गुरुवार, 3 फ़रवरी 2011

बस ये मत पूछना कि क्यूँ लिखा? -- ब्लॉग4वार्ता -- ललित शर्मा

नमस्कार, अखबार के एक समाचार ने आज झकझोर डाला। नैतिक पतन की पराकाष्ठा नजर आई। केन्द्र सरकार ने एक घटिया प्रस्ताव राज्य सरकारों को भेजा था। जिसमें बच्चों के लिये सेक्स की कानूनन न्यूनतम उम्र को घटाकर मात्र 12 साल करने का उल्लेख था। अब यह तो पता नहीं किस घिनौने अफ़सर की करतूत प्रस्ताव के रुप में राज्य सरकारों के पास भेजी गयी। लेकिन इस प्रस्ताव से केन्द्रीय सचिवालयों  में बैठे विकृत मानसिकता के लोग होने का पता चल गया। यह दीमागी दिवालिएपन की इंतिहा है। इस तरह के लोगों की पहचान कर उन्हे पद मुक्त करना चाहिए। जिस मंत्रालय ने यह प्रस्ताव भेजा था उसके  मंत्री को जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफ़ा देना चाहिए। अब चलिए ललित शर्मा के साथ आज की ब्लॉग4वार्ता पर...

इस मुद्दे पर अनिल पुसदकर कहते हैं कि अफ़सोस की बात तो ये है कि सड़ी-सड़ी बातों के लिये हंगामा कर देने वाले सभी राजनैतिक दल खामोश बैठे है।ऐसा घटिया प्रस्ताव बनाने वाले के खिलाफ़ तो जांच कर  कड़ी कार्रवाई होनी चाहिये।सिर्फ़ ज़ल्दी बड़े होने के नाम पर बच्चों को सेक्सूयल रिलेशनशीप के लिये इतनी कम उम्र में ही अनुमति दे देना इस देश के साथ सांस्कृतिक और धार्मिक अपराध है।कहने को ये ज़रूर कहा गया है कि 12 साल की उम्र मे सेक्स के दौरान इंटरकोर्स की अनुमति नही होगी या बिना इंटरकोर्स के वे अपनी उम्र के बच्चों के साथ सेक्स कर सकेंगे।पता नही कौन सा विद्वान अफ़सर य नेता था जो सेक्सूअल संबंधो के बीच इतनी बारीक लकीर खींच कर दिखा रहा है।

इसी मुद्दे पर एक खरी खरी पोस्ट पर के आर बारस्कर भी लिखते हैं कि जिस महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की ओर से यह बिल भेजने की बात चल रही है उसके मुखिया का नाम मैंने ढूँढना चाह तो श्रीमती कृष्णा तीरथ का नाम सामने आया.. सोचकर हैरानी होती है कि एक महिला होकर वो इस प्रकार कि कलुषित सोच रखती है ... क्या यह कांग्रेसी संस्कृति का असर है? या वे पागल हो गयी है? या वे भी इटली या अमेरिका की अगेंट बन गयी है? इनके इस तरह के पागलपन को जनता कभी स्वीकार नहीं करने वाली है।

आगे कहते हैं -- सबसे पहले वे अपने १२-१३ साल के बच्चो-नाती, पोतो को इस बात की जानकारी दे और उन्हें सेक्स करने की छूट दे दे.. उनके लिए सेक्स पार्टनर तलासने में उनकी मदद करे.. जब मिल जाये तो उनसे अपने सामने सेक्स कराये.. उनकी मानसीकता जांचे, उनसे उनके अनुभव के बारे में पूछे.. अगर संभव हो तो सेक्स के समय वहा उपस्थित रहे.. अगर उनका अनुभव ठीक रहा तो ही इस कानून को देश पर धोपा जाये..

दिव्या जी का यहाँ सौ टका सही कहना है -- ये खबर तो समाचार में नहीं सुनाई दी । आपके ब्लॉग से ही पता लगा। पढने के बाद लगा की वास्तव में विकृत मानसिकता वाले ही सत्ता में बैठे हैं। जिसने भी ये योजना बनायी है पागल रोगी तो है ही साथ ही किसी आतंकवादी जैसा शातिर दिमाग भी रखता है । ऐसे पागलों के टुकड़े करके चील-कव्वों कों खिला देना चाहिए।

मीनाक्षी पन्त जी का कहना है -- वेसे तो समाज मै हर कोई अपने पैमाने से हर बात को आंकता है पर मेरे ख्याल से इस मुद्दे को रखने से पहले किसी ने भी सोचना वाजिब नहीं समझा जबकि ये बहुत ही गहन मुद्दा है जब देश के एसे बच्चों की बात हो रही हो जो अभी कुछ सीख ही रहें हों और जिन्हें अच्छे और बुरे का ठीक से ज्ञान भी न हो तो उनके हाथ मैं इतना बड़ा निर्णय सिर्फ प्रयोग करने के माध्यम से छोड़ दिया जाये मेरे ख्याल से बहुत गलत हो सकता है क्युकी इस उम्र मै तो उन्हें सहारे की और कुछ बेहतर कर सकने के लिए निर्णय देने की जरूरत होती है न की इतनी बड़ी जिम्मेदारी डाल देने की जिससे की वो सही और गलत का फ़ेसला ही न कर पाए ! इससे से तो साफ़ जाहिर है की जिसने भी ये निर्णय लिया है वो अपनी जिम्मेदारियों को ठीक से निभा ही नहीं पा रहा है ? 

