शनिवार, 7 अप्रैल 2012

कनुप्रिया के लिए फूलों की तलाश में भटकते रहे हम --- ब्लॉग4वार्ता……… ललित शर्मा

ललित शर्मा का नमस्कार, ममता बैनर्जी ने एक समारोह में भाषण के दौरान वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों और रेल मंत्रालय से दिनेश त्रिवेदी की रवानगी के फैसलों का बचाव करते हुए मीडिया को हड़बड़ी में ख़बरें छापने से आगाह किया. उनका कहना था कि पाठकों कि संख्या बढ़ाने के लिए मीडिया नकारात्मक ख़बरें बेच रहा है. उन्होंने कहा कि अख़बारों को यह नहीं भूलना चाहिए कि आख़िरकार फैसला तो जनता ही करती है.मतलब साफ है, "मैं तुम्हारी मजबूरियां समझती हूँ, तुम मेरी समझो" ... जी हाँ समझ गए है हम आखिर आपको सरकार चलानी है, आपकी अपनी मजबूरियां हैं... ये तो हुई सरकार कि बात वहां जो होना है होता ही है. आइये चलते हैं ब्लॉग 4 वार्ता कि ओर मेरी पसंद के कुछ लिंक्स के साथ...

लौट आ किसी बहाने से मैनपुरी नगरपालिका सफाई कर्मचारी को समर्पित :- "बहुत उदास है कोई तेरे जाने से; हो सके तो लौट आ किसी बहाने से; तू लाख खफा सही पर आ कर एक बार तो देख; कितना कचरा जमा है तेरे न आने से!" तुम अक्सर मेरी कविताओं में आती हो...तुम अक्सर मेरी कविताओं में आती हो, माटी के डिबिये की रौशनी में, सकुचाती हो, शरमाती हो... इस दुनियादारी के गणित में उलझे, जो जिए हैं वो पल तुमने उनसे जुडी ज़िन्दगी का इतिहास सुनाती हो... अजीब ही पागल हो, मे...सब्जेक्टिया मिलन..हमारे प्रेम में इक तो, ज्योग्राफी का लफड़ा है । केमिस्ट्री ठीक है लेकिन,  हिस्ट्री का झगड़ा है । लिटरेचर पर बहस नहीं, सोसिओलोजी का रगडा है । हैं हम आर्ट्स के बन्दे,  मैथ समझ नहीं पाते, बायोलोजी के बंधन में,...

रंगास्वामी वेडार : दक्षिण भारत के सुप्रसिद्ध टेराकोटा शिल्पीरंगास्वामी वेडार, दक्षिण भारत के सुप्रसिद्ध टेराकोटा शिल्पी हैं। उनका जन्म तमिलनाडु राज्य में मलईउर ग्राम, तालुका आलंगुड़ी जिला पुदुक्कोटई में पारम्परिक कुम्हार परिवार में हुआ। तमिलनाडु के अंचलों में, स्...ऊर्दू की परवरिश की ज़िम्मेदारी बड़ी बहन हिन्दी पर है.एक वक़्त था देश कई सूबों में हिन्दी,अंग्रेज़ी और ऊर्दू की तालीम स्कूल के स्तर पर दी जाती है. भाषा के विकास में एक राजनीति एक ग़लत खेल खेल रही है. राजनीति नाहक ही भाषा को मज़हब के साथ जोड़ रही है.साझी विरासत को बा...टिप बॉक्‍स का कमालखाना खाने के बाद टिप देना स्‍टेटस बन चुका है, अगर आप ने खाना खाने के बाद टिप न दी तो शायद आपको महसूस होगा कि आज मैंने बड़े होटल में खाना नहीं खाया, वैसे टिप देना बुरी बात नहीं, इससे सर्विस देने वाले का मन...

तुम औ मैतुम औ मैं रेल की दो समानांतर पटरिया हैं जो एक दुसरे से अलग नही हैं आपस में जुड़े हुए हैं विश्वास के अटूट बंधन से बंधन इतना मजबूत है कि ये मुसाफिर को उसकी मंजिल तक पहुचातें हैं ......... साथ साथ चलन...कृष्ण लीला एक दिन बलरामजी घर पर रहे और कान्हा गोपों संग गौ चराने गए वन में चरते चरते गौ छिटक गयीं ग्वालबाल कान्हा से विलग हो गायों को ढूँढने निकले और अति व्याकुल हो गौओं संग यमुना का जल पीया होनहार वश ना उन्हें ...हनुमान जी के चरित्र से शिक्षा लो चैत्र माह की पूर्णिमा अर्थात् हनुमान जयन्ती। आज ही के दिन वानरराज केसरी और अंजना के घर हनुमान जी का जन्म हुआ था। समस्त भारतवर्ष में आज के दिन हनुमान जी के भक्त श्रद्धा और उल्लास के साथ हनुमान जयन्ती का पर्...

स्वप्न रहस्यअली सय्यद सर से आज फोन पर बात करते हुए उनके नए लेख की चर्चा हुई जिसमें उन्होंने किशोरावस्था में किसी विदेशी लड़की को स्वप्न में देखा था और उसका चेहरा मोहरा और आकृति आज भी उन्हें याद है ! समाज वैज्ञानि...कर्जे की भाषा के ज़रिये सफल क्रांतियाँ क्या संभव है..?----------ब्लॉग जगत की बड़ी शख्सियत गुरदेव समीर लालआज कई दिनों बाद ब्लॉग पढने के लिए ओपन किया तो सबसे पहले समीर लाल जी की रचना ....बुरा हाल है ये मेरी जिन्दगी का...... उसे पढने के बाद अचनाक गुरदेव समीर जी की करीब दो साल पुरानी रचना | की कुछ लाइन याद आ ग...बुराई तेरे अल्फाजों में साफगोई नजर नहीं आ रही है दोस्त तू तारीफ़ में है, या नाराजगी है !! ... शायद, कहीं कुछ थी बुराई, अन्दर ही मेरे मैं अच्छा करता रहा, और बुरा होता रहा ! ...

खुदा भी क्या मौसम देते हैंखुशियाँ जिनको हम देते हैं वो बदले में गम देते हैं जख्म मिले हैं उनसे अक्सर हम जिनको मरहम देते हैं हैं नफरत के काबिल फिर भी प्रीत उन्हें हरदम देते हैं देहरी उनके दीप जलाया जो लोगों को तम देते हैं जिनकी वा...भारत चीन सबंधवियतनाम के साथ मिलकर तेल क्षेत्र में काम करने की भारत की मंशा किसी भी तरह से चीन को रास नहीं आ रही है और वह विभिन्न अवसरों पर अपनी नाराज़गी ज़ाहिर करने से नहीं चूक रहा है इसके बावजूद भारत भी...सत्ता और हिंसा : बद्री नारायणबद्री नारायण का यह लेख लखनऊ के एक हिंदी अख़बार को दिया गया था पर उन्होंने छापने से मना कर दिया* : *शिवम विज* शक्ति अपने संस्थागत रुप में सत्ता में तब्दील हो जाती है। सत्ता अपने मूल अर्थ में भय एवं हिंसा...

