नमस्कार, ब्लॉग4वार्ता पर पुन: आना पड़ा, मित्रों की प्रेम भरी डांट-डपट के कारण। होली का त्यौहार प्रारंभ हो चुका है, आप सभी को होली की शुभकामनाएं, राग,द्वेष, बैर का होली में दहन कर नए सिरे से वर्ष की शुरुआत करने का समय है। मैने भी बहूत कोशिश की हैं इनका दहन करने की। लेकिन कुछ कड़ुवाहट तो रह जाती है, कुछ पलों की स्मृतियां जीवन में स्थाई रह जाती हैं। जिन्हे मनुष्य चाह कर भी नहीं भूल सकता और ऐसा ही कुछ मेरे साथ भी है, मित्रों धूम धाम से होली मनाएं, किसी का दिल न दुखाएं। चलते हैं आज की ब्लॉग वार्ता पर...
सबसे पहले
अनिता कुमार जी को जन्मदिन की बधाई देते हैं, उसके बाद चलते हैं
ताऊ गरही कवि सम्मेलन में चच्चा रामपुरी चाकू वाले : श्री अनुराग शर्माप्यारे श्रोताओं, मैं रामप्यारे ताऊ तरही कम गरही सम्मेलन में आप सबका स्वागत करता हुं. ताऊ गरही मुशायरे में अभी तक आप महाकवि ताऊ जी महाराज, महान कवियित्री मिस समीरा टेढी, आल राऊंडर ललित शर्मा और कवि सम्राट ...
यह जो जमीन पर पढ़े हेंयह इस राह में आखिर जानी पहचानी किसकी खुशबु हे यह इस राह में आखिर जाने पहचाने किस के पद्छाप हे ऐसा लगता हे मेरे वोह जिन्हें तलाशता हूँ में इधर उधर शायद वोह इधर से ही निकले हें अभी अभी ...... . अख...
चलते हैं रश्मि रविजा की पोस्ट पर, यहाँ
डोर को सुलझाने का यत्न हो रहा है, दादू महाराज कहते हैं "जीव जंजालों पड़ गया, उलझा नौ मण सूत। कोई एक सुलझे सावधान, गुरु बाईक अवधूत॥ शबनम खान कह रही हैं
रात और मैं...जैसेखाली ख़ामोश रातों में अधूरे सपने ज़ख्मी ख्वाहिशें बेचैन यादें, अक्सर जागे रहतें हैं संग संग मेरे... ज़ोर आज़माइशें करते हैं जलते बुझते हैं उनका सामना करती मैं जैसे... लौ लड़ रही हो बेरहम हव...शेखर सुमन के ब्लॉग से
बस यूँ ही आज तुम्हारी याद आ गयीजब कभी उन बीते लम्हों की अलमारी खोलता हूँ तो बेतरतीबी से बिखरी हुयी यादें भरभरा के बाहर गिर पड़ती हैं ... न जाने कितनी बार सोचा कि उन्हें करीने से सजा दूं लेकिन कभी जब बहुत बेचैन होता हूँ ...
अवधी में पढिए
इहवइ धरतिया हमार महतरिया ..कवि रमासंकर यादौ 'बिद्रोही' ३ दिसंबर १९५७ क सुलतापुर - अवध - के अइरी फिरोजपुर गाँव म पैदा भये। आर्थिक तंगी के चलते साइन-साइड कै पढ़ाई छोडि के नौकरी पकरिन। कुछ समय आंतर नौकरी छोड़ दिल्ली आये। दिल्ली आयके ज...वन्दना द्वारा
एक प्रयासआज बिरज मे होरी रे रसिया-2-* *मेरे बिरज मे ना हुई बरजोरी रे रसिया* *मै भी प्रेम रंग घोल के बैठी* *श्याम मिलन की आस मे बैठी* *मुझ संग हुई ना ठिठोली रे रसिया* *आज बिरज मे होरी रे रसिया-2-* *श्याम रंग की मै...ज्ञानवाणी पर
बहारें फिर भी आती हैं ...बहारें फिर भी आएँगीपरीक्षाओं का घनघोर माहौल बना हुआ है घर में ...पतिदेव के एम बी ए की परीक्षाएं बस अभी ख़त्म हुई है , बच्चों को अभी फ्री होने में थोडा समय लगेगा ...बहुत दिनों बाद घर से निकलना हुआ ...कार , ट्रक , दुपहिया...
