गुरुवार, 23 फ़रवरी 2012

सूरज से बगावत और मैं धरती सी ……… ब्लाग 4 वार्ता....संध्या शर्मा

संध्या शर्मा का नमस्कार... वार्ता का सफ़र अरसे से मुसलसल जारी है,  देखने पर पता चला कि 602 वीं पोस्ट प्रकाशित हो चुकी है और आज 603 वीं पोस्ट है। इस खुशी के अवसर पर वार्ता की तरफ़ से आप सभी पाठकों, टिप्पणिकर्ताओं एवं वार्ता दल के सभी सहयोगियों को मेरी तरफ़ से हार्दिक शुभकामनाएं। सहयोग बनाए रखिए वार्ता का सफ़र जारी रहेगा…………अब चलते हैं आज की वार्ता पर…
 
साहित्य में संतई की राह... मेरे मनोभावों का अनवरत अथक प्रवाह बना रहता है. और फ़िर शुरू हो जाती है एक खोज - एक प्रयास - उन्हें बेहतरीन शब्दों का जामा पहनाने की. उन्हें कुछ इस तरह काग... 
मोहब्बत के रोजे हर किसी का नसीब नहीं होते ...........
जानती हूँ जीना चाहते हो तुम एक मुकद्दस ज़िन्दगी ख्वाबों की ज़िन्दगी हकीकत के धरातल पर सिर्फ़ और सिर्फ़ मेरे संग ………है ना लिखना चाहते हो सारी कायनात पर... 
खुशनसीब ..
*बैठती नहीं हर डालपर बुलबुल हर वृक्ष खुशनसीब नहीं होता करती नहीं कोलाहल हर बगीचे में बुलबुल हर बाग़ खुशनसीब नहीं होता खिलते नहीं हर गुंचे में गुल * * हर हार खुशनसीब नहीं होता मिलते नहीं नदिया के दो ...
आज के नेता...
आज के नेता... आज के नेता एक अरब लोगों को पागल बना रहे है अलग अलग पार्टी बनाकर हमे आपस में लडवाकर अपना मतलब निकाल रहे है, कर रहे है बड़े बड़े घोटाले रिश्तेदारों को टिकट दिला रहे है साले भ्रष्टाचार कर भर ...
ईश-व्यथा!
.दिखता भले नहीं, पर ईश्वर यहीं कहीं है! ये दृश्य का दोष नहीं... अगर हमारे पास दृष्टि ही नहीं है! एक भोली सी मुस्कान में वह है... कभी महसूस हुई थी जिसमें, उस ध्यान में वह है... ज़िन्दा है वह टूटती हुई सांसों...
ज़िंदगी के रंग .... हाइकु के संग
बच्चे का रोना खुशियों का खजाना मुबारक हो ********************* उनीदीं आँखे किलकारी उसकी सुकूं देती है . ***************** [image: Baby_walking : First steps Stock Photo] चलना सीखा हाथ थाम के ...
ऋतु फागुन की
आई मदमाती ऋतु फागुन की चली फागुनी बयार वृक्षों ने कियाश्रृंगार हरे पीले वसन पहन झूमते बयार संग थाप पर चांग की थिरकते कदम फाग की मधुर धुन कानों में घुलती जाए पिचकारी में रंग भर लिए साथ अबीर गुलाल ...
मै ना बांटूँ श्याम आधा आधा
यूँ तो वो सबके हैं मगर केवल मेरे हैं तभी कहता है इंसान जब पूरा उसमे डूब जाता है जैसे गोपियाँ … तुम केवल मेरे हो , आँखों के कोटर मे बंद कर लूंगी श्याम पलकों के किवाड लगा दूंगी ना खुद कुछ देखूंगी ना तोहे ...
ठहर गया उर ज्यों आकाश
ठहर गया उर ज्यों आकाश विरस हुआ जग से जब कोई स्वरस में डूबा उतराया, धीरे-धीरे उससे उबरारस कोई भी बांध न पाया !  जग से लौटा ठहरा खुद में स्वयं से भी फिर मुक्त हुआ, स्वयं ‘पर’ के बल पर ही टिकता मन इससे भी रि...
" गुनगुने आंसू ...."
बर्फ से गाल पे, लुढकी दो बूंदे, आंसुओं की, गुनगुनी सी | बन गई लकीर, नमक की | लोग कह उठे, चेहरे पे उसके, तो नमक है | मन की भाप, कितनी उठी होगी, कितनी सूखी होगी, तब शायद, बना होगा, नमक चेहरे पे | *गुनगुने आंस...
रंगीली दुनिया बेरंग क्यों लगती है ?
रंगीली दुनिया कभी बेरंग क्यों लगती है ? ज़िन्दगी इतनी छोटी है ,फ़िर लम्बी क्यों लगती है ? इंसान दयालु से हैवान कैसे बन जाता है ? कोई क्यों किसी को छोड़ कर चला जाता है ? .....अंत में सब शून्य ही क्यों दीखता ह...
सुखांतकी !
*इस रंगशाला के हम मज़ूर* *कोई कुशल, कोई अकुशल, * *कोई तन-मन से,* *कोई अनमन उकताया सा, * *निभा तो रहे किन्तु सब * *अपना-अपना किरदार !* *पर्दा उठते ही अभिनय शुरू * *और गिरने पर ख़त्म !!* *मगर कभी-कभी कम्व...
झाँक के देखो तो ज़रा
वक़्त की शाख से टूटे लम्हे टाँक के देखो तो ज़रा टूटी है कोई डोर झाँक के देखो तो ज़रा पीले पत्तों की खनक टोह के देखो तो ज़रा ठहर जाती है खिजाँ रोक के देखो तो ज़रा किस्मत को नकारा ढाँक के देखो तो ज़र...
वो सूरज से बगावत कर रहा है ...
कविता के दौर से निकल कर पेश है एक गज़ल ... आशा है आपको पसंद आएगी ... अंधेरों की हिफाज़त कर रहा है वो सूरज से बगावत कर रहा है अभी देखा हैं मैंने इक शिकारी परिंदों से शराफत कर रहा है खड़ा है आँधियों में...
किसी गांव में एक गरीब ब्राह्मण रहता था | ब्राह्मण गरीब होते हुए भी सच्चा और इमानदार था| परमात्मा में आस्था रखने वाला था | वह रोज सवेरे उठ कर गंगा में नहाने जाया करता था| नहा धो कर पूजा...
कहीं एक - २ आने का हिसाब मांग रही पैसा | कही खुद को संभाल पाने में असमर्थ है पैसा | कहीं भूखे बच्चे को रुलाकर सुला रही है पैसा | कहीं जश्ने जिंदगी पल - पल मना रही पैसा | कहीं झोलियाँ भर २ के खुशियां ...
मेष लग्नवालों के लिए 21 , 22 और 23 फरवरी 2012 बुद्धि ज्ञान के मामलों के लिए महत्वपूर्ण होंगे , संतान पक्ष के मामलों में महत्वपूर्ण निर्णय लिए जा सकते हैं। किसी सामाजिक कार्यक्रम में पिता पक्ष का महत्व दिख...
मैं धरती सी ……………… संध्या शर्मा  
जुगनु सा है जीवन मेरा क्षण में बुझती जलती हूँ मन भर प्रकाश फ़ैलाने नित जोत सी जलती हूँ सूरज ढलता पश्निम में ... 
ब्लॉगिंग का अपना एक *स्वभाव* है , उसकी अपनी एक* प्रकृति* है ( यह विषय फिर कभी ) इन सभी के बाबजूद ब्लॉगिंग करने के लिए कुछ बाते निर्धारित की जा सकती हैं .जिनके आधार पर हम *सफल और सार्थक *ब्लॉगिंग की और बढ...
 
