गुरुवार, 20 दिसंबर 2012

यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते ......?... ब्लॉग 4 वार्ता... संध्या शर्मा

संध्या शर्मा का नमस्कार.... आज के दिन भी ब्लॉग जगत में दिल्ली की घटना पर दुःख, आक्रोश ही दिखाई दिया, जो बहुत सी रचनाओं में साफ दिखाई दे रहा है. लोगो की सोच मानसिकता, नजरिया क्यों नहीं बदलता??? क्यों उनके लिए कोई भी रिश्ता हवस के सामने मायने नहीं रखता...??? ओह... पता नहीं कब बदलेगा ये इंसान जो इंसान कहलाने लायक भी नहीं रह गया... आइये अब चलते हैं आज की वार्ता पर.......

 



क्योंकि........ हूँ बलात्कारियों के साथ तब तक - हम थोथे चने हैं सिर्फ शोर मचाना जानते हैं एक घटना का घटित होना और हमारी कलमों का उठना दो शब्द कहकर इतिश्री कर लेना भला इससे ज्यादा कुछ करते हैं कभी ....अराजकता का जिम्मेदार कौन ? - ** जब से दिल्ली में चलती बस में बलात्कार की वारदात हुई है,संसद से लेकर सड़क पर खूब उबाल दिख रहा है। सड़क पर तो आम आदमी इस तरह के वाकयों के बार-बार होने से...'पुरुष' होने का दंभ - बलात्कार जैसी घटनाओं के लिए पुरुषों में 'पुरुष' होने का दंभ भी एक कारण है। पुरुषों को बचपन से यह ही यह अहसास दिलाया जाता है कि वह पुरुष होने के कारण महिला... 

खुशियाँ मनाइये कि मेरा रेप नहीं हुआ!!! पापा, आप खुशियाँ मनाइये* *** *एक उत्सव सा माहौल सजा*** *कि आपने मुझे खत्म करवा दिया था*** भ्रूण मे ही मेरी माँ के वरना शायद आज मैं... प्रस्तार कहाँ से लाऊँ ... - आज फिर चली जा रही हूँ ... बढ़ी जा रही हूँ ..... आस से संत्रास तक ..... खिँची खिँची ... नदिया किनारे .... कुछ यक्ष प्रश्न लिए ... डूबता हुआ सूरज देखने ....ऐसी जिन्दगी तो चाही नहीं थी मैनें .....? - *साँसों का बंधन /* दिल की कराहें / काँटों का बिछौना / *ऐसी जिन्दगी तो चाही नहीं थी मैनें .....?* आँखों का रोना / दिल का तडपना / रातो को जगना / *ऐसी जिन..

लौट आओ कि अब वतन मुश्किल मे है - राम प्रसाद बिस्मिल भारतीय स्वाधीनता संग्राम में काकोरी कांड एक ऐसी घटना है जिसने अंग्रेजों की नींव झकझोर कर रख दी थी। अंग्रेजों ने आजादी के दीवानों द्वारा ...बलात्कारियों के खिलाफ कड़े कानून कब बनेंगे !! - देश में बलात्कार की घटनाओं लगातार वृद्धि दर्ज हो रही है अगर आधिकारिक आंकड़ों की ही बात करें तो एक साल में पुरे देश में लगभग पच्चीस हजार महिलाओं ,लड़कियों ... बलात्कार दो प्रकार का होता है --घोषित और पोषित जिसमें शोषित तो हमेशा स्त्री ही होती है - "बलात्कार दो प्रकार का होता है --घोषित और पोषित जिसमें शोषित तो हमेशा स्त्री ही होती है . घोषित बलात्कार के विषय में सभी जानते है पर बारीकी से नहीं . घोषि...