नींदरोज़ रात आती है मुझे सुलाने,**पर हार जाती है ख्यालों के आगे,**फिर नींद आती है लंगडाती हुई,**जब दिल-ओ-दिमाग थक जाते हैं सवालों के आगे…. ** ** **नींद छिप जाती है जब शायरी मुझ से मिलने आती है, **कैसे समझाऊं ...वीर तुम बढे चलो वीर तुम बढे चलो फकीर तुम बढे चलो। वोट तुम अपना सदा, भ्रष्टाचारीयो को दो। बढ रही महँगाई हो ,धर्म की लड़ाई हो राह चलते चलते तेरी रोज ही पिटाई हो तुम कभी डरो नही, पीछे भी हटो नही, तुड़वा के हाथ पाँव तुम, ...तुम्हे बिसराना भूल गये ..आप बनके दोस्त ऐसे आये , हम ये जमाना ही भूल गये .. आपको याद आये न आये हमारी , पर हम तो आपको भुलाना भूल गए .. रोते थे रातो को अक्सर,.. तन्हाईयों में खामोश बैठकर . तुम्हारा साथ जो मिला . गम का हर वो तराना भ.

कनुप्रिया के लिएमेरे घर आई एक प्यारी परी, सोचते हैं लोग क्यूं आती है मुझसे मिलने और मैं क्यूं हो जाता हूं बेचैन उसके बिना क्यूं याद करता हूं और बातें करता हूं पूरे दिन, देर रात और सपनों में भी उससे वो मेरी कोई नहीं, लोग कह...भगवान महावीर : अहिंसा का सन्देश भगवान महावीर : अहिंसा का सन्देश * अहिंसा परमो धर्म:, भगवान महावीर ने अहिंसा की परिधि का विस्तार किया है । यह अहिंसा सिर्फ पशु वध के रोक तक सीमीत नहीं है बल्कि भगवान महावी...फूलों की तलाश में , भटकते रहे हम गुलशन गुलशनरविवार का दिन था । श्रीमती जी कहने लगी --जी बहुत दिन हो गए , फूलों को देखे हुए । चलिए कहीं चलते हैं । मैंने कहा भाग्यश्री, ऱोज तो रोज को देखती हो , फिर कहती हो , फूल नहीं देखे । बोली , नहीं जी वो वाला नही...

वार्ता को देते हैं विराम, मिलते हैं एक ब्रेक के बाद राम राम

शुक्रवार, 6 अप्रैल 2012

बन गयी चिंगारी - जाग उठी देहात की नारी...ब्लॉग4वार्ता....संध्या शर्मा

 संध्या शर्मा का नमस्कार... अखबारों की विश्वसनीयता खत्म होते जा रही है, जिस तरह का समाचार इंडियन एक्सप्रेस में आया कि सेनाएं दिल्ली पर कूच करने जा रही थी और पाकिस्तान जैसे तख्ता पलट को अंजाम दिया जा सकता था। अब खुलासा हुआ है कि युपीए के किसी मंत्री के कहने पर  उसकी स्वार्थ सिद्धी के लिए यह समाचार प्लांट किया गया। जिससे प्रधानमंत्री एवं सेनाध्यक्ष के बीच तनातनी हो जाए और ये अपने उल्लू सीधा करते रहें। इस षड़यंत्र की जांच होनी चाहिए और दोषी व्यक्ति को सजा मिलनी चाहिए। यह भारत की स्वतंत्रता, संप्रभुता एवं सवैंधानिक ढांचे पर आक्रमण है   …… अब प्रस्तुत हैं मेरी पसंद के कुछ लिंक्…।

 देहात की नारी की आवाज- "देहात की नारी" ब्लॉग पर आपका स्वागत है। आज हम इस ब्लॉग पर प्रकाशन प्रारंभ करें , इसके पूर्व कुछ परिचय नवीन ब्लॉग का देना चाहेंगे ........ हमारा देश सांस्कृतिक सम्पदा... 

यशवन्‍त कोठारी का व्यंग्य : सरकार के सलाहकार - सरकार है तो सलाहकार भी है। ऐसी किसी सरकार की कल्‍पना नहीं की जा सकती है जिसके पास सलाहकार नहीं हो। वैसे भी सरकारों के पास सलाहकारों की कभी कमी नहीं रहती। क...

प्यार और प्यार ! - प्यार सत्य है, प्यार मुक्ति है, इच्छाओं से विरक्ति, प्यार शक्ति है. प्यार है इबादत ईश्वर का है उपहार, प्यार है भरोसा तक़दीर है ये प्यार . प्यार ज़िन्... 

सीख ऐसी भी तो हो सकती थी। - पुरानी कहानी है कि एक गुरु अपने शिष्यों को लेकर एक जंगल से कहीं जा रहे थे। एक दिन पहले ही भयानक तूफान वहां से तबाही मचाते हुए गुजरा था। जिसके फलस्वरूप बडे... 

नासमझ की बात- कुछ पंक्तिया कहीं शायद पढ़ी हुई या सूनी हुई पंक्तिया **ऐ माँ आज मैंने जाना मेरे बचपन में मेरे अबोलेपन के बाद भी क्यों जान समझ लेती थी तूँ मेरी पीड़ा को क...


चम्मच भर गद्य - दिन दिन दिन उतान होते जा रहे हैं और आस पास के जन हैरानियत की सीमा के उस पार पहुँच चुके हैं जहाँ किसी को बेहद आसान सा माना जाने लगता है - वह तो ऐसा ही है..

कैसा रहेगा आपके लिए 5 , 6 और 7 अप्रैल का दिन ?? - मेष लग्नवालों के लिए 5 , 6 और 7 अप्रैल 2012 को भाई.बहन , बंधु बांधवों के मामलों में सुखद अहसास बनेगा। सहकर्मियों से सहयोग मिलेगा। झंझट उपस्थित हो सकते हैं... 

आज मैं भी देह होना चाहती हूँ ,थक चुकी हूँ सीता बनकर - हे! पुरुष जब जाते हो बाहर तुम और मिलते हो किसी मेनका से तब हो जाती हूँ मैं तुम्हारे लिए घर की मुर्गी दाल जैसी ही कोई क्या तुम्हारे मन ने भी पूछा है कभी तुमस...

धन घड़ी आई आज ... - धन घड़ी आई आज ... आज आनंद ही आनंद है मन में |आज मेरे ब्लॉग का दूसरा जन्मदिवस है ...!! मन की सरिता जब ब्लॉग पर डाली थी जानती नहीं थी की इसकी यात्रा ...

आज कल मैंने बहुत बिज़ी हूँ - आज कल मैंने बहुत बिज़ी हूँ किस काम में ? जानना चाहते हैं आप ..तो पढ़िए ....(एक हास्य जो सच में रसोई में काम करते करते ये ख्याल आ गया ...कि अगर कभी कुछ ऐसा ह... 

सार्थक सोच - अभिनन्दन है विस्थापन है , अभिषेक कहीं सूनापन है , अंतर्विरोध के युग्मों में , पराया है अपनापन है - ताप ,तृष्णा की ज्वाला है , ईर्ष्या की तपती शाला है , द्वेष ,दंभ ,..



सिर्फ महसूस किये जाते है......!!!- .*कुछ एहसासों को लब्ज़ नही मिलते,* *वो सिर्फ महसूस किये जाते है......* * उन्हें शब्द हम क्या दे...उन्हें अर्थ हम क्या दे.....? जो अनजाने में इस दिल से जुड़ जाते है.... साथ होते है फिर भी तन्हाई सी रहती है,...

