सोमवार, 3 मई 2010

किस तरह मानव में सर्वश्रेष्‍ठ है मजदूर .. ब्‍लॉग 4 वार्ता .. संगीता पुरी


आप सबों को संगीता पुरी का नमस्‍कार .. दिनभर के महत्‍वपूर्ण आलेखों को समेटने का प्रयास करते हुए यह वार्ता कर रही हूं  .. इसे पढते वक्‍त आप ये सुंदर गीत भी सुन सकते हैं .... मेरे घर आयी एक नन्‍ही परी  .. क्‍यूंकि पोस्‍ट पढते पढते आप राज भाटिया जी के द्वारा प्रेषित यू ट्यूब तो नहीं देख सकते .. पर उसे बाद में जरूर देखिए .. बसंती इन कुत्‍तों के सामने मत नाचना ।


कल हिंदी का शृंगारसरस पायस वाले रावेंद्रकुमार रवि , शब्दों की दुनियाखामोशी,बर्बरता के विरुद्ध वाले संदीप तथा दो वर्ष के हो चुके नन्हे आदित्य रंजन का जन्‍म दिन था , उन्‍हें बहुत बहुत बधाई  .. आप भी यहां जाकर उन्‍हें बधाई दे आएं .. जन्‍म दिन था आदित्‍य का .. और आज पूरी रविवारिय मस्‍ती की है जादू ने .. ब्‍लॉग जगत में इतने जन्‍मदिन थे .. इसलिए कनिष्‍क कश्‍यप जी ने पोस्‍ट किया है कि कहां ताजी मिठाइयां मिलती हैं .. आज बच्‍चो के खास दिन थे .. तभी तो गिरीश बिल्‍लौरे जी ने अर्चना आंटी के साथ बच्‍चों के अंत्‍याक्षरी प्रोग्राम के पॉडकास्‍ट पोस्‍ट किए हैं .. बडे बडे दिग्‍गजों के बाद आज कु अक्षिता ने भी बैशाखनंदन प्रतियोगिता के लिए अपनी प्रविष्टि भेजी है  .. दूध में मिले पानी से परेशान वह पाऊडर मिल्‍क पीने को तैयार है .. सचमुच बहुत ही अच्‍छा होता है बचपन .. संतोष प्‍यासा जी भी बता रहे हैं .. क्‍या होता है बचपन ??



अनामिका की सदाएं सही कह रही है ..सत-असत, पाप- पुन्य, न्याय-अन्याय, राग-विराग से युक्त जब दो भाव एक साथ उत्पन्न होते हैं .. तो मनुष्य विचार के आधार पर निर्णय नहीं कर पता कि किस पक्ष को स्वीकार करू अथवा किसका त्याग करूं ऐसी स्थिति में उस के भीतर 'हाँ-नहीं' में खींचतान चलती रहती है, वाही अंतर्द्वंद कहलाता है .. इस अभिव्यक्ति के लेखक डा. जगन्नाथ प्रसाद शर्मा जी हैं. आस्‍था देव जी लिखते हैं कि आज जहां छोटी छोटी परेशानियों में हम विचलित हो जाते हैं .. रामायण की कहानी आज भी प्रासंगिक है .. क्‍यूंकि यह मनुष्‍य में धैर्य का विकास करती है .. इस्‍लाम में जाति या वर्ण का विचार न कर सबको समान भाव से देखा जाता है .. ये जानकारी दे रहे हैं डॉ अनवर जमाल जी .. आस्तिकों के कई ब्‍लोगों के बाद अब नास्तिकों का भी एक ब्‍लॉग बन गया है .. लेखक का मानना है कि आस्था की शुरुआत वहीँ होती है .. जहाँ अँधेरा हो और जैसे जैसे उजाला होगा चीजें साफ़ होती जायेंगी ।


