शनिवार, 24 दिसंबर 2011

कुछ मुस्काने की बात करो आहिस्ता आहिस्ता -- ब्लॉग4वार्ता -- ललित शर्मा

ललित शर्मा का नमस्कार,  मित्रों एक सप्ताह की गैर हाजरी के पश्चात आज वार्ता पर पुन: उपस्थित हुआ हूँ, इस दौरान संध्या जी ने मोर्चा संभाल रखा था। इस अवधि में कई अच्छी पोस्टें आई, अब समय निकाल कर सिलसिले वार पढा जाएगा। स्वराज्य करुण जी ने एक गंभीर विषय को लेकर आलेख लिखा है। हिन्दी के सरलीकरण के नाम पर भाषा को बिगाड़ने का षड़यंत्र हो रहा है। हिन्दी वाक्य में अंग्रेजी के शब्द भी घुसेड़े जाएगें, जिन्हे अनचाहे ही लोगों को झेलना पड़ेगा। हिन्दी के सरलीकरण के नाम पर यह सही नहीं  है। इसका पुरजोर विरोध होना चाहिए। हिन्गलिश के पक्षधरों ने लार्ड मैकाले को भी पीछे छोड़ दिया। मैकाले ने हमारी शिक्षा पद्धति को बदल डाला तो उसके मानस पुत्र हमारी भाषा को ही बदल डालने के फ़ेर में हैं। अब चलते हैं आज की ब्लॉग4वार्ता पर..........।

सत्ता की सांप-सीढ़ी का खेल सीबीआई जारी है, पर सुकून गायब है, क्यों कि अन्ना भाई ने एलान कर दिया है कि अब कम ही सक्रिय रहूंगा मैं इंटरनेट पर , भैया हमारे कहने से तो माने नहीं, अच्छा हुआ हकीम के कहने से मान गए। क्योंकि एक होता है बाघ और एक होता है बघेरा, जब दिन निकले तब समझो सबेरा।बाली जात्रा महोत्सव हो रहा है, रात की गीली हथेली पर सरसों जमाई जा सकती  है, है ना कमाल का करिश्मा।हिंदी उर्दू के पंख उग आए हैं, परवाज सात समंदर पार है, यात्रा जारी है,  हरकीरत हीर जी ने अभूतपूर्व साहित्यिक दस्तावेज’ सौंपा है, अब जाकर ही देख आईए, किसे और क्यों सौंपा है। हम तो देख आए, पर टिपियाएगें बाद में, अभी चौखट पर खड़े पवन चन्दन और वार्ता का सफ़र जारी है।

उद्घोष हो रहा है एक नई इंकलाबी चाहिए, ले आईए भाई हमे कौनो इतराज नहीं है, हमें भी एक नयी रकाबी चाहिए, टूट गयी हो हल्ले में, गदर मचा है मुहल्ले में। अब कुछ कुछ मुस्काने की बात करो तो बात बने।आहिस्ता आहिस्ता बढते हैं, एक सवाल है देश की असली संसद कौन सी? अब जवाब आप दीजिए या अन्ना भाई से लीजिए। ठंड बढ रही है सर्द रात ख्वाबों में बड़ा कहर व्यापा है, सपने बहुत डराते है, नहीं डरना चाहिए डरावने सपनों से क्योंकि ज़माना बदल गया है  अब हमें भी बदलना चाहिए। संसार के खत्म होने से पहले माया पुजारियों ने विशेष धार्मिक कर्मकांड शुरू किए। अब देखते हैं संसार बचता है कि प्रलय आता है।

ब्लॉगोत्सव में टोपी, मफलर साथ लायें जी नहीं सांपला कोई हिल स्टेशन नही है, लेकिन पिछले ३-४ दिनों से बढती ठंड ने टोपी, मफलर को अनिवार्य कर दिया है। और रात के समय ७:०० बजे से १२:३० बजे तक कवि सम्मेलन में बैठना है तो जितनी एहतियात बरती जाये, मातृत्वब्लॉग जगत में आये मुझे लगभग ढाई साल हो गए है.इस समय में जो भी लिखा वो आप सभी लोगो ने सराहा.जिससे मुझे ओर लिखने की हिम्मत मिली .बीच बीच में कुछ रुकावटें भी आयी जिससे लिखना कम हुआ लेकिन लिखने का शौक ओर आपका...