ब्लोगजगत में दूसरी वर्षगांठ ....- जी हाँ आज मैंने ब्लोगिंग के दो वर्ष पूरे कर लिए ,यह दो वर्ष कैसे बीते इसका पता ही नहीं चला । लिखना, पढ़ना और टिपियाना यही क्रम चलता रहा । कभी कभी अच्छी पंक्तियाँ, सुंदर अभिव्यक्ति ,बहुत खूब, मजेदार जैसी ...

एक करोड़ रुपये देने का वादा करता हूं ब्लागर्स राहत कोष के लिये ?- .posted by noreply@blogger.com (गिरीश"मुकुल") at मिसफिट Misfit  

छेड़ दो गीत कि यह शाम बहुत उदास लगे ।- छेड़ दो गीत कि यह शाम बहुत उदास लगे ।। बैठे हो पहलू में मेरे ,दिल में यह ख्वाब जगे।। बेखबर तारे हैं यह़ आसमान भी उनीदा है, चाँद निकलेगा यह अरमान अभी जिंदा है। पल दो पल का यह अनजान सफर तो नहीं, ताउम्र रात...

यह इन्कलाब ज़रूरी है दोस्तों !- मैं जीवन का सत्य लिखना चाहती हूँ बिल्कुल हँस की तरह दूध अलग पानी अलग ... पानी की मिलावट यानि झूठ की मिलावट अधिक होती है पर न ग्वाला मानता है न दुनिया ग्वाले के स्वर में भी सख्ती झूठे के स्वर में कभी...

स्मृति का उजाड़ रेगिस्तान- ज़िन्दगी में जब भी कोई चीज़ आगे नहीं बढती तो उस पर धूल और काई जमने लगती है. हम छटपटाने लगते हैं. नयेपन की चाह में ये ठहरा हुआ लम्हा बोझ बन जाता है. हाँ बोझ.... ये कुछ बेवजह की बातें भी आगे नहीं बढ़ पा र...

यह आज की नारी है...... - नए-नए आयाम बनाती है, शिखर पर झंडे लगाती है, यह आज की नारी है...... हर जगह पहुँच जाती है. सहिष्णुता के आवरण में ज्ञान-विज्ञान से, अन्याय की त्रासदी को ललकारकर... 

देखन आये जगत तमाशा. - दायें बाएं देखता हूँ, कुछ कोशिश जारी रखता हूँ, अपने वजूद को पहचाने की - उस बच्चे मानिंद जो देखता है छूता है - और वस्तु को उसकी प्रकुति के हिसाब से...  

विक्रम बेताल - भ्रष्टाचार कथा - हमेशा की तरह बेताल ने कहानी शुरू की, "सुन विक्रम! जिसे तू जम्बूद्वीप अथवा आर्यावर्त के नाम से जानता है, कालान्तर में उस देश का नाम भारतवर्ष हो गया। भारतवर्...

  
माँ.... मैं दूध न पी पाऊँगी! - कई बार बच्चों की कोमल सच्ची भावनाएं हमें जीवन के भूले हुए पाठ याद दिला जाती हैं आज अचानक खेल अधूरा छोडके वह आ बैठी आँचल के छोरसे पोंछके आंसू औंधे मूंह जा लेटी पूछा मैंने जाकर उससे "अरे क्या ह..

ऊँची चोटियों का अभिमान - उन ऊँची चोटियों को कितना अभिमान है उन पर पड़ रही स्वर्णिम किरणों का आधार ही तो उनका श्रृंगार है । घाटियों की गहराई विजन में ज़ज़्ब यादों की अवहित्... 

बाबा की बाबाई प्रा0 लि‍0 - http://kajalkumarcartoons.blogspot.com

फूलों की तलाश में , भटकते रहे हम गुलशन गुलशन --- - रविवार का दिन था । श्रीमती जी कहने लगी --जी बहुत दिन हो गए , फूलों को देखे हुए । चलिए कहीं चलते हैं । मैंने कहा भाग्यश्री, ऱोज तो रोज को देखती हो , फिर कह...

भई, कार्यक्रम हो तो ऐसा ----- ललित शर्मा भई अब तो लिखना ही पड़ेगा कि कार्यक्रम हो तो ऐसा! अनिल पुसदकर ने एक महीने पहले फ़ोन कर के बताया कि उनकी कृति "क्यों जाऊं बस्तर? मरने! का विमोचन 31 मार्च को होना है, साथ ही यह भी कहा कि "31 मार्च को कहीं दू...

अब लेते हैं आपसे विदा मिलते हैं, अगली वार्ता में, नमस्कार.....

गुरुवार, 5 अप्रैल 2012

चारागर की तलाश है...ये इश्क इश्क -- ब्लॉग4वार्ता…… ललित शर्मा

ललित शर्मा का नमस्कार, हद हो गई है, जब चाहो तब पैट्रोल के दाम बढा दो। फ़िर पैट्रोल की कीमते बढाने की कवायद जारी है। तेल कम्पनियाँ अल्टीमेटम दे रही हैं। सरकार पेश-ओ-पश में है। देखो ऊंट किस करवट बैठता है। सहयोगी दलों के विरोध पर कब तक तेल वृद्धि लंबित रहती है। वैसे भी जितनी मंहगाई इस कांग्रेस सरकार ने बढाई है, इससे लगता है कि एन डी ए की सरकार ही ठीक थी। हर गली  में गैस का सिलेंडर मिल जाता है। इन्होने सिलेंडर पर तो ऐसा ताला लगाया है कि जैसे उसकी सब्सिडी से ही सरकारी खर्चे चल रहे हैं। खैर जो भी हो जनता जवाब देना जानती है और वह दिन भी दूर नहीं…………. अब चलते हैं आज की वार्ता पर……… 

कुछ तो लिखो मेरे यार..... -कहते हो कि लिखो, कुछ तो लिखो,लो ये कलम और लिख दो दिल के जज्बात, लिखो कि दिल पुकार रहा है, लिखो कि शाम कामौसम खुशनुमा है और तुम नहीं समझ पा रहे हो कि टाइम्...अपराधग्रस्‍त जीवन या सम्‍मानजनक जीवन -जिन्‍दगी में ज्‍यादा लोग अपराधबोध के कारण आगे नहीं बढ़ पाते, जाने आने में उनसे कोई गलती हो जाती है, और ताउम्र उसका पल्‍लू न छोड़ते हुए खुद को कोसते रहते ह...बोल्डनेस छोड़िए हो जाइए कूल...खुशदीप​ ​​बोल्डनेस को लेकर ब्लाग-जगत का माहौल उबाल पर है...दैहिक रिश्तों के विमर्श से अलग कुछ कूल-कूल बातें करना ज़रूरी है...ऐसे में लाफ्टर की डोज़ से ,,, 

सब ठीक ही होंगा " *मेरे प्रिय आत्मन ; [ आत्मन शब्द मैंने ओशो के प्रवचन से लिया है , पहले मैं मित्रों कह कर सम्बोदित करता था , अब से आत्मन ही कह कर आप सभी को पुकारूँगा,. क्यो..परिवर्तन तो हुआ है किन्तु सकारात्मक नहीं 21वीं सदी को परिवर्तनकारी रूप में स्वीकार किया गया और ऐसा विचार किया जाने लगा कि समाज के प्रत्येक क्षेत्र में परिवर्तन होना अवश्यंभावी है। इस सोच का प्र...एक कर्म हमारा पूरा जन्म बिगाड़ देता है और उसका फल न जाने कितने जन्म.........(कुँवर जी) हम जो भी कर रहे है है या कर चुके है अथवा तो करने वाले है,सबका परिणाम तभी...करते ही पाना चाहते है!कई बार तो उसके गलत परिणाम की आशंका से उसके फल को ही नहीं च.. 

