रविवार, 15 अप्रैल 2012

अंजू चौधरी की कृति "क्षितिजा" को महादेवी वर्मा सम्मान --- ब्लॉग4वार्ता -- ललित शर्मा

ललित शर्मा का नमस्कार,  १४ अप्रेल को बाबा साहब आंबेडकर जयंती थी. इस अवसर पर नागपुर के कृषि महाविद्यालय ग्रंथालय के पूरण चंद बूटी सभागृह में महात्मा फुले प्रतिभा संशोधन अकादमी महाराष्ट्र द्वारा नागपुर कार्यक्रम आयोजित किया गया. इस अवसर पर ब्लॉगर अंजू  चौधरी की नवीनतम कृति "क्षितिजा" को महादेवी वर्मा कवियत्री सम्मान दिया गया, इस अवसर पर ब्लॉगर ललित शर्मा, अनीता कपूर, संजीव तिवारी, संध्या शर्मा उपस्थित थे........ ब्लॉग4वार्ता की तरफ से अंजू चौधरी को कोटिश शुभकामनाएं ......... अब चलते है आज की वार्ता पर और प्रस्तुत करते हैं कुछ उम्दा लिंक............

"क्षितिजा"कवितायेँ मन की सोच, अहसास होती है, जिन्हें शब्दों में पिरो कर कवि ह्रदय अपने को सबके सामने रखता है| कविताओं के द्वारा फूटने वाले शब्द, एक सदाबहार वृक्ष की पुष्प के भांति है, जिससे निकलता सुगंध उस वृक्ष...बेटियाँगर्मी में खुशबू वाली, हवा सी, ये बेटियाँ, सर्दी की धूप गुनगुनी जैसी ये बेटियाँ । घर में सुरों की तान सी बहती ये बेटियाँ, कितनी नई कहानियां कहती ये बेटियां । जीवन के रंग भी और मिठास बेटियाँ, हर दिन रचत...एक जीनियस की मृत्यु..18 अप्रैल 1955 को दुनिया ने महानतम वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टीन को खो दिया। करीब एक महीने बाद उनके करीबी मित्र मैक्स टालमड ने टाइम मैगजीन में एक संस्मरणात्मक लेख लिखकर आइंस्टीन को श्रद्धांजलि अर्पित की। ‘व...

तेरी याद मेंहम जी न सकेंगे दुनियां में * *माँ जन्मे कोख तुम्हारी से * *जो दूध पिलाया बचपन में ,* *यह शक्ति उसी से पायी है * *जबसे तेरा आँचल छूटा, हम हँसना अम्मा भूल गए, * *हम अब भी आंसू भरे , तुझे टकटकी लगाए बैठे है...हम चाहें तो सब बदल सकते हैंवे शोख़, मासूम और फूल-सी दिखती हैं, लेकिन पर्दे पर उनकी परिपक्वता हैरान कर देती है। वे जितनी बिंदास और अल्हड़ हैं, अभिनय को लेकर उतनी ही संजीदा भी हैं। अलग ‘लुक्स’ और ख़ास अभिनय शैली के लिए चर्चित इस...रफ्ता -रफ्ता.रफ्ता -रफ्ता यादो के बादल छाते है हम तेरे शहर से दूर अब जाते है . वक्त का सितम तो कुछ कम नहीं है पर तेरी बेरूखी से हम तो मरे जाते है . ज़माने में रुसवा न हो जाये प्यार मेरा चुपके से नजरे झुका के निकल जात...

ऎ कामवाली तुम्हे बस कामवाली ही बने रहना है...*हल्लो कौन!* *घरवाली?* *नही मै कामवाली….* *खट* *और कनैक्शन कट* *लेकिन मै जानती हूँ तुम्हारी उपयोगिता* *सच कहूँ* *तुम्हारे होने से* *घरवाली का ठाठ-बाठ* *उसका सजना सँवरना हो पाता है* *नख स...वो निरीह कल देखा था मैंने उसे वहीँ उस कोने में बैठा था चुपचाप मुस्काया मुझे देख सोचा होगा उसने कुछ तो करुँगी बहलाऊँगी ,मनाऊंगी फिर उठा लुंगी अहिस्ता से हमेशा ही होता है ऐसे. वो जब तब रूठ कर बैठ जाता है थोडा ...चाह होनी चाहिए राह तो खुद-बखुद सामने आ जाती हैबहुत पहले सुना था कि जी. टी. रोड पर पंजाब के ढाबों में भीड़ अधिक होने और ग्राहकों के पास समय कम होने की वजह से लस्सी या शेक जैसे पेय पदार्थों को "वाशिंग मशीन" में बनाया जाने लगा था. एक साथ ढेर सारा पेय पदा...

क्षितिज के पारहम करते हैं मानवीयकरण प्रकृति का और कहलवाते हैं किसी पंछी या फिर कल-कल बहती नदिया से अपनी वेदना... अपनी संवेदना क्या कभी सोचा है हमने? हमारे मन की वाणी बन कर क्या सोचता होगा उनका मन हमारी कथा बांच कर कैसा ल...सुआलकुसी की सानू ने मुझे ''बिहुआन' भेंट किया था.असम के रंगीले पर्व 'बिहू' के अवसर पर आज मैं अपने उन सभी मित्रों के साथ , उन के उत्सव में शामिल होना चाहता हूँ,जो वहां इस पर्व को मना रहे होंगे और अपने उत्सव में मुझे शामिल करना चाहेंगे । अपने एक मित्र माख...आरंग , भानसोज की पुष्पा साहूआरंग , भानसोज की पुष्पा साहू .......... हम किसी काम से भानसोज गए थे . वहां भीड़ में भी एक अलग सा चेहरा हमे नजर आया . सावली सी सूरत और लम्बा छरहरा बदन ........आवाज में तेज , आँखों में चमक ......

विधि की व्यवस्था नास्तिकों का एक बड़ा तर्क है, यदि ईश्वर है तो यह अन्याय और अव्यवस्था क्यों? यदि वह ईश है और दयालु है तो किसी को कोई दुख होना ही नहीं चाहिये। तर्क श्रंखला बढ़ती जाती है और अन्ततः जगत में व्याप्त समस्त दोषो...कार्बेट म्यूजियम और कार्बेट फालइस यात्रा वृत्तान्त को शुरू से पढने के लिये यहां क्लिक करें। 23 मार्च 2012 और मैं था हल्द्वानी में। आज सबसे पहले मुझे कालाढूंगी जाना था। कालाढूंगी के बारे में उस समय जाने से पहले मेरी जानकारी बस इतनी ही थी ...वो जो हममें तुममें क़रार थाकहते हैं पतिदेव कि मुझे बेचैन रहने की बीमारी है। आराम ही नहीं देती ख़ुद को, और यही वजह है कि सेहत अक्सर नासाज़ हो जाया करती है। किताब पढ़ो, गाने सुनो, टीवी देखो, आराम करो। तुम्हें कैसी बेचैनी है ये? सही ही...