इतना सा फसानाक्रिसमस का समय है. बाजारों में ओवर टाइम हो रहा है और स्कूलों में छुट्टी है .तो जाहिर है की घर में भी हमारा ओवर टाइम होने लगा है.ऐसे में कुछ लिखने का मूड बने भी तो अचानक " भूख लगी है ........या .."तू स्टुपि...हद-ए-वफ़ा क्या है आख़िर?नैना को पहली बार देखा था तो हैरान रह गई थी। कोई इतना भी ख़ूबसूरत हो सकता है? रौशन चेहरा, गोरा रंग, तीखे नक्श और चेहरे पर चमकती मुस्कान। हम पड़ोसी थे लेकिन सीढ़ियों पर आते-जाते एक-दूसरे का हाल पूछने के अलाव...घर का शौहर ! 

रेत के शिल्प में घरइधर हाल में गौतम चटर्जी को पढ़ने का अवसर मिला. उनकी कविताओं में जीवन के प्रति जिजीविषा, मृत्यु बोध और दर्शन की छाप जितनी गहन है, उतनी ही सरल उनकी भाषा भी है. फिलहाल एक प्रिय कविता और साथ में साल्वाडोर डा...कैसे बिछी लोकपाल पर मठ्ठा डालने की सियासी बिसातयह पहला मौका है जब सरकार ने किसी बिल को पेश करने से ज्यादा मशक्कत बिल पास न हो इस पर की। और अन्ना टीम को बात बात में पहले ही यह संकेत दे दिया गया कि अगर वाकई लोकपाल के मुद्दे में दम होगा तो आने वाले वक्त म...मेहरबानों के घर के बाहर 

चलते चलते व्यंग्य चित्र

मिलते हैं ब्रेक के बाद, राम राम

शुक्रवार, 23 दिसंबर 2011

पहचान तो खुद बोलती है... ब्लाग4वार्ता...संध्या शर्मा

संध्या शर्मा का नमस्कार, वार्ता पर आप सभी का स्वागत है. प्रस्तुत है, आज कुछ निराले और ख़ूबसूरत लिंक्स... 

गीत तुमको ढ़ूँढ़ता है
आखिरी पल का अकेला, गीत तुमको ढ़ूँढ़ता है। रुक न जाये श्वास वेला, मीत तुमको ढ़ूँढ़ता है। स्नेह का आकाश अब भी, नेह का दो बूँद माँगे, अश्रु का प्रवाह बह-बह, नैनों का फिर बाँध लाँघे। सिसकियाँ देती है मेरे, सर्...

काश !
चौराहे पर खड़ा एक मोटर साईकिल सवार| कर रहा था हरी बत्ती का इंतज़ार| पड़ोस में खड़ी थी एक कीमती कार, आधी खुली खिड़की से कुत्ते का बच्चा झाँक रहा था बाहर| वह सवार, उस कुत्ते के बच्चे को , निहार रहा था बार ...

अलविदा ए वर्ष.....
अलविदा ए वर्ष तुम्हारा अभिनन्दन, सीने पर ले चले भ्रष्टता का क्रंदन, कभी नहीं सोचा था तुम ऐसे जाओगे, कुछ खुशियाँ कुछ जीवन को रंगबिरंगा कर जाओगे , उथल पुथल से भरा रहा ये सारा वर्ष, जीवन मुझ...

भारत पाक युद्ध के चालीस साल
भारत-पाक युद्ध की तस्वीर ( गूगल से साभार ) भारत-पाक के बीच हुआ 1971 का युद्ध स्वतंत्र भारत के इतिहास में हमेशा अविस्मरनीय रहेगा . तब हम मात्र 14-15 साल के थे तथा हायर सेकेंडरी के छात्र थे . एक दिन स्कूल...