 " बलात्कार का "इलाज ",फांसी या सेक्स-शिक्षा."...?????? - * सभी " समझदार " मित्रों को मेरा नमस्कार !!* * कल संसद में देश के समझदार सांसदों ने एक बलात्कार की घटना की निंदा कर,और दोष..आतंकवादियों का सम्मान करना कोई कांग्रेसियों से सीखे - दिग्विजय जी आतंकवादी ओसामा को 'जी' कहकर संबोधित करते हैं तो श्रीमान शिंदे जी आतंकवादी हाफ़िज़ सईद को 'श्री' कहकर सम्मान देते हैं ! -----------------------...शीला और सोनिया रहतीं दोनों दिल्ली में , - माँ बहन बेटी कोई भी सुरक्षित नहीं है इस व्यवस्था में . युवा संस्थाएं तो इस दरमियान बहुत बनी हैं लेकिन सब की सब वोट बटोरने के लिए ,मौज मस्ती के लिए ....

 कन्या भ्रूण हत्या मजबूरी है !!!:( - (अपवाद होते हैं) - सिसकियों ने मेरा जीना दूभर कर दिया है माँ रेsssssssssssssss ............ मैं सो नहीं पाती आखों के आगे आती है वह लड़की जिसके चेहरे पर थी एक दो दिन में ... . महिलायें कहीं भी सुरक्षित नहीं..........? - *हरेश कुमार* * * * * देश की राजधानी, दिल्ली में आए दिन महिलाओं के खिलाफ अपराधों में बढ़ोतरी होती जा रही है और ऐसा तब है जब यहां महिलायें जिंदगी के हर क्षे..किस मानव के लिए ये अधिकार - चिन्तामणि मिश्र अभी पिछ¶े सप्ताह देश भर में मानव अधिकार दिवस पर कई कार्यकम हुए। सा¶ का एक दिन मानव अधिकार का कीर्तन करने के ¶िए निर्धारित है। इस दिन गोष...

यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते ......? - दिल्ली में एक छात्रा के साथ हुए अपराध के बारे में बहुत कुछ कहा सुना जायेगा और कुछ समय बाद इस घटना को भूलकर हम फिर से अपने...   दर्द दे गया...... - * **हमदर्द है जमाना कि दर्द दे गया,* *कुछ ख्वाब थे अधूरे, कुछ और दे गया-* * **किस्तों में है चुकानी हर बार जिंदगी,* *निभा रहे थे फर्ज क...क्या बुराई थी उसमें ? (आज जो भी लिख रही हूँ, शायद उसका ओर-छोर आपको समझ ना आये, क्योंकि मन बहुत विचलित है।) क्या बुराई थी उसमें ? डॉक्टर बन रही थी वो ...बन जाती तो न जाने कितनों को मौत के मुंह से निकाल लाती वो। लेकिन दुराचारियों ने उसे ही मौत के मुंह में धकेल दिया !! कितने अरमान से, कितने परिश्रम से वो यहाँ तक पहुंची होगी। कितनी तपस्या की होगी उसने और उसके परिजनों ने। लेकिन कुछ ही मिनटों में सब कुछ स्वाहा हो गया. 

" कल हो न हो..........." दिनांक २१.१२.१२ को दुनिया खत्म हो जायेगी | कोई पिंड हमारी धरती से टकराएगा और हम खंड खंड हो बिखर जायेंगे | ऐसी भविष्यवाणी की गई है | कहते हैं 'माया कलेंडर' में २१.१२.१२ के बाद की तिथि ही अंकित नहीं है | ऐसा हो या न हो ,कौन जानता है परन्तु जब कभी भी अंत होगा तो ऐसे ही होगा. शुक्र है... नज़र अंदाज़ कर देते हैं हम छेड़छाड़ दहलते हैं दरिंदगी पर शुक्र है... अभी हमें गुस्सा भी आता है! देख लेते हैं आइटम साँग बच्चों के साथ बैठकर नहीं देख पाते ब्लू फिल्म शुक्र है... अभी हमें शर्म भी आती है! करते हैं भ्रूण हत्या बेटे की चाहत में अच्छी लगती है दहेज की रकम बहू को मानते हैं लक्ष्मी बेटियों का करते हैं कंगाल होकर भी दान शुक्र है... |मैं कद्र करती हूँ एक ऐसा इंसान जो सच के लिये जीता हो... त्याग, सदभावना में विश्वास हो.. मैं भी एक ऐसे इंसान को जानती हूँ सच में ऐसे लोग बहुत कम होते हैं.. कुछ पंक्तियाँ मेरी तरफ से.. वो आत्मविश्वास जिससे खुद आगे बढ़ते जाये तलाश ले मंज़िल उन हौसलों की जो अत्यधिक अटूट हैं मैं कद्र करती हूँ ।...
Alok Khareजी ने ब्लॉग 4 वार्ता पर लिखा है, "आज जब पूरा देश एक बेटी, बहिन की हुयी दुर्दशा पर आहत है! लोग बाग़ आज ये सोचने लगे हैं की बेटी का बाप होना या भाई होना कोई पाप तो नही है!

