मंगलवार, 27 दिसंबर 2011

ज़रा एक नज़र इधर भी………हम भी खडे हैं राह में………ये है मेरा सफ़र.... ब्लॉग़4वार्ता --- संध्या शर्मा

संध्या शर्मा का नमस्कार, वार्ता पर आप सभी का स्वागत है. प्रस्तुत है, 
आज कुछ मेरी पसंद के  लिंक्स... ब्लॉगर मीट की रिपोर्ट यहां पढें

एक नया रूप धर कर.........2012
 * * * हर साल की तरह ये साल भी गुज़र गया, **कुछ दिल में सिमट गया तो कुछ टूट कर बिखर गया...* *कभी तो लगा की एक प...

प्रेम : कुछ क्षणिकाएं
* *१. प्रेम से होता है पराजित विज्ञान अर्थशास्त्र भी २. प्रेम गढ़ता है नया भूगोल ३. प्रेम देता है जन्म नए विषयों को जो समुच्चय होता है दर्शन शास्त्र और मनोविज्ञान का ४. प्रेम से उत्त्प्...

 मुहूर्त्‍त को लकर लोगों के भ्रम ... अतिथि पोस्‍ट ... (मेरे पिताजी श्री विद्या सागर महथा की)
 कई प्रकार की व्‍यस्‍तता के कारण कुछ दिनों से अपने ब्‍लोग पर नियमित रूप से ध्‍यान नहीं दे पा रही हूं। फिलहाल जहां एक ओर दोनो बच्‍चों की छुट्टियां मनमाने ढंग से मनाने में उनकी मदद कर रही हूं , वहीं दूसरी ओर ...

माचान पर सोयी नींद गौरैंया थी
आंखो में सिहरता समन्दर गोद में लहरे खौफ खाये बैठी रही आन्ने दो आन्ने की बात नही थी अब हजार में भी नही भरता था पेट मचान वही बनती जिसके नीचे लहलहाते खेत होते संतोष अमीरी में उगे तो मुश्किल क्या पर गरीबी...

सुनामी की याद और निकोबार की यात्रा
अंडमान में पिछले तीन दिनों से खूब बारिश और तूफानी हवाएं चल रही हैं. सभी द्वीपों पर जाने के लिए अधिकतर बोट, हेलीकाप्टर इत्यादि कैंसल हो गए हैं. इस सबके चक्कर में तो क्रिसमस का सारा मजा ही ख़राब हो गया. मेरी...

चाहा था उन्हें
कसूर इतना था कि चाहा था उन्हें दिल में बसाया था उन्हें कि मुश्किल में साथ निभायेगें ऐसा साथी माना था उन्हें | राहों में मेरे साथ चले जो दुनिया से जुदा जाना था उन्हें बिताती हर लम्हा उनके साथ यूँ करीब पा...

 कुंती
कर्ण को प्रवाहित कर उसकी संभावित मृत्यु से विमुख कुंती ने उसका त्याग किया यूँ कहें खुद को मुक्त किया ! कुंवारेपन का भय - चलो मान लिया पर कालांतर में जब सभी पुत्र दूसरों के थे तब अपने ध्यान के एक अंश...

ज़रा एक नज़र इधर भी………हम भी खडे हैं राह में………ये है मेरा सफ़र
वंदना गुप्ता का खामोश सफ़र सुमित प्रताप सिंह SUMIT PRATAP SINGH ON SUNDAY, DECEMBER 25, 2011 | प्रिय मित्रो सादर ब्लॉगस्ते! *आ*इये मित्रो आज क्रिसमस के शुभ अवसर पर काजू और किशमिश खाते हुए मिलते हैं ...

तेरी कशिश..
* * *मैं तुम्हे अपना बनाना चाहता हूँ !* *सात सुरों का सरगम सजाना चाहता हूँ !* * * *बनकर मैं बादल**,** **तेरे मन की धरती पर* *एक धीमें सावन को बरसाना चाहता हूँ !* * * *उठ रही जो लहर, मेरे दिल के दरिया में* *...

मैं क्यों अग्नि-परीक्षा देती रहूँ ?
नवभारत टाइम्स की वेबसाईट पर ये खबर पढ़ी - ''इस सप्ताह प्रीति जिंटा की बारी है अपने सबसे बड़े हेटर (नफरत करने वाले) चिराग महाबल ...

एक मुहावरा खिसियानी बिल्ली खम्भा नोंचे
 दादी कहती थी खिसियानी बिल्ली छीका नोंचे । शायद ये मुहावरा आज की परिस्थिती मे सरकार के लिये उपर्युक्त है । देशहित के लिये सशक्त लोकपाल के मुद्दों को ले अडिग है हमारे अन्ना । बे सिर पैर के नित इलज़ाम लगा ...

शुभकामनाएं
आते हुए नव वर्ष की कोमल हवाए, आपकी यश कीर्ति के मोती लुटाएं, सफल हो संकल्प, उम्मीदें, सभी सपने, साथ हों अज़ीज़ सब बिछुड़े सभी अपने, दे रहा दस्तक दरवाज़े पर तुम्हारे आसमा आगोश में हो आपके सोचा हुआ सा...

जंगल बेदना
जंगल बेदना सदय होने का मिला परिणाम क्या मनु को बचाने का मिला प्रतिदान क्या आध्यात्म फूला-फला जिसकी गोद में वो जल रहा है क्यों स्वयं अब क्रोध में क्यूँ कुपित न हो उजाड़ा जब उसे दोष मनु पुत्रों का देगा फिर...

अटल जी के जन्म दिवस पर सुशासन की शपथ
विस्फ़ोट से  मैं सत्य निष्ठा से शपथ लेता हूं कि, मैं प्रदेश में  सुशासन के उच्चतम मापदंडों को स्थापित करने के लिये सदैव संकल्पित  रहूंगा और शासन  को अधिक पारदर्शी,सहभागी, जनकल्याण केन्द्रित  तथा जवाब...

नारी के रूप और चेतावनी ........
बेटी जो पुकारोगे तो, गले में झूल जाएगी | बहन जो बनाओगे तो, राखी बांध जाएगी | पत्नी जो मानोगे तो, यह प्यार बरसायेगी| समझोगे माँ इसे तो, आँचल में छिपाएगी | खिलौना जो समझोगे तो, यह खेल भी दिखाएगी |...

याद
मेरी आंखों में, तुम्हारी याद, खारे पानी में, हो जाती है तब्दील। सोचता हूं मैं , तुमको भी, तन्हाई में, आती होगी याद मेरी? यादों को सम्हाल रखा है मैंनें, क्यूंकि, मुझे तुमसे प्यार है। तुमने कहां गलत किया ...

चलते-चलते देखिये मेरी पसंद का एक गीत
सादर-
संध्या शर्मा
मिलते हैं अगली वार्ता पर... 

8 टिप्पणियाँ:

बढ़िया लिंक्स के साथ बढ़िया वार्ता

Gyan Darpan
..

बहुत सुंदर लिंक्‍स ..
अच्‍छी वार्ता ..
गीत मेरा भी मनपसंद है ..
आभार !!

बहुत सुंदर लिंक्‍स ..

बस मौला ज्‍यादा नहीं, कर इतनी औकात,

सर उँचा कर कह सकूं, मैं मानुष की जात

बढिया लिंक्स सहेज़ कर लाईं आप संध्या जी

बहुत सुंदर लिंक्‍स ..

बेहतरीन लिंक्स से सजी बेहतरीन वार्ता !

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