सुकुमार राहुल मनमोहन सिंह जी ने देश की कीमत पर इटली वालों को पाला, और सोनिया ने मनमोहन की कीमत पर राहुल को पाल-पोस कर तैयार कर लिया। उत्तर प्रदेश में तो गुंडा राज आ ही च...  इनसे कुछ मत कहना साथी चित्र -गूगल से साभार गीत -इनसे कुछ मत कहना साथी परधानों के हिस्से आई खेतों की हरियाली | मजदूरों के हिस्से स्लम की बहती गन्दी नाली | इनसे कुछ मत कहना ...सहारा से दिन....अंधे कुएं सी रातें (कहानी --6 ) * कहानी अब तक-- * *(जया के कविता संग्रह को पुरस्कार मिलने पर पत्रकारों के इस सवाल ने 'उसकी कविताओं में इतना दर्द कहाँ से आया ?' उसे पुरानी यादों के मंज़र ... 

श्रोता एक बीमार चाहिए अभी आपको प्यार चाहिए क्या पूरा संसार चाहिए? जो भी बाँटा, मिला आपको बातें और उधार चाहिए? भाव हृदय का जो न समझे तब उसको प्रतिकार चाहिए मैं बोलूँ, वो सुनता ज...आज कल मैंने बहुत बिज़ी हूँ आज कल मैंने बहुत बिज़ी हूँ किस काम में ? जानना चाहते हैं आप ..तो पढ़िए ....(एक हास्य जो सच में रसोई में काम करते करते ये ख्याल आ गया ...कि अगर कभी कुछ ऐसा ह...रात यूँ महकी....... * चाँद यूँ चमका सितारों ने रौशनी खो दी,* * रात यूँ महकी हवा चुपचाप सो गयी !* * * * 

टूटते रिश्ते Roshi: टूटते रिश्ते: जीवन के है अद्भुत रूप और विचित्र रंग आज किसी का साथ और कल दुसरे का संग ना है रत्ती भर उनको साथ छोड़ने का गम बरसों की दोस्ती बस यूं ही ...मणिपुर के गुम आदिवासियों की 3000 साल बाद घर जाने की बेचैनी खबरों में इतिहास अक्सर इतिहास से संबंधित छोटी-मोटी खबरें आप तक पहुंच नहीं पाती हैं। इस कमी को पूरा करने के लिए यह ब्लाग इतिहास की नई खोजों व पुरातत्व, ...जो दवा के नाम पे ज़हर दे उसी चारागर की तलाश है...ये इश्क इश्क है ! शायद 1990 की बहार का मौसम था जबकि वे एक दूसरे के प्रति अनुरक्त हुए होंगे और फिर शादी के पवित्र बंधन में बंधना उनकी मजबूरी बन गया ! फिलहाल उनके दो बच्चे हैं.

शान्ताराम-एक नज़र!! फरवरी १४, तब मैने लिखा था कि शायद १७०० पन्नों की ई बुक शान्ताराम की शुरुवात ही है- वाकई ९८८ पन्नों की पुस्तक- परन्तु ईबुक में पन्ने बढ़ जाते हैं. आज १ अप...मेरी व्यस्तताएं ... मुझे पता है .. बिलकुल कायदे से पता है.. देखते रहते हो तुम मुझे कहीं छुप के ..हर वक्त जब कोई नहीं होता है आस-पास, तब आ के खड़े हो जाते हो मेरे समक्ष . पता ....दोहे *बाहर के सौंदर्य को , जानो बिल्कुल व्यर्थ, जो अंतर्सौंदर्य है, उसका ही कुछ अर्थ। समय नष्ट मत कीजिए, गुण शंसा निकृष्ट, जीवन में अपनाइए, जो गुण सर्वोत्कृष्ट...प्यार नहीं मरा है ...... * * * * *भावनाओं की आग * *में जल * *शिखर सागर बन * *धरा पर फ़ैल गया ......* *अब वह -* *गहरा हो चला था ....* *विस्तृत हो चला था ....* *हर आग को * *खुद में... 

कपालीश्वर चेन्नई की सबसे पुरानी और घनी आबादी वाली बस्ती है मयिलापुर. प्रख्यात कपालीश्वर का मंदिर भी यहीं है. भगवान् शिव ने ब्रह्मा जी के अनादरपूर्ण व्यवहार से कुपित ...तोता और कौवा ! *नीले आसमान में * *उड़ते हुए तोते को * *कौवे ने टोंका,* *तुम इस तरह आसमान में* *अतिक्रमण नहीं कर सकते,* *उड़ नहीं सकते !* *तुम तभी तक महफूज़ हो* *जब तलक उस ...तेरी जुस्तजू करते रहे... पहाड़ों की एक महकती शाम...लड़की न भी चाहे तो भी चाँद की किनारी आँचल से छू ही जाती. वो मुंह फिराकर नाराज होने का नाटक करे तो भी चाँद शदीद मोहब्बत सीने में... 

बोकारो आये थे भगवान श्रीराम ! .. - रामनवमी पर विशेष - शीर्षक पढ़ कर चौंकना लाजिमी है! मगर धार्मिक मान्यता है कि मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम त्रेता युग में बोकारो आये थे. हालांकि त्रेता युग में बोकारो का ...छतहार मन भावै हो भाय : आरती मिश्रा *छतहार गांव पर पंचायत की उभरती गीतकार आरती मिश्रा ने छतहार ब्लॉग के लिए खासतौर पर एक गीत लिखा है। गीत को संगीत दिया है मनोज मिश्र ने। हमारी कोशिश रहेगी कि ...बुरा भला ' देखते देखते बीते 3 साल -*लो जी आज आप सब का यह ब्लॉग 'बुरा भला' पूरे ३ साल का हो गया है | ३१ मार्च २००९ को युही बनाये इस ब्लॉग को आप सब का भरपूर प्यार मिला ... और आगे भी मिलता रहेग... 

बेचारा जमींदार झेल रहा सर्दी और सरकार की मार *आजकल लावनी (फसल कटाई) का समय चल रहा हैं पर इस बार बेचारा किसान जमींदार वर्ग मन मार कर (बेमन) से सरसों की फसल की कटाई का कार्य कर रहा हैं कारण है पिछले दिन...इस अदा पर कुछ मुस्कुराहट, कुछ प्यार हो आया इस चिट्ठी में, नैनीताल के, स्नोव्यू की चर्चा है। स्नो-व्यू से नैनीताल नैनीताल में, हम लोग सबसे पहले, तार गाड़ी से स्नोव्यू गये। यह तारगाड़ी काफी समय से चाल...

वार्ता को देते हैं विराम, मिलते हैं ब्रेक के बाद, राम राम...