बस उसी को समर्पित ये कविता समर्पित ..

दादा दादी, नाना नानी,
सबकी राजदुलारी बिटिया

मम्मी पापा , चाचा चाची
के आँखों कि ज्योति बिटिया

मामा बन हुआ बाबरा मन
गोद लिए घूमू इस उपबन

जब चहक उठती किलकारी इसकी
घर -आँगन कि खिलती बगिया

झूम उठता मन मयूर हे मेरा
मैं हूँ मामा, ये मेरी बिटिया

माँ माँ से बनता मामा है
जुग जुग जिए ये रानी बिटिया

दादा दादी, नाना नानी,
सबकी राजदुलारी बिटिया......"

...

 
आज के लिए इतना ही, इजाज़त दीजिये नमस्कार...

बुधवार, 19 दिसंबर 2012

बेशर्मी की हद है .. (कु)सभ्‍यता .. ब्‍लॉग4वार्ता .. संगीता पुरी


आप सबों को संगीता पुरी का नमसकार , क्रेडिट पॉलिसी में आरबीआई ने रेपो रेट और सीआरआर में कोई कटौती नहीं की है। रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं होने से आम आदमी के कर्ज पर ईएमआई कम नहीं होगी। जिससे लोगों को सस्ते कर्ज के लिए थोड़ा और इंतजार करना पडेंगा! आरबीआई के कदम के बाद देश के 3 बड़े बैंकों स्टेट बैंक, आईसीआईसीआई बैंक और एचडीएफसी बैंक ने साफ संकेत दिए हैं कि अभी वो कर्ज सस्ता नहीं करेंगे। बैंकों का कहना है कि अभी कॉस्ट ऑफ फंड काफी ज्यादा है। साथ ही बैंकों को नहीं लगता कि लोन ग्रोथ आने वाले समय में जोरदार रहेगी। इस खबर के बाद चलते हैं ब्‍लॉग जगत के चुने हुए पोस्‍टों पर , जहां सारे ब्‍लॉगर गुस्‍से में लाल पीले हो रहे हैं ।

बेशर्मी की हद है ... - *मैं इस पोस्ट को यहाँ शेअर न भी करूँ तो भी कोई फर्क नहीं पड़ता ... जनता जानती है यह कोंग्रेसी सरकार, इसके मंत्री और इन सब के सहयोगी कितने संजीदा है इतने गंभ...(कु)सभ्यता - *दिल्ली कभी हमरे सपना का सहर नहीं था. नौकरी के सिलसिला में दू-एक बार हमसे पूछा भी गया दिल्ली जाने के लिए, त हम मना कर दिए. मगर जब २००५ में हम दिल्ली आये,...प्रलय-....बाकी है ?? - सुना है 21 दिसंबर को प्रलय आने वाली है ..पर क्या प्रलय आने में कुछ बाकी बचा है ?.भौतिकता इस कदर हावी है की मानवता गर्त में चली गई है, बची ही कहाँ है इंसान...भेड़िये - दिन में ही अब घूमते भेड़िये तलाश में शिकार की और करते शिकार खुले आम, भयभीत हैं सभी लगाते गुहार मदद की पर जंगल का राजा शेर अपना पेट भरने के बाद सोया है ग...


