उठत हिलोर .... प्रेम प्रीत पिचकार बनाई.. होरी आई सब रंग ,रंग लाई ... श्याम तुम रंगे सब रंग ... मैं कैसे खेलूं होरी श्याम के संग ... रंगूँ ...

देखी एक समानतानेता है आज का स्वभाव भी बड़ा अनोखा कभी हारता कभी जीतता वर्चस्व की लड़ाई में फिर भी कोइ शिकन न दिखती चेहरे पर ना ही ग्लानि मन में हार का मुंह देख कर | देखी एक समानता अभिनेता और नेता में अपने अपने चरित्रम...कुछ पकड़ने में कुछ छूट जाता हैकुछ पकड़ने में कुछ छूट जाता है। पढ़ो तो लिखना छूट जाता है। लिखो तोपढ़ना छूट जाता है। घूमो तो दोनो छूट जाता है। ठहरो तो घूमना छूट जाता है। आभासीदुनियाँ में विचरण करो तो यथार्त से परे चले जाते हैं। घर गृहस..निमन्त्रण-पत्र का नया चेहरा छोटा बेटा तथागत होली पर घर आया। उसने मुझे एक निमन्त्रण-पत्र दिखाया। आप भी देखिए और अब ऐसे ही निमन्त्रण-पत्रों की आदत डाल लीजिए। मेरे कस्बे में ऐसे निमन्त्रण-पत्र चलन में आ गए हैं। वैवाहिक आयोजन के इस निमन... 

बुरा न मानो होली जब जब चाहा मैंने, रंग जाना प्यार के रंगों में न जाने क्यूँ, तूने सिर्फ गुलाल से मन भाया है ! ... सच ! तूने ये किस रंग में रंग दिया है मुझे तेरी सखियाँ ही मुझसे खफा-खफा सी हैं !! ... वैसे भी तेरे प्यार का रंग...होली का त्‍योहारप्रीत के हिंडोले में हुई खुशरंगों की बौछार। देख सजन फि‍र आ गया होली का त्‍योहार।। लाल-पीले रंगों से क्‍यों भिगोता है मुझे। एक तेरी छुवन से खि‍ले गालों में सुर्ख फूल हजार।। न कर मुझसे जोरा-जोरी मैं तो बलम हू...रंग में भंग डालने वाला होली चिन्तन हर साल की तरह फिर होली आ गई। मनो-टनों लकड़ी फूँककर निश्चित ही कई लोगों के कलेजे में ठंडक पड़ेगी। इतनी जलाऊ लकड़ी अगर बची रहने दी जाए तो कइयों के घर का चूल्हा जलेगा, दिल जलने से बचेंगे और पेट की आग बुझेग...

होली - भाभी बौरायी फिरे,साली भी दे ताल गलियों गलियों हो रही रंगों की बौछार बस्ती बस्ती हो गये कितने रंगे सियार रंग हुए शमशीर से रंग बने पहचान जीना बेरंगी हुआ अब कितना आसान पीटो चाहे पीट लो,ये चाहत के ढोल खोल हटा खुल जायेगी,मढे ढोल की पोल चटके ...इस बार होली मेंदिल का टुकड़ा , रहा बरस भर घर से बाहर माँ चूमे मुखड़ा , घर बेटा आया होली में | मेहँदी छूटने से पहले चला गया परदेश जो बिछड़ी उस विरहन से मिलने , आया होली में | जिस बेटी की हुई विदाई इसी म...होली - एक कबित्तई हमारा पहिला कबित्त है, जो हम 'संवेदना के स्वर' पर आज से दू साल पहिले पर्कासित किये थे... आज इहाँ दोहरा रहे हैं... होली के सुबह कामना के साथ: होली का त्यौहार, मची धूम चारों ओर है जी, देख-देख रंग की बौछार...

