मंगलवार, 19 जुलाई 2011

गूगल+पर लिखा फेसबुक और ट्विटर पर छापें .. ब्‍लॉग4वार्ता .. संगीता पुरी



  •  Image Loadingअन्य फोटो 
    सभी पाठकों को संगीता पुरी का नमस्‍कार... अमेरिकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन भारत-अमेरिका के बीच मंगलवार को होने वाली दूसरे दौर की रणनीतिक वार्ता में शामिल होने के वास्ते सोमवार को पहुंच गईं। दोनों देशों के बीच होने वाली इस वार्ता में अफगानिस्तान और पाकिस्तान में स्थिति के साथ ही हाल में मुम्बई में हुए श्रंखलाबद्ध बम विस्फोटों के मद्देनजर आतंकवाद के खिलाफ सहयोग को लेकर चर्चा होगी।


    प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से मुलाकात के साथ ही हिलेरी राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार शिवशंकर मेनन के साथ बैठक करेंगी। इसके साथ ही वह संप्रग अध्यक्ष सोनिया गांधी सहित कई अन्य वरिष्ठ राजनीतिक नेताओं से बातचीत करेंगी। आज की इस खास खबर के बाद आपको लिए चलते हैं ब्‍लॉग जगत की सैर पर ....


    सबसे पहले  धार्मिक विषयो पर  ....



     वन्दना at एक प्रयास

    तब शुकदेव जी कहने लगे आहुक राजा के दो पुत्र थे देवक और उग्रसेन उग्रसेन महाप्रतापी राजा था पवन रेखा उसकी भार्या अति सुन्दरी पतिव्रता थी कालसंयोग से इक दिन वनविहार के समय बिछड़ गयी राजा और सखियों से घने ज..



    *नवमोऽध्यायः * *राजविद्याराजगुह्ययोग * दोषदृष्टि नहीं है तुझमें, हे अर्जुन ! केशव बोले परम गोपनीय विषय कहूँगा, मुक्त करेगा जो तुझे सब विद्याओं का राजा, विज्ञान सहित ज्ञान यह उत्तम है शाश्वत, गुप्त, अति प.

    जब कही कोई रास्ता ही न हो हो भी तो मंजिल न दिखे दिखे भी तो डगमगानें लगें पैर सहारे को उठे स्वार्थी हाँथ हांथों में हो अद्रश्य यातनाओं की कीलें संवेदनाओं से रिक्त हो रहा हो हृदय हृदय में बह रहा ह..



    सावन मास की अपनी महत्ता है। सावन मास को श्रावण भी कहा जाता है। यह महीना बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि इस दौरान भक्ति, आराधना तथा प्रकृति के कई रंग देखने को मिलते हैं। श्रावण मास त्रिदेव और पंच देवों में प्रध..

      
    उसके बाद कुछ तकनीकी लिंक .......

    Ratan Singh Shekhawat at ज्ञान दर्पण
    ट्विटर,फेसबुक और गूगल+ बढ़िया सोसियल वेब साईट है और हर कोई तीनों जगह रहना चाहता है पर इस भागमभाग जिंदगी में किसके पास इतना समय है कि तीनों जगह जाकर अपने स्टेटस अपडेट करता रहे|पर कितना अच्छा हो कि हमें ए...



    •  रिंकू सिवान at Computer Tips & Tricks 
      अगर आप को किसी भी अंग्रेज़ी शब्द का अर्थ मालूम नहीं है तो आप उस शब्द का अर्थ इस ऑनलाइन शब्दकोष से जान सकते है | यहाँ आप सिर्फ हिंदी में ही नहीं बल्कि कई और भाषावो में भी अर्थ खोज सकते है |जिस शब्द का अर्थ ...

      •  नवीन प्रकाश at Hindi Tech - तकनीक हिंदी में 
        अब आप अपने किसी गाने या संगीत की mp3 फाइल की धीमी आवाज को तेज कर सकते है बिना किसी सॉफ्टवेयर या ज्यादा तकनीकी ज्ञान के मुफ्त में ही, बस एक वेबसाइट की मदद से . इसमें आपको अपने mp3 फाइल की आवाज को तेज बना...

      • कार्यक्रमों पर आधारित .....

        AlbelaKhatri.com at Albelakhatri.com 


        * * * * * * * * * * *प्रतिभावान कवयित्री उर्मिला 'उर्मि' के प्रथम काव्य-संग्रह "कुछ मासूम से पल" का भव्य विमोचन एवं लोकार्पण समारोह हास्य-व्यंग्य के खिलखिलाते कवि- सम्मेलन के साथ सूरत के शानदार.


