सोमवार, 7 जून 2010

सोरेन कीर्केगार्ड के अनमोल वचन ..... ब्‍लॉग 4 वार्ता .... संगीता पुरी

अपने दिल्‍ली यात्रा की वजह से पिछले कई सप्‍ताह से मैं यानि संगीता पुरी वार्ता न कर सकी ,आज हिंदी ब्‍लॉग जगत में बहुत सारे सद्विचार प्रकाशित किए गए हैं , इन्‍हें न सिर्फ पढा जाना चाहिए , वरन् अमल भी किया जाना चाहिए। निशांत मिश्र जी ने  अपने ब्‍लॉग पर 

सोरेन कीर्केगार्ड के अनमोल वचनों का पोस्‍ट लगाया है .......





वे 

डेनमार्क के दार्शनिक और रहस्यवादी थे. बीसवीं शताब्दी के चिंतकों पर उनके दर्शन का गहन प्रभाव पड़ा है. उन्होंने मानव जीवन और इसकी प्राथमिकताओं, अनुभवों, अनुभूतियों, संकल्प, और विकल्पों के क्षेत्र में बेजोड़ काम किया है. उनके प्रसिद्द वचनों को मैंने यहाँ आपके लिए अनूदित किया है:

Patience(धैर्य)और Sense(विवेक)एक दूसरे के पूरक है, मगर जहां Patience दिखाने वाला उसे जरूरत से ज्यादा दिखा रहा हो,समझ लीजिये कि उसमे Sense की कमी है! 

मन क्या है, मन आत्मा का एक अदभुत स्वरूप है जो हमारे मस्तिष्क में चलायमान अर्थात क्रियाशील है, मन ही शरीर के आंतरिक स्वरूप तथा प्रकृति रूपी बाहरी स्वरूप के बीच की कडी है, जो हमें दोनो रूपों का साक्षात बोध कराता है।

मन ही हमें प्रत्येक वस्तु के महत्व को समझाता है, इच्छाएं जागृत करता है, भ्रम पैदा करता है, लालच जाग्रत करता है, प्रायश्चित कराता है, आत्मा-परमात्मा की ओर जाने का मार्ग प्रशस्त करता है और जब आप जाने लगें तो जाने से रोकता भी है।



  • सारा जगत स्वतंत्रता के लिए लालायित रहता है फिर भी प्रत्येक जीव अपने बंधनो को प्यार करता है। यही हमारी प्रकृति की पहली दुरूह ग्रंथि और विरोधाभास है।- श्री अरविंद
  • सत्याग्रह की लड़ाई हमेशा दो प्रकार की होती है। एक जुल्मों के खिलाफ़ और दूसरी स्वयं की दुर्बलता के विरुद्ध।- सरदार पटेल
  • कष्ट ही तो वह प्रेरक शक्ति है जो मनुष्य को कसौटी पर परखती है और आगे बढ़ाती है।- सावरकर    
जब सत्कर्मी व्यक्ति को असह्य कष्ट हो,

तो समझना चाहिए कि

ईश्वर शीघ्र ही उस पर कृपा करने वाला है

यह बात मैंने साक्षात् अनुभव की है


-टीकमचंद वारडे


ईमानदार आदमी ईश्वर की सर्वोत्कृष्ट कृति है ।


पोप
ईमानदार आदमी ईश्वर की सर्वोत्कृष्ट कृति है ।


इस लेख को इसके पहले भाग से आगे बढ़ाते हैं, इस लेख के पहले भाग में मैंने लिखा था,संगत का प्रभाव पड़ता है, अगर किसी की कोई भी युवा बर्ग या कोई भी किशोर,किशोरी अपनी जिस प्रकार की संगत बनाता या बनाती है, तो उस संगत का प्रभाव उस किशोर,किशोरी या युवा बर्ग पर पड़ता ही है, अगर कोई किशोर,किशोरी या युवा वर्ग अगर साहसिक कार्य करने वाले समुदाय की संगत में आता है,तो उस पर साहसिक कार्य करने का प्रभाव तो पड़ेगा ही,अगर वोह किसी भक्ति वाले समुदाय की संगत में आयेंगे  तो उन पर भक्ति का प्रभाव तो पड़ेगा ही,जिस प्रकार की संगत यह लोग करेंगे उन पर वैसा ही प्रभाव पड़ेगा,इसके विपरीत अगर कुसंगत में पड़ेंगे तो,यह लोग अनुचित कार्य करने प्रारंभ कर देंगे, कहने का तात्पर्य है,बातो से अधिक किसी इन्सान पर उस पर उस इन्सान के आचरण का प्रभाव अधिक पड़ेगा जिसकी वोह संगत में है |


विगत कुछ दिनों से मेरा मन स्वमेव अध्यात्म की ओर बढ रहा है ... हुआ दर-असल यह है कि विगत दिनों एक नये ब्लाग आचार्य जी पर पहुंच गया ... वहां अध्यात्मिक लेख पढे .... एक टिप्पणी में स्वमेव उनके अनुशरण में जाने की इच्छा जाहिर हो गई ....

... एक-दो दिन बाद आचार्य जी का ईमेल पर संदेश आया ... जवाब भी दे दिया ... फ़िर देखा आचार्य जी ने मुझे अपने "मन मंदिर" का सदस्य बना लिया है तथा ब्लाग पर मेरा नाम दर्ज कर मुझे कृतज्ञ कर दिया है ... जानकर बेहद खुशी हुई ... तब से ही कुछ अध्यात्मिक लिखने का सोच रहा हूं ... पर क्या लिखूं, कैसे शुरु करूं .... मन में उथल-पुथल चल रही है ... पर ये तो तय है कि मेरे कदम अध्यात्म की ओर बढ रहे हैं ...





कैसे  मुमकिन  है  कि  हम तुम,
साथ  में  जिंदा  रहें,
साथ  खेले मुस्कुराएं,
हम  कदम  हम  दम  रहें,






जिंदा है रहना मुझको जो,
फिर तुझे मरना ही  है,
लाशों पे रख के कदम,
आगे मुझे बढ़ना ही है,

कल मैं कोई पोस्ट नहीं लिख पाया। मैं ब्लॉग लेखन को अपनी आदत में शामिल नहीं कर पाया हूँ। मेरी आदत दैनिक अखबार के काम के हिसाब से ढली है। उसे बदलने में वक्त लगेगा, फिर मैं पूरी तरह से कार्य मुक्त नहीं हुआ हूँ। शायद फिर कहीं काम करूँ।

अखबार में हमारे काम का तरीका अगली सुबह के पाठक को ध्यान में रख कर बनता है। नेट पर या टीवी पर उसी वक्त का पाठक होता है। हर क्षण पर नज़र रखने की एक मशीनरी होती है। मुझे एक साल टीवी में काम करने का मौका भी मिला। वहाँ के काम में अजब सी मस्ती और रचनात्मकता होती है, पर कोई नहीं जानता कि उसने क्या किया। 


नहीं मील का पत्‍थर पथ में ,
समझूं कितना चलना बाकी।
अकेलेपन की छाया सघन 
मेरी पीडा और एकाकी मन।







मेरे बचपन का बिहार अर्थात गर्मी की छुट्टियों वाला बिहार, पके आम, घोड़ागाड़ी, बैलगाड़ी, खेत-खलिहान, बंसवारी, बगीचों, अनथक धमा-चौकड़ी वाला बिहार, गांव के साप्ताहिक बाजार वाला बिहार, गांव के सुन्दर मंदिर वाला बिहार। अब पीछे छूटता जा रहा है। मैं उसे पकड़ नहीं पा रहा हूं और उसकी मुझे पकडऩे में कोई रुचि नहीं है। वह शायद चाहता है कि मेरे जैसी थोड़ी समझ वाले लोग बाहर रहें, ताकि उसका कारोबार निर्विघ्न चलता रहे। बदलते बिहार में चिन्ताएं दूसरी दिशा में मुडऩे लगी हैं। 

मुझे पता था कि आप शीर्षक देख कर यही कहने वाले हैं कि क्या यार, जुम्मा जुम्मा दो रोज़ हुये नहीं नेट पर लिखते हुये और तू हम धुरंधरों को बतायेगा ये दांव-पेच कि नेट पर कैसे लिखना होगा। लेकिन बात तो सुनिये ---हमें हर एक की बात सुन तो लेनी ही चाहिये --मानना ना मानना तो आप के हाथ में है।
तो सुनिये मुझे आज सुबह ही विचार आया है कि मुझे इंटरनेट लेखन के ऊपर थोड़ा बहुत लिखना चाहिये। कारण? ---दरअसल यह विषय मेरे दिल के करीब है। कुछ अरसा पहले जर्मनी की स्टेट ब्राडकॉस्टिंग (Deutsche welle) से विशेषज्ञ आये.. और दिल्ली में मुझे उन से एक महीने की इसी वेब-राइटिंग पर ट्रेनिंग लेने का अवसर मिला। बहुत कुछ सीखने का मौका मिला और अब मैं उन सब अनुभवों को आप के साथ बांटने के लिये तैयार हूं।

ब्लाग के क्षेत्र में आज कई प्रतिभाऐं मौजूद हैं। संभवतः यदि ब्लाग जैसा माध्यम न होता तो वे गुमनाम ही रह जाती परंतु अपने हुनर को तराशने के लिये उन्हें यह एक अच्छा विकल्प मिला है। और इस माध्यम से उनकी प्रतिभा पूरी दुनिया के सामने महज एक क्लिक के द्वारा प्रस्तुत हो जाती है। परंतु यदि काम का दाम न मिले तो कई प्रतिभायें वक्त से पहले ही दम तोड़ देती हैं। इसके अलावा उत्साहवर्धन के लिये भी पैसा जरुरी है। तो इसके लिये ब्लाग पर विज्ञापनों को दिखा कर आनलाइन रेवन्यू कमाया जा सकता है। 



“चढ गया ऊपर रे…अटरिया पे…अटरिया पे लौटन कबूतर रे"…
“गुटर-गुटर…गुटर-गुटर"…
“ओह्हो!…दुबे जी आप"..
“जी तनेजा जी…मैं"…
“कहिए!…कैसे याद किया?”..
“ये मैं क्या सुन रहा हूँ?”…
“क्या?”..
“यही कि आपने हमेशा के लिए ब्लॉग्गिंग तो तिलांजलि दे बूढ़े बरगद के नीचे अपना सारा जीवन बिताने का निर्णय लिया है?”
टेलीफोन डायरेक्टरी में जगह बनाना आसान होता है...