केवल कृ्ष्ण एक अच्छे लेखक और रिपोर्टर हैं वर्तमान में नेशनल लुक रायपुर में सह सम्पादक के पद पर कार्यरत हैं वे मनोज ब्यास के आलेख जंगल का भगवान प्रकाशित करते हुए लिखते हैं --बार नवापारा से लगे देवपुर के जंगल का एक हिस्सा सागौन की खास किस्मों के लिए जाना जाता है। अंग्रेजी हुकूमत के दौरान मनीराम नाम के एक बीटगार्ड ने सागौन का यह जंगल तैयार किया था, जिसकी उसे सजा दी गई। मध्यप्रदेश सरकार ने तो मनीराम के पोते को सम्मानित कर अपना हक अदा कर दिया पर छत्तीसगढ़ सरकार ने पूछा भी नहीं। मनीराम प्लांटेशन की अब इतनी दुर्गति हो गई कि कुछ साल में नामोनिशान खत्म हो जाएगा।पौने तीन मीटर की मोटाई और 28 मीटर तक ऊंचे मनीराम के सागौन देखकर लोग दांतों तले ऊंगली दबा लेते हैं। आज से 110 साल पहले मनीराम ने देवपुर के जंगल में सागौन के पौधे रोपे थे।

आगे लिखते हैं --पिथौरा ब्लाक के कुम्हारीमुड़ा निवासी मनीराम बीटगार्ड था, गिधपुरी गांव के लोगों का कहना है कि नौकरी से निकाले जाने के बाद मनीराम पागलों की तरह भटकने लगा था, फिर उसकी मौत हो गई। मरने के बाद उसकी आत्मा जंगल और गांव में भटकती थी, जिसे बैगाओं ने मिलकर मनीराम प्लांटेशन के बीच ही एक बरगद के पेड़ में स्थापित किया। इसके बाद उसकी आत्मा शांत हुई और भटकना बंद किया। होली, दिवाली, हरेली सभी  त्योहारों में उसकी पूजा की जाती है।

"बस ये मत पूछना कि क्यूँ लिखा"जाने वाला तो चला गया वो किसी ने नही पूछा क्यूँ चला गया, क्या हुआ ऐसा! हाँ कई कविताएँ जरूर लिख दी अपनी अपनी समझ के साथ कोई कहता कि गाँधी जी के बाद भी देश चल रहा हे कोई न जाने कहा से किसी कि लिखी ह...कुतर्कियों के सिर पर चढा प्रोटीन का भूत इन्सान पर हावी होने वाले भूत-प्रेतों को उतारने के लिए तो ओझाओं-गुनियों, तान्त्रिक, पीर-फकीरों, बाबाओं वगैरह को बुलाना पडता है. लेकिन आज के इस वैज्ञानिक युग में कईं भूत ऎसे भी हैं जिनका किसी के पास कोई इलाज...

गलती मीडिया की नहीं है, गलती जनता की हैआज शेखर सुमन जी के ब्लॉग में यह पढकर आया कि किस तरह भारत के नेता, जो हजारों रुपये तनख्वाह पाते हैं, सस्ता खाना खाते हैं, और दूसरी तरफ हमारे देश में लाखों गरीब भूखे मर रहे हैं... पढकर दिमाग में कहीं कुछ जो...सपनों को दिखा दो सूरजस्वप्न सदियों से तुम्हारी आँखों में जो पल रहे हैं इतिहास होने से पहले उन्हें एक बार सूरज दिखा दो सपनो का होता है अपना भूगोल अपनी दिशाएं अपने मौसम जो निर्भर होते हैं मन के भीतर बहने वाली हवाओं पर धूप ...सजाखता जो तुमने की, सजा क्यूँ हमको दी... चुप से सह लेते हम सजा भी। फिर क्यूं तुमने शिकायत की , सह लेंगे सभी शिकवे भी पर जो सजा तुमने खुद को दी सह न सकेंगे ........ 

 अरे सब गुफायें कहाँ हैं ?एक पुरातत्ववेत्ता की डायरी – ग्यारहवाँ दिन – एक * * *सुबह आर्य साहब ने कहा “ क्या बात है कल तुम लोग काफी देर तक जागते रहे ? “ रवीन्द्र ने कहा “ हाँ सर , कल शरद अपनी टूर डायरी पढ़कर सु...बोस जीने नहीं देता गहलोत पीने नहीं देता ...दोस्तों मेने शराब माफिया के मटके में से ८१ लाकह रूपये बरामद होने की खबर सुबह अपने ब्लॉग पर लिखी थी कुछ ने पढ़ी कुछ ने तवज्जो नहीं दी लेकिन मेरे एक मित्र भाई अतुल श्रीवास्तव ने छत्तीस गढ़ में बेठे ही बेठे ए...

वो खौफ का मंजर, वो खतरों का सफर. न जाने क्यों लोग प्याज और पेट्रोल की बढ़ती कीमतों को लेकर इतना परेशान रहते हैं. जबकि इस देश में इंसान की जान की कीमत दो कौड़ी की नहीं है. बरेली से लौट रही हूं. ओह, बरेली पहुंच ही कहां पाई. शाहजहांपुर के ...असाधारणता को सदा अपने हाथ क्यों कटाने पड़ते हैं ?इंसान की एक सनातन इच्छा है कि वह अमर हो जाए। सशरीर ऐसा होना नामुमकिन होने की वजह से वह अपने नाम को ही ज्यादा से ज्यादा समय तक दुनिया में कायम रखने की जुगत करता रहता आया है। सदियों से राजा, महाराजा, बादशाह,...

