सोमवार, 29 अक्टूबर 2012

कौन ब्लॉगर बनना चाहेगा? -------- राम राम ब्लॉग4वार्ता ......... ललित शर्मा

ललित शर्मा का नमस्कार, प्रस्तुत हैं ब्लॉग वार्ता में कुछ फटाफट लिंक्स ............

राजपूत नारियों की साहित्य साधना : प्रेम कुंवरी यह सर्वथा अज्ञात और साहित्यिक क्षेत्र में अचर्चित राजपूत कवयित्री है| महाराजा जयसिंह आमेर की महारानी चन्द्रावती द्वारा अपनी आत्मा के कल्याणार्थ संकलित करवाई गयी पद्य कृति में इनके २८ छंद संकलित है| यह पद्य महाराव मनोहरदास शेखावत के ब्रजभाषा में रचित पद्यों के संकलन के पश्चात् लिखित है| ग्रंथ में लिखा है- प्रेमकुंवर बाई कृत पद्य| यद्धपि यह तो अन्य साहित्यिक स्त्रोतों से स्पष्ट नहीं होता कि प्रेमकुंवरी का जन्म, माता-पिता, विवाह आदि किस कुल में किस संवत में हुआ, परन्तु महाराव मनोहरदास की रचना की समाप्ति के बाद हि इनकी रचना लिपिबद्ध होने और बाई संबोधन से यह प्रत्यय होता है कि वह शेखाव... more »

आशा आशा तिमिरपान कर लेती हूँ जब, चिमनी सा जी जाती हूँ आँखों में भर जाए समंदर तो, मछली सा पी आती हूँ सर सर सर सर चले पवन जब खुशियाँ मैं उड़ाती हूँ शब्दों के तोरण से कानों में घंटे घड़ियाल बजाती हूँ अंतस की सोई अगन को मध्धम मध्धम जलाती हूँ मूक श्लोक अंजुरी में भर कर नया संकल्प दोहराती हूँ तिमिरपान कर लेती हूँ जब, चिमनी सा जी जाती हूँ आँखों में भर जाए समंदर तो, मछली सा पी आती हूँ जीवन के इस हवन कुण्ड में अपने अरमान चढ़ाती हूँ क्षत विक्षत आहत सी सांसें कहीं कैद कर आती हूँ भूली बिसरी बातों पर फिर नत मस्तक हो जाती हूँ आशा की पंगत में बैठे जो उनका दोना भर आती हूँ तिमिरपान कर लेत... more »

लहुरी काशी रतनपुर बाबू रेवाराम से गौरवान्वित लहुरी काशी रतनपुर के काशीराम साहू (लहुरे) के माध्यम से यहां की पूरी सांस्कृतिक परम्परा सम्मानित हुई, जब इसी माह 9 तारीख को छत्तीसगढ़ के लोक नाट्‌य के लिए उन्हें संगीत नाटक अकादेमी पुरस्कार-2011 मिला। आठ सौ साल तक दक्षिण कोसल यानि प्राचीन छत्तीसगढ़ की राजधानी का गौरव रतनपुर के नाम रहा। इस दौरान राजवंशों की वंशावली के साथ यहां कला-स्थापत्य के नमूनों ने आकार लिया। अब यह कस्बा महामाया सिद्ध शक्तिपीठ के लिए जाना जाता है। कभी इसकी प्रतिष्ठा लहुरी काशी की थी। तासु मध्य छत्तिसगढ़ पावन। पुण्य भूमि सुर मुनि मन भावन॥ रत्नपुरी तिनमें है नायक। कांसी सम सब विधि सुखदायक॥... more » अन्नपूर्णा गहरे सांवले रंग पर गुलाबी सिंदूर ,गोल बड़ी बिंदी ...... कहीं से घिसी ,कहीं से सिली हुई साड़ी पहने अपनी बेटी के साथ , खड़ी कुछ कह रही थी मेरी नयी काम वाली .. कि मेरी नज़र उस के चेहरे ,गले और बाहं पर मार की ताज़ा -ताज़ा चोट पर पड़ी ....और दूर तक भरी गहरी मांग पर भी ..... और पूछ बैठी , कितने बच्चे है तुम्हारे .. सकुचा कर बोली जाने दो बीबी .....!!!!! क्यूँ ..!!!. .तुम्हारे ही है ..... या चुराए हुए ...और तुम्हारा नाम क्या है ,बेटी का भी.... वो बोली नहीं -नहीं बीबी .... चुराऊँगी क्यूँ भला .. पूरे आठ बच्चे है ....ये बड़ी है सबसे छोटा गोद में है ..... पता नहीं मुझे क्यूँ हंसी आ गयी ........ इसलिए ... more »