         रश्मि प्रभा... at परिकल्पना 

        *छोटी छोटी कहानियों में बहुत कुछ मिल जाता है ... लघु कथाओं की अपनी खूबी होती है ! इस खूबी के साथ हैं आज रंगमंच पर श्याम कोरी उदय जी* *आत्म संतुष्टि !* भिखारी बस अड्डे पे बैठ कर भीख मांग रहा था, सामने से ए...

        हास्‍य व्‍यंग्‍य ....


         सुनीता शानू at मन पखेरू फ़िर उड़ चला 

        वैसे तो कुछ दिन से तबीयत ठीक नही फ़िर भी सोचते हैं आपको अपने साथ-साथ क्यों रूलायें थोड़ा हम भी हँस लें, थोड़ा आपको भी हँसाये...:) शीर्षक है मुहावरों की मार( कविता का नायक है प्रभुदयाल, आज प्यारेलाल छुट्टी...

        कुछ कविताएं  .....


        रविकर at "कुछ कहना है" 

        नौ महिने रख कोख में, सात घुमाई गोद, अन्नाशन संस्कार का, मनता मंगल-मोद ||१|| हिजड़े न समझे मज़बूरी | बनती है उनकी दस्तूरी || लाव मदरसे के लिए, पक्का दस्तावेज, अनुमंडल आफिस गया, उत्थे खाली मेज ||२|..

        'उदय' at कडुवा सच 

        हे यमदूतो, मेरी प्रार्थना सुनकर तुम, चुप-चाप, चले आओ मुझे, तुम्हारा इंतज़ार है इस ऊंची हवेली के पीछे बने, बेजान कमरे में मैं, ज़िंदा हूँ अभी शायद, ज़िंदा रहूँगा, मरुंगा नहीं तुम्हारे आने तक पर तुम, देर न करो, आ.


         निवेदिता at झरोख़ा

        हथेली से खिसकती जाती रेत सा बढ़ चला हठीला समय अवसान की ओर.... पत्ते भी हैं कुछ ज्यादा ही जल्दी में प्यास बुझाने को सूर्य-किरणों के आने के पहले .... ओस की बूँदें मुँह छुपाती निगाहें चुरा बचान..



        y rajeysha@gmail.com (Rajey Sha राजे_शा) at ~Ajnabi अजनबी 

        बेईमान इश्क बार-बार सिर उठाता है लोग कहते हैं, घर बार द्वार उम्र देखो लोग, घर बार द्वार उम्र में बंधे हैं मुझे सबके नीचे दिखते चार कंधें हैं क्या इश्क की जात, उम्र, समाज और लिहाज होते हैं अजीबोगरीब तरीकों स..



         डा.राजेंद्र तेला"निरंतर" Dr.Rajendra Tela,Nirantar" at"निरंतर" की कलम से.....

        मोहब्बत में खो गया था खुद को भूल गया था जब होश आया तो लुट चुका था बिलकुल अकेला था बेवफायी में बिखर गया था अब खुद को समेटने की कोशिश में लगा हूँ निरंतर बीते कल को दफ़न करने में लगा हूँ 18-07-20..


         मेरे भाव at पलकों के सपने 

         पाषाण नगरी में * *हम हो गए * *पत्थर * *तो क्या होगा * * * *गढ़ उठेगी * *एक मूरत * *बोलती सी * *तो क्या होगा * * * *बज उठेगा * *उसमें गीत * *कराहता सा * *तो क्या होगा * * * *उन आँखों में * *न भरना प.



         Dr.J.P.Tiwari at pragyan-vigyan 

        *(१)* बार - बार क्यों देखते दर्पण? देखो उसमे, अपना तुम अर्पण, तन - मन में राग - विराग भरा, क्या करे बेचारा यह- 'दर्पण'? दर्पण को दोष क्यों देते हो? क्यों बारम्बार रगड़ते हो? दर्पण तो सत्य दिखलाएगा, क्यों पी..




        शाम ढलती है जब कहीं पर बवाल रखती है चेहरे पे वो अपने तो रंग सुर्ख लाल रखती है उतर जाए है शब् की थकान उसकी आमद से सहर अपने अंदर कुछ ऐसा कमाल रखती है गम मिलता है तो लिपट जाता है खुद ही खुद ख़ुशी आये ह..



         Vivek Jain at मेरे सपने

        लीक पर वे चलें जिनके चरण दुर्बल और हारे हैं हमें तो जो हमारी यात्रा से बने ऐसे अनिर्मित पन्थ प्यारे हैं साक्षी हों राह रोके खड़े पीले बाँस के झुरमुट कि उनमें गा रही है जो हवा उसी से लिपटे हुए सपने हमारे है..



        कैसा यह बंधन है  ! बांधा था हमने खुद को अपने ही शौक सेउसने तो भागने के रस्ते सुझाये थे पिंजरे का द्वार खोल इशारे भी कर दिये उड़-उड़ के पंछी लौट के पिंजरे में आये थे सुख की तलाश करते तो क्यों नहीं मिलता ह..