चलते-चलते  एक व्यंग्य चित्र और यहाँ ब्लेक ऑउट



वार्ता को देते हैं विराम -- आप सभी को ललित शर्मा का राम राम - मिलते हैं ब्रेक के बाद

ब्रेकिंग न्यूज --  बच्चों के लिये सेक्स की कानूनन न्यूनतम उम्र को घटाकर मात्र 12 साल करने पर केन्द्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री कृष्णा तीरथ का बयान आ गया है।

बुधवार, 2 फ़रवरी 2011

ठन-ठन गोपाल - क्या हमारे सांसद इतने गरीब हैं - ब्लॉग 4 वार्ता - शिवम् मिश्रा

प्रिय ब्लॉगर मित्रो ,
प्रणाम !

वैज्ञानिकों ने दुनिया का पहला हैक फ्री सॉफ्टवेयर विकसित करने का दावा किया है। यह आपके कंप्यूटर सिस्टम को ठप होने और साइबर हमलों से बचाने में मददगार होगा।
ऑस्ट्रेलियाई कंपनी ओपेन केरनेल लैब [ओके लैब्स] के वैज्ञानिकों के मुताबिक, 'एसइएल4' माइक्रोकेरनेल नामक यह सॉफ्टवेयर कंप्यूटर के हार्डवेयर तक पहुंचने वाले रास्ते को नियंत्रित करती है। वैज्ञानिकों के इस दल का नेतृत्व करने वाले जर्विन क्लेन ने कहा, 'यह सॉफ्टवेयर इकलौती संचालन प्रणाली है जो गणितीय रूप से सही साबित पाई गई है। साथ ही यह सिस्टम को ठप होने और साइबर हमलों से बचाता है।'
भविष्य में यह सॉफ्टवेयर भरोसेमंद वित्तीय लेनदेन को सुनिश्चित कर सकता है। इस सॉफ्टवेयर की मदद से बैंक या शेयर बाजार के काम ग्राहक के मोबाइल फोन पर सुरक्षित तरीके से संचालित हो सकते हैं।

अब उम्मीद है हमारे ब्लॉग भी बचे रहेंगे ... ;-) ... आइये चलते आज की ब्लॉग वार्ता की ओर ... 

सादर आपका 

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और डोमेन नेम के विजेता हैं .......... :- बधाइयाँ जी बधाइयाँ












पागलों की तलाश :- जारी है 




समीर-सागर के मोती...खुशदीप :- आप ले आये या नहीं 






आखिर ये मंहगाई क्यों ? :- जवाब मालुम होता ...तो क्या यहाँ होते






एक रूप यह भी नारी का :- आप बताये कैसा 




लखनऊ यात्रा - गाइड माहात्म्य. :- मुस्कुराइए कि आप लखनऊ में है




सम्राट चन्द्रगुप्त :- एक और ऐतिहासिक पुस्तक ... आपके लिए







आलोकिता :- की एक सुन्दर कविता 






याद की चादरें कुछ नई फिर बुनें :-  छेड़ दें आस्था की नई रुनझनें


ठन-ठन गोपाल ..(कार्टून धमाका) :- और आमदनी


सूनी गली का नाम कहकशां लिखूँ ... :- क्यूँ न मेरे सफ़र की दास्ताँ लिखूँ   


कुत्ते की दुम :- टेढ़ी की टेढ़ी 






४०० पोस्ट और सात लाख आवेदन... बीस मौतें !!!! :- बेहद दुखद


हमारीवाणी ई-पत्रिका का शुभारम्भ! :- बधाइयाँ और शुभकामनाएं


नई ग़ज़ल/ तुम्हारे नैन में तो प्यार की गंगा समाई है..... :- संभालना ... बाढ़ ना आ जाए


बहुत कुछ कहते हैं दिल तो बच्चा है के महिला किरदार :- अब महिला है तो बातें तो होगी ही








हमारी खुशकिस्मती कि अभी भी दो विकल्प मौजूद है हमारे पास ! :- गनीमत है 










 आप क्या हैं- गाजर, अंडा या कॉफ़ी...खुशदीप :- हम तो एक आम इंसान है ... आप अपनी कहो ...


उम्र 12 साल और सेक्स के लिए परिपक्व :- सरकार का नया शगूफा


वायरलेस ब्रॉडबैंड भी है एक विकल्प :- काम की जानकारी


लो जी सरकार हो गई ५१ पोस्टो के लिंक्स की वार्ता तैयार ... आप मज़े से पढ़िए ... हम चलते है ... 
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आज की ब्लॉग वार्ता बस यहीं तक ..... अगली बार फिर मिलता हूँ एक और ब्लॉग वार्ता के साथ तब तक के लिए ......
जय हिंद !!

