बुधवार, 12 दिसंबर 2012

मैं कहां शब्‍दों में बांध पायी तुम्‍हें .. ब्‍लॉग4वार्ता .. संगीता पुरी

आप सबों को संगीता पुरी का नमस्‍कार , चुनाव आयोग ने सब्सिडी प्राप्त रसोई गैस सिलेन्डरों की संख्या में गुजरात विधानसभा चुनाव के ठीक पहले बढ़ोतरी किये जाने के केंद्र सरकार के कदम पर मंगलवार को सख्त ऐतराज जताया और उसे फौरन इस कदम को रोकने को कहा। चुनाव आयोग ने पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री एम वीरप्पा मोइली द्वारा इस सिलसिले में की गई घोषणा को लेकर उनसे कल सुबह तक इस बारे में स्पष्टीकरण भी मांगा है। आयोग ने मोइली की घोषणा के फौरन बाद स्वत: संज्ञान लेते हुए एक आपात बैठक बुलाई। चलिए चुनाव के बहाने भी जनता को जो लाभ मिल जाता है , वह भी रोक दिया उन्‍होने , अब चलिए ब्‍लॉग जगत की सैर पर .....


दिलीप साब! आप चिरायु हों- अमिताभ बच्चन - जन्मदिन विशेष हिंदी सिनेमा के महानतम अभिनेता *दिलीप कुमार* को सदी के महानायक *अमिताभ बच्चन * के रुप में एक प्रिय प्रशंसक प्राप्त हैं. दिलीप कुमार को अमिता...हकीकत ... - उनकी आशिकी में, हमने नाम कमाया है या हुये हैं बदनाम ये जिससे पूंछो,........................ तो वो चुप हो जाता है ? ... उन्हें, फर्जीवाड़े की आदत कुछ...जीवन यात्रा को विराम कब मिलेगा? -10 नवंबर- पूरा दिन जैसे सर्रर्रर्र से बीत गया हो. पूरे हफ्ते की मेहनत का रंग आज दिखा. एक सेमिनार होना था जो खूब अच्छा हो गया. कैम्पस में लोगों से बात करते...ऐसे बचाई जाती है हिन्दी - अपनी खुशी प्रकट करने के लिए कोई किसी को डाँट भी सकता है - यह मैंने नरेश से जाना। कह रहा था - ‘सरजी! इतराइए नहीं! आप जैसे और भी लोग हैं दुनिया में।’

ब्लॉग और ब्लॉगर की टिप्पणी - मैने कल अभी एक नया ब्लॉग बनाया आज यह दूसरा! आप भी कहेंगे.. पगला गया है! लेकिन यह अनायास बन गया । अब बन गया तो बन गया। हुआ यह कि कल चित्रों का एक ब्लॉग ब...चाहतें..... - * * * **अक्सर होता ऐसा ही है...* *चाहतें किसी की होती हैं...* *निशाना पे भी कोई होता है * *लक्ष्य साधा जाता है उसी पे* *लेकिन...* *बूमरैंग की तरह निशाने ...मैं कहाँ शब्दों में बांध पायी हूँ......तुम्हे ......!!! - मैं कहाँ शब्दों में बांध पायी हूँ.......तुम्हे अब तक जितना भी लिख चुकी हूँ....तुम्हे फिर भी अधुरा-अधुरा सा रहा है..... अभी कहाँ पूरी तरह से जान प...वालमार्ट की रिपोर्ट से कठघरे में सरकार !! - वालमार्ट द्वारा अमेरिकी सीनेट में पेश रिपोर्ट से सरकार कि मुश्किलें तो बढ़ ही गयी है और सरकार खुद कटघरे में खड़ी हो गयी है क्योंकि लोकसभा में सरकार के मंत...

सह न पाई - देख बदहाली उसकी ,मन को लागी ठेस | प्यारा था पहले कितना ,लोक लुभावन वेश || साथ समय के बदल गया ,रूप रंग वह तेज | शरीर ढांचा रह गया ,चेहरा हुआ निस्तेज || - ...Katju and Phoolan - काटजू और फूलन - Katju and Phoolan -Dilip Mandal दुनिया फूलन देवी को जॉन ऑफ आर्क और आंग सान सू की की लिस्ट में रखकर सलाम करती है (देखें दुनिया की सबसे बड़ी पत्रिका TIME की...सफेद बादलों की लकीर - * 1. **कितनी धुँधली-सी हो गई हैं छवियाँ या आँखों में भर आया है कुछ शायद अतीत की नदी में गोता लगा रही हैं आँखें ! 2. विवेक ने कहा- हाँ, यही उचित है ! ...अलीना माल्दोवा है मेरा नाम -*क्रिस्टीना टोथ की तीन कविताओं की सीरीज 'पूर्वी यूरोप : त्रिफलक' से एक और कविता... * * * * * *पूर्वी यूरोप त्रिफलक : क्रिस्टीना टोथ * (अनुवाद : मनोज पटे...


गुजरात विस चुनाव 2012 बनाम नरेंद्र मोदी -गुजरात विधान सभा चुनाव 2012 पर भारत की ही नहीं, बल्‍कि विश्‍व की निगाह टिकी हुई है, क्‍यूंकि नरेंद्र मोदी हैट्रिक बनाने की तरफ अग्रसर हैं, और उनका प्रचार ...ओ..त्तेरी की... -*ओ..त्तेरी की..*. * **तुम भी बड़े वाले हो...माइंड ब्लोइंग, ओ...त्तेरी की...लग गई वॉट...इट इज हॉट...* *चक्कर क्या है? जिसे देखो वही इन शब्दों को दाग रहा है औ...ये जीवन है???... संध्या शर्मा -* * *हर रोज बैठे रहते हैं अकेले कभी टी वी के निर्जीव चित्र देखते कभी मोटे चश्मे से अखबार छानते एक वक़्त था कि फुर्सत ही न थी एक पल उसकी बातें सुनने की ...अरे डॉक्टर यह दिल है मेरा - "अरे डॉक्टर यह दिल है मेरा वह और होंगे जिनका दिल मशीन होता है मेरा दिल लोगों के हंसने पर हंसता है लोगों के रोने पर रोता है स्नेह से देख ले कोई तो इसमें भी क...