अब लेते हैं आपसे विदा मिलते हैं, अगली वार्ता में, नमस्कार...

मंगलवार, 21 फ़रवरी 2012

अजब रूप धारे शिवजी हमारे ... ब्‍लॉग4वार्ता .. संगीता पुरी

सभी प्राणियों के आराध्य हैं। वह सर्वेश्वर और देवादिदेव है । पहनने के लिए वस्त्र की जगह बाघम्बर अथवा मृगशाला, आभूषण के नाम पर विषधर सर्प तथा मुंडमाल शृंगार की जगह मात्र भस्म का लेपन, उन के स्वरूप की पहचान है। वे बैल की सवारी करते हैं। श्मशान वासी हैं। कंठ में धारित विष से नीलकंठ कहलाते हैं। उन के साथ भूत-प्रेत निशाचर और पिशाचों का झुण्ड रहता है। वे महाकाल भैरव के रूप में भी जाने जाते हैं।

फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी को शिवरात्रि पर्व मनाया जाता है। माना जाता है कि सृष्टि के प्रारंभ में इसी दिन मध्यरात्रि भगवान् शंकर का ब्रह्मा से रुद्र के रूप में अवतरण हुआ था। प्रलय की वेला में इसी दिन प्रदोष के समय भगवान शिव तांडव करते हुए ब्रह्मांड को तीसरे नेत्र की ज्वाला से समाप्त कर देते हैं। इसीलिए इसे महाशिवरात्रि अथवा कालरात्रि कहा गया। तीनों भुवनों की अपार सुंदरी तथा शीलवती गौरां को अर्धांगिनी बनाने वाले शिव प्रेतों व पिशाचों से घिरे रहते हैं। उनका रूप बड़ा अजीब है। शरीर पर मसानों की भस्म, गले में सर्पों का हार, कंठ में विष, जटाओं में जगत-तारिणी पावन गंगा तथा माथे में प्रलयंकर ज्वाला है। बैल को वाहन के रूप में स्वीकार करने वाले शिव अमंगल रूप होने पर भी भक्तों का मंगल करते हैं और श्री-संपत्ति प्रदान करते हैं।


 ऐसी मान्यता है कि इसी दिन भगवान शिव ज्योतिर्लिंग रूप में प्रकट हुए थे। इस संबंध में एक पौराणिक कथा भी है। उसके अनुसार-भगवान विष्णु की नाभि से कमल निकला और उस पर ब्रह्माजी प्रकट हुए। ब्रह्माजी सृष्टि के सर्जक हैं और विष्णु पालक। दोनों में यह विवाद हुआ कि हम दोनों में श्रेष्ठ कौन है? उनका यह विवाद जब बढऩे लगा तो तभी वहां एक अद्भुत ज्योतिर्लिंग प्रकट हुआ। उस ज्योतिर्लिंग को वे समझ नहीं सके और उन्होंने उसके छोर का पता लगाने का प्रयास किया, परंतु सफल नहीं हो पाए। जब दोनों देवता निराश हो गए तब उस ज्योतिर्लिंग ने अपना परिचय देते हुए कहां कि मैं शिव हूं। मैं ही आप दोनों को उत्पन्न किया है।