बुधवार, 4 अप्रैल 2012

बड़ा सुकूं है जबके चारो ओर शोर है... ब्लॉग4वार्ता....संध्या शर्मा

संध्या शर्मा का नमस्कार... कल से आईपीएल का धमाल शुरु होने वाला है, इसका आगाज आज सेट मैक्स चैनल पर एक रंगारंग कार्यक्रम से हो गया…मैच की शुरुआत चेन्नई सुपर किंग्स और मुंबई इंडियंस के मुकाबले से होगी…७६ मैचों का आयोजन किया गया है जिसका फ़ाइनल मैच २७ मई को खेला जायेगा. इधर बस्तर में सैनिक बल के अत्याचार पर हंगामा मचाने वालों को यह चित्र भी देखना चाहिए… कि सैनिक बल वहां किस तरह कार्य कर रहे हैं……… अब प्रस्तुत हैं मेरी पसंद के कुछ लिंक्स……… 

रात करती इशारे कि महफिल उठी......
सर्द आहें तो कितनी निकलती मगर, दिल की जलती अगन कब है इससे बुझे। शक्ल अपनी दिखे ख्वाइशें थी बहुत, आईने की इजाजत मिली ना मुझे।1। खुद की आवाज तक तो वो सुनता नहीं, खाक उसकी मुनादी से बस्ती जगे। टेढ़ी गलियों...

भोली गाय
बहुत समय पहले की बात है| किसी जंगल में एक गाय रहती थी| जो जंगल में घास चर कर अपना पेट भरती थी| इसी जंगल में एक शेर भी रहता था जो जंगली जानवरों का शिकार किया करता था| समय आने पर ...

अनागत कुसुम
हवा के झझकोरे से बिखरे पत्तों को देखकर बच्चों की भाँति ठिठक जाता है - भीरु मन और चलने से मना करता है एक भी कदम... फिर उसी हवा के झोंके में देखता है भर अचरज - मन कोरा कोंपल -कलियन कि प्रस्तुत होता है अप्रस्त..
समापन करते हुए श्री हरेश कुमार सक्सेना मैं और मेरी छोटी बहिन साधना मैं काव्य पाठ करते हुए साधना वैद संचालन करते हुए 
मुझे पता है .. बिलकुल कायदे से पता है.. देखते रहते हो तुम मुझे कहीं छुप के ..हर वक्त जब कोई नहीं होता है आस-पास, तब आ के खड़े हो जाते हो मेरे समक्ष . पता है ...तुम ही हो कोई और कैसे होगा भला ? तुम्हारे अल...
फरवरी १४, तब मैने लिखा था कि शायद १७०० पन्नों की ई बुक शान्ताराम की शुरुवात ही है- वाकई ९८८ पन्नों की पुस्तक- परन्तु ईबुक में पन्ने बढ़ जाते हैं. आज १ अप्रेल- खत्म हुई पुस्तक. मानो एक युग का अन्त हुआ. यह ...
मेष लग्नवालों के लिए 3 , 4 और 5 अप्रैल 2012 को स्वास्थ्य या व्यक्तिगत गुणों को मजबूती देने के कार्यक्रम बनेंगे, स्मार्ट लोगों का साथ मिलेगा। रूटीन काफी सुव्यवस्थित होगा। अपनी या संतान पक्ष की पढाई लिखाई क...
ये तस्वीर अपने आप में बहुत कुछ बयां करती है. इसे मैंने फेसबुक से लिया है. 
** * हम भारत में रहते है और हमे अपनी भारतीय संस्कृति पर बहुत गर्व है , हम श्रवन कुमार के आदर्शो को मानते है . हमे ये कतई गवारा नही कि हमारे संस्कार पर कोई ऊँगली उठाये ...हम विश्वगुर...
तो हमारी एक दोस्त से बहस छिड़ गयी कि हिन्दी लिखने वालों को सरल लिखना चाहिए या हिन्दी की गुणवत्ता बरकरार रखते हुए क्लिष्ट? उसे मेरी बहुत ही सरल और सुस्पष्ट हि....
* *फिल्म देखने का नजरिया बदलेगा अंतर्राष्ट्रीय मीडिया फिल्म फैस्टीवल: कुलपति* *भ्रष्टाचार के खात्में के लिए फिल्मों में सामाजिक संवेदनशीलता जरूरी: शाह....
शायद 1990 की बहार का मौसम था जबकि वे एक दूसरे के प्रति अनुरक्त हुए होंगे और फिर शादी के पवित्र बंधन में बंधना उनकी मजबूरी बन गया ! फिलहाल उनके दो बच्चे हैं..
* * * * *मेरा जनम -दिवस * *२८ march* *मेरे जन्म दिन पर आप सभी दोस्तों का मैं आभार प्रकट करती हूँ ----इस दिवस को आप सबने अपने प्यार से यादगार बना दिया .....  
मशाल इन्कलावी बुझाई क्यों गयी है - इबारत लिखी अमन की,मिटाई क्यों गयी है , टुटा है हौसला , बिकता इमान है , इंसानियत से दुरी , बनायीं क... 
आज दिल कुछ अजीब से लम्हात में जी रहा है ,बड़ा सुकूं है जबके चारो ओर शोर है ...शरीर ऐसा शांत है मानो कितनी मुद्दत के बाद गहरी नींद सोये हो, आस पास की हलचल ध...  
छोटी छोटी चीजें जीवन की दिशा बदल सकती हैं, लेकिन उन छोटी छोटी चीजों पर अमल होना चाहिए, इस रविवार मैं अपने ससुराल में था, यहां घर के मुख्‍य द्वार पर कुछ इंग...  

क्या यही हैं वो विधान? जिससे बना मेरा भारत महान! - सरकारी नौकर बनने के लिए कुछ न कुछ न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता की आवश्यकता होती है। किन्तु शैक्षणिक योग्यताओं वाले सरकारी नौकरों को अपने नियन्त्रण में रखकर सरक...
मेरा मन जैसे खेत में खड़ा एक बिजुका महसूसता है हर पल तुम्हारी आवन-जावन को बिना कोई सवाल किये........... और भावनाएं जैसे पीहर में बैठी विवाहिता गिन रही ह... 
*संचार माध्यमों ने* कुछ ऐसी फ़िजा बनाई कि मैं भी पृथ्वी प्रहर (अर्थ आवर) मनाने को संकल्पित हो गया। अर्थ आवर आने पर उसका जोरदार स्वागत करने के लिए मोमबत्...  
*एक समय था जब देश देश की तरह चला करता था. अब तो लगता है देश किसी बड़े सेठ की दूकान है, जो अपने लाभ की ही चिंता में लगा रहता है. दुःख होता है कि हमारी सरकार...   
पहाड़ों की एक महकती शाम...लड़की न भी चाहे तो भी चाँद की किनारी आँचल से छू ही जाती. वो मुंह फिराकर नाराज होने का नाटक करे तो भी चाँद शदीद मोहब्बत सीने में..

अब लेते हैं आपसे विदा मिलते हैं, अगली वार्ता में, नमस्कार..... 