कुछ तो है ...- मैं न यशोदा न देवकी मैं न राधा न रुक्मिणी न मीरा नहीं मैं सुदामा न कृष्ण न राम न अहिल्या न उर्मिला न सावित्री .......... मैं कर्ण भी नहीं नहीं किसी क...गज़ल - ३ - ज्यों चकवा देखा करता है हर शाम चांदनी की राहें, ज्यों बेल-लता ढूंढा करती हैं ऊँचे दरख्तों की बाहें, ऐसे ही हाँ, हम ऐसे ही पलकें बिछाये रहते है...शिकायत परिंदों से.....- मेरे हाथ से छिटक कर प्रेम बिखर गया है सारे आकाश में.. देखो सिंदूरी हो गयी है शाम तेरी यादों ने फिर दस्तक दी है हर शाम का सिलसिला है ये अब तो.... कमल ने समे...वेब मीडिया बदल रहा है उपभोक्ताओं का मिजाज -इंटरनेट की शुरुआत से ही कन्वर्जेंस की संभावनाओं के असीमित विकल्प खुल गए थे, पर तकनीकी और कंटेंट के स्तर पर यह बदलाव हमारी मीडिया हैबिट पर किस तरह से असर क...शैतान की प्रेमिका का आना -शैतान ने कई दिनों तक चाहा कि एक तमीजदार आदमी होने की जगह वह सब कुछ भूल जाए। वे सारे शुबहा जो उसे अक्सर रोकते थे मगर वह एक शैतान होने कि ज़िद में उन सब को ...


सफेद बादलों की लकीर - * 1. **कितनी धुँधली-सी हो गई हैं छवियाँ या आँखों में भर आया है कुछ शायद अतीत की नदी में गोता लगा रही हैं आँखें ! 2. विवेक ने कहा- हाँ, यही उचित है ! ...लॉबिंग का काला कारोबार -सी. गोपीनाथ [image: Print] वॉलमार्ट की लॉबिंग से जुड़ी खबर ने संसद में हंगामा खड़ा कर दिया। लेकिन सभी जानते हैं कि आज के दौर का सच यही है। अमेरिका में क...ये पहरुवे हैं हमारे पर्यावरण के -सन्देश परक लघु कथा है .ऐसी कथा आप बा -कायदा लिख सकतें हैं बस थोड़ी सी शैली बदल दें .मसलन -वह पेड़ रास्ते को छाया देता था पक्षियों को आश्रय .घनी थी उसकी शाख...इस देश की मिट्टी पोली है ,,, -* **इस देश की मिट्टी पोली है* *हर पौध उगाया करती है -* *जन्म -मरण,उत्थान -पतन,* *हर रश्म निभाया करती है -* * **गेंदा गुलाब , केशर चन्दन ,* *बेला ...सेना और युद्ध सामग्री - रक्षा मंत्री ए के एंटोनी ने लोकसभा में स्वीकार किया है कि देश की रक्षा में लगी हुई हमारी सेना के पास युद्ध सामग्री की ...

नए राशिफल के लिए लॉगिन करें ... www.gatyatmakjyotish.com - लग्‍न के आधार पर लिखा जाता है यहां राशि फल .. आनेवाले दिनों के नए राशिफल को जानने के लिए के लिए यहां सब्‍सक्राइब करें ... www.gatyatmakjyotish.comमैं शून्यकाल का अगीत ………… - मैं शून्यकाल का अगीत तुम हो मोहन मेरे मीत नृत्य करूँ या झांझर बजाऊँ कहो तो मोहन कैसे रिझाऊँ कुछ तो बोलो मेरे मनमीत मै शून्यकाल का अगीत ………… बन मीरा ग...हवा का झोंका ! - *उनका आना ताज़ा हवा के झोंके की तरह खिला देता है तन-मन सूखे मरुथल में गिरती हैं बूंदें उमगने लगती है अमराई झड़ते है सूखे पत्ते और आती दिखती हैं कोपलें छो...दाढ़ी और विद्वान - उसने कहा है - दाढ़ी बढ़ाये लोगों से घिन आती है। ऐसे जन गन्दे होते हैं। मैं सोचता हूँ कि उसने ‘लोग’ कहा है, इसलिये यहाँ स्त्री पुरुष विमर्श की गुंजाइश नहीं...




आज के लिए बस इतना ही ... मिलते हैं एक ब्रेक के बाद ....


मंगलवार, 11 दिसंबर 2012

जिन्हें नाज़ है हिंद पर वो यहां हैं...ब्लॉग 4 वार्ता... संध्या शर्मा

संध्या शर्मा का नमस्कार.....यादें...बड़े काम की चीज!  *कुछ यादें तो होती है...बड़ी रंगीन... *** *इन्हें संजोकर रखना है बड़ा कठीन...*** *दिल के किसी कोने में दबा कर रखना...कभी कभी फुर्सत में इन्हें दिन का उजाला दिखलाना...या रात के अँधेरे में चाँद की रोशनी दिखलाना....कही दूर ना चली जाए इसलिए...सहलाना..बहलाना..थपथपाना.. प्रस्तुत है आज की वार्ता.... 

डल झील- जैसे महबूब को जी भर के देखना - 9 नवंबर सूरज की हथेली पर मानो किसी ने बर्फ का ढेला रख दिया हो. ठंडी सी गर्माहट थी उसके आने में. हमारे यहां आने के मकसद को बस अंतिम अंजाम मिलना बाकी था. ...उन्नति और सभ्यता... - अपनी स्कॉटलैंड यात्रा के दौरान एडिनबरा के एक महल को दिखाते हुए वहां की एक गाइड ने हमें बताया कि उस समय मल विसर्जन की वहां क्या व्यवस्था थी। महल में रहने. जब इश्क ही मेरा मज़हब बना ……… - आह! आज ना जाने क्या हुआ धडकनों ने आज इक राग गाया है बस इश्क इश्क इश्क ही फ़रमाया है जो जुनून बन मेरे दिलो दिमाग पर छाया है ये कोई असबाब या साया नहीं बस इश्क ...

पाणिग्रहण संस्कार से तनिक आगे - परसों, आठ दिसम्बर को मेरी पोती, नीरजा-गोर्की की बड़ी बेटी अभिसार का पाणिग्रहण संस्कार सम्पन्न हुआ। गोर्की मेरा छोटा भतीजा है और नीरजा उसकी उत्तमार्ध्द। ..आशिक ... - लो, उन्ने.. फिर से उन्हें धो डाला उफ़ ! क्या गजब की सफेदी है ?? ... चवन्नी छापों को, सिक्कों के तमगे क्या.... यही हिन्दी का साहित्य है ? ..ये तन्हाई मुझे उस भीड़ तक लाती है.. !! -

काटजू के कडवे पर सच्‍चे बोल - अपने तेजतर्रार वक्तव्य और विवादास्पद विषयों पर बेखौफ बोलने के लिए जाने जाने वाले भारतीय प्रेस परिषद के अध्यक्ष मार्कण्डेय काटजू के ताजा बयान पर बवाल सा ... जस्टिस काटजू का वर्गीकरण - देखिये तो आप किस श्रेणी में हैं - जस्टिस काटजू का कहना है की भारत की जनता में 90% ईडियट हैं , लेकिन उन्होंने यह नहीं स्पष्ट किया की वे कौन से लोग हैं ! अतः पाठकों की सुविधा के लिए कुछ ....अपनी बीबी के नाम से दे दे सेठ...दो दिन से कुछ मुर्गा...अंगूरी नही चखी है सेठ... - यह सर्व विदित है कि ताऊ ने बहुत सारे काम धंधे किये पर किसी भी काम में सफ़लता उससे इतनी ही दूरी रखती थी जितनी रामप्यारे के सर से सींग. ताऊ ने चोरी, डकैती... 

