शुक्रवार, 7 जून 2013

सुबह ढूंढेंगे फ़िर सपने... ब्लॉग 4 वार्ता... संध्या शर्मा

संध्या शर्मा का नमस्कार...मायूस तो हूं वायदे से तेरे  कुछ आस नहीं कुछ आस भी है, मैं अपने ख्यालों के सदके तू पास नहीं और पास भी है. दिल ने तो खुशी माँगी थी मगर, जो तूने दिया अच्छा ...सुबह ढूंढेंगे फ़िर सपने, अभी तो शाम ढलती है - इन हथेली की लकीरों से, कहाँ तक़दीर बनती है, मुसाफ़िर ही सदा चलते, कभी मंज़िल न चलती है. चलो अब घर चलें, सुनसान कोने राह तकते हैं, सुबह ढूंढेंगे फ़िर सपने ...लीजिये प्रस्तुत है, आज की वार्ता ......

जहरीला इन्सान - जैसे जैसे लोग के, बदले अभी स्वभाव। मौसम पर भी देखिए, उसके अलग प्रभाव।। जाड़े में बारिश हुई, औ बारिश में धूप। गरमी में पानी नहीं, बारिश हुई अनूप।। ..मैंने उसको....सताया नही !!! - *करता था मैं उनसे प्यार * *और आज भी करता हूँ, * *पहले वो मुझ पे मरते थे * *आज मैं उनपे मरता हूँ ||* *----अशोक"अकेला"* *मैंने उसको....सताया नही !!! * *. ढूँढता हूँ शहर मैं जो बरसों पहले खो गया - ढूँढता हूँ शहर मैं जो बरसों पहले खो गया जाने किस सभ्यता में दफ़न कैसे हो गया जहाँ तिलिस्मों के बाज़ार में बिकती हों ख्वाहिशें उन ख्वाहिशों का कोई खरीदार ... 

कमाल है एक असफल हिरोईन की आत्महत्या इस देश में सबसे बडी खबर बन जाती है. - कमाल है एक असफल हिरोईन की निहायत ही निजी कारणो से की गई खुदकुशी इस देश में सबसे बडी खबर बन जाती है.उस पर चर्चाओ का दौर चल पडता है.उसी देश मे जंहा भूख से एक... .कर सकिये तो आदिवासियों पर शक करना बंद करिए : खेतों में नहीं उगते माओवादी. - *कवासी लखमा एक आदिवासी हैं,* उन लाखों सामान्य आदिवासियों की तरह जो मध्य भारत में चल रहे लगभग गृहयुद्ध में फंसे हुए हैं. पर फिर, वह उनमे से एक नहीं भी हैं. ... राजनैतिक पार्टियां आरटी आई से इतनी डरती क्यों है !! - केन्द्रीय सुचना आयोग नें राजनैतिक पार्टियों को सुचना के कानून के अंतर्गत आने का निर्णय सुनाया है ! केन्द्रीय सुचना आयोग का यह एक अच्छा फैसला था

पानी क्यों खूं सा मुझे नज़र आता है? - मिट जायेगा निशां, जानकर बहता है रेत की ओर पानी, बहने दो क्यों तुले बैठे हो खुलवाने को मेरी जुबां, राज को राज ही रहने दो यूं तो खुद का ही चेहरा था देखा मैंने,...ओ मेरे !.............4मेरी आँखों में ठहरे सूखे सावन की कसम है तुम्हें ............कभी मत कहना अब "मोहब्बत है तुमसे" ...........बरसों कहूं या युगों कहूं नहीं जानती मगर ये जो आँखों की ख़ामोशी में ठहरा दरिया है न कहीं बहा न ले जाए तुम्हें भी और इस बार सैलाब रोके नहीं रुकेगा चाहे जितने बाँध बना लेना ..............जानते हों क्यों ? क्योंकि मैंने दिल की मिटटी में खौलता तेज़ाब उंडेल दिया था उसी दिन जब तुम मेरी आखिरी ख्वाहिश जानकर भी वो तीन लफ्ज़ ना कह सके...शिंगणापुर के शनिदेव कई वर्ष बाद इस वर्ष 8 जून को शनिवार के दिन शनि जयंती का संयोग बना है। इसी दिन मेरा भी जन्मदिन होने के कारण मुझे पिछले वर्ष गर्मियों में मेरी सपरिवार शिर्डी और उसके उपरांत शनि शिंगणापुर की यात्रा के वे पल याद आ रहे हैं जब हम पहली बार सांई बाबा के दर्शन कर सीधे शनिदेव के दर्शन के लिए शिंगणापुर पहुंचे। ऐसी मान्यता है कि जो पहली बार सांई बाबा के दर्शन करने जाता है उसे शनिदेव के भी दर्शन हेतु शिंगणापुर जरूर जाना चाहिए ...
 
छत्तीसगढ़ की अनाज भण्डारण क्षमता में अप्रत्याशित वृद्धि - छत्तीसगढ़ की अनाज भण्डारण क्षमता लगभग 12 लाख मीटरिक टन तक पहुंची : साढ़े नौ साल में बने 245 करोड़ के 364 नये गोदाम * .. कि व्यर्थ न जाए एक भी आहुति......(विश्व पर्यावरण दिवस ) - एक आकाशवाणी और बीज अंकुरित हुआ गर्भ धारण किया माँ ने नेह सिंचित उस बीज की पौध हूँ मैं! मेरी नसों की नीलाई पर तुम्हारा अधिकार है माँ मेरे ह्रदय का हर एक ....रह्मलीन आचार्य महामण्डलेश्वर निर्वाणपीठाधीश्वर श्री श्री १००८ स्वामी विश्वदेवानन्द जी की ब्रह्मचारी अनंतबोध चैतन्य के साथ वार्तालाप के कुछ अंश --- - महाराज श्री से जन्म समय तथा जन्म स्थान के बारे मे पूछने पर महाराज श्री का बडा सारगर्भित उत्तर- पूज्य महाराज जी फ़रमाते हैं कि साधु का परिचय जन्म के साथ...

कुछ कहानियां----- - * * * एक छोटी निजी यात्रा पर---कुछ दिनों के लिये जाना हुआ---* *अपने,व्यक्तिगत जीवन-लय की चुप्पी को तोडने का एक प्रयास---साथ ही,जीवन की लय...शान हिल की ट्विटर कहानियाँ - *शान हिल की कुछ और ट्विटर कहानियां... * *शान हिल की ट्विटर कहानियाँ * (अनुवाद : मनोज पटेल) मेरे मम्मी-डैडी ने मुझे नाक से कीबोर्ड खटखटाते देख लिया. मम्मी..मैं तेरा साया हूँ ... - *तू हमसफ़र है , मैं तेरा साया हूँ * *जब भी आया हूँ साथ आया हूँ -* * **वक्त ने जब भी छोड़ा है तेरा दामन * *यक़ीनन मैं वक्त छोड़ आया हूँ -* * **ज़माने की...

इस तरह भी क्या जाना - मैं एक चौबीस पन्नों का अख़बार लिए हुये छोटे टेम्पो के इंतज़ार में था। ये मिनी ट्रक जैसे नए जमाने के पोर्टबल वाहन खूब उपयोगी है। खासकर छोटी जगहों को बड़ी...  मैं नाजुक हरसिंगार..... - तुम बूंदे ओस की मैं पत्‍ती लाजवंती तुम पगलाई सी हवा मैं नाजुक हरसिंगार तुम घनेरे कारे बदरा मैं खेतों की कच्‍ची मेड़ * * * * * तुम संग जि‍या न जाए तुम बि‍... व्याकुल पीड़ा ...- .... कांक्रीट के जंगल में अकेला खड़ा वटवृक्ष भयभीत है...? व्याकुल है आज चौंक उठता है हर आहट से जबकि जोड़ रखे हैं कितने रिश्ते - नाते सांझ के धुंधलके में दूर ....

.हमने गजल पढी, (150 वीं पोस्ट ) - हमने गजल पढी, * एक झलक ही देखकर हमने गजल गढ़ी पहली बार महफ़िल में हमने गजल पढ़ी, ** **ऐसा था, उसका रूप वो परी लगी मुझे आँखों में आँखें डालकर हमने गज..वह प्रसून-प्रसूता है ... - वह अकेली है छबीली है निगरी है निबौरी है जितनी कोमल उतनी जटिल जितनी सहज उतनी कुटिल तरल-सी है पर जमी हुई पिघला कर बहा देती है अपने किनारे लगा लेती है निचुड़...लगता है तुम आ रहे हो - लगता है तुम आ रहे हो, आँचल में छिपा लूँगी अभिव्‍यक्ति उन्‍वान (चित्र)- 59 ये चाँद तुम्‍हें देखकर नज़र तुम्‍हें लगा दे न पीठ किये बैठी हूँ बाहों में ...