चुनाव परिणाम आने के पश्चात् कुछ घिसे पिटे बयान...चुनाव परिणाम आने के पश्चात् कुछ घिसे पिटे बयान.......* * हमने अपनी हार स्वीकार कर ली है ....* * * *इसके अलावा आपके पास * *बाकी कोई चारा नहीं था क्यूंकि आपके सिर पे करारी हार उनके गले फूलों का हार सजा थ...होली पर एक हज़लरंगोत्सव की शुभकामनायें* होली के मौक़े पर आप सभी को गुदगुदाने के लिये एक हज़ल। ये हज़ल पंकज सुबीर जी द्वारा आयोजित तरही मुशायरे के लिये कही है। *घड़ी में याँ ठुमकता है घड़ी में वाँ मटकता है मेरा महबूब है य...विकल्पहीनता से उपजा भरोसा उप्र के परिपक्व फैसले से जगी बदलाव की उम्मीद -संजय द्विवेदी उत्तर प्रदेश के लोग कुछ भले न कर पा रहे हों, पिछले दो विधानसभा चुनावों में वे एक स्थिर सरकार जरूर दे रहे हैं। एक राज्य की जनता अपनी नाकारा ...

होली  की बधाई के साथ वार्ता को देते हैं विराम, मिलते हैं ब्रेक के बाद राम राम

बुधवार, 7 मार्च 2012

तोर पैरी के झनर-झनर --- ब्लॉग4वार्ता --- ललित शर्मा

ललित शर्मा का नमस्कार, सभी मित्रों को होली की हार्दिक शुभकामनाएं, होलिका की ज्वाला में मन के कलुष जलाएं, जगमगाएं प्रीत का रंग अबीर लगाएं। सौहद्रता से होली मनाएं। होली पूर्व 5 राज्यों के चुनाव परिणाम आ गए हैं। कहीं खुशी कहीं गम वाली स्थिति बनी। कहीं आँसूओं का सैलाब तटबंध तोड़ बह रहा है तो कहीं सायकिल से ही चाँद पर पहुंच गए लोग, अपोलो की पोल खोल कर धर दी। अब सायकिल से  होगी अंतरिक्ष की सैर। सायकिल बांटी जाएगी, लेन देन भी सायकिल का होगा। अब चलते हैं आज की होलिया ब्लॉग4वार्ता पर………।

जय हो....लन्दन के एक मंदिर में त्यौहारों पर लगती लम्बी भीड़ त्यौहार पर मंदिर में लगती लम्बी भीड़, रंग बिरंगे कपड़े, बाजारों में, स्कूल के कार्यक्रमों में बजते हिंदी फ़िल्मी गीत,बसों पर लगे हिंदी फिल्म और सीरियलों...नबेलिन में बेलिन में, वनन में बागन में बगरयो बसंत है।बसंत को कामदेव का पुत्र माना जाता है। इसीलिए इस समय मनाए जाने वाले उत्सव को मदनोत्सव भी कहते हैं। मदन का अर्थ होता है काम। जो मनुष्य जीवन का अभिन्न अंग है। हिंदु धर्म-शास्त्रों में मनुष्य के लिए चार पुरुष...फेसबुक पेज लाइक, ट्विटर फोलोवर, यूट्यूब सब्सक्राइबर व अपनी वेब साईट पर हिट बढ़ाएं१-आपने फेसबुक पर बड़ी मेहनत से एक पेज बनाया, सभी दोस्तों को उसे लाइक करने के लिए आमंत्रित किया फिर भी उस पेज के लाइक ना बढ़ें तो आपको कैसा महसूस होगा? २-यूट्यूब पर वीडियो अपलोड किया पर उसे किसी ने सब्सक्...

दुश्मनदुश्मन ......... गम अपना छुपाने को , मै मुस्कुरा देती हूँ .. दर्द अपना ,पी जाने को . मै गुनगुना लेती हूँ. बह न जाये ..आँखों से अश्क .....चेहरा छिपा लेती हूँ .. दिल की तडफ छिपाने को ,होंठो पे गीत सजा लेती ...बोलो तुम क्या बाँटोगेखुशियाँ या फिर गम के मौसम या स्नेहसिक्त महके सावन पूछ रहा है फागुन हमसे बोलो तुम क्या बाँटोगे साबुन के बुलबुले उड़ाते नन्हें बच्चों की बातें भोली छूट गए गुब्बारे जिनसे उन हाथों की गहन उदासी पूछ र...होली पर कुण्‍डलि‍याँहोली की मस्ती में हो अबीर गुलाल का रंग।पानी में घुल कर रंग-रंग हो जाए ना बदरंग।जाए ना बदरंग रंग बेरंग लगे होली।काले दि‍ल वालों की काली होती है होली।कह ‘आकुल’ कवि‍राय जाओ घर घर खेलो होली।खेलो खुल कर केवल सूखे... 

