रविवार, 30 मई 2010

छुट्टी का ले मजा-आओ देखें किस ब्लाग में क्या है सजा- ब्लाग 4 वार्ता राजकुमार ग्वालानी

ब्लाग 4 वार्ता  का आगाज करने से पहले सभी ब्लागर मित्रों को राजकुमार ग्वालानी का नमस्कार- आएं मिलकर बांटते चले सबको प्यार

आज रविवार यानी छुट्टी का दिन है। इस दिन सब मस्ती में रहते हैं। ऐसे में किस ब्लाग में किस तरह की मस्ती भर लेख है, उस पर एक नजर डालते हैं- 
मानव जीवन में बहुत से ऐसे विलक्ष्ण क्षण आते है जो अविस्मर्णीय होते है ऐसे ही विलक्ष्ण पलों का मौका था नागलोई जाट धर्मशाला में आयोजित हिंदी चिट्ठाकार सम्मलेन में बिताये चार घंटों का , जहाँ आभासी कही जाने
 
दिल्ली यात्रा 2, ब्लागर मिलन, संगठन एवं एक स्टींग आपरेशन.....!
...रास्ते में अविनाश जी ने पवन चंदन जी और त्रिपाठी जी को साथ लिया और ब्लागर मिलन स्थल की ओर चल पड़े। नांगलोई रेल्वे स्टेशन के पास राजीव जी पहुंच चुके थे हमें रास्ता बताने के लिए, जाट धर्मशाला पहुंचे तो वहां जय कुमार झा जी, संजु भाभी जी, माणिक(राजीव जी के
दादा दिनेश राय द्विवेदी की हार्दिक इच्छा थी कि कचैहरी के सामने भी आईना रखा जाये उन के आदेश पर मैंने प्रयास भर किया है विश्वास है कि दादा के साथ-साथ आप सब भी मेरा समर्थन करेंगें लंपट, चोर, लुटेरे, डाकू...
आंखों ने डाला मेरे शरीर पर भार जांच रही हैं मेरा हर एक उभार। सब कुछ नकद नहीं कुछ उधार आंखें हैं तेरी या चाकू तेज धार। सच है बिल्‍कुल मन तेरा लाचार कहूं इसे कैसे मैं व्‍यभिचार रेंग रही हैं आंखें शरीर पर मे...
वो कई सालों तक हमारे साथ रहा.. हम बच्चों के जिद पर ही उसे घर में लाया गया था.. पटना सिटी के किसी पंछियों के दूकान से पापाजी खरीद कर लाये थे.. उससे पहले भी हमने कई बार कोशिश कि थी तोता पालने कि, मगर हर बार ...
१. * क्या मैं (याने जनता) भारत का नागरिक हूँ. २. मुझे क्या सचमुच अपने वतन से अपने माँ बाप जितना प्यार है? ३. क्या मुझे राष्ट्र को समर्पित या गाँव शहर में जनता के पैसे से (कर के माध्यम से वसूले गए.

*दौड़ते हाथी की पीठ पर तुम्‍हें हंसता देखा था* *स्‍टेडियम के गोल मैदान पर खिंचे चॉक की* *फांक पर दौड़ता, बीच दौड़ गिरता देखा था * *सपने में दीखी हों नीली पहाड़ि‍यां, उसकी * *घुमराह रपटीली लाल पगडंडियों...
कल एक सवाल पूछा था...कई लोगों ने इसे पढ़ा, समझने की कोशिश की. वक़्त निकाला,और जबाब भी दिया. सबका शुक्रिया...सौरभ,राज जी, महफूज़ को लगा, अपने कॉलेज के सहपाठी ,जो पहला प्रेमी भी था, उसी से शादी करेगी...क्...
"सारे ज्योतिषी बेकार है ,यह ठगी का व्यापार है सब के सब धंधा करते है जिसको जैसा बन पड़ता है लूटता है ."आप फलां रत्न पहन लीजिये ,फलां पूजा ,अनुष्ठान करा लीजिये ,आपके कष्ट दूर हो जायेंगे " बस फिर क्या है ....
भले ही मोटे तौर पर यह प्रचारित किया जा रहा है कि छत्तीसगढ़ी फिल्में बाजार में अच्छा बिजनेस कर रही है लेकिन हकीकत इससे अलहदा है। मोर छइंया-भुईयां की सफलता के बाद अब तक सैकड़ो फिल्में बन चुकी है लेकिन मात्र ...
एंकर-- सराय रोहिल्ला के शास्त्री नगर में बुधवार को बिजनेसमैन के घर में दिनदहाड़े हुई लूट की मास्टर माइंड थी उनकी ही नौकरानी। महेश कुमार अग्रवाल के घर में हुई इस लूट कि गुत्थी को सुलझाते हुए पुलिस ने पुलि...
कभी बेंगलूर, कभी दिल्ली, कभी हवाई जहाज, कभी बस, कभी रेल। वही वहशत, वही दरिंदगी, वही हैवनियत, वही बेगुनाहों की लाशें, वही मौत का नंगा नाच। वही आंकड़ों का जमा खाता। वही नेताओं के रटे-रटाए जुम्ले। वही दी जाने व...
  
