गुरुवार, 27 जनवरी 2011

एक और तमाचा--कानून हाथ में--हैप्पी रिपब्लिक डे --- ब्लॉग4वार्ता --- ललित शर्मा

नमस्कार, गणतंत्र दिवस मनाया गया। सरकारी कार्यक्रम हुए, झंडा फ़हराया गया। बुंदी बांटी गयी, देशभक्ति के गाने बजाए गए। नेताओं के भाषण हुए, लेकिन राशन के मुल्य में कमी की कोई बात नहीं हुई। राज्यों से लेकर दिल्ली तक सभी ने अपनी उपलब्धी के ढोल पीटे। तिरंगे को लेकर दिन भर राजनीति चलती रही। दिल्ली की परेड में ब्रह्मोस मिसाईल को पेश किया गया, सेना में शामिल करने के लिए। अब चलते हैं ब्लॉग नगरिया की सैर पर, पेश करते हैं कुछ पोस्ट लिंक ब्लॉग4वार्ता पर.....

सबसे पहले चलते हैं NEWS 36 पर जहाँ अहफ़ाज रशीद ने कहा है पत्रकार की हत्या और पत्रकारों की राजनीति हो रही है।क्या ये बात सच है  कि जैसा राजा होता है प्रजा भी वैसी ही होती चली जाती है. एक पत्रकार की हत्या ने फिर ये सवाल खड़ा कर दिया है. छुरा के पत्रकार उमेश राजपूत की हत्या ने एक और सवाल दागा है कि पत्रकारिता क्यों और किसके लिए?

आगे कहते हैं--नई दनिया ने मृतक उमेश को अंशकालिक पत्रकार बताया है. अब मुझे कोई बताएगा कि ये अंशकालिक और पूर्णकालिक क्या होता है. आज ही बताना ज़रूरी था कि उमेश अंशकालिक पत्रकार था. अपना रक्षा धन जमा करके बिना तनख्वाह के और अपनी जान हथेली पर रखकर पत्रकारिता करने वाले अंशकालिक?  कौन है पूर्णकालिक? अब तो पत्रकरों को सोचना ही पड़ेगा कि हम आखिर पत्रकारिता में आये क्यों हैं? और किसके लिए कर रहे हैं पत्रकारिता ? आगे यहाँ पर  

मटुक जूली का फेविकोल जोड़ तगड़ा है। जो आज तक नहीं छूटा। लोगों ने उदाहरण भी दिए। इस पर मटुक नाथ कहते हैं - मटुक-जूली के प्रेम के टिकाऊपन का कारण ढूँढ़ने की कोशिश लोगों ने क्यों नहीं की ? अनुमान क्यों नहीं भिड़ाया ? क्या उनलोगों में विचार करने की क्षमता नहीं है ? उल्टा सीधा अनुमान भी नहीं लगा सके ! क्यों हमदोनों का नाम आते ही वे अपनी-अपनी मनोग्रंथियों में सिकुड़ गये ? यह बात तो सच है कि स्कूल-कॉलेजों में मौलिक ढंग से विचार करना नहीं सिखाया जाता। इसलिए वे विचार अगर नहीं कर पाये तो कोई आश्चर्य नहीं। विचार न सही, अगर वे प्रेम कर रहे होते तो दूसरों के प्रेम को समझने की क्षमता उनमें अपने आप आ गयी होती। 

तानपुरा और जीवन के विषय में लिखा है प्रवीण पाण्डेय ने वे कहते हैं -हम सबके व्यक्तित्व में एक तानपुरा बसता है, जो एक आधार बनाता है, एक दृष्टिकोण बनाता है, घटनाओं और व्यक्तित्वों को समझने का। उत्थान-पतन, लाभ-हानि आदि द्वन्दों से भरा है हम सबका जीवन पर इन सबके बीच जो विश्राम की निर्द्वन्द स्थिति आती है, वही हमारे तानपुरे की आवृत्ति है। व्यक्तिगत सम्बन्धों में उत्पन्न कर्कशता, जीवन को उन स्वरों में ले जाने के कारण होती है, जो औरों के व्यक्तित्व के तानपुरे के साथ संयोजित नहीं हो पाते हैं।

आगे लिखते हैं -- आप माने न माने, आपका जीवन समाज के तानपुरे को बल देता है और उससे प्रभावित भी होता है। आपका हलचलविहीन जीवन भले ही आपको भला न लगे पर वह हर समय उस तानपुरे का सृजन कर रहा होता है जिसकी आवृत्ति पर आने वाली पीढ़ियाँ सुर मिलायेंगी। हमारे पूर्वज जिनका नाम इतिहास की पुस्तकों में नहीं है, हमारे वयोवृद्ध जो उत्पादकता के मानकों पर शून्य हैं, वे जनसामान्य जिनका जीवन विशेष की श्रेणी में नहीं आता है, सबने वह आधार निर्माण किये हैं  जिस पर हम अपने उत्थानों के स्वर सजाते रहते हैं।

अशोक बजाज ग्राम चौपाल पर लिखते हैं --किसी भी नागरिक को अपने देश के  किसी भी भू-भाग में राष्ट्रीय  ध्वज  फहराने की स्वतंत्रता है। स्वतंत्र भारत का ध्वज तिरंगा है और इसे भारतीय गणतंत्र के किसी भी भू-भाग में फहराया जा सकता है यह विडंबना ही है कि भारत एक मात्र देश है जहॉं पर राष्ट्रीय पर्व के दिन ध्वज फहराने को लेकर विवाद उत्पन्न हो रहा है। विवाद उत्पन्न करने वाले लोग यह तर्क दे रहें हैं कि तिरंगा अगर फहराया गया तो कश्मीर में शांति भंग हो जायेगी। जिस तिरंगे की आन-बान और शान के लिए लाखों लोगों ने अपनी कुर्बानी दी तथा  अनेक वीर सपूत हंसते-हंसते फांसी के फंदे पर लटक गये  ।