शादी की सालगिरह : जो कहूंगा सच कहूंगा - खुशी का मौका हो और आप वहां मौंजूद ना हों, मुझे लगता है आप सबको इसका अहसास होगा। कल यानि नौ दिसंबर को मेरे भांजे की शादी थी, बढिया रही। लेकिन मैं वहां ... रूप संवारा नहीं,,, - *रूप संवारा नहीं,* कुहासों ने घूंघट उतारा नही है, अभी मेरे प्रियतम का इशारा नहीं है! किरणों का रथ लगता थम गया, सूरज ने अभी पूरब निहारा नही है! ... नींद ने टुकड़ों-टुकड़ों मे आना शुरू कर दिया - नींद ने टुकड़ों-टुकड़ों मे आना शुरू कर दिया जब से आपने ख्वाबो मे कदम धर दिया अब हालात संभाले नहीं संभलते हमने आपका नाम छुपाना शुरू कर दिया हाल-ए-दिल बयां ... 

हो गई बोहनी! - *मझली का परिवार:** * बाप पेंटर, बड़का डरइवर [पियक्कड़] महतारी धोवे चुक्कड़। छोटका बउका, बड़की छुट्टा, छोटकी खेले गुट्टा। *मझली:** * चौदह की उमर।... अफ़ज़ल और संसद पर हमले की अजीबो-ग़रीब दास्तान – 2 - ( कसाब की फांसी के बाद, अफ़ज़ल को भी जल्दी ही फांसी की मांग उठाए जाने की पृष्ठभूमि में यह आलेख पढ़ने को मिला. 13 दिसम्बर, संसद पर हमले की तारीख़ की आमद के ...जिन्हें नाज़ है हिंद पर वो यहां हैं.. दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है भारत... लोकतंत्र का सबसे बड़ा मंदिर है संसद... लेकिन देश की शान इसी संसद में एफडीआई जैसे गंभीर मुद्दे पर बहस के दौरान ये...

चिंताएँ  कितनी उर्वरा होती है वह ज़मीन - जहाँ बोते हैं हम बीज चिंताओंके --- बेटे की बेरोज़गारी - घर की दाल रोटी- बेटी की शादी - रिश्तों में अविश्वास- किस्म किस्म के बीज..... देखते ही देखते एक जंगल खड़ा हो जाता है - एक घना जंगल- चिंताओंका - एक चलता फिरता जंगल-.... हम सब उस बोझ को ढोकर- घूमते रहते हैं - दिनों ..महीनों..सालों ... कहाँ ढूँढूँ तुझे ? कहाँ-कहाँ ढूँढूँ तुझे कितने जतन करूँ, किस रूप को ध्यान में धरूँ, किस नाम से पुकारूँ, मंदिर, मस्जिद, गिरिजा, गुरुद्वारा किस घर की कुण्डी खटखटाऊँ ? किस पंडित, किस मौलवी, किस गुरु के चरणों में शीश झुकाऊँ बता मेरे मौला मैं कहाँ तुझे पाऊँ ?..शीत डाले ठंडी बोरियाँ *"ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक - 26 के लिए लिखी रचना "हेमंत ऋतु" पर आधारित * देख माथे की शिकन औ त्योरियाँ, शीत डाले ढेर ठंडी बोरियाँ, गोद में अपनी लिटाकर सूर्य को, गुनगुनाती है सुनाती लोरियाँ, धुंध को फैला रही है राह में, बांधती है मुश्किलों की डोरियाँ, बादलों के बाद रखती आसमां, धूप की ऐसे करे है चोरियाँ, सुरसुरी बहती पवन झकझोर दे. ...

कार्टून:- कि‍स्‍सा कवि‍ के पि‍छवाड़े का

  

अगली वार्ता तक के लिए इजाज़त दीजिये नमस्कार........

सोमवार, 10 दिसंबर 2012

21 दिसंबर को खत्म नहीं होगी दुनिया...ब्लॉग 4 वार्ता... संध्या शर्मा

संध्या शर्मा का नमस्कार.....नासा के शीर्ष वैज्ञानिकों ने 21 दिसंबर 2012 को दुनिया खत्म होने की भविष्यवाणी को बकवास करार दिया है। नासा ने अपनी वेबसाइट पर कहा है कि 21 दिसंबर को दुनिया खत्म होने वाली नहीं है। पिछले चार अरब साल से अधिक समय से पृथ्वी टिकी हुई और वैज्ञानिकों को इससे जुड़े किसी खतरे की जानकारी नहीं है। वैज्ञानिकों ने बताया कि सुमेर सभ्यता के समय खोजे गए एक संभावित ग्रह निबिरु के पृथ्वी से टकरा जाने की अफवाह के कारण इस खबर को बल मिला, नासा ने यह भी स्पष्ट किया है कि माया सभ्यता का कैलेंडर दिसंबर 2012 में खत्म नहीं हो रहा है। वैज्ञानिकों ने यह बताया कि निबिरु के पृथ्वी से टकराने की खबर सिर्फ एक अफवाह, जो इंटरनेट के जरिये लोगों के बीच फैली। इस अफवाह से दुनिया के कई देशों में दहशत है। रूस, फ्रांस, मैक्सिको, यूक्रेन आदि देशों में इसका खासा असर देखा जा रहा है। लेकिन वैज्ञानिकों के साथ-साथ भविष्यवक्ता भी 21 दिसंबर को दुनिया खत्म होने को अफवाह बता रहे हैं। दुनिया कि चिंता ख़त्म हुई ... :)) , आइये चलते हैं आज की वार्ता पर. आज काफी सारे लिंक चुनकर लाये हैं हम आपके लिए ....

 http://static.binscorner.com/c/contribute-to-save-earth/part-007.jpeg 
 
पुराने रिश्ते -पुराने लोग - पता नहीं ये योग है या संयोग -- आज प्रो. सरोजकुमार जी के यहाँ जाना हुआ माँ को लेकर( कल वादा जो कर लिया था)...फ़िर वे और माँ बीते दिन याद करते रहे ,और मैं ... सच कहना - सच कहना रुकता है क्या ...कुछ किसी के होने से या न होने से . कहीं कुछ नहीं थमता वैसे ही है चलता रहता अच्छा है जितनी जल्दी आ जाएँ बाहर ..... ये सर्दियां और तुम्हारे प्यार की मखमली सी चादर... - आज मौसम ने फिर करवट ली है, ज़रा सी बारिश होते ही हवाओं में ठण्ड कैसे घुल-मिल जाती है न, ठीक वैसे ही जैसे तुम मेरी ज़िन्दगी के द्रव्य में घुल-मिल गयी हो..