"सूखे दरख़्त "
सूख चुके रिश्तों में, शायद, आँखों की नमी भी ना रही | फासले दरमियां, कुछ यूँ हुए, कि संग रह के भी संगदिल हुए | दूरियां क्या इतनी, कि तय हो ना सके | *अरे !* *सूखे दरख़्त हो,* *या हो रिश्ते* *शादाब हो भी सकते ...

पहचान प्रश्नचिन्ह तो नहीं  
पहचान प्रश्नचिन्ह तो नहीं पहचान तो खुद बोलती है बिना किसी शब्द के बिना किसी मोल भाव के पहचान तो बनती ही है फिर चाहे जड़ हो या चेतन चाहे कोई भी रूप हो रंग ह... 

साहिर लुधियानवी की नजरों में ताजमहल
ताज़ तेरे लिये इक मज़हर-ए-उल्फ़त ही सही तुम को इस वादी-ए-रंगीं से अक़ीदत ही सही मेरे महबूब कहीं और मिला कर मुझ सेताज तुम्हारे लिए प्यार का एक प्रतीक सही और तु... 
 
आह ! वो बचपन
वो गालों पे उँगलियों के निशान.. वो मार खा कर सूजे-सूजे होंठ, कंप-कपाता मन, डर के मारे... अश्रुओं से भीगा वो चेहरा मुझे भूलता ही नहीं है. ... 

'फहमियां' !
*जब ठिठुरती ठण्ड में,* * * *मेरी कक्षावधि शुरू होती थी * * * *और तुम्हारी ख़त्म,* * * *अक्सर ही * * * *महाविद्यालय के मुख्यद्वा... 

छिटकी धुप
आसमाँ के पथ से चल के सितारों की छाँव में सतरंगी झूले में झूल के बादलों के रथ पे हो सवार उतर धरती पे एक नन्ही किरन आई छिटकी धुप अलसाई सी रात गई अंगड़ाई लेती भ... 

ज़माना बदल गया है --आँखों देखी ---
ऋषि कपूर और नीतू सिंह पर फिल्माया गया एक गाना था -- खुल्लम खुल्ला प्यार करेंगे हम दोनों , इस दुनिया से नहीं डरेंगे हम दोनों । लेकिन तब न तो हकीकत में , ... 

वही तो हमराज है
वही तो हमराज है राज करना इस जहाँ पर, कायरों का काम है दिल पे अपने राज कर ले, वह बना सरताज है सो रहे हम क्यों तिमिर में, जग गया वह सूर्य बन राह रोशन कर गया...   

मुनु बिलाई रे मुनु बिलाई (बाल-गीत)
मुनु बिलाई रे मुनु बिलाई तयँ बघुवा के मौसी दाई. कुकुर देख के थर थर काँपे ठउँका दउँड़त प्रान बचाई. मुनु बिलाई रे मुनु बिलाई………………. नान नान तोर पीला दू किंजर..

 मातृत्व 
 ब्लॉग जगत में आये मुझे लगभग ढाई साल हो गए है.इस समय में जो भी लिखा वो आप सभी लोगो ने सराहा.जिससे मुझे ओर लिखने की हिम्मत मिली .बीच बीच में कुछ रुकावटें भी... 

रिश्ते...और हम... 
*मेरी डायरी से* ... बरौनी रिफायनरी २३-९-२००६ हर रिश्ता ... बड़े प्यार से, बड़े लगन से काफी समय में बन पाता है और कभी कभी instant भी बन जाता ह..  

दिवा- स्वप्न 
दिवा--स्वप्न दिवा स्वप्न देख-देख अब बहुत खुश हो चुकी , चैन से रातो को  सोना भी अब तो मुहाल हो गया !आकाश की गहराइयो को लांधकर बहुत थक चुकी ,पैर जमीं पर र...

चलते-चलते देखिये मेरी पसंद का एक गीत

 


सादर-
संध्या शर्मा
मिलते हैं अगली वार्ता पर... 