मंगलवार, 1 फ़रवरी 2011

आधी रात का सच

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  "
भोपाल को हिला गया था वो हादसा . हम सबको रुला गया वो समाचार जो चार दिन बाद बाबूजी को मिला तबसे अब तक कोरें भर आतीं हैं बूढ़े बाबूजी की आंखें भी नम हो जातीं है बरसों से हम तिल तिल मरते देख रहे हैं बुआ को यूं लगता है कि कि क्यों मेरी बुआ से ज़्यादा ज़रूरी तो न था यूनियन कार्बाईट का कर्ता धर्ता क्रोध से भर जाता हं  जब भी बुआ को देखता हूं बुआ वाला भोपाल
को देखता हूं आज़ फ़िर एक बार वो रात याद आ गई बारास्त अजित भैया के ब्लाग जहां ये लिका है:-सत्ता के शिखरों पर चलनेवाली धोखेबाजी, सौदेबाजी, साजिशो और बईमानी की अंतहीन कहानी का यह एक नमूना भर है। इसमें एक हाईप्रोफाइल सनसनीखेज धारावाहिक का पूरा पक्का मसाल है। गैस त्रासदी आज़ाद भारत का अकेला ऐसा मामला है, जिसने लोकतंत्र के तीनो स्तंभों को सरे बाज़ार नंगा किया है। विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका के कई अहम ओहदेदार एक ही हमाम के निर्लज्ज नंगों की क़तार में खड़े साफ़ नज़र आए।" 

भ्रष्टाचार के खिलाफ जनयुद्ध,  

बना के तस्वीर मिटाते हैं वो,ख़त लिख कर फाड़ते हैं वो 

वृष लग्‍नवालों के विभिन्‍न संदर्भों का आपस मे संबंध .. 

.चलो गंगा में फिर मुझको बहा दो ।

You are my lost but regained delight

क्या सुनाऊं ,,,

 लिमिटी  खरे का के रोजनामचा पे 900 वीं पोस्ट आ गई बधाई .दो पाटन के बीच में ब्लाग परओह, आखिरी उघन भी टूट गयादेखिये . अमीर धरती: गरीब लोग दूसरों को न्याय दिलाने के लिये लड़ने-झग़ड़ने वाले पत्रकारों को अपनी मांगो के लिये धरना देना पड़ा!

डॉ श्याम गुप्त की कहानी...बारात कौन लाये .......

सोमवार, 31 जनवरी 2011

महात्‍मा गांधी की हत्‍या तो हर रोज हो रही है ..क्षमा करना बापू तुम हमको .. ब्‍लॉग4वार्ता .. संगीता पुरी

आप सबों को संगीता पुरी का नमस्‍कार .. आज महात्‍मा गांधी के पुण्‍य तिथि पर ब्‍लॉगर भाइयों ने बहुत लिखा है। ब्‍लॉग4 वार्ता की ओर से उन्‍हे विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए फटाफट आप सबों को लिए चलती हूं आज की वार्ता में ... 


आज 30 जनवरी के दिन राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की पुण्यतिथि है । 2 अक्टूबर 1869 को पोरबंदर (गुजरात) में जन्मे और भारतीय जनसमुदाय में बापू के नाम से पुकारे जाने वालेमोहनदास करमचंद गांधी की नृशंस हत्या इसी दिन देश के स्वातंत्र्य-प्राप्ति के चंद महीनों के भीतर १९४८ में हुयी थी । तब नाथूराम गोडसे ने भारत विभाजन के नाम पर उत्पन्न आक्रोश के वशीभूत होकर उन पर जानलेवा गोली चलाई थी । 
पूरा पढें ..योगेन्‍द्र जोशी जी की प्रस्‍तुति ..महात्‍मा गांधी की हत्‍या तो हर रोज हो रही है। 


बापू आज तुम्हारी पुण्यतिथि है.आज तुम हमें बहुत याद आ रहे हो.मैं तुम्हें याद करने का कोई दिखावा नहीं करूंगा क्योंकि तुम हमें सचमुच याद आ रहे हो.तुम्हारे जाने के बाद हमने बहुत-से पाप किए हैं.अगर सूची बनाने बैठ जाएँ तो शायद दुनिया में कागज की कमी पैदा हो जाए.

बापू के भी ताऊ निकले तीनों बंदर बापू के



सरल सूत्र उलझाऊ निकले तीनों बंदर बापू के
सचमुच जीवनदानी निकले तीनों बंदर बापू के
ज्ञानी निकले, ध्यानी निकले तीनों बंदर बापू के
जल-थल-गगन-बिहारी निकले तीनों बंदर बापू के
लीला के गिरधारी निकले तीनों बंदर बापू के।


आदरणीय बापू



सप्रेम चरण स्पर्श
बहुत सालो से आपको चिट्ठी लिखने का मन था . यह बता दू मैं आपका ५०% प्रशंसक हूँ और ५०% आलोचक .
 बापू अफ्रीका से जब आप आये थे तब भी आज़ादी का आन्दोलन उसी गति चल रहा था लेकिन सितारे आपके साथ थे और १८५७ से सतत लड़ने वालो को भूल कर सब आप पर फ़िदा हो गए . आप के कुशल नेतृत्व में आज़ादी की लड़ने वाली लडाइयां टेबिल पर आ गई .खैर बापू आपको चोरा चोरी की हिंसा तो दिखी लेकिन भगत सिंह और उनके साथियो की फासी हिंसा नही दिखी .


आज गाँधीजी की पुण्य तिथि है..... राष्ट्रपिता को पूरा राष्ट्र नमन कर रहा है – याद कर रहा है. पर मेरे जैसे बुरबक को बापू की बकरी याद आ रही है. सुना है, बापू बकरी को बादाम खिलाते थे. बकरी की बहुत सेवा करते थे. और बकरी भी बापू से उतना ही प्यार करती थी. ये बात आश्रम में सभी को पता थी.... अत: जब भी कोई नेता या भक्त बापू से मिलने आता तो बकरी के सर पर हाथ जरूर फेर कर जाया करता था. पंडित नेहरु को भी बकरी में विशेष दिलचस्पी थी. वो बापू को खुश रखने के लिए अधिकतर बकरी को अपने हाथ से बादाम खिलाते. 