मन है, तनिक ठहर लूँ - मन फिर है, जीवन के संग, कुछ गुपचुप बातें कर लूँ । बैठ मिटाऊँ क्लेश, रहा जो शेष, सहजता भर लूँ ।। देखो तो दिनभर, दिनकर संग दौड़ रही, यश प्रचण्ड बन, छा जा...BIKANER- Desnok Karni Mata's Rats Temple बीकानेर- दशनोक करणी माता का चूहे वाला मन्दिर - रामदेवरा बाबा के यहाँ से जब चले तो शाम का समय हो रहा था। उस समय बीकानेर के लिये कैसी भी मतलब सवारी गाड़ी या तेजगति वाली एक्सप्रेस गाडी भी नहीं मिलने ... सुबहे बनारस-2 - ये आज सुबह की तस्वीरें हैं। गंगा जी में आजकल साइबेरियन पंछियों का जमावड़ा है। नाव में सूर्योदय के दर्शन के लिए घूमने वाले यात्रि इनके लिए कुछ दाना लिये रह... 

मौन निमंत्रण - मौन निमंत्रण ये मेरा है मौन निमंत्रण, आज तुम्हें अजमाने को, जब मैं पहुंचा देर शाम को, खेतों औ खलिहानों को. तेरी साँसे पास न आयीं, मेरा दिल बहलाने को, सो अप...  धार बनी नदिया की ....... - नदी की यात्रा ....समुद्र की ओर .....आत्मा की यात्रा, परमात्मा की ओर ....इसी भाव से पढ़िये ....धार बनी नदिया की ...... छवि मन भावे ... नयन समावे .. सूरति... लिखने को बेकरार - *-* लिखने को बेकरार लेखनी रुक न पाएगी पुरवैया के झोंकों सी बढती जाएगी सर्द हवा के झोंकों का अहसास कराएगी जब कभी गर्मीं होगी प्रभाव तो होगा मौसम ...

तम्बुओं के शहर इलाहाबाद का अलबेला कवि -कैलाश गौतम - लोकप्रिय कवि -कैलाश गौतम समय [08-01-1944 से 09-12-2006] आज पुण्यतिथि पर विशेष वह विगत कई दशकों का एक अलबेला कवि था | उसकी कविताओं में बनारस की मस्ती और..बैठे ठाले - ३ - नई गाड़ी चलाने का रोमांच कुछ और ही होता है. मैं अपने १९ वर्ष पुरानी मारुती ८०० को एक एक्सचेंज ऑफर के तहत बदल कर, नई नैनो सी एक्स लेकर, घर आया तो देखा घर क... * हिचकियाँ * - *तुमसे दूर हूँ कुछ मजबूर हूँ* *ना ई - मेल,, ना मेसेज ...* *तुमने मना जो किया है* *कैसे तुम्हें याद दिलाऊँ* *की तुम्हारी बहुत याद आती है* *सबसे सुना है की ... 

किताब - जागते हुए शब्दों के बीच सोते हुए अर्थों में बंद एक किताब अपने में समेटे कई- कई इतिहासों की पुनरावृत्ति भूगोल की नयी परिभाषाएं जीत से हार और हार से जीत का... ऐ ! आलोचना के बाबुओं ... - क्या कहूँ ? इस मुख से कहते हुए बड़ी ही लज्जा सी आती है कि कैसे आज की कविता अपना चीरहरण खुद ही करवाती है और अपनी सफाई देते हुए बात-बात में गीता या सीता को ..जलाओ मशाल कि... - *जलाओ मशाल कि रौशनी हो,* *अभिशप्त प्रलेखों को फूंकने का* *हौसला रखो ....।* * **जलती मशाल में तेल कितना है ,* *कम पड़े तो देह की चर्बी जलाने का,* *फैसला रखो... 

 माँ तो माँ है ... मैंने देखा तुम मुस्कुरा रही हो देख रही हो हर वो रस्म जो तुम्हारी सांसों के जाने के साथ ही शुरू हो गयी थी समझ तो तुम भी गयीं थीं अब ज्यादा देर तुम्हें इस घर में नहीं टिका सकेंगे हम अंतिम संस्कार के बहाने बरसों से जुड़ा ये नाता कुछ पल से ज्यादा नहीं सहा जाएगा कुछ देर तक दूर से आने वालों का इंतज़ार अंतिम दर्शन फिर चार कन्धों की सवारी... नासूर टीस सी उठती है जब रगों में दौड़ता है धुआँ जो तुम्हारी सिगरेट से निकलता हुआ मुझे हर पल, हर घडी अहसास दिलाता है कि तुम्हारा शौक हमें दूर कर देगा ......हेमंत ऋतु पर कुछ हाइकू शीतल जल रविकर किरण हिम पिघल आग जलाई कहर निरंतर ओढ़ रजाई चौपट धंधे हैं चिंतित किसान छुपे परिंदे गर्म तसला मुरझाई फसल सूर्य निकला घना कुहासा खिलखिले सुमन शीतल भाषा पौष से माघ सुरसुरी पवन पानी सी आग शुरू गुलाबी मानव भयभीत शिशिर बाकी ......

विशाल भारद्वाज का संगीतमय फि‍ल्‍मी सफर - विशाल भारद्वाज का संगीतमय फि‍ल्मी सफर...सुनील चि‍पड़े के साथ...... प्रस्तुति- सुनील चिपड़े ..

कार्टून कुछ बोलता है- राज को राज रहने दो !

 

आज के लिए बस इतना ही इजाज़त दीजिये नमस्कार.........


शनिवार, 8 दिसंबर 2012

वह कसमों सा आया रसमों सा चला गया .. ब्‍लॉग4वातर्ा .. संगीता पुरी



आप सबों को संगीता पुरी का नमस्‍कार , ऐतिहासिक ईडेन गार्डस की जिस पिच पर इंग्लैंड ने पहली पारी में 523 रनों का विशाल स्कोर खड़ा किया उसी पिच पर सचिन तेंदुलकर [5] समेत भारत के सभी सूरमा बल्लेबाज एक-एक करके अपना विकेट गंवाते चले गए पर भला हो आर अश्विन [नाबाद 83] का जिन्होंने संघर्षपूर्ण बल्लेबाजी कर अपनी टीम को पारी की हार से बचा लिया! 

