गुरुवार, 21 जून 2012

एक सैलानी की कलम से... ब्लॉग4वार्ता....संध्या शर्मा

संध्या शर्मा का नमस्कार... देश बदहाल है फिर भी 55 करोड़ का दान दिया जा रहा है, एक तरफ जहाँ भारतीय अर्थव्यवस्था संकट के दौर से गुजर रही है , पैसों की तंगी विकास में बाधा बन रही है, बावजूद इसके भारत ब्रिक्स सम्मलेन में पैसा लुटाने से बाज नहीं आ रहा है. इतने पैसों की मदद से भारतीय अर्थव्यवस्था को काफी मजबूत किया जा सकता था. इसे कहते है, दिखावे की दुनिया अपने भूखे हैं और दे रहे हैं दान. आइये कुछ देर के लिए ये सब भुला कर चलते है अपने ब्लॉग जगत की सैर पर. एक नए ब्लॉग का स्वागत कीजिए, अब प्रस्तुत हैं वार्ता में कुछ पोस्ट लिंक्स, आशा है आपको पसंद आएगें....

सखी बरखा ग्रीष्म की भीषण गर्मी में जब मन क्लांत हो जाता है जब तृषित धरती तुम्हारी प्रतीक्षा में पलक पावडे बिछाये बैठी रहती है तब याद आ जाते हैं - जीवन के विभिन्न पड़ावों पर - तुम्हारे साथ बिताये वे पल .....तुम्हारी पहली मौसमी आहट  जानते हो एक अरसा हुआ तुम्हारे आने की आहट सुने यूँ तो पदचाप पहचानती हूँ मैं बिना सुने भी जान जाती हूँ मैं मगर मेरी मोहब्बत कब पदचापों की मोहताज हुई जब तुम सोचते हो ना आने की मिलने की मेरे...अदाएँ ... - खुदा जानता है या फिर तुम, गहराई प्यार की वर्ना, सुनते तो यही हैं कि बहुत डूबते डूबते बचे हैं ? ... अब तू खामों-खां इल्जाम मत लगा आँखों से, छेड़-छाड...

अभिशप्त स्त्री ...! - एक आदिवासी युवा आखेटक योद्धा अपनी पत्नी और मां के साथ सागर तट की ओर आकर रहने लगा ! उन दिनों गर्मियां बेहद सख्त थीं और मछलियों ने किनारों पर आना छोड़ दिया थ... ज़िन्दगी एएम से पीएम के बीच झूल रही - 1 ठीक छह एएम पर अलार्म की आवाज के साथ उठ जाता हू रोजाना, जागने की कोशिश करता हू अधमुन्दी आंखे ढूढ लेती है यंत्रवत ब्रश मंजन और अखबार, साढे आठ ... आम गिरने से ... - आम पकने के * दिनों मन बेचैन रहता है . खोजी आँखें बागान में रेंगती ....दुखती हैं .* *अँधेरे-उजाले... पेड़ से आम गिरने की आवाज़ कानों को भरती रहती है .... 

 तुम्हारे जाने के बाद ! - तुम्हारे जाते ही खुश हुआ था मैं अब न कोई रोकेगा,न टोकेगा, सब कुछ हमारे हाथ में होगा हमारे काम पर भी नज़र कोई नहीं रखेगा | तुम्हारे बिना कुछ दिन बड़ा अच्छा ... मूड अनुसार - मेरा मन होता है कि तुमसे मिलने का ,इश्क करने का यह फैसला, हम दोनों ... अपने घर की दीवार पे टंगे इस कैलेण्डर को देख कर न तय करें . महीना,तारीख ,मौसम ये कौन... ( rashifal ) कैसा रहेगा आपके लिए 19 , 20 और 21 जून 2012 का दिन ?? - मेष लग्नवालों के लिए 19 , 20 और 21 जून 2012 को भाई , बहन , बंधु बांधवों का महत्व बढेगा , प्रभावशाली लोगों से संबंध की मजबूती बनेगी। कुछ झंझटों को सुलझाने... 

श्रीमद्भगवद्गीता-भाव पद्यानुवाद (१६वीं-कड़ी) - तृतीय अध्याय (कर्म-योग - ३.२५-३५) अविद्वान व्यक्ति हे भारत! होकर आसक्त कर्म हैं करते. अनासक्त लोक संग्रह को विद्वत जन हैं कर्म वो करते. अज्ञानी आसक्त क... प्रधानमंत्री और सरकार बनाना बिगाडना छोडो,समाचार दिखाओ समाचार.आप लोगो के एक्ज़िट पोल का हाल जनता कई बार देख चुकीहै. - सुत न कपास जुलाहो में लट्ठम लट्ठा नही तलवार-भाला-बरछा-बंदूक-गोला-बारूद बम,सब कुछ हो रहा है.प्रधानमंत्री अभी बनना नही है.और प्रधानमंत्री चुनती है सबसे बडी प... .निर्मल बाबा केवल एक नहीं है : अन्तर सोहिल - इंदु आहूजा, लाल किताब वाले गुरूदेव और अन्य बहुत सारे ज्योतिष बताने और यंत्र बेचने वाले टीवी चैनलों के जरिये धर्मांध जनता को शोषित कर रहे हैं। कई बार तो लगत... 

उत्तरकाशी और नेहरू पर्वतारोहण संस्थान - इस यात्रा वृत्तान्त को शुरू से पढने के लिये यहां क्लिक करें। 6 जून 2012 की शाम तक हम उत्तरकाशी पहुंच गये थे। लगातार बारह घण्टे हो गये थे हमें बाइक पर बैठे ब... मानसिक विकलांगता से कहीं बेहतर है,शारीरिक विकलांगता - सत्यमेव जयते प्रोग्राम में जब differently able (जब अंग्रेजी में disable शब्द की जगह इस शब्द का प्रयोग होने लगा है तो हमें भी हिंदी में 'विकलांग' की जगह मनसर की ओर यायावर ------------- ललित शर्मा - अयोध्या का ददुवा राजा महल जीवन चलने का नाम, चलते रहो जब तक हो प्राण। चलना ही जीवित रहने का परिचायक है, ठहरना मुर्दा होने के समान। रमता जोगी और बहता दरया, द... 

अब लेते हैं विदा मिलते हैं अगली वार्ता में नमस्कार  .....

