गुरुवार, 8 दिसंबर 2011

चांदसी दवाखाना -हर बीमारी का शर्तिया इलाज ------ ब्लॉग4वार्ता -- ललित शर्मा

ललित शर्मा का नमस्कार, ब्लॉग4वार्ता पर रुकावट चल रही थी, पीसी की गड़बड़ी के कारण्। चाह कर भी वार्ता नहीं लिख पा रहा था।आईए चलते हैं वार्ता के अगले दौर में .........। श्रेष्ठ ...कोई कहे, न कहे कोई मानें या न मानें कोई समझे या न समझे पर अब ये तो तय-सा है कि - बिना साहित्यिक पटका-पटकी के यह तय करना मुश्किल है कि - कौन श्रेष्ठ है ? कौन किससे श्रेष्ठ है ?? दिल में तड़पता है अँधेरे का अन्दाज़ मुक्तिबोध की कविता 'अंधेरे में '  में ने  कितने - कितने समय से कितना - कितना कोलाहल मचा रक्खा है।  हिन्दी कविइता पढ़ने - लिखने वालों की जमात में  यह  अपनी उपस्थिति निरन्तर बनाए हुए है। उप्फ ..अंधेरा है कि  क...

 माँ का आशीर्वादकब बच्चे हो जाते हैं बड़े और करने लगते हैं फैसले स्वयंपता भी न चलता है रह जाते हैं स्तब्ध हम .......... कभी उचित कभी अनुचित उठा जाते हैं वो कदमपर हम फोरन भूल जाते हैं अपना गमयह ही तो होता है दिल और खून का ...अंडे का क्रूर फंडासब जानते हैं कि मांसाहार का व्यवसाय क्रूरता और हिंसा पर टिका है। लेकिन जब बात अण्डों की होती है तो कई बार वह क्रूरता और व्यवसायिक हिंसा पर्दे की ओट में छिप जाती है और कुछ लोग अंडे को शाकाहारी बताने के प्रच...कांग्रेस में सत्ता के तीन केंद्र गौड़,जांदू और कांडायोति कांडा अग्रवाल के यूआईटी अध्यक्ष बनने का मतलब केवल इतना ही नहीं है की पहली बार अग्रवाल समाज को किसी पार्टी ने महत्व दिया है। इसके अलावा भी बहुत कुछ है। जो हाल फिलहाल बेशक किसी को दिखाई न...

हर बीमारी का शर्तिया इलाज --डॉ पाबला जी भिलाई वाले.ब्लोगिंग में अपनी एक आदत है --जो पोस्ट पसंद आए , मैं उस पर दोबारा ज़रूर जाता हूँ . कल *वीरुभाई जी *की एक पोस्ट पढ़ी -- नाश्ते के लिए अब वक्त कहाँ ?पढ़कर ऐसा लगा जैसे हमारी ही हालत बयाँ कर दी . दूसरों के व...प्रतिबन्ध का विरोध और विरोध का औचित्यअभी कपिल सिब्बल ने सोशल नेटवर्किंग साइट पर प्रतिबंध लगाने जैसी बात कही कि देश के उस वर्ग में भूचाल सा आ गया जो इंटरनेट पर बैठा-बैठा अपनी भड़ास निकालता है। इसी के साथ उस वर्ग में भी उठापटक जैसी स्थिति हो ग...आज राजेन्द्र स्वर्णकार की वैवाहिक वर्षगाँठ हैआज, 8 दिसम्बर को शस्वरं वाले राजेन्द्र स्वर्णकार की वैवाहिक वर्षगाँठ है स्वर्णकार दम्पत्ति को बधाई व शुभकामनाएं
लोक मंगल के लिए जीने वाले संत महात्मा होते हैंदुनिया में लाखों करोड़ों व्यक्तियों में ही कुछ ही महामानव जन्म लेते हैं जो लोक मंगल के लिए अपना जीवन जीते हैं और मानवता की सेवा करने के लिए अपना सारा जीवन अर्पित कर देते हैं और बदले में उन्हें कुछ भी चाह न...लाली उसकी सहेलियां और डर्टी पिक्‍चरहाल से निकल कर जब बाहर आया तो मुझे जाने क्‍यों मगर लाली बहुत याद आई ..या शायद केवल लाली ही नही कई और भी चेहरे जिनके जीवन स्‍तर को लेकर कोई बहुत लिखी जाने वाली बात नही है, मगर अगर कुछ इन सबमें सारी असम...ज़िंदगी से क्यों हार रहे हैं लोग मंगलवार और बुधवार को देश के दो शहरों में ऐसी घटनाएं हुईं, जो बहुत कुछ सोचने को मजबूर करती हैं कि हमारे बड़े शहरों में लोगों पर तनाव किस कद्र हावी होता जा रहा है...चुनौतियों से जूझने की जगह किस तरह लोग ज...