पिछले हफ़्ते इक रात गुरु वृहस्पति यानि Jupiter मिलने आए थे हम सबसे ! - ज़मीनी दुनिया की तो यात्राएँ हम करते ही रहते हैं। पर इस दुनिया के ऊपर भी एक रहस्यमय दुनिया है इस आकाशगंगा की, जिसे समझने और देखने के लिए खगोलशास्त्री और बड़...गणित छोड़, सब विषयों में फेल - इस चिट्ठी में रामनुजन के द्वारा बिताये स्कूल के जीवन की चर्चा है। गॉवर्मेन्ट कॉलेज कुम्बाकोनम जहां रामानुजन फेल हो गये - चित्र यहां से रामानुजन ने प्राइमरी ...- *न जाने क्या पाने को जी चाहता है * तेरी रहमत का है ये भी एक दौर मालिक कि सब कुछ भुलाने को जी चाहता है तूनें तो बख्सी दुनिया की सारी नियामतें मुझे पर तुझ...मौन को सुरक्षित कर लिया - *छीनना तुमने अपना अधिकार बना लिया* *पर यथासंभव मैंने अपने मौन को सुरक्षित कर लिया * *यह मौन - मेरा अस्तित्व मेरा व्यक्तित्व है * *रेगिस्तान में यही मौन पा...


मुखौटे ... - लो, आज उन्ने.... उनके समर्थन में सीना ठोक दिया है अब,... जनता,... पार्टियाँ ... जिसकी जो मर्जी वो करे ? ... अब तो बच्चों-बच्चों की जुबां पे सरेआम चर्...जानते हो ! प्रेम में कुछ शेष नहीं रहता ………… - तुमने स्वीकारा अपना प्रेम और छोड दिया एक प्रश्न मेरी तरफ़ …मेरी स्वीकार्यता मेरे जवाब का इंतज़ार तुम्हारे लिये शेष रहा …………मगर शेष रहा …………क्या? प्रेम ? उसक...ये सर्दियां और तुम्हारे प्यार की मखमली सी चादर... - आज मौसम ने फिर करवट ली है, ज़रा सी बारिश होते ही हवाओं में ठण्ड कैसे घुल-मिल जाती है न, ठीक वैसे ही जैसे तुम मेरी ज़िन्दगी के द्रव्य में घुल-मिल गयी हो......खुशनुमा मौसम... - *फ़िर सुहाना मौसम आया है हर ओर बहुत खूबसूरत नजारा है खुश्बू से मैं जान पाई हूँ इस मौसम को महसूस पाई हूँ तुम्हारा साथ था तो खिड़की के बाहर दिख जाता था या सार...


मन है, तनिक ठहर लूँ - मन फिर है, जीवन के संग, कुछ गुपचुप बातें कर लूँ । बैठ मिटाऊँ क्लेश, रहा जो शेष, सहजता भर लूँ ।। देखो तो दिनभर, दिनकर संग दौड़ रही, यश प्रचण्ड बन, छा जा...BIKANER- Desnok Karni Mata's Rats Temple बीकानेर- दशनोक करणी माता का चूहे वाला मन्दिर - रामदेवरा बाबा के यहाँ से जब चले तो शाम का समय हो रहा था। उस समय बीकानेर के लिये कैसी भी मतलब सवारी गाड़ी या तेजगति वाली एक्सप्रेस गाडी भी नहीं मिलने वाल...Saavdhaan , up bihaar ban raha hai - जब भी गर्मियां आती हैं तो मेरी धर्म पत्नी को शरीर पे एक अजीब सा इन्फेक्शन हो जाता है . बड़ी परेशानी होती है .एक मित्र है डॉक्टर .उनस...धार बनी नदिया की ....... - नदी की यात्रा ....समुद्र की ओर .....आत्मा की यात्रा, परमात्मा की ओर ....इसी भाव से पढ़िये ....धार बनी नदिया की ...... छवि मन भावे ... नयन समावे .. सूरति...


लिखने को बेकरार - *-* लिखने को बेकरार लेखनी रुक न पाएगी पुरवैया के झोंकों सी बढती जाएगी सर्द हवा के झोंकों का अहसास कराएगी जब कभी गर्मीं होगी प्रभाव तो होगा मौसम क...वह कसमों सा आया और रस्मों सा चला गया - "वह कसमों सा आया और रस्मों सा चला गया , मैं पेड़ों सी खडी रही वह हवा सा गुज़र गया हिला गया बदन मेरा खिला गया वह मन मेरा वह गुज़र गया तो पता चला मुझे गुजारि...किताब - जागते हुए शब्दों के बीच सोते हुए अर्थों में बंद एक किताब अपने में समेटे कई- कई इतिहासों की पुनरावृत्ति भूगोल की नयी परिभाषाएं जीत से हार और हार से जीत का...ऐ ! आलोचना के बाबुओं ... -क्या कहूँ ? इस मुख से कहते हुए बड़ी ही लज्जा सी आती है कि कैसे आज की कविता अपना चीरहरण खुद ही करवाती है और अपनी सफाई देते हुए बात-बात में गीता या सीता को बड...


जलाओ मशाल कि...- *जलाओ मशाल कि रौशनी हो,* *अभिशप्त प्रलेखों को फूंकने का* *हौसला रखो ....।* * **जलती मशाल में तेल कितना है ,* *कम पड़े तो देह की चर्बी जलाने का,* *फैसला रखो...नींद ने टुकड़ों-टुकड़ों मे आना शुरू कर दिया - नींद ने टुकड़ों-टुकड़ों मे आना शुरू कर दिया जब से आपने ख्वाबो मे कदम धर दिया अब हालात संभाले नहीं संभलते हमने आपका नाम छुपाना शुरू कर दिया हाल-ए-दिल बयां ...खुशनुमा मौसम... -*फ़िर सुहाना मौसम आया है हर ओर बहुत खूबसूरत नजारा है खुश्बू से मैं जान पाई हूँ इस मौसम को महसूस पाई हूँ तुम्हारा साथ था तो खिड़की के बाहर दिख जाता था या सार...सारे बैंक हमारे - एनईऍफ़टी द्वारा बैंकों से धन का हस्तांतरण पहले ही बहुत आसान हो चुका है अब इस कड़ी में सरकार और रिज़र्व बैंक ने मिलकर पूरे देश में किसी भी श...