जसपाल भट्टी वन मैन आर्मी अगेंस्ट करप्शन जसपाल भट्टी को कॉमेडी किंग भी कहा जाता रहा है और वे भारतीय टेलीविजन और सिने जगत का एक जाना-पहचाना नाम रहे हैं। भट्टी को आम-आदमी को दिन-प्रतिदिन होने वाली परेशानियों को हल्के-फुल्के अंदाज में पेश करने के लिए जाना जाता रहेगा। उनका जन्म 3 मार्च 1955 को अमृतसर, पंजाब में हुआ था। उनकी पत्नी, सविता भट्टी हमेशा उनके कार्यों में उनका सहयोग करती थी। दूरदर्शन पर प्रसारित उनके सबसे लोकप्रिय शो – फ्लॉप शो में उनकी पत्नी सविता भट्टी ने अभिनय करने के साथ ही उसका प्रोडक्शन भी किया। भट्टी ने पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज से इलेक्ट्रिक इंजीनियरिंग में स्नातक की डिग्री ली लेकिन उनका मन इंजीनियिंग में नहीं ... more » 

इसे पढ़कर कौन ब्लॉगर बनना चाहेगा...मठाधीश! वाल्मीकि जयंति पर विशेष.... वाल्मीकीय रामायण के उत्तर कांड में एक बहुत ही रोचक प्रसंग है..... नित्य की भांति श्रीराम आज भी राजकार्य को निपटाने के लिए पुरोहित वशिष्ठ तथा कश्यप आदि मुनियों और ब्राह्मणों के साथ राज्यसभा में आ गये। इधर कार्य को निपटाने के उपरान्त श्रीराम ने लक्ष्मण से कहा- लक्ष्मण! * * *निर्गच्छ त्वं महाबाहो सुमित्रानन्दवर्धन।* *कार्यार्थिनश्च सौमित्रे व्याहर्तुं त्वमुपाक्रम।।* * * तुम स्वयं जाकर देखो। यदि कोई कार्यार्थी द्वार पर उपश्थित है, तो उसे भीतर आने के लिए कहो। श्रीराम की आज्ञा से लक्ष्मण ने बाहर आकर उच्च स्वर में कहा-क्या किसी को श्रीरामजी से मिलना है? किसी ने भ... more » 

मुखौटों की बस्ती.... संध्या शर्मा

इतनी बडी बस्ती में मुझे एक भी इंसान नहीं दिखता चेहरे ही चेहरे हैं बस किस चेहरे को सच्चा समझूँ किसे झूठा मानूं और उस पर इन सबने अपनी जमीन पर बाँध रखी है धर्म की ऊंची - ऊंची इमारतें इन्ही में रहते हैं ये मुखौटे क्षण प्रतिक्षण बदल लेते हैं नाम, जाति, रंग‍,रूप बसा रखा है सबने मिलकर मुखौटों का एक नया शहर जिन्हें चाहिए यहाँ सिर्फ मुखौटे जिनमे मन, ह्रदय, भावना कुछ नहीं बस फायदे नुकसान के सबंध इंसान जिए या मरे कोई फर्क नहीं पड़ता इन मुखौटों को लगे हैं कारोबार में श्मशान विस्तारीकरण के ये नहीं जानते मृत्यु केवल अंत ... more »
 
वार्ता को देते हैं विराम, मिलते हैं, ब्रेक के बाद ..........

रविवार, 28 अक्टूबर 2012

चाँद मुबारक... ब्लॉग 4 वार्ता... संध्या शर्मा

संध्या शर्मा का नमस्कार...  वार्ता परिवार की ओर से आप सभी को ईद की हार्दिक-हार्दिक शुभकामनायें ...... नवरात्री और दशहरे की धूमधाम के बाद आप सभी का ब्लॉग 4 वार्ता पर बहुत-बहुत स्वागत है। आज रविवार है, मतलब अवकाश का दिन और हम सबको नई - नई ब्लॉग पोस्ट पढ़ने से ज्यादा आनंद  और कहीं नहीं मिल सकता। ये तो हमारी दिनचर्या में शामिल हो चुके हैं,  कुछ अतिरिक्त समय और मिल जाये तो फिर क्या कहने। काफी दिन हो गए आप सब से कुछ कहे, थोडा सा बोलना तो बनता है न, अच्छा ठीक है हम आगे कुछ नहीं कहते हुए सीधे चलते हैं आज की वार्ता पर। लीजिये प्रस्तुत है आज की वार्ता बहुरंगी लिंक्स के साथ ....