        संगीता स्वरुप ( गीत ) at गीत.......मेरी अनुभूतियाँ

        आज कल चाँद मेरे घर रोज आता है और अपनी चांदनी से रोशन कर देता है कोना - कोना चांदनी में होती है भोली सी मुस्कान जो देती है मुझे मेरी पहचान उस मुस्कान को भर अपनी आँखों में झुलाती हूँ मैं उसे अ..



         Akanksha~आकांक्षा at सप्तरंगी प्रेम

        अंशल तुम्हारे अंक में अक्षुण्ण रहा जीवन हमारा! अनुराग के साथ हमने थामा था एक-दूजे का हाथ अग्नि के संग-संग फेरों में वचनों ने हमें बांधा था वह बंधन सदा सुदृढ़ रहा सरिता सुजल प्रेम का हर पल बहा प्रिय! सौखिक र...

        कुछ विचारोत्‍तेजक लेख ....


        रेखा श्रीवास्तव at मेरी सोच

        वैसे तो माँ - बाप के लिए जैसे ही किसी नए मेहमान के आने की बात सामने आती है , वे उसके भविष्य के लिए उसके नामकारण, शिक्षा और संस्कारों के लिए सपने बुनने लगते हैं (अपवाद इसके भी हो सकते हैं.) . जब वह दुनियाँ ..



         राजकुमार ग्वालानी at राजतन्त्र

        दिग्विजय सिंह लगता है अपने बड़बोलेपन से बाज आने वाले नहीं हैं। अब उनको मुंबई ब्लास्ट में हिन्दु संगठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) का हाथ नजर आता है। लगता है कि दिग्गी को कांग्रेसियों को छोड़कर बाकी सब ग..



        rastogi.v@gmail.com (Vivek Rastogi) at कल्पनाओं का वृक्ष
        यह एक बहुत बड़ा सवाल है, क्या सरकार को हमसे किसी भी प्रकार का कर लेने का हक है ? जब सरकार आम आदमी की रक्षा नहीं कर सकती, आम आदमी को मूलभूत सुविधाएँ नहीं प्रदान कर सकती तो सरकार हमसे कर कैसे ले सकती है..



         वंदना शुक्ला at चिंतन

        कल प्रकाशित मेरे एक लेख के सम्बन्ध में फोन आया ‘’आपने अच्छा लेख लिखा है लेकिन फलां व्यक्ति को इतना आभामंडित क्यूँ किया गया है ?वो कला का दुश्मन है ...’’.मैंने कहा एक शब्द भी उस व्यक्ति के बारे में नहीं लिख.

        अब बाल कोना भी.....


        • डॉ. नागेश पांडेय "संजय" at बाल-मंदिर
          *बाल कविता : उदय किरोला * खेल करो जी खेल करो , आपस में सब मेल करो . जीत - हार का होता खेल , आपस में तुम रखना मेल . यदि जीतो तो ख़ुशी मनाओ , हारो भी तो मत पछताओ . मत करना जी ठेलम ठेल . मिलकर सदा खेल...



          माधव( Madhav) at माधव

        कानूनी सलाह ....



         दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi at तीसरा खंबा*


        विनोद ने पूछा है -* संतान न होने के कारण मेरी पत्नी दबाव डाल रही है कि मैं उस की छोटी बहिन से विवाह कर लूं। मुझे क्या करना चाहिए? * उत्तर -* *विनोद जी,* यह तो आप भी जानते ही होंगे कि मौजूदा हिन्दू..

        और अंत में ...


         चंद्रमौलेश्वर प्रसाद at कलम

        खुजली-२ पिछली पोस्ट पर टिप्पणी करते हुए निशांत मिश्र जी ने लिखा था कि इस लेख में सेवन ईयर इच को नहीं लिया गया है। उपरोक्त चित्र उस कमी को पूरा करेगा :-) यह मूर्ति शिल्पकार सेवार्ड जॉनसन ने चिकागो के इल

11 टिप्पणियाँ:

सुव्यवस्थित वार्ता ... आभार

सुन्दर |
मैं भी हूँ यहाँ ||
आभार ||

बहुत महत्वपूर्ण लिंक्स...

बहुत ही सुन्दर लिंक्स से सजी वार्ता लगाई है।

बहुत सुंदर,
आपने सजाया भी है बहुत ही बढिया

विस्तृत और बढ़िया वार्ता.

धन्यवाद संगीता जी, मुझे मालूम ही नही था कि यहाँ मेरी कविता का लिंख भी है, बस यूँ ही भ्रमण करते-करते यहाँ तक पहुँच गई। बहुत अच्छे लिन्क्स दिये है आपने।

bahut badiya links ke saath sundar vaarta ke liye aabhar!

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