मामला हिंदी चिट्ठाकारों की अदालत मेंआइए आपको न्‍यायाधीश नियुक्‍त किया जाता है आप अपना फैसला सुनाइए पहले पूरा मामला यहां पर क्लिक करके पढ़ जाइए। "कानून को नचाती राजनीति "नमस्‍कार। होली की मस्‍ती शुरू हो गई है। दो दिन बाद दुनिया का अलहदा त्‍यौहार मनाया जाएगा जिसमें सब रंगों में सराबोर नजर आएंगे। होली का हुडदंग मचाने वंदना जी आ गई हैं हाईकू लेकर। मजा लीजिए उनकी रचनाओं क...छाप-तिलक सब छीनी रे मोसे नैना मिलाये के..मैंने ये पोस्ट पढ़ा फिरदौस जी के ब्लॉग पर...उन्होंने बहुत अच्छी पोस्ट लिखी है...सच पूछिए तो मेरी यह पोस्ट उनकी पोस्ट से प्रेरित होकर ही लिखी गयी ह...

अश्क बनकर वही बरसता हैनहीं जज्बात दिल में कम होंगे तेरे पीछे मेरे कदम होंगे तुम सलामत रहो कयामत तक ये है मुमकिन कि हम नहीं होंगे प्यार जिसको भी किया छूट गया बन के अपना ही कोई लूट गया दिलों को जोड़ने की कोशिश में दिल भी शीशे की त...तोर पैरी के झनर झनर....सम्मान समारोह छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में अंचल की दो महान हस्तियों के सम्मान का सुअवसर मिला. एक है प्रथम छत्तीसगढ़ी फिल्म के निर्माता/निर्देशक श्री मनु नायक तथा दूसरे है आज के छत्तीसगढ़ी फिल्म स्टार स...टेढ़े मेढ़े रास्ते और मंजिल बहुत दूर -- विश्व के कुछ सबसे दिलचस्प और हैरतंगेज़ रास्ते और सड़कें । ये सभी हमने टी वी पर या तस्वीरों में देखे होंगे । देखते हैं , आप कितने पहचान पाते हैं । यह कौन सा शहर है ? यह कौन सा आईलेंड ...

अनचीन्ही..अनजानी.. अनदेखी सी डगरजया के कविता संग्रह को पुरस्कार मिलने पर जब .. पत्रकार पूछने लगे, 'उसकी कविताओं में इतना दर्द कहाँ से आया ?' तो जया पुरानी यादों में खो गयी...दो बड़े भाई और दो बड़ी बहनों..माँ-बाबूजी के...पगोडापगोडा...जब से गोराई में पगोडा बना है तब से ही कई बार हमने यहाँ जाने का प्लान बनाया लेकिन कभी जा ही नहीं पाए...पिछले सन्डे हम यहाँ गए...घर से मार्वे तक ऑटो में और वहां से पगोडा तक जेट्टी(छोटा जहाज) में...क..होलिका तो होलिका , कहीं रावण भी जल न पाए --कुछ वर्ष पहले दिल्ली में होली के अवसर पर मौसम में हुए बदलाव पर एक कविता लिखी थी जो शायद आज भी उतनी ही तर्कसंगत लगती है । जनता को चिंता सता रही थी , क्योंकि होली करीब आ रही थी। पर पानी की किल्लत थी भार...