किसी के दिल में जगह बनाना बहुत मुश्किल...

सोचा   मैंने एक दिन , इस जगत में सैर करूँ 



अपनी कल्पना की  लहरों पर धीरे धीरे  तैर चलूँ 

तभी विचार आया मन में ,कल्पना से उपर उठूँ

खुद चलते चलते   इस  धरती पर पग रखूं  |


जब धरा पग मैंने पृथ्वी पर 

एहसास हुआ ऐसा 

ज़िन्दगी के चार दिन औ  

फिर भी जीवन है कैसा ?


रविवार, 6 जून 2010

ब्लॉगजगत में अनोखी चोरी--क्रोध अनलिमिटेड--ब्लाग4वार्ता

लेखिका अरुन्धती राय ने खुले आम नक्सली हिंसा का समर्थन किया है। जब लेखक कवि हिंसा का समर्थन करेंगे तो उनके लेखन में प्रेम और लय कहां से आएगी। जिसकी आज समाज को सबसे ज्यादा जरुरत है। लेखक समाज का प्रतिबिंब जगत के सामने रखता है न कि सामाजिक अपराध में लिप्त हो जाता है। जब एक आम नागरिक हिंसा का समर्थन करता है तो उस पर कानून लागु कर दिया जाता है। लेकिन जब कोई बड़ा लेखक लेखिका खुले आम समर्थन कर रहा है तो उसके खिलाफ़ कानूनी कार्यवाही क्यों नहीं की जा रही है यह एक बहुत बड़ा प्रश्न है। अब मै ललित शर्मा ले चलता हूँ आपको आज की ब्लाग4वार्ता पर...................

सबसे पहले चर्चा करते हैं गिरीश पंकज जी के ब्लाग सद्भावना दर्पण की..अरुंधती राय द्वारा खुलेआम हिंसा का समर्थन...?मैं नक्सलियों और उनकी पैरोकार अरुंधती राय को अब क्या कहूं. दोनो की हरकतों पर रोना ही आता है. पहले नक्सलियों कि बात. इनके कारण पिछले दिनों ज्ञानेश्वरी रेल हादसा हुआ। इस हादसे में छत्तीसगढ़ और अन्य राज्यों क...मंज़िल चलकर आयेगी तुम्हारे पास अंधेरा बहुत गहरा हो तो समझना सुबह क़रीब है लड़ना नहीं तमस से अपनी शक्ति जाया मत करना शून्य में इंतज़ार करना सूर्य के उगने का अंधेरा ख़ुद-ब-ख़ुद भाग खड़ा होगा तुम्हारे रास्ते से दुःख जब भी आए घबराना नहीं, ...

मनुष्य की मूलभूत जैवीय जरूरतें उस के विचारों को संचालित करती हैं। विगत आलेख जनता तय करेगी कि कौन सा मार्ग उसे मंजिल तक पहुँचाएगा पर आई टिप्पणियों ने कुछ प्रश्न खड़े किए हैं, और मैं महसूस करता हूँ कि ये बहुत महत्वपूर्ण हैं। इन प्रश्नों पर बात किया जाना चाहिए। लेकिन पहले ...भरी दुनिया में आख़िर दिल को समझाने कहाँ जाएं......आवाज़....'अदा' की... आवाज़....'अदा' की... भरी दुनिया में आख़िर दिल को समझाने कहाँ जाएं मुहब्बत हो गई जिनको वो दीवाने कहाँ जाएं लगे हैं शम्मा पर पहरे ज़माने की निगाहों के जिन्हें जलने की हसरत है वो परवाने कहाँ जाएं सुनाना भी .

दिल्ली यात्रा-8-अंतिम में मिले हंसी ठिठोली के बादशाह............! दिल्ली यात्रा से वापस हम पहुंच रहे थे नागपुर, ट्रेन पूरी 5 घंटे लेट हो चुकी थी। नागपुर पहुंचे तो दो बज चुके थे। जो कि रायपुर पहुंचने का समय है। तभी मुझे याद आया कि सूर्यकांत गुप्त...पर्यावरणीय प्रदूषण रोकना मानव का कर्तव्यमनुष्य अपने वातावरण की उपज है,इसलिए मानव जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में स्वच्छ वातावरण जरूरी है। लेकिन जब प्रश्न पर्यावरण का उठता है तो यह जरुरत और भी बढ जाती है। वास्तव में जीवन और पर्यावरण का अटूट संबंध है...

मैं क्यों लिखता हूँ? जी का जंजाल बन गया है ये सब, जब से घर वालों ने मेरा ब्लाग देख लिया। अच्छा हुआ अभी डायरी नहीं देखी…… लेकिन क्या भरोसा?! आज नहीं तो कल उनके हाथ लग ही जायेगी। इतनी बातें सुनने को मिल गयी कि ऐसा लगता है मा...ताऊ पहेली - 77प्रिय बहणों और भाईयों, भतिजो और भतीजियों सबको शनीवार सबेरे की घणी राम राम. ताऊ पहेली *अंक 77 *में मैं ताऊ रामपुरिया, सह आयोजक सु. अल्पना वर्मा के साथ आपका हार्दिक स्वागत करता हूं. जैसा कि आप जानते ही हैं क...

सीनियर - जूनियर एसोसिएशन ... या छीछा-लेदर !!!ब्लागदुनिया के मेरे हमसफ़र साथियों .... लेखन क्षेत्र में कोई उम्र नहीं होती ... कोई छोटा-बडा नहीं होता ... लेखन के भाव महत्वपूर्ण व छोटे-बडे होते हैं .... ये और बात है कि हम भारतीय संस्कृति के अंग हैं इसलिय...वीरान धरती एवं पेड़ों की लाशें (1) सुबह सुबह उठकर दौडाता हूँ नजर, अपने घर की चार दीवारी के भीतर सजाये हुए हरे भरे बगीचे की ओर अरे! यहाँ तो मुरझा गये हैं पेड़, हरी हरी दूब सूखी घास हो गई है. पानी नहीं डाल..

कहीं धोखा तो नहीं खा रहे हैं आप? इस चित्र को देखकर क्या लग रहा है आपको? देखिये, सच सच बताइयेगा। आप यही सोच रहे हैं ना कि .... ! !! !!! पर आप जो सोच रहे हैं वह कहीं गलत तो नहीं है? कहीं धोखा तो नहीं खा रहे हैं आप? ? ?? ??? ????...कब तक जहर पिएगा आवाम मतलब तब तक जहर पिए रियाया* *शीतल पेय मामले में कोर्ट सख्त तो सरकार नरम!* *(लिमटी खरे)* * देश में कीटनाशक की अत्याधिक मात्रा से युक्त शीतल पेयजल की बिक्री के मामले में देश के सबसे बडे न्यायालय क...

संगठन एक नही बनता, दो बनते हैं ब्लागर संगठन"* *यह इन्ट्रनैशनल ब्लागर मीट, दिल्ली का मुख्य टापिक था।* मैं संगठन का सदस्य नहीं बनना चाहता हूं। लेकिन इसका यह अर्थ बिल्कुल नहीं है कि मैं संगठन का विरोधी हूं। मैं ना किसी विचार का पक्ष लेना...को नहीं जानत है जग में प्रभु संकटमोचन नाम तिहारो मै जैसे ही ध्यान केंद्र के अंदर गया अंदर गुरुदेव की बातें कान में पड़ी . गुरुदेव अनिल से से बातें कर रहे थे . गुरुदेव "सूर्य से तेजस्वी और प्रतापी इस जगत में और कोई नहीं है .सारे ग्रह नक्षत्र उसके...

ब्लॉगजगत में अनोखी चोरी अपने बारे में कुछ कहना कुछ लोगों के लिए बहुत आसान होता है, तो कुछ के लिए बहुत ही मुश्किल और मेरे जैसों के लिए तो नामुमकिन फिर भी अब यहाँ कुछ न कुछ तो लिखना ही पड़ेगा न तो सुनिए. by qualifi...दिल्ली के एक समाचार पत्र में 'गपशप का कोना', 'एक आलसी का चिट्ठा', घुघुती बासूती', 'चोखेरबाली' तथा 'हम आप'4 जून 2010 को दिल्ली के एक समाचार पत्र 'आज तक क्राईम टाईम्स' में *गपशप का कोना ,एक आलसी का चिट्ठा , घुघुती बासूती, चोखेरबाली* तथा *हम आप* का उल्लेख करते हुए निरूपमा पाठक प्रकरण पर एक लेख

एक छत्तीसगढिया का दर्द: दिल्ली से योगेश गुलाटी कभी कभी हैरानी होती है कि कुछ लोग अपने निहित स्वार्थों के लिये कैसे आतंकवाद और नक्सलवाद जैसी विनाशकारी विचारधाराओं का समर्थन कर सकते हैं! वो कैसे निर्दोषों और मासूमों की हत्याओं को सही ठहरा सकते हैं? अरुंधति..''चोर कहीं का..''(लघुकथा)''कल तो किसी तरह बच गया लेकिन आज? आज कैसे बच पाऊँगा पिटाई से, जब घर पर पता चलेगा तो....'' ये सोच-सोच कर सिहरा जा रहा था वो. थोड़ी-थोड़ी देर बाद क्लास के बाहर टंगी घंटी को देखता जाता और फिर चपरासी को.. ठीक...

मेरे बिना (कहानी) शाम से अब तक तीन डिब्बी सिगरेट फूंक चुका हूँ ,मुह का स्वाद इतना कडुवा हो चुका है की सामान्य में मुह का स्वाद कैसा होता है याद ही नहीं ...शायद यही कडवाहट मेरी रगों में भी घुल गई है, बिना झुंझलाए बात नहीं कर...दो शब्द, इजराइल की तारीफ़ में, Well done Israel ! अगर कोई देश संकल्प के साथ अपने दुश्मन का डटकर मुकाबला करता है तो आज की इस सभ्यता में उसकी निंदा की जाती है ! लेकिन मैं यह कहूंगा कि बहुत अच्छा किया इजराइल , वेल डन ! इजराइल अगर इस तरह का प्रतिघाती नहीं होत...