शुक्रवार, 7 दिसंबर 2012

ब्‍लॉगरी का बाइप्रोडक्‍ट .. उम्‍मीद अभी बाकी है दोस्‍त .. ब्‍लॉग4वार्ता .. संगीता पुरी

आप सभी पाठकों को संगीता पुरी का नमस्‍कार , जापान में एक बार फिर जोर के भूकंप के बाद सूनामी आ गया है। देश के पूर्वी इलाकों में महसूस किए गए भूकंप के झटकों की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 7.3 बताई जा रही है। हालांकि भूकंप और सूनामी पिछली बार के मुकाबले कमजोर बताए जा रहे हैं और इनसे बड़े पैमाने पर नकुसान की खबरें नहीं हैं, फिर भी पूरे देश में घबराहट फैली हुई है और कई इलाकों में लोगों को ऊंचे स्थानों पर जाने को कहा जा चुका है।जापान के सरकारी टीवी पर भूकंप के तुरंत बाद सूनामी का अलर्ट जारी कर दिया गया और लोगों को तटीय इलाकों को खाली करने की सलाह दी गई। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक भूकंप के झटके राजधानी टोक्यो में भी महसूस किए गए। टेलिविजन चैनलों पर भूकंप से इमारतों को हिलते हुए दिखाया गया है।अमेरिकी जियोलॉजिकल सर्वे के मुताबिक, भूकंप का केंद्र कैमाशी से 24 किलोमीटर दक्षिण-पू्र्व समुद्र में 36 किमी की गहराई में था। मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया है कि देश के सारे परमाणु रिऐक्टर सुरक्षित हैं। इस खबर के बाद आप सबको लिए चलती हूं आज की ब्‍लॉग4वार्ता पर ....

- *हे माँ ! दे मुझे वरदान ..* * * *घना जो अन्धकार हो तो हो रहे, हो रहे * *तिमिराच्छादित हो निशा भले हम वे सहें * *चंद्रमा अमा का लुप्त हो आकाश से तो क्या *...ब्‍लागरी का बाइ-प्रोडक्‍ट - आप सभी वेब परिचित, प्रत्‍यक्ष मुलाकात तक अन्‍तरिक्षीय देवों की तरह होते हैं, इसलिए वहां ईमानदार बना रह सकना आसानी से संभव हो जाता है, ज्‍यों कन्‍फेशन बाक्‍... कब होई हमरे रिमही केर बिहान - चिन्तामणि मिश्र रीवा और शहडोल राजस्व संभाग में रिमही बोली का इस्तेमाल हिन्दी से अधिक है। शहरों की तुलना में इस क्षेत्र में गांवों से लेकर कस्बों,बाजारों मे...उम्मीद अभी बाकि है दोस्त ! -*हरेश कुमार* * * * * हमारे देश की संस्कृति विविधताओं से भरी-परी है और हमारा समाज इन विविधताओं के बीच उस बगीचे की तरह है जिसकी बगियां में भांति-भांति के फू...

प्रशंसनीय और अनुकरणीय सार्वजनिक नागरिक-आचरण - अपने चार दिवसीय पुणे प्रवास में जिस बात ने मुझे सर्वाधिक आकृष्ट और प्रभावित (और खुद पर लज्जित भी) किया, वह थी - लोगों का, नागरिक-बोध से ओतप्रोत सार्वजनिक ...आह्बान ... - चलो उठो उठाओं फावड़े खोदो कब्र कुछ जिन्दा लाशों को दफनाना हैं । धरती का बोझ कुछ कम करना हैं ।फेसबुक को पीछे छोड़ने की होड़ में गूगल - *-: वाईआरएन सर्विस :-* भले ही गुगल का ओर्कुट उत्‍पाद फेसबुक के आगे दम नहीं भर सका, लेकिन ओर्कुट से सीखकर लोग फेसबुक तक पहुंचे। मगर अब गूगल अपने निराश हो च...अकेलापन का दर्द - मैं अपने को बार-बार फैलाता, सिकोड़ता, कभी अवांछित स्थितियों से जोड़ता कभी सारे बंधन तोड़ता अकेलेपन, तटस्थ भावों के सैलाब में तैरता सुनिश्चित तट तक पहुंच नहीं...

आनुली आमा - आज से पचास/पछ्पन वर्ष पहले जब पण्डित हरीशचंद्र लोहनी का ब्याह रीति रिवाजों के अनुसार आनंदी उर्फ आनुली देवी के साथ हुआ और वे बारात के साथ दुल्हन की डोली ले...नज़्म से प्रेम तक..... -एक नज़्म पढ़ी मेरी हँसी पर उसने.... मैं हँस पड़ी वो बोला- लो फिर एक नज़्म हुई.... मुझे छेड़ कर उसने एक शेर कहा मैं गज़ल हुई.... दो लफ्ज़ रखे अधरों पर उसन...याद का सिनेमा - उसे इस सीज़न का स्वेटर पहने एक हफ़्ता हो चुका था.आज सुबह जब उसकी नज़र स्वेटर की सफ़ेद पट्टियों पर पड़ी जो जगह जगह से ज़ंग खाइ लगने लगीं थीं तो याद आया कि बाज़ार...क्‍या करें क्‍या न करें 8 और 9 दिसंबर 2012 को (लग्‍न राशिफल मेष लग्नवालों के लिए 8 और 9 दिसंबर 2012 को भाई , बहन , बंधु बांधवों का महत्व बढेगा , उनके कार्यक्रमों के साथ तालमेल बैठाने की आवश्यकता पड सकती है। प्रभावशाली लोगों से संबंध की मजबूती बनेगी। कुछ झंझटों को सुलझाने में अपने प्रभाव का पूरा उपयोग करना होगा।


गोली मार दो, क्या रखा है? - दोपहर होने तक फरेब से भरे इश्क़ की दास्तां के पहले तीस पन्ने पढे थे। एक गहरी टिंग की आवाज़ आई। फोन की रिंग ऐसे ही बजती है। किसी निर्विकार, निर्लिप्त औ...पुणे क सफ़र -- भाग 2 - पुणे क सफ़र -- भाग 2 *( आगा खां पैलेस )* *आगा खाँ पैलेस * *पुणे का सफ़र भाग 1 ...यहाँ पढ़िए * दगडू शेठ के गणपति देखकर हम चल दिए *"आगा खाँ पैलेस "...शक और नफरत को दिल और ज़हन से निकाल देदिल इस हद तक शक और नफरत से भर गया आधी बात सुन कर ही मतलब निकालने लगा जिसका वजूद ही नहीं उसकी मूरत बनाने लगा तुम किसी से हंस कर बात कर रहे थे बार बार मेरी तरफ देख रहे थे मैंने समझा तुम मेरी ही बात कर रहे हो आग बबूला हो कर गंदे लफ़्ज़ों से तुम्हारा इस्तकबाल किया बाद में पता चला तुम किसी और बात पर हंस रहे थे

