शुक्रवार, 2 जुलाई 2010

काश तुम हिजङे होते-विशेष पैकेज दिये जाते----ब्लाग4वार्ता----ललित शर्मा

सत्ता परिवर्तन के बाद अच्छे-अच्छों को धक्के खाने पड़ते हैं। इसका उदाहरण कल देखने मिला। कभी जार्ज साहब के घर से अपनी सत्ता चलाने वाली जया जेटली को उसी घर में घुसने की इजाजत नहीं मिली। समय बदलते देर नहीं लगती। कल जया जेटली अपना कुछ सामान लेने जार्ज साहब के घर आई थी। लेकिन वहां के कर्मचारियों ने उन्हे अंदर घुसने नहीं दिया और पुलिस बुला ली। जार्ज साहब अल्जाईमर (भूलने की बिमारी) से ग्रस्त हैं और 3कृष्णमेनन मार्ग की कोठी से उनकी पत्नी उन्हे आकर अपने घर ले गयी। तब जार्ज साहब वहीं हैं। अब मै ललित शर्मा आपको ले चलता हूँ आज की ब्लाग वार्ता पर.....

अब चलते हैं ब्लाग क्रांतिदूत पर जहां अरविंद झा एक लघु कथा कह रहे हैं कोठा (भाग-एक)----काश तुम हिजङे होते. आज बाप और बेटा दोनो एक साथ कोठे पर आया. पुतलीबाई से लङकी देने को कहा. किसी एक के साथ बेटा एक कमरे में चला गया. पुतलीबाई ने उसके बाप से कहा--" बेटा को तो सही जगह पे पहुंचा ही दिया. अब तुम यहां क्या कर रहे ह...सुप्रसिद्ध साहित्यकार और ब्लागर गिरीश पंकज का इंटरव्यू पढेँ-1साहित्यिक पत्रिका "सदभावना दर्पण" के संपादक और "साहित्य अकादमी,नई दिल्ली" के सदस्य व साहित्यकार,गजलकार,व्यंगकार तथा अब ब्लागर बन चुके गिरीश पंकज जी के साथ इटिप्स ब्लाग टीम ने बातचीत की । उनका यह इंटरव्यू ह...

जा रै प्यारे, देखे थारे, झूठे सैं ये रिश्ते सारे यह रचना (हरियाणवी रागिनी) मेरे मित्र "कृष्ण टाया" जी की है। पसन्द आये तो साधुवाद जरूर दीजियेगा। *कवि ने पुराने समय और आज के जमाने की तुलना की है। बीते समय में रिश्तों की क्या अहमियत होती थी और आज के रिश्ते...जब अखबार को माफी मांगनी पड़ी जनसंपर्क विभाग की दादागिरी कोई असमान्य बात नहीं है और यदि सचिव स्तर का अधिकारी बात बात पर अखबारों की जमीन नपवाने या फिर विज्ञापन बंद करने की धमकी दे तो गले तक गफलत में डूबे अखबार मालिकों का चूहा बनना स्वाभाव...

१ जुलाई , १ साल,१०० वी पोस्ट "राँझा राँझा ना कर हीर " सौवी पोस्ट लिखने जा रही हूँ ये तो पता था पर आज १ जुलाई को मेरे ब्लॉग का साल पूरा हो रहा है ये अनायास पता चला .... बीज तो अंकुरित हो गया कुछ नन्ही -नन्ही कोंपलें भी दीख रही है ...मन खुश है ..अरे दोहरी ख़ुश...मैं तो एक शमा हूं , मैं जलती हुई शमा हूं , यह कैसे समझाऊं उन परवानों को , तरह तरह की भाषा जिनकी , और जाति भी जुदा जुदा | बिना बुलाये आते हैं , जब तक कुछ कहना चाहूं, जल कर राख हो जाते हैं , बदनाम मुझे कर जाते है | मैं जलती हूं र...