बस देह भर - पुनरावृति हताशा की एक मौन अपने होने पर एक पीड़ा नारी होने की वही अंतहीन अरण्य रुदन बस देह भर ये अस्तित्व छिद्रान्वेषण पुन: पुन: चरित्र हनन या वस्त्...मर्जी के मालिक हो गए,अब यहाँ के सब कारिंदे है। - * * * * * * * * * * * * * * * * * * *आबरू के खातिर कुछ मर गये, तो कुछ जिंदे है,* *हर दरख़्त की शाख पे बैठे, डरे-डरे सब परिंदे है**।* *खौफजदा नजर आता है, ....रेप रेप रेप, अब ब्रेक -दिल्‍ली से केरल तक रेप की ख़बरें। भारतीय संस्‍कृति ऐसी तो नहीं। फिर क्‍यूं अपने घर में, देश की राजधानी में सेव नहीं गर्ल। लड़कियां कल का भविष्‍य हैं, कहकर....नफ़स-नफ़स कदम-कदम -नफ़स-नफ़स कदम-कदम बस एक फिक्र दम-ब-दम घिरे हैं हम सवाल से हमें जवाब चाहिए! जवाब दर सवाल है कि इंकलाब चाहिए! इंकलाब जिन्दाबाद! जिन्दाबाद इंकलाब! जहां अवाम के ...


हिन्दी ब्लॉगर्स फिर जुटेंगें - शनिवार, 29 दिसम्बर 2012 को सांपला में हास्य कवि सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा है। कवि सम्मेलन शाम 7:30 बजे से आरम्भ होगा। आप सबका स्वागत है। सांपला एक छोटा...एक गीत -सूरज लगा सोने पहाड़ों में - चित्र गूगल से साभार एक गीत -सुबह अब देर तक सूरज लगा सोने पहाड़ों में सुबह अब देर तक सूरज लगा सोने पहाड़ों में | हमें भी आलसी, मौसम बना देता है जाड़ों म...चिड़िया उड़ाते थे... - पुरानी कहावत है कि पुरुष के भाग्य का कोई अंदाजा नहीं लगाया जा सकता है. इस कहानी के नायक रूपचंद मौर्य गोरखपुर के पास एक साधनहीन, पिछड़े गाँव के मूल निवासी ...कन्या भ्रूण हत्या मजबूरी है !!!:( - (अपवाद होते हैं) -सिसकियों ने मेरा जीना दूभर कर दिया है माँ रेsssssssssssssss ............ मैं सो नहीं पाती आखों के आगे आती है वह लड़की जिसके चेहरे पर थी एक दो दिन में .


अलकरहा के घाव अउ ससुर के बैदी - छत्तीसगढ़ी में कई ऐसे मजेदार शब्द हैं जिसका प्रयोग छत्तीसगढ़ के हिन्दी भाषी लोग भी कभी कभी करते हैं और उस शब्द का आनंद लेते हैं. इनमें से कुछ को इनका अर...आरोग्य प्रहरी -आरोग्य प्रहरी (1)हरी मटर की फलियाँ खेत से तोडके खाइये मिल जाएँ तो .इनमें रहता है एक Carotenoid substance ,Lutein पता चला है इसका सेवन सफ़ेद मोतिया (Catar...आरटीआई का दुरूपयोग -महाराष्ट्र के ठाणे में जिस तरह से एक तथाकथित आरटीआई एक्टिविस्ट को पिछले हफ्ते पुलिस ने लोगों को ब्लैकमेल करके धन वसूलते र...