http://www.nicekarachi.com/eid-mubarak-card/newcards/eid1.jpg

शुभकामनाएं ईद के शुभावसर पर  ईद के शुभ अवसर पर आप सब को हार्दिक शुभ कामनाएं | एक डाल के दो पत्ते फिर भी रहे न कभी जुदा सभी त्यौहार मिल कर मनाते हिलमिल कर मिठाई खाते | प्यार अनवरत बढता जाता खुशियाँ हर त्यौहार लाता...कैसे मिलते राम मारा-मारा फिरता है, प्राणी चारों धाम, मन के भीतर खोजा ना, कैसे मिलते राम, जीवन कैसा जीता है, प्राणी हो गुमनाम, एक दूजे के हिस्से हैं, श्री राधे-घनश्याम, किस्मत अपनी रूठे तो, बनता बिगड़े काम, होनी-अनहोनी सब, भगवन तेरे नाम, श्री राधा के चरणों में, नतमस्तक प्रणाम।। ..वे क्या मल्टीप्लाइड बाई टू थे क्या मानव द्वारा ईश्वर पूजा, ध्यान, योग, या कहें आज की तारीख में धर्मग्रंथों में लिखे उपदेश निहायत ही आज के जीवन में अनुपयोगी हैं? विजयादशमी के दिन चर्चा चल रही थी; क्या सचमुच रावण के दस शीश थे? और हाथ कान आँख याने मानव के कंधे से जुड़े व कंधे के ऊपर के अंग जो 2-2 होते हैं, वे क्या मल्टीप्लाइड बाई टू थे?......

आकाश से टकराती खिलखिलाहटें - मासूम खिलखिलाहटों के एक रेले ने जिस मजबूती से मुझे अचानक आ पकड़ा था कि व्यक्तित्व में समाई शाश्वत उदासियां भी भाग खड़ी हुईं. कैसा अजूबा था. उन चेहरों से,... मेरे पैर नही भीगे ……………देखो तो !!! - मेरे पैर नही भीगे देखो तो उतरे थे हम दोनों ही पानी के अथाह सागर में सुनो………जानते हो ऐसा क्यों हुआ? नहीं ना …………नहीं जान सकते तुम क्योंकि तुम्हें मिला ....तुम शायद ही समझो - आँखों की लाली कितने समंदर समेटे होती है .. कितने तूफ़ान छुपाये होती है... अपने भीतर . यादों की धूल से धूसरित मन ही यह जान सकता है समझ सकता है गला भर आता ... 

पुतले और वास्तविकता - यह संसार एक मेला है , यहाँ जो भी आता है अपना समय बिता कर चला जाता है आने - जाने का यह क्रम आदि काल से चला आ रहा है . पूरी कायनात को जब हम देखते हैं तो यह..मुखौटों की बस्ती.... ]इतनी बडी बस्ती में मुझे एक भी इंसान नहीं दिखता चेहरे ही चेहरे हैं बस किस चेहर...मंज़र - तेरे दामन की जो ये दिलकश ख़ुश्बू है कितने ही फूलों की शहादत की दास्ताँ है... उनके ज़ुल्मों से पामाल हो गए हम से कितने कैसे कह दूं जो उनका है वही मेरा पास..

कोई भी इंसा मुझे बुरा नहीं लगता. - दिल की उलझन ने जन्म दिया कुछ अटपटे और बेतरतीब ख्यालों को....उन ख्यालों को करीने से रखा तो लगा कुछ गज़ल सी बनी......काफिया रदीफ कहाँ है पता नहीं ....अब वहाँ मैं भी हूँ .... - यहाँ ..एक पल में ख्याब सजतें है अगले ही पल टूट जाते है तो मुझे क्या लुत्फ़ देंगी , इस ज़माने की कोई भी खुशी बड़ी ही कशमकश में हूँ कि क्यों मुझे से वो ही ...... यों रूठा ना करो - शिकवे कबूल लूंगा, तू मुझको बता तो दे, या कह दे सारी बात, जो उसका पता तो दे. गुल से पूछा, गुलशन से पूछा, भंवरों ने भी कह दिया- उनको नहीं पता।..

  लक्ष्मण मंदिर सिरपुर ...... - संग्रहालय की कुछ मूर्तियाँ और लक्ष्मण मंदिरधसकुड़ से लौटते हुए रास्ते में मख्मल्ला और खरखरा नामक दो नाले मिले, बरसाती खेती में नालों का भी सिंचाई के लिए ... पत्थर के पेड़ .... - * **दरख़्त की * *सूखती डाल,* *कह रही है .....* *पगली मत बना नीड़* *मेरी छाँव में * *कल आएगा लक्कड़हारा * *कर कुल्हाड़े का प्रहार * *काट ले जायेगा ,* *साथ... रूपकुण्ड- एक रहस्यमयी कुण्ड - इस यात्रा वृत्तान्त को शुरू से पढने के लिये यहां क्लिक करें। भगुवाबासा समुद्र तल से लगभग 4250 मीटर की ऊंचाई पर है जबकि इससे चार किलोमीटर आगे रूपकुण्ड 4800 म... 

