मंगलवार, 23 मार्च 2010

कह गयी फ़ांसियों मे फ़ंसी गर्दने,ये हमारा नमन है वतन के लिए---ब्लाग4वार्ता----ललित शर्मा

सांस का हर सुमन है वतन के लिए, जिन्दगी एक हवन है वतन के लिए, कह गयी फ़ांसियों मे फ़ंसी गर्दने, ये हमारा नमन है वतन के लिए--मित्रों आज 23 मार्च है आज ही के दिन आजादी के मतवालों ने अपने प्राणों की आहुति दी थी। हम उन्हे नमन करते हैं तथा अपनी विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं। मै ललित शर्मा आपको ले चलता हुँ आज की ब्लाग यात्रा पर कुछ चुने हुए लिंकों के साथ------------
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भगत सिंह
राजगुरु
सुखदेव
पहला पर्चा खोलते हैं गिरिजेश राव जी का--इन्होने कहा है कि वे लोग किस खुशी की बात करते थे?बलिदान दिवस: 23 मार्च 1931,खुश रहो अहले-वतन, अब हम तो सफर करते हैं।वे लोग किस खुशी की बात करते थे ? ऐसा क्या था उस 'खुशी' में जो  जीवन तक निछावर कर गए?.. आज स्वयं से, सब से यह पूछ रहा हूँ, "हम 'खुश' तो हैं न ?" 

प्रेमचंद गांधी जी ने लिखा है -शहीदों के नाम माफ़ीनामा---- तुम्हारी हत्या पर भी रख लेंगे २ मिनट का मौन रतन सिंग शेखावत  ज्ञान दर्पण पर--(अभागे भारतीय की फरियाद पर सिक-यू-लायर(Sick you Liar, बीमार मानसिकता वाले झुट्ठे) नेता द्वारा सांत्वना भरे कुटिल उपदेश की तरह पढ़ें) --------------- ---- ------ ---------------------------- अच्छा!!! वो दुश्मन है----तेईस मार्च के शहीदों को शत-शत नमन.भारतीय नागरिक - Indian Citizen द्वारा भारतीय नागरिक - Indian Citizen -4 घंटे पहले पर पोस्ट किया गया भगत सिंह, राजगुरू और सहदेव को उनके शहीदी दिवस पर शत-शत नमन.. 
आज शहीदी दिवस है----->>>दीपक 'मशाल' दीपक 'मशाल'  मसि-कागद - पर --आज शहीदी दिवस है भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु का.. कुछ याद आ रहा है- ''भगतसिंह, सुखदेव, राजगुरु..पहन वसंती चोले रात मेरे सपने में आये आके मुझसे बोले हमारा व्यर्थ गया बलिदान.. हमारा व्यर्थ गया बलिदान..,,ये डीज़ल लगा-लगा कर थक़ गया आज तक़ किसी ने पलट कर देखा तक़ नही,सोचता हूं अब पर्फ़्यूम बदल ही लूं,ऐक्स इफ़ेक्ट कैसा रहेगा?Anil Pusadkar अमीर धरती गरीब लोग -पर,बड़ी-बड़ी बात करने के लिये ज़रूरी नही है बड़ी पोस्ट लिखना सो एक छोटी सी पोस्ट आप लोगों के विचारार्थ सामने रख रहा हूं।वैसे तो मेरी खुद की नाक बहुत खराब है मगर पर्फ़्यूम लगाने का बड़ा शौक है मुझे।फ़िलहाल डीज़ल यूज़ क...
वे नहीं सूंघ सकतीं बेकरी की डबलरोटी--शरद कोकास द्वारा शरद कोकास -पर-- नवरात्रि पर्व : सातवाँ दिन * *अब तक जिनकी कवितायें आपने पढ़ीं :* फातिमा नावूत , विस्वावा शिम्बोर्स्का, अन्ना अख़्मातोवा .गाब्रीएला ----ममता  अरुणाचल प्रदेश की वादियों से - पर -- गंगा लेक यहां का एक पिकनिक स्पॉट माना जाता है। ईटानगर से तकरीबन १० -११ कि.मी.की दूरी पर ये गंगा लेक है । तो एक शनिवार को हम लोगों ने यहां जाने का कार्यक्रम बनाया । बस फिर क्या था ड्राईवर को बुलाया गया और च...
स्वच्छ दिल्ली ----- सुन्दर दिल्ली ---- मेरी दिल्ली --- LET'S DO IT!!! DELHI--यशवन्त मेहता "फ़कीरा"  VOICE OF YOUNG INDIA ------ युवा भारत की आवाज -पर दिल्ली मेरी शान!!! भारत की राजधानी दिल्ली, देश का दिल दिल्ली!!! २३ जनवरी २०१० स्थान -- रोज गार्डन दिल्ली ५५ जागरूक नागरिक, २० डीडीए और १० कॉरपोरेट कर्मचारियों ने मिलकर दिल्ली के रोज गार्डन की सफाई करी. जान...---मेरी बीवी….उसकी बीवी राजीव तनेजा हँसते रहो -पर***राजीव तनेजा*** [image: biwi] “ओह्हो…शर्मा आप?..आज ये सूरज अचानक पश्चिम से कैसे निकल पड़ा?…कहिए सब खैरियत तो है?”… “जी…बिलकुल”…. “तो फिर आज अचानक…यहाँ कैसे?”… “कैसे क्या?…ये आपके सामने वाले पेट्रो...
 काम का प्रतिफल मिलने की खुशी दिनेशराय द्विवेदी  अनवरत -पर--शनिवार को मैं एक थकान भरी व्यवसायिक यात्रा से लौटा था। उस दिन अदालत में कोई काम न था। सिवाय एक मुकदमे में अगली पेशी नोट करने के। जिस अदालत में यह मुकदमा चल रहा है वहाँ की महिला जज प्रसूती अवकाश पर हैं जो छ...सांसद संसद और साइकिल डा०आशुतोष शुक्ल  सीधी खरी बात.. -पर ,बीजू जनता दल के सांसदों ने पर्यावरण पर जागरूकता पैदा करने के लिए लोकसभा अध्यक्ष से जब अनुमति मांगी थी तो लोगों ने सोचा कि शायद यह भी एक राजनैतिक शोशा ही हो पर मीरा कुमार को यह विचार इतना पसंद आया कि उन्हों...
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आत्म-उचाव !पी.सी.गोदियाल अंधड़ ! - पर--*स्वप्न सुन्दरी, मै अपने इस बदतमीज, नादां दिल की हरकतों पर शर्मशार हूं । और मेरी जुबां पे आये दर्द को सुनकर, छलक आये उन आंसुओं को, पलकों मे ही छुपा लेने पर, तुम्हारे इन नयनों का शुक्रगुजार हूं ॥ ...तेरे जैसा देश भक्त नारदमुनि नारदमुनि जी - पर--तेरे जैसा देश भक्त कोई हुआ ना होगा मतवाला, भारत मां की रक्षा हेतु अपना जीवन डे डाला। आज हम अपने परिवार के साथ भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव को प्रणाम करते हैं। उनकी वीरता के कारण भारत आजाद हुआ। अब वर्तमान म...
तुम्हे कैसे याद करुँ भगत सिंह-अशोक कुमार पाण्डेय जिन खेतों में तुमने बोई थी बंदूकेंउनमे उगी हैं नीली पड़ चुकी लाशें जिन कारखानों में उगता थातुम्हारी उम्मीद का लाल सूरजवहां दिन को रोशनी रात के अंधेरों से मिलती है ज़िन्दगी से ऐसी थी तुम्हारी मोहब्बतकि कांपी तक नही जबानसू ऐ दार पर-----अश्लीता को बढा रहा है इलैक्ट्रानिक मीडिया :लिमिटि खरेलिमिटि खरे का कथन गलत है ऐसा कहना भूल होगी रोज़नामचा वाले लिमिटि जी के बारे में जो प्रोफ़ाइल में है ठीक वैसा ही व्यक्तित्व जी रहे. लिमटी खरे LIMTY KHARE हमने मध्य प्रदेश के सिवनी जैसे छोटे जिले से निकलकर न जाने कितने शहरो की खाक छानने के बाद दिल्ली जैसे--२३ मार्च को कुछ ख़ास है क्या ???? हैप्पी शहीद डे यार !देश के तीन सपूत जिन्हें आज देश भुला बैठा है पापा, आज २३ मार्च को कुछ ख़ास है क्या ?हाँ बेटा, तुम्हें नहीं पता , आज शहीद दिवस है। आज ही के दिन तो हमारे आजादी के कुछ दीवाने हँसते हँसते अंग्रेजों के फांसी के फंदे को फूल की माला की तरह गले में लपेट कर झूल गए
  