महाशिवरात्रि का व्रत फाल्गुन महीने में कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को रखा जाता है ( Falgun Krishna Paksha Chaturdashi tithi Mahashivratri)। शिवरात्रि न केवल व्रत है, बल्कि त्यहार और उत्सव भी है. इस दिन भगवान भोलेनाथ का कालेश्वर रूप प्रकट हुआ था. महाकालेश्वर शिव की वह शक्ति हैं जो सृष्टि के अंत के समय प्रदोष काल में अपनी तीसरी नेत्र की ज्वाला से सृष्टि का अंत करता हैं। महादेव चिता की भष्म लगाते हैं, गले में रूद्राक्ष धारण करते हैं और नंदी बैल की सवारी करते हैं. भूत, प्रेत, पिशाच शिव के अनुचर हैं. ऐसा अमंगल रूप धारण करने पर भी महादेव अत्यंत भोले और कृपालु हैं जिन्हें भक्ति सहित एक बार पुकारा जाय तो वह भक्त की हर संकट को दूर कर देते हैं. महाशिवरात्रि की कथा में शिव के इसी दयालु और कृपालु स्वभाव का परिचय मिलता है.

कल्याण करने वाले निश्चित रूप से उसे प्रसत्र करने के लिए मनुष्य को उनके अनुरूप ही बनना पड़ेगा’शिवो भूत्वा शिवं यजेत‘ अथात् शिव बनकर ही शिव की पूजा करें धम ग्रंथों में शिव के स्वरूप की प्रलयंकारी रूद्र के रूप में स्तुति की गयी है शंकर के ललाट पर स्थित चंद्र, शीतलता और संतुलन का प्रतीक है यह विश्व कल्याण का प्रतीक और सुंदरता का पयाय है, जो निश्चित ही ’शिवम्‘ से ’सुंदरम्‘ को चरिताथ करता है सिर पर बहती गंगा शिव के मस्तिष्क में अविरल प्रवाहित पवित्रता का प्रतीक है.

उस एक चेतना, एक बीज का नृत्य जिससे विश्व में १० लाख से भी अधिक प्रजातियां प्रकट हुई हैं, वो शिवजी हैं।। सारा विश्व भोलेपन और बुद्धि की शुभ लय से चल रहा है जो शिवजी हैं। शिव ऊर्जा का स्थाई एवं अनन्त स्त्रोत हैं; एक और सिर्फ एक अस्तित्व का अनंत स्वरुप है।शिवरात्रि का अक्षरशः अर्थ होता है वह रात्रि जो शिव तत्व या अंतर्ज्ञान सिद्धांत के तीन अंग को उत्तेजित करता है। समाधि को कई बार शिव सायुज्य से निर्दिष्टि किया जाता है, यह वह धारणा है, जिसे समझाना कठिन है । कबीर दास इसे कहते हैं “कोटि कल्प विश्राम”। दस लाख वर्ष से अधिक का विश्राम एक क्षण में संजोया हुआ। यह सतर्कता के साथ गहन विश्राम की अवस्था है, जो हर पहचान से मुक्ति प्रदान करता है ।

शिव बारात सज रही है!
आज तो बम बम बोल रही है काशी....शिवरात्रि पर काशी शिवमय हो जाती है ..शिव बारात सज रही है ...बरात क्या है चित्र विचित्र दृश्यों का संयोग है -एक बूढा बैल पकड़ा गया है,लोग उस पर भयावह से लग रहे बाल शिव को बैठाने के उपक्रम में हैं ...बैल बिदक रहा है ..लोग उसे संभाले हुए है ..दर्शक दूर से नमस्कार कर रहे हैं ..कहीं बैल बिदक गया तो किसी के थामें न थमेगा ..मेरे मन में भी दहशत है इसलिए एक सुरक्षित कोना ढूंढ लिया है ..बारात सज बज रही है ...यह भी कोई बरात है?

सरकारी दफ्तरों की छुट्टी है और शिवमंदिरों में लोगों की भीड़ लगी है। शिवलिंग पर से दूध की धार थम ही नहीं रही है। जितनी तस्वीरें हमारे फोटोग्राफर लेकर आए हैं या जो टीवी के परदे पर दिख रही हैं वे दूध से अभिषेक की तस्वीरें हैं। यही त्यौहार नहीं, बाकी त्यौहार भी और दूसरे धर्मों के भी त्यौहार भी, इसी किस्म के बहुत से रीति-रिवाज लेकर आते हैं जब ईश्वर के सामने लड्डुओं से लेकर तरह-तरह की कुर्बानी चढ़ाई जाती है। ऊपर वाले का दरबार चढ़ावों से लबालब होता है। सड़क किनारे से जब लोगों को हटाया जाता है तो रोज कमाकर रोज खाने वाले फुटपाथी लोग सबसे पहले हटाए जाते हैं, और ईश्वर की दूकान आखिर तक चलती रहती है।



पत्तों और
कच्चे फलों से
विरक्त कर दिया गया
'बेल 'का पेड़ .....!