देशवासियों ने राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी को पुण्यतिथि पर याद किया, प्रतिवर्ष यही हैडिंग होती है अखबार में। पिछले कुछ वर्षों से युवाओं को शहीद दिवस भूल जाने के लिए दोषी ठहराया जाने लगा है। महात्मा गाँधी की समाधि राजघाट पर राष्ट्रपिता को श्रद्धांजलि अर्पित करने वालों की कतार में प्रायः वे ही होते हैं जिन्हें या तो कुर्सी की चाह या नेतृत्व की आस लगी रहती है। बडी संख्या में स्कूली बच्चे हाथ में फूल लिए खडे रहते हैं जिन्हें दुनिया की दोरंगी चाल का अंदाजा नहीं होता।
पूरा पढें .. जया केतकी की प्रस्‍तुति .. एक बार फिर बापू याद आए।


पूरे जगत में सत्य, अहिंसा और भाईचारे का संदेश देते हुए अपना सर्वस्व बलिदान करने वाले बापू ने जर्मन तानाशाह एडॉल्फ हिटलर को भी अहिंसा का पाठ पढ़ाया था और उनसे युद्ध का रास्ता छोड़ने का आग्रह किया था।
पूरा पढें ... रमेश मिश्रा जी की प्रस्‍तुति .. हिटलर के नाम बापू की पाती।

महात्मा गांधी की हत्या के 10 दिन पहले भी दिल्ली के बिड़ला हाउस में ही उन पर हमला किया गया था। और वे खुद भी जानते थे कि उनकी जान को खतरा है। लेकिन इसके बाद भी वे बेझिझक अपना काम करते रहे। अपने अंतिम दिन उन्होंने एक साथी की लापरवाही से नाराज होकर कहा कि मुझे यह सब पसंद नहीं है और मेरी कामना है कि भगवान यह सब देखने के लिए मुझे ज्यादा दिन यहां नहीं रखें। जीवन के अंतिम दिन उन्होंने करीब आधा दर्जन बार मौत का जिक्र किया।





तुम
एक दिव्य चेतना
जो तन मन को सचेत कर गयी है
जैसे एक चिंगारी भड़की हो
 अनुप्राणित कर दिया हो जिसने  
तुम्हारा अनूठा व्यक्तित्व, अनोखे बोल
प्राणोत्सर्ग और वह सब
जिसके लिये तुम लड़े...
 खुद से जुड़ा मालूम होता है,
तुम्हारी आँखों में छिपा दर्द
और निर्भयता की चादर
सत्य के प्रति प्रेम
आज पुकारते हैं
जब देश खड़ा है दोराहे पर 


गांधी ने आखिरी समय में कहा था हे राम...शायद उनके जाते ही देश की हालत यह हो गई है। देखा जाए तो इस देश में कुछ भी अच्छा नहीं चल रहा है। भ्रष्टाचार का भूत सता रहा है, इसमें खास लोग शामिल हैं। वहीं महंगाई देश में चरम पर है। बड़े नेता देश को अंधेरी गर्त में डाल रहे हैं। देखा जाए तो हर कोई नेता अपनी अपनी तिजौरियां भरने में जुटा हुआ है। वहीं मीडिया, न्यायपालिका और संसद। हर कोई भ्रष्टाचार की गाड़ी पर सवार है, ऐसे में देश कहां जाएगा। 

64  साल पहले 
यानि 30 जनवरी सन 1948.
नव-स्वाधीन भारत का वह काला दिन
उग्र हिन्दुत्ववादी 
दक्षिणपंथी 
विचारधारा से
ताल्लुक रखने वाले
एक दिग्भ्रमित युवक  ने 
(मैं उसका नाम नहीं लेना चाहता)
बापू को
हमसे छीन लिया था.

पूरा पढें .. डॉ शशिकांत की प्रस्‍तुति .. बापू के आखिरी क्षण ..




बापू ! तुम्हारी ऐनक !
बहुत पहले ही चढ़ गई थी शायद
तुम्हारी आँखों पर
इतिहास के काल की
जटिल सँभावनाओं के बहुत पहले
तुम बन गए थे इसका अटूट हिस्सा...

बापू ! तुम्हारी ऐनक !
जिसके गोल शीशे तुम्हारी एक निश्चित पहचान बनाते हैं
कई देशों की राजनीति से तुम्हारा परिचय
इन्हें पार करके ही हुआ था
जिन पर कभी धुंध नहीं जमी...
पूरा पढें .. रविन्‍द्र कात्‍यायन जी की प्रस्‍तुति .. बापू तुम्‍हारी ऐनक ..


आज से ठीक तिरसठ साल पहले एक धार्मिक आतंकवादी की गोलियों से महात्मा गाँधी की मृत्यु हो गयी थी. कुछ लोगों को उनकी हत्या के आरोप में सज़ा भी हुई लेकिन साज़िश की परतों से पर्दा कभी नहीं उठ सका . खुद महात्मा जी अपनी हत्या से लापरवाह थे. जब २० जनवरी को उसी गिरोह ने उन्हें मारने की कोशिश की जिसने ३० जनवरी को असल में मारा तो सरकार चौकन्नी हो गयी थी लेकिन महत्मा गाँधी ने सुरक्षा का कोई भारी बंदोबस्त नहीं होने दिया .

शान्ति का  उपदेशक 



सत्य-अहिंसा में आस्था रखना छोड़ दिया है 
और  जम्हूरियत 
बन गयी है खानदानी वसीयत का पर्चा 
सिपहसलार-
कर गया  है सरकारी खजाना 
सगे-संवंधियों के नाम..