उदय आज कल शेरों से जूझ रहे हैं, सेव टाईगर:)
कौन जाने किस घड़ी, अपनी घड़ी भी आयेगी !!न जाने कब तलक, हम खुद को आजमाएंगे चलो छोडो, क्या रक्खा है पुरानी रंजिशों में ! ... हम मोहब्बत को, और मोहब्बत हमें आजमाती रही उफ़ ! बला थी मोहब्बत, बस जिन्दगी गुजरती रही ! ... बेचैन आत्मा कह रही है
काहे हौआ हक्का-बक्काकाहे हौआ हक्का-बक्का ! छाना राजा भांग-मुनक्का ! इहाँ कहाँ सुनामी आयल काहे हौवा तू घबड़ायल कल फिर उठिहैं सीना ताने आज भले जापानी घायल देखा तेंदुलकर कs छक्का काहे हौआ हक्का-बक्का ! प्रकृति से खिलवाड़ हम ...
धर्मराज अदा जी के ब्लॉग से--यहाँ....! कुछ उथल-पुथल है, कुछ ऊबड़-खाबड़, कुछ झटके हैं, और कुछ हिचकोले, कभी शान्ति, तो कभी अपनापन, कभी प्रेम, और कभी रीता जीवन, समझौते की चाल चलाते, असंख्य धर्मराज, हर दिन नया शहर बसाते हैं,...
सुनिए मिसिर जी का प्रवचन
पुस्तकें भी जाग्रत देवता के समान होती आजकल स्वाध्याय के लिए उपयुक्त साहित्य बड़ी कठिनाई से काफी खोजबीन करने के उपरांत मिलता है जो जीवन निर्माण के लिए आज की परिस्थिति को ध्यान में रखते हुए पाठकों को ठोस व्यवहारिक सुझाव देते हैं . अखबारों में कि..सोनल रस्तोगी
होली पर कुछ कह रही हैं, हर उम्र में होली का अपना मज़ा होता है ..मन फागुन की बयार में बौराने लगता है आज भी बौइरा रही हूँ पर तुम पता नहीं कहा हो ..शायद कंधे पर लैपटॉप डाले ऑफिस की तरफ जा रहे होगे ...या अपनी शॉप पर बैठे होगे ....शाहनवाज के
चोरी हो रहे हैं लेख / रचनाएंआज अचानक अपनी ग़ज़ल *"मायूसियों से अकसर भर जाती है ज़िन्दगी" *को गूगल सर्च में डाला तो हक्का-बक्का रह गया, मेरी ग़ज़ल को कई लोगो ने अपने ब्लॉग पर सजा रखा था. चलिए बाकी ने तो साथ में मेरा नाम लिखा था, परन्त...
जिंदगी के मायने कितने जुदा होते हैं-इससे पहले कि सब के साथ हम भी होली के रंग में रंग जाएँ , आज प्रस्तुत हैं कुछ बेहद गंभीर नज़्में , जिंदगी की कड़वी सच्चाइयों को दर्शाते हुए । I) जिंदगी के मायने : सूने आसमां को ताकते किसान के माथे पर चिंता ...
कृत्रिम परिपक्वताशिक्षा प्रणाली और बाजार व्यवस्था दोनों नें मिलकर आज बच्चों से उनका बचपन पूरी तरह से छीन लिया है. दोनों ही बच्चों को उम्र से कहीं पहले बढा कर देना चाहते हैं. आज की पीढी में बारह-तेरह साल के बच्चे जिन्हे हम ...
श्री अलबेला खत्री आज रांची मेंमशहूर हास्य कवि श्री अलबेला खत्री रांची आ रहे हैं यह खबर मुझे ब्लोगर मित्र श्री ललित शर्मा ने दीऔर उनका मोबाइल नंबर भी उपलब्ध कराया ,मैंने अलबेलाजी से संपर्क साधा और कहा -रांची आकर मुझसे बिना मिले चले गए ..
जापानियों, तुम्हें सलाम हैदूसरा विश्वयुद्ध लाया था जापान के लिए तबाही और सिर्फ़ तबाही। हिरोशिमा तथा नागासाकी जैसे शहर तबाह हो गये थे। सारे देश की व्यवस्था छिन्न-भिन्न हो चुकी थी। किसी भी संस्था के पास अपने कर्मचारियों के लिये पूरा क...