मंगलवार, 3 अप्रैल 2012

बात निकलेगी तो दूर तलक जायेगी ... ब्लॉग4वार्ता, ललित शर्मा

ललित शर्मा का नमस्कार, प्रस्तुत है आज की फटाफट वार्ता मेरी पसंद के लिंक्स के साथ... अना सागर घुम कर आएई प्यार नहीं मरा है ...... * * * *भावनाओं की आग * *में जल * *शिखर सागर बन * *धरा पर फ़ैल गया ......* *अब वह -* *गहरा हो चला था ....* *विस्तृत हो चला था ....* *हर आग को * *खुद में समां लेने * *में सक्षम था ........* * * *झुलसते ह...महामूर्ख मेला  रविवार, 1 अप्रैल 2012, अंतर्राष्ट्रीय मूर्ख दिवस के अवसर पर बनारस के राजेन्द्र प्रसाद घाट पर हमेशा की तरह इस वर्ष भी 43वें महामूर्ख मेले का आयोजन हुआ। मेले का शुभारंभ सिद्ध संचालक पंडित धर्मशील चतुर्वेदी क... तलाश और सुकून*हर शख्स मुकम्मिल जहाँ की तलाश में है व्यस्त,कि.. ** उलझी हुई साँसे टूटे हुए साजों पर गीत गा नहीं सकतीं अब ;** हर तरफ बिखरी हुईं हैं अश्कों में भीगी उम्मीदें ,थके हुए हैं...अना सागर

हे राम ! आप महान अतिशय और हृदय उदार थे।  हे राम ! आप महान अतिशय और हृदय उदार थे।। प्रेम,करुणा,शील,सनेह, दया के आप प्रभु आगार थे।। यह धरा थी संत्रप्त जब दानवी अत्याचार से, पाप से, पाखंड से, लोभ और अनाचार से, निज-बाहुबल से दुष्टदल का नाश करके , त... "नगर वधु" १- नहीं आसरा, मंजिल का अब, न किसी पड़ाव की जरुरत है मुझे जो भी रुका, मंजिल बना जो चला गया वो कुछ पल का रहबर बना २- न मेरी कोई डगर है न मेरा कोई नगर है यहाँ जिस राह भी तुम ले चलो वो .संभलकर , विषय "बोल्ड" है स्त्री और पुरुष दो भिन्न अस्तित्व पर फिर भी मिलन को आतुरता , सन्निकटता रतिक्रीड़ा की उत्सुकता ही शायद इनके जीवन का पर्याय बनी और भोग सम्भोग की जमीन पर ही माधुर्य की नींव रखी प्रथम मिलन स्त्री की ... 

निर्मल बाबा का दरबार बोले तो लाफ्टर शो ... *भा*ई साधु संतो से तो मैं भी डरता हूं, इसलिए मैं पहले ही बोल देता हूं निर्मल बाबा के चरणों में मेरा और मेरे परिवार का कोटि कोटि प्रणाम। वैसे मैं जानता हूं कि साधु संत अगर आपको आशीर्वाद दें तो उसका एक बार ... जतिन दास की मांग जायज है लगभग 17 वर्ष पूर्व भिलाई स्पात संयंत्र द्वारा अपने चौकों के सौदर्यीकरण के तहत प्रसिद्व कलाकार जतिन दास के द्वारा निर्मित कलाकृतियॉं भिलाई के सेक्टर 1 स्थित संयंत्र प्रवेश द्वार के पूर्व चौंक पर लगाई गई थी.... सिलसिला *बात निकलेगी तो फिर दूर तलक जायेगी ....................इसी उम्मीद पर शायद लोग गज़ल लिखा करते हैं.......* * **अपने दिल से मेरा सिलसिला जोड़ दे...* *जो राहें न मुझ तक पहुचें सनम* *उन राहों का रुख तू अभी मोड

नदी हूँ  थम जाऊं, पहाड़ नहीं हूँ, नदी हूँ, बहती चली जाती हूँ, मायूसी का जोर नहीं चलता ज़रा देर, उम्मीद का दामन थामे चली जाती हूँ…. Ganga River (photo from google) पत्थर की ताकत नहीं मुझमे, हाँ, प्यास बुझानी आती है,...झीना आवरण  वे व्यस्त नजर आते जीवन की आपाधापी मे अभ्यस्त नजर आते मनोभाव छिपाने में आवरण से ढके सत्य स्वीकारते नहीं झूट हजारों के सत्य स्वीकारते नहीं हर वार से बचना चाहते ढाल साथ रखते व्यंग वाणों से बचने के लिए ... मेरे आलेख , आपकी टिप्पणियाँ और यह पॉडकास्ट अर्चना जी जीवन और साहित्य एक दूसरे के पर्याय हैं . जिस तरह जीवन की कोई सीमा नहीं , उसी तरह साहित्य को भी किसी सीमा में बांधना असंभव सा प्रतीत होता है . सीमा तो शरीरों की है . लेकिन भाव तो शाश्वत है , भाव म...

कहीं नहीं है, कोई... दिन का डेढ़ बजा था, कुछ देर और बात की जा सकती थी. लेकिन जो बातें होती, वे शायद मुझे रोक कर नहीं रख पाती. दोपहर ज्यादा गरम नहीं थी. बरसों से चालीस के ऊपर की गरमी में जीने की आदत है. तो क्या करूं? कोई का... लाड़ली लक्ष्मी योजना: क्या पांचवीं बार बाज़ी मारेगा जबलपुर सम्भाग .क्रमांक जिला लक्ष्य उपलब्धि प्रतिशत सम्भाग में रैंक   1 बालाघाट 7593 13564 178.63 प्रथम 2 छिंदवाड़ा 9374 16423 175.19 द्वितीय 3 डिण्डौरी 2944 2958 1...कैसा रहेगा आपके लिए 3 , 4 और 5 अप्रैल 2012 ?? मेष लग्नवालों के लिए 3 , 4 और 5 अप्रैल 2012 को स्वास्थ्य या व्यक्तिगत गुणों को मजबूती देने के कार्यक्रम बनेंगे, स्मार्ट लोगों का साथ मिलेगा। रूटीन काफी सुव्यवस्थित होगा। अपनी या संतान पक्ष की पढाई लिखाई का वातावरण कमजोर रहेगा , इस कारण किसी प्रकार का ज्ञान प्राप्त करना कठिन रहेगा। संतान के अन्य किसी पक्ष से से संबंधित माहौल भी कमजोर बना रहेगा।
वार्ता को देते हैं विराम, मिलते हैं ब्रेक के बाद, राम राम... तब तक पढिए……।

सोमवार, 2 अप्रैल 2012

आप सब को राम नवमी की हार्दिक शुभ कामनाएँ .. ब्‍लॉग4वार्ता .. संगीता पुरी

ॐ नमः शिवाय
भारत पर्वों का देश है। यहाँ की दिनचर्या में ही पर्व-त्योहार बसे हुए हैं। ऐसा