संगठन में ही बडी शक्ति है .. क्‍या आप इंकार कर सकते हैं ?? हिंदी ब्‍लॉग जगत से जुडने के बाद प्रतिवर्ष भाइयों के पास दिल्‍ली यानि नांगलोई जाना हुआ , पर इच्‍छा होने के बावजूद ब्‍लोगर भाइयों और बहनों से मिलने का कोई बहाना न मिल सका। इस बार दिल्‍ली के लिए प्रस्‍थान कर...सत्य की उपलब्धि के नाम पर – कविता – रवि कुमार सत्य की उपलब्धि के नाम पर ( a poem by ravi kumar, rawatbhata) सत्य कहते हैं ख़ुद को स्वयं उद्‍घाटित नहीं करता सत्य हमेशा चुनौती पेश करता है अपने को ख़ोज कर पा लेने की और हमारी जिज्ञासा में अतृप्ति भर देता है...

ग्लोबल वार्रि्मग पर एक आलेख - शिवम् मिश्रा हम बचत करेंगे तो ही बचेगी हमारी दुनिया ! वैज्ञानिकों का कहना है कि हर कोई अपने स्तर से प्रयास करे, तो ग्लोबल वार्रि्मग के बढ़ते दुष्प्रभाव को कम किया जा सकता है | यहाँ दिए गए कुछ छोटी छोटी पर बेहद जरूरी.....तेरी कमी का अहसास करके रोये.. तेरी बातो को बार बार याद करके रोये तेरे लिए दर पे फरियाद करके रोये तेरी ख़ुशी के लिए तुझे छोड़ दिया फिर तेरी कमी का अहसास करके रोये | 

क्रोध अनलिमिटेड...खुशदीप एक शख्स अपनी नई कार को पॉलिश से चमका रहा था...तभी उसके चार साल के बेटे ने एक नुकीला पत्थर उठा कर कार पर कुछ उकेर दिया...शख्स ने नई कार का ये हाल देखा तो क्रोध से पागल हो गया...उसने गुस्से के दौरे में ही बच...गुफ्तगू -शोभना 'शुभि' काफी दिनों से ख्याल मन दिमाग पर आहट दे कर मुड जाते है कलम निकाल कर लिखना शुरू करती हूँ कि कुछ काम डायरी को फिर से अलमारी में सजवा देते हैं सोचती हूँ चाँद सितारों से बातें कर लूँ थोडा रुक कर अपने दिल से भी...

प्राप्त सूचना के अनुसार छत्तीसगढ में कुत्तो का महा ब्लोगर सम्मेलन होने वाला है.-------मिथिलेश दुबे प्राप्त सूचना के अनुसार छत्तीसगढ में कुत्तो का महा ब्लोगर सम्मेलन होने वाला है. गब्बर-- नाच बसंती नाच वीरु -- नहीं बसंती तुम इन कुत्तों के सामनें मत नाचनाबसंती-- परन्तु मेरे सईया मैंने तो सुना है कि सारे कुत्ते छत्तीसगढ़ गयें है ब्लोगर सम्मेलन में ये..कामनवेल्थ गेम्स का टिकट बुक कराया क्या लो जी तैयारियां अब आखिरी पायदान पर हैं। दिल्ली उतावली हो रही है, खेल प्रेमियों का स्वागत करने के लिये। 03 अक्तूबर से 14 अक्तूबर तक होने वाले कामनवेल्थ गेम्स क्या आप नहीं देखना चाहेंगें। अजी खेल ना सही उद्घाटन समारोह तो देख आईये।

ब्लाग 4 वार्ता को देते हैं विराम --आप सभी को ललित शर्मा का राम राम--मिलते हैं ब्रेक के बाद...........

शनिवार, 5 जून 2010

आग लग जाये जहाँ में फिर से फट जाये ज़मीं- नई पृथ्वी की तलाश--------ब्लाग4वार्ता

आज पर्यावरण दिवस है,जिसे हम वर्ष में एक बार मनाते हैं और कुछ पेड़ लगाकर,गोष्ठियां सेमीनार करके अपने कर्तव्य की इति श्री कर लेते हैं। पर्यावरण प्रदुषण से पृथ्वी के वातावरण को खतरा हो गया है धरातल की गर्मी दिनों दिन बढते ही जा रही है। जिस हिसाब से पृथ्वी के संसाधनो का निर्बाध दोहन हो रहा है और जल, वायु एवं वातावरण प्रदुषित हो रहा है लगता है कि एक अतंराल के बाद नयी पृथ्वी की आवश्यकता पड़ ही जाएगी। इससे पहले हम इसी पृथ्वी को सहेज ले तो उत्तम है। अब मै ललित शर्मा ले चलता हुं कुछ चिट्ठों की वार्ता पर.........

सबसे पहले एक आलेख लेते हैं उमेश चतुर्वेदी जी का  कब चेतेंगे हम पर्यावरण को लेकर --पर्यावरण को लेकर विकसित देशों की चिंताएं कितनी गंभीर है, इसे समझने के लिए उनके रवैये पर भी ध्यान देना होगा। पिछले साल दिसंबर में डेनमार्क की राजधानी कोपेनहेगेन में हुए सम्मेलन में भी उनका टालू रवैया साफ नजर आया। अमेरिका समेत तकरीबन सभी ---जुगाली पर संजीव शर्मा बता रहे हैं चींटी ने खोली ज़माने की पोल कई बार पुरानी दन्त कथाएं और मुहावरे बहुत कुछ कह जाते हैं.कुछ तो इतने सटीक होते हैं कि मौजूदा समय के बिलकुल अनुरूप लगते हैं और गागर में सागर की तरह साफगोई के साथ हकीकत को बयान कर देते हैं.कुछ ऐसी ही एक कथा मेरे एक मित्र ने मेल पर भेजी है. मुझे लगता

अदालत का नोटिस फेसबुक के माध्यम से भेजा जाएगा आस्ट्रेलिया की एक अदालत ने कहा है कि सुनवाई से बचने की कोशिश करने वालों को ऑनलाइन सोशल नेटवर्किग वेबसाइट "फेसबुक" के माध्यम से कानूनी नोटिस भेजी जा सकती है। अदालत ने आदेश दिया है कि बच्चो के विवाद में श... एक बहुत ही मकबूल गीत सुनिये, देखिए और अपनी प्रतिक्रिया दीजिये... एक बहुत ही मधुर गीत है जिसके बोल हैं " ना ना करते प्यार तुम्हीं से कर बैठे". एक बड़ी दुर्लभ फुटेज यूट्यूब पर है. यहां यह गीत कोकिलाकंठी सुमन कल्यानपुर गा रही हैं.सुनिये, आनन्द लीजिये और प्रतिक्रिया दीजिये. ...

एक रहिन ईर, एक रहिन बीर, एक रहिन राजा, एक रहिन हम.... एक रहिन ईर, एक रहिन बीर, एक रहिन राजा, एक रहिन हम, एक रहिन ईर, एक रहिन बीर, एक रहिन राजा, एक रहिन हम। ईर ने कहा चलो शिकार कर आबें, बीर ने कहा चलो शिकार कर आबें, राजा बोला चलो शिकार कर आबें, हमऊँ बोले हाँ च... उसका / मेरा चाँद -- एक नौनिहाल माँ का एक खिड़की से झाँक रहा था साथ थाल में पड़ी थी रोटी चाँद अस्मां का मांग रहा था माँ ले कर एक कौर रोटी का उसकी मिन्नत करती थी लाके देंगे पापा शाम को उससे वादा करती थी पास खड़ा एक मासूम सा बच्...

गाने की वाट अभी कुछ दिनों पहले ही हास्य अभिनेता राजू श्रीवास्तव की एक प्रस्तुति को देखकर मैं खूब हंसा था। राजू श्रीवास्तव ने कुछ फिल्मी गानों की तीन-पांच करते हुए यह साबित करने की कोशिश की थी कि गाना लिखने वालों ने गी...केवल नमाज़ पढ़ लेने से ख़ुदा नहीं मिलता ख़ुदा को पाने का रास्ता सिवाय ख़ल्क की यानी दूसरों की ख़िदमत के और कोई नहीं है । माला लेकर 'अल्लाह अल्लाह ' रटने से, चटाई बिछा कर नमाज़ पढ़ने से या गुदड़ी ओढ़ लेने से अल्लाह नहीं मिलता--

एक घंटे में गूगल से 3497.62 रुपए पाने का मौका नहीं, कोई मज़ाक नहीं। यकीन मानिए। गूगल ब्लॉगर साथियों को एक घंटे में 3497.62 रुपए पाने का मौका दे रहा है। इसके लिए न तो कोई विज्ञापन को लगाने या उस पर क्लिक करने का झमेला है और न ही कोई दूसरा मशक्कत वाला क... मशहूर भारतीय हस्तियों के ट्विटर पते-भारत में बहुत सी मशहूर हस्तियाँ अब लोगों से ट्विटर के माध्यम से ही अपने विचार बाँट रही है । अभी तो जैसे होड़ लगी है की कौब ट्विटर में है और कौन नहीं । यहाँ पर है एक सूची कुछ भारतीय हस्तियों की उनके ट्विटर ...

तो क्या अब मधुमेह से बचने के लिये भी दवाईयां लेनी होंगी? एक बार तो यह रिपोर्ट देख कर मेरा भी दिमाग घूम गया कि अब नौबत यहां तक आ पहुंची है कि मधुमेह जैसे रोग से बचने के लिये भी दवाईयों का सहारा लेना होगा। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि प्री-डॉयबीटिज़ को मधुमेह तक न प...तुम और धर्म धारण करने योग्य जो भी है जरुरी नहीं है हो वह धर्म ही तुम्हे जो धारण किया है मैंने अपने रोम रोम में अपनी हर सांस में हर क्षण हर पल तुमसे निर्देशित हुआ हूँ निर्धारित हुआ हूँ पोषित हुआ हूँ मैं , धर्म नहीं...