अलबेला खत्री कहते हैं --ये देख कर आज मन लज्जित हैएक ईमानदार प्रशासक यशवंत सोनावणे को ज़िन्दा जलाने वालों को रोकने वाला कोई नहीं............ लेकिन अपने ही मुल्क़ में तिरंगा यात्रा रोकने वालों के लिए पूरा तन्त्र सज्जित है--दिनेश राय द्विवेदी जी कहते  हैं जनशिक्षण और जनसंगठन के कामों में तेजी लानी होगी आज से 61 वर्ष पूर्व दुनिया का सब से बड़ा लिखित संविधान अर्थात हमारे भारत का संविधान लागू हुआ। इसे भारत की संविधान सभा ने निर्मित किया। संविधान सभा का गठन ब्रिटिश सरकार के तीन मंत्रियों के प्रतिनिधि मंडल,.
आशा जी लिख रही हैं वह एक बादल आवारा वह एक बादल आवारा इतने विशाल नीलाम्व्बर में इधर उधर भटकता फिरता साथ पवन का जब पाता | नहीं विश्वास टिक कर रहने में एक जगह बंधक रहने में करता रहता स्वतंत्र विचरण उसका यह अलबेलापन भटकाव और दीवानापन स्थिर् मन रहन.26 जनवरी विशेष...गणतंत्र का ये कैसा उत्सव...खुशदीपपिछले पांच दिनों में गणतंत्र के सफ़र के कुछ पहलुओं को आप तक पहुंचाने की कोशिश की...इस तरह की पोस्ट पर तात्कालिक सफ़लता बेशक न मिले लेकिन इनका महत्व कालजयी रहता है...नेट के ज़रिए अतीत में झांकने वालों को क...
पद्मावलि » जय हिंद गणतंत्र दिवस पर ब्लॉग परिवार को मंगल कामनाएँ ! एक बहुत बड़ा पेड़ था जिसपर हज़ारों पक्षी रोज़ अपना बसेरा करते थे. किसी दिन उस पेड़ में आग लग गयी…तथापि पक्षियों ने उसी पेड़ पर रहते हुए जल मरने का निर्णय लिय…. भीमसेन जोशी, मन्नाडे और बसन्त बहार भारतीय शास्त्रीय संगीत परम्परा की मूर्धन्य मनीषी पण्डित भीमसेन जोशी से जुड़ा एक महत्वपूर्ण किस्सा विख्यात पाश्र्व गायक मन्नाडे ने टिप्पणीकार से एक अन्तरंग बातचीत में बताया था जो फिल्म बसन्त बहार से जुड़ा है..
क्या फिर में कोटा में पैदा हो गयानया जन्म देने वाले एक बच्चे ने लेबर रूम में पैदा होते ही नर्स से पूंछा नाश्ते में क्या हे ? नर्स ने कहा कचोरी और पकोड़ी ..... बच्चा उफ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़् ....... इस जनम में फिर से कोटा में पैदा होग...बंगलौर यात्रा और दो दो ब्लोगर्स मीट की रिपोर्ट :- देवसबसे पहले मेरे मित्रों... सभी देशवासिओं को गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभ-कामनाएं..... बाकी सब भला-बुरा अलग अलग हैं.... अपने लिए तो आज का दिन छुट्टी का दिन है और दिन भर घर पर बैठे बैठे कुछ अपनी सुनाने का दिन...
गणतंत्र दिवस पर सूरज से हुई कुछ बातचीत आज राजेन्द्र जी की पोस्ट पढ़ छत पर गई तो देखा ...सूरज धुंध की चादर ओढ़े बादलों की ओट में है ....मुझ से रहा न गया ...खूब छेड़ा- छाडी हुई ...आरोप-प्रत्यारोप लगे ....शायरों पर छींटा- कशी हुई ....कुछ मासूम से जवा..."हेप्पी रिपब्लिक डे"प*रेड ग्राउंड से वापस आते हुए मैंने उसे देखा... सड़क किनारे सिर झुकाए बैठा था. निकट ही बड़ी सी गठरी रखी थी. मैं बगल में बैठ गया, धीरे से कंधे पे हाथ रखा तो उसने चौंक कर सिर उठाया.... यह क्या...? मैंने कहा...
एक और तमाचा...सारे जहाँ से अच्छा हिन्दोस्तान हमारा .....हर जगह आज यही पंक्तियाँ बजती सुनाई दे रही हैं. हर कोई देश भक्ति की भावना से लवरेज दिखाई पड़ता है, अंतर्जाल तिरंगों से भरा पडा है ,.राजपथ से ऐतिहासिक लाल किले तक आठ...मिले शायद कभी ?कई देर बाद लगता है कुछ दूरी तक किसी के साथ चलते हुए हम कितना जुड़ गए थे उससे आज जब चल रहे है अकेले तब याद आया है वो वक़्त जब हम चले थे साथ लिए हाथ मैं हाथ बनाये थे हमने कई नए रास्ते कितने ही बोये ...
ऐंटरटेन रिव्यू : माटी की सौंधी महक मितान-420छत्तीसगढ़ी फिल्मों में परंपरा और संस्कृति को लेकर बुद्धिजीवी हमेशा सवाल उठाते रहे हैं। खासकर पत्रकार तो हर कांफ्रेंस में ‘संस्कृति-परंपरा’ वाला एक प्रश्न दागकर डायरेक्टर का कान ऐंठ ही देते हैं। डायरेक्टर भ...आज़ाद हिंदुस्तान में तिरंगे का अपमान!आज 62वें गणतंत्र पर सारे देश ने जो तस्वीरें देखीं उसने हिंदुस्तान को पानी-पानी कर दिया है. 62वें गणतंत्र दिवस पर हम सभी एक बार फिर स्वतंत्रता का अर्थ तो सिखा दो इनको भीजी यशवंत सोनवाने को व्यवस्था ने मारा है *आत्म केंद्रित सोच स्वार्थ और आतंक का साम्राज्य है.चारों ओर छा चुका है अब तो वो सब घट रहा है जो इस जनतंत्र में कभी नहीं घटना था. कभी चुनाव के दौरान अधिकारी/कर्मचा...
चलते चलते एक व्यंग्य चित्र
वार्ता को देते हैं विराम मिलते हैं ब्रेक के बाद, आप सबों को गणतंत्र दिवस की बहुत बधाई और शुभकामनाएं..

