गुरुवार, 8 नवंबर 2012

गैस बचाएं दिवाली मनाएं... ब्लॉग 4 वार्ता... संध्या शर्मा

संध्या शर्मा का नमस्कार.... कमरतोड़ महंगाई के बीच दिवाली का त्यौहार भी दरवाजे की कुण्डी खटखटा रहा है, रंगाई-पुताई से लेकर कपड़े-लत्ते की भेंट चढ़ रही है सारी तनख्वाह और बोनस। दीवाली का त्यौहार अपने साथ रौनक लेकर आता है। इसी बहाने बरसात के बाद घर की सफाई के साथ रंग रोगन भी हो जाता है। दिवाली को कुछ ही दिन रह गए हैं, बाजारों में रौनक नजर आने लगी है। कितनी भी महंगाई हो जाए, भले ही दिवाला निकल जाए पर दिवाली तो मनानी पड़ती है। अबकि दिवाली में गैस सिलेंडर की मारा-मारी चल रही है। गैस बचाएं और दिवाली मनाएं ........  प्रस्तुत हैं आज की वार्ता में मेरी पसंद के कुछ ब्लॉग लिंक्स ............
 


तेरे बाद...... - तेरे बाद बेतरतीब सी ज़िन्दगी को समेटा पहले... अपने बिखरे वजूद को करीने से लगाया .. अब इकट्ठा कर रही हूँ तेरी यादों की रद्दी, गराज में पड़े एक पुराने सीले ...तो ये है - - सुबह-सुबह आँख मलते हुए आप सैर को जाएँ वहाँ दौड़ती-भागती , चक्कर लगाती चेहरे पर ताज़ी लालिमा उगाये कोई कविता दिख जाए तो बेशक ! हैरानी की कोई बात नहीं होगी ... दोस्ती को मोहोब्बत बताते रहे... - हर आने जाने वाले को हमसफ़र बताते रहे, दोस्ती को हम मोहोब्बत बताते रहे, घोड़ों की दौड में हम बस ख्याल ही दौडाते रहे, सब खा गए पकवान सारे, हम ख्याली पुलाव पकात...


सोच नहीं पाती - भाव आतुर मुखर होने को दीखता वह सामने फिर भी शब्द नहीं मिलते अभिव्यक्ति को | कोइ बाधा या दीवार नहीं फिर भी हूँ उन्मना कहीं कोई अदृश्य रोकता कुछ कहने क...

https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEh8FUZ1vBtXozkXgXWqo-pIHV0GOR5X1cZr8VyISdFWHnN4eu3O7tSQdbVHc1gexGYgsRiqpsjshwbCMz_xhozLw3TmCOkXu3AUSInhpnhmSbAZcBiqeidgy39ej8KZ58auPiONk3lNgSZ7/s1600/MEGHDOOT.jpg
मेरे कालिदास... - हर बार.......... जब भी कुछ लिखने बैठती हूँ बहुत कोशिश करती हूँ तुमको ना लिखूं फिर भी आ ही जाते हो तुम कहीं ना कहीं से तुम्हारे आते ही छाने लगते है भाव... 


पंचकोसी ------ राजिम का त्रिवेणी संगम छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर नगर से प्राचीन नगर एवं जमीदारी फिंगेश्वर 61 किलोमीटर पर 20058' 7.50"N 82002'48.56" E पर स्थित है। इस नगर ...


कहाँ छिपे ? - वही समय है वही मौसम है वही है तन्हाई छोड़ के मुझको यमुना के तीरे ........ कहाँ छिपे कन्हाई ? विरहाग्नि से दग्ध .... ह्रदय करे चित्कार यमुना तट पर ..... 


लादेन ने बनाया ओबामा को राष्ट्रपति ! - *मैं *अमेरिका की नीतियों से इत्तेफाक नहीं रखता हूं, खासतौर पर उसकी विदेश और आर्थिक नीतियों का तो मैं सख्त विरोधी हूं। इसके बाद भी मैं अमेरिकियों की देश के...  


 
स्नेह लिखना..... - *** ** ** **हृदय के आँगन, नुपुर खनकते* *उनके स्वर का स्नेह लिखना-* *भरे नेत्र , आतुर झरने को* *स्मृतियों के नेह लिखना-* * **ह... 


भादवँ जातरा - क्षमा करें। प्रमाद वश यह पोस्ट अगस्त में नहीं जा सका था। बहरहाल, देर आयद दुरुस्त आयद की तर्ज पर नवम्बर में सही, लेकिन पोस्ट को तो जाना ही है। बुधवार, 15 अ...


बंगलोर, मेट्रो और साइकिल - अभी कुछ दिन पहले एक समाचार पढ़ा कि बंगलोर मेट्रो अपने प्रमुख स्टेशनों पर साइकिलें रखेगी। इन साइकिलों का उपयोग मेट्रो में यात्रा करने वाले लोग अपने स्थान ... 


हाउस ऑफ़ लॉर्ड्स की एक शाम और निदा फ़ाज़ली ... - कभी किसी को मुकम्मल जहाँ नहीं मिलता कहीं ज़मीं तो कहीं आसमां नहीं मिलता . बहुत छोटी थी मैं जब यह ग़ज़ल सुनी थी और शायद पहली यही ग़ज़ल ऐसी थी जो पसंद ... 


मौन रतनपुर - इतिहास का रास्ता भूल-भुलैया का होता है और किसी ऐसे स्थल से संबंधित इतिहास, जो सुदीर्घ अवधि तक राजसत्ता का मुख्‍य केन्द्र, प्रशासनिक मुख्‍यालय के साथ-साथ धा... 


 

कुछ कम कम सा .... - कभी कभी पूरी बरसात से , पड़ने वाली कम कम सी बूंदे इस तन और मन को अधिक शांत करती है वैसे ही ... कम बोलने वाले शब्द कम बाते ,और छोटे वाक्य जो किताब के पन्..तुम मेरे सीने की साँस हो - तुम मेरे सीने की साँस हो तुम मेरा सच्चा अहसास हो तुम ही जीवन का राग हो तुम ही मेरी हर बात हो तुम मेरे सीने की साँस हो तुम दिल में हो मेरे रवां -रवां तुम ह... .मौत के बाद है असल जीवन - मेरे घर में मेरा पसीना है लगे हर ईंट में नगीना है भले पानी टपक रहा छत से जिन्दगी लड़के सुमन जीना है मौत से प्यार करना सीख सुमन और जीवन से लड़ना सीख सुमन मौ... 
 