तीन दशक और वह, जो शेष है!वह, जो शेष है!”* *श्री राजेश उत्साही* की कविताओं का प्रथम संकलन है. *ज्योतिपर्ब प्रकाशन* द्वारा प्रकाशित इस पुस्तक का विमोचन अंतर्राष्ट्रीय पुस्तक मेला – २०१२ में प्रगति मैदान, नई दिल्ली में हुआ. इस कवि...मैख़ाने में दो जासूस1975 में आई थी ये फ़िल्म जिसमें एक्स जुबली कुमार राजेंद्र कुमार और हिन्दी सिनेमा के इटर्नल शो मैन राजकपूर स्थायी स्थूलावस्था को प्राप्त होने के बावजूद मुख्य भूमिकाओं में थे । ये वही साल था जब शोले भी रिली...स्क्रीचिंग हाल्टमेरे आज में क्यूँ चले आते हो? बोलो ? कितना ही मना करूँ फिर भी चले ही आते हो? इस तरह तुम्हारा आना चाहें वो यादों में हो.. या फिर ख़्वाबों ,ख्यालों में मेरी ज़िंदगी को .... ................... स्क्रीचिंग हाल्ट...

वार्ता को देते हैं विराम, मिलते हैं एक ब्रेक के बाद राम राम ...............

शुक्रवार, 13 अप्रैल 2012

लाख सताओ, नहीं मरूंगा/ इस पंकज में जान बहुत है..... : ब्लॉग4वार्ता,ललित शर्मा

ललित शर्मा का नमस्कार, बैसाखी का त्यौहार भारत के पंजाब, हरियाणा और हिमाचल के किसानों द्वारा सर्दियों की फसल काट लेने के बाद नए साल की खुशियों के जैसे मनाया जाता हैं। वैसाखी त्यौहार का नामकरण वैशाख के महीने पर रखा गया है। बैसाखी पंजाब और आसपास के प्रदेशों का सबसे बड़ा त्योहार है। यह खरीफ की फसल के पकने की खुशी का प्रतीक है। इसी दिन, 13 अप्रैल 1699 को दसवें गुरु गोविंदसिंहजी ने खालसा पंथ की स्थापना की थी। सिख इस त्योहार को सामूहिक जन्मदिवस के रूप में मनाते हैं। सभी पाठकों को बैसाखी एवं खालसा पंथ स्थापना दिवस की हार्दिक बधाईयाँ एवं शुभकामनाएं………अब चलते हैं आज की वार्ता पर… प्रस्तुत हैं कुछ लिंक ब्लॉग जगत से……

लाख सताओ, नहीं मरूंगा/ इस पंकज में जान बहुत है..... - *माना के धनवान बहुत है* *इसका उसे गुमान बहुत है* * नम्र बनो ऐ प्यारे भाई * *जान गए के ज्ञान बहुत है* * किसको जा कर शीश झुकाएँ * * भीतर का भगवान् बहुत है* * झ... मंगल पर निस दिन मंगल हो और चाँद पर हो इक आशियां! - यह सचमुच हैरान करने वाली बात है कि हमारे आदि पूर्वजों ने भी कभी अन्तरिक्ष में एक शहर बसाने का सपना देखा था ....इस बारे में मय दानव और उसके द्वारा बसाए ग... भाव संप्रेषित करने की क्षमता हर प्राणी में होती है। - *यदि ध्यान से पशु-पक्षियों, कीट-पतंगों के कार्य-कलाप को देखा जाए तो बहुत सारे आश्चर्यजनक तथ्य सामने आते हैं। यदि इनकी आवाजों पर ध्यान दिया जाए तो साफ पता ... 

जब चाहा इस्तेमाल किया जब चाहा फ़ेंक दिया वाह! - * * *जब चाहा इस्तेमाल किया जब चाहा फ़ेंक दिया। क्या है यह सब? मै समझ नही पाती हूँ। जब भी किसी ने पुरूष के खिलाफ़ एक शब्द भी लिखा, उसका विरोध किया गया। स्त... अब आचमन को गंगा कहाँ से लाऊँ? - पानी ठहर गया है शायद बहना भूल गया है तभी तो अब इसमें हिलोरें नही उठतीं कहीं काई तो नही जम गयी अब आचमन को गंगा कहाँ से लाऊँ? गिफ्ट वाली पायल-2 - *पिछले भाग से आगे... * गली में मुड़ते ही उन्हें झुग्गी के आगे तीन चार जन खड़े दिखाई दिये और बेटी के रोने की आवाज़ सुनाई देने लगी। दोनों के कदम तेज हो गये।...

हाल-ए-मुफलिसी ... - कभी इस पार, तो कभी उस पार बता आखिर तेरी रज़ा क्या है ? ... 'उदय' कहता है, जख्मों को छिपा के रखना यारो जो भी देखेगा, कुरेद कर चला जाएगा ! ... हाल-ए-मुफल... दोस्ती - आजकल इंडियन आइडल का एक विज्ञापन आ रहा है जिसमे एक कालेज का लड़का खुद शर्त लगा कर हारता है किसी ओर लडके की आर्थिक मदद के लिए. वैसे तो टी वी पर कई विज्ञाप...वृद्ध लोगों को वर्तमान में जीने के बजाय अतीत में जीने की आदत सी हो जाती है। - है तो यह वैशाख का महीना किन्तु दोपहर में घर से बाहर निकलने पर लगता है कि यह वैशाख नहीं बल्कि ज्येष्ठ माह है जिसमें ग्रीष्म अपनी चरमावस्था में होती है और गर... 

