मंगलवार, 30 अगस्त 2011

बोरसोरा क्यों याद आता है -----ब्लॉग4वार्ता----ललित शर्मा

ललित शर्मा का नमस्कार, आज चलते हैं, सीधे ही कुछ चिट्ठों पर..............


राजीव गांधी के हत्यारों को फांसी हो या न हो...खुशदीप अगर कोई क़ानूनी पेंच और न फंसा तो पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या के तीन दोषियों- मुरुगन, संथन और पेरारिवालान को अगली 9 सितंबर को फांसी के तख्ते पर लटका दिया जाएगा...यानि राजीव गांधी की हत्या...क़ानून अपनी जगह है बबुआ बदलाव अपनी जगह।आज चौबे जी बहुत खुश हैं, कह रहे हैं कि "राम भरोसे देखा ....अन्ना ने चूसा दिया नs गन्ना भ्रष्टाचारियों को .... बड़ा हेकड़ी बग्घार रहे थे पहिला दिन, कि अनशन के लिए पुलिस के पास जाईये, बाद में खुदै करने लगे ...और टोपी पहना ही दी अन्ना जी ने गिरीश"मुकुल" --घरकाजी और बाहरकाजी औरतों की समस्याओं पर विचार विमर्श करना ज़रूरी  कामकाजी औरतों का क्लासिफ़िकेशन The classification of working women आम तौर पर कामाकाजी औरत उस औरत को माना जाता है जो कि मर्दों की...अभी तो यह अंगडाई है: छत्तीसगढ़ में ‘ललितडॉटकॉम’  29 अगस्त 2011 को दैनिक छत्तीसगढ़ के सम्पादकीय पृष्ठ पर ललितडॉटकॉम का आलेख 


आन्दोलन के पहले चरण के उपरान्त पहला दिन अन्ना अस्पताल में हैं। खबर है कि पहले उन का भार लगभग 500 ग्राम प्रतिदिन की दर से कम हो रहा था। अब जो कुछ तरल खाद्य वे ले रहे हैं उस से यह गिरावट 200 ग्राम प्रतिदिन रह गई है। दो दिन में वह स्थिति आ जाए...भरी भीड़ में एकाकी हम भरी भीड़ में एकाकी हम बने हुए अपवाद खोज रहे हैं दायें-बायें रिश्तों की बुनियाद बूढ़े अनुभव जंग लगे-से काम नहीं आये थके-थके से देखे हमने जीवन के साये संवादों में उगे अचानक संशय औ॔ अवसाद खोज रहे हैं दायें-ब...बनारस लीना मेहेन्दले की यह टीप दो दिन पहले आई थी. यह छोटी सी टीप हमारे समाज के एक स्याह पक्ष को उजागर करती है. एक सवाल उठाती है कि क्या आज के कुछ नेताओं में पेशेवर हत्यारों जितनी नैतिकता भी नहीं बची है* ! - *...सभ्य , पढ़े लिखे और शरीफ सांसद  हमारे सब सांसद सभ्य , पढ़े लिखे और शरीफ है !!कहीं प्यार की अमर कहानी कहीं प्यार की अमर कहानी मिरे प्यार की लचर कहानी जीने को प्रायोजित बंधन वहां प्रेम है समर कहानी उपजे भाव प्रणय के दिल में कहती है सब नज़र कहानी परम्पराओं की बाधा जब बने प्रेम तब लहर कहानी प्रत...

बोरसोरा क्यों याद आता है बार-बार शिलॉन्ग बहुत ख़ूबसूरत शहर है। लेकिन शहर से बाहर निकलते ही खासी पहाड़ियों से होकर गुज़रते हुए लगता है, इन पहाड़ों को नहीं देखा तो कुछ नहीं देखा। हम शिलॉन्ग से दक्षिण की ओर बढ़ आए हैं, नेशनल हाईवे से उतरकर प...बातों और गीतों की जु़बानी - राखी पवित्रता और ममता के प्रतीक पर्व रक्षाबंधन पर फिल्मों से लिये गए गीतों के साथ ढेर सारी बातें राखी की...... रक्षाबंधन यानि भाई और बहन का अटूट बंधन, प्यारा सा बंधन.....फूलों से भी प्यारा तारों से भी प्यारा.....अनशन का टूटना और भ्रष्‍टाचार का रूठना कौन सा गेम खेला जाए, खैर … भ्रष्‍टाचार ने खूब गेम खेले थे, जी भर के प्रत्‍येक स्‍तर के दुर्जनों को खेले और खिलवाए थे, कितने ही तो उसके चेले तिहाड़ में उसका नाम रोशन कर रहे थे और वे अन्‍ना से उनके जबर्दस्‍...यह फूल एक तीसरी ही लड़की का नाम था काली लड़की चन्द्रकान्त देवताले वह शीशम के सबसे सुन्दर फूल की तरह मेरी आँख के भीतर खुप रही थी अपने बालों में पीले फूलों को खोंसकर वह शब्दों के लिए ग़ैरहाजिर पर आँखों के लिए मौज़ूद थी मैं बोलता जा रहा था पर...