बापू ये क्या हो रहा है...निकल पड़े दो डग जिधर...भारत गावों में बसता है ...सत्य और अहिंसा ... ये सब बापू के है ...इसका उल्लेख बड़े.बड़े मंचों से नेता बड़े श्रद्धा से करते है...लेकिन जब घोटला करना होता है तब महात्मा गांधी को भूल जाते है। पूरे विश्व में भारत की पहचान गांधी के नाम से होती हैं । पिछले दिनों एक सर्वेक्षण में यह बात सामने आई थी। आज बापू का निर्वाण दिवस है । 
" आज महान दुखद: घटना घटी है उसे आप सुन चुके हैं ! यह घटना हमारे इतिहास मैं अभूतपूर्व है ! महात्मा गाँधी अपनी प्रार्थना सभा मै जा रहें थे जबकि एक उन्मत्त व्यक्ति ने उन पर तीन गोलियां चलाई ! ये गोलियां गाँधी के हृदय के पार जा चुकी !" 
                          ये शब्द हमारे देश के प्रधान मंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरु ने जनता के सामने तब कहे जब गाँधी जी के सीने मै नत्थू  राम गोडसे ........ तीन गोलियां उतार चुका था जिससे गाँधी जी की जान जा चुकी थी ! इस बात को हुए 63 साल हो चुके हैं ! 

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को उनके शहीदी दिवस (30 जनवरी) पर जिला व कुमाऊं मंडल मुख्यालय नैनीताल में कैसे याद किया गया, यह चित्र इसकी बानगी हैं। यहाँ तल्लीताल डांठ पर स्थापित गांधीजी की आदमकद मूर्ति पर आज नए फूल चढ़ाने तो दूर गत 26 जनवरी से चढ़ाये गए सूखे फूलों को भी नहीं हटाया गया। मुख्यालय में आज शायद रविवार होने कि वजह से परंपरागत तौर पर ऐसे मौके पर सुबह 11 बजे बजने वाला साइरन बजाना भी प्रशासन भूल गया। गांधीजी के नाम पर राजनीतिक रोटियां सेंकने वाले राजनीतिक दलों के बात-बात पर आसमान सर पर उठाने वाले कार्यकर्ताओं ने भी कहीं कोई सार्वजनिक आयोजन नहीं किया। 
पूरा पढें ..नवीन जी की प्रसतुति ..राष्‍ट्रपिता को शहीदी दिवस पर सूखे श्रद्धा सुमन।

जो अलख जगाया था कभी ,  एक बार और जगाना बापू ,-------
चमन  से  दूर  मत    जाना  ,   लौट   कर  आना   बापू  ----------

गम -  ज़दा   हैं   तेरे     जाने   से ,  हम    इतना   बापू    ------
भूल    जाएँ   डगर   अपनी  ,  राह     दिखाना      बापू ----------

हाल  - ए -  वतन    बयां  ,  करें ,   तो      करें     कैसे  ?
खुद    देख    लो    आकर ,  यहाँ     फ़साना         बापू --------

बापू तुम क्या गये देश से सच्चाई चली गई
अब झूठ में ढुढ़ते हैं यहां सब सच
लेकर कइयों की जानें, बन रहे महात्मा
किसान होकर बेहाल, गला रहे मौत गले
करवा कर दंगे नेता, बन रहे हैं भले
बापू तुम क्या गये देश से सच्चाई चली गई।।

चलिए आज एक बार फिर  बापू को याद कर लें और उनकी ही आत्मा को सोचने पर मजबूर करें कि क्यों उन्होंने अपने सीने पर गोली खाई, हम जैसे लोगों के लिए जिनके पास आत्मा है ही नहीं और संवेदनाएं रास्ता भूल  गई हैं | आज बापू के चित्र को सबसे ज्यादा माला वही लोग पहनायेगे  जिनको उनके आदर्श भूल गए है | 
उन को सिर्फ इतना याद है कि साल में दो दिन --गांधी जयंती  और शहीद दिवस --गांधीजी के चित्र पर माला डालना है ,पहनाना या चढ़ाना नहीं | 



कहते हैं लोग कि 
महान लोग अवतार लेते हैं 
और तार देते हैं 
बुझी हुई आशाओं को
एक नया दीप दिखा देते हैं 
पर मैं तलाश में हूँ 
आज एक अवतार की
जो यहीं कहीं हो शायद 
हमारे बीच कहीं 

आज महात्मा गाँधी कि पुण्यतिथि है। आइये उनको याद करते
हुए एक गीत सुनते हैं। सन १९४८ में एक गीत उनकी याद में रचा
गया था जिसे रफ़ी ने गाया है। काफी बड़ा गीत है ये। इसका एक
भाग आपको सुनवा रहे हैं।

गीत संगीत की प्रस्‍तुति .. सुनो सुनो ये दुनियावालों बापू की ये अमर कहानी।

रविवार, 30 जनवरी 2011

यशवंत सोनावने को व्यवस्था ने मारा है, ज़रा सोचिए -- ब्लॉग4वार्ता -- देव कुमार झा

प्रिय ब्लॉगर मित्रो ,
प्रणाम !