आन्तरिक सुरक्षा और देश - देश की आन्तरिक सुरक्षा के मुद्दे पर आयोजित मुख्यमंत्रियों के सम्मलेन का इस्तेमाल जिस तरह से दलीय राजनीति को आगे बढ़ा...ख़ामोशी - मांग करने लायक कुछ नहीं बचा मेरे अंदर ना ख्याल , ना ही कोई जज्बात बस ख़ामोशी है हर तरफ अथाह ख़ामोशी वो शांत हैं वहाँ ऊपर आकाश के मौन में फिर भी आंधी, बारिश ...मोदी से इसलिए नाराज हैं आडवाणी ! - *वृक्षारोपण का कार्य चल रहा था। नेता आए, पेड़ लगाए, पानी दिया, खाद दिया। जाते-जाते भाषण झाड़ गए। गाड़ना आम का पेड़ था, पर वो बबूल गाड़ गए। * ..

 

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दीजिये इज़ाजत नमस्कार .....

रविवार, 2 जून 2013

मन पखेरु उड़ चला फ़िर... ब्लॉग 4 वार्ता... संध्या शर्मा

संध्या शर्मा का नमस्कार... जनता पर फिर महंगाई की मार, पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़े. डॉलर की तुलना में रुपये की गिरावट आम जनता पर महंगी पड़ी। कमजोर रुपये की वजह से ही शुक्रवार को तेल कंपनियों को तीन महीने बाद पेट्रोल की कीमत में 75 पैसे प्रति लीटर की वृद्धि करने का फैसला करना पड़ा। साथ ही डीजल की कीमत भी 50 पैसे प्रति लीटर बढ़ा दी गई है। यह मूल्य वृद्धि शुक्रवार आधी रात से लागू हो गई है। वहीं गैर सब्सिडी वाला एलपीजी सिलेंडर 45 रुपये सस्ता हो गया है।इस खास खबर के बाद आइये अब चलते हैं आज की ब्लॉग वार्ता पर... लीजिये प्रस्तुत है, आज की वार्ता ........

मन पखेरु उड़ चला फ़िर : परिचर्चा से लौट कर - कार्यक्रम - परिचर्चा : मन पखेरु उड़ चला फ़िर स्थान - कान्स्टिट्युशन क्लब डिप्टी स्पीकर हॉल नई दिल्ली दिनांक-18 मई 2013, समय - 5 बजे सांय काव्य संग्रह का पुन..ये राग वि‍रहा कि मत लगाना... - उदासी की नवीं किस्‍त * * * * बसाकर आंखों में भूल गए सांवरे....न रखो नि‍शानी....मुझको काजल सा मि‍टा दो......जब याद कोई बेइंतहा आए और कि‍सी शै सुकूं न मि‍ले..अँगारा को जगाना है ... - निरे पत्थर नहीं हो तुम अतगत अचल , निष्ठुर , कठोर आँखें मूंदे रहो , युग बीतता रहे किसी सिद्धि की प्रतीक्षा में या किसी पुक्कस पुजारी की दया-दृष्टि तुम पर ...

क्या ऐसे ख़त्म होगा नक्सलवाद... क्या ऐसे ख़त्म होगा नक्सलवाद...] *- गौरव शर्मा "भारतीय"* * **प्रदेश में हुए नक्सली हमले के बाद एक बार फिर आरोप-प्रत्यारोप, ...दीवानगी .. - कल तक उनकी फेसबुकिया तस्वीरों ने खूब चौंकाया है हमें सच ! आज मालुम पडा, बेटा उनका नौंबी पास हो गया है ? ... प्रायः सभी कुदाल - छोटी दुनिया हो गयी, जैसे हो इक टोल। दूरी आपस की घटी, पर रिश्ते बेमोल।। क्रांति हुई विज्ञान की, बढ़ा खूब संचार। आतुर सब एकल बने, टूट रहा परिवार।। हाथ मिलाते... 

विश्व जियेगा - विश्व जियेगा और गर्भरण जीते बिटिया, प्रथम युद्ध यह और जीतना होगा उसको, संततियों का मोह, नहीं यदि गर्भधारिणी, सह ले सृष्टि बिछोह, कौन ढूढ़ेगा किसको..रात गुलज़ार के संग काट आयी, बाबुषा - *कुछ लोग बड़े सलीके से जिन्दगी की नब्ज को थामते हैं। सहेजते हैं घर के कोने, तरतीब से सजाते हैं ख्वाब पलकों पर. सब कितना दुरुस्त होता है उनकी जिन्दगी में ...क्या आँच पहुंची वहाँ तक ? - वो एक कतरा जो भिगो कर भेजा था अश्कों के समंदर में उस तक कभी पहुँचा ही नहीं या शायद उसने कभी पढ़ा ही नहीं फिर भी मुझे इंतज़ार रहा जवाब का जो उसने कभी दिया ...

मृत्यु और जीवन ! - *(1)मृत्यु घिन आती है ऐसे समाज से जहाँ हक की लड़ाई जमीन और जंगल के बहाने जान लेने पर उतारू है। जिस जमीन पर गिरता है पानी वहां बहाया जाता है रक्त। ... ओ मेरे !..........2 - कुछ आईने बार बार टूटा करते हैं कितना जोड़ने की कोशिश करो .............शायद रह जाता है कोई बाल बीच में दरार बनकर .............और ठेसों का क्या है वो तो फूलो...दूर-पास का लगाव-अलगाव - कोई सेब अपने पेड़ से बहुत दूर नहीं गिरता है। बछड़ा अपनी माँ से बहुत दूर नहीं रहता है।। दूर का पानी पास की आग नहीं बुझा सकता है।मुँह मोड़ लेने पर पर्वत भी...

ऐ दुनियादारी ! - *अपना भी न सके ढंग से,हुई भी न तू हमारी, * *अलगा भी न सके खुद से,तुझे ऐ दुनियादारी।* * **छोड़ देते जो अगर साथ तेरा, तो अच्छा होता,* *न सीने में बेच...ऎसा लगता है कि कोई नगरवधु मांग में सिंदूर भरकर प्रवचन कर रही हो. - हो गया खात्मा नक्सलवाद का.भूल गये नक्सलवाद के ज़ख्म.सूख गये आंसू इंसानियत की कथित आंखो के,इंसानी खून की सडांध,लाश के चीथडे,मांस के लोथडे..सच तो यह है कि सिद्धांत सभी स्थिर हैं सारे - " चीखती चिड़िया और चील की शान्ति में से क्या चुनोगे ? सच बताना महक फूलों की अच्छी थी तो तोड़ा क्यों उन्हें ? चहक चिड़िया की अच्छी थी तो पिंजडा क्यों बना ?.. 

यादें बचपन की...  - बीती यादें उमड़ -घुमड़ के आ रही रही हैं मेरे मन में कैसे-कैसे वो दिन हैं बीते क्या-क्या छूटा बचपन में रोज सबेरे सूरज आता स्वर्ण रश्मि साथ लिए..बादल तु जल्दी आना रे (भाग २) - काले काले बादल बताओ तुम कहाँ है तुम्हारा देश? कहाँ से तुम आये ,जा रहे हो कहाँ जहां होगा नया नया परिवेश। दूर देश से आये हो तुम थक कर .. "आत्म""हत्या !!!! - कूद पड़ी वो नीचे चौथे माले से (और ऊपर जाना शायद वश में न रहा होगा...) लहुलुहान पड़ी काया से लिपट कर रो पड़ा हत्यारा पिता जानता था उसकी महत्त्वाकांक्षाओं ने ही ...

क्रिकेट यानि सेक्स और सट्टेबाजी ! - भारतीय क्रिकेट बहुत बुरे दौर से गुजर रही है। अब क्रिकेट के साथ ही क्रिकेटर्स की प्रतिष्ठा भी दांव पर लगी हुई है। हालत ये है कि भारतीय टीम के कप्तान महेन्द...अब क्या होगा छत्तीसगढ़ कांग्रेस का ? - ** *क्या चरणदास महंत को मिलेगी चुनावी अभियान की कमान* *-संजय द्विवेदी* माओवादी आतंकवाद के निशाने पर आई छत्तीसगढ़ कांग्रेस के तीन दिग्गज नेताओं महेंद्.. छत्‍तीसगढ़ी महागाथा : तुँहर जाए ले गिंयॉं - छत्‍तीसगढ़ी गद्य लेखन में तेजी के साथ ही छत्‍तीसगढ़ी में अब लगातार उपन्‍यास लिखे जा रहे हैं। ज्ञात छत्‍तीसगढ़ी उपन्‍यासों की संख्‍या अब तीस को छू चुकी है।...


 


दीजिये इज़ाजत नमस्कार .....

शुक्रवार, 24 मई 2013

ये ब्लॉगिंग है जनाब !... ब्लॉग 4 वार्ता... संध्या शर्मा

संध्या शर्मा का नमस्कार.....ये ब्लॉगिंग है जनाब !  जैसे हड्डी-शोरबा मिला शोख़ क़बाब या गज़क लाजवाब पर यहाँ नहीं है कोई नवाब एक-दूजे का जोरदार हुकुम बजाइये और नजराना में वही आह-वाह पाइये......लीजिये प्रस्तुत है, आज की वार्ता ........

