गुरुवार, 26 अगस्त 2010

क्या है भगवा आतंकवाद ? - बड़े लोग और बड़ी बातें, अपन छोटे ही भले - ब्लॉग 4 वार्ता - शिवम् मिश्रा

प्रिय ब्लॉगर मित्रो ,
प्रणाम !

ब्लॉग ४ वार्ता  के इस मंच से आज की ब्लॉग वार्ता शुरू करने से पहले आप सब के लिए स्वामी विवेकानंद जी का एक सन्देश !

दूसरों के प्रति हमारे कर्तव्य का अर्थ है- दूसरों की सहायता करना, संसार का भला करना। ऊपर से तो हम संसार का उपकार करते हैं, परंतु असल में हम अपना ही उपकार करते हैं। हमें सदैव संसार का उपकार करने की चेष्टा करनी चाहिए। परंतु इस संसार को हमारी सहायता की बिल्कुल आवश्यकता नहीं। एक बार मैंने एक उपदेश पढ़ा था- यह सुंदर संसार बड़ा अच्छा है, क्योंकि इसमें हमें दूसरों की सहायता करने के लिए अवसर मिलता है।
ऊपर से तो यह भाव सचमुच बहुत सुंदर है, परंतु यह कहना कि संसार को हमारी सहायता की आवश्यकता है, क्या घोर ईश्वर निंदा नहीं है? यह सच है कि संसार में दुख-कष्ट बहुत है और इसलिए लोगों की सहायता करना हमारे लिए सर्वश्रेष्ठ कार्य है, परंतु दूसरों की सहायता करने का अर्थ है अपनी ही सहायता करना। उपकार इतना ही होता है कि हमें नैतिक शिक्षा मिलती है। यदि हम यह ध्यान रखें कि दूसरों की सहायता करना एक सौभाग्य है, तो परोपकार करने की इच्छा एक सर्वोत्तम प्रेरणाशक्ति है। एक दाता के ऊंचे आसन पर खड़े होकर और अपने हाथ में दो पैसे लेकर यह मत कहो, ऐ भिखारी, ले, यह मैं तुझे देता हूं। तुम स्वयं इस बात के लिए कृतज्ञ होओ कि तुम्हे वह निर्धन व्यक्ति मिला, जिसे धन देकर तुमने स्वयं अपना उपकार किया। धन्य पाने वाला नहीं होता, देने वाला होता है। इस बात के लिए कृतज्ञ होओ कि इस संसार में तुम्हें अपनी दयालुता का प्रयोग करने और इस प्रकार पवित्र एवं पूर्ण होने का अवसर प्राप्त हुआ। 
- स्वामी विवेकानंद

आइये अब चलते है आज की ब्लॉग वार्ता की ओर ................. आशा है आप को यह ब्लॉग वार्ता पसंद आएगी !

सादर आपका 

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पिपली लाइव के नारी पात्र [समापन किस्त] :- अम्मा को बीडी दो बीडी .........नहीं तो पड़ेगी गाली !!


मन पर दुख का लवलेश भी न हो :- क्या संभव है ऐसा ?


तलाश एक लडकी की -सतीश सक्सेना :- सब्र का फल मीठा होता है !

तुम्हारा ‘ना’ तुम्हारा ‘हां’ :- कोई नेता जी है क्या ?


रिश्तों में दरार :- आई ....बेटे ना रहे बेटे .....भाई ना रहे भाई !!



राखी का बंधन :- है प्यारा बंधन !









'चित्त' तो 'उस' की है ही...'पट' भी 'उसी' की है... और 'अंटा' भी हे प्रभु तेरा ही है...तुझे नमन !!! :- सत्य वचन !

हे कलमाड़ी, आप न घबराना. :- आपका भला क्या बिगड़ेगा जमाना !

माता-पिता बच्चों को यातायात के नियम सिखाएँ!!! :- अरे .......पहले खुद तो सीख जाएँ !

यादें-1. :- याद आती है .....बाते भूल जाती है !!

क्या है भगवा आतंकवाद ? :- एक नया चुनावी मुद्दा ; आतंक का एक नया अवतार .......कुछ भी हो सकता है .... जैसा आप चाहे !!

पाकिस्तान भारतीय राहतकर्मियों को वीजा देने के लिए तैयार नहीं है :- "रस्सी जल गयी पर ऐठ नहीं गयी !!"

नई ग़ज़ल/ इक रोज कोई आपसा मिल जाएगा.. :- तब तक क्या करोगे ??

गोहाटी स्टेशन, ट्रांजिट कैम्प एवं ब्रह्मपुत्र से भेंट---यात्रा ७ :- कैसी रही यह भेंट ?

क्यों झांकते हो नज़र में ये नकाब जैसा है :- आँखों में ग़र उतर गया वो शराब जैसा है !!

दिल्ली:डीटीसी गायब!उसकी जगह यह क्या आ गाया!? :- पानी जब इतना बरस रहा है तो यह तो होना ही था !! 

छोड़ो ना…कौन पूछता है? - राजीव तनेजा :- किस बारे में ? 