सत्ता पर सेठों (व्यापारियों) का प्रभाव तब और अबपिछले दिनों आम आदमी पार्टी के अरविन्द केजरीवाल ने एक प्रेस कांफ्रेंस में रिलाइंस द्वारा सरकार से मिलीभगत कर देश के संसाधनों को जिस तरह से लूटा उसका खुलासा किया साथ ही मुकेश अम्बानी की यह कहते हुए ऑडियो टेप भी सुनाई कि सत्तधारी दल तो उसकी जेब की दुकान है| तब से आम आदमी हैरान परेशान कि कैसे एक औधोगिक घराना सरकार को अपनी मुट्ठी में रखता है| माई गे माई..एफडीआई..आई रे आई, एफडीआई... माई गे माई, एफडीआई.. दादा रे दादा, एफडीआई.. हथिया पे आई.. साइकिल पे आई.. लल्लू के, कल्लू के दुर्दिन मिटाई.. आई रे आई, एफडीआई.. बटुआ में आई, जै काली माई व्हाइट हाउस वाली काली कमाई.. आई रे आई, एफडीआई... अमरीकी राशन जियो सुशासन खेती लंगोटी में बिक्री में आदमियों की सम्भालपति को अकेले छोड़ बिटिया के पास जाना है उससे पहले कामवाली को उनके योग्य खाना बनाना सिखाना है लो सोडिअम, लो फैट, लो ग्लाइसिमिक इन्डैक्स, लो कार्बोहाइड्रेट क्या है यह बताना, समझाना है। वह चश्मा पहनना पसन्द नहीं करती और लाना भूल जाती है सो उसे कहा कि कुछ साबुत दालों में कंकड़ बहुत होते हैं 

आज के लिए बस इतना ही .. मिलते हैं एक ब्रेक के बाद ..

गुरुवार, 6 दिसंबर 2012

2012 . 2013 में विभिन्‍न लग्‍नवालों के विवाह के योग ….ब्‍लॉग4वार्ता .. संगीता पुरी

आप सबों को संगीता पुरी का नमस्‍कार , प्राकृतिक आपदाएं हमारा पीडा नहीं छोडती , फिलीपींस में इस साल के सबसे जबरदस्त तूफान में करीब दो लाख लोग बेघर हो गए और 475 लोगों के मारे जाने की पुष्टि हुई है। इस बीच सरकार ने अंतरराष्ट्रीय मदद की अपील की है। तूफान ‘बोफा’ मंगलवार को मिंडानाओ द्वीप के पास आया। रास्ते के शहरों को पूरी तरह से झकझोरने वाला यह तूफान साथ में तेज बारिश भी लाया जिससे बाढ़ और भूस्खलन की स्थिति पैदा हुई। एरिनीया कैंटीला और उनका छह सदस्यीय परिवार न्यू बतान के पास करीब दो दिन तक नंगे पैर भोजन और आश्रय की तलाश में घूमता रहा क्योंकि तूफान के कारण उनका घर और फार्म तबाह हो गए। इस समाचार के बाद चलते हैं आज की वार्ता पर ....

फलों में पोषक तत्व : अनार - फल : अनार(इनमें केवल वे पोषक तत्व सूचीबद्ध है जो उल्लेखनीय मात्रा में उपस्थित होते हैं।) *एक कप परिमाण *अनार *में 4.21 grams प्रोटीन, 112 केलरीज, और 8...शून्य-बटे-सन्नाटा ... - काश ! होता .......... हम में भी, छपने-छपाने का हुनर तो शायद, हमारे करतबों पे भी तालियाँ बज रही होतीं ? ... अब 'खुदा' ही जाने, क्यूँ खफा हैं वो बस...इक महल हो सपनों का --- - हजारों ख्वाहिशें ऐसी कि हर ख्वाहिश पर दम निकले बहुत निकले मेरे अरमान फिर भी कम निकले। जब तक सूरज चाँद रहेगा, तब तक मनुष्य के मन में अरमान रहेंगे। जहां भी जाएं वहाँ की व्यवस्था को पूरी तौर से अंगीकार करें। - साल में दूसरी बार नार्वे में एक और भारतीय दंपति अपनी ही संतान को लेकर वहां की सरकार का कोपभाजन बन गयी है। बच्चों का ठीक से पालन-पोषण नहीं करने के आरोप मे...


ईश्वर ने तो जवाब गढ़े - पर खुद प्रश्नों के सैलाब में फंस गए - * क्रम-दर-क्रम आखिकार हम प्रवेश कर ही गए परिकल्पना उत्सव के पांचवे दिन के आखिरी पड़ाव में। मध्यांतर से पूर्व दुनिया समाप्त होने की संभावनाओं की जब बात ह...गर बच सके तो "कुछ" बचा लो - मिट रही है इंसानियत बढ़ रही है हैवानियत इंसानियत के नीलाम होने से पहले गर बच सके तो "कुछ" बचा लो बिक चुका है जो जमीर लालच हुआ गीत/ सत्ता का गुणगान नहीं जो लिख पाया.... - *।। गीत।। --------------- सत्ता का गुणगान नहीं जो लिख पाया। क्या करता कि कभी नहीं वो बिक पाया। । -------------- बाजारों में लोग बड़े आतुर दिखते, जिसको देखो ...- *इक ख़ूबसूरत याद का........ यूँ बीच राह में मिलना, बारिश की इक शाम जैसे..... सूरजमुखी का खिलना. वो कालेज वाली चौक पर.. इक दुकान थी गपशप की, गुजरना तेरी गलि...


जिन्हें नाज़ है हिंद पर वो यहां हैं...खुशदीप- दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है भारत... लोकतंत्र का सबसे बड़ा मंदिर है संसद... लेकिन देश की शान इसी संसद में एफडीआई जैसे गंभीर मुद्दे पर बहस के दौरान ये...सुन सनकर तंग आए ''देश का अगला...........?" - कांग्रेस, हम ने कल लोक सभा में एफडीआई बिल पारित करवा दिया। अब हम गुजरात में भी अपनी जीत का परचम लहराएंगे। मीडिया कर्मी ने बीच में बात काटते हुए पूछा, अपनी बीबी के नाम से दे दे सेठ...दो दिन से कुछ मुर्गा...अंगूरी नही चखी है सेठ... - यह सर्व विदित है कि ताऊ ने बहुत सारे काम धंधे किये पर किसी भी काम में सफ़लता उससे इतनी ही दूरी रखती थी जितनी रामप्यारे के सर से सींग. ताऊ ने चोरी, डकैती..." खुसरे, गाली दे सकते हैं- निभा नहीं सकते " !!!???? - * प्यारे मित्रो,बहनों और भाइयो,नमस्कार !! * * इस संबोधन को हम आगे बढ़ाना चाहें , तो पुरषों से सम्बंधित कई रिश्ते लिखे जा सकते हैं, या फिर महिलाओं से सम्ब...