बुधवार, 20 जून 2012

मनसर और अमरनाथ के हिम कपोत --- ब्लॉग4वार्ता …… ललित शर्मा

ललित शर्मा का नमस्कार, काव्य का कोई भरोसा नहीं कि कब उमड़ आए। कभी सोते-सोते तो कभी भागते-भागते। काव्य का उमड़ना ऐसी ही चीज है। वाल्मीकि से क्रौंच पक्षी का दर्द नहीं देखा गया और काव्य का सोता उमड़ पड़ा, रामायण लिखी गयी। कभी कभी विकट स्थिति में भी काव्य उमड़ पड़ता है। शरद कोकास - नीन्द न आने की स्थिति में लिखी कविता  का पांचवा भाग पोस्ट कर रहे हैं। वे कहते है - नीन्द के बारे में कहीं कोई लिखित नियम नहीं होता । कभी ऐसा भी होता है कि बेहद थके होने के बावज़ूद नीन्द नहीं आती और कभी ऐसा भी होता है कि दिनभर सोते रहने के बावज़ूद भी नीन्द आ जाती है । दर्शन कौर जी ने नैनीताल यात्रा को हनुमान की पूंछ  की तरह लम्बा खींच दिया। अब आई  है नैनीताल  पढिए जब नीलकंठ बोलें ,मुंडमाल हिले-डोलेगिरिबाला देख चौंक चौंक जाये, लगे एक-एक मुंड,किसी कथा का प्रसंग लिये भेद कुछ समाये है छिपाये . बार-बार कोई बात भूले सपन की सी याद मन- दुआरे की कुंडी बजाये , कभी लागे..

लक्ष्यशिक्षण एक कला है किंतु यह कला जन्म जात गुणो से युक्त गुरू सहज ढंग से कर लेता है दूसरी ओर अव्यस्थित चीजों, पाठय वस्तुओं, पाठयक्रमों को निर्धारित नियमानुसार विधि सम्मत समय पर पूर्ण कर पाना कहा सम्भव बन पड़त...योग भूल गए बाबा रामदेव ! पहले तो आज का सबसे बड़ा सवाल ये कि रामदेव हैं क्या ? सन्यासी हैं, योगगुरु हैं, आयुर्वेदाचार्य हैं, व्यापारी हैं, उद्यमी हैं आखिर क्या हैं रामदेव ?वैसे आमतौर पर लोग इस सवाल का एक ही जवाब देंगे कि वो योगगुर...ये बरसात की बीमारियाँपिछले वर्ष मैंने बरसात में कीड़ों के काट लेने से होने वाली परेशानियों और व्याधियों के उपचार के बारे में लिखा था .इस साल की बरसात में आप ये जानें कि तमाम बरसाती बीमारियों से अपने शरीर की रक्षा कैसे करनी ह..

‘क्रांति की मां’ तवक्कुल करमानयमन एक इस्लामिक देश है जहां पर्दा प्रथा का कड़ाई से पालन कराया जाता है। स्त्रियों को घर से बाहर निकलने की मनाही है। विवशता में ही वे घर से बाहर निकलें,** **यही उनसे अपेक्षा की जाती है।...मानसिक विकलांगता से कहीं बेहतर है,शारीरिक विकलांगतासत्यमेव जयते प्रोग्राम में जब differently able (जब अंग्रेजी में disable शब्द की जगह इस शब्द का प्रयोग होने लगा है तो हमें भी हिंदी में 'विकलांग' की जगह किसी दूसरे उपयुक्त शब्द की खोज और उसका प्रयोग शुरू क...मदद चाहिए हमको..अच्छा लगता है, देखना अपने नाम के आगे 'डॉ' लिखा, ज़रा वजनी हो जाता है नाम और सामने वाला चार बार सोचता है, आपसे बोलने से पहिले, लेकिन हमरी ऐसी तकदीर कहाँ, नहीं कर पाए न पी.एच.डी. फिर हमरे जैसे जाने कितने हैं, ...

मनसर की ओर यायावरअयोध्या का ददुवा राजा महल जीवन चलने का नाम, चलते रहो जब तक हो प्राण। चलना ही जीवित रहने का परिचायक है, ठहरना मुर्दा होने के समान। रमता जोगी और बहता दरया, दोनो ही उत्तम होते हैं। साधू रमता रहे तो दाग लगे न...बरखा कब आऊं? बरखा ने पूछा जब इच्छा हो मैंने कहा कितना भी भीगो सूखी ही रहोगी वह मुस्कुराकर बोली तु...दो पति- दो राष्ट्रपतिदेखिये साहब, ऐसे तो हमारा राष्ट्रपति पद से कुछ खास लेना नही है। देना नही भी चाहे, तो भी सरकार हियां उहां टैक्स लगा कर वसूल ही लेती है। लेकिन इन दिनो हम बड़े चिंतित है कि राष्ट्रपति कौन बनेगा। हम इसे बात ...मेरी संगिनी ......!मन का हठ दिल की है तड़प रूठी कलम . 2)कहाँ से लाऊं विचारो का प्रवाह शब्द है ग़ुम. 3)कैसे मनाऊं कागज कलम को हाथ से छुठे . 4)मेरी संगिनी कलम तलवार पक्की सहेली 5) प्यासा मन साहित्य की अगन ज्ञानपिपासा . 6...

वार्ता को देते  हैं विराम, बिजली रानी की आँख मिचौली के बीच वार्ता समय पर नहीं लग पाई। वर्तमान में तीन चीज महत्वपूर्ण हो गयी है मनुष्य की जीवन 1- गैस का सिलेंडर 2- बिजली रानी 3- राजा नल। इनके बिना सब सून। मिलते हैं एक ब्रेक के बाद, तब लीजिए लेट लतीफ़ वार्ता का आनंद

मंगलवार, 19 जून 2012

तुम हँसो... कि चाँद मुस्कुराये...ब्लॉग4वार्ता....संध्या शर्मा

संध्या शर्मा का नमस्कार... फ़ेसबुक पर अमित श्रीवास्तव जी ने बड़े मार्के की बात कही, आपसे बांटना चाहूंगी …कार के साइलेंसर से पानी की बूंद जो टपके ,संकेत है: इंजन अपना काम कर रहा है,ए.सी.के आउट लेट से पानी की बूंद जो टपके,संकेत है: ए.सी.अपना काम कर रहा है, उनको याद करते करते आँखों से बूंद जो टपके संकेत है:दिल अपना काम कर रहा है| बात पते की है। प्रस्तुत हैं वार्ता में कुछ पोस्ट लिंक्स, आशा है पाठकों को पसंद आएगें....

तपती जून में..चिलचिलाती धूप चुभती गर्मी तन मन की प्यास बढाए. जलती आँखें चुभती साँसें पपड़ाये होठ बहता घाम तेज वारा पवन भी भरमाए. जलती धरा पे पड़ी जो बूंद भाप बन उड़ जाए पथिक को मिले न चैन उमस तो घिर -घिर आए. बरसो हे ,इन...हमें का हानि?बाबूलाल फिटर बिना नागा रोज सुबह साढ़े नौ बजे राधे की पान की दुकान पर पहुँच जाता है। तब पान की दुकान खुली ही होती है। वह पान की दुकान के आरंभिक कामों में राधे की मदद करता है। राधे उसे चाय पिलाता ह...वेश्या उद्धारक शक्ल जानी पहचानी क्यों लगती है ? * *दूर है तो पास इतनी क्यों लगती है?* * लिख चुके हैं कई, इसे पढ़ चुके कई, हर गज़ल, मेरी कहानी क्यों लगती है ? * =========== " मैं तुमसे एक बिनती करना चाहता हू...