कार्टून:-हो गई है पीर पर्वत-सी पिघलनी चाहिए 

 

  

आज के लिये बस इतना ही नमस्कार ...........

बुधवार, 24 अक्टूबर 2012

ब्लॉग जगत की नव देवियाँ- नवमी...ब्लॉग 4 वार्ता... ललित शर्मा

ललित शर्मा का नमस्कार .........नौ दिन तक चलने वाले नवरात्र का आज आखिरी दिन  है. नवमी के दिन माता सिद्धिदात्री की पूजा होती है. मां दुर्गा अपने नौवें स्वरूप में सिद्धिदात्रीके नाम से जानी जाती हैं. आदि शक्ति भगवती का नवम रूप सिद्धिदात्री है, जिनकी चार भुजाएं हैं. उनका आसन कमल है. दाहिनी ओर नीचे वाले हाथ में चक्र, ऊपर वाले हाथ में गदा, बाई ओर से नीचे वाले हाथ में शंख और ऊपर वाले हाथ में कमल पुष्प है. मां सिद्धिदात्री सुर और असुर दोनों के लिए पूजनीय हैं. जैसा कि मां के नाम से ही प्रतीत होता है मां सभी इच्छाओं और मांगों को पूरा करती हैं. ऐसा माना जाता है कि देवी का यह रूप यदि भक्तों पर प्रसन्न हो जाता है, तो उसे 26 वरदान मिलते हैं. हिमालय के नंदा पर्वत पर सिद्धिदात्री का पवित्र तीर्थस्थान है. 


या देवी सर्वभूतेषु मातृरूपेणसंस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:॥




आज मिलिए  शैल मंजुषा "अदा"  जी से, ये मई 2009 से ब्लॉग जगत में हैं। अपने छोटे से परिचय में कहती हैं " बस मैं और मेरे ख्यालों का मौसम..."  संगीत सुनना, karaoke पर गाना, चुटकुले सुनाना, नक़ल करना, कविता लिखना और पढ़ना, बातें करना, बच्चों के साथ बैठ कर फिल्में देखना, जब भी अवसर मिले माँ और पिताजी को दर्शनीय स्थलों पर घुमाने ले जाना इन्हें पसंद है  काव्य मंजूषा इनका ब्लॉग है .


My Photo  


इनकी प्रथम पोस्ट 

समय...

याद है मुझे,
जब मैं छोटी बच्ची थी,
झूठी दुनिया की
भीड़ में, भोली-भाली
सच्ची थी,
तब भी सुबह होती थी
शाम होती थी,
तब भी उम्र यूँ ही
तमाम होती थी,
लगता था पल बीत रहे हैं
दिन नहीं बीता है
मैं जीतती जा रही हूँ,
वक्त नहीं जीता है,
पर,अब बाज़ी उलटी है पड़ी,
वक्त भाग रहा है,और मैं हूँ खड़ी
वक्त की रफ़्तार का
नही दे पा रही हूँ साथ,
इस दौड़ में न जाने कितने
छूटते जा रहे हैं हाथ
अब समय मुझे दीखाने लगा अंगूठा
कहता है, तू झूठी,
तेरा अस्तित्व भी झूठा
जब तक तुम सच्चे हो
तुम्हारा साथ दूंगा
जब कहोगे,जैसा कहोगे,
वैसा ही करूँगा
अच्छाई की मूरत बनोगे तो
समय से जीत पाओगे
वर्ना दुनिया की भीड़ में
बेनाम खो जाओगे
आज भी समय जा रहा है भागे
सदियों पुरानी सच्चाई की मूरत
अब भी हैं आगे
ये वो हैं जिन्होंने
ता-उम्र बचपन नहीं छोडा है
वक्त ने इन्हें नहीं,
इन्होने वक्त को मोड़ा है
सोचती हूँ
कैसे लोग बच्चे रह जाते हैं
झूठ की कोठरी में रह कर भी
सच्चे रह जाते हैं,
अभी तो मुझे
असत्य की नींद से जागना है
फिर समय के
पीछे-पीछे दूर तक
भागना है ....

नवीनतम पोस्ट 

मेरे कदम...


न वो चिनार के बुत,
न शाम के साए,
एक सहज सा रस्ता,
न पिआउ, न टेक |
बस तन्हाई से लिपटे,
मेरे कदम,
चलते ही जाते हैं
न जाने कहाँ ।
मिले थे चंद निशाँ,
कुछ क़दमों के,
पहचान हुई,
चल कर कुछ कदम,
अपनी राह चले गए,
फिर मैं और
तन्हाई से लिपटे
मेरे कदम
चल रही हूँ न...
मैं अकेली.. !!
इसके साथ ही नवदेवियों  की यह खास श्रंखला समाप्त होती है, अगली नवरात्री में इस क्रम को और आगे बढ़ाएंगे। मिलते हैं अगली वार्ता में तक के लिए राम - राम ...............