 अब इजाज़त दीजिये नमस्कार.............

सोमवार, 5 नवंबर 2012

पेसल वार्ता में कुँवर रविन्द्र .................... ललित शर्मा

ललित शर्मा का नमस्कार,  कवि, चित्रकार, लेखक के विचारों की उड़ान अनंन्त होती है। कला कर्म सहज नहीं होता, उसके लिए मस्तिष्क की बत्ती हमेशा जलाये रखनी पड़ती है, चाहे बिजली का बिल कितना ही आ जाये। पेट की रोटी काट कर, कष्ट सहकर भी कलाकार अपनी कला को जीवित रखता है। अभिव्यक्ति का माध्यम चाहे कुछ भी हो, चिन्तनशील मानव हर हाल में अभिव्यक्त करता है। कुछ जन्मजात कलाकार होते हैं, उनके द्वारा खींची गयी आड़ी-टेढ़ी रेखाएं भी बहुत कुछ कह जाती हैं। उनके चित्रों में समुद्र सी गहराई है तो नदियों सा अल्हडपन भी है। गाँव की माटी की सोंधी खुशबू है तो शहर की धुप भी। उनके रेखांकन अद्भुत होते हैं, लकीरें ही बहुत कुछ कह जाती हैं, ऐसे कलम एवं कूंची के धनी कुँवर रविन्द्र हैं।

कुँवर रविन्द्र ब्लॉग जगत में 2009 से है, इनकी कृतियाँ भारत की पत्र-पत्रिकाओं "साक्षात्कार, अक्षरा, वागर्थ, मधुमती, सारिका, धर्मयुग, कहानीकार, नई कहानियां, पहल, गवाह, कथानक,कथाबिम्ब, कथादेश, काव्या, कारखाना, शिराजा, हंस, सारिका टाईम्स, नवभारत टाईम्स, संडे मेल, दिनमान, आजकल, नवनीत, खनन भारती, आकलन, वर्तमान साहित्य, समकालीन जनमत, समकालीन जनगाथा, आकंठ, संबोधन, ओर, वसुंधरा, मध्यांतर, शुरूआत, असुविधा, कल के लिए,गुंजन आकल्प, अर्चना, भाषासेतु, पुरुष, कला प्रयोजन,प्रेरणा,साहित्य अमृत, उत्तर प्रदेश, सदभावना दर्पण, कृति ओर,संकेत, परिकथा जैसी साहित्यिक पत्रिकाओ के साथ देश की अनेको व्यावसायिक -अव्यावसायिक पत्र -पत्रिकाओ, पुस्तकों के मुख पृष्ठों पर अबतक लगभग १४.००० ( चौदह हजार ) रेखांकन/चित्र के साथ कविताये प्रकाशित हो चुकी हैं।

इनके चित्रों की प्रदर्शनी  रायपुर छत्तीसगढ़ - १९७९, ब्योहारी , मध्यप्रदेश - १९८३, शहडोल, मध्यप्रदेश - १९८३, विधानसभा सभागार, भोपाल - १९८५, मध्यप्रदेश कला परिषद्, भोपाल - १९८६, दंगा और दंगे के बाद, हिंदी भवन, भोपाल - १९९३, विवेकानंद सभागार, बेतुल - १९९५ एवं 28 अक्तूबर 2012 को महंत घासीदास संग्रहालय की आर्ट गैलरी संपन्न हो चुकी है। इन्हें सृजन सम्मान -१९९५, भोपाल(म.प्र.), कलारत्न -१९९८, बिहार,सृजन सम्मान- २००३, रायपुर(छ.ग.) आदि सम्मान प्राप्त हो चुके हैं। मिलनसार एवं  व्यक्तित्व के स्वामी कुंवर रविन्द्र को मेरी ढेर सारी शुभकामनाएं। इनके ब्लॉग का नाम अमूर्त है, मेरी 4 लाइनों के साथ प्रस्तुत हैं इनकी कुछ कृतियाँ ............

 फूलों  का  दर्द  आंसुओं से निचो कर इत्र बनता है.
लाखों  में  कोई  एक हमदर्द अपना मित्र बनता है.
ग़ालिब की गजल मीरा का विरह रंगों में घोलकर 
                                         कतरा  कतरा   रंगों  से  कोई  एक चित्र बनता है. 
                                                                                 (c) तोप रायपुरी 



अब वार्ता को देते है विराम, मिलते हैं ब्रेक के बाद ........... राम राम 

रविवार, 4 नवंबर 2012

अब उठ जाओ, आठ बज गए हैं, दस हजारी वार्ता ....... ललित शर्मा

ललित शर्मा का नमस्कार, वार्ता लिखने का समय नहीं मिल पा रहा है, वार्ता दल के साथी ही सहयोग कर रहे हैं। साथियों के सहयोग से निरंतर प्रकाशित हो रही वार्ता एक मुकाम को हासिल कर चुकी है। 150823 pageviews - 838 posts, last published on Nov 3, 2012 - 362 followers के साथ वार्ता भी दस हजारी क्लब में शामिल हो चुकी है। पहले ललित डॉट कॉम दस हजारी को स्थान प्राप्त हो चुका है। समस्त वार्ता दल के सहयोगी सदस्यों एवं पाठकों को मेरी हार्दिक शुभकामनायें एवं बधाई। अब चलते हैं आज की वार्ता पर प्रस्तुत हैं कुछ चिट्ठों के लिंक ...........