गुरुवार, 22 दिसंबर 2011

आज जी जाने को जी चाहता है.... ब्लाग4वार्ता...संध्या शर्मा


संध्या शर्मा का नमस्कार, आप सभी का स्वागत है. लीजिये प्रस्तुत है, आज की वार्ता कुछ नए और बेहतरीन लिंक्स के साथ...
बस यूँ ही .... - देर रात तक तारों संग , खिलखिलाने को जी चाहता है. चांदनी के आँचल को खुद पर से, सरसराते गुजरते जाने को जी चाहता है. पीपल की मध्धिम परछाई से छुपते छुपाते , ...  

समंदर सा इमरोज़ , सीप सा इमरोज़ - अमृता को मोती बनना ही था !
अमृता - एक टीनएजर की आँखों में उतरी तो उतरती ही चली गई ... वक़्त की नाजुकता रक्त के उबाल को किशोर ने समय दिया फिर क्या था समय अमृता को ले आया .... अमृता के पास शब्द थे इमरोज़ के पास सुकून का जादू ज...

स्कूल की छुट्टी..क्रिसमस की बधाइयाँ !!
आज से मेरे स्कूल की छुट्टियाँ आरंभ हो गई हैं. अब मेरा स्कूल क्रिसमस और नए साल के बाद 2 जनवरी को खुलेगा. तब तक तो मुझे खूब मस्ती करनी है, घूमना है. स्कूल बंद होने से पहले हम सभी को क्रिसमस कार्ड बनाने का प...

मैं और मेरी तन्हाईयाँ -----!
* * * * मैं और मेरी तन्हाईयाँ * * *"अपने फ़साने को मेरी आँखों में बसने दो !* *न जाने किस पल ये शमा गुल हो जाए !" * बर्फ की मानिंद चुप -सी थी मैं ----क्या कहूँ ? कोई कोलाहल नहीं ? एक सर्द -सी सिहर...

भारत तो धरती को रब की सौगात है !
सिन्दूरी सुबह है ...उजली हर रात है अपने वतन की तो जुदा हर एक बात है जितने नज़ारे हैं जन्नत से प्यारे है भारत तो धरती को रब की सौगात है . बासन्ती मादकता मन को लुभाती है रंगीले फागुन में सृष्टि रंग जाती...

बेचारे मजबूर प्रधानमंत्री ...
*सेवा में* *प्रधानमंत्री जी* *भारत सरकार* प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह जी, मैं पिछले कई दिनों से नहीं बल्कि महीनों से देख रहा हूं कि गल्ती कोई और कर रहा है, लेकिन निशाने पर आप हैं। इसके कारणों पर नजर डालें...

"सिसकते लम्हे" 
न अब यहाँ रुकने का मन न किसी को रोकने का, न किसी के आने का सबब न अब किसी के जाने का, बस सारी रात, तन्हा, बरस जाने का मन घुप्प अंधेरो में, अपनी ही परछाई से, सिसकते हुए लिपट जाने का मन

मेरी राय तो यही है कि जितना नुकसान फेसबुक ने हिन्‍दी चिट्ठाकारी (ब्‍लॉगिंग) को पहुंचाया है, उतना तो नहीं परंतु कुछ नुकसान तो अविनाश वाचस्‍पति जी की बीमार... 
 कभी तो निकलें मनुष्यता के मोर्चे मोर्चे जिनमें केवल महिला-पुरुष की बात ना हो ना ही नारे लगें एक धर्म की जय और दूसरे की पराजय के समानता ,असमानता का ... 
एक कोशिश करता रहता हूँ मैं बस.. मैं.. नहीं कुछ और हो जाऊँ उलझन उलझन तैर रहा हूँ जाने क्या से क्या हो जाऊँ कभी सोचता धूप बनूँ... 
 यादें.....!!! "यू उठा तेरी यादो का धूआँ जैसे चिराग बुझा हो अभी अभी"॥ क्यों याद आता है ,वो गुज़रा ज़माना  जो नामुमकिन है,लौट के वापस आना |  वो ठंडी ... 
*नेताओं का काम रुलाना है * * अपना तो काम हँसाना है * * होगई दो दिन की आरामगी * * अब फिर सफ़र पर जाना है* * * ______________22 -23 अहमदाबाद _______...  
 
