सोमवार, 2 अप्रैल 2012

आप सब को राम नवमी की हार्दिक शुभ कामनाएँ .. ब्‍लॉग4वार्ता .. संगीता पुरी

ॐ नमः शिवाय
भारत पर्वों का देश है। यहाँ की दिनचर्या में ही पर्व-त्योहार बसे हुए हैं। ऐसा

ही एक पर्व है रामनवमी। असुरों का संहार करने के लिए भगवान विष्णु ने राम रूप में पृथ्वी पर अवतार लिया और जीवन में मर्यादा का पालन करते हुए मर्यादा पुरुषोत्तम कहलाए। आज भी मर्यादा पुरुषोत्तम राम का जन्मोत्सव तो धूमधाम से मनाया जाता है पर उनके आदर्शों को जीवन में नहीं उतारा जाता। अयोध्या के राजकुमार होते हुए भी भगवान राम अपने पिता के वचनों को पूरा करने के लिए संपूर्ण वैभव को त्याग 14 वर्ष के लिए वन चले गए और आज देखें तो वैभव की लालसा में ही पुत्र अपने माता-पिता का काल बन रहा है।
को भगवान श्रीराम का जन्मोत्सव मनाया जाता है, इसलिए इस तिथि को श्रीराम नवमी भी कहते हैं। इस बार राम नवमी का पर्व 1 अप्रैल, रविवार को है। भगवान श्रीराम को प्रसन्न करने के लिए कई स्तुतियां, मंत्र, आरती आदि की रचना की गई है। एक स्तुति का वर्णन रामचरितमानस के अरण्यकाण्ड में आया है। भगवान राम की यह स्तुति मुनि अत्रि द्वारा की गई है। इस स्तुति का पाठ करने से भगवान राम भक्त पर प्रसन्न होते हैं तथा उसकी हर मनोकामना पूरी करते हैं। यह राम स्तुति इस प्रकार है-
राम स्तुति
नमामि भक्त वत्सलं । कृपालु शील कोमलं ॥
भजामि ते पदांबुजं । अकामिनां स्वधामदं ॥
निकाम श्याम सुंदरं । भवाम्बुनाथ मंदरं ॥
प्रफुल्ल कंज लोचनं । मदादि दोष मोचनं ॥
प्रलंब बाहु विक्रमं । प्रभोऽप्रमेय वैभवं ॥
निषंग चाप सायकं । धरं त्रिलोक नायकं ॥
दिनेश वंश मंडनं । महेश चाप खंडनं ॥
मुनींद्र संत रंजनं । सुरारि वृंद भंजनं ॥ 
श्रीराम के पाँच गुण नीति-कुशल व न्यायप्रिय श्रीरामभगवान राम विषम परिस्थितियों में भी नीति सम्मत रहे। उन्होंने वेदों और मर्यादा का पालन करते हुए सुखी राज्य की स्थापना की। स्वयं की भावना व सुखों से समझौता कर न्याय और सत्य का साथ दिया। फिर चाहे राज्य त्यागने, बाली का वध करने, रावण का संहार करने या सीता को वन भेजने की बात ही क्यों न हो। 
सहनशील व धैर्यवान सहनशीलता व धैर्य भगवान राम का एक और गुण है। कैकेयी की आज्ञा से वन में 14 वर्ष बिताना, समुद्र पर सेतु बनाने के लिए तपस्या करना, सीता को त्यागने के बाद राजा होते हुए भी संन्यासी की भांति जीवन बिताना उनकी सहनशीलता की पराकाष्ठा है। 
दयालु व बेहतर स्वामी भगवान राम ने दया कर सभी को अपनी छत्रछाया में लिया। उनकी सेना में पशु, मानव व दानव सभी थे और उन्होंने सभी को आगे बढ़ने का मौका दिया। सुग्रीव को राज्य, हनुमान, जाम्बवंत व नल-नील को भी उन्होंने समय-समय पर नेतृत्व करने का अधिकार दिया।