वह जो छुप-छुप कर एकांत ढूंढने के लिए छुपनाबचपन-आलोक  धन्वा  क्या किसी को पता हैकि कौन-सा बचपनसिर्फ उसका बचपन हैउतने बच्चों के साथमैं भी एक बच्चाक्या किसी को पता हैकि बचपन की बेला बीत गईवे जो पीले नींबू के रंग के सूर्यास्तजो नानी को याद करोतो मामी भी...सीवरेज पर सियासत कब तकशहर में बारिश से निपटने की तैयारी कैसी है, इस बात का अहसास उन लोगों को बखूबी हो गया होगा, जो रविवार को मामूली बूंदाबांदी से ही हलकान हो उठे। यकीनन इस बार की बारिश बिलासपुर पर बहुत भारी पड़ने वा... मेरे गीत का लोक समर्पण  16 जून लगभग ५:३० सायं हिन्दी के प्रख्यात हस्ताक्षर डॉ राजेंद्र अग्रवाल जी, डॉ योगेन्द्र दत्त शर्मा , डॉ भारतेंदु मिश्र जी, श्री अशोक गुप्ता ,एवं प्रोफ़ेसर डॉ अम्बरीश सक्सेना, जिन्हें देश में मीडिया गुरु...

एक रागिनी है मस्ती कीएक रागिनी है मस्ती की एक ही धुन बजती धड़कन में एक ही राग बसा कण-कण में, एक ही मंजिल, एक ही रस्ता एक ही प्यास शेष जीवन में ! एक ही धुन वह निज हस्ती की एक रागिनी है मस्ती की, एक पुकार सुनाई दे...धइलें रही हमके भर अंकवरीया..तन्मय ने कुछ लोगों को अपनी बर्थ पर कब्जा किये देखा तो पूछ बैठा,- "भाई साब, आप लोगों का टिकट" ? "टिकस तो है लेकिन वेटिन्न में है, क्या करें हम तीन महीना पहले से टिकस निकाले लेकिन तब्बौ कन्फम नहीं ...खूब लड़ी मर्दानी ...झाँसी की रानी सिंहासन हिल उठे राजवंशों ने भृकुटी तानी थी, बूढ़े भारत में आई फिर से नयी जवानी थी, गुमी हुई आज़ादी की कीमत सबने पहचानी थी, दूर फिरंगी को करने की सबने मन में ठानी थी। चमक उठी सन सत्त...

साथ तेरा मेरादिखे जब रंग इन्द्रधनुष के कुछ स्वप्न भूले बिसरे याद आए दे के दर्द गए वह पवन के झोंके भी जब हौले से वह यूं छु जाए चुभी दिल में कोई फाँस सी जब कोयल कुहू कुहू गाए हर बीता मौसम दे याद तुम्हारी पर गुजरा वक्त क...एक अफवाहएक अफवाह थी कि वो बदलना चाहते हैं, आगे की गलत राह से संभालना चाहते हैं, अब तक जो, आँखों से आँशू बहा रहे थे, हांथों से वही गालों को मलना चाहते हैं, मकसद था पाल रखा मेरी जान लेना, वो दुश्मन दोस्ती में, ढलना ...सुनो !मैं पढ़ रहा हूँ तुम्हे ...सुनो ! तुमसे बात करना कविता लिखने जैसा है ..बेहद नाजुक बातें होती है तुमसे ...बातें नाजुक हां ...इन गुलाबी होंठो से खुदा ना करे कोई और बातें हो ..तो मैं कह रहा था तुमसे बात करना .....तुम्हारी उंगलिया अनज...

तुम हँसो......तुम हँसो..... कि चाँद मुस्कुराये, तुम हँसो..... कि आसमान गाये. खुशबुयें फूल से उड़के कलियों पे आये, पत्तों पे शबनम की बूँदें नहाये, कलियों के दामन में जुगनू चमक लें, नज़्मों की चौखट पे लम्हे ठहर लें, खिड...करे कोई भरे कोई ...आज कुछ भी शुरू करने से पहले ही बता दूँ, इस पोस्ट को पढ़ने के बाद हो सकता है मेरी कुछ महिला ब्लॉगर दोस्तों को बुरा लगे मगर जो मुझे लगा जो मैंने महसूस किया वही मैंने लिखा। कमाल की बात है ना, आज के ज़माने ...शरीर...इश्क़...ज़िन्दगीआँखों से बरसते ये शोले वहशत के नहीं, मेहनत के हैं. इन्हें तेरी ज़ुल्फ़ों की नर्म छाँव नहीं ठंडा-काला अँधेरा चाहिए. हर साँस में आती है सुलगते बारूद की बू. इन्हें तेरे लम्स की नहीं, गीली मिट्टी की ख़ुश्बू चा.


लॉफिंग .....बुद्धा नहीं...पुलिस ..पुलिस कहीं भी हो हमेशा ही डरावनी सी होती है .इस नाम से ही दहशत का सा एहसास होता है .पुलिस नाम के साथ ही सख्त, क्रूर, डरावना, भ्रष्ट, ताक़तवर, असंवेदनशील और भी ना जाने कितनी ही ऐसी उपमाएं स्वंम ही दिमाग म..कलाम को मुसलमान बना दिया नेताओं ने *दे*श के जाने माने वैज्ञानिक और पूर्व राष्ट्रपति ए पी जे अबुल कलाम को इन नेताओं ने मुसलमान बनाकर रख दिया है। देश ही नहीं दुनिया कलाम साहब की योग्यता का लोहा मानती है। उनकी काबिलियत के आधार पर ही वो 2002 म...हमारे मौननि: शब्द हूँ मैं तुम्हारे मौन को पालती हूँ पोसती हूँ और जब होता है मौन मुखरित तो हतप्रभ सी रह जाती हूँ , हमारी सोचें कितनी भी हों विरोधाभासी फिर भी कभी "हम" के वजूद से नहीं टकरातीं जब तुम्ह..

कुछ अनकहा सा कुछ झूठ* * * * * *कुछ झूठ बतलाने के लिए होते हैं.............* *कुछ झूठ छुपाने के लिए होते हैं.............* *कुछ झूठ दिखाने के लिए होते हैं.............* *कुछ झूठ **सुनाने ** के लिए होते हैं..कथाकार अरुण प्रकाश को विनम्र श्रद्धांजलि!कुछ देर पहले सूचना मिली कि कथाकार अरुण प्रकाश का लम्बी बीमारी के बाद दिल्ली के पटेल चेस्ट हास्पिटल में निधन हो गया है. इस समाचार से दुखी हूँ! मेरी एक बार मुलाक़ात हुई थी अरुण प्रकाश जी से. २००५ में. साहित...सत्रह जून सन बयालीसहमारे रचना संसार ने युद्ध के कठोर यथार्थों के बीच भी कोमल रूमानियत के लिये जगह की तलाश की और उन्हें सहेज कर रखा। अंगरेजी में बनी फिल्म 'समर ऑफ़ ४२' और हिन्दी में प्रकाशित कहानी 'उसने कहा था' दो ऐसी रचनात्...