‘अनु, अब उठ जाओ, आठ बज गए हैं।’ मां की आवाज कानों में पड़ी तो अनुप्रिया तुरंत उठ बैठी। उसे याद आया आज तो उसकी ड्यूटी रामलीला मैदान में लगी है और उसे दस बजे हर हाल में पहुंचना होगा, क्‍योंकि आज धनतेरस है। खरीददारी के लिए लोगों की भीड़ इस दिन से लेकर दीपावली तक जमकर रहेगी। ऐसे में हम पुलिसवालों को अपनी तरफ से बिना किसी दिन छु‍ट्टी किए अलग अलग जगह बारह बारह घंटे ड्यूटी के लिए तैयार रहना होगा। क्‍या पुरुष और क्‍या महिला कांस्‍टेबल, सभी की खाट खड़ी रहेगी। जैसे त्‍योहार के दिन हमारे लिए बने ही न हों। हर समय खड़े रहो आम जनता की चौकसी में। लोग लोग और लोग, हर जगह लोग। उस समय जनसंख्‍या वृद्... more » 

बहुत दिनों से ब्लॉग के* हैडर* की तस्वीर को बदलने की सोच रहा था. आखिर यह तस्वीर पसंद आई और लगा दी. *श्री देवेन्द्र पाण्डेय *जी ने पसंद का चटका भी लगा दिया. लेकिन उनका कमेन्ट पढ़कर हमने इस तस्वीर को ध्यान से देखा और जो समझ आया , वह इस प्रकार है : * जिंदगी एक सफ़र है. * इन्सान राहगीर हैं. * जिंदगी के सफ़र की डगर भिन्न भिन्न हैं. * कोई राह ऊबड़ खाबड़ है तो कोई इस सड़क की तरह साफ और चिकनी सतह वाली. * कहीं काँटों भरी राह मिलती है तो कहीं फूलों भरी. * कोई राह सीधी होती है , कोई टेढ़ी मेढ़ी . * किसी राह पर हमसफ़र मिल जाते हैं , कभी अकेले ही चलना पड़ता है. *अब सवाल यह उठता है -- हम किस र... more » 

पारद विग्रहों की अद्भुतता उनकी उपयोगिता न केबल आधाय्त्मिक रूप से बल्कि भौतिक जीवन मे भी अब हम सभी बखूबी जानते हैं . और यह भी अच्छी तरहसे समझते हैं की अगर सच मे जीवन की उस अद्वतीय उचाईया की स्पर्श करना हैं तो बिना पारद के यह संभव ही नही ..अगर सिर्फ सूंठ रख कर वैद्य बने रहना हैं तो कोई बात नही ..पर जब बात परम हँस स्वामी निखिलेश्वरानंद जी के शिष्य की हो तो ...तब कैसे हम सभी दूसरे नम्बर पर संतुष्ठ हो जाये . पर हर बार एक नया विग्रह ...??? ऐसा इसलिए की पहली बात तो यह हैं की यह कोई व्यवासयिकता वाली बात नही भले की कई कई के दिमाग मे यह बात आये.. इसे ऐ... more » 

२८ सालों से न्याय ........... सत्य को खोज रहा है नामालूम क्यों अब ऐसा लगनें लगा है- शायद सत्य की भी हत्या हो चुकी है या फिर वह किसी कालकोठरी में अंनजान जगह बन्दी बना दिया गया है... कहीं कोई आवाज नही उठती... कहीं कोई अकुलाहट नही होती... अब तो आँखों के आँसू भी सूख चुके हैं.... लेकिन बहुत भीतर अभी भी रह -रह कर एक टीस-सी उठती रहती है जो दुस्वप्न बन रातों को जगा देती है.. भटकती रूहें आज भी वैसे ही चीत्कार कर रही हैं.. शायद कोई उनकी की आवाज सुन ले... लेकिन शायद वे जानती नही हैं... यहाँ अधिकतर बहरे रहते हैं और जो सुन सकते हैं वो गूंगे हो चुके हैं ......................................... .... more » 

*प्रताप कुंवरी भटियानी* यह महाराजा मानसिंह जोधपुर की भार्या और देवावर ठिकाने के ठाकुर गोविन्ददास भाटी की पुत्री थी| इनका विवाह आषाढ़ सुदी 9वि.स.1889 में हुआ था| इन्होंने कुल 15 ग्रंथो की रचना कर सरस्वती के भण्डार की अभिवृद्धि की थी| उपलब्ध कृतियों की नामावली इस प्रकार है- ज्ञान सागर, ज्ञान प्रकाश, प्रताप पच्चीसी, रघुनाथ जी के कवित्त, प्रताप विनय, श्री रामचंद्र विनय, हरिजस गायन, भजन पद, हरिजस, पत्रिका आदि| यह सुशिक्षित नारी रत्न थी| महाराजा मानसिंह के निधन के बाद अहोराम प्रभु की आराधना, वंदना और पूजा में सलंग्न रहती थी| अपने पति के निधन के पश्चात इनका मानसिक संतुलन बिगड गया था| महार... more » 

आप बता सकते थे कि कार के अगले पहिये में क्या हुआ था? लेकिन कोई नहीं बता पाया इससे साबित हुआ कि लोग अंदाजा भी नहीं लगाना चाहते है। मैं आज आपको बता रहा हूँ कि कार के अगले पहिये में चालक वाली साइड में नहीं बल्कि दूसरी तरफ़ वाले पहिये में आवाज आ रही थी। जैसे ही मैंने कार रोक कर नीचे उतर कर पहिया देखने गया तो सबसे पहले मेरी नजर टायर पर नहीं गयी थी मैंने पहले तो टायर के पीछे लटकने वाली रबर को देखा कि कही यह तो टायर में रगड नहीं खा रही है। लेकिन वह टायर से काफ़ी दूरी पर थी। जैसे ही मेरी नजर टायर पर गयी तो एक बार को सिर चकरा गया क्योंकि टायर में पेंचर होने के कारण हवा बिल्कुल नहीं बची थी। क... more » 

राजमहल का दृश्य सिरपुर में उत्खनित सभी पुरा धरोहरों को एक गलियारा बना कर जोड़ने का कार्य प्रगति पर है। इसके बाद कहीं से भी रास्ता पकड़ लीजिये, आप सिरपुर की धरोहरों का दर्शन किसी से रास्ता बिना पूछे कर सकते हैं। सिरपुर में आज हमारा अंतिम दिन था, दोपहर तक हमें यहाँ से रवानगी डालनी थी। इसलिए सुबह ही तैयार होकर राजमहल परिसर के अवलोकनार्थ चल पड़े। जब सिरपुर दक्षिण कोसल के पांडूवंशियों की राजधानी थी तो राजप्रसाद भी होना अत्यावश्यक है तभी राजधानी होने का दावा पुख्ता होता है। महानदी के तट पर पूर्वाभिमुख राजप्रसाद के अवशेष प्राप्त हुए हैं। अरुण कुमार शर्मा के निर्देशन में 2000-2001 में यह विशाल... more  