अनोखे भगत ! आज जब भगत सिंह की शहादत पर अपने चैनल के लिए एक स्टोरी लिखते वक्त किसी ने मुझसे पूछा, कि भगत सिंह के साथ तो दो और क्रांतिकारी सुखदेव और राजगुरु भी फांसी चढ़े थे। तो फिर भगत सिंह को ही ज्यादा तवज्जो क्यों। भगत सिंह को ज्यादा तवज्जो क्यों ? सवाल न तो नया है --भगत सिंह के शहादत दिवस के प्रति सरकार उदासीन क्यों ?देश में किसी महापुरुष की सबसे ज्यादा उपेक्षा हुई है तो वह निर्विवाद रूप से शहीदे आजम भगत सिंह हैं। उन्हें याद किया भी जाता है तो सिफर् इसलिए की एक नौजवान २३ साल की उम्र में हंसते हुए देश की खातिर सुली पर चढ़ गया। वह क्या सोचते थे, सामाजिक, आथिर्क----शहीदों की चिताओं पर…शहीद भगत सिंह(27 सितंबर 1907- 23 मार्च 1931)अवतार सिंह पाश (9 सितंबर 1950 से 23 मार्च 1988)भगत सिंह ने कहा…बम और पिस्तौल कभी-कभी क्रांति को सफल बनाने के साधन हो सकते हैं…। विद्रोह को क्रांति नहीं कहा जा सकता। यद्यपि यह हो सकता है कि विद्रोह का परिणाम--
आज की चर्चा को देते हैं विराम---सभी को राम-राम

10 टिप्पणियाँ:

बहुत अच्छी चर्चा सर जी...
मेरी एक व्यक्तिगत शिकायत रह गयी है....
आपने मेरा पोस्ट शामिल नहीं किया सर जी.....
......
..........
विश्व जल दिवस....नंगा नहायेगा क्या...और निचोड़ेगा क्या ?
लड्डू बोलता है ....इंजीनियर के दिल से....
http://laddoospeaks.blogspot.com/2010/03/blog-post_22.html

बहुत सुन्दर ललित जी! इतने सारे लिंक्स को समेट लिया आपने!

बढ़िया विषय लिया आपने , इस शहीदों को मेरा शत-शत नमन !

बहुत सुन्दर चर्चा

काफी अच्छे अच्छे लिंक मिले
शहीदों को मेरा शत-शत नमन !

काफी अच्छे अच्छे लिंक मिले
शहीदों कि चिताओं पर लगेंगे हर बरस मेले
वतन पर मरने वालों का यही बाकी निशां होगा

मेरी एक शिकायत है....
आपने मेरा पोस्ट शामिल नहीं किया सर जी.....

शहीदों को मेरा शत-शत नमन !

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