भारत.... दुनियां की दूसरी सबसे बडी आबादी... सबसे बड़ा लोकतंत्र... भारत की अर्थव्यवस्था मुद्रा स्थानांतरण की दर से विश्व में दसवें और क्रयशक्ति के अनुसार चौथी सबसे बडी अर्थ-व्यवस्था... दक्षिण एशिया की सबसे बड़ी शक्ति... और यकीनन आज भारत एक विश्वव्यापक शक्ति है। आज़ादी के बाद धीरे धीरे ही सही भारत ने विकास किया.... और पिछले बीस वर्षों में यकीनन विकास दर बढ़ी है... आज के दौर की तमाम समस्याओं के बावजूद विश्व समुदाय की नज़र में भारत निवेश के लिहाज़ से एक बड़ा व्यापारिक केंद्र बन कर उभरा है लोकतंत्र परिपक्व हुआ है की नहीं यह किसी चर्चा का मुद्दा हो सकता है मगर इतना ज़रूर है की बदलते दौर में लोग बदले हैं, लोगों की संवेदनाएं बदली हैं, लोगों की सामाजिक सोच बदली है। सोचिये वह दौर जब नेताओं के बोल स्कूलों की दीवारों पर लिखे होते थे,    राजनीति में लोग सेवाभाव से आते थे... बदलते दौर में राजनीतिक सोच बदली है... तंत्र बदला है... कैसे कैसे इस तंत्र ने भ्रष्ट राजनीति और भष्ट तंत्र के इर्द गिर्द एक ऐसा कुचक्र लाकर खड़ा कर दिया जिसने भले और नेक अफसरों और नौकरशाहों के लिए दुविधा की स्थिति खड़ी कर दी.... जी हाँ मैं बात कर रहा हूँ यशवंत सोनावणे की निर्मम हत्या.... और उसके बाद बने राजनीतिक उहा-पोह की स्थिति के बारे में.... 

समाचार चैनल चिल्लाते हैं.... प्रिंट मीडिया चिल्लाता है.... सरकार हरकत में आती है.... कार्यवाही होती है... सरकार आगे की कार्यवाही और दोषियों को सजा दिलाने की बात भी कहती है.... मगर प्रश्न अभी भी एकदम साफ़ है.... क्या ऐसा निर्मम कांड ऐसे ही हो सकता है, की सरकार को कानो-कान खबर ना हुई..... भाई माफिया के पीछे यकीनन कोई ना कोई बड़ा हाथ है.... यकीनन सरकारी तंत्र दोषी है.... जब एक अफसर की यह हालत है तो फिर एक आम इंसान के साथ क्या हो सकता है.... सोच कर ही रूह कांप जाती है.... 

वैसे इसकी चहुँ-ओर निंदा हुई.... कलम ने इसके बारे में अपना विरोध जताया.... ब्लॉग जगत से भी कई आवाजें उठी.... आज उन आवाजों को एक साथ एक मंच पर लाने का यह एक छोटा सा प्रयास है...... 






ब्लॉग4वार्ता का पूरा वार्ता दल इस काण्ड की घोर भत्संना करता है और सरकार से यह अपील करता है कि न्याय पालिका पर जनता के विश्वास को कायम रखते हुए दोषियों को जल्द से जल्द सजा दी जाए !


दोषियों को सजा मिलेगी.... इसी विश्वास के साथ अपनी वार्ता को आगे बढ़ाते हैं..... 
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सबसे पहले कुछ अर्थ शास्त्र की बातें.... 


सामाजिक नियंत्रण बिना बाजार छुट्टा सांड होता है :- शिवराम का बहुत उम्दा आलेख


आओ पैसा कमायें “जटिलता की जगह सरलता को चुनें” - भाग १ :- जी बिल्कुल, भाग-२ की प्रतीक्षा है.


जीवन बीमा में समूह की छतरी बढ़ी, पर लोग हुए व्यक्तिगत बीमा से दूर :- बीमा आग्रह की विषय वस्तु है....


आगे भी देखिए भाई


अब आपदाओं में भी काम करेंगे फोन :- बहुत रोचक जानकारी...

गोविन्‍द शर्मा का व्यंग्य - मेरा गुस्सा मेरा है :- जी बिलकुल...

चिरयुवा :- सभी की यही उम्मीद है की चिर युवा रहें.....

श्री समीर-सलाह, डॉ दराल प्रेस्क्रिप्शन, अनवांटेड एडवाइज़...खुशदीप :- नैतिक चेतावनी...किसी को बिन मांगे सलाह देना भी कम ख़तरनाक नहीं...

आपकी लेखनी अबाध गति से चलती रहे :- आमीन

धन काला है या नहीं पहले इसकी जांच हो - बूटा सिंह :- फिर तो भैया सारे नेताओं का पैसा सफ़ेद हो गया.....

हाईप्रोफाइल लाईफ !! :- कडुवा सच

घुंघराले बालों वाली शाम :- आनंद लीजिये...

पनीर कोर्न मसाला :- अब खाने पीने की बातों के बिना कैसे काम चलेगा भाई....

यहाँ हैल्थ की मज़बूरी है, वहां वैल्थ की मज़बूरी है :- जीवन की विषमताओं से रूबरू कराती हुई

कुछ फ़िल्मी बातें भी हो जाएं.... तो फ़िर लीजिए फिल्‍म समीक्षा :दिल तो बच्चा है जी

चोला माटी के हे रे :- बहुत कुछ सोचने पर मजबूर करता है....

इसी के साथ आज की ब्लॉग वार्ता बस यहीं तक ..... अगली बार फिर मिलता हूँ एक और ब्लॉग वार्ता के साथ तब तक के लिए ......
जय हिंद !!
देव कुमार झा 

शनिवार, 29 जनवरी 2011

जन्म लेने से पहले ही देश में हर साल 7 लाख लड़कियों की हत्या - जिन्हें नाज़ है हिंद पे वो कहाँ है - ब्लॉग 4 वार्ता - शिवम् मिश्रा

प्रिय ब्लॉगर मित्रो ,
प्रणाम !