( 'पूर्णस्य पूर्णमादाय ' कहने से तात्पर्य यह है की यदि तुम स्वयं इस सत्य की अनुभूति कर सको कि वही ' पूर्ण ' तुम्हारे साथ साथ इस विश्व ब्रह्माण्ड के कण कण में भी प्रविष्ट है तो फिर उस ' पूर्ण ' के बाहर शेष बचा क्या ? इसी को कहा गया - ' पूर्णमेवावशिष्यते '.... ! 'करवा चौथ' के मंगल पावनपर्व पर हार्दिक शुभकामनायें ....) [image: http://festivals.iloveindia.com/karwa-chauth/pics/karwa-chauth-puja.jpg]खूब तुलना हो रही थी अपने चाँद से ऊपर वाले चाँद की, सबकी बातें सुनकर खुद को सँवारने की खातिर ऊपर वाला चाँद कल रात से अभी तक नहा रहा है पूरा निखर के आएगा रात को लेकिन उसे क्या पता कि कि... more » 
 
वार्ता को देते हैं विराम, मिलते हैं छोटे से ब्रेक के बाद .... राम राम  




शनिवार, 3 नवंबर 2012

चलो अपनी कुटिया जगमगाएँ .... ब्लॉग4 वार्ता ---- संगीता स्वरूप


आज की वार्ता में   संगीता स्वरूप   का नमस्कार ..... आइये  चलते हैं आज के लिंक्स पर -----

स्टेट्स अपडेट्स के दौर में पारिवारिक संवादहीनता-----तकनीक ने जीवन को जितना सरल किया है उतना ही उलझाया भी है। यंत्रवत हो चले  जीवन से संवेदनाएं कुछ यूं गुम हुई हैं कि हम अपने मन की कहने और अपनों के मन की सुनने के बजाय मात्र एक आभासी उपस्थिति दर्ज करवाने के आदी हो रहे हैं। आपाधपी भरे आज के जीवन में यूँ  तो सभी की दिनचर्या व्यस्त है ही ।  अ

हिमांचल प्रदेश : बंदर हैं धूमल के दुश्मन नंबर 1---हिमांचल प्रदेश में मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल की कुर्सी बंदरों की वजह से जा सकती है। सप्ताह भर हिमांचल प्रदेश के कई शहरों की खाक छानने के बाद मुझे लगता है कि इस बार यहां हो रहे विधान सभा चुनाव में बीजेपी की सरकार को सबसे बड़ी चुनौती लगभग पांच लाख बंदरों से मिल रही है। आप सोच रहे होंगे कि आखिर ये बंदर किसी चुनाव को कैसे प्रभावित कर सकते हैं ? चलिए मैं बताता हूं कि इन बंदरों से हिमांचल प्रदेश को कितना नुकसान हो रहा है।

बहारें फिर से आयेगीं----शाम हुई हम धीरे-धीरे /चले नदी के तीरे-तीरे /आसमान के माथे देखो /कितनी गहरी पड़ीं लकीरें

चलो अपनी कुटिया जगमगायें-----------सतर्कता सप्ताह चल रहा था, समापन के समय विशिष्ट अतिथि बुलाये जाते हैं जो अधिकारियों और कर्मचारियों की बड़ी बैठक को सम्बोधित करते हैं, सब ध्यानमग्न हो सुनते हैं। यथासंभव उस बैठक में उपस्थित रहना होता है, कि कहीं ऐसा न हो कि अनुपस्थिति का अर्थ सतर्कता की अवहेलना के रूप में ले लिया जाये।

ऐसे चरण धरो दीवाली---- भीतर बाहर हो उजियाली/ ऐसे चरण / धरो दीवाली। / बिम्ब हुए जो मैले मैले / जितने भी सम्बन्ध कसैले / बनें बताशों की ज्यों थाली

ज़िन्दगी भर मुसर्रतों की तलाश में भटकता रहा ---- ज़िन्दगी भर / मुसर्रतों की तलाश में / भटकता रहा / मुसर्रतें तो मिली नहीं / ग़मों से / दोस्ती ज़रूर हो गयी

करवा चौथ ----    आज मैंने मांगी है / सलामती की दुआ / तुम्हारे लिए नहीं / उन करोड़ों के लिए / जिनके लिए तुम्हारा हर दिन / करवा चौथ है

बा और बापू की दृढ़ता-----बा के बारे में गांधी जी लिखते हैं, “… उनमें एक गुण बहुत बड़े परिमाण में है, जो दूसरी कितनी ही हिन्दू-स्त्रियों में थोड़ी-बहुत मात्रा में पाया जाता है। मन से हो या बेमन से, जान में हो या अनजान में, मेरे पीछे-पीछे चलने में उन्होंने अपने जीवन की सार्थकता मानी है और स्वच्छ जीवन बिताने के मेरे प्रयत्न में उन्होंने कभी बाधा नहीं डाली।”

औसत लोग-----  जो होते हैं / औसत / उनका कुछ भी नहीं / न धरती, न आसमान, / न  हवा न पानी / न होते हैं वे वोट ही

नागार्जुन एवं राजमहल ............... ललित शर्मा----------सिरपुर में उत्खनित सभी पुरा धरोहरों को एक गलियारा बना कर जोड़ने का कार्य प्रगति पर है। इसके बाद कहीं से भी रास्ता पकड़ लीजिये, आप सिरपुर की धरोहरों का दर्शन किसी से रास्ता बिना पूछे कर सकते हैं। सिरपुर में आज हमारा अंतिम दिन था, दोपहर तक हमें यहाँ से रवानगी डालनी थी।

कभी नाकाम न होवोगे.....!!!मिलन की आरजू करना... / सफ़र की जुस्तजू करना.... / जो तुम मायूस हो जाओ  / तो मुझ से गुफ्तगू करना....