आइना वही रहता है चेहरे बदल जाते हैं क्या करना है साहब लड़के को ज्यादा पढ़ा लिखाकर? आखिर करना तो उसे किसानी ही है। चिट्ठी-पत्री बाँचने लायक पढ़ ले यही बहुत है।"* यह बात हमसे गाँव के एक गरीब किसान ने कही थी जब हमने उसे अपने बच्चे को खूब पढ़ाने-ल... ब्लागर मीट रिपोर्ट नहीं, बल्कि यह एक बढिया ब्लागर मीट थी, जिसमें Blogging के कई सारे Points पर सभी ने अपने-2 विचार व्यक्त किये। जो आप श्री मयंक जी की , श्री अजय झा जी की, श्री पवन चंदन जी की, श्री शाहनवाज जी की, नुक्कड और अन्य रिपोर्टो...

व्यंग्य पर व्यंग्य लिखना ही है तो टिप्पड़ियां लिखिए बड़ी दर्दनाक बात है. मन दहल जाता है सुनकर. मुल्क में तमाम समस्याएं है. गरीबी की समस्या, महंगाई की समस्या, सरकार बनाने की समस्या और सरकार बन गयी तो उसे चलाने की समस्या.... ज़िंदगी आग लग जाये जहाँ में फिर से फट जाये ज़मीं। मौत हारी है हमेशा ज़िंदगी रुकती नहीं।। आँधी आये या तूफ़ान बर्फ गिरे या फिर चट्टान। उत्तरकाशी भुज लातूर सुनामी और पाकिस्तान।। मौत का ताण्डव रौद्र रूप में फँसी ज़िंदगी अं...

न्याय देते-देते हम अपने साथ अन्याय ना कर बैठें-----कसाब प्रकरण जिस देश के 90%लोगों को पीने के पानी की सुविधा मुहैया न हो, जिस देश के गांवों को पक्की सड़कें नसीब न हो, जिस देश के बच्चों को गांव में प्राथमिक शाला उपलब्ध न हो। ऐसी आधार भूत समस्याओं से लड़ने वाला देश मात्र ... भिखारीपन मुआ... ...ब्लॉग्गिंग की दुनियाँ में- उस दिन में यूँ ही.. एक कवी सम्मलेन सुनने चला गया, सुनने को तो वहाँ कुछ ख़ास था नहीं, पर वहाँ का नज़ारा देख बस मजा आ गया कुछ मत पूछिए ! बस यूँ जानिये की मजा आ गया......! कवी सम्मलेन तो वो कम था.. एक-दुसरे क...

जीवन कोई दलदल है क्या........?....(क्षणिका) जितना सुलझाना चाहता हूँ* *उतना ही छटपटाता हूँ,* *जितना छटपटाता हूँ* *उतना ही धंसता जाता हूँ,* *जीवन कोई दलदल है क्या........?* *समझ ही नहीं पाता हूँ...* . . . *जय हिन्द जय श्रीराम,* *कुंवर जी,*  यह कैसा आविष्कार ? इंसान ने शुरुआत से ही विज्ञान को अपना साथी बनाया हुआ है ............उसने अपनी हर जरूरत के मुताबिक अपने इसी साथी की मदद से अपने लिए ऐसी ऐसी खोजे करी कि आज वह अपनी धरती को छोड़ चाँद तक पर बसने के सपने सजा रहा...

वैशाखनंदन सम्मान प्रतियोगिता मे : श्री अविनाश वाचस्‍पति प्रिय ब्लागर मित्रगणों, आज वैशाखनंदन सम्मान प्रतियोगिता में श्री अविनाश वाचस्पति की रचना पढिये. लेखक परिचय :- अविनाश वाचस्‍पति, साहित्‍यकार सदन, पहली मंजिल, 195 सन्‍त नगर, नई दिल्‍ली 110065 मोबाइल 09868...मिस हॉस्टल ....लघुकथा [एक बार फिर] आज के *अमर उजाला* के *रूपायन *में प्रकशित मेरी लघुकथा *मिस हॉस्टल* ..... एक बार फिर से *मिस हॉस्टल* * * *आज हॉस्टल में बहुत गहमागहमी का वातावरण था क्योंकि आज समस्त वरिष्ठ छात्राओं के मध्य में से को...

कोशिशों की अब भी आख़िरी तो साँस थी बची... कुछ बातें बहुत विचलित कर देती हैं...जरा सी हार पर ये समझना कि ज़िन्दगी के सब रास्ते बंद हो गए...और जीवन जैसे अनमोल उपहार को तोड़ कर फेंक देना और मौत को गले लगा लेना...जब तक हार न मानो हार नहीं होती....बस ...मंगलौर विमान दुर्घटना से लगा IB के विशेष अधिकारियों के कार्यों पर सवालिया निशान----? हलांकि IB (खूपिया ब्यूरो) में इमानदार और देश के लिए मर मिटने वाले अधिकारी अभी भी मौजूद हैं ,ये अलग बात है कि उनकी इस भ्रष्ट व्यवस्था में सुनी नहीं जाती है | हमारा आग्रह है IB के ऐसे इमानदार अधिकारियों से कि वे छोड़ दें ऐसे नौकरी को जिसमे उनके सत्य और--

पर्यावरण दिवस विशेष : पेड़ तब भी नही सुखाता कल ०५ जून विश्व पर्यावरण दिवस है, खूब शोर होगा, अपीले होंगी, पौधे रोपे जायेंगे, तस्वीरे खिंचेगी लोग जबरिया मुस्कुराते हुये न जाने क्या भाषण पेलेंगे और हो जायेगा इस बार भी पर्यावरण दिवस..........चिडियों,ने जब बदल लिया होअपना आशियाना /छांव ने तलाश लिया--द संडे पोस्ट में नितीश कुमार, अमर सिंह, मनोज बाजपेयी के ब्लॉगों सहित दिल्ली ब्लॉगर सम्मेलन दिल्ली से प्रकाशित साप्ताहिक द संडे पोस्ट के 30 मई-6 जून अंक में 'ब्लॉगनामा' स्तंभ अंतर्गत बिहार के मुख्यमंत्री नितीश कुमार, राजनीतिज्ञ अमर सिंह, फिल्म अभिनेता मनोज बाजपेयी के ब्लॉगों की चर्चा सहित नांगलोई, दिल्ली में हुए ब्लॉगर सम्मेलन का जायजा--

आज का कार्टुन 

Mastan singh MASTAN TOONS पर

अब देते हैं वार्ता को विराम--आप सभी को ललित शर्मा का राम राम

शुक्रवार, 4 जून 2010

दंगल की शुरुआत- ब्लागर जेल जाने-पंजीकरण करवाएं--- ब्लाग4वार्ता-----ललित शर्मा

दिल्ली यात्रा के दिनों में अखबार पढने का भी समय नहीं मिला। अभी घर पर सभी पुराने अखबारों को पढ रहा था तो पता चला कि मंगलुर में भयानक प्लेन दुर्घटना हुई। जिसमें लगभग 150से उपर लोग मारे गए। बहुत ही बुरा हादसा था। मैने भी इस रुट पर तीन हवाई यात्राएं की है। एर्नाकुलम से फ़्लाईट मंगलुर होते हुए ही मुंबई आती है और समुद्र पर ही उडान भरती है। मंगलूर की पहाड़ियां के बीच खतरनाक जगह पर ही है यह हवाई पट्टी। लेकिन जब मै आया तो मुझे खतरनाक नहीं लगी, लेकिन अब वि्शेषज्ञों ने कहा है कि खतरनाक स्थान है यहां विमान लैंड करना बड़ा मुस्किल है। अगर यही पहले समझते तो इतनी मौते ना होती। इनका जिम्मेदार कौन है? यह एक सवाल है। मै ललित शर्मा आपको ले चलता हुं आज की वार्ता पर....................

पहली पोस्ट लेते हैं  ब्लागरों के कुत्तों ने बनाया संगठन राजकुमार सोनी  बिगुल -पर---जी हां... यह सच है। अब यह जूनियर ब्लागर है या सीनियर यह तो मुझे नहीं मालूम लेकिन आज सुबह जैसे ही मैंने अपने घर में मौजूद बुद्धु बक्से के कान को उमेंठा तो अपने टकले के दो चार बालों को छिपाते हुए लोगों को क...ब्लॉग पर दंगल की शुरुआत --- माइक्रो पोस्ट इंटरनेट पर ब्लॉगिंग की सर्वप्रथम शुरूआत करने वाले का क्या मकसद रहा होगा ये तो पता नहीं पर ये जरूर पता है कि ये तो नहीं रहा होगा जो आजकल दिख रहा है। इन सब बातों पर ध्यान दिये बिना इसपर ध्यान दें तो आपका ... 

कविता का मौसम कविता का मौसम बस मुहाने पर ही है. गरमी तो वैसे भी कविता का पौधा सूख जाता है और बारिश के साथ लहलहा उठता है. सावन, बारिश, बरखा, मोर, मोरनी, झूला, छतरी, बदरी का आज भी, याने ए सी के जमाने में भी, बोलबाला बरक..."आचार्य जी" का प्राकट्य गीता के महात्म्य से कौन अनभिज्ञ होगा. हमने देखा आज कल ब्लॉग जगत में *"**आचार्य जी**" का प्राकट्य* यत्र तत्र सर्वत्र हो रहा है . स्वलिखित ग्रन्थ में सद्विचार की धारा प्रवाहित कर रहे हैं. आचार्य शब्द का प्र...

पांच माह में 500 पोस्ट नए साल 2010 में हमने अपने ब्लागों में पांच माह में करीब पांच सौ पोस्ट लिख डाली है। इस समय हमारे ब्लाग राजतंत्र और *खेलगढ़* के साथ अगर *ब्लाग 4 वार्ता* को मिला दिया जाए तो 1400 पोस्ट का आंकड़ा भी पार हो गया... अब सजेगी ब्लाग चौपाल हमने अब आपसी मतभेद से ऊपर उठते हुए एक ब्लाग चौपाल सजाने का फैसला किया है। इस चौपाल में हम हर उस ब्लाग को शामिल करने की कोशिश करेंगे जिस ब्लाग पर हमारी नजरें पड़ेंगी और जिस ब्लाग में अच्छा लेखन होगा। हमें इ...