दीजिये इजाजत. मिलते हैं अगली वार्ता में नमस्कार......

सोमवार, 18 जून 2012

संडे सन्नाट , खबरें झन्नाट ... ... ब्‍लॉग4वार्ता .. .... संगीता पुरी

  • आप सबों को संगीता पुरी का नमस्‍कार,  फादर्स डे के उपलक्ष्‍य में रविवार को पूरा इंटरनेट मानो पिता के लिए प्‍यार में डूब गया। इंटरनेट पर लोगों ने अपनी भावनाओं को खुलकर रखा। खास बात यह है कि फादर्स डे पर बाप-बेटे से ज्‍यादा बाप-बेटी के रिश्‍ते पर लोगों ने शुभकामनाओं भरे कमेंट किये।इंटरनेट पर अपलोड की गई ज्‍यादातर तस्‍वीरों में पिता-पुत्री को दर्शाया गया। भारत के परिप्रेक्ष्‍य में देखें तो यह जरूरी भी है, क्‍योंकि हमारे देश में कन्‍या भ्रूण हत्‍या के लिए पुरुष भी जिम्‍मेदार हैं। ब्‍लॉग जगत में भी पितृ दिवस पर कई रचनाएं देखने को मिली , उन्‍हें और अन्‍य महत्‍वपूर्ण लिंकों को संजोया गया है आज की वार्ता में .....

    फादर्स डे स्पेशल --- - आज सुनिये लोरी अली के ब्लॉग ----------*आवारगी *से ---------- *फादर्स डे स्पेशल ----* * * ** * * * वत्सल और पल्लवी पापा के साथ ( 1988)* * * एक विडियो ये भी...बाबा की बिटिया - मैं अपने बाबा की दुलारी बेटी हूँ मेरी आधी उम्र गुज़र गयी, मगर उनके लिए अब भी छोटी हूँ... बचपन से थामी उँगलियाँ अब भी थाम रखी हैं... पहले पकड़ उनकी थी... .दिल की बातें- फादर्स डे पर एक बाप की मज़बूरी * *एक दिन एक रोजगार बाप , अपने बेरोजगार बेटे की किसी बात पर खुश हो गया | और अनजाने में अपनी उम्र उसको लग जाने का , आशीर्वाद हैप्पी फादर'स डे ... पा ... कार्तिक ... - आज फादर'स डे है ... मैं इस बहस में नहीं पड़ता कि यह रस्म देशी है या विदेशी ... मुझे यह पसंद है ! आज मैं खुद एक पिता हूँ और जानता हूँ एक पिता होना कैसा लगत...ऐ बाबुल - * * ** * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * *बाबुल मोहे रहने दे * *अपनी प्यारी बिटिया ही * *मत तोड़ मुझे डाली से * *खिलने दे अपनी बगिया ही …….* *बे...

    बाबू जी ... - शहर में ... धूप में ... अब मेरा बसेरा है ! न छाँव है ... न गाँव है ... जब से - चले गए हैं बाबू जी !! पापा, आपसे माफ़ी मांगता ही रहूँगा... - भले ही मैं इस तरह के ख़ास दिनों में कोई यकीन नहीं रखता, मेरे लिए पापा की बातें करने के लिए कोई एक दिन काफी नहीं हो सकता... लेकिन जब आस पास सब...पितृ प्रेम को शब्द नहीं है - (पितृ दिवस पर अपनी एक पुरानी रचना दुबारा पोस्ट कर रहा हूँ) गीत लिखे माँ की ममता पर, प्यार पिता का किसने देखा, माँ के आंसू सबने देखे, दर्द पिता का क...बस ऐसे ही तो थे मेरे बाबूजी - कोई ऐसा रिश्ता होता है कोई ऐसा नाता होता है जो बिछड़ कर भी ना बिछड़ता है बस यादों में टीसता रहता है आँख नम कर जाता है वो स्नेह दुलार तड़पाता है निस्वार्थ .

    त्वदीय पाद पंकजम नमामि देवी नर्मदे ... - विगत दो तीन माहों के दौरान संयोग से धार्मिक स्थानों का भ्रमण करने के खूब मौके मिले . इस दौरान मैं मथुरा, वृन्दावन, हरिद्वार, देहरादून, मसूरी सपरिवार घूमने ... यमुनोत्री की यादे - ब्लागर सथियों आज अपनी यात्रा का संचिप्त विवरण प्रतुत कर रही हूँ ...... हम चार परिवार थे जिन्होंने एक साथ इस यात्रा का प्लान बनाया था ...जिनमे आठ बड़े और पाँ...कुछ जानी पहचानी , कुछ अंजानी , पर्वतों की रानी --- मसूरी . - दिल्ली से करीब पौने तीन सौ और देहरादून से २५ किलोमीटर की लगातार चढ़ाई के बाद आती है *क्वीन ऑफ़ हिल्स ( पर्वतों की रानी ) मसूरी*. यहाँ पहली बार


    जनजाति समाज और जनसंचार माध्यम पर तीन दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी 18से - *देश भर से जुटेंगें आदिवासी चिंतक, विचारक और सामाजिक कार्यकर्ता*** *भोपाल,17 जून।* माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय की ओर से 18 जून से... स्त्री हिंसा और सत्यमेव जयते - सत्यमेव जयते के 17 जून के एपिसोड में स्त्री हिंसा पर आमिर खान ने अलग-अलग घटनाओं, त्रासदी झेलने वाली स्त्रियों और उनमें से कुछेक के आत्मविश्वास पर बात की ..सबरिया - छत्तीसगढ़ के रायगढ़-बिलासपुर अंचल के निवासी ''सबरिया'' वस्तुतः कौन है? ठीक-ठीक कोई नहीं जानता। नृतत्वशास्त्री, न समाजशास्त्री, न शासकीय विभाग और न रेत मजदूर को देखते हुए - पंकज मिश्र - फेसबुक पर कभी-कभी बहुत अच्‍छी कविताएं मिल जाती हैं। अशोक कुमार पांडेय के सौजन्‍य से यह कविता अभी मिली...जिसे अनुनाद पर लगा देने का लोभ मैं संवरण नहीं कर प...
     
  • गज़ल - *तुम्हारी याद मे आंसू आंखों से छलकते हैं,*** *सावन के बारिश ज्यूं मेघों से बरसते हैं।*** *तुम जो गये तो बस दिल ही टूट गया,*** *वो जिगर कहाँ से लाऊँ जो पत्थ..देस बटुरा रेलवई के डिब्बे में - बमचक-7 - Disclaimer : बमचक सीरीज़ में कुछ शब्द अश्लील, गाली-गलौज वाले, अपठनीय भी हो सकते हैं, अत: पाठकों के अपने विवेक पर है कि बमचक सीरीज़ पढ़ें या नहीं। 5TH Pillar Corruption Killer- " खिलाडी पिंकी " निकला " पिन्का " ?? गयी नौकरी ! प्यारे मित्रो , नमस्कार !! इस कलयुग में हर रोज़ हैरान कर देने वाली ख़बरें आ ही जाती हैं ! जैसे ही मैंने ये...प्रेम-वरदान - माना कि हर समय पलड़े का झुका काँटा है और दैविक सुअवसरों ने केवल दुःख ही दुःख बाँटा है.... पर सच देखा जाए तो हीरे ने ही हीरे को काटा है चाहे जितना भी खींचता ...
     