श्रद्धा ,अभिव्यक्ति का
ये रूप 
मुझे गया झकझोर ....

क्यूंकि ,
एक स्पर्श के बाद
पत्तों ,फलों की 
जगह थी
कचरे का डिब्बा ...!!

माना जाता है कि 175 साल पहले शिवरात्रि के तीसरे प्रहर में 14 वर्षीय बालक मूलशंकर के हृदय में सच्चे शिव को पाने की अभिलाषा जगी थी। शिव' विद्या और विज्ञान का प्रदाता स्वरूप है परमात्मा का। इसी दिन मूलशंकर को बोद्ध-ज्ञान प्राप्त हुआ था और वह महर्षि दयानन्द सरस्वती बन सके।इस दिन को याद करते हुए दयानंद बोध दिवस के रूप में हर साल मनाया जाता है।

सो अपने कुटुम्बजनों- मेरे चचेरे भ्राता जनों, को मैं सायाश ही एक पत्र लिखा, व इसे डाक द्वारा प्रेषित कर दिया।हालाँकि यह पत्र मेरे कुछ ही बंधुओं को डाक द्वारा प्राप्त हुआ, किंतु जिन्हें प्राप्त हुआ और जिन्होंने इसे पढ़ा , उनसे पत्रोत्तर संवाद अति भावुकतापूर्ण था। मेरा अनुभव रहा है कि विगत कुछ वर्षों में कौटुम्बिक , पारिवारिक संबंधों व अपनेपन पर भारी कुठाराघात हुआ है( यह मेरा मात्र व्यक्तिगत अनुभव है, और इसे आप कतई पारिवारिक संबंधों के बारे में मेरी सामान्य राय के रूप में न लें, और यदि आपका स्वयं का अनुभव इससे इतर है, तो यह जानकर शायद मुझसे प्रफुल्लित व्यक्ति कोई नहीं हो सकता।), और इससे मेरा मन बड़ा दुखी व भावुक था।इन्ही विचारप्रवाहों में ये शब्द मेरे पत्र में उकेरित हो गये।


एक झलक जो तेरी पाए
तेरा दीवाना हो जाये,
गा-गा कर फिर महिमा तेरी
मस्त हुआ सा दिल बहलाए !

तू कैसी सरगोशी करता
जो जैसा, तुझे वैसा देखे,
पल–पल चमत्कार दिखलाता
बुद्धि खा जाती है धोखे !

अनुतप्त न होगा कभी तेरा मन,
कर भोर भये भोले का सुमिरन|
रख शिव चरणों में मनोरथ अपना,
निश्चित मनोकामना होगी पूरन||
सरल सहृदय मन कृपालु बड़े है,
जय भोलेनाथ सन्निकट खड़े है|
अनसुलझी रहे न कोई उलझन,
कर भोर भये भोले का सुमिरन||

रसमसी चाल चले अलबेली अंग चढाय विभूत ।
कानन कुंडल मुकुट विराजत पीताम्बर ओढ़े कटि पूत ।। १ ।। 
दंड कमंडल गहि जपमाला आसन लीनों बनाय ।
कोटि जतन राधा पचिहारी मुख न बोलत मुसिक्याय ।। २ ।।
जगजीवन जोगी हे आये अरस परस लिये ग्वाल ।
मानों कोटि उडुगण शशि जैसे ऐसे बने नंदलाल ।। ३ ।।
दृग दृग थेई थेई धुनि बाजे इत गोपी उत ग्वाल ।
आनंद भई हैं सकल व्रज निता बोलत बचन रसाल ।। ४ ।।

हे भोले ... बम बम भोले ...
देवादि देव महादेव ...
तुम्हें प्रणाम ... कोटि कोटि प्रणाम ...
मैं आज तुम्हारी चौखट पे
कुछ लेने नहीं !
और न ही कुछ जानने आया हूँ !!

अब अंत में शिवरात्रि पर एक विशेष गीत सुनिए ......


आप सबों को शिवरात्रि की बहुत बहुत बधाई और शुभकामनाएं ...
नमस्‍कार , फिर मिलते हैं एक ब्रेक के बाद  ... 

गुरुवार, 16 फ़रवरी 2012

वार्ता परमालवेयर का हमला

वार्ता पर मालवेयर के हमले के कारण वार्ता के टेम्पलेट में सुधार कार्य चालू है, तब तक की छुट्टी है, इसके लिए हमें खेद है.........

व्यवस्थापक
ब्लॉग4वार्ता  

बुधवार, 15 फ़रवरी 2012

बांधे मैंने तुम्हारे जुड़े में सुर्ख़ गुलाब ----- ब्लॉग4वार्ता ------ ललित शर्मा

ललित शर्मा का नमस्कार, वेलेंटाइन डे की जगह छत्तीसगढ़ सरकार के मुख्यमंत्री रमन सिंह की घोषणा के अनुसार माता-पिता दिवस मनाया गया. यह कदम भारतीय संस्कृति को बनाये रखने के लिए मील का पत्थर साबित होगा. पाश्चात्य संस्कृति के बाजारवाद का प्रचार प्रसार जोरों से हो रहा है. समस्त त्योहारों का बाजारी करण उपभोक्ताओं की कमर तोड़ रहा है. सांस्कृतिक प्रदुषण से बचाना आवश्यक है......... अब चलते हैं आज की ब्लॉग4वार्ता पर, करते हैं ब्लॉग जगत की सैर ...............