श्रीसंतों का कैसा हो बसंत ? - श्रीसंतों का कैसा हो बसंत ? आ रही सट्टालय से पुकार है बुकी गरजता बार - बार कर फिक्सिंग तू बटोर नोट अपार सब कुछ मिले है तुरंत - फुरंत । ...छडो जी, सानु की... वडे लोकां दियां वडी गल्लां.... - मैं कब से बकवास करता आ रहा हूँ, पर अब सरकार को भी पता चला है कि आई पी एल वाकई एक गन्दा खेल है. क्रिकेटर, उनकी पत्नियाँ, उनकी माशुकें, उनके मित्र, उनके लोग... आज का क्रिकेट गीत ! - *इन पापी लोगो (IPL) ने,* *इन पापी लोगो (IPL) ने,* *इन पापी लोगो ने लगा दिया जी सट्टा मेरा......,* *हो जी हो सट्टा मेरा,* *हां जी हाँ सट्टा मेरा...

" जनता ",!! अभी पता नहीं चला क्या ?? - *"सूझबूझ वान"सभी पाठकों को मेरा प्रणाम !!* * कल यूपीए सरकार के नो साल पूरे हो गए , इस अवसर पर रात्रि-भोज रख्खा गया ,जनता हेतु नहीं बल्कि ..चमकदार असफलता की असफल पार्टी - विगत नौ वर्षों से अपनी (अन)उत्कृष्ट सेवाएँ देने वाली संस्था के द्वितीय पंचवर्षीय सत्र का वार्षिक रिपोर्ट कार्ड पेश किया जाना है. ...अच्छाई कभी मिट नहीं सकती - *धर्म-जाति-क्षेत्रियता के नाम पर भोले-भाले लोगों को बरगला कर कुछ मुट्ठी भर लोग अपना उल्लू सीधा करने में जुटे हुए हैं,पर फिर भी इमान, इंसानियत, सच्चाई अभी ... 

मुझे तो बीती यादों से दिल बहलाना है .... !!! - *आजकल अपने वतन से दूर ....और अपनी छोटी बेटी के * *बहुत पास टोरंटो (केनाडा) में श्रीमती जी के साथ ,और अपनी * *दोनों नातिन के संग समय बहुत अच्छा कट रहा है .....एंजोलिना ...एक खबर कई कोण - एंजोलिना जोली अमेरिका की एक ख्यातनाम अभिनेत्री है उन्होंने एक परिक्षण में पाया की उनके शरीर में एक जीन बी आर सी १ है जिसकी वजह से उन्हें ब्रेस्ट केंसर ..हांफता,काँपता दमे से पीड़ित, मेरा प्रेम हुआ मृत्यु में लीन - हांफता,काँपता दमे से पीड़ित, मेरा प्रेम हुआ मृत्यु में लीन खुश हूँ बहुत मैं आज, संताप मेरा हुआ आज क्षीण. जब जीवित था,स्वप्न बिखरे थे सूने पथ पर मेरे....

नाकाम इश्क - एक तूफ़ान की तरह आया था तेरा इश्क अपनी सारी हदें लांघता हुआ डुबो डाला था मेरा सारा वजूद. नामंजूर था मुझे खुद को खो देना नामंजूर था मुझे तेरा नमक! सो लौटा दिया.. मुख्‍़तसर सी बात है..... - उदासी की दूसरी किस्‍त * * * * आज सुबह आंखें खुली तो पाया.....पलकों की कोर में आंसुओं की नमी है। पता भी नहीं लगा और याद में तेरी रात भर रोती रही आंखें।...बचपनममता की छाँव में परवान चढ़ पल्लवित होता प्यारा सा भोला सा बचपन माँ के दुलार में खोया रहता कुंद के पुष्प सा महकता मीठी लोरी सुनता बचपन | प्यार भरी थपकिया पा चुपके सेआँखें मूंदता सोने का नाटक करता फिर धीरे से अँखियाँ खोल माँ को बुद्धू बनाता बचपन.....
  
मेरा परिचय विशाल हिमखण्ड के नीचे मंथर गति से बहती सबकी नज़रों से ओझल एक गुमनाम सी जलधारा हूँ मैं ! अनंत आकाश में चहुँ ओर प्रकाशित अनगिनत तारक मंडलों में एक टिमटिमाता सा धुँधला सितारा हूँ मैं !..जहाँ भी देखो बैनर -पोस्टर !दूर -दूर तक नज़र न आए मंज़र क्यों बहारों के जहाँ भी देखो बैनर -पोस्टर केवल ठेकेदारों के ! रंग-बिरंगे चैनल भी अब हाल चाल क्या बतलाएं नारों में रंगी दीवार लगते चेहरे हैं अखबारों के ! अदालतों से बरी हो रहे दौलत के भूखे कातिल भी नीति,नीयत निर्णय सब कुछ हाथों में हत्यारों के ! अपना दर्द किसे बतलाएं ,सभी व्यस्त हैं अपनों में ..अलविदा साज़ जबलपुरी जी : संजीव वर्मा सलिल - ...जैसे वह मुझसे कुछ कहना चाहता है ... - जबलपुर में दमोह रोड स्थित माढोताल तालाब है . दमोह रोड में मेरे चाचा जी का मकान है और उनके मकान के ठीक पीछे माढोताल तालाब है . यहाँ मैं बचपन से जा रहा हू... 

मुगालते ... - लो, तमाम मूर्ख, बे-वजह का हो-हल्ला मचा रहे हैं मुल्क में 'उदय' जबकि - दोष अधिनस्थों का नहीं, उनके चाटूकार समर्थकों का है ? ... अब हम क्या कहें 'उदय',...ओ मेरे !...........1 - सपनों के संसार की अनुपम सुंदरी नहीं जो तुम्हें ठंडी हवा के झोंके सी लगती, फिर भी हूँ .......सोचती हूँ , शायद , कुछ ......rani Amrit kaur park , Tarna hills mandi ,रानी अमृत कौर पार्क , तारना हिल्स , मंडी  रानी अमृत कौर पार्क जिसे तारना हिल्स, मंडी पर बनाने के बाद दलाई लामा ने जनता के लिये खोला था एक सुंदर और छोटा सा पार्क, जो कि तारना देवी मंदिर के बगल में होने के कारण और ऐसी पहाडी पर होने के कारण जो कि मंडी शहर का बढिया नजारा प्रस्तुत करती हैं ....

हम दुबेजी बोल रहे हैं ! - "हैलो सर ! हम मेरु कैब से दुबेजी बोल रहे हैं" जिस सम्मान और गर्व के साथ दुबेजी ने अपना नाम लिया मन किया कहूँ - "दुबे जी प्रणाम !" नाटे कद के काली-सफ़ेद.दगाबाज तोरी बतियाँ कह दूंगी..हाय राम कह दूंगी ! - ताऊ डाट इन की यह शुरूआती पोस्ट्स (अक्टूबर-2008) में थी जो राष्ट्रीय समाचार पत्र हमारा मैट्रो में 20 मई 2013 को प्रकाशित हुई है. जिसकी सूचना ...पानी का निशान मिटता नहीं - सुनो..... पानी का निशान मिटता नहीं कभी कहा था तुमने पानी पर मेरा नाम लिखते हुए पानी में भीगे वे शब्द आज भी गीले हैं पानी गीला नहीं होता पर मेरी आँखों ....

कार्टून :- उफ़्फ, यहां तो खुजाना भी ज़ुर्म हो गया !!!

 

दीजिये इज़ाजत नमस्कार .....

मंगलवार, 21 मई 2013

स्पॉट फ़िक्सिंग : चंद हाईप्रोफ़ाइल ब्लॉगर और लेखक भी शामिल .. ब्‍लॉग4वार्ता .. संगीता पुरी

आप सबों को संगीता पुरी का नमस्‍कार , कांग्रेस ने आज इस बात को खारिज कर दिया कि घपले और घोटाले कल चार साल पूरा करने जा रही संप्रग-दो की कमियां रही हैं। संप्रग कल सत्ता में लगातार नौ साल भी पूरा करेगी। जब पत्रकारों ने यह सवाल किया कि क्या पार्टी मानती है कि घोटाले संप्रग-दो की कमी है, इस पर पार्टी प्रवक्ता राज बब्बर ने कहा, ‘‘नहीं मैं ऐसा नहीं मानता। क्या नौ साल पहले भ्रष्टाचार नहीं होता था?’’ बब्बर ने कहा कि कांग्रेस की अगुवाई वाली सरकार ने जनता को सूचना का अधिकार जैसा औजार दिया है जिससे कोई भी किसी ताकतवर शख्स की ओर से किए गए गलत काम को उजागर कर सकता है। अब चलते हैं आज की वार्ता पर .....