मंगलवार, 23 अक्टूबर 2012

ब्लॉग जगत की नव देवियाँ- अष्टमी...ब्लॉग 4 वार्ता... ललित शर्मा

ललित शर्मा का नमस्कार ............. माँ दुर्गा जी की आठवीं शक्ति का नाम महागौरी है | इनका वर्ण पूर्णत: गौर है | इनकी गौरता की उपमा शंख, चक्र और कुंद के फूल से की गई है | इनकी आयु आठ वर्ष की मानी गई है- ' अष्टवर्षा भवेद गौरी ' | इनके वस्त्र एवं समस्त आभूषण आदि भी श्वेत है | इनकी चार भुजाएं है | इनका वाहन वृषभ है | इनके ऊपर के दाहिना हाथ अभय-मुद्रा में तथा नीचे वाले दाहिने हाथ में त्रिशूल है | ऊपर वाले बायें हाथ में डमरू और नीचे वाले बायें हाथ में वर मुद्रा है | इनकी मुद्रा अत्यंत शांत है | अपने पार्वती रूप में जब इन्होने शिव जी को पति रूप में पाने के लिए तपस्या की थी तो इनका रंग काला पड़ गया था | इनकी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान् शिव ने इनके शरीर को पवित्र गंगा-जल से मल कर धोया तब इनका शरीर बिजली की चमक के सामान अत्यंत क्रन्तिमान-गौर हो गया | तभी से इनका नाम महागौरी पड़ा |  

श्वेते वृषे समारूढा श्वेताम्बरधरा शुचिः |
महागौरी   शुभं  दधान्महादेवप्रमोददा ||
https://encrypted-tbn2.gstatic.com/images?q=tbn:ANd9GcR-8cSrUKjx0bZutANHMoG3j9UdnrZRaymg7-vGPBp8rkuqIA1o0Q

आज मिलिए सुषमा 'आहुति' जी से मार्च 2011 कानपुर  से  ब्लॉगिंग कर रही हैं। अपने बारे में लिखते हुए कहती हैं -  सुषमा "आहुति" शिक्षा-बी.एड.एम.ए.( यु जी सी नेट समाजशास्त्र) कार्य-डिग्रीकॉलेज में प्रवक्ता... पिता-श्री हरी चन्द्र माता-श्रीमती जमुना देवी.... .....पता-कानपुर ब्लॉगलिंक-sushmaaahuti.blogspot.com परिचय-मेरा परिचय तब तक अधूरा है जब तक मै अपने माता पिता का जिक् ना कर लूँ आज मै जो कुछ भी हूँ इनके ही त्याग और कठिन संघर्ष के कारण ही हूँ इनके ही दिये आर्शीवाद और दिये संस्कारो से ही आज मैने अपनी पहचान बनायी है..!!!!........... रंग तितलियों में भर सकती हूँ मैं...... फूलो से खुशबू भी चुरा सकती हूँ मैं.... यूँ ही कुछ लिखते-लिखते इतिहास भी रच सकती हूँ मैं......!!! 

[4X6.jpg] 

इनकी प्रथम पोस्ट:

एक लम्हा...!!!

एक लम्हा जो जिँदगी से कभी गया नही,
 हम भूले हो उसे एक पल के लिये ऐसा भी कभी हुआ नही..!

 रास्ते बहुत थे कुछ जाने पहचाने कुछ अन्जाने,
 पर मंजिल तक जो जाता,
 हमे ऐसा कोई रास्ता मिला नही..!!

 हमे वो मिला है जो नसीब मेँ था,
 किसी से शिकवा कोई गिला नही,
 हमने निभाया है जिँदगी का साथ हर हालात मे,
 मुकाम और भी मिल सकते थे,
 पर वक्त ने साथ दिया नही...!!!

 एक लम्हा जो बदल सकता था जिँदगी के मायने,
 बहुत कोशिश की जिँदगी को बदलने की,
 पर जिँदगी से वो लम्हा मिला नही......!!!!


अद्यतन पोस्ट: 

कोई रिश्ता है हमारा......... !!!


         इस रिश्ते को क्या नाम दूँ..?         
सिर्फ महसूस होता है....

कि हमारा कोई रिश्ता है.....


नज़र नही आता किसी को,

दिखाई देता भी नही है...

सिर्फ हवा के झोकों के साथ,

साँसों को महसूस होता है...