बुधवार, 26 जनवरी 2011

राजा फ़ोकलवा--मेरे देश का गणतन्त्र--कुछ अनुत्तरित सवाल--ब्लॉग4वार्ता --- ललित शर्मा

नमस्कार, आज 26 जनवरी है, गणतंत्र दिवस। देश स्वतंत्र हो चुका है,पर तिरंगा झंडा फ़हराने को लेकर युद्ध जारी हैं। अपने राष्ट्रीय पर्व पर हमें अपने ही देश में तिरंगा फ़हराने पर चुनौतियाँ मिल रही है। कैसा दुर्भाग्य  है हमारा। काश्मीर से कन्याकुमारी एवं अटक से कटक तक जब देश हमारा है तो हम कहीं भी राष्ट्रीय ध्वज फ़हराने की पात्रता रखते हैं। इसमें राजनीति को आड़े नहीं आना चाहिए, उसे रोड़े नहीं अटकाना चाहिए। तिरंगा झंडा फ़हराने का विरोध करने वालों पर देशद्रोह के कानून के अंतर्गत कार्यवाही होनी चाहिए। राष्ट्र विरोधी ताकतों को प्रश्रय किसी भी हालात में नहीं देना चाहिए।  राष्ट्र की अस्मिता पर चोट करने वालों को बख्शना नहीं चाहिए। सभी को गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं। चलते हैं ब्लॉग4वार्ता पर ......

सबसे पहले चलते हैं आर्ट गैलरी पर जहाँ भारत के राष्ट्रीय पक्षी मयूर के जोड़े का दर्शन हो रहा है बधाई संदेश में गणतंत्र दिवस की हार्दिक बधाई -- आर्ट गैलरी ----

तिरंगा - प्रेम.

तिरंगा - प्रेम 
(१)
हे राष्ट्र ध्वज "तिरंगा" !
हर साल  अंग्रेजी महीने की  तारीख 
  छब्बीस जनवरी व पंद्रह अगस्त को   
महज औपाचारिकता ही सही 
करती जनता तेरा ध्यान 
देती है तुझको सम्मान 
इतिहास का भले हो न हो ज्ञान 
भाई कोई बात नहीं, सब चलता है 
क्योंकि देश में चले प्रजा का  तंत्र
क्या फर्क पड़ता है, स्वतंत्रता दिवस हो छब्बीस जनवरी
या पंद्रह अगस्त हो दिवस-गणतंत्र


(२)
हे राष्ट्र ध्वज तिरंगा!
जाने हैं कितने लोगों ने तेरी अहमियत 
तेरे प्रति अचानक उमड़ता, छलछलाता प्यार 
क्या नहीं लाता शक़ के दायरे में किसी की नीयत 
लानत है; बजती है ढपली 
"कश्मीर से लेकर कन्या कुमारी तक भारत एक है 
मगर फहर नहीं सकता "तिरंगा" कश्मीर में 
यह कहने वालों के  इरादे क्या नेक हैं?
(३)
हे राष्ट्र ध्वज "तिरंगा"
येन केन प्रकारेण हम सभी के दिलों में
बहा दे प्रेम की गंगा, 
फहरने फहराने में तेरे 
कोई कभी कोई डाल न पाए  अड़ंगा  
...........जय हिंद

टीवी पर ठगी का धंधा जोरों पर चल रहा है, कौन देखे? किसको फ़ूरसत है। यूँ ही लुटते रहिए और रोते रहिए। सिनेमा पर तो थोड़ी बहुत लगाम है पर विज्ञापनों के मामले में टीवी बेलगाम है। टीवी को विज्ञापन चाहिएं, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि विज्ञापन कैसे हैं। अच्छे या बुरे। समाज के हित में या अहित में। टीवी के मामल...सौन्दर्य और कला की प्रतिमूर्ति --माधुरी दीक्षितमाधुरी दीक्षित --एक ऐसा नाम जो ज़ेहन में आते ही दिल धक् धक् करने लगता है । करीब दो दशकों तक करोड़ों युवा दिलों पर राज़ करने के बाद, माधुरी दीक्षित शादी कर यू एस में बस गई थी। अब एक बार फिर देश में टी वी पर 