*सभी मित्रों को प्यारी जिद्द भरा नमस्कार !! जिद्द भी कई तरह की होती है !! बच्चे की जिद , जो अच्छी लगती है ?? पत्नी या प्रेमिका की जिद , जो प्यारी लगती है...
   
 "अपनी यादों से कहो थोड़ी जगह खाली कर दें,

तेरे सपनों को कुछ और जगह चाहिए..." 
 
 
सादर-
संध्या शर्मा
मिलते हैं अगली वार्ता पर... 

बुधवार, 21 दिसंबर 2011

एक मीठा सा अपना ख्याल.... ब्लाग4वार्ता...संध्या शर्मा

संध्या शर्मा का नमस्कार, आप सभी का स्वागत है आज की वार्ता मे प्रस्तुत है मेरी पसंद के कुछ खास लिंक्स

अपने अन्दर का ही ख्याल  एक मीठा सा अपना ख्याल

जनकवि नहीं रहे ....  जिनको सुनना था  उन्होंने न तब सुना ना आज 

खुद से मुलाकात.. कितनी मुश्किल है खुद से मुलाकात 

ये दिल्ली है........यहाँ  जाऊं-न-जाऊ.. 

जिंदगी सबकुछ सिखा देती है .....  क्या कभी आपके मन में भी यह खयाल आता है !!

इतना असर है ख़ादी के उजले लिबास में  अच्छी कविता अच्छा आदमी लिखता है 

जिसको खुद सहलाते हैं  संग तुम्हारे जो पल बीते, याद वही पल आते हैं 

आशा नयी इक ज्योति जगा जाता

स्मृतियों में रूस ... ( शिखा वार्ष्णेय ) ..मेरी नज़र से  ब्लॉगजगत का जाना माना नाम

महफिल सजी है आजा…………॥ देर ना हो जाये कहीं देर ना हो जायें 

हिंदी उर्दू के पंख ऐ परदेस मुझे, हिंदी उर्दू के पंख लगा के उड़ उड़ जाऊं मैं

अब कम ही सक्रिय रहूंगा मैं इंटरनेट पर : अविनाश वाचस्‍पति होगा कम आना जाना

सादर-
संध्या शर्मा
मिलते हैं अगली वार्ता पर... 
        



 

मंगलवार, 20 दिसंबर 2011

क्या कहता है ये तूफान...? ब्लाग4वार्ता...संध्या शर्मा

संध्या शर्मा का नमस्कार, एक दिवसीय अवकाश के बाद प्रस्तुत हैं कुछ चुनिन्दा ब्लॉग लिंक उम्मीद करती हूँ आपको भी पसंद आयेंगे....

ज़िंदगी की तपती हुई ज़मीं पर...!
बोलने से दूरियां बढ़ती हैं निकटता में शब्द बहुत कम होते हैं! बिना कहे ही समझ ली जाए बात ऐसे रिश्ते कम होते हैं! ज़िंदगी की तपती हुई ज़मीं पर कुछ हिस्से ही नम होते हैं! मिटा नहीं सकती समय की धार ऐस...

सच-झूठ पर दोहे
*कुँवर कुसुमेश* सच्चाई फुटपाथ पर, बैठी लहू-लुहान. झूठ निरंतर बढ़ रहा,निर्भय सीना तान. उन्नति करते जा रहे,अब झूठे-मक्कार. होगा जाने किस तरह,सच का बेड़ा पार. झूठ तुम्हारे हो गए,कितने लम्बे पैर. सच की इज़्..

"लेन्ज़ का नियम और मनुष्य"
"लेन्ज़ का नियम कहता है कि चुम्बकीय फ़्लक्स में परिवर्तन होने पर उत्पन्न ई.एम.एफ़.से प्रवाहित धारा की दिशा इस प्रकार क़ी होती है कि उससे उत्पन्न चुम्बकीय क्षेत्र उस कारण का ही विरोध करता है .