पश्चिम बंगाल के मिदनापुर इलाके मे इस बार मओवादियो के निशाने पर मुंबई -हावरा एक्सप्रेस ट्रेन आई .जिसके चपेट मे १०० से ज्यादा लोग बे मौत मारे गए .पश्चिम बंगाल पुलिस का दाबा है की नक्सली समर्थित पी सी पी ऐ यानि पीपुल्स कमिटी अगेंस्ट पुलिस अट्रोसिटी के दस्ते
  
महंगाई पर काबू पाने की कीमत सरकार अब किसानों से वसूलने जा रही है। खेती की लागत बढ़ने के बावजूद वह इस बार खरीफ फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) बढ़ाने नहीं जा रही है। धान का मूल्य किसानों को वही मिलेगा जो पिछले साल मिला था। जबकि दलहन के मूल्य में की
  
आज मालिक और ड्राइवर दोनो उदास और परेशन से नज़र आ रहे हैं . दोनो कुछ अपने ही सोच मे डूबे हुए हैं . दोनों के चेहरे पर चिंता की सिलवटें एक जैसी है (राज बाद में खुलेगा .. पढ़ते रहिये ) .२० मिनिट की लंबी यात्रा तक कोई बात नही हुई. दोनों का पूरा दिन बहुत बुरा
  
शेष नारायण सिंह भाई मंसूर नहीं रहे. पाकिस्तान के शहर कराची में मंसूर सईद का इंतकाल हो गया. मौलाना अहमद सईद का एक पोता और चला गया .मृत्यु के समय मंसूर सईद की उम्र 68 साल थी . वे जियों टी वी में बहुत ऊंचे पद पर थे. उनकी पत्नी आबिदा , कराची में एक मशहूर
  
भेजा था मैनें, उस दिन एक दस्तक तुम्हारे दरवाजे के नाम और तुम्हारा दरवाजा अनसुना कर गया था; तभी तो खुलने से मना कर गया था. मुझे पता है यह हौसला दरवाजे का नहीं हो सकता वह उन दिनों तुम्हारे 'फैसले' की सोहबत में था. शायद उसने यह बात तुमसे भी नहीं बतायी होगी
  
प्रिय ब्लागर मित्रगणों,आज वैशाखनंदन सम्मान प्रतियोगिता में डॉ0 कुमारेन्द्र सिंह सेंगर की रचना पढिये.लेखक परिचय नाम- डॉ0 कुमारेन्द्र सिंह सेंगर पिता का नाम- श्री महेन्द्र सिंह सेंगर माता का नाम- श्रीमती किशोरी देवी सेंगर शिक्षा- पी-एच0डी0, एम0एम0
  
जिसे ता उम्र सोचा वो लड़की शहर की थीउसने छोड़ा जिस जगह वो धूप दोपहर की थी।मुझको तसल्ली देती रही वक्ते रुख़सती परपर्चा दवा का हाथ में, शीशी ज़हर की थी।अरमाने इश्क मुझको ले आया था कहाँन पता था शाम का, न ख़बर सहर की थी।थक-हारके दरख्त के नीचे मैं आ गयाहालात
  
मेरी एक दोस्त घर जल्दी जाना चाहतीं थी। कल संडे हैं। उन्हें आज ही ब्यूटी पार्लर जाना है। जरूरी। कल उन्हें शादी के लिए एक लड़का देखने जाना है। उनकी शादी की तैयारियां जोरों से चल रही हैं। किसी रविवार वे दिखने जाती है। तो कभी लड़का देखने। शायद आपको यह बात
अब आपसे लेते हैं हम विदा
 लेकिन दिलों से नहीं होंगे जुदा 
..

8 टिप्पणियाँ:

वाह बहुत बढिया वार्ता राजकुमार जी

वार्ता में तो मजा आने लगा है

आभार

वाक ई आज आपने छुट्टी के हिसाब से लिन्क दिया है जरूर सभी लिन्क पढे जायेन्गे। धन्यवाद।

बहुत बेहतरीन चर्चा!१ मजा आया!

बेहद उम्दा वार्ता ..........बधाइयाँ !!

बढ़िया चिट्ठाचर्चा

...बेहद प्रसंशनीय चर्चा !!!

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