हित-चिन्तक बन कर हमें, लूट रही सरकार - सत्यनारायण सिंह

ठेस-टीस

मुँह पर ताला, मन व्यथित, नयनन अँसुअन धार

हित-चिन्तक बन कर हमें, लूट रही सरकार

अल्फाज हो खुदा के .   कदम   हलचल मचाते  हैं / जब     अपने    बुलाते  हैं / नसीहत   भूल    जाती  है , / घर    काँटों    के  जाते  हैं -

तेरी याद  ----गिरी असमान से / फंसी टहनियों पर  / फिसल कर न जाने  / कहाँ गिर पड़ी है

मुस्कुराहट का रंग   ----मुस्कुराहटों की उंगली थामे / दर्द को मिश्री सा घोलकर पी लिया / थोड़ा खिलखिला दोगे अगर / तो ख़्वाबों के मेरे कारवां पर / खुशियाँ बरस ही पड़ेंगी / ताज़ादम हो के चलना अच्छा लगेगा न ..

खोह, वीराने और सन्नाटे    ----जिंदगी की खोह में चलते हुए वर्षों बीत चुके हैं, कभी इस नीरव से वातावरण में उत्सव आते हैं तो कभी दुख आते हैं और कभी नीरवता होती है जो कहीं खत्म होती नजर नहीं आती। कहीं दूर से थोड़ी सी रोशनी दिखते ही लपककर उसे रोशनी की और बढ़ता हूँ, परंतु वह रोशनी पता नहीं अपने तीव्र वेग से फ़िर पीछे कहीं चली जाती है।

किशोर डायरी के पन्ने     ------बाल्यवस्था से  युवावस्था तक पहुंचने की एक कड़ी है । किशोर अपनी अलग पहचान बनाने  की कोशिश इसी अवस्था से शूरू करते हैं ।उनमें शारीरिक -मानसिक परिवर्तन परिलक्षित होने लगते हैं ।उलझन में फंसे ,दुविधा में पड़े किशोरे अपने माँ -बाप से प्रथम सहयोग ,मार्गदर्शन व् प्यार की उम्मीद करते हैं 

उफ़................. उधर अपनी सरकार मंहगाई वाली . / इधर पास आने लगी  है दिवाली .

तान---    कान्हा, कब से खामोश है तुम्हारी बांसुरी, / कोई मीठी तान छेड़ो ना, / वन-उपवन,नदी-तालाब छोड़ो, / अब बस्तियों में आओ ना.

क्षणिकाएँ ...  क्षणों की लहरों ने तो  / विभीषिकाओं का पाठ पढ़ाया है / पर मैंने भी हर लहर के लिए / डांड तोड़ कर डोंगा बनाया है

बैठे रहे तस्सवुर-ए-जाना किये हुए .....एक कहानी----यादों में एक ख़ास बात होती है...वो खट्टी-मीठी तार से जुडी होती है...एक याद को याद करो तो दूसरी ख़ुद-ब-ख़ुद आ जाती, मानो कहती हो, मुझे भी याद करो, मुझे भी याद करो...मेघा के साथ भी यही हो रहा था...आज उसने फिर एक फैसला लिया है, पिछले दो हफ्ते से उसके पास दो ऑफर आ चुके दो कम्पनियों से, एक दवाइयों की कंपनी में सी.ई.ओ. की पोजीशन के लिए और दूसरी मीडिया कंपनी से वाईस प्रेसिडेंट के लिए..

बेदर्द शाम हो जाए---

हवाएं सर्द जहाँ बेदर्द शाम हो जाए
मेरी वो शाम तुम्हारे ही नाम हो जाए

एक दिन का देवता ..   कल वर्ष भर के  / सारे सुप्त सुख  / लौट आये थे
एक दिन में, / आल्हादित हुआ  / था मन अपने इस

कटु सत्य-----   मैं कोई ज्योतिषी या भविष्यवक्ता नहीं हूँ, पर इतना जानता हूँ कि यदि कोई अनाड़ी तैराक किसी गहरी नदी के भंवर में नहाने लगे तो अवश्य ही डूबेगा. 

मैं इंदिरा गाँधी के आपद्काल का प्रत्यक्षदर्शी और भुक्तभोगी रहा हूँ. उस काल में अनेक विचारकों व सभ्य नागरिकों ने उसकी तारीफ़ में यह भी कहा था कि “यह अनुशासन पर्व है.” ऐसे नारे भी जगह ज

रहम-ओ-करम --   आजकल ............... /मुझे लफ़्ज़ों की ज़रुरत कम पड़ने लगी है / क्यूंकि स्पर्शों की नयी दुनिया जगने लगी है

गुलाब की तरह थे करवा चौथ पर पतियों के चेहरे-----श्रीगंगानगर-दोस्त की मैडम 24 घंटे में से कुछ घंटे ही बिना मेकअप के रहती है। सजी संवरी गुड़िया सी लगभग हरसमय। दोस्त घर में हो या ना हो, उसने तो बनी ठनी रहना है। बीस सालों में आज तक दोस्त को ये नहीं पता कि वो अधिक सुंदर कैसे दिखती है। मेक अप के या बिना मेक अप के

उन महान बेनामी टिप्पणीकारों को शत शत नमन-----    अब बात उन बेनामी टिप्पणीकारों की 

जो अपनी बेनामी टिप्पणी से ब्लॉग लिखने वालों के दिलों दिमाग को विचलित करते हैं |
व अपनी टिप्पणी के माध्यम से ये सलाह दे डालते है कि आपको तो लिखना ही नहीं आता | आपको अपना ब्लॉग बंद कर देना चाहिए |
ऐसा आपके साथ भी हुआ होगा | मेरे साथ भी ऐसा हुआ है |

क्‍या करें क्‍या न करें 3 , 4 और 5 नवंबर 2012 को ??-मेष लग्नवालों के लिए 3 , 4 और 5 नवंबर 2012 के कार्यक्रमों में भाई.बहन , बंधु बांधव सहयोगी बनेंगे , इनकी मदद लेने की कोशिश करें!  कुछ झंझट उपस्थित हो सकते हैं , पर घबराए नहीं , प्रभाव की मजबूत स्थिति से उन्हें दूर किया जा सकता है


अब आज्ञा दीजिये ----- नमस्कार

शुक्रवार, 2 नवंबर 2012

मेरा पति मेरा देवता है .. करवा चौथ की शुभकामनाएं .. ब्‍लॉग4वार्ता .. संगीता पुरी .