कल मजदूर दिवस था .. आज भी उसपर कई आलेख प्रकाशित हुए हैं .. भोपाल में श्रमजीवी पत्रकारों की रैली हुई .. जानकारी दे रहे हैं लिमटी खरे .. इस अवसर पर फिलिस्‍तीनियों ने भी जुलूस निकाला .. जिसमें 2000 से अधिक लोग शामिल हुए .. पहले से तय कार्यक्रम के मुताबिक हमार कर्मियों ने हडताल आरंभ किया .. अब समझौता भी हो गया है ..  मजदूर दिवस व्‍यतीत हो गया पर .. केंद्र सरकार के कर्मियों के स्वास्थ्य की देख भाल के लिए बनाए गए केंद्र सरकार कर्मचारी स्वास्थ्य सेवा [सी.जी.एच.एस.]से केंद्र सरकार के कर्मचारी ठगा सा महसूस कर रहे हैं .. दिनेश राय द्विवेदी जी का मानना है ..  दुनिया में ये भ्रम भी टूटेगा  .. मजदूर दिवस पर रजनी नैय्यर मल्‍होत्रा जी की कलम भी चली है .. मजदूर हूं अपनी मजबूरी बोल रहा हूं .. पर सबसे बढिया आलेख प्रेषित किया गया है .. अनिकेत प्रियदर्शी जी का आलेख इसे पढकर जानिए  .. किस तरह मानव में सर्वश्रेष्‍ठ है मजदूर



 रेलवे की साइट पर पॉप अप विज्ञापनों से परेशान हैं अवधिया जी  ..  हिन्‍दी की हार पर दुखी है जे पी तिवारी जी .. दिल भरा - भरा है घावों से .. है कष्ट दिलों से भाषा की प्यार गयी .. लेकिन मनीकंट्रोल तो हिंदी में आ गयी है .. अमित शर्मा जी दुनिया को प्‍यारी नहीं देख पा रहे .. उन्‍हें लग रहा है मां ने कहीं झूठ तो नहीं कहा था .. टेंशन प्‍वाइंट में चिंतित है शंकर फुलारा जी .. ब्‍लॉगर विवादित और संवेदनशील मुद्दे क्‍यूं उठाते हैं .. ओनेस्‍टी प्रोजेक्‍ट डेमोक्रेसी देश हित के नए नए मुद्दे लेकर ही सामने नहीं आ रहे .. पाठकों से समस्‍याओं को दूर करने हेतु विचार भी मांग रहे हैं .. संजय कुमार चौरसिया जी का आलेख पढकर जबाब दें .. अब आप लोग बताएं की क्या हैं .. हमारा देश , नंगा, भूँखा, और गरीब या फिर आधुनिक .विष्‍णु सिन्‍हा जी का मानना है ..  राजनीति से ऊपर होकर समस्‍याओं को सुलझाने की आवश्‍यकता है  ।




आज अजय कुमार झा जी की 'ब्‍लॉग बातें' का पहला अंक प्रकाशित होकर आ गया है .. आज कडुवा सच का निशाना है काला धन .. शिवम् मिश्रा जी जानकारी दे रहे हैं .. आपके चलने से हुआ करेगा अब मोबाइल चार्ज  .. होर्डिंग्‍स के साथ 'ही' पर रोचक लेख देखें .. रविश कुमार जी के ब्‍लॉग पर  .. राजकुमार ग्‍वालानी जी जानकारी दे रहे हैं .. कि रायपुर में खिलाडियों के ठहरने के लिए 50 कमरों का होस्‍टल बन रहा है .. दुनिया बहुत छोटी कैसे हो गयी है .. जानिए रूपचंद्र शास्‍त्री जी की रचना से  .. डॉ अमीता नीरव जी का मानना है .. बाजार भूख जगाने के लिए जिम्‍मेदार है .. ओम आर्य जी की सुंदर रचनाओं का आनंद ले .. कर रहे हैं मजा मना रहे हैं पिकनिक .. आए हैं जमीन बेचकर इलाज की खातिर ..   क्‍या आप भी टेलीवीजन नामक बुद्धू बक्से को सरासर नकारते हैं .. ज्ञानदत्‍त पांडेय जी की तरह इण्टरनेट पर निर्भरता से व्यक्तित्व एक पक्षीय तो नहीं होता जा रहा .. आज देव कुमार झाजी के माता पिता की शादी की सालगिरह है .. एक बहुत सुंदर कविता पेश कर रहे हैं वे आज के दिन .. उनके माता पिता को मेरी भी शुभकामनाएं !!


