शुक्रवार, 12 मार्च 2010

पुराने चावल की पुरानी शराब ---- ब्लॉग 4 वार्ता ----- (यशवंत मेहता "फ़कीरा" )



अक्सर लोग चावल को गोदाम में रख देते  और फिर जब वो चावल साल-दो साल पुराना हो जाता था तो उसको बना कर खाते थे. पुराने चावल का स्वाद उत्तम होता हैं. और जब पुराने के बात चलती हैं तो पुरानी शराब के चर्चे किसने नहीं सुने होंगे. पुरानी शराब का स्वाद और क्वालिटी बेहतरीन होती हैं. कईं शराब बनाने वाली कम्पनियाँ तो शराब को सालो-साल पुराना करके बेचती हैं.
तो हमने सोचा कि क्यूँ न पुराने चावल की पुरानी शराब आप सबको पिलाई जायें वो भी पुरानी हवेलियों में ले जा कर. अब आप कहेंगे कि भाई फ़कीरा ------- कौन से पुराने चावल? कौन सी पुरानी शराब? और कौन सी पुरानी हवेलियाँ? तो खुद ही देख लीजिये , पढ़ लीजिये और समझ लीजिये.

आज एक गाना चल रहा हैं, धान के देश में --- मैं चला मैं चला ---- और फिर वो गाना बंद हुआ और दूसरा चला ---- मैं रुका मैं रुका. हमने कहा कि सब लोग धान के देश में बैठकर जरा अवधिया जी के सुर में सुर मिलाओ तब तक हम इनकी हवेली का दौरा करके आते हैं. वहां एक कोने में हमें मिली कुछ यादें , कुछ पन्ने 
अब कोई गाना सुनाये और सिर्फ आवाज हो तो मजा नहीं आता, संगीत तो जरुरी हैं. अब उड़न तश्तरी में बैठकर वो बजा रहे थे एक धुन इक तारे पर, हमने उड़न तश्तरी में पड़े हुए पुराने बक्सों को टटोलना शुरू कर दिया कि तभी एक आवाज आई --- हेल्लो हेल्लो ---- अब आप खुद ही सुन लो.

हेल्लो हेल्लो --- हाँ बोलो ---- मैं वापस आ गया हूँ ---- बहुत खूब, तुम आये बहार आई चलो हवेली के द्वार खोलो और हमें चखने दो जरा पुरानी शराब तुम्हारी हवेली से. इसी हवेली में हमें मिले ताऊ महाराज, प्रणाम करके हमने मिसाइल छोड़ दी --  क्या कर रहे हो ताऊ जी??? अरे दिखे कोन्या --- बुढऊ ब्लागर्स एशोसियेशन, समीरा टेढ़ी भी हैं ---- ओके ताऊ जी, जरा अपनी हवेली का पता दो, छानबीन करनी हैं ---- इब ताऊ ने लाठी मारी और बोले --- इधर ही बैठ और सुन वीकेंड गप-शप

झा जी घूम घूम के , झूम झूम के नाचे जा रहे थे, श्रीशांत ने जैसा डांस किया था छक्का मरने पर वैसा डांस दिखा रहे थे --- क्या हुआ जी??? हमने ५०० बना लिए, ५०० बना लिए, कुछ भी कभी भी  ----- तो जरा बताओ पहला रन कैसे लिया --- तो हाथ में थमा दिया ----- पहला पन्ना, पहली बात

किसने कहाँ हुजूर तेवर बदल गए ----अजी बदल गए, बदल गए ----- और नहीं बदले तो हम बदलवा देंगे , कोई नहीं जायेगा कहीं , अदा जी रहेंगी यहीं हम सबके साथ ----- मान भी जाओ न, क्यूंकि तुम ही बताओ  कि अब मेरे ख्वाब जो पलकों पर बैठे हैं ,कहाँ जायेंगे ??


अभी पुरानी हवेलियो के और भी चक्कर लगायेंगे, कुछ और पुराने चावलों को पकड़ कर पुरानी शराब का आन्नद उठायेंगे
चर्चा कैसी लगी , जरुर बताये
आपका सबका
---- यशवंत मेहता "फ़कीरा"

12 टिप्पणियाँ:

वाह फ़कीरा साहब ..लाजवाब वार्ता है, बहुत शुभकामनाएं.

रामराम.

बहुत बढ़िया चर्चा करते हो यशवंत ! थोड़े में ही सब महत्वपूर्ण ब्लाग्स दिखा दिए !! शुभकामनायें !

बहुत खूब ऐसी ही चर्चा की तो तलाश में थे हम धन्यवाद्

वाह यहाँ तो बहुत कुछ मिल रहा है नयी और पुरानी और काकटेल भी !

वाह यशवंत जी,
पुराने चावल और पुरानी शराब का मजा ही कुछ और है।
बहुत सुंदर चर्चा की है आपने बिलकुल हट कर्।
बधाई स्वीकारें

बहुत खुब यशवंतजी। मज़ा आ गया।

बहुत बढ़िया यशवंत भाई , आप तो इस कला में भी पारंगत हो गये हैं ।

ढूंढ ढूंढकर निकाले हैं लिंक्स .. बहुत बढिया चर्चा !!

रोचक एवं भौंचक चिट्ठाचर्चा :-)

ये वार्ता के बीच लिंक्स हैं कि लिंक्स के बीच वार्ता?

लाजवाब!

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