महाब्लॉगर सम्मेलन...अविनाश वाचस्पति के घरआप सभी को भी निमंत्रण मिला होगा इस आयोजन का। अविनाश वाचस्पति जी वैसे भी आये दिन नई-नई ब्लॉगर मीट करते हैं लेकिन कल उनके यहाँ जो ब्लॉगर मीट थी उसका आँखों देखा प्रसारण यहाँ किया जा रहा है। मैने तो सोचा था क...
गूगल ब्लॉगस्पॉट ने एक नया विज़ेट पेश कियागूगल ब्लॉगर ने ताज़ा ताज़ा एक विजेट प्रस्तुत किया है जिससे द्वारा पाठक आपना ई-मेल दर्ज कर उस ब्लॉग की नई जानकारियाँ अपने ईमेल में प्राप्त कर सकता है. मूल तौर पर यह फीडबर्नर की ईमेल सेवा का ही दूसरा स्वरूप...
शिव पार्वती और विकीलीक पर संसद मे हंगामा लोकसभा चैनल पर हंगामा देख मां पार्वती ने सो रहे शिवजी को उठाया - सुनिये देखिये भारत मे क्या हो रहा है प्रभु भन्नाते हुये ब...
दिल हो लेकिन 'यंग' तो समझो होली हैहोली उमंगों का, मस्ती का, प्यार का त्यौहार है. पूरा देश धीरे-धीरे 'मूड' में आ रहा है-उत्सव के. लेकिन लेखक का भी मूड तो बने. लेकिन यह हर बार संभव नहीं होता. इस बार बहुत बेहतर कुछ सूझ न...
"गुजरा हुआ जमाना आता नहीं दोबारा…"साथी और भाई संजीत त्रिपाठी की सलाह है कि मैं,पत्रकारिता के अपने अनुभव "खबरों की दुनियाँ" में शेयर करुं । कोशिश होगी कि वर्तमान समय जो बदलाव आया या आ रहा है उसे दृष्टिगत कर अपने अनुभव आप तक इस माध्यम से पह...
तस्वीरें बोलती हैंमोहब्बत कब मरती है जो मर जाते हैं वह तो फ़क़त लोग होते हैं जो इतिहास बन कर वक़्त के माथे पर नक्श हो जाए उसी शय का नाम है मोहब्बत !!! मध्य भारत का "मांडू" बाज़ बहादुर, और रूपमती के प्रेम की कालजय...
भागमभाग में हैदराबाद आंध्र प्रदेश में, हैदराबाद के दर्शनीय स्थलों के बारे में तो आपने ज़रूर पढ़ा- सुना होगा. इसे दक्षिण व उत्तर का संगमस्थल कहा जा सकता है. यहां तेलुगु व हिन्दी दोनों चलती हैं. आइए आज हैदराबाद का वह पहलू देखें...
बताइए किस ख्यातनाम ब्लागीर ने किया है ये हाल अपने घर का?पूरा एक सप्ताह गुजर चुका है, इस ब्लाग पर एक शब्द भी नहीं लिख सका हूँ। हुआ यूँ कि पिछले शुक्रवार को एक विवाह में जाना हुआ। शनिवार को लौटा तो थका हुआ था। रविवार को इस सप्ताह में होने वाला अदालत का काम देखा, ...
चलते हैं हंसते रहो पर हंसने के लिए तैयारियां पूर्ण- पहला अंतराष्ट्रीय हिन्दी ब्लोगर सम्मलेन बांग्लादेश मेंलो जी हो गई तैयारियां पूरी…पासपोर्ट रेडी और वीसा तैयार….ब्लोगर बांग्लादेश की मच्छी मार्का धरती पर कूच करने को तैयार… अरे!…अरे…रुको तो सही…इतनी जल्दी काहे को करते हो मेरे यार?…पहले ज़रा किसी पण्डित…मौलवी या फिर पादरी से शुभ लग्न व मुहूर्त तो निकलवा लो….
क्यों भाई लोग?…क्या कहते हैं आप…मुहूर्त निकलवाना चाहिए या नहीं?…. अच्छा!…ओ.के….चलिए मान लेते हैं आपकी बात कि शुभ मुहूर्त निकलवाना तो निहायत ही ज़रुरी है लेकिन यहीं से तो असली समस्या शुरू हो रही है जनाब कि घूंघट के पट सबसे पहले कौन खोलेगा?….याने के पहला कदम कौन बढ़ाएगा?
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| पहचानिए भौजी को |
चलते है अब और मिलते हैं ब्रेक के बाद….........आपके लिए
होली का तोहफ़ा.............