    .रेल और बिजली बचत - उत्तर रेलवे के मुरादाबाद मंडल द्वारा जिस तरह से बिजली बचाने के लिए पुणे की एक कंपनी के साथ मिलकर एक सफल प्रयोग किया है उससे रेलवे जैसे बड़े उपभोक्त... फिर अधूरा हो गया हूँ... - सियासत और मज़हब का सा रिश्ता हो गया हूँ... बड़ी जद्दोजहद के बाद इंसां हो गया हूँ... मुझे सिर पर चढ़ाया, डूबने को फेंक आए... मैं पत्थर का कोई बेबस, खुदा सा..तेरे भीगे बदन की खुशबू से - साहेब खम्मा घणी, मेरा ध्यान दरवाज़े की ओर गया. जाने कितनी ही दावतों में मेहदी हसन, ग़ुलाम अली और नुसरत फ़तेह अली खान जैसे साहेबान की ग़ज़लों को बखूबी ग... इक हसीं शाम के संग्………पुस्तक विमोचन की एक झलक - सतीश सक्सैना जी की पुस्तक "मेरे गीत" के विमोचन की कुछ झलकियाँ सतीश जी के लिये सरप्राइज़ पैकेट आखिर हमने भी धरना दे ही दिया सतीश सक्सैना जी...



     अपने कंप्यूटर के शुरू होने की आवाज बदलिए - आप अगर चाहते हैं की आपका कंप्यूटर शुरू होते हुए विंडोज की Startup धुन की बजाये आपकी पसंद का संगीत सुनाये ये अब बहुत आसानी से संभव हो सकता है । एक छोटे से ....प्रदूषण ही प्रदूषण - आजकल देश के हर भाग में भीषण गर्मी पड़ रही है . मौसम विज्ञान विभाग हर दिन तापमान बढ़ने के आंकड़े जारी करता है , और साथ में यह भी चेतावनी देता है कि आने वाल... वही आदिम टोटके उपाय - रिसता आषाढ़ आतप स्वेद ग्रंथियों से, निहारता है अनिल ठिठक भीग चिपके वस्त्रों को। समय ठहरता है आँख सलवटें उभरती हैं, बादल उतरते हैं वदन पर बन आब बेचैन बारिशे...सदालाल सिंह (पटना १३) - उस दिन शाम को जब मैं चाय पीने गया तो बीरेंदर उर्फ बैरीकूल फोन पर बात करता हुआ कुछ चिंतित सा दिखा. मैंने पुछा – ‘क्या हुआ बिरेंदर? सब ठीक है?’ ‘हाँ भई...
     आखिर मैं क्या कर पाऊंगा उनके बिना? - युवा भारत का स्वागत- आलोक  धन्वा युवा नागरिकों सेभारत का अहसासज्यादा होता हैजिस ओर भी उठती हैमेरी निगाहसड़कें, रेलें, बसें,चायखाने और फुटपाथलड़के और लड़कियों...मेरा हासिल हो तुम ! - *तुम गए कहीं नहीं ,रूह में शामिल हो तुम,* *सुर में हो,हर साज में,दर्द में शामिल हो तुम ||* * * *हर ख़ुशी तुमसे मिली,गम को हमने कम किया,* *हर भटकती ...संडे सन्नाट , खबरें झन्नाट ......... - * * * * * * * * * * *हम बांचते हैं अखबार अब , और रखते हैं अपना व्यूज़ , अरे मारिए गोली टीभी को , सुनिए टटका न्यूज़ (ई पेपर टीभी बाला सब त असलका बात गोल न कर...
     
    अब लेती हूं विदा .. मिलती हूं अगली वार्ता में ...

रविवार, 17 जून 2012

पेसल फ़ुरसती वार्ता: ये तो बड़ा टोईंग है ---- ब्लॉग4वार्ता ---- ललित शर्मा

ललित शर्मा का नमस्कार, आज रविवार है, होगी फ़ुरसतिया वार्ता, हम फ़ुरसत से लिख रहे हैं, पाठक भी फ़ुरसत से बांचे। फ़ुरसत में होना भी गजब का जज्बा है। चचा छक्कन कभी फ़ुरसत में नहीं होते। जब भी कोई काम कहो तो कहते हैं कि फ़ुरसत में नहीं हैं। जबकि लोगों ने कभी उन्हे एक चने की दो दाल करते नहीं देता। देखा है तो दिन में पाँच बार लोटा परेड करते हुए। दिन भर भैंस के जैसे पान चबाते हैं और जुगाली करते हैं। किस्मत भी उन्होने माशा अल्ला पाई है। जब तक उनके बच्चे जवान हुए तब तक बाप की कमाई खाई मजे से बैठकर। जब बाप मर गया तो बच्चे कमाने लग गए। मतलब चचा की उमर यूँ ही निकल गयी लोटा परेड में। लेकिन फ़ुरसत कभी नहीं पाई। एक दिन टहलते टहलते दुनिया से भी टहल गए, पर मजाल है उन्हे फ़ुरसत मिली हो। हम फ़ुल्ल फ़ुरसत में हैं। इसलिए आज प्रस्तुत है फ़ुरसती वार्ता……… प्रस्तुत है कुछ उम्दा लिंक
नीरज जाट चिल्ला में, इब चिल्ला तो दे :)
अन्ना स्वामी ने फ़ुरसत में राष्ट्रपति पद के लिए दावा ठोंक दिया है, जब बिल्लियों में विवाद हो तो फ़ैसला करने वाले बंदर की मौज हो जाती है। अन्ना स्वामी कहते हैं कोई मुझे राष्‍ट्रपति बना दे, फिर मेरी चाल  हमने इन्हे तथास्तु कह दिया। हमारा व्होट पक्का जानिए, पर मानिए  नहीं। क्या भरोसा मतपेटी तक पहुंचते-पहुंचते स्वतन्त्र देवता के विचार बदल जाएं। पद के मायने तो तब है जो गर्मी में भी दें सर्दी का अहसास -- करा दे। ठंडा ठंडा कूल कूल, बाकी सब जाओ भूल भूल। क्योंकि कई दिनों से शिकायत नहीं ज़माने से..., शिकायत हो भी तो क्या करें। शिकायत लेकर कहाँ जाईएगे, अपने गम घर में अंगीठी पर चढाईएगा, मंहगाई का जमाना है पकाईएगा, खाईएगा, ए अग्‍नि प्यार की सुलगाईएगा। प्यार भी बड़ा टोईंग है। जब चाहो तब हाजिर हो जाता है कारगिल के फ़ौजी की तरह।