आज हरि शर्मा का जनमदिन हैआज, 3 जून को नगरी-नगरी द्वारे-द्वारे वाले हरि शर्मा का जनमदिन है। इनका ई-मेल पता harisharmaster@gmail.com तथा मोबाईल नम्बर 0-9001896079 है। बधाई व शुभकामनाएँ वैसे, आज अरूण मिश्रा का जनमदिन भी है। *आन...खुशखबरी... खुशखबरी... खुशखबरी... ब्लोगिंग से कमाई शुरू
आप तो जानते ही हैं कि आजकल विज्ञापन का जमाना है और आप विज्ञापन के महत्व को भी अच्छी तरह से समझते हैं। ये विज्ञापन चीज ही ऐसी है कि किसी उत्पाद को बाजार में आने के पहले ही सुपरहिट बना देती है। अच्छे से अच्छ...

कुछ ब्लागर जैल जाने की कगार पर हैं !!!बलागजगत में मचे घमासान को देख कर ऎसा लग रहा है कि कुछ ब्लागर जैल जाने की कगार पर हैं !!! ... जैल कैसे ... क्या उन्होंने किसी का खेत काट लिया है ? ... या किसी की मोटर साईकल की टंकी से पेट्रोल चोरी कर लिया ह...ब्लागर मीट के आयोजकों मैं और नीरज जाटजी जब नांगलोई जाट धर्मशाला के सामने पहुंचें तो देखा श्री अविनाश जी बाहर ही खडे सब आने वालों का स्वागत कर रहे हैं। अन्दर पहुंचते ही श्री राजीव तनेजा जी और सुश्री संजू तनेजा जी एकदम दौडकर पा...

उद्योगपति है भाता , अपराध से है नाता एसईसीएल के सीएमडी एम.पी. दीक्षित रिश्वत लेते गिरफ्तार क्या हुए सारा संसार बताने वाले एक अखबार के मालिक की पोल खुलने लगी है। शराब के धंधे से अखबार के धंधे होते हुए लोहे के धंधे में आए इस अखबार मालिक का संबंध ...पूरे महीने दिलो दिमाग में दुर्घटनाओं का खौफ छाया रहा !! पिछले आलेख में मैने बताया कि इस बार की दिल्‍ली यात्रा मेरे लिए बहुत ही सुखद रही, पर पूरे महीने दिलो दिमाग में दुर्घटनाओं का खौफ छाया रहा। 5 मई को बोकारो से प्रस्‍थान की तैयारी में व्‍यस्‍त 4 मई को मिली एक ...

बेटा बीमार है .....मेरी दो बेटियां हैं ...बेटा नहीं मगर माँ , मम्मी , मॉम आदि संबोधन दिए बगैर भी सचमुच माँ जैसा ही सम्मान देने वाले बेटे कई हैं ...उनमे से एक बहुत ही प्यारा भोला भाला सा बेटा आजकल बीमार है ... अभी लगभग एक वर..."अच्छा, अमिताभ की तरह भगवान के पास जाकर बोल भी आया " रित्तु ने कहा "मेरा पूरा उत्साह ठंडा पड़ गया है .मै आखिर काम करू तो किसके लिए .डाक्टर साहब सबकी प्रेरणा होती है .जादातर लोग परिवार के लिए करते है .मेरी तो शादी होने का कोई ठिकाना दिख नहीं रहा है " दर अ...

बाद मुद्दत के पहलू में सनम आया है उसने हंसकर जब गले लगाया है आँखों में चाँद उतर आया है गालों में पड़े गहरे दो भंवर उनमें डूबकर कौन उबर पाया है कुछ हया उसकी अदा में शामिल है और कुछ अदा से वो शर्माती भी है कभी झिड़क देती है शरारत से कभ...अवसाद (डिप्रेशन) के लिये ली जाने वाली टैबलेट क्या संजीवनी है ?
अकसर मैं सोचता हूं कि यह कैसे संभव है कि डिप्रेशन के लिये ली जाने वाली गोली संजीवनी बूटी जैसा काम कर देगी और मूड को लिफ्ट करा देगी। वैसे तो मैं कहने को एलोपैथी से ही संबंधित हूं लेकिन पता नहीं क्यों कुछ तकली...

वैशाखनंदन सम्मान प्रतियोगिता मे : सुश्री वाणी शर्मा प्रिय ब्लागर मित्रगणों, आज वैशाखनंदन सम्मान प्रतियोगिता में सुश्री वाणी शर्मा की रचना पढिये. लेखिका परिचय .... नाम : वाणी शर्मा शिक्षा : एम . ए .(इतिहास ), एम . ए प्रिविअस (हिंदी ) साधारण गृहिणी ...पढने का ... जानवर....तुम महान हो चौराहे पर सेक्स करना जानते हो, तुम्हें बलात्कार करना नहीं आता. तुम विश्वास करना जानते हो, तुम्हें छल करना नहीं आता. तुम बोलना जानते हो, झूठे शब्द गढना नहीं आता. तुम्हारे पास बुद्धि है, तुम चालाकी नहीं जानते....

असली बुद्धिजीवी- नकली बुद्धिजीवी (ज़रा सी मसखरी)------------------>>>दीपक 'मशाल' बुद्धिजीवी!!! एक ऐसा शब्द जिससे मेरा तब पाला पड़ा जब उसका मतलब समझ में आने लगा था.. *असल में है क्या कि मैंने ये महसूसयाया है कि शब्दों का भी ज़िंदगी के सफ़र में पहिचान होने के आधार पर वर्गीकरण कर सकते ह... सोच रहा हूँ कि क्या लिखा जाए और क्यूँ लिखा जाए !!! अब इसे मौसम का असर कहा जाए कि माहौल का; पता नहीं क्यों अब कुछ भी लिखने पढने को मन ही नहीं करता. शायद ब्लागिंग का वो पहले वाला रस अब चला गया है. पहले कभी कुछ लिखते थे तो चाहे उसे पढने वालों को बेशक आनन्द न ... 

गीत/ पापी है वह गौपालक तो, जिसकी गैया हुई हलाल. कल रात नाली में गिरकर एक गर्भवती गाय की जान चली गयी. मै अपने आँसूं नहीं दिखा सकता लेकिन इस घटना ने मुझे कितना दुःख दिया, वह मेरी आहत-भावना को देख कर समझ सकते है. अब तक उबर नहीं पाया हूँ इससे. कल बेटे साहि... कुछ पोस्टें , देखी अनदेखी सी (पोस्ट झलकियां )- बीबीसी हिंदी ने अपने पत्रकार साथियों को अपने मन की बात अपने तरीके से कहने के लिए ,के लिए बीबीसी ब्लोग्स मंच प्रदान कर रखा है । इस मंच पर प्रतिदिन अलग अलग पत्रकार जो देश विदेश के अलग अलग कोने में अ...

लाली पूरब की ना खोए, नवजीवन का श्वास बहे...कुछ लाल रंग का उपयोग कर लिखा है उम्मीद है पसंद आये....हर पंक्ति में लाल शब्द या उससे जुड़े किसी शब्द का उपयोग किया है....एक छोटा सा प्रयोग और आवाहन... एक समय था लाली अद्भुत आसमान में सजती थी... सिंदूर...मेह की बाट पहली बरसात से पांखों के भीतर ...तक बूँदें जा ठहरी झटक कर चिड़िया मार मार चोंचे पंखों पर सूखाती वो बरसात ... फिर ....निहारती आकाश शायद ...आज आयें वे जाऊं जाकर सजा लूँ घोंसला बिछाकर नर्म नर्म ह...

पहली और अंतिम चेतावनी --- ब्लॉग पर बनने वालीं एसोसिएशन का पंजीकरण करवाएं ये बहुत हो गया ड्रामा, अब ये सब नहीं चलेगा। हाँ जी, सही कह रहे हैं, जिसे देखो वो ब्लॉग के नाम पर तमाम तरह की एसोसिएशन बनाने निकल पड़ा है। अब ऐसा ज्यादा नहीं चलेगा। कोई वरिष्ठ के नाम पर तो कोई जूनियर के न...इ..... सीनियर जूनियर का है ब्लाग जगत मा?: दिल्ली से योगेश गुलाटी आजकल ब्लागजगत में सीनियर जूनियर की चर्चा बडी जोरों पर है! बीते दिनों सुनने में आया कि जूनियर ब्लागरों ने अपना संगठन भी बना लिया है! भई हमारी तो कुछ समझ नहीं आया! इसलिये आज हमने निश्चय किया कि ज़्यादा से ज़्य...

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गुरुवार, 3 जून 2010

जूते ही जूते-कुत्ता भूके हज़ार -धडाधड महराज-बब्बे का चमत्कार

भीषण गर्मी का कहर दिल्ली यात्रा के दौरान देखने को मिला, गुड़गाँव से दिल्ली तक सड़क के किनारे पेड़ बहुत ही कम नजर आए, गुड़गांव नए टोल से लेकर रेवाड़ी रोड़, खेड़की दौला तक के पुराने टोल तक एक भी पेड़ नहीं मिला जो राहगीर को छाया दे सके। पहले जब इधर आता था तो सड़क के किनारे पेड़ दिखाई देते थे। लेकिन अब सड़क बनाने वालों ने पेड़ काट डाले। उसकी जगह नए पेड़ भी नहीं लगाए। नए टोल से लेकर उद्योग विहार के मोड़ तक भी अगर कोई गर्मी के दिनों में धोखे से भी पैदल आ गया तो उसकी जान अवश्य ही चली जाएगी। सड़क के किनारे पेड़ नहीं मॉल नजर आते हैं जो छाया नहीं दे सकते, अब पावस का समय आ रहा है हो सके तो ज्यादा से ज्यादा पेड़ लगाएं जिससे आने वाली पीढी सुख का सांस ले सके। अब मै ललित शर्मा ले चलता हुँ आपको आज की ब्लाग4वार्ता पर कुछ नए चिट्ठों के लिंक के साथ................

प्रारंभ करते हैं डॉ महेश परिमल की पोस्ट आखिर कौन है अफजल गुरु को बचाने वाले! से ---डॉ. महेश परिमल अजमल कसाब को जब फाँसी की सजा मुकर्रर हुई, उसके बाद संसद पर हमला करने वाले अफजल गुरु को फाँसी पर चढ़ाने के लिए दबाव बनने लगा। लेकिन इस बीच जो बयानबाजी हुई और फाइल इधर से उधर हुई, उससे यह ... मैं भी भूखा हूं. संस्था में चार लोग काम कर रहे थे. कल मुझे एक हजार रुपये प्रति श्रमिक कुल चार हजार रुपये वेतन देना था.हाथ पर रुपये सिर्फ़ दो हजार ही थे.मैंने चारो श्रमिक के पिछले माह के कार्य का अवलोकन किया.दो श्रमिक लगातार...