कुमाऊँनी बैठकी होली की एक झलककुमाऊं में शास्त्रीय होली गायन की लंबी परम्परा रही है. आज एक वीडियो आप के साथ बाँट रहा हूँ मित्र आशुतोष उपाध्याय के सौजन्य से -कल और आजहाथों की मुटिठयां तब हाथों की अंगुलियां कब? खुली रह गई इतनी कि अंजुरी में धरे पल चुक गये हाथों से रेत के दानों की तरह और मैं निहारता रहा हाथों की मुटिठयां अब और हाथो की अंगुलियां कब? क्यों बंध गये इतने? कि होली पर - कुछ लोक-रंगससुरारै में निदिया सताये रे , जी भर के कबहुँ ना सोय पाय रे मोरी अक्कल चरै का चलि जात हौ, ससुरारै में बावरी सी हुइ गई ! * सैंया बोले गैया को चारा डालना , मैं भइया सुन्यो निंदिया की झोंक में , छोटे देउर को ना... 

रंगोत्सवनेता जी भी रंग गये नीले पीले रंग * *चेहरा उनका हो गया होली में बहुरंग * *होली में बहुरंग हुए ही घर जा पहुंचे * *घरवालों ने पूछा आये किस से मिलने * *पत्नी बोली वे तो जी बाहर गये हैं * *मिलने आना कल आज वे घर ...इस बार होली कुछ ऐसे ही खेलूंगी मैं.इन रंगों से थोड़े रंग* *खुशियों के लेकर, * *सबके जीवन में घोलूँगी मैं.....* *इस बार होली कुछ ऐसे ही खेलूंगी मैं.....* * * *भूल से दुःख दिया हो जो किसी को,* *...​​ ​समाजवाद तो धीरे-धीरे आई बबुआयूपी में माया गईं...मुलायम आ गए...राहुल गांधी आस्तीनें ही चढ़ाते रह गए...बीजेपी को न सत्ता मिली, न राम...आखिर साइकिल इतनी रफ्तार से क्यों दौड़ी...हाथी चारों खाने चित...हाथ खाली...कमल मुरझाया का मुरझाया...


रंग भरी होली: बहुरंगी दुनियामोबाइल में निरीक्षण रिपोर्ट रेलवे में निरीक्षण का कार्य अत्यन्त गहन होता है। आवश्यक भी है, यदि आपके संसाधन विस्तृत क्षेत्र में फैले हों। ट्रैक पर लगी एक एक क्लिप पर दैनिक रूप से दृष्टि बनाये रखनी पड़ती ह...विनम्रता वोटम् ददातिकहते हैं विरासत संभालने का भी एक सलीका होता है। उस सलीके का एक नियम यह भी है कि अपने सिपहसालारों पर चाहे जितना रौब गांठ लो, लेकिन उनसे अलग, आम-जनों पर रौब गांठते समय सतर्क रहना चाहिये क्योंकि उन...

वार्ता को देते हैं विराम, होली की राम राम एवं शुभकामनाएं

मंगलवार, 6 मार्च 2012

सपने बुनने के बहाने....ब्लॉग4वार्ता....संध्या शर्मा

संध्या शर्मा का नमस्कार...  आज राज्यों के चुनाव के परिणाम आने वाले हैं, हाथी किस करवट बैठेगा, सायकिल किधर चलेगी, पंजे की खड़ी होगी खाट या लगेगी वाट, उड़ेगी धूल या खिलेगा फ़ूल, सब पेटी खुलते ही निकलेगा चुनावी जिन्न।  मनवांछित परिणाम की आशा में लगी हैं पार्टियाँ। चुनाव परिणाम से पहले दिल्ली में आया भूचाल। दिल्ली थरथराने लगी। भूकंप की आहट ने दिल्ली को हिला डाला………… घबराईए नहीं जनता ने जो चाहा वही परिणाम मिलेगा………अब चलते हैं आज की ब्लॉग4वार्ता पर और प्रस्तुत हैं मेरी पसंद के कुछ लिंक…………।

छत्तीसगढ़ के जन-कवि स्व.कोदूराम "दलित" के 102 वें.जन्म दिन पर विशेष...
*-अरुण कुमार निगम * कवि कोदूराम 'दलित' का जन्म ५ मार्च १९१० को ग्राम टिकरी(अर्जुन्दा),जिला दुर्ग में हुआ आपके पिता श्री राम भरोसा कृषक थे.आपका बचपन ग्रामीण परिवेश में खेतिहर मजदूरों के बीच बीता. आ...