कैसे तय होगा
जो मैं कहूँ वो तुम कहो - ज़रूरी नहीं फिर जो तुम कहते हो वही मैं भी कहूँ - क्यूँ ज़रूरी होता है ? मैं तो मानती हूँ कि विचारों की स्वतंत्रता ज़रूरी है अपना अपना स्पेस ज़रूरी है तुम भी मानते हो ... तभी मेरी...

मुर्गा लडाई का रोमांच
स्‍पेन, पुर्तगाल और अमेरिका का बुल फायटिंग (सांड युध्‍द) का नजारा मैंने टीवी पर देखा है..... रोमांच का आलम वहां होता है इस खेल के दौरान पर पिछले दिनों मैंने उससे ज्‍यादा रोमांच देखा छत्‍तीसगढ के वनाचंल मे...

यह प्रामाणिक है परंतु प्रत्‍येक को अलग अलग बतलाऊं पासीबल नहीं है
दिनांक 17 दिसम्‍बर 2011 को दोपहर दो बजकर बीस मिनिट पर इंस्‍टीच्‍यूट लीवर एंड बायलरी साईसेंज, वसंत कुंज में लगाया गया है। इससे पहले 13 दिसम्‍बर से दो दो कैप्‍सूल Ribavirin and 1 capsule ..

क्या सिर्फ़ लिख कर ब्लागिंग की जाए : गिरीश बिल्लोरे मुकुल
पद्मसिंह जी के ब्लाग पद्मावलि से साभार * हिन्दी ब्लागिंग अब केवल लिपि आधारित ब्लागिंग नहीं रह गई है लोग आडियो-वीडियो ब्लागिंग के लिये भी आगे आ रहे हैं इनमें मध्य-प्रदेश सबसे अव्वल है इन्दौर से अर्चना चा...

महत्व ....
महत्व... आफिस में क्लर्क का, व्यापार में संपर्क का. जीवन में वर्क का, रेखाओं में कर्क का, कवि में बिहारी का, कथा में तिवारी का, सभा में दरवारी का,भोजन में तरकारी का. महत्व है,... ससुराल में साली का,बगीचे...

जिंदगी के मेलों में.......
जिंदगी के मेलों में, मैं देख रहा हूँ तमाशे कहीं ठेलों पर बिकती चाट, और कहीं पानी बताशे * खट्टा सा है स्वाद खुशी का ,कहीं गम मीठे लगते हैं जलजीरे मे कभी मिठास, कभी शर्बत तीखे लगते हैं पीना है फिर जीना है,ज..

मेरे मन की
मेरे दो अनमोल रतन .. - अरे कब बड़े हो गए पता ही नहीं चला ...... देखो तो जरा ----वही हैं ये .....  
हौसले जब जवान होते हैं, ज़ेर पा आसमान होते हैं. ग़म को पीकर जो मुस्कुतारे हैं, आदमी वो महान होते ह...    
बाल विवाहएक अभिशाप ......... - गुड्डे और गुड़ियों का व्याह जो रचाती है | अगले ही पल वह , ख़ुद दुल्हन बन जाती हैं | जो पिता नहीं कह पाती, वह पत्नी क्या कहलाएगी | जो दूध अभी पीती है, ... 
 
हामी..मुस्कुराहट...धूप...मेरा आसमान और तुम... - ख्यालों की सिगरेट जलती जा रही थी... झड़ती जा रही थी तगाफ़ुलों की राख अचानक मैंने कहा तुम से ‘सुनो मेरी ओर से हां है...’ तुम ने मुस्कुरा के कहा, ‘मेरी तरफ ...
 कालाधन ... - बिट्टू - चच्चू, काला धन क्या होता है ? चच्चू - बेटा ... कालाधन ... बोले तो, जो आम इंसान को दिखाई न दे ! बिट्टू - और सफ़ेद धन ? चच्चू - बेटा, वह जो आम इंसान... 
 दर्द तो होता रहता है, दर्द के दिन ही प्यारे हैं - जब चाहा इकरार किया, जब चाहा इनकार किया देखो, हमने खुद ही से, कैसा अनोखा प्यार किया. ऐसा अनोखा, ऐसा तीखा, जिसको कोई सह न सके हम समझे पत्ती पत्ती को, हमने ही ... 
 कुछ मीठा हो जाए ?--या फिर थोडा सा परोपकार ? - परोपकार करना चाहिए, ऐसा सभी कहते मिलेंगे लेकिन इस दिशा में प्रयासरत विरले ही होते हैं ! सभी अपनी-अपनी पूरी ऊर्जा के साथ कमाने में लगे हुए हैं! कोई धन कमा र..