भारतीय संस्कृति की गरिमा के रक्षकः स्वामी विवेकानंदआज से 104 वर्ष पूर्व सन् 1893 में शिकागो में जब विश्वधर्म परिषद (World Religious Parliament) का आयोजन हुआ था तब भारत के धर्मप्रतिनिधि के रूप में स्वामी विवेकानंद वहाँ गये थे। विश्वधर्म परिषद वाले मानते थ...बलटिहान बाबा यदि इस लेख से किसी की प्रेमिल भावनाएं आहत होती हैं तो इसकी जिम्मेदारी उस शख्स की पत्नी की होगी.........पति तो वैसे भी गैरजिम्मेदार माने जाते हैं : ) बहरहाल आप लोग अपनी अपनी सीट बेल्ट बाँध ले...

जन्मदिन का सप्ताह और महाबलेश्वर की यात्रा.मित्रों सबसे पहले आप सभी का आभार जो आप सभी नें जन्मदिन की शुभकामनाएं ब्लाग और फ़ेसबुक के माध्यम पर दी.... पहली बार विशिष्ट होनें सा आभास हुआ :-)अम्मा और पापा मुम्बई में खास हमारे जन्मदिन के कारण ही आए थे, ...एक 'कील' हूँ मैं **? असम्भव की गहरी खाई में गिरी हुई **** एक* 'कील' *हूँ मैं *** ? साधारण *** जंग लगी *** खुद से ही टूटी हुई ** थकी ??? कमजोर !!! तुम्हारा तनिक -सा सपर्श ,,, मुझे जिन्दगी दे सकता हैं प्रिये ! ...

दवेजी का वैलेन्टाईन डेप्रसिद्ध कार्टूनिस्ट पवन जी से साभार सुबह जब हम निकलने के लिये तैयार होने पहुंचे, तो देखा नया पैंट नयी शर्ट हमारा इंतजार कर रही थी। दिमाग चकराया कि नये कपड़े खराब ...पुनः केरल- कोच्चि या कोचीनकोच्चि या कोचीन – दिन आंठवा – आज जब हमारा भ्रमण परिवार कमरे से बाहर आया तो सामान लॉबी में रखा हुवा था जो कि पूर्व से दो तीन गुना ज्यादा था और आज कोच्चि में तो शॉपिंग ही शॉपिंग थी । आज अगर सिक्यूरिटी वाले...

मिलन-यामिनी मिलन-यामिनीआज रिमझिम मेघ रिमझिम हैं नयन भी पास मेरे तुम,तुम्हारे पास मस्ती, बादलों की गोद में बिजली विहँसती, मैं भरी-उमड़ी भरा-उमड़ा गगन भी; आज रिमझिम मेघ रिमझिम हैं नयन भी ...ऋतु नन्ही सी गुडि़यों की रानी आई है परियों की नानी नित आती रहें चंदा की किरण बन्नों बन जाना तू चंदन महके तुमसे गुलशन-गुलशन खुश्बु से झूमे सारा चमन लाई सौगातें मनमानी ऋतिुओं की रानी दिवानी कुंदन सा चमके तेरा ...... 

वैलेन्टाइन सभा कल्लू काटा और लल्लू लाटा हमारे मुहल्ले के मुहल्ला विकास समिति के सबसे अधिक सक्रिय सदस्य हैं, बल्कि वास्तव में कहा जाए तो वे दोनों ही मुहल्ला विकास समिति के सर्वेसर्वा हैं। दोनों ही चाहते हैं कि मुहल्ले में...तुझे मैला न कर दें..! ओ....!! श्वेतवसना  ओ..!! स्फटिक प्रतिमा, गंगोत्री मुख सी, तू लाज में सिमटी, ओ दूधिया दीप्ती,  तू गाँठ सुगंध की , तारों की चाँदी,   यौवन तेरी बाँदी,      ओ....!! रूपगर्विता, कहता हूँ...
घूम आओजीवन की एकरसता से गर मुक्ति पाना हो उत्साह और उमंग को जीवन का अंग बनाना हो जोश किसको कहते है औ कैसा है गंगा का बंधनयुक्त उन्मुक्त मस्त विहार देखना चाहते हो तो घूम आओ हरिद्वार। गंगा की इठलाती,लहराती औ बलख...श्रीलंका- विलुप्त हुए चीते वेल्‍लूपिल्‍लई प्रभाकरन जनश्रुतियां व लोक साहित्य किस तरह से इतिहास को पुष्ट करती हैं, इसका बेहतरीन उदाहरण मलिक मोहम्मद जायसी के 'पद्मावत' में देखा जा सकता है। इस ग्रंथ के आरंभ में सिंहलद्वीप की राजकुमार.