शिल्प और पेंटिंग के विलक्षण कलाकार जेराम पटेल - श्वेत-श्याम रंगों से अपनी कलाकृतियों को एक विशिष्ट पहचान देने वाले विख्यात कलाकार जेराम पटेल का जन्म 1930 में सोजित्र, गुजरात में हुआ। आपने सर जे. जे. स्...  सब कुछ कहने के लिए...... - सब कुछ कहने के लिए नहीं होता, सब कुछ लिखने के लिए नहीं होता, सब कुछ पढने के लिए नहीं होता...... कुछ समझने-सोचने, कुछ सहने-भोगने, कुछ महसूस करने के लिए होता ...क्यों कहते हो फिर बेटियों को लक्ष्मी...खुशदीप - कब बदलेगी संस्कारवान होने का दावा करने वाले इस देश की सोच ..... बेबी फलक ने दिल्ली के एम्स में15 मार्च को दम तोड़ा, दो साल की फलक को 18 जनवरी को बड़े ..

प्रेम कहानी से सुप्रीम कोर्ट के फैसले तक - एक लड़का व लड़की कहीं पैदल जा रहे थे। तभी लड़के की टांग पत्‍थर से टकराई और रक्‍त बहने लगा, लड़के ने मदद की आस लगाते हुए लड़की की तरफ देखा कि शायद वह अपना ... सब कुछ कहने के लिए...... - सब कुछ कहने के लिए नहीं होता, सब कुछ लिखने के लिए नहीं होता, सब कुछ पढने के लिए नहीं होता...... कुछ समझने-सोचने, कुछ सहने-भोगने, कुछ महसूस करने के लिए होता ... वृद्ध लोगों को वर्तमान में जीने के बजाय अतीत में जीने की आदत सी हो जाती है। - है तो यह वैशाख का महीना किन्तु दोपहर में घर से बाहर निकलने पर लगता है कि यह वैशाख नहीं बल्कि ज्येष्ठ माह है जिसमें ग्रीष्म अपनी चरमावस्था में होती है और गर... 

जानवर - ** ** ** ** image courtesy : narnia movie *** * *अक्सर शहर के जंगलों में ; मुझे जानवर नज़र आतें है ! इंसा... आदत........(मतला और एक शेर) - किसी की मौत पर बहाने के लिए, दो आंसू कहाँ से लाऊं मैं। मुझको तो आंसूओं को पीने की , आदत जो पड़ गयी हैं । आजकल मेरी मुस्कराहटें भी, मुझसे नाराज़ ह...कहीं ऐसा न हो .... - कहीं ऐसा न हो .... अत्युक्ति में सुन्दरतम सत्यों का कुरूपतम उपयोग अदम्य अभियान न हो जाए अतुष्टि से भाग्य के ढाँचे में अकर्मण्यता ढलकर सतत अनुष्ठान न हो जा... 

मानव तू मानव तो बन ले - अपने अन्दर झाँक ले मानव, तब तो कुछ कर पाएगा, मानव तू मानव तो बन ले, तब तू सबको भाएगां सबका खून लाल है बन्दे, जटिल प्रश्न तो नहीं है ये, सबका स्वामी एक है बन.. ओस से कोमल एहसास ... जीवन की गहराईयों में डूबने लगा जब मन ... टूटने क्यों लगे ... नयनो के प्यारे सपन ... जैसे तेज़ धूप से कुम्हलाने लगा हो ... कोमल पुष्प का तन ...!! करती हूँ कोशिश .. बंद कर लूं नयन ... ढलकने न दूं उन्ह...

विषैली जाति

कुतिया ने जने
छ: बच्चे
एक को खा गयी
पाँच बचे
उन्हें दो महीने
दूध पिलाया
बड़ा किया
अब वे मोहल्ले में
शान से घुमते हैं
घर घर डोलते हैं

वार्ता को देते हैं विराम, मिलते हैं ब्रेक के बाद राम राम ----

गुरुवार, 12 अप्रैल 2012

प्रिया हो तुम रंगरेजन सी...........ब्लॉग4वार्ता -- ललित शर्मा

ललित शर्मा का नमस्कार, इंडोनेशिया के सुमात्रा में आए भूकम्प के झटकों  की धमक भारत में भी महसूस की गयी। बस्तर के सुदूर इलाके में भी धरती 3 मिनट तक हिलते रही। जगदलपुर से 14 किलोमीटर दूर डिमरापाल में  नवनिर्मित मेडिकल कॉलेज में मजदूरों ने 3 मिनट तक कम्पन महसूस किया। मजदूरों जब इसकी जानकारी साईट इंजीनियर को दी, तब काम बंद करके सभी मजदूरों को बाहर निकाला गया। किसी जान माल की हानि होने की सूचना नहीं है। प्रस्तुत हैं कुछ फ़टाफ़ट लिंक ब्लॉग नगरिया से…………

उगना... - ' न...अब सांस लेने की कोई गुंजाइश नहीं बची. जीने का जी नहीं करता कि अब सीने में कोई ख्वाहिश नहीं उगती...न ख्वाब आते हैं नींद के गांव में... जीवन अब सहा न... सावधान इंटरनेट पर सीआईए आपकी जासूसी कर रहा है - * कल तक इंटरनेट परआनंद और स्‍वाधीनता के दि‍न थे। अब खतरा सामने आ गया है। अमेरि‍की गुप्‍तचर संस्‍थासीआईए ने अपने पैर इंटरनेट पर रख दि‍ए हैं। सीआईए की नजर... देवेन्द्र कुमार पाठक' का एक ग्रीष्म-गीत - तीन पात ढाक के - ~ ¤ ~ ¤ ~ ¤ ~ तीन पात ढाक के - - - - - - अंधड़ हम तपते बैसाख के. वर्षोँ की इस लंबी जाग का, सारे ऋण-योग, गुणा-भाग का; हासिल, बस तीन पात ढाक के ! दिन-दुपहर,... 

सिगरेट और तेरी याद - तुम्हारी याद.... सिगरेट के धुंए सी... कपड़ों ,बालों,उँगलियों तक बस जाने वाली...है . रग-रग में दौडती है जानलेवा ज़हर सी हरेक आती-जाती सांस के साथ अंदर उतर...आज तुम्हारा अस्तित्व प्रश्नचिन्ह बन गया है ? - कभी कभी लगता है तुम भी एक छलावा हो -कान्हा नहीं है तुम्हारा कोई अस्तित्व ये सिर्फ हमने ही तुम्हें एक रूप दिया है तुम्हारा एक वर्चस्व कायम किया है वरना... हे सीता - सीता तुम थी शक्ति फिर क्यों दी अग्निपरीक्षा यदि न रहती मौन तब तुम बच जाती फिर कितनी सीता वन वन भटकी थी तुम पतिव्रत धर्म निभाने को कठिन समय में त्याग...