शिमला कालका रेल यात्रा इस यात्रा वृत्तान्त को शुरू से पढने के लिये यहां क्लिक करें। 27 अप्रैल 2013 सुबह सराहन में साढे पांच बजे उठा और अविलम्ब बैग उठाकर बस अड्डे की ओर चल दिया। तीन बसें खडी थीं, लेकिन चलने के लिये तैयार कोई नहीं दिखी। एक से पूछा कि कितने बजे बस जायेगी, उसने बताया कि अभी पांच मिनट पहले चण्डीगढ की बस गई है। अगली बस साढे छह बजे रामपुर वाली जायेगी। चाय की एक दुकान खुल गई थी, चाय पी और साढे छह बजे वाली बस की प्रतीक्षा करने लगा। बिना किसी खास बात के आठ बजे तक रामपुर पहुंच गया। यहां से शिमला की बसों की भला क्या कमी? कुछ ऐसी पुस्तके जो बदल देगी आपकी आने वाली जिन्दगी को मेरी पिछली पोस्ट में आपने शेयर मार्किट से जुडी पुस्तक देखी थी आज की पोस्ट में आप लोगो के बीच ऐसी पुस्तके ला रहा हु जिन्हें पढ़कर आपकी जिन्दगी में जरुर बदलाव आयेंगे इन पुस्तको को पढ़कर आप अपनी आने वाली जिन्दगी को बहुत ही मस्त रूप से जी सकते हो तो चलिए आपको लेकर चलता हु उन पुस्तको की दुनिया में जो आपकी जिन्दगी में बदलाव लाएगी। मुँबई से बैंगलोर तक भाषा का सफ़र एवं अनुभव.. करीबन ढ़ाई वर्ष पहल मुँबई से बैंगलोर आये थे तो हम सभी को भाषा की समस्या का सामना करना पड़ा, हालांकि यहाँ अधिकतर लोग हिन्दी समझ भी लेते हैं और बोल भी लेते हैं, परंतु कुछ लोग ऐसे हैं जो हिन्दी समझते हुए जानते हुए भी हिन्दी में संवाद स्थापित नहीं करते हैं, वे लोग हमेशा कन्नड़ का ही उपयोग करते हैं, कुछ लोग ऐसे होते हैं जो हिन्दीभाषी जरूर हैं परंतु दिन रात इंपोर्टेड अंग्रेजी भाषा का उपयोग करते हैं, इसी में संवाद करते हैं। जब मुँबई गया था तब लगता था कि सारे लोग अंग्रेजी ही बोलते हैं, परंतु बैंगलोर में आकर अपना भ्रम टूट गया ।

पराजय-बोध से ग्रस्त भाजपा कर्नाटक चुनाव के नतीजे आने के बाद पिछले हफ्ते लालकृष्ण आडवाणी ने अपने ब्लॉग में लिखा कि यह हार न होती तो मुझे आश्चर्य होता। पूर्व मुख्यमंत्री बीएस येद्दियुरप्पा के प्रति उनकी कुढ़न का पता इस बात से लगता है कि उन्होंने उनका पूरा नाम लिखने के बजाय सिर्फ येद्दी लिखा है। वे इतना क्यों नाराज़ हैं? उनके विश्वस्त अनंत कुमार ने घोषणा की है कि येद्दियुरप्पा की वापसी पार्टी में संभव नहीं है। स्पॉट फ़िक्सिंग : चंद हाईप्रोफ़ाइल ब्लॉगर और लेखक भी शामिल! स्पॉट फ़िक्सिंग क्या क्रिकेटरों और बॉलीवुड सेलिब्रिटीज़ की ही बपौती है? कतई नहीं. पता चला है कि चंद हाईप्रोफ़ाइल ब्लॉगर और लेखक भी अब स्पॉट फ़िक्सिंग में शामिल हो गए हैं. सीबीआई जो वाकई में तोता नहीं हो, उससे जाँच करवाई जाए तो और राज निकल सकते हैं. बहरहाल हाल ही में एक फ़ोन टेपिंग में यह खुलासा हुआ है. टेलिफ़ोन टेपिंग की आधी-अधूरी ट्रांसस्क्रिप्ट जो हासिल होते होते रह गई है, वो कुछ इस तरह है - - भाई, अब तो पंगा हो गया हे ना. क्रिकेट में तो मामला जमेगा नहीं. आत्ममुग्धता का संसार *-गणेश पाण्डेय* सोचा है नत हो बार-बार - ‘‘ यह हिंदी का स्नेहोपहार है नहीं हार मेरी, भास्वर यह रत्नहार लोकोत्तर वर’’ - अन्यथा, जहाँ है भाव शुद्ध साहित्य कला-कौशल प्रबुद्ध हैं दिये हुए मेरे प्रमाण कुछ नहीं, प्राप्ति को समाधान पार्श्व में अन्य रख कुशल हस्त गद्य में पद्य में समाभ्यस्त। ‘सरोज-स्मृति’ का यह अंश पता नहीं क्यों मेरे भीतर उमड़-घुमड़ रहा है। निराला क्यों कहते हैं कि मेरे समय के दिग्गजों का काम मेरे काम से मिला कर देख लो।

जैसे उडी जहाज को पंछी . कुछ देर वो लोग उस आलीशान होटल के कमरे में अंगरेजी में बातें करते रहे और बातें करते हुए ही कमरे से जुड़े शानदार छज्जे में जा खड़े हुए |मै अपने चारों और विस्फरित नेत्रों से देख रहा था ‘’क्या ये कमरा भी इसी प्रथ्वी का कोई हिस्सा होगा ?’’मैंने अपने अनदेखे सपनों की तरफ एक प्रश्न उछाला (जो लौटकर फिर मेरे जेहन में आ गिरा )|अद्भुत अभूतपूर्व द्रश्य क्रमशः प्रकट हो रहे थे उसी क्रम में अब एक होटल कर्मचारी जिसकी सफ़ेद चमचमाती वर्दी मेरे मैले कुचैले कपड़ों से कई गुना व्यवस्थित और साफ़ सुथरी थी मेरे सामने कुछ इस्त्री किये तहशुदा कपडे लेकर खड़ा था बिना कुछ बोले बुत की तरह |शिकायतों की चिट्ठी भी .... हप्रेम ने कब भाषा का लिबास पहना हैं, इसने तो बस मन का गहना पहना है । कभी तकरार कहाँ हुई इसकी बोलियों से, कहता है कह लो जिसको जो भी कहना है । लाख दूरियाँ वक्‍त ले आये परवाह नहीं, हमको तो एक दूसरे के दिल में रहना है । दिखावट का आईना नहीं होता प्रेम कभी, हकीकत की धरा पर इसको तो बहना है । शिकायतों की चिट्ठी भी हँस के बाँचता, प्रेम विश्‍वास का *सदा *अनुपम गहना है ।किताबों की दुनिया - 82 कहती है ज़िन्दगी कि मुझे अम्न चाहिए ओ' वक्त कह रहा है मुझे इन्कलाब दो इस युग में दोस्ती की, मुहब्बत की आरज़ू जैसे कोई बबूल से मांगे गुलाब दो जो मानते हैं आज की ग़ज़लों को बेअसर पढने के वास्ते उन्हें मेरी किताब दो आज हमारी किताबों की दुनिया श्रृंखला में हम उसी किताब "*ख़याल के फूल* " की बात करेंगे जिसका जिक्र उसके शायर जनाब "*मेयार सनेही* " साहब ने अपनी ऊपर दी गयी ग़ज़ल के शेर में किया है. मेयार सनेही साहब 7 मार्च 1936 को बाराबंकी (उ प्र ) में पैदा हुए. साहित्यरत्न तक शिक्षा प्राप्त करने बाद उन्होंने ग़ज़ल लेखन का एक अटूट सिलसिला कायम किया।

गर्मी की छुट्टियाँ वाह, गर्मी की छुट्टियाँ। कितने बेसब्री से इंतजार रहता है इसका। 11 मई से हमारे स्कूल बन्द और अब धमाल और मस्ती। सोच रही हूँ कि इन हालिड़ेज़ में पूरा इलाहाबाद घूमूं। यहाँ पर कई हिस्टोरिकल प्लेसेज़ हैं, मुझे उनके बारे में जानना है। पर गर्मी इतनी ज्यादा है की दिन में घर से बाहर निकलने की हिम्मत ही नहीं पड़ती। सारा दिन घर में बीतता है और शाम को पार्क, मॉल, मार्केटिंग और मूवी। इन हालिड़ेज़ में हमने दो मूवी देखी - 'छोटा भीम एंड थार्न आफ दि बाली' और 'गिप्पी'. छोटा भीम तो मेरा फेवरेट सीरियल भी है, इसका कोई पार्ट नहीं छोड़ती, फिर मूवी कैसे छोड़ देती। पत्ते, आँगन, तुलसी माँ ...चौंका, बर्तन, पूजा, मंदिर, पत्ते, आँगन, तुलसी माँ, सब्जी, रोटी, मिर्च, मसाला, मीठे में फिर बरफी माँ, बिस्तर, दातुन, खाना, पीना, एक टांग पे खड़ी हुई, वर्दी, टाई, बस्ता, जूते, रिब्बन, चोटी, कसती माँ, दादा दादी, बापू, चाचा, भईया, दीदी, पिंकी, मैं, बहु सुनो तो, अजी सुनो तो, उसकी मेरी सुनती माँ, धूप, हवा, बरसात, अंधेरा, सुख, दुख, छाया, जीवन में, नीव, दिवारें, सोफा, कुर्सी, छत, दरवाजे, खिड़की माँ, मन की आशा, मीठे सपने, हवन समिग्री जीवन की, चिंतन, मंथन, लक्ष्य निरंतर, दीप-शिखा सी जलती माँ, कितना कुछ देखा जीवन में, घर की देहरी के भीतर, इन सब से अंजान कहीं कितना नीरस होता एक हथोड़ा व एक बांसुरी एक साथ रहते जीवन कितना गुजर गया यह तक नहीं सोचते | था हथोड़ा कर्मयोगी महनतकश पर हट योगी सदा भाव शून्य रहता खुद को बहुत समझता | थी बांसुरी स्वप्न सुन्दरी कौमलांगिनी भावों से भरी मदिर मुस्कान बिखेरती स्वप्नों में खोई रहती | जब भी ठकठक सुनती तंद्रा उसकी भंग होती आघात मन पर होता तभी वह विचार करती | क्या कोइ स्थान नहीं उसका उस कर्मठ के जीवन में पर शायद वह सही न थी भावनाएं सब कुछ न थीं जीवन ऐसे नहीं चलता ना ही केवल कर्मठता से |