तुम्हें मुझसे मोहब्बत हैउल्फत ना सही नफरत ही सही इसको भी मोहब्बत कहते हैं तमन्ना बन कर ना बसे तो क्या हम दिल में कांटे से चुभते रेहते तो हैं ग़म नहीं इस बात का की चेहरे का नूर ना बन सके पर जो उनके चेहरे को चूम गई वो गुस्से की लाल...बोलते शब्‍द 71 बोलते शब्‍द 71 आज के शब्‍द जोड़े हैं 'मंद बुद्धि‍' व 'अक्‍ल मंद' और 'मत करो‍‍' व 'न करें' आलेख - डॉ.रमेश चंद्र महरोत्रा स्‍वर - संज्ञा टंडन 1...चुहल ही चुहल में... अलसुबह घने कोहरे में सड़क की दूसरी पटरी से आती सिर्फ सलवार-सूट में घूम रही कोमलांगना को देख मेरे सर पर बंधा मफलर गले में साँप की तरह लहराने लगा ! वह ठंड को अंगूठा दिखा रही थी और मैं आँखें फाड़ उँगलियाँ चबा...
अयोध्या में कीमियागरहमारे सभी साथी लखनऊ घूमने का मन बनाए बैठे थे। नामदेव जी और हमने तय किया कि अयोध्या चलते हैं। वहीं डेरा डालते हैं, 4/40 पर एक लोकल ट्रेन लखनऊ से फ़ैजाबाद क...कम से कम इच्छाएं देती हैं बहुत ज़्यादा संतोष..दिल्ली का एक मोहल्ला... जहां लोग दिन-रात कारोबार में उलझे रहते, 9 को 99 बनाने की धुन में खोए रहते, वहां कोई था, जो अलग सपने बुन रहा था। सोते-जागते एक ही ख़्वाब उसे दिखाई देता, वो था फ़िल्म बनाना। ...........मुझे तुम्हारे तग़ाफ़ुल से क्यूं शिकायत हो... इन दिनों नाराज हूँ. किससे, पता नहीं. क्यों, पता नहीं. नाराजगी के मौसम में अक्सर साहिर को याद करती हूँ. शायद मैं उनसे भी नाराज ही हूँ और वो दुनिया से नाराज रहे. साहिर मेरे महबूब शायर हैं. अमृता आपा की ज...

वार्ता को देते हैं विराम, मिलते हैं ब्रेक के बाद राम राम



8 टिप्पणियाँ:

अच्‍छे लिंक्स मिले ..
कई दिनों बाद ब्‍लॉग4वार्ता पर पोस्‍ट देखकर अच्‍छा लगा ..
मैं तो अभी भी कंप्‍युटर की समस्‍या को झेल ही रही हूं ..
समाधान निकलते ही वार्ता लगाने का प्रयास होगा !!

सुन्दर लिंक्स... वार्ता को फिर से देखना अच्छा लगा...

यहाँ आकर अच्छा लगा ,अच्छे लिंक्स की जानकारी मिली !आभार आपका !
अगर मुनासिब समझे तो मुझे भी अपने समाज में शामिल करें ! मुझे और भी खुशी होगी !
आभार !
अशोक सलूजा !
http://ashokakela.blogspot.com/

कई दिन इन्तजार करने के बाद आज यह वार्ता पढाने को मिली |अच्छी लिंक्स |
बधाई
आशा

बढ़िया ब्लॉग पठन चल रहा है ।

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