  
मैं और मेरी कवितायेँ...
अंतिम कविता... संध्या शर्मा - *सृष्टि के अंतिम दिन उसके और हमारे बीच कोई नहीं होगा तब मृत्यु एक कविता होगी एक अंतिम कविता बिना किसी भेद-भाव के स्वागत करेगी सबका उस दिन यह दुनिया न तेरी...


"मन काफी खिन्न है, रविवार को दक्षिणी फिलिपीन्स में आये भीषण तूफ़ान को लेकर. 652 की मौत और 800 लापता. मरने वालों की संख्या इसलिए ज्यादा है क्योंकि बाढ़ अचानक आई लोगों के घर में पानी तब घुसा जब वे गहरी नींद में सो रहे थे, मतलब वे सो गए मौत की गहरी नींद में... ईश्वर वहां की जनता को इस दुःख को सहने की शक्ति दे.... "

हाँ आप सभी से मिलने वाले प्यार और सहयोग के लिए आप सब का बहुत बहुत आभार और धन्यवाद !

सादर-
संध्या शर्मा
मिलते हैं अगली वार्ता पर... 
        


रविवार, 18 दिसंबर 2011

जीवन डोर तुम्ही संग बाँधी.... ब्लाग4वार्ता...संध्या शर्मा

संध्या शर्मा का नमस्कार, प्रस्तुत हैं मेरी पसंद के कुछ ब्लॉग लिंक ---
नहीं कहेंगे, "चाचू पसीने क्यों आ रहे हैं" - हुए ब्लॉग लेखन से दूर, पखवाड़ा क्या, बीत गया महीना जारी है शीत लहर, लिखने में क्यों आ रहा है पसीना नहीं कहेंगे, "चाचू पसीने क्यों आ रहे हैं" न ही सुनें... कडुवा सच
 
देखकर अफसोस है कि - तुम्हारे - चेले-चपाटे भाई-भतीजे गुरु-शिष्य तुम्हें, आगे बढाने में रूचि नहीं रखते ! क्यों, किसलिए ? वे सभी के सभी तुम्हारे कच्चे, अ... 
तेरे बिना जिया लागे ना - सुनो देखो ना इक युग बीता मगर देखो तो मेरी आस का टोकरा कभी रीता ही नही सबने मुझे बावरी बना दिया तेरे विरह में ये नाम दे दिया मगर तुम बिन मेरा ना कोई पल रह...
बात सकारात्मकता की हो नकारात्मकता की हो तो ग्लास आधा खाली है आधा भरा है का तर्क समझ में आता है पर पानी हो , प्यास हो और आधा ग्लास पानी मिले यह बात गले..
नई ग़ज़ल / दर्द किसी को भी बतलाना ठीक नहीं.... - *हमने माना यार ज़माना ठीक नहीं* *फिर भी ये सब झूठ-बहाना ठीक नहीं* * * *जहाँ हमारे जाने से बेचैनी हो* *वहाँ कभी भी आना-जाना ठीक नहीं* *दिल देने से पहले सोच लि... 

प्रीत .... - तुम छलना नही छोड़ सकते तो क्यों मैं छोड़ दूँ अपनी प्रीत .... तुम चाहे जग को जीत लो.. पर मैं जाउंगी तुमको जीत...

बड़ी वफ़ा से निभाई तुमने - लिखूं क्या तुम्हारे बारे में ,कोई इतना बे-वफ़ा कैसे हो सकता है ..कितना कोसती हूँ तुम्हे जानकर शायद किसी पल नाराज़ होकर कह उठोगे "कुछ तो मजबूरिया रही होंगी ,क...
लिखने की जूस्तजू - - खुद के बाहर जाकर लिखना - खुद को छोड़कर लिखना - खुद को तोड़कर लिखना। - खुद को किनारे पर खड़ा करके लिखना - खुद से लड़ते हुये लिखना - अपने को भावनात्मकता से ब... 