 कार्यरत इंजन की आवाज - इंजन शक्ति का प्रतीक है, इंजन विकास की अभिव्यक्ति का प्रतीक है, इंजन गतिमयता का स्रोत है, इंजन विज्ञान के दंभ से ओतप्रोत है। इंजन को जब भी देखता हूँ तो अभ... ---कहीं ऐसा न हो .... - कहीं ऐसा न हो .... अत्युक्ति में सुन्दरतम सत्यों का कुरूपतम उपयोग अदम्य अभियान न हो जाए अतुष्टि से भाग्य के ढाँचे में अकर्मण्यता ढलकर सतत अनुष्ठान न हो जा... प्रिया हो तुम तो रंगरेजन सी..तुमको पत्थर रंगना आता !! - मेरी अनकही बातो को तुम्हे समझते देखा है.......!!! - *मेरी हर आहट पर तुम्हे ठहरते देखा है..... * *मेरी धडकनों के साथ,* *तुम्हारी धडकनों को धड़कते देखा है....* *सबसे नजरे बचा कर,* *छु... 

छत्तीसगढ़ी - बोली और भाषा में क्या फर्क है, लगभग वही जो लोक और शास्त्र में है। भाषा के लिए लिपि और व्याकरण अनिवार्य मान लिया जाता है, लेकिन जरूरी नहीं कि वह पृथक लिपि ह...  जी हां ! आज है मेरा जन्मदिन ... - जी हां ! आज मेरा जन्मदिन है। सोचा तो था कि धूमधाम से जन्मदिन मनाऊंगा, खूब हंगामा बरपाऊंगा, कोशिश करुंगा कि पूरा परिवार मेरी इस खुशी में शिरकत करे, क्योंकि... बेघर अरमान - ● बेघर अरमान ● अरमानों का क्या है जी....... वो तो होते ही हैं बाजारों के खैरख्वाह...... इन्हें हावी न होने दो दिल पर........ उनका बेघर होना फिर वक्ती रस्... 

समन्दरों के उधर से कोई सदा आयी ..... - "कहीं रहे वो मगर खैरियत के साथ रहे उठाये हाथ तो लब पर यही दुआ आयी ..." - परवीन शाकिर मैं अकेला भला था .... - दोस्तों दर्द-ए-दिल का पैमाना जब छलकता है तो जज्बातों की बरात कुछ यूँ शोर करती है... ज़रा गौर फरमाइयेगा .... प्यार के बदले में खरीदा उसने और मुझे हासिल समझ... अखबारों का छपना देखा - मुस्कानों में बात कहो चाहे दिन या रात कहो चाल चलो शतरंजी ऐसी शह दे कर के मात कहो जो कहते हैं राम नहीं उनको समझो काम नहीं याद कहाँ भूखे लोगों को उनका कोई नाम...

आगरा- बरेली पैसेंजर ट्रेन यात्रा - इस यात्रा वृत्तान्त को शुरू से पढने के लिये यहां क्लिक करें। 21 मार्च 2012 को मैं आगरा में रितेश जी के घर पर था। वे एक ब्लॉगर हैं और यात्रा वृत्तान्त लिखते ... निवेशकों के लिए अच्‍छी खबर .. शेयर बाजार की स्थिति में सुधार होना चाहिए !! - 9 अप्रैल 2012 को इस हफ्ते के पहले कारोबारी दिन में एशियाई बाजारों में जारी मुनाफावसूली के असर से भारतीय शेयर बाजारों में गिरावट दे्खने को मिला। लगभग डेढ मह...खूँखार कुत्तों के खिलाफ - अक्सर डरती हैं औरतें धकेलती हैं खुद को दूर वे खुद ही हटती हैं पीछे लेकिन अब परवाह नहीं है अब औरत ये जानती है सिंहासन केवल पुरुष का नहीं वह भी लड़ रही ह...   

वार्ता को देते हैं विराम, मिलते हैं ब्रेक के बाद राम राम तब तक इधर पढिए

बुधवार, 11 अप्रैल 2012

बहुत संभल कर 'आना' बिटिया .. ब्‍लॉग4वार्ता .. संगीता पुरी

आप सबों को संगीता पुरी का नमस्‍कार , स्वाइन फ्लू का खतरा अब राजधानी दिल्ली तक आ चुका है। यहां डॉक्टरों ने अब तक 6 लोगों को स्वाइन फ्लू का शिकार पाया है। हालात से निपटने के लिए दिल्ली सरकार ने राज्य में हाई अलर्ट जारी कर दिया है। पूरे देश भर से 300 से ज्यादा स्वाइन फ्लू के मामले आए हैं और 21 लोगों की मौत हो चुकी है। स्वाइन फ्लू के मरीज सबसे ज्यादा महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, राजस्थान और तमिलनाडु में सामने आए हैं। शुरुआत में एक साधारण बीमारी के रूप में दिखने वाला स्वाइन फ्लू मरीज कुछ ही घंटों में गंभीर हालत में पहुँच जाता है| इसलिए अगर आपके आस पास किसी को बुखार या सर्दी जैसी बीमारी है तो अन्यथा न ले क्योंकि यह स्वाइन फ्लू भी हो सकता है| स्वाइन फ्लू का सबसे शुरूआती मामला मैक्सिको में सामने आया था तब से लेकर अब तक लगभग सौ देशों में इस संक्रमण ने लोगों को अपनी चपेट में ले लिया है|स्वाइन फ़्लू के लक्षण आम फ़्लू से मिलते जुलते हैं इसलिए इसकी पहचान खून की जाँच से ही संभव है| वैसे बुखार, गले मे खराश, जुकाम, खाँसी, सिर व बदन में दर्द, जोड़ों में जकड़न, उल्टी, बेहोशी, ठंड लगना, सांस लेने में दिक्कत जैसी बातें इसके मुख्य लक्षण हैं|यह संक्रमण भीड़भाड़ वाली जगहों में बहुत आसानी से फैलता है|