कि हमारा कोई रिश्ता है..


पन्नो पे लिखा जा सकता नही,

शब्दों में बांधा जा सकता नही..

निशब्द सा कोई रिश्ता है हमारा......


ख्वाबों में भी सजाया जा सकता नही,

ख्यालों में भी लाया जा सकता नही...

धडकनों के साथ महसूस होता है...

कि हमारा कोई रिश्ता है....


सवाल कोई करता नही,

ज़वाब भी कोई चाहता नही....

निरूत्तर सा है कोई रिश्ता 
है हमारा....

आगाज़ कोई करता नही,

अंजाम भी कोई चाहता नही,

अनंत सा है कोई रिश्ता 
है हमारा.....

ना कुछ कहना चाहता है किसी से,

ना ही कुछ सुनना चाहता है किसी से....

ख़ामोशी को बयां करता कोई रिश्ता है हमारा...........


ना किसी सफ़र की चाह है इसको,

ना किसी मंजिल की तलाश है इसको...

मेरी परछाई के साथ-साथ चलता....

कोई रिश्ता है हमारा.........


आज की वार्ता समाप्त करते हैं कल फिर आपसे मुलाकात होगी तब तक के लिए राम-राम .............

सोमवार, 22 अक्टूबर 2012

ब्लॉग जगत की नव देवियाँ- सप्तमी...ब्लॉग 4 वार्ता... ललित शर्मा

ललित शर्मा का नमस्कार ..........नवरात्र के सातवें दिन आदि शक्ति मां कालरात्रि की पूजा-अर्चना का विधान है। व्यापार संबंधी समस्या, ऋण मुक्ति एवं अचल संपत्ति के लिए मां कालरात्रि की पूजा का विशेष महत्व बताया जाता है। देखने में मां का स्वरूप विकराल है। परंतु मां सदैव ही शुभ फल प्रदान करती हैं। इस दिन साधकगण अपने मन को सहस्रार चक्र में स्थित करते हैं और मां की अनुकंपा से उन्हें ब्रह्मांड की समस्त सिद्धियां प्राप्त होती हैं। मां कालरात्रि की पूजा-अर्चना एवं साधना द्वारा अकाल मृत्यु, भूत-प्रेत बाधा, व्यापार, नौक री, अग्निभय, शत्रुभय आदि से छुटकारा प्राप्त होता है।
"कराल रूपा कालाब्जा समानाकृति विग्रहा।
   कालरात्रि शुभ दधद् देवी चण्डाट्टहासिनी॥"

 

ब्लॉग जगत की आज की देवी हैं  सुशीला  श्योराण जी है। मई  2011 से गुडगाँव से ब्लॉगिंग कर रही हैं, 

My Photo
आदि कई पत्र पत्रिकाओं में प्रकाशित है. अपने बारे में इनका कहना है "A very straight forward person who values truth, discipline, dedication and loyalty.I am passionate about -teaching, poetry and sports. I love children, rain,visiting new places etc. हमारी भावनाएँ शब्दों में ढल कविता का रूप ले लेती हैं। अपनी कविताओं के माध्यम से मैंने अपनी भावनाओं, अपने अहसासों और अपनी विचार-धारा को अभिव्यक्ति दी है" इनका प्रमुख ब्लॉग वीथी है |

इनकी प्रथम पोस्ट:

 माँ

कोख में सहेज
रक्त से सींचा
स्वपनिल आँखों ने
मधुर स्वपन रचा
जन्म दिया सह दुस्तर पीड़ा
बलिहारी माँ देख मेरी बाल-क्रीड़ा !
गूँज उठा था घर आँगन
सुन मेरी किलकारी
मेरी तुतलाहट पर
माँ जाती थी वारी-वारी !
उसकी उँगली थाम
मैंने कदम बढ़ाना सीखा
हर बाधा, विपदा से
जीत जाना सीखा !
चोट लगती है मुझे
सिसकती है माँ
दूर जाने पर मेरे
खूब बिलखती है माँ !
ममता है, समर्पण है
दुर्गा-सी शक्‍ति है माँ
मेरी हर ख़ुशी के लिए
ईश की भक्ति है माँ !
माँ संजीवनी है
विधाता का वरदान है
जिंदगी के हर दुःख का
वह अवसान है
प्रभु का रूप
उस का नूर है माँ
एक अनमोल तोहफा
सारी कायनात है माँ !
-सुशीला शिवराण

अद्यतन पोस्ट:

