मंगलवार, 2 अगस्त 2011

टाइट जीन्स पहनने से ...रामदेव के साथ चांद पर हनीमून मनाएगी राखी सावंत..

टाइट जींस... या बाबा रामदेव के साथ हनीमून जैसी बातें सनसनाती खबरों की बौछार से मन में कसैलापन सा आ जाता है आज़कल क्या हो रहा है ...? क्या सनसनी के अलावा कुछ और काम नही है. इस सवाल  का ज़वाब तलाशना फ़िजूल है.. लोग तो वही करेंगे जो वे करने के आदी हैं आप तो आइये कुछ लिंक देखिये और फ़ुरसत मिले तो आ जाएं जबलपुर भुट्टा खिलाता हूं सैंक कर
तब तक मैं आता हूं झाड़ू-साड़ू लगा के ललित जी ने भेजी है भुट्टे की सिंकाई से फ़ैले कचरे को बुहारने
राज़ की बात

ललित :- भुट्टा बहुत महंगा है अशोक जी
अशोक जी :- तो क्या करें खाएं न..?
ललित:-करने को क्या है...खाएं और खिलाएं.. मै तो पर्स भूल आया..?




 ये रहे कुछ लिंक मारिये चटका
तुम धड़कन पढ़ना जानती हो....  
कुछ चले गए, कुछ जाने को तैयार.    
कागज़ के पैकेट में भी आ रहा है गुटखा ..  
इस बार "यूनिवर्सल मदर" गर्भनाल पत्रिका में ...  
भगवान ने भगवान को पीछे छोड़ा ........>>>  
जीवन फ़ूल और नारी का .. -जब - जब नारी की   
पाकिस्तानी परमाणु ज़खीरों पर अंतरराष्ट्रीय नि..    रामदेव के साथ चांद पर हनीमून मनाएगी राखी सावंत..    -हँसमुखजी की निरंतर हंसने,मुस्काराने     पच्चीस साल का हंस    विमुख सभी सम्बन्ध हो गये   दर्द ज़िन्दगी का ख़ास हिस्सा है    राजीव गांधी के स्वीस एकाउंट में 2.2 बिलियन डॉलर का खुलासा? सोनिया गांधी का सच     
 वार्ता में देरी के लिये माफ़ी चाहता हूं ये सब भुट्टों की वज़ह से हुआ है...


10 टिप्पणियाँ:

बहुत बढिया वार्ता लगाई दादा
आभार

वैसे आपने भुट्टे की दुकान कब खोली,पता ही न चला। नहीं तो कल आपकी ही सेवा ली जाती। :)

भुट्टे सूतिये धंधे के बारे में बता दूंगा तो क्या और स्वादिष्ट लगेंगे
हा हा हा
आइये बज़ाज साहब को साथ लेकर

बहुत बढ़िया वार्ता ..आभार

बहुत अच्छी वार्ता ..आभार

हा हा ये पर्स भूलने वाली बात पर हमारे एक मित्र की याद आ गयी |
हमारे एक मित्र है उन्हें शाम को दारु भी चाहिए खाने में मुर्गा और जब भुगतान करने की बारी आती है तो जनाब का हर बार यही जबाब होता है -"मैं तो पर्स भूल आया|"
अब जब भी वे किसी से शाम के प्रोग्राम की बात करते है सामने वाला एक बात पूछता है कि-"आपका पर्स पास में है या भूल आये है?"

बहुत बढ़िया वार्ता ..आभार

अच्छे लिंक्स .....

बढ़िया रही भुट्टे की दूकान की चर्चा और वार्ता |
आशा

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