लौटा दो मेरा बस्तर बस्तर तुमने मुझे शर्मशार कर दिया तुम्हारे नाम से डरते हैं मेरे बच्चे पत्नी कभी लौट कर आने को नहीं कहती सुना है पत्ते काले पड़ गए हैं और हवा में जलते हुए मांस के बदबू आती है मेरे बस्तर ऐसे तो ना थे तुम ना ही ऐ...कहीं अपनी अपनी हाँकने का नाम ही तो जीवन नहीं ??? मेरे साथ ये अक्सर ऎसा होता है, कि, जब भी कभी जीवन जी नहीं रहा होता हूँ तो यूँ ही इस के बारे में सोचने लगता हूँ और जब यह सोच के बाहर होने लगता है बैठे ठाले इसे पकडने की नाकाम सी कौशिश में कुछ लिखने लगता हूं...

कैटल क्लास और लगेज क्लास हमारी नियति जब भी कभी हवाई यात्रा करनी हो तो मनाएं कि "पैसेज" की तरफ की सीट मिले। रेल यात्रा में चाहे ए सी 3टियर हो या स्लीपर भूल कर भी साईड वाली दो बर्थों का ना सोचें। ऐसा ना हो कि सफर, Suffer बन कर रह जाए। शशि थुरू...गफलत की ताक में गुरिल्ले ज़रा सी* गफलत और लाशों के ढेर ... ज़रा सी चूक और गोलियों की बौछार ... ज़रा सा बोझिल हुए और जंगल के घने झुरमुट में अचूक निशाने पर झांकती कातिल निगाहें स्वचालित हथियारों से लाशें गिनना शुरू कर देती हैं| नक्सल...

अगेहा तितली पिछले साल एक दोस्त से ' *संशो* ' ... तेजफल क पेड़ मिला। उस पत्ते के ख़ास अपना सुगंध और स्वाद है। एक पत्ते सजाने से सब्जी काफ़ी अच्छी हो जाती है। हम भी वसंत में नए नए तेजफल के पत्ते कभी कभी खाते थे। करीर, ...जोक डे पर विशेष - अनोखी ABCD !! आइये एक नयी तरह की ABCD सीखते है ! आप सभी को हैप्पी जोके डे !! लीजिये साहब आप सब की शिकायत दूर किये देते है ................जोके डे पर आइये सीखते एक नयी तरह की ABCD !! 

और वह फाँसी चढ़ गया ............ आखिर उसे अपनी करनी की सज़ा मिलीवह पूरी जेल में लोकप्रिय था . पूजा पाठी ,कर्मकांडी सब से हँस के ही मिलता था . लोग चकित होते थे वह जेल में क्यों है .कोई नहीं मानता था वह अपराधी हो भी सकता है . उसे क़त्ल के जुर्म में फाँसी की सज़ा हो चुक...इस सब के लिये ही देशवासियों से जमा टैक्स से कश्मीर के लिये विशेष पैकेज दिये जाते हैं..इस चित्र को देखिये (साभार आईबीएन). किस तरह से सुरक्षाबल के जवान के पीछे मुंह पर नकाब बांधे हुये *"भटके हुये नौजवान (जिन्हें विशेष पुनर्वासन योजना देने की बात की जा रही है)"* हाथ में लकड़ी के मोटे डण्डे, पत...

इसी को नसीब कहते हैं… कर्म करो, फल की चिन्ता मत करो”* महाभारत शुरू होने से पहले श्री कृष्ण ने अर्जुन से यही कहा था। *“नौकरी करो, पहली तारीख को तनख्वाह की आशा मत करो”* उत्तर प्रदेश सरकार अपने कर्मचारियों से वर्षों से...
पालने से पालकी तक बेटियों के लिये गिरीश बिल्लोरे मिसफिट:सीधीबात - पर पंडवानी के नायक भीम और महाभारत के नायक अर्जुन यह सर्वविदित तथ्य है कि छत्तीसगढ़ की लोकगाथा पंडवानी महाभारत कथाओं का लोक स्वरूप है। वैदिक महाभारत के नायक अर्जुन रहे हैं जबकि पंडवानी के नायक भीम हैं। पिछले पोस्ट में पंडवानी की तथाकथित शाखा और शैली के स...