छोटू उस्ताद जी सही समझे आप ....आज मिलवा रही हूँ अपने छोटू उस्ताद से .. अभी तो जस्ट शुरूआत है..देखिए आगे-आगे करते हैं क्या ---- * नीले पुलोवर वाला लड़का * पुराने नीले पुलोवर-वाला, वह लड़का उछलता कूदता, सड़क पर शोर ...ये गुलाब एक सुर्ख़ गुलाब देकर , कर देते हैं , अपने भावनाओं का इजहार लोग़ यदि यही है अपने प्रीत को बयाँ करना, तो कई बार बांधे मैंने , तुम्हारे जुड़े में सुर्ख़ गुलाब और तुम मुस्कुरा कर अपने हाथों से छू कर गुलाब ...

एक देहाती क़ब्रिस्तान में लिखा गया शोकगीत इम्तेहानी मजबूरियों के चलते कभी पढ़े गए तमाम साहित्य में से जो कुछ याद आता है कभी-कभार, टॉमस ग्रे की ये अमर रचना उसमें से एक है-- ‘मधुबनी पेंटिग’- गर्दिश में एक चित्र शैली खबरों में इतिहास अक्सर इतिहास से संबंधित छोटी-मोटी खबरें आप तक पहुंच नहीं पाती हैं। इस कमी को पूरा करने के लिए इतिहास ब्लाग आपको उन खबरों को संकलित करके पेश करता है, जो इतिहास, पुरातत्व या मिथकीय इति...

वार्ता को देते हैं विराम, सबको राम राम. आइये नए अभियान  पर चलते हैं
..

मंगलवार, 14 फ़रवरी 2012

वैलेंटाइन हफ्ते के बहाने..गुफ्तगू प्यार की .. ब्‍लॉग4वार्ता .. संगीता पुरी

जीवन की उमंग का प्रतीक ऋतुराज बसंत  का आगमन हो गया है। वसंत के महीने में ही हमारे यहां होली मनायी जाती है,  होली पर एक भोजपुरी गीत  सुने   नूतन   परंपरा शुरू हुई है।  समय  तेजी से आगे बढ रहा है , हर रोज़ नए-नए तरक़ीब से....... मनाए जाते हैं त्‍यौहार  कुछ लम्हों के लिए  सारे काम धाम छोडकर मनाएंगे लोग  "वैलेंटाइन डे" । भले ही यह विदेशी त्‍यौहार हो , पर इससे कोई भी अब अनजान नहीं  खासकर आज का युवा वर्ग , क्‍यूंकि  जिंदादिली से भरपूर है ये ....???  वेलेण्‍टइन डे के दूसरे दिन  15 फरवरी को आम लोगों के लिए बंद रहेगा मुगल गार्डन।  


वेलेण्‍टाइन डे .. मेष लग्‍नवालों के लिए महत्‍वपूर्ण ... 16 से 19 वर्ष की उम्र के नौजवान सावधान रहें !! मेरा अनुरोध है , इस त्‍यौहार को बहुत  गंभीरता से न लें वरना सब अपनी बातें कहेंगे .. कुछ तेरी कुछ मेरी है ये इक कहानी, जो नहीं मनाते हैं ये त्‍यौहार ,    उनका है हर दिन बसंती !   इसलिए    त्यौहार जरूर मनाएं, पर उचित-अनुचित का ख्याल रखते हुए।     आज का प्रश्न-204 question no-204   में पूछा गया है ... यारों कुछ तो याद करो  जबाब इसका .. गर्म आंच-सी क्यूँ है ??


 वैलेंटाइन हफ्ते के बहाने...  ही धीरे धीरे धीरे गुफ्तगू प्यार की  चली , उम्र के खास  उसी ढलान पर ...जहां  उन्मादी प्रेम  को बांधना मुश्किल होता है ,  प्यार की बात  चलती गयी ,  प्रेम पत्र   का आदान प्रदान हुआ और बनी  "एक छोटी सी लव स्टोरी जो गठबंधन में बदल गयी "   अब वो तो कहेंगे ही कि  ऐसा रहा हमारा वैलेन्टाइन  पर लोग कुछ और कहेंगे , शायद ऐसा ही प्यार होता है....... !!!  भले ही  कार्टून कुछ बोलता है- वैलेंनटाइनस डे ! पर  क्या वह प्रेम नहीं था ?

सोमवार, 13 फ़रवरी 2012

रुपहला छत्तीसगढ और मिठलबरा की आत्मकथा -- ब्लॉग4वार्ता -- ललित शर्मा

ललित शर्मा का नमस्कार, गिरीश पंकज जी के बहुचर्चित उपन्यास "मिठलबरा की आत्मकथा" के तेलगु संस्करण का विमोचन पेंशनर्स क्लब रायपुर में हुआ। उपन्यास के अनुवादक गणपत राव हैं। इन्होने बड़ी खुबसूरती से उपन्यास का अनुवाद किया है। किसी भी साहित्य के अनुवाद में अनुवादक दो भाषाओं को जोड़ने के लिए सेतू की भूमिका निभाता है। साहित्य का अनुवाद अन्य भाषा-भाषियों को आपस में जोड़ने का कार्य करता है। इस अवसर पर हम गिरिश पंकज जी एवं गणपत राव जी को हार्दिक शुभकामनाएं देते हैं। अब चलते हैं आज की लेट लतीफ़ वार्ता पर……

आकाशवाणी विनाशवाणी की राह पर..यह नारा सत्य साबित हो तो बेहतर..! निश्चय ही आकाशवाणी से समय-समाज-व्यक्ति-दिनचर्या में क्रांतिकारी परिवर्तन हुए हैं। बहुत कुछ आज भी हम स्वाद की तरह याद करते हैं तो वह आकाशवाणी की ही कृपा से। गाँव गिराँव में...सूरज की बात सुनो*सूरज की बात सुनो*** * * *श्यामनारायण मिश्र*** * * *एक नदी क्या सूखी*** * बालू में फंसी कई नावें।*** *मछुआरे !*** *हिलक-हिलक रोने से होगा क्या ?*** * सूरज की बात तो सुनो।*** *जो पहाड़ टूटा है*** ...