बर्फ हुईं संवेदनाएँ

आज ’वीथी" पर सूरज प्रकाश जी जैसे साहित्यकार की सदस्यता ने १०० का आँकड़ा पूरा कर शतक बनाया !बहुत प्रसन्नता हो रही है मित्रोके साथ यह खुशी साझा करते हुए ! प्रभु के और आप सब के प्रति आभार व्यक्‍त करते हुए मैं सुशीला श्योराण "शील" यह कविता आप सब की नज़र करती हूँ - 

                



ग्रीनपार्क की चौड़ी मगर संकरी पड़ती सड़क
ठीक गुरूद्वारे के सामने

ट्रैफ़िक की रेलम-पेल में
रेंगती-सी ए.सी. कार में
बेटे का साथ
निकट भविष्य की मधुर कल्पना
और राहत फ़तेह अली खान के सुरों में खोई
आँखें मूँदे आनंदमग्न मैं
ब्रेक के साथ बाहर दृष्टि पड़ती है
और जैसे मैं स्वप्नलोक से 
दारुण यथार्थ में पटक दी गई !


तवे-सा काला वर्ण
चीथड़ों में लिपटा नर-कंकाल
सड़क के बीचों-बीच
बायाँ हाथ दिल पर
चेहरे पर भस्म कर देने वाला क्रोध
दायें हाथ से बार-बार
हवा में 'नहीं' संकेतित करता
चारों दिशाओं में यंत्रवत घूमता
विक्षिप्‍त मानव
नहीं भूलता !


दिल ने पुकारा -
कहाँ हो दरिद्रनारायण ?
कितना आसान है
उसे पुकारना
और आँखें बन्द कर
आगे निकल जाना !


 कल फिर मुलाकात होगी, तब तक के लिए राम-राम ......
  

रविवार, 21 अक्टूबर 2012

ब्लॉग जगत की नव देवियाँ- षष्ठी...ब्लॉग 4 वार्ता... ललित शर्मा

ललित शर्मा का नमस्कार .........., नवरात्रि के छठे दिन मां कात्यायनी की पूजा की जाती है। इनकी उपासना और आराधना से भक्तों को बड़ी आसानी से अर्थ, धर्म, काम और मोक्ष चारों फलों की प्राप्ति होती है। उसके रोग, शोक, संताप और भय नष्ट हो जाते हैं। जन्मों के समस्त पाप भी नष्ट हो जाते हैं। इस देवी को नवरात्रि में छठे दिन पूजा जाता है। कात्य गोत्र में विश्व प्रसिद्ध महर्षि कात्यायन ने भगवती पराम्बा की उपासना की। कठिन तपस्या की। उनकी इच्छा थी कि उन्हें पुत्री प्राप्त हो। मां भगवती ने उनके घर पुत्री के रूप में जन्म लिया। इसलिए यह देवी कात्यायिनी कहलाईं। इनका गुण शोध कार्य है। इसीलिए इस वैज्ञानिक युग में कात्यायिनी का महत्व सर्वाधिक हो जाता है। इनकी कृपा से ही सारे कार्य पूरे जो जाते हैं। 

चंद्रहासोज्ज्वलकरा शार्दूलवरवाहना।
कात्यायिनी शुभं दद्याद्देवी दानवघातिनी

https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEgdY2Tkb8aM-yrpmY_uFIvwuekNgFcDNVvhLPHNoH5vkjllKvXsndseFzHJS4Z0MpS_TeQEM7Q2WT8fIdfV_t_X8Vuz7AdXnAA6bSV-N8DB40alwOzjmc9o_0FQSJyu-sroSMgzBwOJQq4/s320/6_maa_katyayini.jpg 
ब्लॉग जगत की आज की देवी हैं संध्या शर्मा जी। जो नागपुर से  ब्लॉगिंग कर रही हैं August 2010से ब्लॉग जगत में हैं..मूलत कवियत्री हैं, वार्ता पर ब्लॉग चर्चा भी करती हैं, अपने बारे में लिखते हुए कहती हैं- लिखने का शौक तो बचपन से था, ब्लॉग ने मेरी भावनाओं को आप तक पहुचाने की राह आसान कर दी. काफी भावुक और संवेदनशील हूँ. कभी अपने भीतर तो कभी अपने आस-पास जो घटित होते देखती हूँ, तो मन कुछ कहता है, बस उसे ही एक रचना का रूप दे देती हूँ. आपके आशीर्वाद और सराहना की आस रखती हूँ...

मंगलवार, 17 अगस्त 2010  को इनकी प्रथम पोस्ट 

WAQT NAHI

है ख्वाब भरे इन आँखों में,
पर सोने का वक़्त नहीं,
ज़ख्म भरे हैं सीने में,
पर सीने का वक़्त नहीं,
हर पल दौड़ती दुनिया है,
पर जीने का वक़्त नहीं,
हजारों ग़म इस दिल में भरे,
पर रोने का वक़्त नहीं,
सारे नाम ज़ेहेम में हैं,
पर दोस्ती का वक़्त नहीं,
अब तू ही बता ऐ ज़िन्दगी,
कैसी है यह दीवानगी,
तेरा साथ निभाना है,
संग चलने का वक़्त नहीं..