दीपक गर्ग जी के मजेदार वीडियो या यू ट्यूब्स पेश करते हैं .. इन्‍हें आप इस लिंक में देख सकते हैं ..  दो बजों को ब्‍लॉक कर दिया गया है .. जानिए डॉ महेश सिन्‍हा जी की संस्‍कृति में .. रेडिएशन की सच्‍चाई पर गंभी आलेख लिखा है प्रतिभा वाजपेयी जी ने .. आप भी एक नजर जरूर डाले  .. श्‍यामल सुमन जी ने भी सुंदर रचना पोस्‍ट की है ..  कैसे कहते कि मुझको जमाने से प्यार .. भाव दिखते नहीं प्यार लगता उधार .. काब्‍य शास्‍त्र में गंभीर आलेखों की बारहवीं कडी को प्रषित किया है मनोज कुमार जी ने .. आज आचार्य अनुभव गुप्‍त के बारे में जानकारी दे रहे हैं वे .. पी सी गोदियाल जी कहते हैं .. चित-अन्धकार को रोशन कर दे ..  दीप बेहद ख़ास जगा .. अविनाश वाचस्‍पति जी की पोस्‍ट को तभी पढिए  .. जब आपके पास कार हो .. वो भी एसी वाली .. अदा जी की शानदार प्रस्‍तुति ..रिन्दों की है पाँत लगी, और दौर चला पैमानों का ..शिकारी ही ललित शर्मा जी के शिकार कैसे बन देखिए .. जानने के लिए यहां क्लिक करे


वैसे तो मुझे ग्‍लोबल वार्मिंग से लाभ ही लाभ नजर आ रहे थे .. पर इसपर रविन्‍द्र गोयल जी की एक बहुत सुंदर रचना ने कुछ सोंचने को मजबूर कर दिया ... 
क्या मैं हूं बनाता अपनी फैक्टरियों में
बंदूकें, गोलियां और बम
मैने तो नहीं डाली थी खेतों में रसायनिक खाद
मैने तो नहीं थे कराए दंगे और फसाद
फिर मुझे क्यों उडाया
फिर से तोड दिया एक पल में
घर मुश्किल से था बनाया
तुम्ही कहो किससे पूंछू
क्यों हो गए तुम सब मौन
कहो मुझे, बतलाओ तो
है इसका ज़िम्मेदार कौन . . . ? 



बहुत हो गया .. आपको अधिक बोर नहीं करूंगी .. आनेवाले दोनो सप्‍ताह सोमवार को मैं चर्चा नहीं कर पाऊंगी .. उसके बाद फिर मिलते हैं .. आप सबों को एक बार फिर से मेरा नमस्‍कार !!

17 टिप्पणियाँ:

संगीता जी
आज तो आपने बहुत सारे लिंक दिए,
बहुत मेहनत की है आपने वार्ता में

आभार

बड़े सारे लिंक्स है, बहुत मेहनत से की है आपने चर्चा, बधाई.

आपके इस सार्थक पहल के हम पूरी तरह साथ हैं /

सुन्दर संकलन ,आभार !

कई चिट्ठों संकलित कर आपने एक कठिन और सराहनीय कार्य किया है।

सादर
श्यामल सुमन
09955373288
www.manoramsuman.blogspot.com

काफी कुछ समेट लिया आपने आज की चर्चा में!
आपका यह अन्दाज़ बहुत ही अच्छा लगा!
कभी हम भी इसका प्रयोग करेंगे चर्चा मंच पर!

काफी कुछ समेट लिया आपने
आभार

बी एस पाबला

बहुत ही बेहतरीन चर्चा

बहुते विस्तृत चर्चा. आभार आपका.

रामराम.

संगीता जी,

आपकी ये चर्चा बहुत विस्तृत है...और बहुत बढ़िया...साथ ही लेखन शैली भी ..पढ़ कर आनंद आया ..आभार

बहुत मेहनत से की है आपने चर्चा।

aapka ishtaiyl pasand aaya. aur bahut bahut shukriya aapne mere abhivyaktiya blog ko apni vaarta me shamil kiya. kal maine apke 1st may ki post padhi...rev.dena chaah rahi thi...lekin na jane kyu tech.probs.ki vajeh se tippani ke liye option nahi khul rahi thi. pls. take action.

बढ़िया और रोचक चर्चा के लिए शुभकामनायें संगीता जी !

bahut saare links mile hain aaj...saari charchaaon ko bahut kareene se piroya hai aapne...
bahut hi shaandaar prastuti...
aabhaar..

ओह, यह पहले देखा ही न था।
धन्यवाद।

संगीता जी नमस्कार ! बहुत दिनों बाद इधर आया तो जनोक्ति पर अनिकेत भाई के आलेख की चर्चा सुनी . अच्छा लगा . जनोक्ति पर नियमित अच्छे नवोदित लेखकों के आलेख पोस्ट होते हैं . कृपया उन आलेखों की चर्चा नियमित रूप से करें . प्रिंट में तो जुगाड़ चलता है बगैर जुगाड़ वालों को तो ऐसे ही वार्ताओं का आसरा है !

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