ऐसे कर सकते हैं बचाव

डॉक्‍टरों का मानना है कि स्वाइन फ्लू से बचने का सबसे अच्छा तरीका स्वच्छता के नियमों का पालन करना है| भीड़-भाड़ वाली जगहों या सार्वजनिक स्थानों पर जाने से बचें, खांसते या छींकते समय मुंह और नाक को रूमाल या कपड़े से ढंकें| फ्ल़ू प्रभावित व्यक्ति से दूरी बनाकर रखें और सार्वजनिक स्थानों पर जाने पर तीनस्तरीय मास्क का उपयोग करें| इससे बचने के कुछ प्रमुख उपाय इस प्रकार हैं-

1. बाहर निकलते समय हमेशा मुँह और नाक ढक कर रखें, खासकर तब जब कोई छींक रहा हो|
2. हर बार हाथ धोना बहुत जरूरी है|
3. अगर लगे की तबीयत ठीक नहीं है तो घर पर ही रहें| ऐसी स्थिति में काम या स्कूल पर जाना उचित नहीं होगा और जहां तक हो सके भीड़ से दूर रहना फायदेमंद साबित होगा|
4. सांस लेने में तकलीफ महसूस होने, अचानक चक्कर आने या उल्टी जैसे हालात में फ़ौरन डॉक्टर के पास जाना जरूरी है| इस महत्‍वपूर्ण जानकारी के बाद चलिए आज की वार्ता पर ...

नित नित प्रभु का ध्यान धरो .. किसी और की अराधना की जरूरत नहीं पडेगी !!
तसल्ली ... .. से करो तो हर काम आसान है !! 
मानव तू मानव तो बन ले - बस सोच और व्‍यवहार बदल ले !!
ममता एक खूबसूरत एहसास .. कुछ भी नहीं ले सकती है इसकी जगह !!
नन्ही कली.. .. आसमान से भाग्‍यशालियों के आंगन में उतरी !!
गिफ्ट वाली पायल .. पहन करती है कुछ अधिक ही छनन छनन !!
टूटकर प्यार करना सबका नसीब नहीं .. तुम खुशनसीब हो !!

"झूठ आजाद है, सत्य परतन्त्र है" .. ऐसा ही है इस देश का हाल !!
रहस्य .. खुलने के बाद भी रहस्‍य ही बना होता है !!
सहरा से दिन...अंधे कुएं सी रातें .. में भी जीवन जीना होता है !!
भय और अधिक भय .. में भला जीवन जीया जा सकता है !!
खूँखार कुत्तों के खिलाफ .. कुछ कदम तो उठाने ही होंगे !!
बहुत संभल कर 'आना' बिटिया .. बहुत बिगड गयी है दुनिया !!
बिस्कुट में गाय और सूअर का मांस .. ये तो हद ही हो गयी !!
कीचड़ में धेला कौन फेंके ??? .. खुद को छींटे से बचाकर फेकना ही होगा !!
कहीं ऐसा न हो .... हम सोए रहें , सबकुछ लुट जाए !!

अब लेते हैं एक ब्रेक .. मिलते हैं अगली वार्ता में !!

मंगलवार, 10 अप्रैल 2012

दीवारें नहीं, पुल चाहिए... ब्लॉग4वार्ता....संध्या शर्मा

संध्या शर्मा का नमस्कार...कन्या को जन्म से पूर्व मार डालने की कुप्रवृत्ति को रोकने के लिए समाज के दृष्टिकोण को बदलने की जरुरत है. कुछ दिन पूर्व नागपुर में कचरे के ढेर में ३ कन्या भ्रूण मिले. ऐसे ही दृश्य हर शहर हर गाँव में देखे जाते हैं.जबकि सभी जगह "बेटी बचाओ अभियान" चलाये जा रहे हैं. आखिर इन आंदोलनों की जरुरत क्यों पड़ती है, जबकि होना यह चाहिए कि नारी को "देवी" उपमा से सम्मानित करने कि परंपरा वाले इस देश में कन्या जन्म पर खुशियाँ मनाई जाये. आवश्यकता है कि हम अपने मन से उस संकुचित मानसिकता को ही जड़ से उखाड़ फेंके, जो परिवार में कन्या के जन्म का विरोध करती है, तभी हम उसे गर्व से "कन्या-रत्न "  कह सकेंगे...
लीजिये अब प्रस्तुत है आज कि वार्ता कुछ चुनिंदा लिंक्स के साथ....   

दीवारें नहीं, पुल चाहिए
मानव सभ्यता के विकास में दीवारों और पुलों की बहुत महती भूमिका है . उसने अपने आश्रय के लिए दीवारों का निर्माण किया और खुद को सुरक्षित महसूस किया , और पुलों का निर्माण कर उसने एक सीमा से दूसरी सीमा में प्रव...

नित नित प्रभु का ध्यान धरो
इस भजन को लिखकर तो मैं खुद में तीरथ महसूस ही कर रही थी .... सजीव सारथी जी के माध्यम से यह आदित्य विक्रम जी तक पहुंचा और आज आदित्य जी द्वारा कम्पोज़ किये इस गीत को उनकी ही आवाज़ में सुनकर मेरे रोम रोम ने...

जिंदगी को भरपूर जिया है
मैंने जिंदगी को कई कोणों से देखा है हर कोण है विशिष्ट हर रंग निराला है | होता जीने का अंदाज गहराई लिए तो कभी अहसास केवल सतहीपन का दे जाता बहुत कुछ जो होता दूर हर व्यक्ति की पहुँच से | दीखता उस रस...

कशिश
प्यासी धरा .. जान कर भी वो अनजान है . वो इस कदर बेईमान है . मजा लेते है , किसी के रुसवाइयों का . और कहते है , कि. हम तुम्हारे कदरदान है,.. नाता न कोई उनसे , बस जरा सी .. जान-पहचान है .. वो ठहरे .बहता...

कुछ मुक्तक .
*1.तुम्हारे जाने से गुलशन तो न खाली होगा * *पर एक फूल डाली से जुदा होगा * *महकेंगी गलियाँ तुम्हारी भी * *पर तुम्हारी साँसों का ज़िक्र यहाँ होगा* * * *2.गुनगुनाने से गाने का सबब बनता है * *खो जाने से पाने क...

बड़ी मुश्किल है यूँ रिश्ता निभाना ...
किसी को उम्र भर सर पर बिठाना बड़ी मुश्किल है यूँ रिश्ता निभाना हज़ारों ठोकरें मारीं हो जिसने उसी पत्थर को सीने से लगाना मेरे गीतों में खुद को पाओगे तुम कभी तन्हाई में सुनना सुनाना बड़ी म...