★ वंदे ★ .....उनके लिए जो शहीद हो गए मिटटी पर..... और उनके लिए जो आज भी शहीद होने , या किसी दुश्मन को शहीद कर देने का ज़ज्बा रखते हैं..... जो जज्बा रखते हैं बिन शहीद हुए देश को आगे ले जाने का....तिरंगा फहराने से हालत बिगड़ना शुरू हो गएदो दिन के बाद 26 जनवरी है, गणतन्त्र दिवस मनाने की पूरी तैयारी दिल्ली ने कर दी है। परेड के लिए भी रिहर्सल को फाइनल कर लिया गया है। इसके बाद भी कहीं न कहीं किसी आशंका के कारण से कोई खुशी सी दिख नहीं रही है।...श्री ललित शर्मा सहित दो सुप्रसिद्द ब्लॉगरों का सम्मानछत्तीसगढ़ राष्ट्रभाषा प्रचार समिति द्वारा आयोजित हम भारतीय सम्मेलन में देश के दो सुप्रसिद्द ब्लॉगरों को ब्लॉग गौरव सम्मान से सम्मानित किया गया। इसमें अभनपुर जैसे छोटे से कस्बे से अपनी ब्लॉग के माध्यम से...

शादी में रोला और हाड़ौती साहित्यकार गिरधारी लाल मालव जी से मुलाकातपरसों रात ही यह तय हो गया था कि रविवार को यहाँ से पचास किलोमीटर दूर स्थित कस्बे अन्ता में एक शादी में जाना है। इस तरह की शादी में जाना हमेशा इस दृष्टि से लाभदायक रहता है, कि उस में बहुत लोगों से मिलना जुल...तारीखों का चक्कर-मिती, बदी, सुदीअ क्सर शादी-ब्याह की पत्रियों और ज्योतिषीय पत्रकों-पंचांगों में तिथियों का उल्लेख जहाँ भी होता है वहाँ *मिति-सुदी-बदी* जैसे शब्द ज़रूर आते हैं मसलन*मिति फागुन बदी पांच * या *मिति कातिक स.. .लघुकथा :: स्वागत‌!!.उस दिन प्याज पहलवान और टमाटर ठाकुर आमने-सामने भिड़ गए। रास्ता तंग था। कोई किसी को आगे बढने की जगह नहीं दे रहा था। प्याज पहलवान दहाड़ा, “हट जा मेरे रास्ते से! 

भैंस पसरी पगुराय (2) भैंस पसरी पगुराय (1) .....अब आगे वैज्ञानिक महोदय पहुंचे भैंस के पास। भैंस देर तक जुगाली करने के बाद सुस्ता रही थी ...सहानुभूति जताते हुए बोले , " भैंस तू पढ़ नहीं पाई , मुझे बहुत दुःख है " मुझे इसका कोई दु...मत छापो नोटों पर महात्मा की तस्वीर !स्वराज्य करुण--लरिकउनू ए.मे. पास किहिनिबहुत दिनन ते हियां मेम्बरी लिये परे रहन तौ अमरेन्दर बोले कि कुछु लिखहौ-पढिहौ कि खाली मेम्बरै बने रहिहौ! तौ स्वाचा कि कुछु लिखा जाये। द्याखा कि यहिमा(ब्लाग मा) लिखा है *ऊ जे 'पढ़ीस' का पढ़िस नाय.. 'बंसीधर' ...बारात के स्वागत में नाचती हुयी घोड़ी का नज़ाराआइये आज आपको एक बारात में ले चलता हूँ ... मिलिए हमारे बड़े भाई श्री गुंजन मिश्रा जी से ... जी हाँ इनका ही विवाह है ! "कैसा लग रहा हूँ मैं ?" शायद गुंजन भाई यही सोच रहे है ! अब एक झलक बारात की ... घोड़ी पर 

तिरंगाआज जब ऑफिस में छोटा सा तिरंगा दिल के पास लगाया तो कुछ ऐसा अनुभव हुआ ...खून थोडा और गर्म लगा और धड़कन की रफ़्तार और तेज़ महसूस हुई, कई दिनों से समाचार पढ़कर ऐसा लग रहा था क्यों तिरंगा फ़हराने पर लड़ाई हो रही...पर्यावरण-कुछ अनुत्तरित सवाल !एक कहावत है कि हाथी के दांत खाने के और, दिखाने के और ! बेशक देश के अखबारों और मीडिया ने इस खबर को कोई ख़ास तबज्जो न दी हो, मगर है खबर बड़ी रोचक ! हमारे इस देश की इस राजनीति ने पिछले साठ-बासठ सालों में और कु..

.मेरे देश का गणतन्त्र दोस्तों घबराओं नहीं यह जो सडक पर भूखा नंगा सिसक रहा हे यह मेरे देश का गणतन्त्र हे । दोस्तों सोचो समझो नहीं यह जो अरबों के घोटाले हें मंत्रियों अधिकारीयों की हठधर्मिता हे यह कुछ और नहीं ' मेरे देश का गणतन्त्र...सड़क खोदकर खेती कार्य शुरू करेंगे किसानग्राम पंडरीपानी से बरदेभाटा मार्ग के मध्य मिनी बाइपास सड़क बनाई जा रही है। दो वर्ष पूर्व प्रारंभ हुए इस सड़क निर्माण में बड़ी संख्या में बरदेभाटा वार्ड तथा ग्राम पंडरीपानी के किसानों की जमीन उपयो...(फिर भी कहती हूँ जननी हूँ)बालिका दिवस पर एक अजन्मी लड़की की व्यथा (फिर भी कहती हूँ जननी हूँ) जन्म लेकर क्या करूँ मै, तुम्हारे इस संसार में. क्या दे सकोगे ? मुझे ख़ुद सा जीने का अधिकार, अन्यथा करते रहोगे, तमाम उम्र बस , हर रिश्तों मे...