सुपर स्टार के झटके, बेचारे रामप्यारे लटके जैसा कि आप जानते हैं कि मिस. समीरा टेढी एक प्रख्यात माडल के अलावा फ़िल्मी दुनियां की भी नंबर एक अदाकारा हैं. उन्होनें ताऊ प्रोडक्ट्स की मोडलिंग से अपना कैरियर शुरु किया और फ़िर सफ़लता के नित नये पायदान छूती चली गई.ताऊ टीवी के खास खबरी पत्रकार रामप्यारे उर्फ़ "प्यारे" ने मिस.टेढी के इंटर्व्यु के लिये बहुत चक्कर लगाये पर मिस समीरा टेढी ने "प्यारे" को कभी घास नही डाली. पर थक जाये वो "प्यारे" ही क्या?मिस. समीरा टेढी - इस सप्ताह ’तेरी मूंछें मेरी जुल्फ़े " द कंपीटिशन" रिलीज हो रही है. और यू नो...इसके पूरे 740 प्रिंट एक साथ लग रहे हैं...बिग धमाका पिक्चर...यू नो.."प्यारे" - मिस. टेढी - इस पिक्चर के बारे में कुछ बतायें प्लिज...मिस. टेढी - मि. प्यारे, आप इसी से अंदाजा लगा लिजिये कि इसमें मैं ट्रिपल रोल कर रही हूं और मेरे अपोजिट इसमे राज कुमार भाटिया, अजय कुमार और ललित कुमार जैसे सुपर स्टार काम कर रहे हैं और मैने इन तीनों के ही छक्के छुडा दिये हैं इस फ़िल्म में...

बहुत ज़हर उगल लिया लेकिन क्या अब कानूनी कार्रवाई के लिए तैयार हैं? पता नहीं कितनों को यह मालूम होगा कि पिछले दिनों एक युवक ने गुस्से के मारे, बदला लेने के इरादे से* मुफ़्त के मंच पर ऑनलाईन ज़हर उगला* था। उस पर ढ़ेरों लोग उमड़ पड़े और कईयों ने तो अपने कथित अनुभव भी लिख डाल...ब्लाग जगत के लिए भी हो सैंसर बोर्ड का गठन गलती से कल देर रात राजकुमार सोनी जी का ब्लाग ‘बिगुल’ खोला और उत्सुकतावश और थोड़ा सा डरते-सहमते उनकी पोस्ट-*’ खूनी महल के दरवाजे में प्यासा हैवान और चीखती लाश’* पढने लगा अचानक लाईट चली गई..फिर क्या था ..लग...

जिकर करण के लायक नहीं और चुप रहया ना जावै, {हरयाणवी रागणी},ये मन भी...बस कुछ भी कहीं भी महसूस करने लग जाता है,* *नहीं सोचता चलो घर की ही तो बात है,पर नहीं...* *इन शब्दों के आगे भला हमारी क्या बिसात है...?* *घर की हो या बहार वालो की अब घात तो घात है....* *आज कुछ आप...आँगन के कोने मे गुपचुप तुलसी सी उग जाती अम्मा....  - आज फिर माँ को समर्पित एक रचना लिख रहा हूँ...सूर्यकांत जी इस बार ये कहने का प्रयास किया है कि माँ अगर साथ न भी हो फिर भी कहाँ कहाँ है माँ...अपनी माँ, आपको और अर्चना जी को समर्पित है ये रचना.... चला जो मुश...

बसन्ती, मेरी जानेमन.. पापी पेट का सवाल है अब से कुछ अरसा पहले जब धर्मयुग और साप्ताहिक हिन्दुस्तान जैसी पत्रिकाएं प्रकाशित हुआ करती थी तब ट्रकों के पीछे लिखे जाने वाले वाक्यों और शायरी को लेकर लिखे गए एक लेख से मैं बहुत प्रभावित हुआ था। यह लेख किस...ग़ज़ल/ सच कहना दुश्वार हुआ है... सच कहना दुश्वार हुआ है* *खुलकर अत्याचार हुआ है* *बड़े-बड़े भी मात खा गए * *छिपकर जब भी वार हुआ है* *झूठ बिका है सबसे ज्यादा * *अच्छा कारोबार हुआ है * *टूट गया हर सुन्दर सपना * *ऐसा बारम्बार हुआ है* *...

कामरेड! अब तो कर ही लो यक़ीन, कि तुम हार गए हो कामरेड! अब तो कर ही लो यक़ीन कि तुम हार गए हो अनेक बार चेताया था मैं ने तुम्हें तब भी, जब मैं तुम्हारे साथ था कदम से कदम मिला कर चलते हुए और तब भी जब साथ छूट गया था तुम्हारा और हमारा याद करो! क्या तय ...इसी को एक शब्द में प्रारब्ध कहते है मै इन लोगों की तुलना में कई गुना जायदा मन्त्र जाप कर चूका हूँ " हम लोगों की तरफ इशारा करके हेमंत ने कहा "मुझको तो कोई लाभ आज तक नजर नहीं आया .मेरा तो किसी भी मन्त्र ,पूजा पर से विश्वास ही उठ गया है .और तो...

धडाधड महराज चिट्ठा जगत  अभी कुछ सूझ नहीं रहा है, सोचा एक बार फिर ब्लॉग में प्रयुक्त होने वाले शब्दों की ओर चलूँ. ध्यान गया ब्लॉगवाणी के नीचे लिख़ा *"धडाधड महराज चिट्ठा जगत" चलिए देखते हैं इस पर क्या लिखते बनता है;* *धडाधड महराज ...हमारी सांसों में आज तक वो हिना की खुशबू महक रही है.. आज अपने ब्लॉग पर पहला ऑडियो दे रही हूँ. इस सुरीले आगाज़ के लिए नूरजहाँ की आवाज से बेहतर भला क्या होगा... हमारी सांसों में आज तक वो हिना की खुशबू महक रही है.. लबों पे नगमे मचल रहे हैं... नज़र से मस्ती छलक...

ताऊ रामपुरिया ताऊजी डॉट कॉम पर--प्रिय ब्लागर मित्रगणों, आज वैशाखनंदन सम्मान प्रतियोगिता में श्री जी. के. अवधिया की रचना पढिये. लेखक परिचय :- नाम : जी.के. अवधिया उम्र : 59 वर्ष, सेवानिवृत शहर : रायपुर (छ्ग) मैं एक संवेदनशील, सादे विचार वा...दीनदयाल शर्मा की शिशु कविताएं - 1 मुर्गा* कुकडू कूँ मुर्गे की बांग आलस को खूँटी पर टांग। * * *तोता* टिऊ-टिऊ जब तोता बोला पिंकी ने पिंजरे को खोला। * * *मोर* पिकोक-पिकोक बोला मोर नहीं करेंगे कभी भी शोर। * * *कबूतर* गुटर ग...
 
ब्लागिंग अपने अंतिम पडाव पर है ??? ब्लागजगत में घमासान मच रहा है ... क्यों, किसलिये ... ब्लागर बे-वजह तो घमासान नहीं कर रहे होंगे ... कुछ-न-कुछ तो अवश्य ही लाभ छिपा होगा ... हो सकता है, पर क्या लाभ होगा ? .... इस विषय पर चर्चा-परिचर्चा की आ...ऐसा तेरा आना ............. ख़्वाबों में तेरा आना और बिना दस्तक दिए चले जाना सालता है मुझे जागी आँखों से गुमसुम सी कदमों के निशाँ गिना करती हूँ .हिन्दी ब्लाग जगत के महारथियों पर बुरी गृह दशा पहले ज्ञान दत्त जी अस्पताल के हवाले हुए और अब समीर लाल जी घायल, मेरी भी गरदन में कुछ दिनो से दर्�¤..
 
ललित शर्मा ललितडॉटकॉम - पर--जब पवन चंदन जी से अविनाश जी ने बात करवाई थी तब मुझे अंदाजा नहीं था कि वे इतनी जल्दी पहुंच जाएगें हमारे से मिलने। जबकि उनका निवास निजामुद्दीन से आधे घंटे की दूरी पर है। पवन चंदन जी ने पूछा कि आप लोगों ने उ...दिल्ली की गर्मी और बब्बे का चमत्कार ---गर्मियों के दिन । दिल्ली की भीषण गर्मी । ऐसे में यदि बिजली भी गुल हो जाये तो फिर सब भगवान भरोसे । बचपन में जब गाँव में रहते थे तो उन दिनों बिजली भी नहीं होती थी । जेठ की तपती रातों में गरमागर्म लू के थपेड... 
 