आओ मिलकर क्यों ना तुम सागर हो जाओ, अंश लिखने से पहले मन में बहुत से ख्यालात आये नारियों की आज भी सामाजिक सिथित दयनीय देख कर मन कुंठा से भर गया जब कुछ नारियों के मुंह से सुनी उनकी व्यथा तो सारा आक्रोश उन्ही पर आता है क्योंकि ख़ुद वो कहती है...हार मिले न हार बिना  मिले न हार बिना " सूना जीवन प्यार बिना नीरस होता यार बिना कला नहीं जीवन जीने की पर पलता व्यवहार बिना दिल में उपजे प्रणय-भाव पर यह सजता अभिसार बिना आशा हो पर ना हो बन्धन हार मिले न हा...मुझे कुछ कहना है ...! संध्या शर्मा  सकती हैं नन्ही सी आँखे भी सपने बड़े - बड़े. **छिपा सकेगा** सूरज को** बादल भी आखिर कब तक...?** अपनों से युद्ध है लड़ना होगा अर्जुन की तरह. सर्वव्याप्त है सर्वव्यापक है ईश्वर और भ्रष्टाचार. **है पर ...शब्द-चित्र = चित्र भी बोलते हैं, शब्दों का भी आकर होता है और चित्रों के सहारे से कुछ कहने का प्रयास...नाम दिया है "शब्द-चित्र" ऊपर से चित्र पांच को छोड़ सारे चित्र ...कैसे कहूं "मैं अन्ना हूँ" अन्ना की मुख्य तीन मांगें मानकर सरकार ने संसद में लोकपाल बिल पेश कर दिया है। लेकिन मेरा व्यक्तिगत विचार था और है कि भारत देश में जनलोकपाल बिल जैसा कानून तो कोई भी सरकार नहीं लायेगी। *मेरा समर्थन अन्ना के स...

एक बार घर लौटा "एक बार घर लौटा, ऐसा लगा की हर रोज़ ही घर लौट रहा हूँ।" जहाँ मैं पिछले मे जाना नहीं चाहता हूँ और आगे को बांधा हुआ नहीं है तो रोज़ घर लौटकर जाना मेरे लिये क्यों है? क्या ये थकावट है? है, लेकिन वो मेरे शर...पोला पर्व की बधाई पोला पर्व की आप सभी को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं...इन्हें भी तो जोड़ो जन-लोकपाल में ! पर ही टिकी होती है. हमें उम्मीद करनी चाहिए कि असत्य . अहंकार ,अत्याचार और भ्रष्टाचार पर आधारित यह समाज व्यवस्था बहुत ज़ल्द बदल जाएगी . अन्ना जी का अहिंसक जन-आंदोलन ज़र..अन्ना के साथ चलना , नहीं चलने से बेहतर है ....अन्ना की आंधी ने स्वतंत्रता संग्राम के बाद पहली बार अनगिनत रिकोर्ड बनाते हुए युवाओं के जोशोखरोश को एक निश्चित दिशा दी है . जैसे पूरा देश एक नींद से जाग उठा है , मुर्दा जिस्मों में हरकतें होने लगी हैं . ...प्राथमिकतायें देखें... जिस तरह से संप्रग सरकार ने अन्ना हजारे के आन्दोलन से निपटा है उसमें बहुत सारी खामियां दिखाई दी हैं फिर भी कहीं से यह भी नहीं कहा जा सकता है कि सरकार पूरी तरह से अन्ना के फैक्टर से परिचित नहीं थी. देश के स...


वार्ता को देते हैं विराम, मिलते हैं, एक ब्रेक के बाद, राम राम ........

10 टिप्पणियाँ:

अच्‍छे लिंक्‍स .. बढिया वार्ता ..
आभार !!

शब्‍दचित्र से सजा बोरसोरा.

मेरी पोस्ट को शामिल करने के लिए आपका बहुत बहुत आभार !

अच्छी लिंक्स दी हैं ललित जी |आप मेरे ब्लॉग पर आए आभार
आशा

पोला पर्व की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं... बहुत अच्छी वार्ता... अच्छे लिंक्स... मेरी पोस्ट को शामिल करने के लिए आपका बहुत बहुत आभार...

बहुत बढ़िया लिंक्स हैं ......

बेहतरीन चर्चा ..

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