वार्ता को देते हैं विराम, सभी को एक बार पुन: गणंतत्र दिवस की बधाई, इस अवसर पर राजा फ़ोकलवा से जरुर मिलें। मिलते हैं ब्रेक के बाद .... तब तक यहाँ भी हो आइये आप

मंगलवार, 25 जनवरी 2011

शास्त्रीय संगीत के पुरोधा पंडित भीमसेन नहीं रहे - ब्लॉग 4 वार्ता - शिवम् मिश्रा

प्रिय ब्लॉगर मित्रो ,
प्रणाम !

आज का दिन हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीत के लिया बेहद दुखद रहा ... अपनी ओजस्वी वाणी से हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत के खजाने को समृद्धि के नए शिखर पर ले जाने वाले पंडित भीमसेन जोशी का पुणे में लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। पंडित जोशी 89 वर्ष के थे।
ब्लॉग 4 वार्ता के पूरे वार्ता दल कि ओर से भारत रत्न पंडित भीमसेन जोशी जी को शत शत नमन और हार्दिक विनम्र श्रद्धांजलि !






सादर आपका 


आज की ब्लॉग वार्ता में सिर्फ़ लिंक्स ...

















































आज की ब्लॉग वार्ता बस यहीं तक ..... अगली बार फिर मिलता हूँ एक और ब्लॉग वार्ता के साथ तब तक के लिए ......
जय हिंद !!

सोमवार, 24 जनवरी 2011

बिन ब्‍याहे घर नहीं लौटे ..बफेट के दस निवेश सिद्धांत ..; ब्‍लॉग4वार्ता .. संगीता पुरी

आप सबों को संगीता पुरी का नमस्‍कार , व्‍यवसायीकरण के दौर में हमारे देश में गाय को माता कहे जाने की परंपरा खत्‍म होती जा रही है। हमने अपनी देसी गायों को गली-गली आवारा घूमने के लिए छोड़ दिया है, क्योंकि वे दूध कम देती हैं और इसलिए उनका आर्थिक मोल कम है, लेकिन आज ब्राजील हमारी इन्हीं गायों की नस्लों का सबसे बड़ा निर्यातक बन गया है। ब्राजील भारतीय प्रजाति की गायों का निर्यात करता है, जबकि भारत घरेलू दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के लिए अमरीका और यूरोपीय प्रजाति की गायें आयात करता है। वास्तव में, तीन महत्वपूर्ण भारतीय प्रजाति गिर, कंकरेज और ओंगोल की गायें जर्सी गाय से भी ज्यादा दूध देती हैं, यहां तक कि भारतीय प्रजाति की एक गाय तो होलेस्टेन फ्राइजियन जैसी विदेशी प्रजाति की गाय से भी ज्यादा दूध देती है। जबकि भारत अपने यहां दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के लिए होलेस्टेन फ्राइजियन का आयात करता है। हाल ही में ब्राजील में दुग्ध उत्पादन प्रतियोगिता हुई थी, जिसमें भारतीय प्रजाति की गिर गाय ने एक दिन में 48 लीटर दूध दिया। तीन दिन तक चली इस प्रतियोगिता में दूसरा स्थान भी भारतीय नस्ल की गिर गाय को ही प्राप्त हुआ। इस गाय ने 45 लीटर दूध दिया। तीसरा स्थान आंध्र प्रदेश के ओंगोल नस्ल की गाय (जिसे ब्राजील में नेरोल कहा जाता है) को मिला। उसने भी एक दिन में 45 लीटर दूध दिया।विस्‍तार से इस लेख को यहां पढा जा सकता है

 गगन शर्मा जी सही बता रहे हैं कि हमारे ऋषी-मुनियों तथा विद्वानों ने अवाम की जिंदगी को सुंदर, सुखमय, निरोग बनाए रखने के लिए जितने उपाय हो सकते थे उन्हें खोज कर हमें सौंप दिया था। पर समय के साथ-साथ हमारी निष्ठा व सोच विदेशों की चकाचौंध में गुम होती चली गयी। डॉ ओ पी वर्मा जी के द्वारा कहानी के रूप में आयुर्वेदिक ज्ञान की महत्‍ता के बारे में एक ज्ञानवर्द्धक पोस्‍ट लिखी गयी है .. एक नजर अवश्‍य डालें। स्‍वास्‍थ्‍य सबके लिए में पढिए .. बुलंदशहर के डीएवी पीजी कालेज के रसायन विभाग की एक शोध छात्रा ने मेडिकल क्षेत्र में तहलका मचाने वाली खोज की है। उसने एक ऐसी दवा की खोज की है जो कैंसर को फैलने से रोकती है। महिलाओं को भी फलों की उतनी ही आवश्यकता है , जितना पुरुषों औरबच्चों की .. बता रही हैं डॉ दिब्‍या श्रीवास्‍तव जी।संसदीय सचिव विजय बधेल का कहना है कि आज की व्यावसायिक शिक्षा ने पूरी तरह से भारतीय संस्कृति को चौपट कर दिया है। एक समय वह था जब स्कूल और कॉलेजों में व्यावाहारित शिक्षा भी दी जाती थी, लेकिन काफी समय से इसको बंद कर दिया गया है .. लिख रहे हैं राजकुमार ग्‍वालानी जी