जूते ही जूते, हर नाप के हर साईज के, हर डिजाईन के ... आईए तो एक बार ... देख तो लें ---"कुत्ता भूके हज़ार हांथी चले बाज़ार"-दीदी ने यह साबित कर दिखाया की "कुत्ता भूके हज़ार हांथी चले बाज़ार "। बंगाल की जनता ने दीदी को भाड़ी मतों से जीत दिलाकर यह साबित कर दिया की मीडिया सिर्फ भुकता है, तमाम तरह के हथकंडो को उपयोग कर दीदी के तेवर को कम करना चाहा पर दीदी के तेवर ने बंगाल में एक नई--चेरी पीकिंग – cherry picking अमेरिका में चेरियों के खेत में चेरियां तोड़ों और जी भरकर खाओ -- चेरियां आप सभी ने खायी होगी। लेकिन लाल सुर्ख दिल के आकार की बड़ी-बड़ी चेरी, भारत में हम जैसे राजस्थाभनियों को बहुत कम देखने को मिलती हैं। भारत में या तो शादी के शाही भोज के पुलाव में दिखायी दे जाती है या फिर कभी-कभार दिल्लीो जैसे शहर में। वो भी इतनी छोटी
 
कोई बचा लो मुझको मर रहा हूँ मैं दीपक 'मशाल' जी के सुझाव पर अपनी इस रचना में कुछ पंक्तियाँ और जोड़ कर प्रस्तुत कर रहा हूँ..... कोई बचा लो मुझकोमर रहा हूँ मैंएक बार में मरता तो अलग बात थी किस्तों में मर रहा हूँ मैं, पहले ज़मीर मराफिर इंसानियतअब तिल तिल कर मर रही है मेरी --- राजनीतिज्ञों की बनिस्बत वह देश की ज़्यादा सेवा करता है - जो कोईअनाज की एक बाली की जगह दो या घास की एक पत्ती की जगह दो उगाता है, ज़्यादा ख़ुशहाली का मुस्तहक हैऔर तमाम राजनीतिज्ञों की समूची जाति की बनिस्बतवह देश की ज़्यादा सेवा करता है ।
 
अब वार्ता को देते हैं विराम---सभी को ललित शर्मा का राम-राम

बुधवार, 2 जून 2010

नव तपा का अंतिम दिन-प्यासा हैवान और चीखती लाश--ब्लाग4वार्ता----ललित शर्मा

मौसम की गर्मी चरम सीमा पर है, लू झुलसा रही हैं तन को, आज नव तपा का अंतिम दिन है,  बस मानसून की फ़ुहारें आने ही वाली हैं,ब्लाग पर भी गर्मी है जो झुलसा रही है मन को, पता नहीं दो चार दिनों में ब्लाग जगत का तापमान क्यों बढ जाता है और कौन सी ताकत इस तापमान को बढाने में लग जाती है। शायद किसी की नजर लग गयी है। नजर बहुत बूरी चीज होती है अगर लग जाए तो खड़े हुए हरे दरख्त को सूखा देती है, ब्लाग जगत को इस बूरी नजरों से बचाना चाहिए, ट्रकों के पीछे लिखा रहता है कि "बूरी नजर वाले तेरा मुंह काला" शायद यहां भी कुछ ऐसा ही टोटका करना पड़ेगा जिससे ब्लाग जगत में अमन चैन और शांति रहे। अब ललित शर्मा ले चलता है आपको आज की ब्लाग वार्ता पर......................

आज मैने पलक का एक कमेंट देखा, कोई नया ब्लाग आया है ब्लाग जगत में कविताएं भी कुछ बोल्ड किस्म की है, सीधी-सीधी कुडि़यों से चिकने आपके गाल लाल हैं सर और भोली आपकी मूरत है

जब से जाना मैंने
कि कैसे जाना जाता है
बेकपड़ों के हर कोई
किसी को क्‍यों भाता है।

आप तो कमाल हो सर
आपके बाल लाल हैं
कुडि़यों से अधिक
चिकने आपके गाल हैं ।

भोली आपकी सूरत है
पहले मिल जाते तो
दिल में बसा लिया होता।
 
यार,तुम लोग तो बहुत भाग्यशाली हो--डॉ.सत्यजीत साहू -पर"मै भींगता रहा, एक नशा मुझमे छाता रहा.,मलंग तू कौन है,,तुने बिना देखे मेरी ओर मेरे दिल को कैसे छु लिया . मै चल रहा था जिस रास्ते उसमें कितना सुंदर मोड़ आ गया .मै मुड़ता चला गया और इस नए रस्ते मे इतनी जा...टूट कर भी मेरा वजूद, बिखर नहीं पायेगा जिस पर टिका है , अस्तित्व मेरा , वो बुनियाद , तुम्हारा कांधा है, जानती हूँ , टूट कर भी मेरा वजूद, बिखर नहीं पायेगा , क्योंकि , इसे , तुम्हारे संबल ने, मजबूती से बांधा है . 
 
खूनी महल के दरवाजे में प्यासा हैवान और चीखती लाश शीर्षक देखकर आप चौक सकते हैं लेकिन जो लोग कथित किस्म के डर में जीवन का आनन्द लेना जानते हैं वे एक न एक बार रामसे बद्रर्स की फिल्मों को जरूर देखते हैं। जो डर में भी हास्य तलाशने के शौकीन है वे रामसे की आड़े...निहारना चाहता है ये दिल अब संभलता नहीं रह रह कसमसाता है देह से बाहिर निकल आकाश हो धरती को निहारना चाहता है बिखर कर हवा में शरीर मेरा अपनी प्रेयसी को ढूंढ़ता है नदी में मिल कर बूँद जैसे ढूंढती अपना वजूद और पानी पानी ... 
 
है ये पल भर की चाँदनी, कल फिर रात है... सेठ जी चादर ताने सोए पड़े थे... लक्ष्मी जी के स्वप्न मे खोए पड़े थे... तभी उनका बेटा झूमते हुए आया... और सेठ जी को हिला हिला के जगाया... फिर बोला उठो मुझे कुछ बताना है... कल मुझे भी अपना जन्मदिन मनान...  नवभारत में, भिलाई सहित SAIL कार्मिकों को मिली ब्लॉग लिखने की अनुमति व सुविधा का समाचार. 1 जून 2010 को नवभारत, रायपुर संस्करण में *भिलाई इस्पात संयंत्र सहित, *भारतीय इस्पात प्राधिकरण (Steel Authority of India Limited) के कार्मिकों को विविध विषयों पर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता हेतु ब्लॉग लिखे जान..उफ़!…ये फोटो खींचना भी कितना मुश्किल काम है ना?
 
चूहा - बिल्ली चूहा - बिल्ली बिल्ली - चूहा आगे - पीछे पीछे - आगे भागम - भाग उछल - कूद दौडा - दौडी जीना - मरना आंख - मिचौली लपका - झपकी झपटा - झपटी पटका - पटकी हाय - तौबा तौबा - तौबी मौका - मौकी लुक्का - छिप्पी चूहा - ... त्रासदियों के बीच सुलगते सवाल ....... पिछली बार की कुछ टिप्पणियों ने सोचने पर मजबूर किया ....क्या औरत को भूख के लिए सिर्फ एक निवाला रोटी भर चाहिए .....? या जीने के लिए एक चारदीवारी ....? जहाँ त्रासदियों का आँगन अपनी दास्ताँ लिखता रहे और चुप्प...
 
'गुलाम तब जागे' -यादवचंद्र के प्रबंध काव्य "परंपरा और विद्रोह" का सप्तम सर्ग *अनवरत के पिछले अंकों में आप यादवचंद्र जी के प्रबंध काव्य "परंपरा और विद्रोह" के छह सर्ग पढ़ चुके हैं। अब तक प्रकाशित सब कड़ियों को यहाँ क्लिक कर के पढ़ा जा सकता है। इस काव्य का प्रत्येक सर्ग एक पृथक युग क... मूर्ति ध्वंस.....(लघु कविता...क्षणिका...) शब्द.. भाव..... मात्रा...... छंद.......... कविता......... जहां से नहीं थी आशा वहीं से देखो फूट रहे हैं क्रोध... शोभ... द्रोह...... विद्रोह.... ध्वंस हुई हैं सदियों से पूजित मूर्तियां देखो युग के प्रतिमान टूट...
 
एंग्री यंग ब्लॉगर्स, इसे पढ़ो प्लीज़...खुशदीप क्रोध वो अवस्था होती है जिसमें जीभ दिमाग़ से तेज़ काम करती है...आप अतीत तो नहीं बदल सकते लेकिन आने वाले कल की चिंता में घुलकर आप अपने आज के साथ अन्याय करते हैं... ऊपर वाला अपना सर्वश्रेष्ठ उसी को देता... वैशाखनंदन सम्मान प्रतियोगिता मे : सुश्री निर्मला कपिलाप्रिय ब्लागर मित्रगणों, आज वैशाखनंदन सम्मान प्रतियोगिता में सुश्री निर्मला कपिला की रचना पढिये. लेखिका परिचय : निर्मला कपिला पंजाब सरकार के सेहत कल्यान विभाग मे नौकरी करने के बाद चीफ फार्मासिस्ट के पद से स...
 
दिल्ली यात्रा-5...कारवां चल पड़ा है मंजिल की ओर...........!बस बिस्तर पर लेटते ही निद्रादेवी ने कब आगोश में लिया पता ही नहीं चला, कब बिजली आई और गई इसका भी भान नहीं था, बकौल राजीव खर्राटे सुनाई देने लगे। सुबह लगभग 7 बजे नींद खुलने के साथ चाय आ गयी, दैनिक कार्यों स...राज' फिल्म से ये गीत है.....आवाज़ 'अदा' की.... 'राज' फिल्म से ये गीत है... आपके प्यार में हम सँवरने लगे.... आवाज़ 'अदा' की.... मम्मी!!…… आप रो क्यों रहीं हैं?!…… 20-21 साल बाद, गाँव से आई कुछ औरतों से विदाई के समय, मम्मी की आखों से बह रही अश्रु धारा को देख कर मेरी सबसे छोटी बहन नें मम्मी से यह प्रश्न पूछा। मम्मी ने इस प्रश्न को अनसुना कर दिया…… शायद वे अभी तक उन ...
 