सोलांग घाटी में बर्फबारीइस यात्रा वृत्तान्त को शुरू से पढने के लिये यहां क्लिक करें। 8 दिसम्बर, 2011 की सुबह मैं और भरत कुल्लू में बस अड्डे के पास एक सस्ते यानी दो सौ रुपये के रेस्ट हाउस में सोकर उठे। पडे पडे ही लगा कि रात बारिश ...स्वप्न मरीचिका, यथार्थ संग ईमारत के दूसरे माले पर के एक किराये वाले फ़्लैट से निकलकर मैं जब बाहर को निकला तब नहीं जानता था ...लगे जो बन्द पड़ी * *खोलता इसे * *बेचैन मन मेरा* *रोज़ ख्यालों में पढ़ी * *2 .* *बन्द किताब * *कोई राज़ छुपाए * *सारे जहां से * *राज़ में जो है छुपा* *वह दिल में बसा * *3 .* *बन्द किताब...बन्द किताब

सच ! ज़माना बदलता हैपहले रिश्ते प्यार के लिए होते थे, चीज़ें इस्तेमाल करने के लिए..​​* *​​ ​अब चीज़ों को प्यार किया जाता है और रिश्तों को इस्तेमाल...​ ​​ ​ज़िंदगी की इस कड़वी हक़ीक़त को छोड़िए, इस ...चक्रव्यूह
मेरा दिमाग आजकल दिल पे खूब बिगडता है .. कहता है..मना करता है ...समझाता है पुरजोर कोशिश करता है कि मैं इस जी के जंजाल में ना पडूँ . इक बार फंसी तो निकल नहीं पाउंगी चक्रव्यूह है ये ,अन्दर ही रह जाउंगी मैं 
 
स्मृतियों में रूसअसल में ये मेरे हाथ में तो 18 जनवरी को ही आ गयी थी, लेकिन यदि मैं समय से समीक्षा कर देती तो हमेशा व्यस्तता का रोना रोने वाली मेरी इमेज का क्या होता? टूट न जाती? इस .२०७वीं हड्डीयूं तो सामान्य आदमी के शरीर में २०६ हड्डी होती है लेकिन बंधुवर सचेत हो जाइए। एक एक्सट्रा हड्डी भी हमारे शरीर में न जाने कबसे चिपकी बैठी है और हमें इसका पता ही नहीं। या फिर पता होने के बाद भी हम इसे अपने श...
 
आन क लागे सोन चिरैया, आपन लागे डाइनयह पोस्ट पुनः प्रकाशित है। उन लोगों के लिए जिन्होने इसे नहीं पढ़ा, उन लोगों के लिए जो इसे पढ़कर भूल गये और उनके लिए भी जो पढ़कर नहीं भूले :-) काशिका में लिखी इस कविता का शीर्षक है.... वैलेनटाइन ब..विद्यासागर नौटियाल का जानाविद्यासागर नौटियाल के निधन से हिन्दी ने एक समर्थ भाषा-शिल्पी और अप्रतिम गद्य लेखक को खो दिया है.29 सितंबर 1933 में जन्मे नौटियालजी का जीवन साहित्य और राजनीति का अनूठा संगम रहा. वे प्रगतिशील लेखकों की उस व...
 
पेप्सी का बाप है फैंटा*यू*पी के चुनावी चौपाल का आज 22 वां दिन है, इस दौरान आईबीएन 7 की टीम ने लगभग पांच हजार किलो मीटर का सफर पूरा कर लिया है और अब तक 35 जिलों में हम दस्तक दे चुके हैं। इसमें 19 जगहों पर हम चौपाल लगा चुके हैं...मैं जिंदगी का साथदेवानंद की पुस्तक 'रोमांसिग विथ लाइफ' तो पूरी तरह पढ़ी नहीं, ... पुस्तकें इतनी महंगी हो गई हैं कि पढ़ने के थोड़ा-बहुत शेष रह गए मोह के बाद भी पसंद की सारी पुस्तकों को खरीद पाना संभव नहीं। कोई अच्छा पुस्तक....
 
ये जो जापान है.सोनी का टेलिविज़न, तोशिबा का लैपटॉप, असाही की बीयर,पैनासॉनिक की प्रसाधन सामग्रियाँ , तोयोता की कार, सेको की घड़ी, कैसिओ का म्यूज़िक प्लेयर,शिन्कान्सेन बुलेट ट्रेन , यामाहा की मोटरसायकल और होंडा का स्कूटर ...गृह प्रवेशसमस्त स्नेही मित्रों को सादर अभिवादन. कुछ समय से जिस अत्यधिक व्यस्तता के चलते आप सभी स्नेहीजनों से अवांछित दूरी बनी रही उसका पटाक्षेप मंत्रोच्चार व शंख ध्वनि के साथ बड़े ही पवित्र ढंग से हुआ. इश्वर की अस...
 