सपने बुनने के बहाने...!
हमने कुछ पन्ने पलटे यूँ ही... रंगों की शामें खिल उठीं, पर बहुत कुछ बुरा भी हुआ कुछ बादल बरसे कुछ नज़्में रुठीं! फिर धूल झाड़कर सहेजे सपने... रूठी नज़्मों को धूप दिखाया, अवांछित सब कुछ काट छाँट कर पुनः शब्दों ...

अमृत बन कर तू ढलता है
अमृत बन कर तू ढलता है तुझसे परिचय होना भर है कदम-कदम पर तू मिलता है, उर का मंथन कर जो पाले परम प्रेम से मन खिलता है ! भीतर के उजियाले में ही सत्य शाश्वत झलक दिखाता, कण-कण में फिर नजर तू आये श्वास-श्वास मे...

चंद अल्फाज़ चाहिए
चंद अल्फाज़ चाहिए हालेदिल बयां करने को है तलाश सुर की हृदय को टटोलने को साजिन्दे तो मिल ही जाएगे संगत के लिए पैर भी थिरकने लगेंगे धुन पर संगीत के पर खोजती हूँ वह कौना एक ऐसे मन का जहां कुछ देर ठहर...

होली का हुडदंग
दोस्तों इस बार होली का हुडदंग शुरू करती हूँ हाइकू के संग .........पहली बार कोशिश है आप सबके समक्ष रखने की .......... उम्मीद है खरी उतरूंगी और यदि कोई त्रुटि हो तो मार्गदर्शन कीजियेगा मुख गुलाल न...

इस होली पर क्यों न साथियो,आओ सबको गले लगा लें -सतीश सक्सेना
*भूले भटके उन अपनों के ,* *कैसे दरवाजे , खुलवाएं ?* *जिन लोगों ने जाने कब से ,* *मन में रंजिश पाल रखी है* *इस होली पर क्यों न सुलगते, दिल के ये अंगार बुझा दें !* *मुट्ठी भर कुछ रंग,फागुन में,अपने घर में...

क्‍या आपकी किताब वास्‍तव में कोई पढ़ना चाहता है?
कुछ लोगों के लिए लिखना बड़ी बात है, कुछ लोगों के लिए छपना। और कुछ लोगों के लिए यह सब देख कर आश्‍चर्यचकित रह जाना? कुछ पाठक यह जानने की फिराक में रहते हैं कि लोग इतना कैसे लिखते हैं? कुछ लोग यह देखकर हतप्रभ र...

कार्टून:- पुस्तक मेले के साइड इफ़ेक्ट
काजल कुमार Kajal Kumar at Kajal Kumar's Cartoons काजल कुमार के कार्टून

बूंद से नदी बन जाने की उत्कंठा
(गिरीश"मुकुल") at मिसफिट Misfit

जीवन प्याली
मेरी जीवन प्याली दे तू बूँद-बूँद भर साकी , परिपूरित कर दे कण-कण रह जाये न खाली बाकी ! मैं ढूँढ-ढूँढ थक आई साकी तेरी मधुशाला , दे दे भर-भर कर मुझको मोहक प्याले पर प्याला ! मैं हो जाऊँ पी-पी कर बेसुध पागल म...

..तुम नहीं आये
बीता रात का तीसरा पहर तुम नहीं आये आधा हुआ चंदा पिघलकर तुम नहीं आये मै अकेला हूँ यहाँ पर यादो की चादर ओढ़कर रात भर पीता रहा ओस में चांदनी घोलकर ...

2000 से अधिक प्राचीन बुद्ध प्रतिमाओं की खोज 
खबरों में इतिहास अक्सर इतिहास से संबंधित छोटी-मोटी खबरें आप तक पहुंच नहीं पाती हैं। इस कमी को पूरा करने के लिए यह ब्लाग इतिहास की नई खोजों व पुरातत्व, मिथक...