एक खबर के मुताबिक ...

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग [एनएचआरसी] का कहना है कि जन्म लेने से पहले ही देश में हर साल सात लाख लड़कियों की हत्या कर दी जाती है।
एनएचआरसी के सदस्य और पूर्व राजदूत रहे सत्यब्रत पाल ने कहा, 'जैसे ही कोई महिला गर्भवती होती है, उसे बच्चे के लिंग के बारे मे चिंता सताने लगती है। गैरकानूनी तरीके से गर्भ परीक्षण कराने पर जब भ्रूण के लड़की होने का पता चलता है तो उसकी हत्या कर दी जाती है।' उन्होंने कहा, 'भारत में हर साल एक वर्ष की उम्र से पहले ही 10 लाख 72 हजार बच्चों की मौत हो जाती है। लैंगिक भेदभाव वाली हमारी सोच इसकी सबसे बड़ी वजह है। लड़कों के बजाय लड़कियों की मृत्यु दर ज्यादा है।'

क्यों ना हम सब मिल कर एक मुहीम चलायें और इस घिनोनी सोच को बदल दें ... 
आज के दौर में जब अक्सर ही यह देखा जाता है कि माँ बाप की सेवा करने में बेटियां बेटो से आगे रहती है ... क्या बेटियों को जन्म ही नहीं लेने देना एक महा पाप नहीं है ... ज़रा सोचियेगा !
ब्लॉग 4 वार्ता  का पूरा वार्ता दल इस मानसिकता की घोर निंदा करता है !

आइये चलते है आज की ब्लॉग वार्ता की ओर ...

सादर आपका 

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डर्मल फिलर से पाएं नई मुस्कान


पलायन !


एक और राष्ट्रीय दिवस "निपटा" सब लौट गए छुट्टी मनाने

आज नीरज दीवान का जन्मदिन है


कोबरा का बाप (कार्टून धमाका)


आप ब्लागर हैं..तो बन सकते हैं मंत्री-प्रधानमंत्री 

"एक सवाल मीठा सा"


शायद तुम्हारी दादी भी यही कहानिया सुनाती होंगी


हिंदी में टाइपिंग करना सीखिए (Hindi Typing Tutor)


मेकाइवली - शैतान का वकील


महेंद्र मिश्र लाइव : "भारत के वीर जवान" पुस्तक का लाइव वेब कास्ट -1,2,3,4 


जिन्दगी है एक दिन ...............केवल राम


हमें भारतीयों के महान कार्यों पर गर्व नहीं होता, सिर्फ आश्चर्य होता है


एक पल... एक ज़िन्दगी...


ब्लागरों को कुछ नहीं आता- फर्जी आईडी वाले ही हैं बड़े ज्ञाता


ये चाँद कैसे कैसे!!!


शिवस्वरोदय-28


घर-घर में माटी का चूल्हा ---- ललित शर्मा


लखनऊ में चूहा बने दो सांड...खुशदीप

कुछ राजा भोज बाकी गंगू तेली ?


"आज कुछ दोहे" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")


कैसा रहेगा आपके लिए 28 और 29 जनवरी का दिन ??


ठेका किसे मिलेगा... :-देव


एक परिवर्तन और हमारा अजय 

रोक सको तो रोको!


मेरा प्रोफाइल फोटो -२


जनवरी 14 का कम्बल वितरण कार्यक्रम ......!


मत पूछ.... 

जहरीली तो नहीं हो गई ईसन नदी ?


अपने ब्लॉगर ब्लॉग का मोबाइल संस्करण एनेबल करें


अब कोई गुलशन न उजड़े, अब वतन आजाद है - साहिर लुधियानवी


वो दिन गए की कहते थे नौकर नहीं हू मै


जिन्हें नाज़ है हिंद पे वो कहाँ है ... कहाँ है ... कहाँ है ??? 

ये फोटो देखकर आप कुछ कहना चाहेंगें?


ब्लॉगिंग के चार वर्ष पूर्ण हुए… सफ़र जारी है (एक माइक्रो-पोस्ट)…… Four years of Blogging, Hindi Blogs and Hindi Writing

अनुरागी मन - कहानी भाग ९


सप्तपदी वैदिक विवाह...सात वचनों का अर्थ...सर्जना शर्मा


बिलखता उद्योगपति , धधकता कलेक्टर , और गणतंत्र मनाता गन तंत्र


अरे भाई अब ये "गन्ना चूसने वाली" मस्तानी कौन है ?


२६ जनवरी को काला झण्डा


गणतंत्र दिवस की बहुत बहुत हार्दिक बधाइयाँ और शुभकामनाएं


आखिर देश है क्या ???- - - - - - - -mangopeople


दम तोड़ते हैं विचार...


एक विचार


पूछने हैं तुमसे कुछ सवाल दोस्तों


अभियांत्रिकी निकाय की अपेक्षा चिकित्सा निकाय की ओर रुझान कम क्यों?


जरा याद इन्हे भी कर लें-----------मिथिलेश


सुन्दरकाण्ड से कुछ चौपाईयाँ.. (Sundarkand) 



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आज की ब्लॉग वार्ता बस यहीं तक ..... अगली बार फिर मिलता हूँ एक और ब्लॉग वार्ता के साथ तब तक के लिए ......
जय हिंद !!

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