लो गिरीश बाबू भी हो गये सम्मानितएक आत्मीय समारोह बनाम "एक पंथ:बहुकाज" कितना व्यग्र थे श्री डा० विजय तिवारी "किसलय" जी सोच रहे होंगे कि शहर भर की सड़कों का निर्माण काश आज तो रुक जाता. तो आमंत्रित लोग सहज विशुलोक आ सकते. जी सच ऐसा ही हुआ ...रुपहला छत्‍तीसगढ़ हबीब जी के नया थियेटर का अभिवादन-संबोधन रहा है। 'पीपली लाइव' के पात्र इसका अनुकरण करते हैं तब लगता है कि हम नया थियेटर के किसी वर्कशाप में उपस्थित हैं। फिल्‍म आरंभ होती है हबीब तनवीर और नया थिये... ...

रविवार, 12 फ़रवरी 2012

सत्य को खोजते हैं या देह दर्शनाओं के चित्र छापने का उनका टेंडर पास हुआ : गिरीश बिल्लोरे "मुकुल"

काजल भाई गज़ब कर दिया आपने 

ज्योतिष जाल बुनतीं संगीता पुरी : बागीची में प्रकाशित आलेख के लिये आभार के साथ  हमारे प्रदेश के मुख्य सचिव जी जबलपुर आए इस बारे में  विस्तार से खबर इधर यानी "विकास-वार्ता" पे दर्ज़ कर दी है  और हम दिन भर की थकान के बाद घर लौटे तो ललित भाई फ़ून की घंटी बाजा दिये बोले भाई आज़ हमारा नेट स्लो है. हम समझ गए कि वार्ता हमें लगानी है फ़िर भी हम अनजान बन गये पर वादा कर ही दिया सो आज़ एक अखबार की खबर यहां चर्चा योग्य है जिसमें ७७ साल पहले नारी-क्रांति का जिक्र है अवश्य देखिये.स्त्री के बारे में बेहद संवेदित हैं पुरुष बेचारे मक्कारियों से बाज़ नहीं आ पाते फ़ेस बुक पर तो बेशर्मी की हद हो गई :-
वार्ता के अंत में वो बिंदु आलेखित है 
 तुम्हारा है हुनर ताजा सितम ईज़ाद कर लेना.......... सच ही तो है परंतु उससे बड़ा सच ये है "

मधु से मधुमेह बनता है, लेकिन मधु से मधुमेह नहीं होता." ये क्या घोर नकारात्मकता के दौर के लिये गार्जियन्स जागेंगे कब.. देश भर के अखबार १५ बरस के कातिल छात्र  का जिक्र कर रहें है ब्लाग पर इस बिंदु पर बात कम ही हुई पर हुई अवश्य "15 साल की उम्र और हत्या?

ये तो पशिम के संस्कार हैं इंग्लैण्ड में भारतीय छात्र पर हमला. -लंदन में हैदराबाद निवासी एक छात्र पर शुक्रवार रात को कुछ लोगों ने हमला कर गम्भीर रूप से घायल कर दिया। दुखद स्थिति है. अगर सकारात्मकता के साथ दो कदम साथ चल देते तो  तुम्हारा क्या जाता..... - बावज़ूद इसके  तस्लीम पर दधीचि बनने का आह्वान उत्साहित कर रहा है  जे लो कल्लो बात भैया ने वैलेंटाइन डे: प्रेम का पर्व या संस्कारों का अवमूल्यन : -पूछकर सबको नि:शब्द कर दिया.. लोगों के गुलाब धरे के धरे रह जाएंगे..
एक ब्लाग पर महाशय जी सत्य को खोजते हैं या देह दर्शनाओं के चित्र छापने का उनका टेंडर पास हुआ पता नहीं पर इतना अवश्य है कि लोग उनके ब्लाग पर फ़ोटू देखने खूब जाते हैं.. 
क्यों न अब अखबारों और चैनलों पर लिखा जाए “केवल वयस्कों के लिए” क्यों न अब न्यूज़ चैनलों और अख़बारों की ख़बरों के साथ “केवल वयस्कों के लिए” जैसा कोई टैग लगाना चाहिए?  जुगाली पर प्रकाशित इस आलेख को देख कर लगा ऐसी व्यवस्था ऐसे ब्लाग्स पर भी हो सत्य-की-खोज करने के बहाने कामुक तस्वीर छाप रहे हैं. 
देखें ब्लाग बुलेटिन में क्या है  होनहार बिरवान के होत चिकने पात 
अंत में कवियत्री चोपड़ा की पीडा 
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i do not chit chat please dont send me greatings and mesage !!
मैं फेसबुक पर हाय हैल्लो और टाइम पास कार्य के लिए नहीं हूँ ।आप सभी से मेरा करबद्ध निवेदन है कि क्रपा कर के मुझे अमर्यादित संदेश प्रेषित न किया करे । धन्यवाद
 ·  ·  · 21 minutes ago via mobile · 

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