चाटुकारिता का तर्पण 
जिसकी आत्मा मरी होती है उसके विरुद्ध कोई समाज परिवार नहीं होता बल्कि सभी मरी आत्मा के साथ चलने लगते हैं चाटुकारिता का तर्पण अर्पण करते हैं - रश्मि प्रभा

दिल्ली कि तरफ ...
ऐसे ही नहीं आग लगाते रहे हैं लोग, जलने का सलीका भी सिखाते रहे हैं लोग | थोड़ी बहुत तो मेरी फिकर भी रही उन्हें, अपने तमाम फ़र्ज़ निभाते रहे हैं लोग | ये करना, ये न करना, नेकी बदी कि राह, हर पाठ तसल्...

सिलसिला-ए-जिंदगी
और फिर कृष्ण ने अर्जुन से कहा :- न कोई भाई, न बेटा, न भतीजा, न गुरु एक ही शक्ल उभरती है हर आईने में आत्मा मरती नहीं, जिस्म बदल लेती है  धड़कन इस सीने की जा छुपती है उस सीने में,  जिस्म लेते हैं जन्म...

आखिर इस दिल को क्या कहिये...
एक रोज़ हो जाता है हर कोई नाउम्मीद और बचा हुआ ऐतबार खो जाता है. हालाँकि सब पहले से ही जानते हैं कि किसी दिन यह दोस्तों को सुनाने लायक, एक किस्सा भर रह जायेगा कि किस तरह बोरियत भरे दिनों को इश्क़ विश्क क...

हम पहले ही मारे जा चुके हैं....
हम पहले ही मारे जा चुके हैं.... सारा कच्चा माल पड़ा है वहाँ अस्तित्त्व के गर्भ में.... जो जैसा चाहे निर्माण करे निज जीवन का ! महाभारत का युद्ध पहले ही लड़ा जा चुका है अब हमारी बारी है... वहाँ सब कुछ है ! थम...

रीत सी रही मोरी प्रीत ....!!
सुर के पीछे पीछे चलना .... सुर साधना .... बने अगर मन की यही आराधना ... बहुत कठिन है ये अर्चना ... ....!! सांस तो चलती है न ....?आस आज भी जागी- जागी सी है .... है ,पर कहीं कुछ भाव में फर्क है .... कभी अपना...

कार्टून :- आओ शांति‍ वार्ता का खेल खेलें
काजल कुमार Kajal Kumar at Kajal Kumar's Cartoons काजल कुमार के कार्टून

किसी भी आईडी को डिलीट करने का बेहतरीन तरीका
मेरे पास ऐसे बहुत से लोगो की मेल आती है जो मुझ से पूछते है कि फेसबुक कि आईडी या जीमेल कि आईडी को केसे डिलीट करते है उनका जवाब मैं मेल से ही दे देता हु अब वो ही तरीका मैं आज मैं आपको बताने वाला हु कि कैसे ...
 
*आग से गुज़रा हुआ हूँ, और भी निखरा हुआ हूँ। उम्र भर के अनुभवों के, बोझ से दुहरा हुआ हूँ। देख लो तस्वीर मेरी, वक़्त ज्यों ठहरा हुआ हूँ। बेबसी बाहर न झाँके, लाज का पहरा हुआ हूँ। आज बचपन के अधूरे, * *ख़्वा...
 
* * मन रे ! तू भागे क्यों ? क्यूँ भागे इन गलियन में- जो उलझी सी हैं आपस में गाँठ भी पड़ती जाती है सुलझाने की कोशिश में आखिर क्या पायेगा भटकन में.......... क्यूँ भागे...मन क्यूँ भागे... ...
 
दोस्तों दर्द-ए-दिल का पैमाना जब छलकता है तो जज्बातों की बरात कुछ यूँ शोर करती है... ज़रा गौर फरमाइयेगा .... प्यार के बदले में खरीदा उसने और मुझे हासिल समझ लिया.. पलकों पे चले आये है अश्क मुसाफिर बन कर.. ......
 
अब लेते हैं आपसे विदा मिलते हैं, अगली वार्ता में, चलते-चलते यहाँ देखें... नमस्कार.......

सोमवार, 9 अप्रैल 2012

कविताएं और देउरपारा की रामेश्‍वरी .. ब्‍लॉग4वार्ता .. संगीता पुरी

भावों और विचारों को अभिव्‍यक्ति देने के लिए साहित्‍य की एक महत्‍वपूर्ण विधा काव्य है। भाव और विचार प्रधान कविता का सीधा सम्बन्ध हृदय से होता है। कविता में कही गई बात का असर तेज और स्थायी होता है।  कवि की दृष्टि से समाज को नवीन दृष्टिकोण से विचार करना आता है और जगत के रहस्यों का नया अर्थ बोध होता है।   बुद्धि और कल्पना के योग से कवि बड़ी सरलता से बड़ी-बड़ी बातें कह देता है , हर युग में कवि अपनी कविता के माध्यम से सत्य के ही दर्शन कराता आ रहा है। कविता में निहित नीति व उपदेश सुनने वाले के पूरे जीवन को बदलने की सामर्थ्य रखते हैं। दर्शन आध्यात्म्य, प्रकृति और सूक्ष्म संवेदनाऍं कविता के माध्यम से बड़ी सरलता से समझाई जा सकती हैं। हिंदी ब्‍लोगर भी काव्य के माध्‍यम से अपने भावों और विचारों को अभिव्‍यक्ति देते आ रहे हैं , ब्‍लोगरों के द्वारा आज पोस्‍ट की गयी कुछ सुंदर कविताओं के लिंक प्रस्‍तुत है  ....
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उन्हें ख़ुशी दे दो-
प्रतीक्षा में अधर सूखे ,
उन्हें हंसी दे दो -
*
वलय अभिशप्त तिरोहित हो ,
सुयश ,सम्मान के सागर ,
वरण शुभ का नियोजित हो ,
मिले सुधा भरी गागर-
चराचर मांगता है ,स्नेह से 
भरी अंजुरी दे दो-

अमावसी, बेजान मूर्तियाँ,
समय के प्रवाह में,
कब की,
विसर्जित हो चुकीं हैं,
फिर भी... 
मेरे पीछे-पीछे,
क्यों लक्ष्यहीन सी,
ये धीरे-धीरे, 
डग भरतीं हैं ?