यूँ आया ऊँट पहाड़ के नीचे --- - हम नास्तिक तो नहीं हैं लेकिन आर्य समाजी विचारधारा के रहते मूर्ति पूजा में बिल्कुल विश्वास नहीं रखते। ऐसे में जब किसी ऐसे कार्यक्रम के लिए निमंत्रण आ जाता ...यादों के आइने में कवि बच्चन... - [समापन क़िस्त] बाद के वर्षों में पत्राचार और संवाद शिथिल होता गया। बच्चनजी अस्वस्थ रहने लगे थे और पढ़ना-लिखना उनके लिए कठिनतर होता गया था। दिन पर दिन बीतते...यहाँ शहीद आपस में बतिया रहे हैं -*यहाँ शहीद आपस में बतिया रहे हैं* - आशीष दशोत्तर ‘‘शहीदों की चिताओं पर लगेंगे हर बरस मेले, वतन पे मरने वालों का यही बाकी निशाँ होगा।’’ शहीदों की शहादत...एक कहानी दो सहेलियों की - *आज वाणी गीत जी के ब्लॉग ज्ञानवाणी से एक कहानी दो सहेलियों की * *शीर्षक है - "रूठना कोई खेल नहीं"*

कार्टून :- सन 2052 का भारतीय क्रि‍केट








मंगलवार, 18 दिसंबर 2012

बहारों फूल बरसाओ , मोदी का रंग छाया है .. ब्‍लॉग4वार्ता .. संगीता पुरी



आप सबों को संगीतापुरी का नमस्‍कार .. कई दिनों से सुर्खियों में शुमार गुजरात विधानसभा चुनाव के लिए एक्जिट पोल के नतीजे आ चुके हैं। सभी पोल यही बोल रहे हैं कि नरेंद्र मोदी की अगुआई में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) लगातार तीसरी बार सत्ता हासिल करने जा रही है। सभी एक सुर में कह रहे हैं कि 182 सीटों वाली विधानसभा में भाजपा की सीटें बढ़ेंगी। पोल यह भी कह रहे हैं कि 68 सीटों वाली हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस सरकार बनाएगी। एक्जिट पोल के नतीजों में इस तरह का मतैक्य बहुत दुर्लभ बात है। जिन टेलीविजन चैनलों ने पोल कराए हैं (कुछ का कहना है कि उन्होंने सर्वेक्षण ही कराया है), उनके बीच सीटों की संख्या पर मतभेद है। इस खास खबर के बाद चलते हैं आज की वार्ता पर ..

चांदनी रात मिलती रहे | - जीवन की आपाधापी के , उठते हुए बादल से, अहसास की धरा पर, उम्मीद की फ़सल खिलती रहे | घुमड़ते हुए ख्याल , कुछ उलझे से सवाल, कभी बूंद बनक...शर्त ... - धुंध छाया है शहर में, बस इक तेरी ही याद का गर भूलना चाहूँ तुझे, तो तू बता मैं क्या करूँ ? ... बगैर तमाशे के............ शोर क्या वजह हो सकती है 'उद...पपडाए अधरों की बोझिल प्यास - सुनो कहाँ हो ............? मेरी सोच के जंगलों में देखो तो सही कितने खरपतवार उग आये हैं कभी तुमने ही तो इश्क के घंटे बजाये थे पहाड़ों के दालानों में सु...तबादले अब होने लगे हैं - ढेरों तबादले होने लगे। हर रोज़ कोई नया ही चेहरा देखने को मिलता। कभी कोई नाम पूछने चला ‌आता तो कभी कोई पते के बारे में मालुमात करने। नज़रे इनती शक्की हो चली...

भौतिकवाद की दोस्ती - बात ज्यादा पुरानी नहीं है, या यूँ कहें की ज़हन में तरोताज़ा है। कॉलेज का प्रथम वर्ष समाप्ति पर था। कई नए दोस्त बने थे, उनमें से धीरज भी एक था। प्रथम सेमेस्टर...वे उधार लेने वाले :-( - ब्लॉग अपनी पर्सनल डायरी है न ? हाँ भाई हाँ! हाँ, यह बात अलग है लिखने वाला चाहे तो इसे सार्वजनिक कर दे या ना भी करे,मगर ब्लॉग तो अब ज्यादातर सार्वजनिक ही ह...उद्योगों की गुण्डागर्दी पर सरकारी चुप्पी ! - ऐसा नहीं है कि वंदना समूह की मनमानी की कहानी समाप्त हो गई है वह बेधड़क जारी है लेकिन ताजा मामला दुर्ग जिले के अहिवारा के समीप स्थापित हो रहे जे के लक्ष्मी ...
हास्य रस - *बिना हास्य कल्पना कहाँ !!! शरीर,मन,दिमाग की तंदुरुस्ती के लिए इस रस का सेवन आवश्यक है ..... तो जिसे जो पसंद आये , वो रस ले ले ....* * * [image: My Photo...