आजकल हिंदी ब्‍लॉग जगत के ब्‍लोगरों की मीटिंग लगातार चल रही है , इससे कुछ सार्थक निकलकर जरूर आएगा , इसकी हम कामना करते हैं। दैनिक हिंदुस्‍तान में छपी खबर को पढने के लिए यहां क्लिक किया जा सकता है। नुक्‍कड पर लगातार इस मीटिंग के वीडियो जारी किए जा रहे हैं। समीर लाल जी की पुस्‍तक 'देख लूं तो चलू' के बारे में  विभिन्‍न समीक्षकों के विचार पढने हों तो गिरीश बिल्‍लौरे जी के मिसफिट में पहुंचिए। फेससबुक के लिए कई शार्टकट कीबोर्ड कीज लेकर आए हैं .. राहूल प्रताप सिंह राठौर जी। इंटरनेट पर राजस्थानी को अपनी पहचान दिलाने के लिए ब्लॉग सशक्त माध्यम बनकर उभरे हैं , पूरा लिस्‍ट लेकर आए हैं ... अजय कुमार सोनी मोटियार जी। 


नीलिमा सुखीजा अरोडा जी की एक समस्‍या है .. ब्‍लॉग कैसे पढें , एग्रीगेटर बंद हो गए तो क्‍या हुआ , मेरा तो मानना है कि कई चर्चाएं प्रतिदिन चल रही हैं, जहां बहुत लिंक मिल जाएंगे आपको। जादू के पूरे रविवार का कार्यक्रम यहां देखें , वह शंकर अंकल के घर मौज मस्‍ती करके अब सो गया है। अरविंद मिश्र जी धोबीघाट फिल्‍म की समीक्षा  कर रहे हैं। राजकुमार सोनी जी पूछ रहे हैं .. इतना सन्‍नाटा क्‍यूं पसरा है ?? वंदना जी का मानना है कि .. मगर झीलें कब बोली हैं ?? बिखरे मोती में संगीता स्‍वरूप जी की रचना पढिए .. नीलकंठ । अरविंद जांकगड जी के सुंदर गजल पर भी एक नजर डालिए .. सोंचते हैं थी वो आग भी कैसी ?? दर्पण शाह जी ने भी आज एक अच्‍छी रचना पोस्‍ट की है .. वक्‍त को चलने दें आगे .. रास्‍ता मत मांगिए । गांव की याद में एक सुंदर रचना बन गयी है ... स्‍वराज्‍य करूण जी के द्वारा। 


नया वर्ष तो तो 23 दिन पहले शुरू हो गया था , पर वीना शर्मा जी आज शुरू हुई हैं दिलचस्‍प कहावतों के पीछे दिलचस्‍प कहानियां भी होती हैं , . ऐसी ही एक कहानी पढिए राजभाषा हिंदी में .. बिन ब्‍याहे घर नहीं लौटे। वारेन बफेट के बारे में आपने जरूर सुना होगा , उनका कहना है कि शेयर बाजार के लोग जब रोते हैं , मैं हंसता हूं। उनको एक सेंट भी अपने परिवार से नहीं मिली। आज केवल अपने खुद के निवेश के दम पर वे अरबों डालरों के मालिक हैं। कल्‍प तरू में विवेक रस्‍तोगी जी लेकर आए हैं .. बफेट के दस निवेश सिद्धांत। 26 जनवरी पर विशेष श्रृंखला चल रही है ... खुशदीप सहगल जी के देशनामा में, सारे आलेख ज्ञानवर्द्धक हैं। नेता जी सुभाष चंद्र बोस के बारे में जानकारी देते एक लिंक के साथ शिवम मिश्रा जी की पोस्‍ट हाजिर है। सुभाष चंद्र बोस जी का जबलपुर से भी नाता था ... बता रहे हैं महेन्‍द्र मिश्र जी।  नेता जी के बारे में विस्‍तार से जानकारी देते हुए एक पोस्‍ट मिथिलेश दूबे जी ने भी लिखी है। 


जनम दिन के खास मौके पर उन्‍हें हमारा भी नमन !!


अब आज्ञा दीजिए .. मौका निकालकर इसी तरह आप लोगों को लिंक उपलब्‍ध कराते रहेंगे !!

रविवार, 23 जनवरी 2011

कैसे प्रीत सीखाऊँ? थोड़ी मिला दे तू सोडा में ---- ललित शर्मा

नमस्कार, पत्रिका ने खबर अपने मुख्य पृष्ठ पर मध्य प्रदेश एवं छत्तीसगढ के संस्करणों में प्रमुखता से प्रकाशित की है। जिसकी ओर बरबस ही ध्यान चला गया। खबर छापने की धमकी देकर 85 हजार वसूलने वाले एक कर्मचारी के खिलाफ़ पत्रिका ने पुलिस में शिकायत दर्ज करा दी है। पत्रिका रतलाम के वितरण विभाग में काम करने वाले इस कर्मचारी के खिलाफ़ अनुशासनात्मक कार्यवाही भी की जा रही है। ऐसा समाचार मैंने कभी नहीं पढा था कि अखबार ही अपने कर्मचारी के खिलाफ़ धमकी-चमकी लगाकर रुपए वसुलने वाले कर्मचारी के खिलाफ़ जुर्म दर्ज कराए। एक अच्छी शुरुवात है, खबरों की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए। अब चलते हैं आज की ब्लॉग4वार्ता पर....

