शनिवार, 20 मार्च 2010

रोमांटिक मुड की ऐसी तैसी--जवान कैसे रहे?----(ब्लाग4वार्ता)---ललित शर्मा

ज एक चुटकुला याद आ रहा है चंदु गणित के सर से बोला-" सर, हिन्दी वाले सर हिंदी मे पढाते हैं , अंग्रेजी वाले सर अंग्रेजी मे पढाते हैं, तो फ़िर आप गणित मे क्यों नही पढाते? गणित वाले सर तपाक से चंदु से बोले -- "ज्यादा तीन पाँच मत करो, वरना दो-चार जड़ दुंगा, तो छठी का दुधा याद आ जाएगा, अच्छाई इसी में है कि जल्दी से 9-2-11 हो जाओ।" अब चलकर कुछ उम्दा चिट्ठों की चर्चा की जाए। तो चलिए आपको मै ललित शर्मा ले चलता हुँ आज कि ब्लाग4वार्ता पर........
चर्चा की शुरुवात करते हैं शि्खा जी के चिट्ठे से, वो कहती हैं कि वक्त वक्त की बात है.आजकल स्कूल में अध्यापक शिक्षक कम और कस्टमर केयर के डेस्क पर बैठे ज्यादा लगते हैं.. चेहरे पर मुस्कान और अच्छी अच्छी बातें ... कितना भी नालायक हो आपका बच्चा हो पर वो उसमें भी खूबियाँ ढूँढ - ढूंढ कर आपको बताएँगे ..तभी बच्चे खींच खींच कर माता पिता को शिक्षकों से मिलवाने ले जाते हैं कि देखो कितने योग्य हैं हम............श्याम कोरी"उदय" आज आपको रतनपुर की महामाया दर्शन कराने ले जा रहे हैं। चलिए चलते हैं सिद्ध शक्ति पीठ के दर्शन करने और लेते हैं महामाया माई से आशीर्वाद।
अब बारी है स्वामी चिन्मयानंद जी के चिट्ठे की---वे मंथन कर रहे हैं--ऐसा प्रायः होता है। हमारे जीवन के हर मंथन से जो भी अशुभ (विशुद्ध) प्रकट होता है, उसको पीने-पचाने वाले ठिकाने तो हमें मालूम होते हैं लेकिन जब कोई शुभ (अमृत) प्रकट होता है तो उसे पाने की, हड़पने की जो स्थिति निर्मित होती है उसका समाधान। ----गगन शर्मा जी एक ई-मेलीय सवाल ले कर आये है कि माँ का हाल पुछने की फ़ुरसत कहाँ है?क्या जिंदगी इसी का नाम हैं.....? शहर की इस दौड़ में, दौड़ के करना क्या है? जब यही जीना है दोस्तों तो फ़िर मरना क्या है?पहली बारिश में ट्रेन लेट होने की फ़िक्र है भूल गये भीगते हुए टहलना क्या है?सीरियल्स् के किर्दारों का सारा हाल है मालूम पर माँ का हाल पूछ्ने की फ़ुर्सत कहाँ है? 
इधर अलबेला खत्री जी कुछ नया लेकर आए है और बता रहे है कि जब एक कबुतर ने समीर लाल जी की बैँड बजा दी। अब कबुतरों ने भी बैंड कम्पनी खोल ली है। जब चाहो आडर बुक कराओ साथ मे छुट मिलेगी। उसका फ़ायदा उठाओ अलबेला खत्री डॉट कॉम पे रजिस्ट्रेशन कराओ।---- सारथी पर शास्त्री जी कह रहे हैं मजदूरी भी, बेईमानी भी---केरल में एक दिन की मजदूरी 300 रुपये के कारीब होती है जो यहां की जीविका के हिसाब से एक अच्छी आय है। इतना ही नहीं इन लोगों को हर साल काम मिलने की गारंटी है क्योंकि पानी हर साल बरसता है और नालेनालियों की सफाई कभी नहीं रुक सकती।
झा जी ले आए हैं चर्चा तथा कह रहे हैं एक और चर्चा झेलिए--- मुझे क्या पता था कि पिछला ट्रेलर आप सबको खूब पसंद आएगा ..हम तो सोच रहे थे कि सब कहेंगे कि अरे कहां फ़ंस गए झाजी ..आप तो बस अपनी टरेन दौडाईये ….धडाधड पटरी बिछा के …और हमको भी ई ससुर लाईव राईटर के स्यापे से मुक्ति मिलेगी।--- जोशी कविराय कह रहे हैं--विक्रम बेताल और डिपार्टमेंट की इज्जत-- जैसे ही वीक एंड पर अंधेर नगरी के आजीवन महाराजा चौपटादित्य संसद के कुंए से सत्य का शव निकाल कर ठिकाने लगाने के लिए चले तो शव में अवस्थित बेताल ने कहा- राजन, तुम बहुत जिद्दी हो मानोगे तो नहीं सो श्रम भुलाने के लिए मैं तुम्हें एक कहानी सुनाता हूँ । कहानी के अंत में एक प्रश्न पूछूँगा । 
अवधिया जी ने एक कहा है कि बेचारी हिंदी--ये वो थाली है जिसमे लोग खाते हैं फ़िर उसी में छेद करते हैं। ये कौन सी नयी बात हो गयी सदियों से चला आ रहा है। थाली छेदक हर जगह हर काल मे पाए जाते हैं। अंग्रेजी के 26 अक्षर तो रटे हुए हैं आपको, पूछने पर तत्काल बता देंगे। किन्तु यदि मैं पूछूँ कि हिन्दी के बावन अक्षर आते हैं आपको तो क्या जवाब होगा आपका? ----राजतंत्र पर एक शर्मनाक घटना के विषय मे बता रहे हैं राजकुमार ग्वालानी जी---कलयुग के गुरुओं का क्या हाल है इसका एक नमूना भिलाई में तब देखने को मिला जब वहां के एक स्कूल के प्राचार्य ने छात्राओं को पास कराने का प्रलोभन देकर उनके साथ अश्लील हरकतें करते हुए अपनी वासना की भूख मिटाने का असफल प्रयास किया। 