 चाहोगे न ? - मैं वाकिफ हूँ इस बात से कि,मेरे साथ बड़ा कठिन है निबाह पाना साथ चल पाना,प्यार कर पाना . तुम जानते हो कई बार मैं बिना किसी कारण तुम्हें कटघरे में खडा क... 

 कुबूलनामा ! - *प्रत्यक्षदर्शियों के * बयान के मुताविक साहिल के उस पार कुछ लहरों को उन्होंने उठते हुए देखा था, फिर एक भंवर बना और देखते ही देखते वो उसमे डूब... 

तवायफ़................... - नारी मन की पीढ़ा को कभी चलते हुए कहीं पढ़ा था ...उस वक़्त ये कविता बहुत अच्छी लगी थी ...इस लिए इसे संजो के रख लिया था ...आज फिर यूँ ही चलते चलते इस पर नज़र ... 
भार्या तुम्हारी .... - *मै सीता * *कुलवधु मै रघुकुल की * *भार्या हूँ राजा राम की ......* *आज चाहती हूँ * *देखना खुद को * *फिर एक बार तटस्थ भाव से -* *सर्व समर्पित * *सर्व अ... 
"निरंतर" की कलम से.....: ना जाने ऐसा ये क्यों हो रहा है? - "निरंतर" की कलम से.....: ना जाने ऐसा ये क्यों हो रहा है?
कैसा अलाव कैसा जाड़ा - सर्दी का मौसम ,जलता अलाव बैठे लोग घेरा बना कर कोइ आता कोइ जाता बैठा कोइ अलाव तापता | आना जाना लगा रहता फिर भी मोह छूट न पाता क्यूँ कि कड़ी सर्दी ... 
जीवन डोर तुम्ही संग बाँधी .... - * शादी की सालगिरह * * * *16 दिसंबर 1979* *शुभ विवाह * *आज मेरी शादी की 32वी सालगिरह हैं .......एक खूबसूरत दिन !* * फ़ैरो के समय हमारे यहाँ घुंघट... 


मुझे शिकायत हे. Mujhe Sikayaat Hay. 
स्वागत, धन्यवाद और माफी - श्री राज भाटिया जी आजकल दिल्ली में हैं और आप उनसे 09999611802 बात कर सकते हैं। शनिवार 24 दिसम्बर 2011 को सांपला में ब्लॉगर मिलन के लिये आने वाले मित्रों ... 

चुपके से यु उस का मुझ से दूर चले जाना पीछे उस के सवाल हज़ार छोड़ गया न आया पसंद उसे वफ़ा का चलन एक जरा सी बात पर इतना बवाल छोड़ गया कौन रोक सका है कि... 
प्रीत .... - तुम छलना नही छोड़ सकते तो क्यों मैं छोड़ दूँ अपनी प्रीत .... तुम चाहे जग को जीत लो.. पर मैं जाउंगी तुमको जीत... 
आजीवन अविवाहित रहने के निर्णय का सम्मान कीजिये - अक्सर कुछ लोग आजीवन अविवाहित रहने का निर्णय लेते हैं ! लेकिन प्रायः ऐसा देखा गया है की उनके मित्र एवं परिजन उन्हें लगातार ये बताते रहते हैं की उनका ये निर्... 

मिलते हैं अगली वार्ता में.... 
  
  
 
 
  
  

शनिवार, 17 दिसंबर 2011

एक मुट्ठी धूप........ संध्या शर्मा

संध्या शर्मा का नमस्कार, आज की ब्लॉग 4 वार्ता में आप सभी का स्वागत है … कुछ चुने हुए उम्दा लिंक्स आप तक पहुँचाने का प्रयास किया है और बहुत से लिंक्स ऐसे हैं जिन तक मैं पहुँच नहीं सकी हूँ, उन सभी से क्षमा प्रार्थी हूँ... 

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