प्रेम ही है ईश्वर सितम्बर २००४ *इस* सृष्टि का आधार प्रेम ही है, प्रभु की कृपा से जब किसी के पुण्य जग जाते हैं, तो इस प्रेम की प्राप्ति होती है, यह एक ऐसा धन है जिसे पाकर संसार के सभी धन फीके लगते हैं, जो घटता नहीं सदा बढ़ता रहता है. जन्मों-जन्मों से संसार को चाहता मन उसके चरणों में टिकना चाहता है, अब उसे अपना घर मिल गया है. जगत तो क्रीड़ास्थली है जहाँ कुछ देर अपना कर्तव्य निभाना है, और फिर भीतर लौट आना है. जगत में उसका व्यवहार अब प्रेम से संचालित होता है न कि लोभ अथवा स्वार्थ से. परमात्मा ही इस प्रेम का स्रोत है. हम जो इसकी झलक पाकर ही संतुष्ट हो जाते हैं, 'समर' के इस समर में 'समर' के इस समर में संभल संभल के चलना है सर पे टोपी या अंगोछा साथ मे पानी पीते रहना है यह मौसम है लू का तपती धूप का मेरे लिये घर की ठंडक में दुबक कर हर दुपहर को सोना है बस आज निकला जो घर से बाहर तो हर 'अक्सर' की तरह देखा मजदूर के बच्चों को तो अंगारों पे ही रहना है मेरे पैरों मे पड जाते हैं चलते चलते छाले पैरों में 'कुशन' की चप्पल पहन कर के ही निकलना है 'समर' के इस समर में संभल संभल के चलना है कहीं तर बतर गले हैं कहीं सूखते हलक को जीना है।सही मायनों में जी भरके कहते हैं सब रहिमन की पंक्तियाँ - "रहिमन निज मन की व्यथा, मन ही राखो गोय। सुनि इठिलैहें लोग सब, बाटि न लैहैं कोय।।" तो व्यथा की चीख मन में रख हो जाओ बीमार डॉक्टर के खर्चे उठाओ नींद की दवा लेकर सुस्त हो जाओ !!!!!!!!!!!!!!! रहीम का मन इठलानेवाला नहीं था न व्यथित रहा होगा मन तो एहसासों को लिखा होगा .... जो सच में व्यथित है - वह कैसे इठलायेगा तो ........ कहीं तो होगा ऐसा कोई रहीम जिससे मैं जी भर बातें कर सकूँ सूखी आँखें उसकी भी उफन पड़े मैं भी रो लूँ जी भर के

ब्राह्मणों का अनादरइस पोस्ट का आशय सिर्फ कुछ अतिवादियों को आइना दिखाना है न की जातिवाद को बढ़ावा देना .. गीता के चौथे अध्याय में कर्म से ब्राम्हण होने को कहा गया है देखते हैं कुछ कर्मयोगी ब्राम्हणों की गाथा ... आजकल ब्राह्मणों का अनादर करना हमारे हिन्दू धर्म में फैसन बन गया है । जबकि भारत के क्रान्तिकारियो मे 90% क्रान्तिकारी ब्राह्मण थे जरा देखो कुछ मशहूर ब्राह्मण क्रान्तिकारियो के नाम ब्राह्मण स्वतन्त्रता संग्राम सेनानी (१) चंद्रशेखर आजाद (२) सुखदेव (३) विनायक दामोदर सावरकर( वीर सावरकर ) (४) बाल गंगाधर तिलक (५) लाल बहाद्दुर शास्त्री (६) रानी लक्षमी बाई (७) डा. राजेन्द्र प्रसाद क्या है ताऊ का अस्तित्व और हकीकत श्री ज्ञानदत्त जी पांडे जो कि ब्लागजगत के सम्माननिय और प्रथम पीढी के ब्लागरों में से एक हैं, और जो अपनी नियमित और सारगर्भित पोस्ट्स के लिये जाने जाते हैं, ने शायद सबसे पहले 3 dec. 2008 को अपनी पोस्ट यह ताऊ कौन है के द्वारा जिज्ञासा प्रकट की. इसके पश्चात सभी ब्लागर्स में ताऊ शब्द एक पहेली बना रहा. मेरे ही शहर के सम्माननीय ब्लागर श्री दिलीप कवठेकर तो एक कदम और आगे जाते हुये हमारे शहर की उस पान की दूकान तक भी पहुंच गये जहां "कृपया यहां ज्ञान ना बांटे, यहां सभी ज्ञानी हैं" की तख्ती लगी है. चटाईयां पेड़ पर नहीं उगती ................कल एक बुढिया को चटाई बुनते देखा तब लगा चटाईयां बुनी जाती हैं पेड़ पर नहीं उगती पैसों के जोर पर वो खुशियाँ खरीदने निकल जाता है उसे ज्ञान नहीं खुशियाँ बाज़ार में नहीं मिलती सतह पर टिकने के लिए कुछ प्रयास सतही हो सकते हैं पर ग्रुत्वाकर्षण के सिद्धांत के बगैर कोई चीज सतह पर नहीं टिकती जन्म से मृत्यु तक सुख और दुःख के काल खंड पलटते रहतें हैं पूरा जीवन सुख या सिर्फ दुःख में नहीं गुजरती मै बुढिया से मूल्य कम करा लेता हूँ चटाई की वो मेरे चले जाने से डरती है और किसी नुकसान से नहीं डरती

जमाव रिश्तों का ...एक ज्योतिषी ने एक बार कहा था उसे वह मिलेगा सब जो भी वह चाहेगी दिल से उसने मांगा पिता की सेहत, पति की तरक्की, बेटे की नौकरी, बेटी का ब्याह, एक अदद छत. अब उसी छत पर अकेली खड़ी सोचती है वो क्या मिला उसे ? ये पंडित भी कितना झूठ बोलते हैं. ************************ चाहते हैं हम कि बन जाएँ रिश्ते जरा से प्रयास से थोड़ी सी गर्मी से और थोड़े से प्यार से पर रिश्ते दही तो नहीं जो जम जाए बस दूध में ज़रा सा जामन मिलाने से .बरगद हो जाना कोई आसान बात नहीं है श्रीगंगानगर-गजसिंहपुर के एक बड़ के पेड़ की धुंधली सी छाया है स्मृतियों मेँ। चारों तरफ फैला हुआ...खूब मोटा तना....भरा भरा...पता नहीं कितना पुराना था। उसके नीचे सब्जी वाला होता, राहगीर भी। बच्चे भी उसकी छाया मेँ गर्मी काटते। टहनियों पर अनेक प्रकार के परिंदों की आवा जाही। क्या मालूम उसे ऐसा बनने मेँ किता समय लगा। अपने आप को कितने दशकों तक धूप,गर्मी,आँधी,सर्दी,गहरी रात मेँ अपने आप को अचल रखा होगा तभी तो शान से खड़ा था वह बड़/बरगद का पेड़। रहबर नहीं है-
क्या कहा है आज तुमने ये तुम्हारा स्वर नहीं है- सोच लो बैठे जहाँ हो वो तुम्हारा घर नहीं है- खा रहे हो कसमें जिनकी वो कोई ईश्वर नहीं है - चल दिए हो हाथ पकडे, वो तेरा रहबर नहीं है- तुम तो डरते हो जिंदगी से उसे क़यामत से डर नहीं है- -- उदय वीर सिंह

आज के लिए बस इतना ही .. मिलते हैं एक ब्रेक के बाद .....