महाशक्ति जी एक धोखे के विषय में बता रहे हैं-इससे सावधान रहने की जरुरत है। इन्‍टरनेट का उपयोग दिनो दिन बढ़ रहा है, और आम तौर पर लोग इन्‍टरनेट की अभासी दुनिया मे अपने नये सम्‍बन्‍ध (दोस्‍ती-विवाह) आदि जोड़ने लगे है। चिट्ठाकारी से जुड़ाव के कारण मैने विभिन्‍न लोगो से मिलना हुआ है, उनसे मिलना किसी न किसी प्रकार की नजदीकी दे जाती है।----- आज तो पराया देश पर राज भाटिया जी ने बर्फ़ बर्फ़ बर्फ़ बर्फ़ और सिर्फ़ बर्फ़ फ़ैला दी है।बर्फ़ भी अलग अलग रुप मे गिरती है मतलब कभी बुरे दार तो कभी हल्की हल्की तो कभी बरसात के संग तो कभी कभी ऎसी की मजा ही आ जाये, तो लिजिये मैने आप सब के लिये तीन विडियो जो कुछ कुछ पल के ही है भरे है, पहली मै सिर्फ़ बर्फ़ ही बर्फ़,--
वंदना जी ने ब्लागवाणी आरती लिख डाली है बहुत ही सुंदर बनी है---ओम जय ब्लागवाणी प्रभु---ज्ञानवाणी पर वाणी जी कह रही हैं--कांधे मेरे तेरी बंदुक के लिए नही ----बिलकुल बजा फ़रमाया है आपने---- अनिल पुसदकर जी कह रहे है--कि भले ही रोमांटिक मुड की ऐसी तैसी हो गयी-रैगिंग इस शब्द से कौन वाकिफ़ नही होगा।छात्र जीवन की सुनहरी यादों मे सीनियर होने के बाद के रूपहले पन्ने ज़रूर जुड़ जाते हैं।हमने तो रैगिंग ली भले नही थी मगर हमारी भी रैगिंग हुई थी।फ़िर छात्र नेता बन जाने के बाद अघोषित रूप से हास्टल मे गुज़ारे समय के दौरान रैगिंग और उसके बाद बने रिश्ते आज भी सालों बीत जाने के बाद उतने ही मज़बूत हैं। यहां देखिए अनोखे लैपटॉप जो दुनिया को बदल देंगे।
राजकुमार सोनी ने किया है भंडाफ़ोड़---अब किसका किया है यह तो उनकी पोस्ट पर ही जाकर पता चल पाएगा।आज आपको उस सीडी का सच बताने जा रहा हूं जो मुझे कहीं से मिली है। इस सीडी को आप दस नहीं बीस बार भी सुन ले तब भी कहीं से यह नहीं लगेगा कि आश्रम के संचालक ने बच्ची को बेचने के लिए अपनी ओर( इस शब्द पर ध्यान दीजिएगा) से पैसों की मांग की है।--भाई गिरीश बिल्लौरे जी कह रहे है---जाग उठा मातृत्व उसका अमिय-पान भी कराया उसने- दुनियाँ भर की सारी बातें फ़िज़ूल हैं कुछ भी श्रेष्ठ नज़र नहीं आती जब आप पुरुष के रूप में शमशान में अंतिम विदा दे रहे होते हैं....... तब आप सारी कायनात  को एक न्यायाधीश की नज़र से देखते हैं खुद को भी अच्छे बुरे का ज्ञान तभी होता है . और नारी को अपनी  श्रेष्टता-का अहसास भी तब होता है जब वह माँ बनके मातृत्व-धारित करती है. ----
चलते-चलते--अगर आपको फ़्री मे बात करनी हो मोबाईल से तो यहां पर जाएं---और  सॉरी नो "मोर" ब्लोगिंग  देखना होतो यहां पर जाएं---अगर सतीश सक्सेना जी से जवान रहने का नुख्सा चाहिए तो यहाँ पर जाएं----अब चर्चा को यही देते हैं विश्राम--राम राम-- मिलते है ब्रेक के बाद---

Byji : aapjisabhijikaji, hardikjiswagathaiji

15 टिप्पणियाँ:

विस्तार से इत्मिनान से चर्चा की है, बधाई.

achhi charcha....!hamara number kab aaega?

ये चर्चा बड़ी है मस्त-मस्त

बहुत ही मस्त और शानदार वार्ता.

रामराम

बहुत अच्छी प्रस्तुति। सादर अभिवादन।

अरे यह कहना भूल ही गया कि गणित वाले सर की भाषा भी जोरदार है!

जोरदार चर्चा! बहुत से काम के लिंक मिल गये।

बहुत अच्छी प्रस्तुति dhnyavaad.

खूबसूरत चर्चा से बढ़िया लिंक दिए आपने ! आभार !

मस्त और शानदार वार्ता.

आप के चर्चा की दाद देते हैं। लिखने का अंदाज एक दम स्वाभाविक, पढने का मजा बहुत अधिक। कई अच्छे आलेख नजर आ गये। आभार!

सस्नेह -- शास्त्री

हिन्दी ही हिन्दुस्तान को एक सूत्र में पिरो सकती है
http://www.Sarathi.info

मुड हो मूड हो जाना चाहिये!

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