गुरुवार, 15 दिसंबर 2011

आज ख्वाब लिख रही हूँ मैं.. ------- संध्या शर्मा

संध्या शर्मा का नमस्कार, प्रस्तुत हैं मेरी पसंद के कुछ ब्लॉग लिंक --- मकान बन रहा है एक मकान मेरे घर के सामने ईंट ईंट जोड़कर दो नहीं तीन मंज़िला सुंदर सा मकान जिसके तीखे नयन नक्श पर फिदा हो जाए देखते ही कोई भी मगर मौका नहीं किसी को कि भीतर झांक भी ले सूरज की किरणें हों या चाँद की ... Roshi: जिन्दगी का फलसफा जिन्दगी का फलसफा: सब कहते हैं की बीति बातें बिसार दो ,और आगे की सुध लो पर भूलना क्या होता है इतना आसा ? जिनको था दिल और दिमाग ने इतना चाहा एक ही झटके में ... स्वय-पाल क़ानून चाहिए मै कौन हूँ ? मुझे नहीं मालूम मगर मै वो बिलकुल नहीं हूँ जो दिखता हूँ, बिना पर्ची मोटे डिस्काउंट पर फुटपाथी दूकान से दवाए खरीदता हूँ और पूछता हूँ नकली तो नहीं है, दरवाजे पर मदर डेरी से आधे दामों पर ...
 
चल कही और चले गमों से पार चले ए हवा चल कही और चले उल्झी सांसो की गुंथियों की जाल से पार चले ए हवा चल कही और चले बंजर भुमि की कोख में लगी आग से कही पार चले ए हवा चल कही और चले निकल चली है कई रस्मो-रवायते ऐ... मासूमियत कुछ लोग कह कए थे कि यही मिलेंगे फिर कबसे खड़े इंतजार में वो कब दिखेंगे फिर न कोई उम्मीद होगी तो क्या करेंगे लोग काज़िब वादों के भरोसे कब तक रहेंगे फिर मेरी एक तमन्ना थी उसका चेहरा देख लेते गोया मगर लगता... विरह - गीत हमारे - तुम्हारे विरह ने पिया दर्द के गीत को जनम दे दिया अनदेखे से परदेश में , हो तुम न जाने किस वेश में , हो तुम तेरी स्मृतियों में ही , मैं घूमूँ नाम तेरा ही , ले लेकर झूमूँ जोगन को मैंने भी..

 कमबख्त यादें ... कई बार चाहा तेरी यादें निकाल बाहर करूं पर पता नहीं कौन सा रोशनदान खुला रह जाता है सुबह की धूप के साथ झाँकने लगती हो तुम कमरे के अंदर हवा के ठन्डे झोंके के साथ सिरहन की तरह दौड़ने लगती हो पूरे जिस्म म... KAVITAYEN तूफ़ान हर ख्वाइश पूरी हो जिसकी ऐसा कोई इंसान नहीं, हर कदम पे हार जाये कुछ भी हो वह तूफ़ान नहीं ! जीतना है अगर तो हारने पर हिम्मत न टूटे, जीवन में किसी मुकाम पर हौसला न छूटे ! वक़्त भले ही कम हो पर जाना है ह... गृहस्थी : कुछ क्षणिकाएं * * १, आटा थोडा गीला फिर भी गीली तुम्हारी हंसी २. मैं तुम बच्चे , गीले बिस्तर की गंध कितनी सुगंध ३. न कभी गुलाब न कोई गीत फिर भी जीवन में कितना संगीत ४. सूखी रोटी नून और तेरा साथ , आह ! कित... 

किसी लकीर को छोटा कैसे बनाओगे?किसी लकीर को छोटा कैसे बनाओगे? बचपन में शिक्षक ने एक लकीर को श्यामपट पर बनाया था फिर उसे अनुभव, ज्ञान, उपलब्धियों और शिक्षा का प्रतीक बताकर एक सवाल उठाया था प्यारे बच्चों कैसे तुम इस लकीर को छोटा बनाओग... नकली पेन ड्राइव ने बनाया ‘उल्लू’आजकल बिलकुल समय नहीं मिल पा रहा अपनी ही वेबसाईट पर लिखने का! कारण एक ही है 2011 के लिए किए गए अपने ही वादे को पूरा करने की जद्दोजहद। अभी कार्य चल रहा जनमदिन वाले ब्लॉग को तुम मर्द भी ना कभी नहीं जीतने दोगे मुझे मैंने देखा हे तुमको मेरे सीने पे उभरे माँस को तकते हुए * *तब जब मै घूँघट मे थी , और आँचल लिपटा था दामन पे * * * *घूँघट हटा मैने दुपट्टा ले लिया , * *ये सोचकर की मेरी तैरती आँखे देख * *शायद तुम ताकना बंद. 