थैंक्यू ब्लागवाणी !! वैरी, वैरी मच थैंक्यू !!!नयी रामकथा की सीता दुविधा में अभी तक अटकी पड़ी है। ब्लागवाणी चालू है लेकिन नए फीड नहीं ले रही है। जिस तरह की बातें सामने आ रही हैं उस से लगता है यदि ब्लागवाणी को वापस लौटना है तो भी कुछ समय तो इंतजार करना ...हमें मालूम था कि वो बेवफ़ा ही निकलेगी उसने अपने हाथों में मेहंदी लगा रखी थी हमने उसकी डोली कन्धे पे उठा रखी थी मालूम तो था ही कि वो बेवफ़ा निकलनी है इसलिए बहन उसकी पहले से पटा रखी थी 

चलते-चलते आज का कार्टून


वार्ता को देते हैं विराम--आप सभी को ललित शर्मा का राम-राम

18 टिप्पणियाँ:

अच्छी चर्चा के लिए आपका आभार.

आज कई बेहतरीन लिंक मिले आपसे ! आभार ललित भाई !

ललित जी यह पहली बार है जब किसी ब्लागर ने अपने ब्लाग पर इटिप्स कि चर्चा कि है
"जी करता है कि आज हसूं पागलो कि हसी, बहुत दिन बीत गऐ है गमो के साए मेँ"
लिखते रहिये,सानदार प्रस्तुती के लिऐ आपका आभार


साहित्यकार व ब्लागर गिरीश पंकज जीका इंटरव्यू पढने के लिऐयहाँ क्लिक करेँ >>>>
एक बार अवश्य पढेँ

बेहतरीन ब्लॉग वार्ता! बहुत खूब!

बेहतरीन ब्लॉग वार्ता.

आशीष के लिए धन्यवाद ...

उम्दा चर्चा...सभी लिंक्स पर देखा ...आभार

विस्तृ्त रूप से तैयार की गई ये चर्चा बहुत ही मनभावन रही...
आभार्!

थैंक्यू थैंक्यू थैंक्यू वैरी वैरी, वैरी मच थैंक्यू !!!जी

कोठा (भाग-एक)----काश तुम हिजङे होते.
आज बाप और बेटा दोनो एक साथ कोठे पर आया. पुतलीबाई से लङकी देने को कहा. किसी एक के साथ बेटा एक कमरे में चला गया. पुतलीबाई ने उसके बाप से कहा--" बेटा को तो सही जगह पे पहुंचा ही दिया. अब तुम यहां क्या कर रहे हो...?...जाओ अपने घर ". बाप खिसियाकर बोला-" मैं तुम्हें हिजङा नजर आता हूं क्या? ". पुतलीबाई का गुस्से से खून खौल उठा---"अरे जा जा हिजङों की बराबङी करता है. तुम मर्दों ने भगवान के दिये हुए हथियार को भांजने के सिवा किया ही क्या है, हिजङों से अलग. इतने महान तो हिजङे ही होते हैं जो यह जानते हैं कि हम भी किसी के मां, बहन और बेटी होते हैं. काश... तुम हिजङे होते तो किसी भी सूरत मे अपने बेटे के साथ कोठे पर नही आते".


ये लिंक मिला….…… पढ़ा,अच्छा प्रहार था

अल कायदा को पत्रकार चाहिए!

ही ही ही, हिन्दी के चाहिये होते तो जबर्दस्त प्रतियोगिता होती :) एंट्रेंस इक्जाम लेना पड़ जाता अलकायदा को…
हा हा हा

बेहतरीन लिंक्स मिले आभार.

अपनी चर्चा में मेरी रचना को शामिल करने के लिए आभार |मेरे ब्लॉग पर आने के लिए धन्यवाद |
आशा

बेहद उम्दा वार्ता ! मेरी पोस्ट को शामिल करने के लिए आपको धन्यवाद !

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