रविवार, 19 मई 2013

झंपिंग ज़पांग..झंपिंग ज़पांग....ब्लॉग 4 वार्ता... संध्या शर्मा

संध्या शर्मा का नमस्कार....18 , 19 और 20 मई 2013 के दिन ग्रहों की स्थिति सामान्‍य तौर पर शुभ फल दायी होंगी , मौसम और वातावरण कुछ बढिया रहेगा , शेयर बाजार में कुछ जोड तोड की स्थिति ही रहेगी , तीनो ही दिन का समय मकर राशि वालों के लिए अशुभ तथा मीन राशि वालों के लिए शुभ रहेगा , तीनों ही दिन सामान्‍य तौर पर 12 बजे से 2 बजे दिन तक का समय किसी कार्य के संपादन के लिए शुभ तथा रात्रि के 11 बजे से 1 बजे तक का समय अशुभ होगा। बाकी अपने अपने लग्‍न से देखिए अपना अपना राशि फल , अपने लग्‍न को जानने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें ...लीजिये प्रस्तुत है, आज की वार्ता ........

रिहाई - * ** **उसने दे दी अपनी हर साँस से रिहाई मुझको * *कुछ इस तरह उसने अपना हक अदा कर दिया !!* संग चांद आवारा बादल ....... - स्‍मृति के वातायन से नि‍काल लाओ उन फूलों को जि‍न्‍हें बि‍खरने के डर से पीली जि‍ल्‍द पड़ी कि‍ताब के सीने में छुपाया था कभी * * * * * अभी थी महफ़ि‍ल अभी...मेरे घर आई नन्‍ही परी - कि‍शोर दि‍वसे मेरे घर आई नन्‍ही परी  .." कहानी .......एक जोड़े की " एक प्यारा सा जोड़ा था , दोनों ने तिल तिल , आपस में प्यार था जोड़ा , इस जोड़े हुए प्यार से , हयाते-राह खुशगवार हुई , यह जोड़ा खुद को दुनिया से, जोड़ने की ख्वाहिश में , रिश्ते तमाम जोड़ता गया...

मैच फिक्सिंग: सरकार इस्तिफा दे! - इतना बड़ा खुलासा. लाखों करोड़ों रुपयों का लेन देन और साथ में सेक्स स्कैंडल. [image: protests] श्री शांत के साथ साथ दो और खिलाड़ी. खिलाड़ियों समेत कई अन्यों .IPL बोले तो इंडियन पाप लीग ! - वैसे तो मेरा हमेशा से मानना है कि इंडियन प्रीमियर लीग यानि आईपीएल की बुनियाद ही चोरी, बेईमानी, भ्रष्टाचार, अश्लीलता पर टिकी हुई है, लेकिन इससे भला हमें य... .. बात शुरू हुई तो अफसाना बन गई खंबा कांग्रेस - श्रीगंगानगर-कांग्रेस के सबसे छोटे पदाधिकारी द्वारा बहुत बड़े पदाधिकारी के सामने शिकायत के लिहाज से कही गई जरा सी बात बहुत बड़ा अफसाना बन गई। ...

Karanparyag-Nandprayag-Chamoli-Gopeshwar कर्णप्रयाग-नन्दप्रयाग-चमोली-गोपेश्वर- ROOPKUND-TUNGNATH 08 SANDEEP PANWAR रात के लगभग 8 बजे के आसपास हमने कर्णप्रयाग ... भूमंडलीकरण, वैश्वीकरण, उदारीकरण बनाम सांस्क़ृतिक संघर्ष - वैश्वीकरण शब्द को विश्व की संस्कृतियो अर्थव्यवस्थाओं तथा राज व्यवस्थाओं का एक दूसरे के ऊपर पड़ने वाले प्रभावों जिसमें सात्मीकरण एवं अलगाव दोनों सम्मिलित... नदी का सागर से मिलन - सागर से मिलने भागी आती नदी पहली बार देख रहा था, एक नदी का सागर से मिलना। स्थान कारवार, नदी काली और अरब सागर। दोपहर के समय ऊपर से पड़ने वाली सूरज की किरणे...

मेरी आवाज़ ही मेरी पहचान है, ग़र याद रहे... - कभी-कभी ज़िन्दगी में कुछ बुरा होना ब्लेसिंग इन डिसगाईज हो जाता है.. अब देखिये न पिछले दो महीने से लैपटॉप ख़राब पड़ा है इन दिनों कुछ भी नहीं लिख सका,..  फाख्ता का पलता-बढ़ता घर-परिवार - कभी जब घर आँगन, खेतिहर जमीनों में, धूल भरी राहों में, जंगल की पगडंडियों में भोली-भाली शांत दिखने वाली फाख्ता (पंडुकी) भोजन की जुगत में कहीं नजर आती तो उस ... हैंडल विथ केयर - मैंने पहुंचाया था प्रेम तुम तक, सम्हाल कर , एहतियात से पैक करके.. सभी आवश्यक निर्देशों के साथ कि - ये हिस्सा ऊपर (दिस साइड अप) हैंडल विथ केयर ब्रेकेबल डु नॉट... 

अंतर्राष्ट्रीय ब्लागर सम्मेलन के छठे सत्र में पुस्तक विमोचन एवम बाबाश्री दर्शन - अंतर्राष्ट्रीय ब्लागर सम्मेलन पर प्रथम पोस्ट, अंतर्राष्ट्रीय ब्लागर सम्मेलन पर द्वितीय पोस्ट *अंतर्राष्ट्रीय ब्लागर सम्मेलन पर तृतीय पोस्ट* *..इंसान को ही खोजना होगा - कल का काम आज ही, हो कैसे सफल। इंसान को ही खोजना, होगा इसका हल।। धूल भरी आँधियाँ, प्रकृति का गुस्‍सा है। सूरज का भी क़हर, पतझड़ पर बरसा है। दिन पे दिन...वटवृक्ष - चित्र गूगल से साभार सूक्ष्म हूँ जैसेक्षुद्र बालू कण ,होना है बड़ा , बनना है विशालसोचता हूँ हर क्षण।मैं छोटा, बहुत ही छोटा जीव हूँकिन्तु एक विन्दु में.. 

ओ री चिड़िया - ओ री चिड़िया सुन ले मेरे मन की बात चुग्गा तुझे खिलाऊँगी ले चल अपने साथ धरती पर बैठी बैठी हो गई मै तो तंग नील गगन की सैर करा दे ले चल अपने संग इतना सा अहसान...bhavnayen- किताब तू है एक किताब तुझ मे रहती दुनिया की जानकारियाँ बेहिसाब कभी तू हंसा जाती कभी रुला जाती कभी बिखरे पलों को भी समेटे गमों की परछाईयाँ कभी तुझ मे दिखाई पड...गुहार: पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन से लापता एक बच्चे के बारे में छपी खबर पर !! - अखबार वाली फोटो की हुबहू नक़ल ताकि सही से पढ़ी जा सके !!यह फोटो अखबार की कतरन की फोटो है !! असम के दैनिक समाचार पत्र में ११ मई को छापी गयी एक खबर ... 

 रिश्वत न धराओ ... - मुझे किसी ऊँचे मंच पर यूँ ही खड़ा न कराओ खड़ा कराओ भी तो चुप रहने के लिए राजस्व से ही रिश्वत न धराओ .... बड़ी मुश्किल में हूँ मैं जबसे चींटियाँ लगातार मेरी ...जलाओ दिल मितरां कि.... - * ****जलाओ दिल मितरां कि चिराग जले * *अँधेरा ही अँधेरा है बहुत दूर तक -* * **लगता है गर्दिशों में माहताब भी है* *बादलों का बसेरा है बहुत दूर ... नैसर्गिक कला - प्यारे प्यारे कुछ पखेरू चहकते फिरते वन में पीले हरे से अलग दीखते पेड़ों के झुरमुट में एक विशेषता देखी उनमें कभी न दीखते शहरों में | वर्षा ऋतु आने के पह... 

अंधेरे की वजह - घाटशिला की यात्रा यूँ तो मैने बिटिया के समर इन्टर्नशिप के चक्कर में मजबूरी में की थी लेकिन इस यात्रा ने मुझे अग्निमित्र से मिला दिया। देश की भलाई सोचने .."झंपिंग ज़पांग..झंपिंग ज़पांग.के बाद . गीली गीली......!!" - चम्पक बन में बैठ सखी संग ... .... - चम्पक बन में बैठ सखी संग ... वृहग वृन्द का कलरव सुनना .... ढलते दिवस के अवरोह पर .. राग दरबारी के .... खरज से ... कुछ गंभीर प्रकृति के स्वर लेना .. लहरें - प्रवीण पाण्डेय जी का नाम खुद अपने आप में परिचय है उनका --- और उसी तरह उनके ब्लॉग का नाम-* न दैन्यं न पलायनम* भी .... प्रस्तुत है उनकी एक रचना* लहरें *....
 

 

दीजिये इज़ाजत नमस्कार .....

