नमस्कार, अखबार के एक समाचार ने आज झकझोर डाला। नैतिक पतन की पराकाष्ठा नजर आई। केन्द्र सरकार ने एक घटिया प्रस्ताव राज्य सरकारों को भेजा था। जिसमें बच्चों के लिये सेक्स की कानूनन न्यूनतम उम्र को घटाकर मात्र 12 साल करने का उल्लेख था। अब यह तो पता नहीं किस घिनौने अफ़सर की करतूत प्रस्ताव के रुप में राज्य सरकारों के पास भेजी गयी। लेकिन इस प्रस्ताव से केन्द्रीय सचिवालयों में बैठे विकृत मानसिकता के लोग होने का पता चल गया। यह दीमागी दिवालिएपन की इंतिहा है। इस तरह के लोगों की पहचान कर उन्हे पद मुक्त करना चाहिए। जिस मंत्रालय ने यह प्रस्ताव भेजा था उसके मंत्री को जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफ़ा देना चाहिए। अब चलिए ललित शर्मा के साथ आज की ब्लॉग4वार्ता पर...
इस मुद्दे पर अनिल पुसदकर कहते हैं कि अफ़सोस की बात तो ये है कि सड़ी-सड़ी बातों के लिये हंगामा कर देने वाले सभी राजनैतिक दल खामोश बैठे है।ऐसा घटिया प्रस्ताव बनाने वाले के खिलाफ़ तो जांच कर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिये।सिर्फ़ ज़ल्दी बड़े होने के नाम पर बच्चों को सेक्सूयल रिलेशनशीप के लिये इतनी कम उम्र में ही अनुमति दे देना इस देश के साथ सांस्कृतिक और धार्मिक अपराध है।कहने को ये ज़रूर कहा गया है कि 12 साल की उम्र मे सेक्स के दौरान इंटरकोर्स की अनुमति नही होगी या बिना इंटरकोर्स के वे अपनी उम्र के बच्चों के साथ सेक्स कर सकेंगे।पता नही कौन सा विद्वान अफ़सर य नेता था जो सेक्सूअल संबंधो के बीच इतनी बारीक लकीर खींच कर दिखा रहा है।
इसी मुद्दे पर एक खरी खरी पोस्ट पर के आर बारस्कर भी लिखते हैं कि जिस महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की ओर से यह बिल भेजने की बात चल रही है उसके मुखिया का नाम मैंने ढूँढना चाह तो श्रीमती कृष्णा तीरथ का नाम सामने आया.. सोचकर हैरानी होती है कि एक महिला होकर वो इस प्रकार कि कलुषित सोच रखती है ... क्या यह कांग्रेसी संस्कृति का असर है? या वे पागल हो गयी है? या वे भी इटली या अमेरिका की अगेंट बन गयी है? इनके इस तरह के पागलपन को जनता कभी स्वीकार नहीं करने वाली है।
आगे कहते हैं -- सबसे पहले वे अपने १२-१३ साल के बच्चो-नाती, पोतो को इस बात की जानकारी दे और उन्हें सेक्स करने की छूट दे दे.. उनके लिए सेक्स पार्टनर तलासने में उनकी मदद करे.. जब मिल जाये तो उनसे अपने सामने सेक्स कराये.. उनकी मानसीकता जांचे, उनसे उनके अनुभव के बारे में पूछे.. अगर संभव हो तो सेक्स के समय वहा उपस्थित रहे.. अगर उनका अनुभव ठीक रहा तो ही इस कानून को देश पर धोपा जाये..