लीजिये एक बार फिर सुन लीजिये ....अपनी डफली आप बजाता हूँ ....अपनी नयी पोस्ट का लिंक दिए जाता हूँ !

धूम्रपान :- एक कार्य महान !! (व्यंग्य) :- जान है तो है जहान !!

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आज की ब्लॉग वार्ता बस यहीं तक .........अगली बार फिर मिलुगा एक ओर ब्लॉग वार्ता के साथ तब तक के लिए .............

जय हिंद !!

27 टिप्पणियाँ:

उम्दा वार्ता शिवम जी,
आभार

बहुत बढ़िया वार्ता...
आभार....

बहुत अच्छी प्रस्तुति।
हिंदी भाषा की उन्नति का अर्थ है राष्ट्र की उन्नति।

बहुत अच्छी प्रस्तुति---आभार

बहुत अच्‍छी वार्ता शिवम जी !!

सुंदर चर्चा, स्वामी जी के वक्तव्य ने इसे महत्वपूर्ण बना दिया है।

बहुत अच्छी प्रस्तुति।

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एक दाता के ऊंचे आसन पर खड़े होकर और अपने हाथ में दो पैसे लेकर यह मत कहो, ऐ भिखारी, ले, यह मैं तुझे देता हूं। तुम स्वयं इस बात के लिए कृतज्ञ होओ कि तुम्हे वह निर्धन व्यक्ति मिला, जिसे धन देकर तुमने स्वयं अपना उपकार किया। धन्य पाने वाला नहीं होता, देने वाला होता है। इस बात के लिए कृतज्ञ होओ कि इस संसार में तुम्हें अपनी दयालुता का प्रयोग करने और इस प्रकार पवित्र एवं पूर्ण होने का अवसर प्राप्त हुआ।

विवेकानन्द जी ने कहा है... फिर भी बहस की गुंजाइश है इस कथन पर...दारिद्रय का गुणगान व दरिद्रता की अवश्यम्भाविता...ताकि कुछ लोगों को पुण्य मिल सके...दान करने का... कुछ इस तरह की बातों ने ही गरीबी को महिमामंडित...और उद्मम कर अधिक धन कमाने को अनपेक्षित व्यवहार का दर्जा दे दिया था हमारे देश में...अमीर होना भी एक तरह की गाली बन गई थी... बहुत नुकसान किया है इस विचार ने...अब जाकर कहीं इस थोपे गये 'गिल्ट' से उबर पाये हैं हम लोग...


चर्चा में मेरी पोस्ट को शामिल करने हेतु आभार!


...

आज की वार्ता बहुत बढिया रही!
--
आभार!

हमें सदैव संसार का उपकार करने की चेष्टा करनी चाहिए।

बहुत बढ़िया वार्ता...आभार..अच्छी प्रस्तुति

बहुत अच्छी ब्लॉग वार्ता है ............ आभार मेरे ब्लॉग को इसमें शामिल करने के लिए

गागर में सागर भर लाई इस वार्ता के संयोजक शिवम भाई
आपको इस जिम्मेदारी भरे कार्य हेतु हार्दिक बधाई।

शिवम् जी,

मेरी blog को blog 4 varta शामिल करने के लिए धन्यवाद.बहुत जिम्मेदारी के साथ कर रहे इस कार्य के लिए आप बधाई के पात्र हैं.

Shivam ji ...Swami Vivekanand ji ka sandesh bahut hi achha lagaa. uske liye apko...Dhanybaad

बेहद बेहद सार्थक चर्चा......
आभार्!

अति सुंदर रचना जी धन्यवाद

आपने शानदार चर्चा की है
मेरी बधाई स्वीकार करें

आप सब का बहुत बहुत आभार !

मेरे नए ब्लॉग को चर्चा में शामिल करने के लिए आभार.

मार्च में शुरू किया गया ये वार्ता ब्लॉग आज हिंदी ब्लॉग जगत में क्या स्थान रखता हैं, ये सभी हिंदी ब्लोग्गर्स जानते हैं,

शिवम् जी आपके द्वारा की गयी वार्ता में ढेरो लिंक्स मिलते हैं, आजकल मैं ब्लॉग पढने के लिए सबसे पहले वार्ता के लिंक ही क्लीक करता हूँ!! आप बहुत ही उत्तम और नियमित वार्ता कर रहें हैं!


मैं समय की कमी के कारण वार्ता में योगदान नही दे पा रहा हूँ ! अब हफ्ते में एक दिन मैं भी वार्ता किया करूँगा!!

यशवंत भाई, मैंने तो केवल आप लोगो के दिखाए मार्ग पर ही चल रहा हूँ .......बहुत ख़ुशी हुयी जान कर कि आप वार्ता से फिर जुड़ रहे है.........आपका इंतज़ार रहेगा ! स्वागत इस लिए नहीं कह रहा हूँ क्यों कि स्वागत महेमान का किया जाता है .......घर वालो का तो इंतज़ार ही रहता है !

बहुत बहुत धन्यवाद , शामिल करने के लिये भी और बधाई के लिये भी

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