बृहस्पतिवार, 11 अक्तूबर 2012 को अद्यतन पोस्ट

जीवन संध्या


सुबह से शाम
चलते-चलते
थक गया तन
सुनते-सुनते
ऊबा मन
आँखें नम
निर्जन आस
भग्न अंतर
उद्वेलित श्वास
बहुत उदास
कुछ निराश
शब्द-शब्द
रूठ रहे हैं
मन प्राण
छूट रहे हैं
पराया था
अपना है
कभी लगता
सपना है
सूरज जैसे
अस्त हो चला
अंतिम छंद
गढ़ चला.................! 

अब लेते हैं विराम, मिलते हैं अगली वार्ता में राम राम  

शनिवार, 20 अक्टूबर 2012

ब्लॉग जगत की नव देवियाँ- पंचमी...ब्लॉग 4 वार्ता... ललित शर्मा

ललित शर्मा का नमस्कार .........माँ दुर्गा का पंचम रूप स्कन्दमाता के रूप में जाना जाता है. भगवान स्कन्द कुमार (कार्तिकेय)की माता होने के कारण दुर्गा जी के इस पांचवे स्वरूप को स्कंद माता नाम प्राप्त हुआ है. भगवान स्कन्द जी बालरूप में माता की गोद में बैठे होते हैं, इस दिन साधक का मन विशुध्द चक्र में अवस्थित होता है. स्कंद माता का रूप सौंदर्य अद्वितिय आभा लिए पूर्णतः शुभ्र वर्ण का होता है माँ कमल के पुष्प पर विराजित अभय मुद्रा में होती हैं, स्कंदमाता को पद्मासना देवी तथा विद्यावाहिनी दुर्गा भी कहा जाता है.स्कंद माता सूर्यमंडल की अधिष्ठात्री देवी हैं. इनकी उपासना करने से साधक अलौकिक तेज पाता है. यह अलौकिक प्रभामंडल प्रतिक्षण उसके योगक्षेम का निर्वहन करता है. एकाग्रभाव से मन को पवित्र करके माँ की स्तुति करने से दुःखों से मुक्ति पाकर मोक्ष का मार्ग सुलभ होता है.

सिंहासना गता नित्यं पद्माश्रि तकरद्वया |
शुभदास्तु सदा देवी स्कन्दमाता यशस्विनी ||
या देवी सर्वभू‍तेषु माँ स्कंदमाता रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।

https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEj0yJbfUgN_b_I5dYsYuaM0xviqa0HmAvD7P3LscjZ3QiL784c3tsVpeZYLNlWT-3QITMwxH1WsTbyBEDebvZcAI5UDkRQDdkuWIpzEaxUea2gDwgN8Mfr0-zKgHP6R0i3asm_-ndfsRfjy/s1600/Skanda-Mata.jpg
वैसे तो इस श्रंखला में आने वाली ब्लॉग जगत की कोई भी देवी परिचय की मोहताज नहीं हैं, फिर भी नवदेवियों के साथ उनके स्मरण का एक प्रयास है यह. ब्लॉग जगत की नव देवियों के क्रम में आज मिलते हैं सुनीता शानू जी से, बहुत सारे  ब्लॉग पर उनकी उपस्थिति दिखाइ देती है  मुख्य ब्लॉग मन पखेरू उड़ चला दिखाई देता है .


उनके ब्लॉग की अद्यतन पोस्ट है कविताई होती भी नही आजकल 

हर बात तुमसे कही नही जाती
कविताई होती भी नही आजकल
किसी की प्यारी बातों ने 
बाँधा है कुछ इस कदर 
कि न चाह कर भी लिख बैठी हूँ
कुछ शब्द कागज़ पर बस
हर बात तुमसे कही नही जाती
कविताई होती भी नही आजकल…

साफ़गोई इतनी अच्छी तो नही
मगर पाकिजा सी तेरी मूरत 
टकटकी लगाये निहारती
मोह सा जगा देती है मुझमें 
कि न चाह कर भी लिख बैठी हूँ मै
कुछ शब्द कागज पर बस. 
हर बात तुमसे कही नही जाती
कविताई होती भी नही आजकल

शानू जी साहित्य की कई विधाओं में हाथ आजमाती हैं, व्यंग्य भी अच्छा लिखती हैं,  अब मिलते हैं अगली वार्ता में तब  के लिए आज्ञा दीजिये, राम राम 

Twitter Delicious Facebook Digg Stumbleupon Favorites More