बचायें किसी की जान, आइये करे रक्तदान - ।।जीते-जी रक्तदान।। ।।जाते-जाते नेत्रदान।। ‘‘एक महत्त्वपूर्ण अपील - ब्लड हेल्पलाइन’’ आदरणीय स्नेहीजन, सादर वन्दे म...Media multitasking can trigger anxiety -Media multitasking can trigger anxiety एक नवीन अध्ययन के अनुसार एक ही समय पर जन संचार माध्यमों की एक से ज्यादा किस्में इस्तेमाल करने वालों में मसलन समर शेष है -रामधारी सिंह दिनकर ढीली करो धनुष की डोरी, तरकस का कस खोलो किसने कहा, युद्ध की बेला गई, शान्ति से बोलो? किसने कहा, और मत बेधो हृदय वह्नि के शर से भरो भुवन...2012 . 2013 में विभिन्‍न लग्‍नवालों के विवाह के योग …..एक पुराने लेख में मैने बताया है कि ज्योतिष शास्त्र में ऐसा कोई भी सिद्धांत विकसित नहीं किया जा सकता है ,जिससे विवाह उम्र की निश्चित जानकारी प्राप्त हो सके । इसका कारण यह है कि विवाह उम्र के निर्धारण में परिवार ,समाज ,युग ,वातावरण और परिस्थितियों की भूमिका ग्रह-नक्षत्र से अधिक महत्वपूर्ण होती है। प्राचीनकाल में भी वही 12 राशियां होती थीं ,वही नवग्रह हुआ करते थें, दशाकाल का गणित वही था ,उसी के अनुसार जन्मपत्र बनते थे । उस समय विवाह की उम्र 5 वर्ष से भी कम होती थी , फिर क्रमश: बढ़ती हुई 10.15.20.25.से 30 वर्ष तक हो गयी है । अभी भी अनेक जन-जातियों में बाल-विवाह की प्रथा है। क्या उस समाज में विशेष राशियों और नक्षत्रों के आधार पर जन्मपत्र बनते हैं ?

मिलते हैं एक ब्रेक के बाद ....

पुरानी सी पोस्‍ट का संगीतमय रूपांतरण रूमाल की कहानी ..ब्‍लॉग4वार्ता .. संगीता पुरी


आप सबों को संगीता पुरी का नमस्‍कार , मेरे ब्‍लॉग में पढिए क्‍या करें क्‍या न करें 5 , 6 और 7 दिसंबर 2012 को ?? ब्‍लॉग जगत का मशहूर परिकल्पना ब्लागोत्सव (तृतीय) चल रहा है ,आज भी वर्ष के कुछ महत्‍वपूर्ण पोस्‍ट को शामिल किया गया है , जिसमें आज डॉ मीनाक्षी स्‍वामी जी की यात्रा और इनकी कहानी -टिक..टिक..टिक.. , सतबीर वर्मा जी की नारी और आधुनिकता , प्रताप सहगल जी से लालित्‍य ललित जी की बातचीत और भी बहुत कुछ । मित्रों यहां रांची में नेशनल बुक फेयर चल रहा है. कल वहां कवयित्री सम्मेलन का आयोजन किया गया जिसमें मैने भी कविता पाठ किया. प्रस्तुत है हिंदी दैनिक प्रभात खबर, दैनिक भास्कर और दैनिक जागरण में छपी खबरें.

राबर्ट्सगंज से शक्तिनगर मुख्यमार्ग पर मात्र 6 किमी पर एक विशालकाय दो टुकड़ो में खंडित पत्थर जिस पर वीर लोरिक पत्थर लिखा है यात्रियों -पर्यटकों का ध्यान अपनी ओर सहज ही आकर्षित करता है। मुझे भी इसके बारे में जिज्ञासा हुयी . जो कुछ जानकारी मिली आपसे अति संक्षेप में साझा कर रहा हूँ क्योकि इस पत्थर से जुड़ा आख्यान वस्तुतः हजारो पक्तियों की गाथा लोरिकी है जिसे यहाँ के लोक साहित्यकार डॉ अर्जुन दास केसरी ने अपनी पुरस्कृत कृति लोरिकायन में संग्रहीत किया है . गाँव से बहुत दूर एक पुराने किले में एक दुष्ट जादूगरनी रहती थी जो कि छोटे बच्चों को पकड़ कर खा जाती थी...लेकिन आप जानते हो कि ये कहानी झूठी है कि गाँव के छोर पर एक गरीब की झोंपड़ी थी जिसमें एक सुनहले बालों वाली राजकुमारी रहती थी...उसके बाल खुलते थे तो सूरज की किरनें धान के खेतों पर गिरतीं थीं और गाँव वालों की खेती निर्बाध रूप से चलती थी.

सन 1970 में मैं पिताजी के साथ पहली बार दिल्ली गया था. तब मैं 18 वर्ष का था और दिल्ली-दर्शन के उत्साह से भरा हुआ था. हम चाँदनी चौक के कटरानील में प्रसिद्ध संस्कृतज्ञ पं. रामधन शर्माजी के यहाँ ठहरे थे. वह पिताजी के परम मित्र और बड़े भाई-जैसे थे. पिताजी प्रतिदिन अपने मित्रों से मिलने चले जाते और मैं दिल्ली-दर्शन के लिए निकल पड़ता; लेकिन जिस दिन पिताजी बच्चनजी से मिलने जाने लगे, मैं भी उनके साथ गया था. 13 विलिंगटन क्रिसेंट संख्यक एक बंगले में उनका निवास था. जीवन एक किताब अधूरी सी ..........आने वाला हर दिन एक कोरा पन्ना हर दिन लिखती हूँ भावों की इबारतें कभी भरती हूँ आशाओं की सरिता प्रवाहों के बीच पड़े बड़े-बड़े पत्थर उनपर जमी वक़्त की काई साथ चलते दो किनारे पेड़ों की घनी कतारें डालियों पर गूंजता पंछियों का कलरव

मेरी यह तीर्थ यात्रा ऐसी रही है जिसमें मैं न तो किसी मन्दिर में गया और न ही किसी देव प्रतिमा के दर्शन किए। भारत सरकार के पुरातत्व विभाग में यह एक ‘संरक्षित स्मारक’ है (जिसमें प्रवेश के लिए पाँच रुपयों का टिकिट लेना पड़ता है) और पुणे नगर परिषद् की सूची में एक ऐसा ‘दर्शनीय स्थान’ जिसे ‘पुणे दर्शन’ के बस मार्ग में शामिल किया गया है। रुमाल वर्तमान में हमारी जरुरत का सामान बन गया है। ऑफ़िस या काम पर जाने से पहले आदमी हो या औरत रुमाल साथ रखना नहीं भूलते। बच्चा भी जब स्कूल जाता है तो उसकी वर्दी पर माँ पिन से रुमाल लगाना नहीं भूलती। रुमाल का कब क्यों और कैसे अविष्कार हुआ यह बता पाना तो कठिन है। पर सुना है कि फ़्रांस के राजा की बेटी से विवाह करने वाले इंग्लैंड के राजा रिचर्ड द्वितीय के मन में प्रथमत: रुमाल बनाने का विचार आया। सुनिए सीजी रेडियो में ....

आज के लिए बस इतना ही .. मिलते हैं एक ब्रेक के बाद .....

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