राम दरश मिश्र  
* * * ** *रामदरश मिश्र * *आज धरती पर झुका आकाश तो अच्छा लगा** **सिर किये ऊँचा खड़ी है घास तो अच्छा लगा** * *आज फिर लौटा सलामत राम कोई अवध में** **हो ग... 

सार्थक ब्लॉगिंग की ओर 1.2 - *गतांक से आगे.......**! * जीवन का मंतव्य जब कला की साधना बन जाता है तो फिर जीवन उस कला में रम जाता है . फिर कला ही जीवन बन जाता है और ऐसा सर्जक निश्चित रूप ... 

अब लेते हैं आपसे विदा मिलते हैं, अगली वार्ता में, नमस्कार..... 

सोमवार, 5 मार्च 2012

इंटरनेट ट्रैफिक पर निगरानी के लिये राष्ट्रीय साइबर समन्वय केंद्र बनेगा .. ब्‍लॉग4वार्ता .. संगीता पुरी

नमस्‍कार .. सरकार साइबर सुरक्षा खतरों का वास्तविक समय पर आकलन करने और इंटरनेट ट्रैफिक पर निगरानी के लिये राष्ट्रीय साइबर समन्वय केंद्र, एनसीसीसी बनाने पर विचार कर रही है। हाल ही में एक उच्च स्तर की बैठक राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय में आयोजित की गई । इस बैठक में एनसीसीसी के गठन पर विचार विमर्श किया गया। इस बैठक में आईबी, रॉ, डीआरडीओ, गृह मंत्रालय और सेना के अधिकारियों ने हिस्सा लिया और इसमें एनसीसीसी और साइबर सुरक्षा से जुड़े अन्य मुद्दों पर प्रस्तुतीकरण दिया गया।

बैठक के विवरण में कहा गया है, ‘देश में साइबर सुरक्षा के खतरे का वास्तविक समय आकलन करने के लिये बहु एजेंसी वाले एनसीसीसी की स्थापना और अग्र सक्रिय कदम उठाने के लिये एक कार्य करने योग्य रिपोर्ट या अलर्ट का निर्माण… । एनसीसीसी देश के अंदर इंटरनेट के ट्रैफिक के प्रवेश और प्रस्थान बिंदू को स्कैन करेगी। इंटरनेट से जुडी इस मुख्‍य खबर के बाद चलते हैं आज की वार्ता पर ........

छत्तीसगढ़ के परंपरागत आभूषण प्रत्येक जाति ,वर्ग, समुदाय, की अपनी पहचान या कहें विशिष्टता उसके सभ्यता ,संस्कृति ,परंपरा, रीति-रिवाज , खान -पान ,मांगलिक कार्य , क्रिया-कर्म, धार्मिक कार्यों में परिलक्षित होता है ,बस ऐसे ही किसी लड़की य...

Mavli Marwar meter gauge मावली - मारवाड मीटर गेज ट्रेन यात्रा 7 फरवरी 2011, अलार्म बजा और मेरी आंख खुली। गाडी किसी स्टेशन पर खडी थी। देख लेते हैं कि कौन सा स्टेशन है। अरे, यह तो मावली है, उतर भई, जल्दी उतर। मैं मावली में उतर गया, गाडी उदयपुर की तरफ चली गई। मावली से स...

मैं भी एक कवि बन पाता - कविता *[अनुराग शर्मा]* चित्र व कविता: अनुराग शर्माआग तुम्हारे अन्तर की मैं अपने दिल में जला पाता दर्द पिरो सकता सीने में मैं भी एक कवि बन पाता अन्धियारी यह रात अमावस बन खद्योत चमका जाता नहीं समझता अलग किसी को ...

इश्श्माइल करते अजय कुमार झा प्रिय मित्रो सादर ब्लॉगस्ते! साथियों अपना जीवन छोटा सा है तो इस छोटे से जीवन को हँसते-मुस्कुराते गुजारा जाए तो कितना अच्छा रहे। अपनी पंक्तियों द्वारा कहूँ तो- *जीवन में दुःख है बहुत * *क्यों न ऐस...