बुधवार, 15 मई 2013

मदारी कुछ भी नहीं बिना जम्हूरे के...ब्लॉग 4 वार्ता... संध्या शर्मा

संध्या शर्मा का नमस्कार....हमें भी स्वयं के अवदान को कम अंकित कर दूसरों से तुलना नहीं करनी चाहिए, प्रायः हम अपने गुणों को कम और दूसरों के गुणों को अधिक आंकते हैं, यदि औरों में भी विशेष गुणवत्ता है तो हमारे अन्दर भी कई गुण मौजूद हैं।अपना अपना महत्त्व  ... लीजिये प्रस्तुत है, आज की वार्ता ........
लो मै आ गया... - विभिन्न भाव भंगिमाओं में आपका अपना गौरव शर्मा "भारतीय" प्रदेश के मुख्यमंत्री माननीय डॉ रमन सिंह के साथ आपका अपना गौरव शर्मा "भारतीय" ...प्रि‍यतम का गुंजलक.... - बरसती चांदनी की पंखुरि‍यों में प्रि‍यतम का गुंजलक मोगरे की खुश्‍बू से मन का उपवन महका जाता है । सांसों की गरमाई से सि‍क्‍त रखो मेरी सांसे गेसुओं से उलझकर..ग़ज़ल - * * *जालिम लगी दुनिया हमें हर शक्श बेगाना लगा * *हर पल हमें धोखे मिले अपने ही ऐतबार से* * * *नफरत से की गयी चोट से हर जखम...

 नशे के कारोबार मे राज्य की भूमिका - ड्रग्स का उपयोग लगभग उतना ही पुराना है जितनी पुरानी मानव सभ्यता। लेकिन अधिक नशे की लत और खतरनाक सिंथेटिक दवाएं पश्चिमी देशों के द्वारा शुरू किए गए थे,. किस पिंज़रे में फ़स गया - एक बार तेरे शहर में आकर जो बस गया, ता-उम्र फड़फडाता, किस पिंज़रे में फ़स गया. नज़रें नहीं मिलाता, कोई यहाँ किसी से, एक अज़नबी हूँ भीड़ में, यह दर्द...अहसासों के पंख...एक ब्लॉग नया सा ... - एक परिचय शरद कुमार जी और उनके ब्लॉग से -- कुछ शेर बेटी के नाम एक मासूम सा ख्वाब और माँ ये रचनाएं हैं शरद कुमार जी के ब्लॉग *अहसासों के पंख* से .. 

 संदीप रावत की कविताएं - मेरे प्रिय छात्र अनिल कार्की की वजह से मेरा ध्‍यान फेसबुक पर संदीप रावत की कविताओं की ओर गया। मैं उनके पिछले कुछ स्‍टेटस को बहुत ध्‍यान से देख रहा था, ...मैं और शब्द - सृष्टि के अनछुए पहलू उनमें झांकने की जानने की ललक बारम्बार आकृष्ट करती नजदीकिया उससे बढ़तीं वहीं का हो रह जाता आँचल में उसके छिपा रहना चाहता भोर का ..चल दिल से उम्मीदों के मुसाफ़िर - मुसलसल बेकली दिल को रही है मगर जीने की सूरत तो रही है मैं क्यूँ फिरता हूँ तन्हा मारा-मारा ये बस्ती चैन से क्यों सो रही है चल दिल से उम्मीदों के मुसाफ़िर ये न... 

वर्षा - वर्षा   अमृत छलका दानी नभ से सिहरा रोम-रोम धरती का जागे वृक्ष, दूब अंकुराई शीतलता आंचल में भर पवन लहराई. भीगा तन पाखी का उड़ा फड़फड़ा डैन... मदारी ..... - * ** **मदारी कुछ भी नहीं...* *बिना जम्हूरे के...!* *ये अलग बात है...* *दिखाई यही देता है कि...* *सारा खेल मदारी के हाथ है......!* *लेकिन जब ज्यादा होशिय....तल्ख स्मृतियाँ ( हाइकु ) - कड़वी यादें चीर देती हैं सीना मैं लहूलुहान । ************ पीड़ित यादें झटक ही तो दीं थीं पीले पत्ते सी । ***************...

कोई भी छोटा बड़ा नही है सभी समान हैं !! - एक गाँव में एक पण्डित जी अपनी पंडिताईन के साथ रहते थे ! पण्डित जी गाँव में पूजा और अन्य धार्मिक कार्य करवाते थे ! उन पण्डित जी के मन में जातिवाद और उंच ..विचलित मन ! - *हर घर से होकर गुजरती नियति की गली है, * *न हीं मुकद्दर के आगे,वहाँ किसी की चली है, * *नीरस लम्हों के सफ़र में,किंतु सकूं के दो पल, * *जो हंसकर गुजार दे ... ताऊ का खूंटा "रेडियो प्लेबैक इंडिया" पर.....! - ताऊ के खूंटे से एक खूंटा जो 2 जनवरी 2009 को ताऊ के सैम और बीनू फ़िरंगी की पोस्ट के अंत में "* इब खूंटे पै पढो"** * के अंतर्गत * *प्रकाशित हुआ था उसे आज ..

 इंटरनेट युग में विज्ञापन का कारोबार - समाज के साथ ही हर दौर में विज्ञापनों का रुझान भी बदल जाता है। लेकिन अब जो बदलाव आ रहा है, वह समाज की वजह से कम और तकनीक की वजह से ज्यादा है। ...शब्दों का साथ खोजते विचार - कह पाना जितना सरल है भावों और विचारों को शब्दों के रूप ने लिख पाना उतना ही कठिन । जाने कितनी ही बार यह आभास हुआ है कि विचारों का आवागमन जारी रहता है पर ... “गुलाब भरा आँगन” - “गुलाब भरा आँगन” सहजता सिमटता हवा का झोंका सहज होनें का करता था भरपूर प्रयास. बांवरा सा हवा का वह झोंका गुलाबों भरे आँगन से चुरा लेता था बहुत सी गंध और उसे...

 मेरा आईना - मुझको मेरा आईना दिखाकर तुमने अच्छा काम किया भूल गई थी जिसको मैं उसको फिर पहचान लिया ....वह तस्वीर......बहुत वक़्त से देखता रहता था मैं दीवार पर टंगी उस तस्वीर को न जाने कब से टंगी थी घर के कोने के उस अंधेरे कमरे में गर्द की एक मोटी परत रुई धुनी रज़ाई की तरह लिपटी हुई थी उस तस्वीर से पर आज .....बादल तेरे आ जाने से ...* *** बादल तेरे आ जाने से जाने क्यूँ मन भर आता है, मुझको जैसे कोई अपना, कुछ कहने को मिल जाता है ! पहरों कमरे की खिड़की से तुझको ही देखा करती हूँ , तेरे रंग से तेरे दुःख का अनुमान लगाया करती हूँ ! यूँ उमड़ घुमड़ तेरा छाना तेरी पीड़ा दरशाता है , बादल तेरे आ जाने से ...थकता नहीं है आदमी - भीड़ ही भीड़ है चारों तरफ है आदमी। चलता ही जा रहा है बस थकता नहीं है आदमी। वाहनों की दौड़-भाग से नहीं इसे परहेज न है इसे प्रतिद्वंदिता न द्वेष .....

 

दीजिये इज़ाजत नमस्कार .....

मंगलवार, 14 मई 2013

अहसासों के पंख...एक ब्लॉग नया सा ...ब्‍लॉग4वार्ता .. संगीता पुरी

आप सबों को संगीता पुरी का नमस्‍कार , कल बंबई शेयर बाजार का सेंसेक्स 430.65 अंक की भारी गिरावट के साथ 19,691.67 अंक पर आ गया। यह 27 फरवरी, 2012 के बाद सेंसेक्स की सबसे बड़ी गिरावट है। बंबई शेयर बाजार में चले भारी बिकवाली के दौर से निवेशकों की कुल पूंजी एक लाख करोड़ रुपये घट गई। प्रत्येक तीन में से दो शेयर नुकसान के साथ बंद हुए। सेंसेक्स की सभी 30 शेयर नुकसान दर्शाते बंद हुए। आईटीसी को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ। कंपनी के शेयर में 5 फीसद से अधिक की गिरावट आई। बिकवाली के दौर के बीच निवेशकों की बाजार हैसियत एक लाख करोड़ रुपये घटकर 67,03,388.59 करोड़ रुपये रह गई। भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था की इस खास खबर के बाद चलते हैं आज की वार्ता पर .....