संगीता पुरी का नमस्कार,  एक अरसे से परंपरा के तौर पर मनाया जाने वाला पर्व 'करवा चौथ' पर आधुनिकता का पूरा रंग चढ गया है , पूजा का सामान, करवा, मेहंदी की कोन और सूखे मेवे का डिब्बे वाली थाली की कीमत 800 रुपये से 4,500 रुपये तक है। 4,500 रुपये वाली डिजाइनर थाली के साथ बिंदी, चूड़ी, काजल, आलता तथा सोहनपापड़ी का डिब्बा भी है। करवा चौथ के दिन चांद को छलनी से देखने की परंपरा है। अब यह छलनी भी डिजाइनर हो चुकी है। जरी गोटे से सजी इस छलनी की कीमत भी 120 रुपये से हजारों में हैं।  यह एक दिन ही काम आती है, लेकिन नवविवाहित महिलाएं बहुत चाव से ऐसी छलनी खरीदती हैं। ब्‍लॉग जगत में करवा चौथ को लेकर बहुत लेख लिखे गए हैं , इन चित्रों में क्लिक कर ढूंढिए कि किसने क्‍या लिखा है .....













और अंत में एक सुंदर गीत भी .....

मिलते हैं अगले दिन एक ब्रेक के बाद ....

बुधवार, 31 अक्टूबर 2012

धीरे - धीरे सुबह हुई जाग उठी ज़िन्दगी... ब्लॉग 4 वार्ता... संध्या शर्मा

संध्या शर्मा का नमस्कार... नए रेल व पेट्रोलियम मंत्रियों ने जल्द ही जनता पर बोझ बढ़ाए जाने के संकेत दिए हैं. वर्षों बाद रेलमंत्रालय को अपने हाथ में लेने के बाद कांग्रेस के पवन बंसल ने साफ कहा कि रेल किराया बढ़ाया जाएगा. वहीं मोइली ने सब्सिडी नीति पर विचार करने को कहा. उन्होंने यह भी कहा है कि मुझे रेल्वे  की वित्तीय हालत सुधारनी है. किराया बढ़ाते समय सेवा सुधारनी होगी तभी जनता पसंद करेगी. ये तो वक़्त ही तय करेगा कि जनता बढ़ा हुआ किराया पसंद करती है या इनकी सेवा...मतलब नए बोझ कि तैयारी जारी है...प्रस्तुत है आज कि वार्ता कुछ रोचक लिंक्स के साथ 

यह जाडे की धूप है या "तुम". - अलसाये सकुचाये गुलाबी ताप के टुकडे, क्षोभमंडल पार से उतरते है मुझ पर और फैलते जाते है सिंकते है रोम रोम, पिघलती है उर्मियाँ बिंधती है कोशिकायें ... बन जाओ मेरी कविता का शीर्षक तुम!! - बन जाओ मेरी पुस्तक का शीर्षक.... जो है ३६५ पन्नों की... वर्ष के दिन की गिनती और यह संख्या.. जाने क्यूँ एक से हैं... लगे है ज्यूँ करती हों ...इल्जाम ... - उनपे ... उनपे ... उनपे ... लगे आरोप ... उनकी नजर में साजिशें हैं ! पर, हकीकत में लगते हमें ... इल्जाम सच्चे हैं ! पर, अब ... करे तो करे ... क... 

आनेवाले दो महीने में बुध ग्रह का आपपर पडने वाला प्रभाव क्‍या होगा ?? - भले ही अपने जन्‍मकालीन ग्रहों के हिसाब से ही लोग जीवन में सुख या दुख प्राप्‍त कर पाते हैं , पर उस सुख या दुख को अनुभव करने में देर सबेर करने की भूमिका ..हेकड़ी,अहंकार और फेसबुक - इस दौर में हेकड़ी बढ़ी है। भ्रष्टनेता से लेकर ईमानदार नौकरशाह तक सबमें हेकड़ी का विकास हुआ है। सामान्य कारिंदे से लेकर भिखारी तक सब हेकड़ी में बातें करते ह... जिन्हें तकलीफ है किसी से ... - भीखमंगा बनकर सबसे मोती मांगने का चलन है बोनस में मिलते दुत्कार का करता कौन आकलन है... अपने ही प्राणों में दौड़ती कड़वाहटों का जलन है , पर एक-दूसरे पर आरोप-... 

 ओ बंजारे - भवसागर के गहन भँवर में नश्वर जीवन के इस क्रम में प्रफुल्ल रहा करते हो ...... गठरी दौलत की नहीं है ...तभी ...... जहाँ -तहां विचरते हो ! नहीं चाह है ...  इश्क - कल रात चाँद यूँ ठहरा मेरे पहलु में आकर जैसे आया हो कभी न जाने के लिए... मैं चाँद और मोहब्बत... बंद कर लिए किवाड़ हमने कभी न खोलने के लिए.... कसमें खायीं ...सोच रहा हूँ,कुछ लिखूँ शाम घनेरी हो चली है सोच रहा हूँ,कुछ लिखूँ * * राह अंधेरी हो चली है सोच रहा हूँ,कुछ लिखूँ चाँदनी* *बिखरने लगी है टूट कर रात की बाहों में शबनम अब गाने लगी है सूनी सूनी फिज़ाओं में मावस की आहट लगी है सोच रहा हूँ,कुछ लिखूँ झुरमुटों में सरसराहट मची है सोच रहा हूँ,कुछ लिखूँ...