भारतीय काव्यशास्त्र - 102 *भारतीय काव्यशास्त्र - 102*** आचार्य परशुराम राय पिछले अंक में *साकांक्षता, अपदयुक्तता* और *सहचरभिन्नता अर्थदोषों *परचर्चा की गयी थी। इस अंक में *प्रकाशितविरुद्धता *और* विध्ययुक्तता अर्थदोषों*पर चर्चा की...

शीर्षकहीन हर बार छीन ले जाता है कोई, मेरी तकदीर, मेरे ही हाथों से, सुना था, गिर गिर कर उठना, उठ कर चलना ही जिंदगी है.. यूँ, गिरते उठते, आत्मा तक लहुलुहान हो गयी है.. क्या नाकामियों की, कोई तयशुदा अवधि नहीं होती..?? !!...

जोगीरा:'परम' श्रेणी परहेज से रहे...बोलs हमरो जिन्दाबाद!... (1) के पीये हर घाट के पानी, के बा परम सयानी केकर चुनरी दागा लागल, के धोयेला पानी रानी पीये हर घाट के पानी, राजा परम सयानी पबलिक चुनरी दागा लागल, कोइ न धोये पानी। वा वा! जोगीरा सर र र र। (2) हम बिछवलीं ...

बुज़ुर्गियत की मुस्कान...खुशदीप​ ​​ *सांध्यकाल से जुड़ी पोस्ट की आखिरी कड़ी ​शुक्रवार को ही लिखनी थी...लेकिन शनिवार को 'नूरा कुश्ती' में उलझ गया...लीजिए बुज़ुर्गियत की वो कुछ गुदगुदाती बातें, जिनसे हमें भी कभी न कभी पेश आना ही पड़ेगा...* *​...

यूँ ही नहीं राधा को मोहन मिला करते........... *चाहत कोई भी हो* *कैसी भी हो* *किसी की भी हो* *एक बार नैराश्य के * *भंवर में जरूर डूबती है* *फिर भी इंसान चाहत की * *पगडण्डी नहीं छोड़ता* *एक आस का पंछी* *उसके मन की मुंडेर पर* *उम्र भर चहचहाता रहता है* *उस...

क्या यही प्यार है ??? कहते हैं .. प्यार वरदान है जीवन को जिसे मिल जाए वो स्वर्ग सा सुख पा लेता है इसी मृत्यु लोक में ! लेकिन ...... ये सच नहीं है, प्यार तो बहुत निर्मम है.... जो न तो भय से बाँधा जा सकता है, न ही अधिका...

हर पल हर पल बेहतर था तेरे आने पर उम्मीद जग उठी थी तेरे रहने पर पर तूने जो जख्म दिया मेरे सीने में सपने बह गए सारे तेरे जाने पर रेत ले गया समंदर मेरे प्यार की दफन हो गया एहसास तेरे प्यार की ख्वाबो पर अब ...

आधुनिक किताबें ...मेरी कविता रोज लिखी जाती है रोज छपती है और रोज प्रकाशित हो जाती है और तो और उस पर पाठकों की प्रतिक्रिया अच्छी, बुरी, मिलीजुली त्वरित मिल जाती है मैं आधुनिक कवि हूँ ब्लॉग, फेसबुक ... मेरी आधुनिक कि...

मौन बैठे हुए... पिता! तुम बूढ़े नहीं हो रहे। नहीं घट रही है तुम्हारी, डेसिबल आंकने की क्षमता। सिक्स बाई सिक्स देखने भर ज्योति, अभी भी है नेत्रों में। किंचित अधिक ही हो गई है। तुम छोड़ सकते हो एक और रोटी, खींच सकते हो साइ...

बांधे रखती है फिल्म पान सिंह तोमर! जी हाँ फिल्म के प्रमुख किरदार का नाम ही फिल्म का नाम भी है . दरअसल एक असली किरदार के 'रियल लाईफ' का ही रील वर्जन है यह फिल्म . पान सिंह तोमर कभी सेना में दौड़ प्रतिस्पर्धाओं के नेशनल चैम्पियन हुआ करते थे ...