अलबेला खत्री पहुंच रहे हैं सिंगापुर, क्यों जा रहे हैं, उन्ही से पुछिए। राज भाटिया जी ने फ़रमाया है आओ फ़िर से मिल बेठे...भुले पुराने गिले शिकवे हमारी तरफ़ से मुबारकां कबूल कीजिए और जरुर बैठिए।यादों में खुश रहता दिल एक चित्र देख हो गया दुखी रायटोक्रेट कुमारेन्द्र कह रहे  हैं। दुख न करें देव, हर पुरानी इमारत का यही हाल होता है। रानी विशाल की कविता पढें मृग मरिचिकायथार्थ और परिकल्पनाओं के अधर भावनाओं के सागर में उठती लहर सत्य समझ छद्म आभासों को पाने को लालायित हुआ ह्रदय समक्ष यथार्थ के आते ही आभास क्षणभर में हुआ विलय

हमारी बैंकिंग प्रणाली भी नेताओं की तरह काम करती है यार इतना लिख कर यात्रा पर चल पड़े देव बाबु, थोड़ी मिला दे तू सोडा में फ़िर बुलबुले देख ले, एक गाना सुनिए, शायद पसंद आ जाए।दलाल स्‍ट्रीट में अगले सप्‍ताह रौनक  होने वाली है, संगीता ने कहा है।बकर बकर कहां हुई,जरा दौरा कीजिए और जानिए।परदेशी की प्रीत-देहाती की प्रेम कथा प्रवचन सुनिए यहाँ पर।भैंस पसरी पगुराय वाणी जी ने लिखा है। स्वराज्य करुण जी कह रहे हैं सूरज उगेगा परदे के पीछे ! कहीं से भी उगे, लेकिन उगना चाहिए, हमने कहा। श्यामल सुमन जी कहते हैं कैसे प्रीत सिखाऊँ?, जैसे भी बने सिखाईए, नफ़रत भरी दुनिया में इसी की जरुरत है।

अब चलते हैं धान के देश में, जहाँ अवधिया जी एक ज्ञानवर्धक पोस्ट लगाई प्रसिद्ध व्यक्ति तथा उनके उपनाम , हमें भी लगा कि भारत के महापुरुषों की तुलना विदेशियों के  उपमानों से करते हैं। विदेशियों की तुलना भारतीय उपमानों से क्यों नहीं करते, विषय विचारणीय है।कब तक गोरों को लादे फ़िरते रहेंगे हम।
 
ललित शर्मा said... | January 22, 2011 12:23 PM
कुछ ऐसे नहीं हो सकता क्या? इंग्लैंड का कालीदास- शेक्सपीयर फ़्रांस का समुद्रगुप्त - नेपोलियन इत्यादि, जरा विचार करें :)
जी.के. अवधिया said... | January 22, 2011 12:54 PM
@ ललित शर्मा होना तो यही चाहिए किन्तु दुर्भाग्य की बात है कि ऐसा नहीं है। जिस दिन इस देश का प्रत्येक व्यक्ति स्वाभिमानी और अपनी सभ्यता तथा संस्कृति का सम्मान करने वाला हो जाएगा, उस दिन ऐसा ही हो जाएगा।
प्रवीण पाण्डेय said... | January 22, 2011 1:32 PM
बाहर के उपमानों से तुलना अस्वीकार हो हमें, हमारे अपने मानक हों। मैं ललित जी से सहमत हूँ पूर्णरूपेण।
संगीता पुरी said... | January 22, 2011 1:48 PM
बढिया संग्रह .. वैसे ललित जी की बात में भी दम है .. काश हम भारतीय इतने स्‍वाभिमानी होते !!
Rahul Singh said... | January 22, 2011 2:44 PM
सामान्‍य ज्ञान की खुली किताब - जीके अवधिया.
सिंहावलोकन पर मोती कुत्‍ता की चर्चा हो रही है। राहुल सिंग कहते हैं ''मैं तो कुत्ता राम का, मोतिया मेरा नाम।''राम की कौन कहे, सबकी खबर ले लेने वाले कबीर ने क्यों कहा होगा ऐसा? 'मैं', कबीर अपने लिए कह रहे हैं या कुत्ते की ओर से बात, उनके द्वारा कही जा रही है। पं. हजारी प्रसाद द्विवेदी होते तो जवाब मिल जाता, अब नामवर जी और पुरुषोत्तम जी के ही बस का है, यह।

मुझे लगता है, यह कबीर की भविष्यवाणी है। वे यहां बता रहे हैं कि सात सौ साल बाद एक 'राम' (विलास पासवान, रेल मंत्री) होंगे और उनका एक कुत्ता 'मोती' होगा।दस्तावेजी सबूत ?, चलिए आगे देखेंगे। दस्तावेजी सबूत देखने के लिए यहाँ जाएं।

विनीता यशस्वी के साथ  पिथौरागढ़ सैर कीजिए।900 वी पोस्ट और एक खुशखबरी आई है,एक जरूरी सूचना के साथ फ़ेस बुक से चोरी का माल आप सब के लिये आया है गौर फ़रमाएं , इधर इनर सोईल पर चिंतन है "तुच्छ" लोगों की कमी नहीं है। गोदियाल जी कविता कर रहे हैं अग्नि-पथ ! अख्तर खान अकेला भले ही हैं पर शुभकामनाएं भरपुर बांटते हैं शुक्रिया शुक्रिया भाई दिनेश जी द्विवेदी को, अके्ला जी के ब्लॉग ने चोला बदल डाला है। अब पोस्ट फ़्रिक्वेंसी और भी बढ सकती है। 98वीं भारतीय विज्ञान कोंग्रेस चेन्नई की झलकियां देखिए।