पार्ट-फाइनलयह कहानी आर्य-स्मृति साहित्य-समारोह( किताबघर दिल्ली )2011 के लिये चयनित कहानियों के संकलन--रामलुभाया हाजिर है-- में संग्रहीत है । इस बार पुरस्कार योग्य कोई रचना न होने के कारण केवल प्रोत्साहन स्वरूप ही कहा...धन-बल को मिलने वाला मान है भ्रष्टाचार की जड़ . ऐसे देश में भ्रष्टाचार कैसे खत्म हो सकता है , जहाँ किसी व्यक्ति का मान उसकी बेटी की शादी में खर्च किये गए धन से निर्धारित होता है | जहाँ समाज की नज़र में किसी एक मनुष्य की मनुष्यता बौनी हो जाती है दूसरे..आम के आम , गुठलियों के दाम , छिलके , डंठल और पत्तियों के भी दाम आज से दो सप्ताह के लिए अर्जित अवकाश शुरू हो गया है । इसलिए दो सप्ताह के लिए डॉक्टरी बंद । अब डॉक्टरी के सिवाय सारे काम किये जायेंगे । हालाँकि डॉक्टर डॉक्टरी छोड़ना भी चाहे तो लोग छोड़ने नहीं देते । किसी भी ...

डाइबिटिक रेटिनोपैथी हल्के में लेना पड़ेगा भारीहम में से सब को अपना अपना परिवार बेहद प्रिय होता है ... और होना भी चाहिए ... अगर परिवार के एक भी सदस्य पर कोई विपत्ति आ जाये तो पूरा परिवार परेशान हो जाता है ... ख़ास कर अगर परिवार का सब से ज़िम्मेदार बन्दे...छुईमुईबाग बहार सी सुन्दर कृति , अभिराम छवि उसकी | निर्विकार निगाहें जिसकी , अदा मोहती उसकी || जब दृष्टि पड़ जाती उस पर , छुई मुई सी दिखती | छिपी सुंदरता सादगी में, आकृष्ट सदा करती || संजीदगी उसकी मन हरती, खोई उस मे...आज ख्वाब लिख रही हूँ मैं..तन्हा बैठी आज कुछ लिखने जा रही हूँ... * *खुली आखों से कुछ सपने बुनने जा रही हूँ.....* *सालो पहले कुछ सवाल किये थे खुद से,* *उन सवालो के जवाब लिख रही हूँ मैं....* *आज ख्वाब लिख रही ..

.अहसासशहरे अलफाज का सौदागर, अहसासों के गुलशन में, ले कर झोली भर गीत मधुर, बैठा है लब खामोश लिए । कुछ भीगे से, कुछ खिलते से, कुछ मुरझाते, कुछ सपनीले, कुछ उलझे से, कुछ सुलझे से, कुछ ख्वाब हसीं आगोश लिए । कुछ यार म...हिन्दी : हम सबकी गौरव भाषा राष्ट्रभाषा के बिना राष्ट्र गूंगा है। राष्ट्र के गौरव का यह तकाजा है कि उसकी अपनी एक राष्ट्रभाषा हो। कोई भी देश अपनी राष्ट्रीय भावनाओं को अपनी भाषा में ही अच्छी तरह व्यक्त कर सकता है। ...देर आए दुरुस्त आएबेख्याली में ही गुज़ार दी सारी उम्र इसी इंतज़ार में कि कभी तो कोई रखे कुछ ख्याल और जब आज कोई अपना रखता है ज़रूरत से ज्यादा ख़याल तो अनिच्छा की रेखाएं खिंच जाती हैं चेहरे पर, वाणी में भ...अनवरत रामलीला बिड़ला मंदिर की घंटियों की आवाज से नींद खुली, मंदिर की घंटियों की आवाज से नींद का टूटना, अच्छा लग रहा था। कमरे की पिछली खिड़की से रोशनी आ रही थी। मच्छर न होने के कारण रात को चैन की नींद आयी। रात चैन की नींद...


मिलते हैं अगली वार्ता में
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13 टिप्पणियाँ:

बढिया वार्ता है संध्या जी
आभार

मेरी पोस्ट को वार्ता में शामिल करने के लिए आपका बहुत बहुत आभार !

सुन्दर लिंक्स से सजी बेहतरीन वार्ता संध्या जी ! बहुत अच्छा लगा यहाँ आकर !

अच्छे लिंक्स मिले संध्या जी ... अच्छी वार्ता

बढ़िया वार्ता... सुंदर लिंक...
सादर आभार...

बढिया लिंक्स, अंदाज निराला

बहुत सुंदर वार्ता ..
अच्‍छे लिंक्‍स !!

कम्पूटर की खराबी का कारण ब्लॉग पर आने में देर हुई |अच्छी वार्ता और लिंक्स |मेरी रचना शामिल करने के लिए आभार |
आशा

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