रविवार, 8 अप्रैल 2012

इहै ब्लॉग नगरिया तू देख बबुआ -------- ब्लॉग4वार्ता --- ललित शर्मा

ललित शर्मा का नमस्कार,  ब्लॉग4वार्ता के टिप्पणी बाक्स पर स्पष्ट लिखा है कि -टिप्पणी में किसी भी तरह का लिंक न लगाएं। लिंक लगाने पर आपकी टिप्पणी हटा दी जाएगी। -- तब भी कुछ लोगों को यह लिखा दिखाई नहीं देता। जब हम खुद ही पोस्ट के लिंक दे रहे हैं तो टिप्पणी में फ़ालतु लिंक लगाने की क्या आवश्यकता है, अगर आपके ब्लाग पर किसी को जाना होगा तो वह आपकी प्रोफ़ाईल से चला जाएगा ब्लॉग पर। एक बार फ़िर से कर बद्ध निवेदन है कि टिप्पणी में लिंक न लगाएं अन्यथा टिप्पणी हटा दी जाएगी…… अब चलते हैं ब्लॉग4वार्ता पर और सैर करते हैं ब्लाग नगरिया  की……

जापान देशस्य तोक्यो नगरे वसन्त काले एकदा  तोक्यो में इन दिनों साकुरा यानि चैरी-पुष्पों की बहार पूरे शबाब पे है । बमुश्किल दस दिन जीने वाले इस फूल को लेकर जापानियों की दीवानगी ला-जवाब कर जाती है । सदियों से इन्हीं दिनों ये फूल खिलता है , खिल के ...अपने पसंदीदा रंग से जानिए अपना भाग्‍य ....रंग हमारे मन और मस्तिष्‍क को काफी प्रभावित करते हैं। कोई खास रंग हमारी खुशी को बढा देता है तो कोई हमें कष्‍ट देने वाला भी होता है। जिस तरह यदि हम प्रकृति के निकट हों , तो खुद को फायदा पहुंचाने वाले वस्‍तुओ...एक काला कव्वा !मुंडेर पर बैठा आज फिर एक काला कव्वा ! चौकस ! कभी इधर ! कभी उधर ! गर्दन को घुमाता हुआ .. काऊं ! कांउ !! कांउ !!! यु चिल्ला रहा था मानो सबको खबरदार कर रहा हो --- *"मैं आ गया हूँ "* मैं आ गया हूँ " *काऊं...

परीक्षानुरागीपरीक्षा पुस्तिकाओं में , सूखे ,अश्रुजल , बिंधा हुआ दृदय,पिस्तौल का भूगोल , विवसता ,पश्चाताप ,या निर्लज्जता ! नहीं मालूम ... परीक्षक पढ़ता है उत्तर ! जो उत्तरपुस्तिका में लिखे गए , सर ! प्रार्थना है !उत्ती...मंजर ...टुच्चों लुच्चों चोर-उचक्कों के घर रोज खूब खिचड़ी पक रही है 'उदय' ! और अच्छे-सच्चों के घर अक्सर कभी रोजे, तो कभी उपवास के हैं बहानों के मंजर !! मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के नाम पत्रश्री अखिलेश यादव जी माननीय मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश सरकार लखनऊ। विषय: चिन्मयानंद के दबाव के कारण शाहजहाँपुर पुलिस से न्याय न मिलने के संबंध में महोदय, निवेदन है कि प्रार्थिनी उच्च शिक्षा प्राप्त जागरूक ...

एक चुनौती हैं वी.के. सिंहसत्तारुढ़ दल के सामने सेना प्रमुख वी. के. सिंह एक चुनौती के रूप में उभरे हैं। सरकार को यह समझ में नहीं आ रहा है कि आखिर सिंह के साथ किस प्रकार का सलूक किया जाए? इस मामले को दबाने के लिए स...अनकहातुम्हारे कहने * *मेरे सुनने के बीच * * * *जो था अनकहा * * * *कह दिया * *तुम्हारी ख़ामोशी ने * * * *कि अब लफ़्जों की जरुरत नहीं हमें ....* * * * * * ...रिश्तों का सचकौन कहता है कि.. हो जाता है एक नज़र में प्यार दो दिल न जाने कब एक साथ धड़कने लगते हैं... तोड़ लायेंगे चाँद सितारे और बिछा देंगे फलक क़दमों के नीचे ऐसे सिरफिरे वायदे भी कसमों की जुबान होते हैं, पर सब खो जाता ...