राम ने अपने पिता दशरथ एवं माता कैकेयी के चरणस्पर्श किये। राम को देखकर महाराज ने एक दीर्घ श्‍वास और केवल "हे राम!" कहा फिर अत्यधिक निराश होने के कारण चुप हो गये। उनके नेत्रों में अश्रु भर आए। विनम्र स्वर में राम ने कैकेयी से पूछा, "माता! पिताजी की ऐसी दशा का क्या कारण है? कहीं वे मुझसे अप्रसन्न तो नहीं हैं? यदि वे मुझसे अप्रसन्न हैं तो मेरा क्षणमात्र भी जीना व्यर्थ है।"
शीर्षक पढ़ कर चौंकना लाजिमी है! मगर धार्मिक मान्यता है कि मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम त्रेता युग में बोकारो आये थे. हालांकि त्रेता युग में बोकारो का क्या स्वरूप रहा होगा, इसकी कल्पना मात्र की जा सकती है.
बावजूद इसके वर्तमान बोकारो के विभिन्न स्थलों पर उनके आने के अलग-अलग प्रसंग की जनश्रुतियां हैं. इन सभी स्थलों का विशेष धार्मिक व ऐतिहासिक महत्व है. यूं कहें, इन्हें धरोहर के रूप में संजो कर रखा गया है. मुख्यत: जिले के तीन स्थलों पर भगवान श्रीराम के आने की मान्यता है. इनमें दो स्थल कसमार व एक चास प्रखंड में है.
हाल ही में नेट पर देखा की कुछ विशिष्ट जन को भगवान राम और माँ सीता के विवाह के सन्दर्भ में कुछ भ्रान्ति है. कुछ तर्क वाल्मीकि रामायण से लेकर ये निष्कर्ष निकला जा रहा है की विवाह के वक़्त माँ सीता की उम्र महज छ साल की थी, जो कतई सही नहीं है.
जैसा की हम सब जानते है, समय के साथ साथ लोगो ने धर्म को अपनी सुविधा और धर्म के व्यापार के हिसाब से तोड़ मरोड़ दिया है. उदहारण के तौर पर हिन्दू धर्म में के कुछ कुख्यात बाबाओ के कारनामे हमने पिछले एक महीनो में हर हफ्ते देखे सुने और पढ़े है. ठीक वैसे ही मुस्लिम धर्म में कुछ लोग मानते है की किसी भी बेगुनाह को मारने वाले को अल्लाह कभी माफ़ नहीं करता वही मुस्लिम कुछ लोग इस तरह के खून खराबे को अल्लाह के रसूल का हुकुम मान कर आतंक को धर्म का पर्याय बनाने को आतुर है. कहने का तात्पर्य ये है की समय के साथ साथ मान्यताये बदली और फिर अल्पबुद्धि लोगो ने धर्म ग्रंथो का अपनी सुविधा के हिसाब से व्याख्यान कर दिया. कहा भी गया है धर्म प्रदर्शन की नहीं अपितु धारण करने की चीज़ है. धर्म वो है जो व्यक्ति को संयमी बनाता है.
राम जन्म :बाल काण्ड सर्ग १८ शलोक ८-९-१० में महार्षि वाल्मीक जी ने उल्लेख किया है कि श्री राम जी का जन्म चैत्र शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को अभिजित महूर्त में मध्याह्न में हुआ था। कंप्यूटर द्वारा गणना करने पर यह २१ फरवरी, ५११५ ई पू आता है। इस दिन नवमी तो आती है लेकिन नक्षत्र पुष्य आता है। नवमी तिथि के बारे में तुलसी राम चरितमानस में भी उल्लेख मिलता है एवं रामनवमी चैत्र शुकल की नवमी को ही मनाई जाती है। बाल काण्ड के दोहा १९० के बाद की प्रथम चौपाई में तुलसीदास जी लिखते हैं
नौमी तिथि मधुमास पुनीता, सुकल पच्छ अभिजित हरिप्रीता |
मध्य दिवस अति सीत न धामा , पावन काल लोक विश्रामा ||
खुशी भी श्री राम से है,
गम भी श्री राम से है,
तकरार भी श्री राम से है,
प्यार भी श्री राम से है,
रुठना भी श्री राम से है,
मनाना भी श्री राम से है,
राम नाम सत्य है, सत्य ही रहेगा. 