ही एक पर्व है रामनवमी। असुरों का संहार करने के लिए भगवान विष्णु ने राम रूप में पृथ्वी पर अवतार लिया और जीवन में मर्यादा का पालन करते हुए मर्यादा पुरुषोत्तम कहलाए। आज भी मर्यादा पुरुषोत्तम राम का जन्मोत्सव तो धूमधाम से मनाया जाता है पर उनके आदर्शों को जीवन में नहीं उतारा जाता। अयोध्या के राजकुमार होते हुए भी भगवान राम अपने पिता के वचनों को पूरा करने के लिए संपूर्ण वैभव को त्याग 14 वर्ष के लिए वन चले गए और आज देखें तो वैभव की लालसा में ही पुत्र अपने माता-पिता का काल बन रहा है।
को भगवान श्रीराम का जन्मोत्सव मनाया जाता है, इसलिए इस तिथि को श्रीराम नवमी भी कहते हैं। इस बार राम नवमी का पर्व 1 अप्रैल, रविवार को है। भगवान श्रीराम को प्रसन्न करने के लिए कई स्तुतियां, मंत्र, आरती आदि की रचना की गई है। एक स्तुति का वर्णन रामचरितमानस के अरण्यकाण्ड में आया है। भगवान राम की यह स्तुति मुनि अत्रि द्वारा की गई है। इस स्तुति का पाठ करने से भगवान राम भक्त पर प्रसन्न होते हैं तथा उसकी हर मनोकामना पूरी करते हैं। यह राम स्तुति इस प्रकार है-
राम स्तुति
नमामि भक्त वत्सलं । कृपालु शील कोमलं ॥
भजामि ते पदांबुजं । अकामिनां स्वधामदं ॥
निकाम श्याम सुंदरं । भवाम्बुनाथ मंदरं ॥
प्रफुल्ल कंज लोचनं । मदादि दोष मोचनं ॥
प्रलंब बाहु विक्रमं । प्रभोऽप्रमेय वैभवं ॥
निषंग चाप सायकं । धरं त्रिलोक नायकं ॥
दिनेश वंश मंडनं । महेश चाप खंडनं ॥
मुनींद्र संत रंजनं । सुरारि वृंद भंजनं ॥ 
श्रीराम के पाँच गुण नीति-कुशल व न्यायप्रिय श्रीरामभगवान राम विषम परिस्थितियों में भी नीति सम्मत रहे। उन्होंने वेदों और मर्यादा का पालन करते हुए सुखी राज्य की स्थापना की। स्वयं की भावना व सुखों से समझौता कर न्याय और सत्य का साथ दिया। फिर चाहे राज्य त्यागने, बाली का वध करने, रावण का संहार करने या सीता को वन भेजने की बात ही क्यों न हो। 
सहनशील व धैर्यवान सहनशीलता व धैर्य भगवान राम का एक और गुण है। कैकेयी की आज्ञा से वन में 14 वर्ष बिताना, समुद्र पर सेतु बनाने के लिए तपस्या करना, सीता को त्यागने के बाद राजा होते हुए भी संन्यासी की भांति जीवन बिताना उनकी सहनशीलता की पराकाष्ठा है। 
दयालु व बेहतर स्वामी भगवान राम ने दया कर सभी को अपनी छत्रछाया में लिया। उनकी सेना में पशु, मानव व दानव सभी थे और उन्होंने सभी को आगे बढ़ने का मौका दिया। सुग्रीव को राज्य, हनुमान, जाम्बवंत व नल-नील को भी उन्होंने समय-समय पर नेतृत्व करने का अधिकार दिया।
राम ने अपने पिता दशरथ एवं माता कैकेयी के चरणस्पर्श किये। राम को देखकर महाराज ने एक दीर्घ श्‍वास और केवल "हे राम!" कहा फिर अत्यधिक निराश होने के कारण चुप हो गये। उनके नेत्रों में अश्रु भर आए। विनम्र स्वर में राम ने कैकेयी से पूछा, "माता! पिताजी की ऐसी दशा का क्या कारण है? कहीं वे मुझसे अप्रसन्न तो नहीं हैं? यदि वे मुझसे अप्रसन्न हैं तो मेरा क्षणमात्र भी जीना व्यर्थ है।"
शीर्षक पढ़ कर चौंकना लाजिमी है! मगर धार्मिक मान्यता है कि मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम त्रेता युग में बोकारो आये थे. हालांकि त्रेता युग में बोकारो का क्या स्वरूप रहा होगा, इसकी कल्पना मात्र की जा सकती है.
बावजूद इसके वर्तमान बोकारो के विभिन्न स्थलों पर उनके आने के अलग-अलग प्रसंग की जनश्रुतियां हैं. इन सभी स्थलों का विशेष धार्मिक व ऐतिहासिक महत्व है. यूं कहें, इन्हें धरोहर के रूप में संजो कर रखा गया है. मुख्यत: जिले के तीन स्थलों पर भगवान श्रीराम के आने की मान्यता है. इनमें दो स्थल कसमार व एक चास प्रखंड में है.
हाल ही में नेट पर देखा की कुछ विशिष्ट जन को भगवान राम और माँ सीता के विवाह के सन्दर्भ में कुछ भ्रान्ति है. कुछ तर्क वाल्मीकि रामायण से लेकर ये निष्कर्ष निकला जा रहा है की विवाह के वक़्त माँ सीता की उम्र महज छ साल की थी, जो कतई सही नहीं है.
जैसा की हम सब जानते है, समय के साथ साथ लोगो ने धर्म को अपनी सुविधा और धर्म के व्यापार के हिसाब से तोड़ मरोड़ दिया है. उदहारण के तौर पर हिन्दू धर्म में के कुछ कुख्यात बाबाओ के कारनामे हमने पिछले एक महीनो में हर हफ्ते देखे सुने और पढ़े है. ठीक वैसे ही मुस्लिम धर्म में कुछ लोग मानते है की किसी भी बेगुनाह को मारने वाले को अल्लाह कभी माफ़ नहीं करता वही मुस्लिम कुछ लोग इस तरह के खून खराबे को अल्लाह के रसूल का हुकुम मान कर आतंक को धर्म का पर्याय बनाने को आतुर है. कहने का तात्पर्य ये है की समय के साथ साथ मान्यताये बदली और फिर अल्पबुद्धि लोगो ने धर्म ग्रंथो का अपनी सुविधा के हिसाब से व्याख्यान कर दिया. कहा भी गया है धर्म प्रदर्शन की नहीं अपितु धारण करने की चीज़ है. धर्म वो है जो व्यक्ति को संयमी बनाता है.
राम जन्म :बाल काण्ड सर्ग १८ शलोक ८-९-१० में महार्षि वाल्मीक जी ने उल्लेख किया है कि श्री राम जी का जन्म चैत्र शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को अभिजित महूर्त में मध्याह्न में हुआ था। कंप्यूटर द्वारा गणना करने पर यह २१ फरवरी, ५११५ ई पू आता है। इस दिन नवमी तो आती है लेकिन नक्षत्र पुष्य आता है। नवमी तिथि के बारे में तुलसी राम चरितमानस में भी उल्लेख मिलता है एवं रामनवमी चैत्र शुकल की नवमी को ही मनाई जाती है। बाल काण्ड के दोहा १९० के बाद की प्रथम चौपाई में तुलसीदास जी लिखते हैं
नौमी तिथि मधुमास पुनीता, सुकल पच्छ अभिजित हरिप्रीता |
मध्य दिवस अति सीत न धामा , पावन काल लोक विश्रामा ||
खुशी भी श्री राम से है,
गम भी श्री राम से है,
तकरार भी श्री राम से है,
प्यार भी श्री राम से है,
रुठना भी श्री राम से है,
मनाना भी श्री राम से है,
राम नाम सत्य है, सत्य ही रहेगा. 
असत्य के युगों में भी, राम तो रहेगा.
राम नाम सत्य है, सत्य ही रहेगा.
जिस ह्रदय में राम के, नाम का प्रकाश है,
उस ह्रदय में स्वयं ही, ब्रम्ह का निवास है.
काम-क्रोध-लोभ-मोह, पल में छोड़ जाते हैं,
राम के होते हुए, लौट के न आते हैं.
तू भी ऐसे नाम का दास कब बनेगा ?
असत्य के युगों में भी, राम तो रहेगा.
राम नाम सत्य है, सत्य ही रहेगा.
उच्चतम न्यायालय ने केन्द्र सरकार से कहा कि वह इस बारे में दृष्टिकोण स्पष्ट करे कि क्या राम सेतु को राष्ट्रीय स्मारक घोषित किया जा सकता है।उच्चतम न्यायालय ने केंद्र से सेतुसमुद्रम परियोजना पर आरके पचौरी की रिपोर्ट छह सप्ताह के अंदर उसके समक्ष रखने को कहा। मालूम हो प्रधानमंत्री ने जुलाई 2008 में पचौरी की अध्यक्षता में छह सदस्यीय समिति का गठन किया था। 
धनुष वाण काँधे पर धारे,
मोहक कोमल श्यामल छवि ।
रघुपति राघव नीति विधायक ,
कुल देवता तेजमय रवि ।।
रविकुल तिलक, हे दीप्त भाल ,
मुख कमल नव, लोचन विशाल।1।
श्यामल शरीर, ल्यौं मेघ नील,
आजान बाहु , शुभाचरणशील।2।
आया है पर्व राम नवमी का , सांवलिया रामजी की जीवन के अनुसरण करने का ,
मर्यादा पुरुषोत्तम थे वो , उन्हों ने ही सिखाया प्रकृति से प्यार करने का ,
जिसने मिटाया अश्पृश्यता का भेदभाव कावट की नैया में बैठ के ,
प्रेम और भक्ति भरी शबरी के जूठे बोर खा लिए उन्होंने हंसते हंसते
अहल्या का उद्धार करके सिखाया मत समजो नारी को पतित,
राम की चिरैया राम का खेत
खावो री चिरैया भर-भर पेट
राम यदि अपनी चिड़ियों को अपने खेत की फसल चुगने देता है तो इसमें दोष ही क्या है? आखिर चिड़ियों और खेत दोनों का मालिक राम ही तो है! राम याने कि परमात्मा का अवतार और परमात्मा याने कि सुपर पॉवर!
रावण, कंस, दुर्योधन भी स्वयं को सुपर पॉवर समझा करते थे। आज संसद सुपर पॉवर बन गया है। सांसद इस सुपर पॉवर अर्थात् संसद की चिड़ियाएँ हैं और देश की जनता इसका खेत। तो सांसद यदि जनता को लूटें तो किसी भी प्रकार का दोष हो ही नहीं सकता। राम के खेत को चुगना तो राम की चिड़ियों का अधिकार है। 
'रोम-रोम' में राम पर, जिनको था अभिमान
हृदय राम-दरबार का, सबको मिला प्रमाण
उन्हीं राम के भक्त की, निष्ठा का कर ध्यान
लिखा नाम 'श्रीराम' का, छबि में थे हनुमान
राम-राम लिख चित्र पर, किया प्रयोग विचित्र
लोगों तक पहुंचा दिया, अनुपम राम चरित्र
परमेश्वर में आस्था अंतर्मन विश्वास
लगन एक 'श्रीराम' में, जीवन हुआ सुवास