देखना तुझको बंदगी मेरी ,
 तुझको खो खो के मैंने पाया है
 अब मिटी जा के तिश्नगी मेरी ...
 यूँ सहेजा है इक अनाम सा कुछ ,
 के जैसे आब-ए-शब गुलों पे हो ,
ना लगे धूप इस जहां की ...

दोस्त जितने भी मिलेरंगीन थे 
कुछ न कुछ तो था मगर 
जाने न तुम
कनखियों की राह 
पहचाने न तुम 
रास्ते में जो मिले
ग़मगीन थेजो भी मिले संगी सभी 
नमकीन थे

खुदा ये मुहोब्बत के गम क्यूँ दे दिए..
मैं अकेला भला था इस संसार में
तूने तन्हाइयों के सागर क्यूँ दे दिए...

मैं तो हँसता था फाके मस्ती में भी..
बे-रब्त उम्मीदों के सैलाब क्यूं दे दिए..
आरज़ू ना की जिसने शब्-ए-महताब की,
उसे खुद पे रोने के सिलसिले क्यूं दे दिए..

खिल उठी है ज़िन्दगी फिर, जो अंधेरा छा गया।।

आइने में शक्ल देखी, फिर जवां लगने लगा,
लो हवा का एक झोंका, चेहरा ये सहला गया।।

हौसला है कूद करके, यह समन्दर तैर लूँ,
बाजुओं में अब कहाँ से फिर वही दम आ गया।।

भूख खुलकर लग रही है, अंतड़ियां चलने लगीं,
बन्द था जो मर्तबानों में गिज़ा सब खा गया।।

नज़रों को 
फूल हरसिंगार के |
तुमने 
कुछ बोल दिया 
चर्चे हैं प्यार के |


मौसम का 
रंग -रूप 
और अधिक निखरा है ,
सैलानी 
मन मेरा 
आसपास बिखरा है ,
आज 
मिला कोई 
बिन चिट्ठी ,बिन तार के |

कटोरा सामने रखकर 
नुक्कड़ पर बैठी
कभी भी बूढी
न होने वाली
बुढिया

और
बरसो से
फुटपाथ पर
चाय और सिगरेट
बेचती
असमय ही
बूढी होती
बुढिया
मानो ,
अकर्मण्य सरकार का
लम्बा खोखला जीवन

ना लगाओ
मैंने तो नहीं चाहा
उसकी तमन्ना बनूँ
मैंने तो सिर्फ चाहा था
वो तन्हा ना रहे
तन्हाई में अश्क ना
बहाए
रो रो कर झील सी
नीली आँखों की
ख़ूबसूरती ना खो दे
मैंने तो चाहा तो
वो मायूस ना रहे
मायूसी में
जिंदा रहने की ख्वाइश
ना छोड़ दे


रहते हुए भी

मैं बेखबर हूँ

सलाखों के अंदर की
इस दुनिया से
बिलकुल वैसे ही
जैसे
रंगबिरंगी मछलियाँ
मस्त रहती हैं 
एक्वेरियम की
दीवारों के चारों ओर।

जीवन में अन्धकार
शून्य सी हो जाती हूँ
मिटाने को अकेलापन
लगाती हूँ
हम प्याले, हम निवाले,
हम साये, हम शक्ल से
कुछ अंक,
शून्य से पहले
और हमेशा ही घटती
और विभजित होती हूँ
सम संख्याओं की तरह
कुछ इस तरह की
कुछ भी बचा नहीं पाती अपने लिए

मयपान कर रही हैं , रंगीन तितलियाँ.
क्या बात है , बाजार बड़े सूनसान हैं
सजने लगी हैं आजकल श्मशान की गलियाँ.
बरसात अपने साथ लिये, बाढ़ आ गई
जो बच गया,उस पे गिरीं आज बिजलियाँ.
बागों में बड़ी शान से, हैं खार हँस रहे
खिलने को तरसती हैं मासूम-सी कलियाँ.

अहसास मानो खाली पड़ी हवेली की तरह है
लगता है ज़ख्म आज भी थोडा तो हरा है
लफ्जो में बयां होती किसी पहेली की तरह है
चाहत कभी जो इस कदर बरसी हो किसी पर
चांदनी में तू खिलती हुई चमेली की तरह है
कोशिश बीते वक़्त की पूरी रही मगर
हर दिन तेरा ख्याल नई नवेली की तरह है

मजबूरों से काम न लो
वक्त का पहिया घूम रहा है
व्यर्थ कोई इल्जाम न लो

धर्म, जगत - श्रृंगार है
पर कुछ का व्यापार है
धर्म सामने पर पीछे में
मचा हुआ व्यभिचार है
अब लेती हूं एक ब्रेक .. मिलती हूं अगली वार्ता में ..
तबतक मिलिए  .. देऊर पारा की रामेश्वरी से 

रविवार, 8 अप्रैल 2012

इहै ब्लॉग नगरिया तू देख बबुआ -------- ब्लॉग4वार्ता --- ललित शर्मा

ललित शर्मा का नमस्कार,  ब्लॉग4वार्ता के टिप्पणी बाक्स पर स्पष्ट लिखा है कि -टिप्पणी में किसी भी तरह का लिंक न लगाएं। लिंक लगाने पर आपकी टिप्पणी हटा दी जाएगी। -- तब भी कुछ लोगों को यह लिखा दिखाई नहीं देता। जब हम खुद ही पोस्ट के लिंक दे रहे हैं तो टिप्पणी में फ़ालतु लिंक लगाने की क्या आवश्यकता है, अगर आपके ब्लाग पर किसी को जाना होगा तो वह आपकी प्रोफ़ाईल से चला जाएगा ब्लॉग पर। एक बार फ़िर से कर बद्ध निवेदन है कि टिप्पणी में लिंक न लगाएं अन्यथा टिप्पणी हटा दी जाएगी…… अब चलते हैं ब्लॉग4वार्ता पर और सैर करते हैं ब्लाग नगरिया  की……

जापान देशस्य तोक्यो नगरे वसन्त काले एकदा  तोक्यो में इन दिनों साकुरा यानि चैरी-पुष्पों की बहार पूरे शबाब पे है । बमुश्किल दस दिन जीने वाले इस फूल को लेकर जापानियों की दीवानगी ला-जवाब कर जाती है । सदियों से इन्हीं दिनों ये फूल खिलता है , खिल के ...अपने पसंदीदा रंग से जानिए अपना भाग्‍य ....रंग हमारे मन और मस्तिष्‍क को काफी प्रभावित करते हैं। कोई खास रंग हमारी खुशी को बढा देता है तो कोई हमें कष्‍ट देने वाला भी होता है। जिस तरह यदि हम प्रकृति के निकट हों , तो खुद को फायदा पहुंचाने वाले वस्‍तुओ...एक काला कव्वा !मुंडेर पर बैठा आज फिर एक काला कव्वा ! चौकस ! कभी इधर ! कभी उधर ! गर्दन को घुमाता हुआ .. काऊं ! कांउ !! कांउ !!! यु चिल्ला रहा था मानो सबको खबरदार कर रहा हो --- *"मैं आ गया हूँ "* मैं आ गया हूँ " *काऊं...