दिव्या जी का यहाँ सौ टका सही कहना है -- ये खबर तो समाचार में नहीं सुनाई दी । आपके ब्लॉग से ही पता लगा। पढने के बाद लगा की वास्तव में विकृत मानसिकता वाले ही सत्ता में बैठे हैं। जिसने भी ये योजना बनायी है पागल रोगी तो है ही साथ ही किसी आतंकवादी जैसा शातिर दिमाग भी रखता है । ऐसे पागलों के टुकड़े करके चील-कव्वों कों खिला देना चाहिए।
मीनाक्षी पन्त जी का कहना है -- वेसे तो समाज मै हर कोई अपने पैमाने से हर बात को आंकता है पर मेरे ख्याल से इस मुद्दे को रखने से पहले किसी ने भी सोचना वाजिब नहीं समझा जबकि ये बहुत ही गहन मुद्दा है जब देश के एसे बच्चों की बात हो रही हो जो अभी कुछ सीख ही रहें हों और जिन्हें अच्छे और बुरे का ठीक से ज्ञान भी न हो तो उनके हाथ मैं इतना बड़ा निर्णय सिर्फ प्रयोग करने के माध्यम से छोड़ दिया जाये मेरे ख्याल से बहुत गलत हो सकता है क्युकी इस उम्र मै तो उन्हें सहारे की और कुछ बेहतर कर सकने के लिए निर्णय देने की जरूरत होती है न की इतनी बड़ी जिम्मेदारी डाल देने की जिससे की वो सही और गलत का फ़ेसला ही न कर पाए ! इससे से तो साफ़ जाहिर है की जिसने भी ये निर्णय लिया है वो अपनी जिम्मेदारियों को ठीक से निभा ही नहीं पा रहा है ?
केवल कृ्ष्ण एक अच्छे लेखक और रिपोर्टर हैं वर्तमान में नेशनल लुक रायपुर में सह सम्पादक के पद पर कार्यरत हैं वे मनोज ब्यास के आलेख जंगल का भगवान प्रकाशित करते हुए लिखते हैं --बार नवापारा से लगे देवपुर के जंगल का एक हिस्सा सागौन की खास किस्मों के लिए जाना जाता है। अंग्रेजी हुकूमत के दौरान मनीराम नाम के एक बीटगार्ड ने सागौन का यह जंगल तैयार किया था, जिसकी उसे सजा दी गई। मध्यप्रदेश सरकार ने तो मनीराम के पोते को सम्मानित कर अपना हक अदा कर दिया पर छत्तीसगढ़ सरकार ने पूछा भी नहीं। मनीराम प्लांटेशन की अब इतनी दुर्गति हो गई कि कुछ साल में नामोनिशान खत्म हो जाएगा।पौने तीन मीटर की मोटाई और 28 मीटर तक ऊंचे मनीराम के सागौन देखकर लोग दांतों तले ऊंगली दबा लेते हैं। आज से 110 साल पहले मनीराम ने देवपुर के जंगल में सागौन के पौधे रोपे थे।
आगे लिखते हैं --पिथौरा ब्लाक के कुम्हारीमुड़ा निवासी मनीराम बीटगार्ड था, गिधपुरी गांव के लोगों का कहना है कि नौकरी से निकाले जाने के बाद मनीराम पागलों की तरह भटकने लगा था, फिर उसकी मौत हो गई। मरने के बाद उसकी आत्मा जंगल और गांव में भटकती थी, जिसे बैगाओं ने मिलकर मनीराम प्लांटेशन के बीच ही एक बरगद के पेड़ में स्थापित किया। इसके बाद उसकी आत्मा शांत हुई और भटकना बंद किया। होली, दिवाली, हरेली सभी त्योहारों में उसकी पूजा की जाती है।
"बस ये मत पूछना कि क्यूँ लिखा"जाने वाला तो चला गया वो किसी ने नही पूछा क्यूँ चला गया, क्या हुआ ऐसा! हाँ कई कविताएँ जरूर लिख दी अपनी अपनी समझ के साथ कोई कहता कि गाँधी जी के बाद भी देश चल रहा हे कोई न जाने कहा से किसी कि लिखी ह...कुतर्कियों के सिर पर चढा प्रोटीन का भूत इन्सान पर हावी होने वाले भूत-प्रेतों को उतारने के लिए तो ओझाओं-गुनियों, तान्त्रिक, पीर-फकीरों, बाबाओं वगैरह को बुलाना पडता है. लेकिन आज के इस वैज्ञानिक युग में कईं भूत ऎसे भी हैं जिनका किसी के पास कोई इलाज...
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वार्ता को देते हैं विराम -- आप सभी को ललित शर्मा का राम राम - मिलते हैं ब्रेक के बाद
ब्रेकिंग न्यूज -- बच्चों के लिये सेक्स की कानूनन न्यूनतम उम्र को घटाकर मात्र 12 साल करने पर केन्द्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री कृष्णा तीरथ का बयान आ गया है।