क्यों पराजय लग रहा है प्यार तुझको दर्द क्यों है, क्या नहीं स्वीकार तुझको ? क्यों पराजय लग रहा है प्यार तुझको दैन्य से दुनिया भरी है क्या मिलेगा ज़ख्म वाला ज़ख्म तेरे क्या सिलेगा चाहता जो खुद किसी की सरपरस्ती इन बुतों में ढूंढता तू हाय मस्ती बंद भी कर खेल अब सारे अहम के दे गिरा तू आज सब परदे वहम के सोच तो ! क्यों चाहिए संसार तुझको क्यों पराजय लग रहा है प्यार तुझको.. यार देखो तो एक वो चाँद ऊपर ,एक चाँद तुम मेरे हो फिर ज़रा कुछ ओर करीब आ कर,यार देखो तो नैन मिला कर ज़रा एक दफा फिर से देखो तो पास बिठाकर ,यार एक दफा फिर देखो तो || दो या ना दो कोई दाद जीवन में तुम मुझे पर एक बार फिर से साथ निभाकर,यार देखो...पलकों के झूले और ख्वाब...... मन कर रहा चाँद को बुलाने का , पलकों के झूले पे ख्वाब कर झुलाने का । नींद नहीं आती है क्यूँ, ये हमको मालूम नहीं – वादा था उनकी अपने ज़ुल्फों तले सुलाने का । मौसम भी इन दिनों न जाने, क्यूँ भींगा भींगा रहता है – है आरोप उसपे मेरी आँख की नमी चुराने का । मैं धूप को ओढ़े बाहर बैठा, चिड़ियों को दाने चुगाता हूँ – मन करता पाखी बन तेरे पास ही उड़ आने का ...

अपनी ही मैं में .... दर्द आज़ अपनी ही पीड़ा को पीना चाहता है आँसुओं की शक्‍ल में सिसकियों का रूदन कब चिन्हित हुआ रूख़सार पर वो हतप्रभ है औ भयाक्रान्‍त भी इस आक्रोश पर सर्जक का आवेग बहा ले जाता है अपनी ही मैं में बिना किसी की कोई बात सुने ... वो अधजली लौ रौशनी तो उतनी ही देती है कि सारा जहाँ जगमगा दे निरंतर जल हर चेहरे पर खुशियों की नदियाँ बहा दे फिर भी नकारी जाती है क्यों?? वो अधजली लौ मूक बन हर विपत्ति सह पराश्रयी बन जलती जाती परिंदों को आकर्षित कर जलाने का पाप भी सह जाती फिर भी दुत्कारी जाती है क्यों??...शर्माओंगी तो नहीं, तुमको अपनी दिवानी कह दूं आज इस महफिल में उल्‍फत की कहानी कह दूं शर्माओंगी तो नहीं, तुमको अपनी दिवानी कह दूं सितारों ने किया है मुकरर्र,अपनें वस्‍ल का‍ दिन अपनी मुलाकात को मैं , रूहानी कह दूं देख्‍ाता हूं तुमको तो रूह को सूकून ऑंखों को ठंडक आती है क्‍या तुमको मैं ..

आनंदप्रभ कुटी विहार सिरपुर ...... - यायावर -  प्रभात सिंह भोजनोपरांत कुछ देर का ब्रेक लेने लिए रेस्ट हाउस पहुंचे, भोजन की खुमारी कान में कह रही थी, देह कुछ देर का विश्राम चाहती है, दे...बच के रहना उस्ताद से !! - सम्बन्धित शब्द-1.गुरुघंटाल. 2.इच्छा. 3.ईंट. 4.ठग. 5.पाखंडी. 6.पालक.7.मदारी. 8.जादूगर. 9.पंडित. अक्सर शब्द अपना चोला बदल लेते हैं । “हरि रूठे गुरु ठौर है ।... निःशब्द हूँ , मां हूँ ..... - ** * **माम !* *मुझे इतनी सी, प्यार से* *एक बात बताना* *कान में ....* *क्यों करती हो* *इतना प्यार ?* *कोई इतना भी प्यारा* *क्यों लगता है ....?* *कोई इतना भी ...शरद-पूनम की अंजोरी में मैं तुमको पाता हूं..

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धीरे - धीरे सुबह हुई जाग उठी ज़िन्दगी............

आज के बस लिए इतना ही नमस्कार......

मंगलवार, 30 अक्टूबर 2012

चांदनी का दरिया ...शरद पूर्णिमा की बहुत बहुत बधाई .. ब्‍लॉग4वार्ता .. संगीता पुरी

आप सबों को संगीता पुरी का नमस्‍कार , कैरेबियाई क्षेत्र में भारी तबाही मचाने के बाद चक्रवाती तूफान सैंडी सैकड़ों मील रफ्तार से अमेरिका के उत्तर-पूर्वी क्षेत्र की ओर बढ़ रहा है। आशंका जताई जा रही है कि इससे देश के 12 राज्यों के तकरीबन छह लाख निवासी बुरी तरह से प्रभावित होंगे। अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने नागरिकों को चेतावनी दी है कि वे सैंडी को गंभीरता से लें। अधिकारियों ने पूर्वी तट पर तूफान से निपटने की तैयारी शुरू कर दी है। कैरेबियाई क्षेत्र में तूफान के कारण मृतकों का आंकड़ा रविवार तक 65 पहुंच गया। हैती के अधिकारियों ने 51 लोगों के मौत होने की पुष्टि की है।खतरे को देखते हुए तटीय इलाकों से लोगों की सुरक्षित जगहों पर भेजा जा रहा है। संभावना जताई जा रही है कि सोमवार रात तक तूफान अमेरिका में पहुंच जाएगा। न्यूयॉर्क प्रशासन ने शहर में पब्लिक ट्रांसपोर्ट को रविवार शाम से बंद कर दिया है। वहीं स्कूलों में छुट्टी दे दी गई है।न्यूयॉर्क शहर में 3.75 लाख नागरिकों को निचले इलाकों से हटाकर सुरक्षित जगहों पर पहुंचाया गया है। अब चलते हैं आज की वार्ता पर ....