परीक्षानुरागीपरीक्षा पुस्तिकाओं में , सूखे ,अश्रुजल , बिंधा हुआ दृदय,पिस्तौल का भूगोल , विवसता ,पश्चाताप ,या निर्लज्जता ! नहीं मालूम ... परीक्षक पढ़ता है उत्तर ! जो उत्तरपुस्तिका में लिखे गए , सर ! प्रार्थना है !उत्ती...मंजर ...टुच्चों लुच्चों चोर-उचक्कों के घर रोज खूब खिचड़ी पक रही है 'उदय' ! और अच्छे-सच्चों के घर अक्सर कभी रोजे, तो कभी उपवास के हैं बहानों के मंजर !! मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के नाम पत्रश्री अखिलेश यादव जी माननीय मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश सरकार लखनऊ। विषय: चिन्मयानंद के दबाव के कारण शाहजहाँपुर पुलिस से न्याय न मिलने के संबंध में महोदय, निवेदन है कि प्रार्थिनी उच्च शिक्षा प्राप्त जागरूक ...

एक चुनौती हैं वी.के. सिंहसत्तारुढ़ दल के सामने सेना प्रमुख वी. के. सिंह एक चुनौती के रूप में उभरे हैं। सरकार को यह समझ में नहीं आ रहा है कि आखिर सिंह के साथ किस प्रकार का सलूक किया जाए? इस मामले को दबाने के लिए स...अनकहातुम्हारे कहने * *मेरे सुनने के बीच * * * *जो था अनकहा * * * *कह दिया * *तुम्हारी ख़ामोशी ने * * * *कि अब लफ़्जों की जरुरत नहीं हमें ....* * * * * * ...रिश्तों का सचकौन कहता है कि.. हो जाता है एक नज़र में प्यार दो दिल न जाने कब एक साथ धड़कने लगते हैं... तोड़ लायेंगे चाँद सितारे और बिछा देंगे फलक क़दमों के नीचे ऐसे सिरफिरे वायदे भी कसमों की जुबान होते हैं, पर सब खो जाता ...

या कुरसी अरु पावरवा पर...या कुरसी अरु पावरवा पर न्याय सदाशय सब तजि डारौं। वोटर को ललचाय रिझाय के जब तब आपन काम निकारौं॥ पावरवा को पावत ही मतदाताओं को ततकाल बिसारौं। लूट खसोट धन पाउँ उसे स्विस बैंक जमा करि भाग सवारौं॥ सुरक्षा कंपनियों की आड़चंद लाइसेंसी सुरक्षा कंपनियों की आड़ में सैकड़ों सुरक्षा एजेंसियां काम कर रही हैं। एजेंसियों के पास न तो शासन की मान्यता है और न ही प्रशिक्षित सुरक्षाकर्मी। बावजूद इसके वह शासन की नाक के नीचे धड़ल्ले से कं...दिल में यही तमन्ना है सारी दुनिया की सैर करूँसंस्कार पत्रिका ने इस कविता को अप्रैल'१२ के 'पर्यटन विशेषांक' में [भारत पर केन्द्रित करते हुए] छापा है। देश-गाँव-शहरों-कस्बों से अनुभव का हर पृष्ठ भरूँ दिल में यही तमन्ना है सारी दुनिया की सैर करूँ स...

हैप्‍पी अभिनंदन में रविश कुमारहैप्‍पी अभिनंदन* में इस बार आपको एनडीटीवी के रिपोर्टर से एंकर तक हर किरदार में ढल जाने वाले गम्‍भीर व मजाकिया मिजाज के* रवीश कुमार* से मिलवाने की कोशिश कर रहा हूं, इस बार हैप्‍पी अभिनंदन में सवाल जवाब नह...क्या वो आपको मंजूर होगा ??सच पूछा जाए तो, ब्लॉग लिखना आत्मसंतुष्टि का परिचायक है, हम आत्मिक ख़ुशी के लिए ब्लॉग लिखते हैं, कुछ हद तक, ये हमारे अहम् को भी तुष्ट करता है, कुछ अलग सा करने की  प्रेरणा भी देता है,  जैसा हर जगह देखने को मिल...यात्रापुनः नमस्कार ! आज ही मैं यात्रा से लौटी हूँ पूरे सत्रह दिन बाद घर आकर व आप सभी से मुखातिब होकर अच्छा लग रहा है. यात्रा में ही लिखी कुछ पंक्तियाँ प्रस्तुत हैं, धीरे-धीरे और भी बहुत कुछ जो कहने से रह गया है व ...

आप सब दोस्तों की क्या राय हैं ?आप सब दोस्तों की क्या राय हैं ...... आज अभी फेसबुक के माध्यम से ........खामोशी ...बहुत कुछ कहती हैं...(http://ab8oct.blogspot.in/2012/04/blog-post_07.html...............ब्लॉग) पर जाने का मौका मिला ..वहाँ...मौत को क़रीब से देखना हो तो ''टाइटैनिक'' देखिए... मौत को क़रीब से देखना हो तो 'टाइटैनिक' देखिए। थ्रीडी चश्मे से और करीब दिखती है मौत। एकदम माथे को चूमती हुई। सौ साल पुराना एक हादसा। हादसा क्या पूरा का पूरा प्रलय ही। पिछली बार जब टाइटैनिक देखी थी तो स्कू...नकल का सिद्धांतनकल एक सार्वभौमिक परिकल्पना है। प्रकृति के हर अंग में कूट कूट कर भरी है यह प्रवृत्ति। सारी संततियाँ आकार प्रकार में अपने पूर्वजों की शतप्रतिशत नकल ही होती हैं। नित नयी मौलिकता कहाँ से लाये प्रकृति, 

वार्ता को देते हैं विराम, मिलते हैं ब्रेक के बाद राम राम

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