फलों में पोषक तत्व - फल : आम (इनमें केवल वे पोषक तत्व सूचीबद्ध है जो उल्लेखनीय मात्रा में उपस्थित होते हैं।) एक मध्यम आकार(कप परिमाण)के आम में 1.06 grams प्रोटीन, 135 केलरीज, ...आक्रोश नहीं... - आक्रोश नहीं, ध्यान से देखना, सोचना, समझना और कार्य अपेक्षित हैं। रेत से सिर निकाल आँखें खोल कर देखिये कि कैसे कैसे सपने इस धरती को लेकर देखे जा रहे हैं! ...निजी स्कूलों के लिए की गई एक प्रार्थना - निजी स्कूलों की कुछ बातें मुझे बहुत ही बुरी लगती है। एक तो यह कि वे जानबूझकर बच्चों को इतना होम वर्क देते हैं कि अकेला बच्चा उसे करने में असमर्थ हो जाता ह...यादों के आइने में कवि बच्चन... - [नवीं क़िस्त] कालान्तर में हम हरद्वार होते हुए पटना आ गए। भौतिक दूरियां बढ़ गई थीं, लेकिन बच्चनजी और पिताजी के मन की प्रीति अक्षुण~ण रही। पत्र आते-जाते रह...


रूठना कोई खेल नहीं ! - तुम ही हो माता ,पिता तुम ही हो ! तुम ही हो बन्धु ,सखा तुम ही हो ! प्रार्थना के बीच अधमुंदी आँखों से सुनीता ने अपनी पीछे की लाईन में देखा , कुसुम अब तक ...वजूद,,, -काश- तुम्हारे भी एक बेटी होती प्यार से उसका नाम रखते ज्योती, सहमी सहमी सिमटी सी- गुलाबी कपड़ों लिपटी सी- टुकुर टुकुर निहारती, जैसे बेरहम दुनिया को देखना चा...लिखो , लिखो , खूब लिखो ...- लिखो , लिखो , खूब लिखो खुरदरे , संकरे किनारे से भी धकेले हुए पीछे के पन्नों पर बनाए गये कँटीले बाड़ों में बिलबिलाते उन वंचितों के लिए लिखो , लिखो , खूब लिखो...ahiran : ek nadii upanyaas kee . -अहिरन : एक नदी उपन्यास की *बि*लासपुर जिले के पुराने गजेटियर (१९१० ई०) में एक लोकोक्ति उद्धृत है--जहर पिये ना माहुर खाए , मरे ला होवै तव मातिन जाए ")। इ...

मोदी : चमत्कार हुआ तभी हैट्रिक ! -*अगले *तीन दिनों तक टीवी न्यूज चैनलों पर गुजरात चुनाव का रंग दिखेगा, मेरे ख्याल से इसके अलावा कोई और खबर चैनल पर अपनी जगह नहीं बना पाएगी। अखबार भी गुजरात ...चुनाव संपन्‍न, मोदी को मिलेगा बहुमत - *-: वाईआरएन सर्विस :-* गुजरात विधान सभा चुनावों के नतीजे तो 20 दिसम्‍बर को आएंगे, लेकिन यह भविष्‍यवाणी तो एग्जिट पोल गुरू कर रहे हैं। विधान सभा चुनाव संपन्...बहारों फूल बरसाओ , मोदी का रंग छाया है ... -नरेन्द्र मोदी की हैट्रिक --बधाईयाँ, मिठाईयाँ, शहनाईयां---मोदी दिल्ली आओ --स्वागत है .. Zeal अगले तीन दिनों तक टीवी न्यूज चैनलों पर गुजरात चुनाव का रंग दिखेगा, मेरे ख्याल से इसके अलावा कोई और खबर चैनल पर अपनी जगह नहीं बना पाएगी। अखबार भी गुजरात चुनाव और नरेन्द्र मोदी से पटे रहेंगे। मोदी : चमत्कार हुआ तभी हैट्रिक !सच कहूं तो मीडिया ने जिस ऊंचाई पर गुजरात चुनाव को पहुंचा दिया है, उससे राजनीति में थोड़ी सी भी रुचि और दखल रखने वालों की जुबान पर सिर्फ एक ही सवाल है क्या नरेन्द्र मोदी लगातार तीसरी बार चुनाव जीत कर सरकार बना पाएंगे ?किसका है देश, हम किसके लिए मरें! - ईश्वर करे ऐसा दिन कभी न आए कि जब सियाचिन ग्लैशियर में बर्फीले तूफान से जूझते हुए देश की रक्षा में तैनात जवान की अन्तरात्मा देश से यह सवाल करे। आज हम जिन व...