सेहत ठीक रही तभी जीभ भी स्वाद लेने लायक रहेगी -*कोशिश करें कि ऐसे खाद्य पदार्थों से जितना बचा जा सके बचे और खाने के बाद यथासंभव गर्म जल का सेवन कर अपने दिल और पेट को थोडा सहयोग प्रदान करें। क्योंकि यदि ...काश लौट आए वो माधुर्य. (ध्वनि तरंगों पर ..) - बोर हो गए लिखते पढ़ते आओ कर लें अब कुछ बातें कुछ देश की, कुछ विदेश की हलकी फुलकी सी मुलाकातें। जो आ जाये पसंद आपको तो बजा देना कुछ ताली पसंद न आये तो भी भैय...विवाह योग्य आयु के बहाने हो विवाह संस्था पर चर्चा - **** वर्तमान में समाज में एक ओर जीवन-शैली के नवीन स्वरूप पर लोग चर्चा करने को आतुर दिखते हैं, वहीं हमारे मंत्री लड़कियों की विवाह योग्य उम्र क...खता,,, -खता, दिल की बात कहने के लिये हम इशारों से काम लेते है, क्योंकि, तुम्हे अपना समझने की खता हम कर चुके है! हमने तुम्हारे लिये सपने संजोये, उस बात का दुख नह...

गंधर्वेश्‍वर मंदिर और महानदी तीर की सुबह ............ललित शर्मा - महानदी के किनारे सुबह प्रारंभ से पढ़ें प्रभात सिंह की आमद आहट से प्रभात हुई। वे चाय बनाकर ले आए थे। मैंने घड़ी की तरफ देखा, 6 बजा रही थी, मतलब प्रभात सिंह ...समूह में पहली बार कैम्पटी फ़ॉल भ्रमण kampty fall group tour -लोग कहते है कि घुमक्कडी में पैसे खर्च करना फ़िजूल खर्ची है लेकिन मुझे ऐसा नहीं लगता। दूसरी बात पैसे खर्च करके भी कोई साधु महात्मा जितनी घुमक्कडी और भी करत...अस्सी घाट, शरद पूर्णिमा और चाँदनी की पदचाप - सभी तस्वीरें आज शाम की हैं। दूसरी तस्वीर में आकाश दीप जल रहा है। आज से तुलसी के पौधे और गंगा घाट के किनारे दीप दान प्रार..

इल्जाम ... - उनपे ... उनपे ... उनपे ... लगे आरोप ... उनकी नजर में साजिशें हैं ! पर, हकीकत में लगते हमें ... इल्जाम सच्चे हैं ! पर, अब ... करे तो करे ... क...फ़िल्म चक्रव्यूह से नक्सल समस्या तक - *प्रकाश झा की फिल्म* चक्रव्यूह देखने की इच्छा बहुत दिनों से थी। नक्सल समस्या पर बड़े बैनर की यह पहली फिल्म है और इसे देखने के बाद भारत के नौजवानों के मन म...मन की नदी - मन की नदी श्वास और मौन के दो तटों के मध्य बहती है मन की नदी... जिसे लील जाता है कभी अगाध मरुथल निगल जाता है कभी आसमान जाने कितनी नदियाँ गुम हो गय...मैं बोलना चाहता था शत प्रतिशत सच - "मैं बोलना चाहता था शत प्रतिशत सच पर पच्चीस प्रतिशत सच इसलिए नहीं बोल सका क्योंकि उससे देश के अल्प संख्यकों के नाम पर खैरात खा रहे दूसरे नंबर के बहुसंख्यक सम...अपमान से सम्मान का तेज बढ़ता है- सम्मान का अपमान नहीं हो सकता गरिमा धूमिल नहीं की जा सकती जो मर्यादित है उसे गाली देकर भी अमर्यादित नहीं किया जा सकता ... शमशान में कर मांगते राजा हरिश...

विण्डोज़ ८ में कुछ नयी उपयोगी सुविधायें - विण्डोज़ ८ में आयी कुछ नयी उपयोगी सुविधायें और कुछ हटायी गयी चीजें [[ यह पोस्ट सामग्री का केवल एक अंश है। पूरी पोस्ट पढ़ने के लिये कृपया ऊपर पोस्ट का टाइटल ...क्षणिकाएं -मैंगो पीपुल ऑफ़ बनाना रिपब्लिक ' - *खट्टे-मीठे, रसीले, * *सख्त और पितपिते,* *अफ़सोस **कि * *सबके सब गए बिक ! * *'मैंगो पीपुल ऑफ़ * *बनाना रिपब्लिक ' !!* * * *xxxxxxxxxxxxxxxxxxx* * * *गुरू..." मिलावटी - फेरबदल " जनता को चिढा रहा है..?? - *" मिलावट के आदी हो चुके " प्यारे मित्रो,शुद्ध प्यार भरा नमस्कार स्वीकार करें !!* * हमारे" पावर - फुल " प्रधानमंत्री जी ने अपने...अपेक्षाएं - गहन प्रेम ही तो किया था प्रिय क्या इसमें भी तुम्हारी शंकाएं सिर उठाती हैं ? यह केवल आसक्ति नहीं थी प्रिय ! इसमें दोषी शायद मेरे कृत्य ही हैं कहीं न क...असुर मर्दिनी .. - चंड-मुंड , शुम्भ-निशुम्भ , महिषासुर और रक्तबीजों का मर्दन करने हेतु माँ काली और महिषासुर-मर्दिनी की नवरात्रि में भरपूर स्तुति की। अब दिल्ली दूर नहीं , इन...

छत्तीसगढ़ी भाषा के शब्दकोश, भाषा और मानकीकरण की चिंता - *- संजीव तिवारी* शब्द भाषा की सर्वाधिक महत्वपूर्ण और अपरिहार्य कड़ी है. शब्द के बिना भाषा की कल्पना करना निरर्थक है. वास्तव में शब्द हमारे मन के अमूर्त्त ...रफूगरी, रफादफा, हाजत-रफा -पिछली कड़ियाँ- 1.‘बुनना’ है जीवन.2.उम्र की इमारत.3.‘समय’ की पहचान.[image: darn] 4. दफ़ा हो जाओ हि न्दी की अभिव्यक्ति क्षमता बढ़ाने में विदेशज शब्दों के सा...चांदनी का दरिया - ये जगमगाता चांदनी का दरिया और उसमें दमकता सा तुम्हारा चेहेरा ये अनोखी सी मदभरी ठंडक अपनी नजदीकियों की ये गरमाहट । ये शरद की लुभावनी सी ऋतु ये फिज़ा भी ...शरद पूर्णिमा की बहुत बहुत बधाई -शरद पूर्णिमा की बहुत बहुत बधाई जय जोहार .....



आज बस इतना ही .. मिलते हैं अगली वार्ता में ......

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