कल रात कारे मतवारे घुँघरारे बदरवा घनघोर बरसे, अखबारों ने सुबह कहा प्री-मानसून है, हमने कहा श्रीमानसुन है। श्रीमान कहाँ सुने? फ़ुरसत हो तब न सुनें। जब बादल गरजें, बिजलियाँ कड़कने लगे, तब मुझे बहुत डर लगता है। बादलों की गड़गड़ाहट से धड़कने बढ जाती है, तब खामोश दिल की सुगबुगाहट होती है, एक बार गले से लगा लेना.. एक बार काहे जी, गला तो आपका  ही है, जब चाहे तब लग जाईए, छाती भी अंग्रेजों के जमाने के  जेलर जैसी है, परिंदा  भी पर नहीं मार सकता। आपके  लिए ही रिजर्व रखी हैयादों की खुरचनें, खुरचिए और हल्के हल्के दर्द का मजा लीजिए। आकाश से बरसते शोलों की दहशत में प्रतीक्षा थी मानसून की चंद बूंदों की। दम तोड़ती धरती को भी जरुरत है प्राण वर्षा की। शायद पड़ती हुई मानसूनी फ़ूहारें, अबकि बार प्राण बचाने में कामयाब हो जाएं क्योंकि ये आभासी दुनिया  है, यहाँ संबंधों की कोई कदर नहीं।

वैसे तो हम अरसे से लिखना भूल चुके हैं, पर कभी कभी सीने के दाग उभर आते हैं, ईश्क प्रीत लव, गम, धोखा, आँसू, रोना, चिल्लाना जैसे विषयों से फ़ेसबुक भरा पड़ा है पर गीत प्यार का लिखते लिखते एक कहानी लिख गए। ज्यों जाना था जापान पहुंच गए चीन, अहँकार भी जीवन में मायने रखता है। सीधे-सरल आदमी को तो कोई समझता नहीं है, जब तक 2 घंटे बाहर बेंच पर न बैठे मिलने वाला, तब तक बाबू जी भेंटने बुलाते ही नहीं। चपरासी कह देता है फ़ाईल में बिजि हैं, फ़िर चाहे चेम्बर में बैठ कर वोदका के सिप मार रहे हों। जब खत्म हो गयी घूंट तो कहने लगे कल रात इक ग़ज़ल पी थी , ये हुई न बात, यूँ कहो न कल रात एक गजल जी थी फ़ुरसत में , बात फ़ुरसत की ही है। पर फ़ुरसत मिले तब न।

अब बात खुदा की की निकल ही आई, कहते हैं कि प्यार खुदा होता है, मैं कहता हूँ कि नुक्ते से खुदा, ज़ुदा होता है। आबिदा परवीन कहती है, एक नुक्ते विच गल मुकदी है, एक नुक्ते विच गल मुकदी है। इत्थे कोई नी मुकदी, मुकदी होएगी होर किसी दुनिया जहांन विच्चों। इस प्यार को क्या नाम दूँ..? बस यहीं गलती हो जाती है, प्यार को नाम देने में बड़ी भारी। प्यार को नाम की जरुरत नहीं। प्यार तो एक अहसास है, जो बेनामी कमेंट जैसा दर्द देता है। प्यार की उड़े चिरैया बागों में, चूं-चूँ करती बुलबुल जैसे। शायद . उसके गीत से गुल मुस्का दे और सुबह हो जाए। प्यार में मुश्किलें पड़ीं इतनी कि आसां हो गईं, बात आत्मबल की है। जिसका जितना आत्मबल उसके लिए मुस्किलें भी उतनी ही आसान। उम्र भर जिन मुश्किलों से पाला पड़ता रहा, एक दिन जिंदगी ने उन्हे आसान कर दिया।

नीरज जाट हांड के लौट आया है इसके दिल्ली से उत्तरकाशी आते ही मुगल गार्डन की रौनक पर बढ़ता खतरा पैना गया। जाट की खोज में तीन एम आई हेलीकाप्टर भेजे  हैं अन्ना स्वामी ने। लागै तो नूं है  छोरा आग की नदी पार कर रहया सै। बात जुवानी के जोश की भी होया करे हे। बंदे का कोई दोस नहीं होया करता। काश, इतना सा हो जाये, इसका बापु इसकी पसंद जोगी छोरी देख के इसका ब्याह करवा दे, ओर इसकी घुमक्कड़ी की वाट लगा दे। इब कह रहया  है के आम सहमति की भावना को बढ़ाने का एक अवसर बनाओ यो सहमति तो जद बणैगी न, तूँ हां कर देगा। दिल्ली के राष्ट्रपति का चुनाव भी  नुंए हो रहया सै। समझा के नहीं। ताऊ नै एक चिट्ठी सिम्पल अंकल के नाम लिखी सै। देख इब के बेरा पाटै सै। एक बर  हिम्मत जुटा  ले और गंगा जी म्है डुबकी लगा ले, यो बात ताऊ नै भी तेरे तै आखरी बार कही सै…कॄष्ण की चेतावनी……कुछ नहीं कहते, ना रोते हैं; दुःख पिता की तरह होते ह

फ़ुरसतिया वार्ता को देते हैं विराम, पितृ दिवस की शुभकामनाएं मिलते हैं एक ब्रेक के बाद राम राम, थोड़ा इधर भी घुम आईए………

चलते चलते एक व्यंग्यचित्र


शनिवार, 16 जून 2012

हम समंदर हैं, हमें बादल का हुनर आता है .... ब्लॉग4वार्ता....संध्या शर्मा

संध्या शर्मा का नमस्कार... देश में राष्ट्रपति पद को लेकर जाने कितनी चर्चायें, अटकलें लगाई जा रही हैं, बैठकों का दौर जारी है और यहाँ महंगाई दर फिर से बढ़ गई है. बड़ी मुश्किल है. लेकिन आज अपने ब्लॉग जगत का खजाना काफी भरा हुआ नज़र आया, बहुत से कीमती रत्न जगमगाते हुए दिखे. उन्ही में से कुछ हम लाये है आपके लिए चुनकर. आइये चलते हैं, आज की ब्लॉग 4 वार्ता पर...

प्रतिबिम्बित होता वह हममें  प्रतिबिम्बित होता वह हममें गीत मिलन के गाओगे गर विरह का दुःख भी कट जायेगा, उजले दिन की राह तको तो घोर तमस भी छंट जायेगा ! संदेहों को गले लगाते दुःख वीणा भी वही बजाते, उर आशा, विश्वासी अंत...इससे पहले कि तुम मुझसे कहीं दूर चली जाओ, जाते जाते मुझे एक बार गले से लगा लेना..  जाने क्यूँ जैसे उम्मीदें ख़त्म होती जा रही हैं... कलेंडर की ये बदलती तारीखें, एक एक दिन जैसे फास्ट-फॉरवर्ड मोड में हो... हर सुबह एक नयी उम्मीद के साथ शुरू होती है और रात ढलते ढलते दिल बुझता जाता है, .कारे मतवारे घुँघरारे बदरवा ....! धरा पर छाते हैं ...मन को लुभाते हैं .. घूम घूम घिरते हैं ...मतवारे बदरवा ... कैसे उड़ते है ......कारे बदरवा .... कारे मतवारे घुँघरारे बदरवा .............!! उड़ते हवा के संग-संग .. उलझी-उलझी लटों जैसे......