रविवार, 1 अप्रैल 2012

हिन्‍दी चिट्ठाकारिता के विकास के मार्ग में बाधक आत्‍ममुग्‍धता की दूषित प्रवृत्ति और टिप्पणीयों के गुमशुदा होने का राज़/ गिरीश बिल्लोरे

रंगभेदी विज्ञापन क्यों ? सवाल को उठाने वाले आलेख  हस्तक्षेप डाटकाम पर पढ़कर आज़ से  तीस बरस पुरानी बात याद आई सांवली दिखने वाली लड़की को देख कर आए एक शेखीबाज़ परिवार उसे बहू बनाने के लिये असहमत होते देख मैंने तैश में आकर उनका अपमान किया था.  मामला एक ऐसे रिश्तेदार का था जो अपने पुत्र के लिये वधू की तलाश में निकले और जब मेरे घर वापस आए तो बड़े उपेक्षा पूर्ण भाव से एक लड़की के प्रमुख दोष यानी उसके सांवले-रंग के आधार पर सम्बंध के लिये सरे आम लड़की के परिवार को इंकार करके आए थे. कितनी क्रूर होते हैं समाज के लोग जो "रंग-भेद" को प्रश्रय देते हैं. उस नामाकूल रिश्तेदार को मैं आज भी पसंद नहीं हूं.. पर अपने आप में मैं खुश होता हूं कि हर बुरी बात का प्रतिकार करना चाहिये.
इसे भड़ास पर भी देखिये "क्‍या काले रंग वालों का कोई अस्तित्‍व नहीं?" 
समय के साये में  

प्रतिभा की संरचना ( structure of talent ) आलेख बेहद अच्छा लगा इसे अवश्य पढ़ा जाए 

हे मानवश्रेष्ठों, यहां पर मनोविज्ञान पर कुछ सामग्री लगातार एक श्रृंखला के रूप में प्रस्तुत की जा रही है। पिछली बार हमने व्यक्ति के वैयक्तिक-मानसिक अभिलक्षणों की कड़ी के रूप में ‘योग्यता’ के अंतर्गत प्रतिभा और उसके सामाजिक-ऐतिहासिक स्वरूप पर चर्चा की थी, इस बार हम प्रतिभा की संरचना को समझने की कोशिश करेंगे। यह ध्यान में रहे ही कि यहां सिर्फ़ उपलब्ध ज्ञान का समेकन मात्र किया जा रहा है, जिसमें समय अपनी पच्चीकारी के निमित्त मात्र उपस्थित है


ब्लॉग बुलेटिन: गायब होती टिप्पणियों का राज़ - शाहनवाज़ जी के पास है बाबा देशनामा पर 'हेट स्टोरी' के प्रोमोज़ पर चल गई कैंची...खुशदीप जी ने बताया. चलो कुछ तो हो रहा है. सैंसर बोर्ड वालों नी  खुशदीप के  कहां ले जाएगी ये बोल्डनेस...  इस आलेख को भांचा है शायद. तेताला पर हिन्‍दी चिट्ठाकारिता के विकास के मार्ग में बाधक आत्‍ममुग्‍धता की दूषित प्रवृत्ति बेशक चिंतनीय आलेख है. 

  साहित्य-सुरभी को 100 वीं पोस्ट ( कविता )  की बधाई दीजिये .और देखिये पार्थवी के जादू भाग -  और झर कर भी नवगीत अनुपम बन पड़ा है  नवगीत की पाठशाला पर.
आप मिलेंगे
अविनाश वाचस्‍पति ऊर्फ अन्‍नास्‍वामी से
असीम त्रिवेदी से
अपने और बहुत सारे साथियों से
जो आपकी अभिव्‍य‍िक्ति के तालों को
डिलीट करना चाहते हैं
हाइड करना चाहते हैं...
                    आगे जानने जाइये नुक्कड़ पर .इसके बाद संस्मरणात्मक आलेख अवश्य देखिये 

आज़ जिन ब्लाग को देखा 

इनमें क्या था ... न मै न कहूंगा आप खुद देखिये जाकर
जै राम जी की !!
रामनवमीं की हार्दिक शुभ कामनाएं



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