चलते-चलते व्यंग्य चित्र



अखबारों में चर्चा है आम सो अब वार्ता को देते हैं विराम, मिलते हैं ब्रेक के बाद, राम राम

शनिवार, 22 जनवरी 2011

बिना शीर्षक की वार्ता

  • भ्रष्टाचार के कारण  भ्रष्टाचार के कारण इन्फ़ोसिस अपना प्रधान कार्यालय बैंगलोर से पूना ले जा रहा है, जी हाँ कर्नाटक सरकार के भ्रष्टाचार से परेशान होकर, यह पहली बार नहीं हो रहा है, कि कार्पोरेट कंपनी अपना प्रधान कार्यालय बैंगलोर से हटा रहा है, पर जिस आईटी कंपनी के कारण बैंगलोर का नाम विश्व के नक्शे पर जाना जाता है, वही अब बैंगलोर से रवाना हो रही है। आज बैंगलोर मिरर में मुख्य पृष्ठ पर समाचार है, टी.मोहनदास पई जो कि इन्फ़ोसिस में मानव संसाधन प्रभाग के प्रमुख हैं, सुनकर जब मुझे इतना बुरा लग रहा है जबकि मैं बैंगलोर या कर्नाटक का निवासी नहीं हूँ, परंतु मेरे भारत में अब ऐसा भी हो रहा है यह तो बस अब हद्द ही हो गई है। क्या इसी दिन के लिये हमारे स्वतंत्रता सेनानियों ने अपना खून बहाया था, क्या गांधी जी ने आजाद देश का यह सपना देखा था, कि सभी लोग आजादी से भ्रष्टाचार कर सकें और मानवीय मूल्यों का हनन कर सकें।(आगे) 


 आपको याद होगी ये पोस्ट जो मानस में हलचल कर गई चिठ्ठाचर्चा चिठ्ठीचर्चा न्यू चिठ्ठाचर्चा बेस्ट चिठ्ठाचर्चा असली चिठ्ठाचर्चा 
चिठ्ठाचर्चा डॉट फलाना : असली और मोस्ट हाइटेक! उत्कृष्टता की एक मात्र दावेदार दुकान!!

 सुन भी लीजिये क्या कहा बच्चे ने

 

 

शुक्रवार, 21 जनवरी 2011

नयी दुनिया - गरीब सांसदों को सस्ता भोजन - ब्लॉग 4 वार्ता - शिवम् मिश्रा

प्रिय ब्लॉगर मित्रो ,
प्रणाम !

माइग्रेन यानी आधे सिर में दर्द। आजकल यह दर्द आम समस्या बन गया है। इसमे रह-रह कर सिर में एक तरफ बहुत ही चुभन भरा दर्द होता है। यह कुछ घटों से लेकर तीन दिन तक बना रहता है। इसमें सिरदर्द के साथ-साथ गैस बनना, जी मिचलाना, उल्टी जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं। धूमपान, तनाव, उत्तेजना, गलत शारीरिक स्थिति में उठने-बैठने, अनियमित नींद, बीमारी, धूप, तेज रोशनी, तेज आवाज आदि कारणों से भी माइग्रेन हो सकता है। इसके अतिरिक्त भूखे पेट रहने, पर्याप्त मात्रा में पानी न पीने से भी यह समस्या आती है। माइग्रेन का कारण आनुवांशिक भी हो सकता है। नियमित रूप से प्रतिदिन 20-30 मिनट योग करने से माइग्रेन पर काफी हद तक काबू पाया जा सकता है।
अन्य उपाय

माइग्रेन में चिकित्सीय इलाज के अलावा सतुलित आहार जरूरी है।
अगर खाद्य पदार्थो से एलर्जी होने के कारण माइग्रेन हो तो उन फलों-सब्जियों और अनाज से परहेज करें।
नाश्ते में ताजा और सूखे फलों को स्थान दें। दोपहर के खाने में उन चीजों का इस्तेमाल करें, जिनमें प्रोटीन भरपूर हो। मसलन दूध, दही, पनीर, दालें, मास और मछली आदि। रात के खाने में चोकरयुक्त रोटी, चावल या आलू जैसी स्टार्च वाली चीजों के साथ सलाद भी लें।

अधिक समस्या होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। 

हम तो यही कहेंगे कि आप अपने स्वास्थ का ख्याल रखिये .... और ब्लॉग 4 वार्ता  का वार्ता दल आप की रोज़ नयी नयी ब्लॉग पोस्टे पढने की आदत का ख्याल रखेगा !

चलिए चलते है आज की ब्लॉग वार्ता की ओर ...

सादर आपका 

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नया बेहतर TeamViewer :- आपको चाहिए क्या ?








धूप और स्वास्थ्य :- दोनों जरूरी !














नयी दुनिया... :- क्या सच में नयी !?




कलाम, सचिन, रहमान में क्या कॉमन...खुशदीप :- मैं ... इन तीनो का ही फैन हूँ !











केमिकल लोचा-The Chemical Locha :- मुन्ना भाई आये है क्या ?




कैसे समझाऊं उसे... :- कोई रास्ता तो होगा ही !


मुहब्बत :- किस को किस से ?




देखिये मिला मैनपुरी वालों को एक और मंच :- बस आपका साथ चाहिए !


और अब लीजिये बजने गई है हमारी डफली ... और आज बजते हुए आपको दे रही है हमारी २ नयी पोस्टो के लिंक ...




और 





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आज की ब्लॉग वार्ता बस यहीं तक ..... अगली बार फिर मिलता हूँ एक और ब्लॉग वार्ता के साथ तब तक के लिए ......
जय हिंद !!

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