कोई मुझे राष्‍ट्रपति बना दे, फिर मेरी चाल .... हिंदी ब्‍लॉगर या राष्‍ट्रपति ? भारत का आम नागरिक अपने देश का राष्‍ट्रपति क्‍यों नहीं बन सकता और बनने की कौन कहे, जब उम्‍मीदवार बनने की धूमिल सी संभावना भी नजर आती नहीं दिखती है। मेरी हसरत रही है कि किसी औ... कई दिनों से शिकायत नहीं ज़माने से... आते-जाते बादलों को ताकते हुए देखना भी कई बार नीरस और ऊबाऊ होने लगता है. गर्मी से बेहाल पंछियों को डालों पे लटकते देख खुद पर भी झुंझलाहट ही होती अक्सर कि हम भी ज़िंदगी की डाल पे बेसबब लटके ही हुए हैं बस. ...श्रीमद्भगवद्गीता-भाव पद्यानुवाद (१५वीं-कड़ी) तृतीय अध्याय (कर्म-योग - ३.१६-२४) ईश्वर निर्मित चक्र न माने जीवन पापमयी है होता. इन्द्रिय सुख में रमा हुआ जो उसका जीवन व्यर्थ है होता. करता रमण आत्मा में जो तृप्त आत्मा में ही होता. ऐसा जो सन्यासी जन ...  

चाँद ने चांदनी लुटाई चाँद ने चांदनी लुटाई शरद पूनम की रात में सुहावनी मनभावनी फैली शीतलता धरनी पर कवि हृदय विछोह उसका सह नहीं पाते दूर उससे रह नहीं पाते हैं वे हृदयहीन जो इसे अनुभव नहीं करते इसमें उठते ज्वार को महसू... महामुक्ति  हे प्रभु! मुक्त करो मुझे मेरे अहंकार से. दे दो कष्ट अनेक जिससे बह जाये अहं मेरा अश्रुओं की धार से.... मुक्ति दो मुझे जीवन की आपधापी से बावला कर दो मुझे बिसरा दूँ सबको... सूझे ना कुछ मुझे.. सिवा तेरे.. सियार और बन्दर प्राचीन काल बात है, दो ब्यक्ति आपस में बहुत अच्छे मित्र थे, पर दूसरे जन्म में उनमें से एक को सियार की योनि मिली और दूसरा बन्दर बना। सियार जो था, वह शमशान में रहा करता थाऔर मुर्दों ...

युवा सन्यासी को कलहंस चाहिये ...! - एक बार एक वृद्ध साधु एक युवा सन्यासी को लेकर शहर आया , वो उसे उसकी , शैशव अवस्था में अपने साथ ले गया था और अब उसकी परीक्षा लेना चाहता था सो उसे शहर लेकर आय..पहले खुद अपनी भाषा को सम्मान दें - * जब तक हम ही अपनी भाषा की कद्र नहीं करेंगे, जब तक खुद उसे उचित सम्मान नहीं देंगे, तब तक हमें बाहर वालों की आलोचना करने का भी हक नहीं बनता।* आस्ट्रेलिया क...  .सौ साल बाद भी वो ऐसी ही होगी.... - वो फोन पर मेरा नाम तीन बार लेकर इतने जोर से चिल्लाई थी कि रसोई में काम करते हाथों को भी भनक लग गई...... बिना कुछः पूछे और सुने बस बोलती गई... मुझे मालुम थ... 

ग़ालिब ... - हसरतें दिल की, तो कब की टूट के बिखर गईं हैं 'उदय' अब ... ये कौन है, जो खामों-खां दस्तक दे रहा है वहां ? ... देखना, किसी भी पल, वे सब-के-सब चुप हो जा... सलीब - * कंधो से अब खून बहना बंद हो गया है ... आँखों से अब सूखे आंसू गिर रहे है.. मुंह से अब आहे - कराहे नही निकलती है..! बहुत सी सलीबें लटका रखी है मैंने यारों .. जिन्दगी में तो सभी प्यार किया करते हैं ...!!! - *वो एक अज़ीम और अदीब शख्सियत थे ,* *अपनी मौसिकी की दुनिया के ....* *ज़नाब मेहदी हसन साहब !* गज़लों के *"शहंशाह-ए-गज़ल"* * १३ जून ,बुधवार २०१२ को इंतकाल फरमा...

जलती हुई दास्तान हूँ ए मेरे दोस्तो - मेरे साथ ना चल आग रास्ता है मेरा!! तू मेरे साथ दोस्ती ना झेल पाएगा!! मैं हूँ एक सुलगती चिता अरमानों की!! मेरे साथ जो चला तो तू भी जल जाएगा!! बहुत लोगों ने ... मेरी अभिव्यक्ति..........  *ऐ वक्त ! अगर बनकर सूरज तू कड़ी धूप बरसाता है, तो हम भी समंदर हैं, हमें बादल का हुनर भी आता है.* इंतज़ार रंगों का - चाँद ने आज कोई साजिश की है चाँदनी भी आज कहीं दिखती नहीं है मन की झील पर जो अक्स बना था उसकी रंगत भी अब खिलती नहीं है , कर रही हूँ इंतज़ार ... 




चलते - चलते कीजिये रामगढ़ की सैर, मुझे दीजिये इजाजत. मिलते हैं अगली वार्ता में नमस्कार....

शुक्रवार, 15 जून 2012

ऐसी ही ये दुनिया है, तो ये दुनिया क्यूँ है? .. ब्‍लॉग4वार्ता .. संगीता पुरी


नमस्‍कार ,  राष्ट्रपति चुनाव के मुद्दे पर गुरुवार को कांग्रेस का उसके सहयोगी दल तृणमूल कांग्रेस व सपा से टकराव साफ नजर आया और दोनों पक्षों के उम्मीदवारों के मुकाबले की संभावना बढ़ गई। सत्तारूढ़ गठबंधन ने राष्ट्रपति पद के लिए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के नाम की संभावना से इनकार कर दिया वहीं ममता-मुलायम ने संकेत दिए कि वे झुकने वाले नहीं हैं। राजनीतिक गहमागहमी वाले आज के दिन की शुरुआत कांग्रेस पार्टी की ओर से आये कठोर बयान से हुई जिसमें ममता बनर्जी पर निशाना साधा गया। कांग्रेस ने तृणमूल-सपा के सुझाये तीनों नामों को खारिज कर दिया। इनमें प्रधानमंत्री के साथ पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम और पूर्व लोकसभा अध्यक्ष सोमनाथ चटर्जी हैं। पूरे देश की नजर अभी राष्‍ट्रपति चुनाव पर ही टिकी हुई है , अब आप सबों को आज की वार्ता पर लिए चलते हैं  ......