असत्य के युगों में भी, राम तो रहेगा.
राम नाम सत्य है, सत्य ही रहेगा.
जिस ह्रदय में राम के, नाम का प्रकाश है,
उस ह्रदय में स्वयं ही, ब्रम्ह का निवास है.
काम-क्रोध-लोभ-मोह, पल में छोड़ जाते हैं,
राम के होते हुए, लौट के न आते हैं.
तू भी ऐसे नाम का दास कब बनेगा ?
असत्य के युगों में भी, राम तो रहेगा.
राम नाम सत्य है, सत्य ही रहेगा.
उच्चतम न्यायालय ने केन्द्र सरकार से कहा कि वह इस बारे में दृष्टिकोण स्पष्ट करे कि क्या राम सेतु को राष्ट्रीय स्मारक घोषित किया जा सकता है।उच्चतम न्यायालय ने केंद्र से सेतुसमुद्रम परियोजना पर आरके पचौरी की रिपोर्ट छह सप्ताह के अंदर उसके समक्ष रखने को कहा। मालूम हो प्रधानमंत्री ने जुलाई 2008 में पचौरी की अध्यक्षता में छह सदस्यीय समिति का गठन किया था। 
धनुष वाण काँधे पर धारे,
मोहक कोमल श्यामल छवि ।
रघुपति राघव नीति विधायक ,
कुल देवता तेजमय रवि ।।
रविकुल तिलक, हे दीप्त भाल ,
मुख कमल नव, लोचन विशाल।1।
श्यामल शरीर, ल्यौं मेघ नील,
आजान बाहु , शुभाचरणशील।2।
आया है पर्व राम नवमी का , सांवलिया रामजी की जीवन के अनुसरण करने का ,
मर्यादा पुरुषोत्तम थे वो , उन्हों ने ही सिखाया प्रकृति से प्यार करने का ,
जिसने मिटाया अश्पृश्यता का भेदभाव कावट की नैया में बैठ के ,
प्रेम और भक्ति भरी शबरी के जूठे बोर खा लिए उन्होंने हंसते हंसते
अहल्या का उद्धार करके सिखाया मत समजो नारी को पतित,
राम की चिरैया राम का खेत
खावो री चिरैया भर-भर पेट
राम यदि अपनी चिड़ियों को अपने खेत की फसल चुगने देता है तो इसमें दोष ही क्या है? आखिर चिड़ियों और खेत दोनों का मालिक राम ही तो है! राम याने कि परमात्मा का अवतार और परमात्मा याने कि सुपर पॉवर!
रावण, कंस, दुर्योधन भी स्वयं को सुपर पॉवर समझा करते थे। आज संसद सुपर पॉवर बन गया है। सांसद इस सुपर पॉवर अर्थात् संसद की चिड़ियाएँ हैं और देश की जनता इसका खेत। तो सांसद यदि जनता को लूटें तो किसी भी प्रकार का दोष हो ही नहीं सकता। राम के खेत को चुगना तो राम की चिड़ियों का अधिकार है। 
'रोम-रोम' में राम पर, जिनको था अभिमान
हृदय राम-दरबार का, सबको मिला प्रमाण
उन्हीं राम के भक्त की, निष्ठा का कर ध्यान
लिखा नाम 'श्रीराम' का, छबि में थे हनुमान
राम-राम लिख चित्र पर, किया प्रयोग विचित्र
लोगों तक पहुंचा दिया, अनुपम राम चरित्र
परमेश्वर में आस्था अंतर्मन विश्वास
लगन एक 'श्रीराम' में, जीवन हुआ सुवास

7 टिप्पणियाँ:

आपको भी रामनवमी की हार्दिक शुभकामनायें... सुन्दर श्रीराममयी वार्ता के लिए आभार....

आपको भी रामनवमी की हार्दिक शुभकामनायें...

रामनवमी की बहुत-बहुत शुभकामनाये..........श्रीराम से सम्बन्धित जानकारी के लिये शुक्रिया....

आपको भी रामनवमी की हार्दिक शुभकामनायें...

रामनवमी की हार्दिक शुभकामनायें...

राम नौमी पर हार्दिक शुभ कामनाएं |
आशा

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