विचलित मन !*हर घर से होकर गुजरती नियति की गली है, * *न हीं मुकद्दर के आगे,वहाँ किसी की चली है, * *नीरस लम्हों के सफ़र में,किंतु सकूं के दो पल, * *जो हंसकर गुजार दे , वही जिन्दगी भली है। * * **पिछले तकरीबन एक माह से जिन्दगी की रेल, बस यूं समझिये कि पटरी से उतरी हुई है। पहले कम उम्र में एक परिजन की असामयिक मृत्यु से अस्त-व्यस्त था , और अब अपना प्रिय श्वान जोकि पिछले १3 वर्षों से घर में घर के एक सदस्य की भांति था, पिछले ४-५ दिनों से अन्न-जल त्यागकर इस बेदर्द जहां से प्रस्थान की तैयारी में है। खैर, यही दुनिया का दस्तूर है सोचकर विचलित मन ने बहलने की कोशिश में कुछ टूटा-फूटा काव्य समेटा है, प्रस्त... अधिक »

बेल बर्फी ** आइए बनाए बेल की स्वादिष्ट बर्फी । * सामाग्री :-* - एक किलो बेल का पल्प - आधा किलो चीनी - 150 ग्राम देशी घी - इलायची पावडर एक छोटा चम्मच - मेवे इच्छानुसार - 100 ग्राम खोया (यदि मिलाना चाहें) - 50 ग्राम काजू के टुकड़े सजाने के लिए * कैसे बनाए *:- बेल को तोड़ कर पल्प निकाल लें और बीजे साफ कर दें । अब भारी पेंदे की कड़ाही आग पर चढ़ा दें इसमे खोया डाल कर भून लें हल्का सुनहरा होने पर उतार कर ठंडा होने के लिए रख दें अब घी डाल कर गरम करें , बेल डालें थोड़ा भून लें जब घी और बेल अच्छी तरह से एकसार हो जाए भुनने की महक आने लगे तब चीनी और ... अधिक »

Vaan village (Laatu Devta) वाण गाँव की सम्पूर्ण सैर (लाटू देवता मन्दिर सहित) ROOPKUND-TUNGNATH 07 SANDEEP PANWAR अंधेरा होते-होते हम वाण पहुँच चुके थे। मनु भाई का पोर्टर कम गाईड़ कुवर सिंह काफ़ी पहले ही आगे भेज दिया गया था। उसे सामान बचा हुआ सामान वापिस करने के लिये कह दिया था। जैसे ही हम पोस्ट मास्टर गोपाल बिष्ट जी के यहाँ पहुँचे तो देखा कि कुवर सिंह सारे सामान सहित वही जमा हुआ है। मनु भाई गोपाल जी के यहाँ एक रात रुककर रुपकुन्ड़ के लिये गये थे। गोपाल जी यहाँ के ड़ाकिया Postman भी है। इसके साथ वह एक दुकान स्वयं चलाते है जो वाण स्टेशन के कच्चे सड़क मार्ग के एकदम आखिरी में ही आती है। म... अधिक »

क्षणिकाएं ! (१) *सुख और दुःख* ऐसा वक्त कब आएगा जब हम खुशी में बचे रहेंगे सरल और दर्द में अविकल न खुशी में चहकेंगे और न ही दुःख में होंगे विह्वल क्या हमारे जीते जी ऐसा वक्त आएगा जब हम चीजों को एक नज़र से देखने लगेंगे ? * ** * * (२ ) कवि बनना स्थगित कर दिया है* दर्द को कितना बताएँ हर तरफ मौजूद है. समय नहीं मेरे पास कि इस पर महाकाव्य लिखूं ! तुम मेरे खुशी के गीतों में ही दर्द बांच लेना, अपने दर्द को मेरी खुशी में तिरोहित कर देना, ऐसे ही जब तुम खुशी के नगमे गाओगे, मैं तुम्हारा दर्द जान जाऊँगा ! फ़िलहाल,मैंने कवि बनना स्थगि... अधिक »

स्वर्ण रेखा नदी तेरा असली नाम क्या है, स्वर्ण रेखा नदी? तू उस देश में बहती है जिस देश को कभी ‘सोने की चिड़िया’ कहते थे, उस राज्य में बहती है जिसे ‘झारखंड’ कहते हैं, उस जिले में बहती है जिसे ‘घाटशिला’ कहते हैं। क्या महज इसलिए ‘स्वर्ण रेखा’ कहलाई कि पहाड़ियों के पीछे अस्त होने से पहले सूर्य की सुनहरी किरणें कुछ पल के लिए खींच देती है तेरे आर-पार एक स्वर्णिम रेखा! या इसलिए कि तू अपने साथ बहाकर लाई थी कभी ताँबे और सोने के भंडार? जाऊँगा बनारस तो नहीं बता पाउँगा ‘माँ गंगा’ से तेरा हाल! तेरी इतनी बुरी हालत सुनकर दुखी होगी और डर जायेगी बेचारी। बहेलिए जैसे कतरते रहते हैं हाथ आई सुनहरी चिड़िया के पंख, लोभी जैस...अधिक »

कामवाली बाई शादी के मौसम में व्यस्त सभी बाई रहतीं सहन उन्हें करना पड़ता बिना उनके रहना पड़ता उफ यह नखरा बाई का आये दिन होते नागों का चाहे जब धर बैठ जातीं नित नए बहाने बनातीं यदि वेतन की हो कटौती टाटा कर चली जातीं लगता है जैसे हम गरजू हैं उनके आश्रय में पल रहे हैं पर कुछ कर नहीं पाते मन मसोस कर रह जाते | आशा

जज्बात वही आशिकी नया 1990 में आयी महेश भट्ट निर्देशित रोमांटिक फिल्म ‘आशिकी’ अपने समय की सफल फिल्मों में से एक है. लगभग 23 साल बाद भट्ट कैंप एक बार फिर प्यार के उसी जज्बात को नये अंदाज में ‘आशिकी टू’ से परदे पर परिभाषित करने जा रहा है. आदित्य रॉय कपूर और र्शद्धा कपूर इस फिल्म में मुख्य भूमिका में हैं. इन सितारों का कहना है कि ‘आशिकी टू’ पुरानी ‘आशिकी’ से काफी अलग है. जैसे पीढ.ी में बदलाव आया है वैसे ही फिल्म की कहानी में भी कई परिवर्तन आये हैं. दोनों में कोई समानता है तो वह है खास प्रेम कहानी. आदित्य रॉय कपूर और र्शद्धा कपूर से इस फिल्म और उनके कैरियर पर हुई बातचीत के प्रमुख अंश राहुल रॉय औ... अधिक »

मामा भाँजा की रेल्वे कमाल : सुपर व्यंग “ कल्लू झाड़ूवाला पप्पू के कहने पर नौकरी के लिए रेल मंत्रालय पहुँचकर रेल्वे मंत्री से मिलने के लिए गया मगर वहाँ देखा तो बिलकुल रेल्वे के डिब्बो के माफिक ही लंबी लाइन लगी हुई थी जैसे देशभर से नौकरी के डिब्बे लेने कतार लगी हो सब के हाथ मे बक्से थे ओर इंतज़ार था .... मामा भाँजे की सुपर हीट जोड़ी से मिलने का ...मगर अंदर कुछ ओर चल रहा था ..... | “ ** सेमसंग फोनवालो पर कानूनी केस करो* “ भाँजे ,ये सेमसंग पर मस्त केस ठोक देते है “ बंसल जी ने कहा तो भाँजा बोला “ मगर क्यू ,उससे हमे क्या फायदा ? “ .... भाँजे ,ये सेमसंगवाले आजकल बहुत ही पैसा कमा रहे है वो भी हमारे ही ... अधिक »

.भृंगराज भृंगराज का नाम आप लोगों के लिए नया नहीं है। तमाम हेयर आयल के विज्ञापन रोज प्रकाशित होते हैं,उनमें भृंगराज की चर्चा बड़े जोर-शोर से की गयी होती है।केशों के लिए यह महत्वपूर्ण तो है ही लेकिन इसके अन्य औषधीय गुण शायद और ज्यादा महत्वपूर्ण लगते हैं मुझे। अकेले भृंगराज कायाकल्प करने में सक्षम है। अगर उसे सही तरीके से प्रयोग किया जाये तो।यहाँ तक कि कैंसर से आप इसके सहारे लड़ सकते हैं और जीत भी सकते हैं। भृंगराज के पौधे वर्षा के मौसम में खेतों के किनारे ,रेल लाइन के किनारे, खाली पड़ी जमीन पर ,बाग़ बगीचों में खुद ही उग जाते हैं। ये हमेशा हरे रहते हैं।इनके फूल पत्ते तने जड़ सब उ... अधिक »


अभिव्यक्तिमै नहीं जानती ये कविता कैसे बन कैसे बन गई ?एक क्षण कुछ महसूस किया और अगले एक मिनिट में यह रचना बन गई | घर में रखे पुराने सामान की तरह चमकाए जाते है, कभी कभी वो आज निर्जीव ही सही कभी जीवन्तता थी उनमे महकता था उनकी सांसो से घर चहकता था उनके बोलों से घर गूंजते थे अमृत वाणी से मंत्र सौंधी खुशबू से महकती थी रसोई भरे जाते थे कटोरदान ,पड़ोसियों के लिए किससे कहे ?कैसे कहे ? निर्जीव क्या बोलते है ? उनकी सारी खूबियों पर है प्रश्न चिन्ह ? बिताते है इस उक्ति के सहारे वो जीवन की शाम "कर लिया सो काम ,भज लिया सो राम "|

अहसासों के पंख...एक ब्लॉग नया सा ...एक परिचय शरद कुमार जी और उनके ब्लॉग से -- कुछ शेर बेटी के नाम एक मासूम सा ख्वाब और माँ ये रचनाएं हैं शरद कुमार जी के ब्लॉग *अहसासों के पंख* से ..

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