बोकारो के इमरान जाहिद ..निर्माता-निर्देशक महेश भट्ट की फिल्म जिस्‍म दो में मुख्‍य भूमिका मे बोकारो के इमरान जाहिद न तो इंजीनियर बनना चाहते थे और न ही डॉक्टर। वे कुछ अलग करना चाहते थे। स्कूल के दिनों में वे फिल्म देखते थे, बस यहीं से फिल्मी हीरो बनने की धुन सवार हो गयी। मेहनत व लगन की बदौलत इस छो...


मिलते हैं एक ब्रेक के बाद .....

रविवार, 4 मार्च 2012

चेतन भगत बोले :" वाह चेतन भगत तुम्हें बार-बार सलाम, एमपी असली इंडियन "


इब का बतावें मन में उद्द्वेग और हैडवा में तनाव लय के कौनो वार्ता लिखिहै..? लिख है काहे न लिखि है.. दादा कहिन कै वार्ता लगा आओ..! हमहूं कहिन कय वार्ता लगाय दैं हैं.. उनकर आदेश सर माथे लगाय हम लिंक दर लिंक घूम घूम कय बड़ी मेहनत से वार्ता लिखबै... 

ई देखो अपना राशि फल का कहत है..ओऊर आप खुदै देख लेओ.."आज का राशि फ़ल" संगीता पुरी बताय तो रहीं हैं कि आज आप का करौ का न करौ..
                             कल्लू दादा हमारे मोहल्ले के पोस्ट मैन के दिन लद गए अब तो खबरों के झरने जहां तहां सुलभ हैं.खबर से याद आया एक. खुशखबरी  है कि "कृष्ण कुमार यादव बने इलाहाबाद रीजन के नए निदेशक डाक सेवाएं" तो भैया देओ न बधाई......का बोले शिवम भैया यहाँ पर सब शांति ... शांति है - ब्लॉग बुलेटिन दादा देक्खो ज़रा एन होली पे संतों की नाईं बतिया रहे हैं.. अरे सब होली की प्लानिंग  में लगे हैं देखिये न  भाई बारामाठे जी को . इंतज़ार...है..योग्यता की मात्रा कैसे बढ़ाई जावे.अपनी योग्यता से  भ्रष्टाचार भगाने कह रह हैं तो भैया हम भगाय देते हैं-ए भग हट चल जा परे जा भ्रष्टाचार जा हट भाग जा........!


 धान के देश में! जी.के. अवधिया जी फ़ुल तैयारी में हैं भाई..
                                                           मैं श्रीमती ..........................., पत्नी श्री................ एतद् द्वारा घोषणा करती हूँ कि मेरे पति यदि होलिका दहन की रात्रि से लेकर धुलेड़ी के सायंकाल तक मुहल्ले की परम्परा के अनुसार होली मनाएँगे तो मुझे किसी भी प्रकार का ऐतराज नहीं होगा।

हस्ताक्षर श्रीमती ..........................."

क्रिकेट में ऐसा भी होता है...




 दु:खद पटाक्षेप शीर्षक से  बलराम अग्रवाल
जी का स्मृति आलेख देखिये. 
 

वाह चेतन भगत तुम्‍हें बार-बार सलाम,: 

हुल्लड़ मचाती पोस्ट 

होली पर ब्लॉगिंग की 'नूरा कुश्ती'...खुशदीप



[Rakesh%255B4%255D.jpg]मध्‍यप्रदेश का व्‍यक्ति कभी गुट नहीं बनता वह हमेशा हिन्‍दुस्‍तानी रहता है। .. बकौल वेतन भगत एमपी असली इंडियन शुक्रिया. उधर   सिनेमा को नए रंग दे रही स्त्रियां अच्छा आलेख है. ज़ील का आलेख अवश्य देखने योग्य है अछूत रजस्वला स्त्री... मनके मनके पर यह आलेख देखिये क्या,यह खूब ना होता---कैलाश शर्मा का बाल संसार भी उत्तम पोस्ट है. 



Twitter Delicious Facebook Digg Stumbleupon Favorites More