या कुरसी अरु पावरवा पर...या कुरसी अरु पावरवा पर न्याय सदाशय सब तजि डारौं। वोटर को ललचाय रिझाय के जब तब आपन काम निकारौं॥ पावरवा को पावत ही मतदाताओं को ततकाल बिसारौं। लूट खसोट धन पाउँ उसे स्विस बैंक जमा करि भाग सवारौं॥ सुरक्षा कंपनियों की आड़चंद लाइसेंसी सुरक्षा कंपनियों की आड़ में सैकड़ों सुरक्षा एजेंसियां काम कर रही हैं। एजेंसियों के पास न तो शासन की मान्यता है और न ही प्रशिक्षित सुरक्षाकर्मी। बावजूद इसके वह शासन की नाक के नीचे धड़ल्ले से कं...दिल में यही तमन्ना है सारी दुनिया की सैर करूँसंस्कार पत्रिका ने इस कविता को अप्रैल'१२ के 'पर्यटन विशेषांक' में [भारत पर केन्द्रित करते हुए] छापा है। देश-गाँव-शहरों-कस्बों से अनुभव का हर पृष्ठ भरूँ दिल में यही तमन्ना है सारी दुनिया की सैर करूँ स...

हैप्‍पी अभिनंदन में रविश कुमारहैप्‍पी अभिनंदन* में इस बार आपको एनडीटीवी के रिपोर्टर से एंकर तक हर किरदार में ढल जाने वाले गम्‍भीर व मजाकिया मिजाज के* रवीश कुमार* से मिलवाने की कोशिश कर रहा हूं, इस बार हैप्‍पी अभिनंदन में सवाल जवाब नह...क्या वो आपको मंजूर होगा ??सच पूछा जाए तो, ब्लॉग लिखना आत्मसंतुष्टि का परिचायक है, हम आत्मिक ख़ुशी के लिए ब्लॉग लिखते हैं, कुछ हद तक, ये हमारे अहम् को भी तुष्ट करता है, कुछ अलग सा करने की  प्रेरणा भी देता है,  जैसा हर जगह देखने को मिल...यात्रापुनः नमस्कार ! आज ही मैं यात्रा से लौटी हूँ पूरे सत्रह दिन बाद घर आकर व आप सभी से मुखातिब होकर अच्छा लग रहा है. यात्रा में ही लिखी कुछ पंक्तियाँ प्रस्तुत हैं, धीरे-धीरे और भी बहुत कुछ जो कहने से रह गया है व ...

आप सब दोस्तों की क्या राय हैं ?आप सब दोस्तों की क्या राय हैं ...... आज अभी फेसबुक के माध्यम से ........खामोशी ...बहुत कुछ कहती हैं...(http://ab8oct.blogspot.in/2012/04/blog-post_07.html...............ब्लॉग) पर जाने का मौका मिला ..वहाँ...मौत को क़रीब से देखना हो तो ''टाइटैनिक'' देखिए... मौत को क़रीब से देखना हो तो 'टाइटैनिक' देखिए। थ्रीडी चश्मे से और करीब दिखती है मौत। एकदम माथे को चूमती हुई। सौ साल पुराना एक हादसा। हादसा क्या पूरा का पूरा प्रलय ही। पिछली बार जब टाइटैनिक देखी थी तो स्कू...नकल का सिद्धांतनकल एक सार्वभौमिक परिकल्पना है। प्रकृति के हर अंग में कूट कूट कर भरी है यह प्रवृत्ति। सारी संततियाँ आकार प्रकार में अपने पूर्वजों की शतप्रतिशत नकल ही होती हैं। नित नयी मौलिकता कहाँ से लाये प्रकृति, 

वार्ता को देते हैं विराम, मिलते हैं ब्रेक के बाद राम राम

13 टिप्पणियाँ:

बहुत बढ़िया वार्ता

अच्छी वार्ता... बहुत अच्छे लिंक

सचमुच बहुत सुन्दर लिंक्स हैं भईया जी, पर क्या है ना यहाँ बहुत से आँख वाले अंधे भी होते हैं जैसे कि आप खाना खा रहे हैं और अचानक आपका कोई मित्र आ गया और देख रहा है कि आप खा रहे हैं फिर भी कहेगा कि अरे आप खाना खा रहे हैं क्या ?
सो क्या करें बार बार बोलने पर भी नहीं मानते हैं लोग हमने तो अपने फेसबुक वाल पर भी पोस्ट कर दिया है कि हमें किसी समूह में ना जोड़े पर ऐसा करके तो और मुसीबत ले ली है उसके बाद मैं और १८ समूह में जोड़ दिया गया हूँ, अब क्या कहे ऐसे में जिस बात को मना करो उसी को करने पर आमदा होते हैं लोग..

सुन्दर वार्ता।

बहुत बढ़िया लिंक्स.

हम तो लिंक लगायेंगे बाज नही आयेंगे

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