माइक्रो पोस्ट ... समाज और मनोरंजक सामग्री और सपनों की उड़ान * जो समाज मात्र रोटी और मनोरंजक सामग्री पर संतोष कर लेता है वह एक निकृष्ट कोटि का समाज बन जाता है . * ऊँची उड़ाने उड़ने की अपेक्षा यह अच्छा है की आज की स्थिति का सही मूल्यांकन करें और उतनी योजनायें जिसे आज के साधनों से से पूरा का सकना संभव है .बेनी मा फूल गूंथे के दिन-बेनी मा फूल गूंथे के दिनफूल वाले घाटी फेर होगेसुहागिनकली मन के मुस्काए के दिन,धूप छांह के छेड़ छाड़ के दिनभंउरा मन के टोली उतरगेबाग बगीचा माकोनो मुस्काए मंद-मंदगुल मोहर के तरि मा,कोइली कुहके अमरइयापपीहा वन उपवनलाल दहकत टेसू वाला दिन,अमलताश डाली-डाली माआ गे
 
टुकड़ा टुकड़ा दुपहर दुपहर फैल गई है - शुभ्र चादर। मौन। दुपहर लोगों और जीवन धारण किए सब की गतिविधियों के होते हुए भी कितनी शांत लगती है! क्रियाकलाप की शांति, एक निश्चित कार्यक्रम में सब डूबते जाते हैं। ध्यान सी अवस्था कि सम्मोहन सी? - बन्दरों की चिक चिक, दूर कहीं से आती गीत ----फेंको अपनी झोला-झंडी,हो जाओ बिंदास रे जोगी-----(विनोद कुमार पांडेय)-अभी कुछ दिन पहले आज की ग़ज़ल पर एक संपन्न तरही मुशायरा में प्रस्तुत मेरी एक ग़ज़ल जिसमें मैं कुछ लाइन और जोड़ कर आपके समक्ष प्रस्तुत कर रहा हूँ..बैठ मेरे तू पास रे जोगी,बात कहूँ कुछ खास रे जोगीगेरुआ कपड़ा,चंदन,टीका,सब कुछ है,बकवास रे जोगीतुझे पता--

अब वार्ता  को देते हैं विराम - सभी को ललित शर्मा का राम राम
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मंगलवार, 1 जून 2010

वो कौन थी?.दिल्‍ली-यात्रा दिल खुश करनेवाली--ब्लाग4वार्ता ----ललित शर्मा

हमारे डॉक्टर भैया की सलाह पर हमने वार्ता लिखना कम कर दिया था। इधर दिल्ली यात्रा के दौरान राजकुमार जी ने मो्र्चा संभाला। बहुत ही अच्छे से लिंक लगा कर वार्ता को जीवित रखा। वार्ता टीम उन्हे धन्यवाद देती है। दिल्ली से आने के बाद मेरा भी स्वास्थ्य मौसम को देखते हुए कुछ नासाज ही है। अभी आराम ही कर रहे हैं क्योंकि जीवन की यात्रा के लिए यह भी आवश्यक है। अब मै ललित शर्मा आपको ले चलता हुँ आज की वार्ता पर.............

पहला चिट्ठा लेते हैं डॉक्टर चंद्रकांत वाघ का, इनका ब्लागिंग में आज ही पदार्पण हुआ है, पढने से लगता है कि लेखनी मंजी हुयी है।मानवाधिकारवादियों कसाब की इच्छा पूरी करो..........!डॉ.चंद्रकांत वाघ डॉ.चंद्रकांत कहिन पर--मुंबई का तत्कालीन नाबालिक आतंकवादी (जैसे उसने कोर्ट में कहा) अकमल कसाब ने यहाँ की मेहमान नवाजी से खुश होकर एक इच्छा और जाहिर की है. चार मामलों में आजन्म कारावास और ५ मामलों में सजाये मौत वाले कसाब की फांस...शेक्सपियर ग़लत था…. नाम में बहुत कुछ रखा है…. : महफूज़
दुनिया में इन्सान जब जन्म लेता है, तब वह अपने साथ कोई नाम नहीं लाता. हाँ! फ़ौरी तौर पर उसका नामकर�¤...

राष्ट्रवादी घोर निराशा।। नारा देकर गाँधीवाद का, सत्य-अहिंसा क झुठलाना। एक है ईश्वर ऐसा कहकर, यथासाध्य दंगा करवाना। जाति प्रांत भाषा की खातिर, ...मनुष्य के श्रम से विलगाव के जैविक और सामाजिक परिणामआज सुबह अदालत में जब हम चाय के लिए जा रहे थे तो वरिष्ट वकील महेश गुप्ता जी ने पीछे से आवाज लगाई। मैं मुड़ा तो देखता हूँ कि पंचानन गुरू मौजूद हैं। वे मुझे याद कर रहे थे। वे कोटा की पहली पीढ़ी के वामपंथियो... हमें क्या करना इस हिन्दुस्तान से , उजड़ने दो, अगर उजड़ रहा है... जब भी कहीं गोली चलती है, जिन पे गोली चलती है , उनके लिए तड़पते तड़पते उनका हिन्दुस्तान मरता है, जिनके अपनों पर गोली चलती है, उनके लिए डरा सहमा नया हिन्दुस्तान बनता है, बाकी के लिए क्या ग़ज़ब हो गया, ऐसे ह...

झींगालाला ने बांचा ब्लागरों का भविष्यअरसा पहले जब कृष्णा शाह की फ्लाप फिल्म शालीमार आई थी तब ही शायद लोगों ने पहली बार झींगालाला शब्द को सुना था। याद करिए- हम बेवफा हरगिज न थे गाने में झींगालाला ... हुर्र.. हुर्र को। हाल के दिनों में बदल डाला...क्योंकि यहाँ तो सब अपना हाथ है , जगन्नाथ पहले हम विचलित हुए, निकाले अपने मन के गुबार, मित्रों ने भी दिया साथ पर अब धीरे धीरे समझ रहे हैं, माया नगरी की माया को रक्त बीज सब बन रहे यहाँ (बेनामी छ्द्म्नामी ब्लोगरों की उत्पत्ति) *क्योंकि यहाँ तो सब ...आओ, आपको जंगलमहल ले चलूं...खुशदीप  कल आप से वादा किया था आज आपको *जंगलमहल* का सच बताऊंगा...जंगलमहल नाम सुनकर ऐसी कोई तस्वीर ज़ेहन में मत बनाइए कि मैं आपको जंगल में स्थित किसी महल की सैर कराने ले जा रहा हूं...जंगलमहल का मतलब है पश्चिम बंगाल ...

दिल्ली यात्रा-4...एक पारिवारिक भेंट जो दिल को छु गयी........!ललित शर्मा ललितडॉटकॉम पर --जैसे ही हमारी गाड़ी क्लब के गेट पर पहुंच डॉ दराल एवं भाभी जी(डॉ.रेखा दराल) बेसब्री से इंतजार करते मिले। अभिवादन के पश्चात हम क्लब के हॉल में पहुंचे, वहां टेबलें सेट करवा कर बैठे, समय कम था, क्लब 11बजे तक ह...वैशाखनंदन सम्मान प्रतियोगिता मे : श्री दीपक 'मशाल' प्रिय ब्लागर मित्रगणों, आज वैशाखनंदन सम्मान प्रतियोगिता में श्री दीपक मशाल की रचना पढिये. लेखक परिचय नाम : दीपक चौरसिया 'मशाल' माता- श्रीमति विजयलक्ष्मी पिता- श्री लोकेश कुमार चौरसिया जन्म- २४ सितम्बर १९८०,...

दिल को खुश करनेवाली रही यह दिल्‍ली-यात्रा संगीता पुरी  गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष -पर-यूं तो पिछले तीन वर्षों से मई या जून महीने में मुझे दिल्‍ली में ही रहने की जरूरत पडती रही है , पर इस वर्ष की दिल्‍ली यात्रा बहुत खास रही । पूरे मई महीने दिल्‍ली में व्‍यतीत करने के बाद कल ही बोकारो लौटना ह...पर्यटन के नाम पर डकैती मंत्री मेहरबान,अजय पहलवान जिस व्यक्ति पर अपनी हवस के लिए कालगर्ल को कार से कुचलकर मार डालने का आरोप हो और जिसके दुग्ध संघ से पर्यटन मंडल में संविलियन को ही गलत माना जा रहा हो ऐसे अजय श्रीवास्तव का पर्यटन मंड...
 
मीठा है खाना, आज पहली तारीख है......उपदेश सक्सेना  नुक्कड़ समय देने से मिलेगी सफलताराजकुमार ग्वालानी  राजतन्त्र  पर--छत्तीसगढ़ के टेबल टेनिस खिलाडिय़ों को प्रशिक्षण देने आए बंगाल के कोच तन्मय डे का मानना है कि छत्तीसगढ़ के खिलाडि़य़ों में दम-खम की कमी है। राष्ट्रीय स्तर पर सफलता पाने के लिए मैदान में ज्यादा से ज्यादा समय द...-पर*(उपदेश सक्सेना)* टीवी चैनलों पर हर महीने की आखिर में एक विज्ञापन बड़ी धूम मचाता है, *दिन है सुहाना, आज पहली तारीख है,* *खुश है ज़माना, आज पहली तारीख है,* *करो न बहाना, आज पहली तारीख है,* *मीठा है खाना, आज पहल...
 
गुङ और चींटी  क्रांतिदूत पर -मैं अपने घर में चींटियों से परेशान था.खाने पीने का सामान तो दूर मेरे कपङे,बिस्तरे और सोफ़ा सेट भी उससे अछुता नहीं था.वैसे चींटियां भी मुझसे परेशान हो चुकी थी. एक दिन मुझसे उनकी हालत देखी नही गयी और मुझे उनप..आज तुम लटके मिले हो फाँसी पर----------------->>>दीपक 'मशाल'.*आज मई माह में हिन्दयुग्म यूनिकवि प्रतियोगिता में चौथा स्थान प्राप्त एक रचना जो कि किसान आत्महत्या पर केन्द्रित है देखिएगा.* * * *बीज* और आज तुम लटके मिले हो फाँसी पर मगर फिर भी शहीद ना बन पाए अनगिन ख्वाबो...
 
वो कौन थी?. Voronezh Railway Station. वो कौन थी?..जी ये मनोज कुमार की एक फिल्म का नाम ही नहीं बल्कि मेरे जीवन से भी जुडी एक घटना है. बात उन दिनों की है जब मैं १२ वीं के बाद उच्च शिक्षा के लिए रशिया रवाना हुई थी...जो बिना खर्चा बिना असलहे के जीत की गारंटी दिलाती है ......कहीं मंदिर में घंटी बाजे कहीं अजान सुनाती है पाँच बजे पौ फटते ही वो पाने भरने जाती हैचारों चौहद्दी नलका के मजमा बड़ा लगाती है बाल्टी और देगची की कतार बढ़ती ही जाती है मेरी बारी पहले आये हर रण-नीति अपनाती .. तंग आ कर नूरे ने लड़का किडनैप किया, पर :-)हमारा नूरा जब से दिल्ली घूम कर अपने पिंड़ लौटा है तब से उसे शहर में कुछ करने का कीड़ा काट गया है। गांव के अपने तीनों लंगोटियों के साथ माथा पच्ची करने के बाद वे चारों इस नतीजे पर पहुंचे कि मां-बाप पर बोझ बनने...

अब देते हैं वार्ता को विराम-सभी को ललित शर्मा का राम राम

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