( मुसाफ़िर चल तो सही......बमचक -6Disclaimer : बमचक सीरीज़ में कुछ शब्द अश्लील, गाली-गलौज वाले, अपठनीय भी हो सकते हैं, अत: पाठकों के अपने विवेक पर है कि बमचक सीरीज़ पढ़ें या नहीं..... Note: बमचक सीरीज़ की पिछली पांच पोस्टें पहले ही पब्ल...कंकरीट के जंगल से.....आकाश से झर रही है आग घरों में उबल रहे हैं लोग। बड़की पढ़ना छोड़ डुला रही है बेना छोटकी दादी की सुराही में ढूँढ रही है ठंडा पानी टीन का डब्बा बना है फ्रिज। हाँफते-काँखते पड़ोस के चापाकल से पापा ला रहे...ऐसी ही ये दुनिया है, तो ये दुनिया क्यूँ है?  ज़िन्दगी जीने के लिए, मौत समझना पड़े. ऐसी ये हालत क्यूँ है? मोहब्बत समझने के लिए, चोट खानी पड़े. ऐसी ये कहावत क्यूँ है? अमन से जीने के लिए, जंग लड़नी पड़े. ऐसी ये प्रथा क्यूँ है? सच कहने पर, हलक गवानी पड़...

६० साल के जवान या बूढ़े.*“मौत” शब्द सुनते ही कई बार शरीर में झुनझुनी सी लहर जाती है. और कहीं हंसी ठहाकों के बीच मौत शब्द का उच्चारण भी अगर कर लिया जाये तो महफ़िल एक दम संजीदा हो उठती है. पर अपने अस्सी का क्या किया जाए... काशी स...आजमा कर देखोनहीं हो सकते मुक्त जब तक हो खामोश जीतने की प्रखरता हो और हो हार स्वीकार .... नहीं हो सकते मुक्त सत्य असत्य का फर्क मालूम है पर हों जुबां पर ताले नहीं हो सकते मुक्त भय की आगोश में भी किसी उम्मीद की..उस कोरोला का स्वाद था शहद से भी मीठाफिल्म ‘गोलमाल’ सीरिज के निर्देशक रोहित शेट्ठी की फिल्म ‘बोल बच्चन’ के प्रोमोज व गीत प्रदर्शित हो रहे हैं. विकीपिडिया की जानकारी के अनुसार फिल्म 1979 की ऋषिकेश मुखर्जी की कॉमिक फिल्म ‘गोलमाल’ से प्रभावित ह...पुस्तक परिचय -------" मेरे गीत " / गीतकार --- सतीश सक्सेनाकुछ दिन पूर्व सतीश सक्सेना जी के सौजन्य से मुझे उनकी पुस्तक " मेरे गीत " मिली और मुझे उसे गहनता से पढ़ने का अवसर भी मिल गया । सतीश जी ब्लॉग जगत की ऐसी शख्सियत हैं जो परिचय की मोहताज नहीं है । आज अ...
लखनऊ नवाबों से पहले -भाग 1 (आईये जाने एक इतिहास): महफूज़*आज से मैं लखनऊ का अनदेखा और अनजाना इतिहास पेश कर रहा हूँ*. यह इतिहास मैंने नहीं लिखा है और ना ही मेरा इसे लिखने में कोई ऐसा योगदान है. यह वो इतिहास है जिसे हम जानते तो हैं लेकिन सिर्फ नाम से. लखनऊ वो शहर..
शिक्षा पर दुमदार दोहे विद्यालय है कल खुला, बहुत दिनों के बाद अध्यापक हैं ले रहे, पकवानों का स्वाद पढ़ाई होगी कल से। कक्षा कहती आइये, लेकर सब सामान शिक्षक हैं हड़ताल पर, ग्रहण कीजिए ज्...लिस्ट हाथ में थाम, बाम माथे पे मलना"चाँद मान भी जा " Sushil "उल्लूक टाईम्स " चाँद सितारे चाहता, भंवरा खुश्बू फूल । लगता फिर से हिल गई, है दिमाग की चूल । है दिमाग की चूल, गधे सी सोच बना ले । सीवर में हर बार, चोंच की लोट लगा ले । 

कमजोर नज़र *कमजोर नज़र* खोगई है जिन्दगी यहीं कहीं ढ़ूँढ़ रही हूँ , मिलती ही नहीं शायद सोच की नज़र ही कमजोर पड़ गई है… ***** महेश्वरी कनेरी नया Foxit Reader पीडीऍफ़ रीडर की जरुरत तो लगभग हर कंप्यूटर में ही होती हैं और हममें से ज्यादातर एडॉब रीडर का ही उपयोग करते हैं पर एडॉब रीडर का एक बेहतर विकल्प है Foxit Reader, इसी का नया संस्करण अब उपलब्ध है Foxit Reader ...अनकही बातेंकहीं रत जगे हैं कहीं अधूरी मुलाकातें हैं हवाओं की खामोशी में आती जाती सांसें हैं । * * डरता है कुछ कहने से मन की अजीब चाहतें हैं किसी कोने मे दबी हुई अब भी अनकही बातें हैं। मेरे शहर की निर्लज्ज धूप निर्वस्त्र घूम रही है..2007 की एक क्लिक (बादलों के पीछे भागने का पुराना शगल) ओ बुढ़िया , लगता है आसमान की दरी पर सुस्ताते हुए तेरी आँख लग गयी है ! तूने कपास धुनना छोड़ दिया है कि रुई के फाहे अपने ही कानो में डाल रक्खे  हैं ? धर..
ना हाँ कहते थे ,ना ना कहते थे* * ना हाँ कहते थे ना ना कहते थे निरंतर मिलते भी थे मगर खामोश रहते थे कब आयेगा बेकरारी को करार इंतज़ार में दिल की धडकनें भी थकने लगी बरसों बाद एक दिन जुबां खोली मिलते तो रहते ही हैं क्यूं ना ऐसे ही गुजार....मुश्किल में पार्टी, कहां गायब हो राहुल बाबा ...राहुल बाबा आप इस वक्त कहां गायब हैं। यूपीए सरकार, कांग्रेस पार्टी ही नहीं सबसे ज्यादा आपकी मां सोनिया गांधी इस वक्त मुश्किल में है। उन्हें आपकी बहुत सख्त जरूरत है। आप जहां कहीं भी हैं, बिना देरी किए सीधे ...( rashifal ) कैसा रहेगा आपके लिए 14 , 15 और 16 जून 2012 का दिन ?? मेष लग्नवालों के लिए 14 , 15 और 16 जून 2012 को स्वास्थ्य या व्यक्तिगत गुणों को मजबूती देने के कार्यक्रम बनेंगे, स्मार्ट लोगों का साथ मिलेगा। रूटीन काफी सुव्यवस्थित होगा , जिससे समय पर सारे कार्यों को अंजाम दिया जा सकेगा।
आज के लिए इतना ही .. मिलते हैं एक ब्रेक के बाद अगली वार्ता में ....

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