Nature nurtures the brain - Nature nurtures the brain एकाग्रता बढ़ाता है प्रकृति का संग साथ ,पहाड़ों,पर्बतों घाटियों की सैर ,नदियों और सागर का किनारा .तदनुरूप हो जातें हैं प्रक...क्रश का फिर से मुझ पर टूट पड़ना - हाय !! ये क्या हाल हुआ? मैं फिर से उसकी सूरत के सम्मोहन में खो गया। इसी साल मार्च में उस पर पहली बार ध्यान गया था। उसके गले में एक चोकोर ताबीज़ बंधा था। च...कृषि यन्त्र और खेती - कृषि प्रधान देश होने के बाद भी भारत में जिस तरह से आज भी अधिकांश भागों में परंपरागत तरीके से खेती की जाती है उसके कारण से भी प...-लिव- इन -रिलेसनशिप- - *-लिव- इन -रिलेसनशिप- * * **माँ ने पूछा था ,* *शरद कैसी है बहु ,* *साथ नहीं आई ?* *नहीं माँ ,* *फिर कभी ...* *सुना है ,सुन्दर है **नौकरीपेशा है....* *बताओ...


आज के लिए बस इतना ही .. मिलते हैं एक ब्रेक के बाद ....

सोमवार, 17 दिसंबर 2012

पढ़ते-पढ़ते लिखना सीखो साथ-साथ...ब्लॉग 4 वार्ता... संध्या शर्मा

संध्या शर्मा का नमस्कार... जाड़ों की सुबह-सुबह सरकाकर सारे पर्दों को, खोलती हूँ दरवाज़ा जो....... मखमली धूप खिड़की की छड़ों से छनकर, हमारी दहलीज को पारकर, कमरे की हर चीज़ को छूने का प्रयास करती हुई, छू लेती है........ बिखेड़ती हुई, अपनी गरिमामय मुस्कुराहट कोने-कोने में....... इस सुनहले स्पर्श के सम्मोहन से खिल उठता है मन-प्राण और आत्मसात कर लेती हूँ इस छुअन को, अगली सुबह तक के लिये...लीजिये प्रस्तुत है आज की वार्ता......

अरे बाप रे! बंगाल टाइगर की आँखों में मेरा चेहरा.. - थियेटर में घुसने से पहले सर पर एडिडास की उलटी केप लगाए टिकट चेक करने वाले लड़के ने जब प्लास्टिक का चश्मा थमाया तो जितनी उदासीनता से उसके हाथों ने थमाया थ..सब बनेंगे अरबपति - मेरे सभी मित्रो को, मेरे साथ साथ, फोब्स की अगली अरबपतियों की सूची मे शामिल होने की हार्दिक बधाइयाँ और शुभकामनायें ! ( अरे आपको नहीं मालूम क्या ... ४ लोगो के... ..सब जानती हूँ ...........दिवास्वप्न है ये - इंतजार की हद पर ठहरा धूप का टुकड़ा देख कुम्हलाने लगा है नमी का ना कोई बायस रहा है हवाओं में भी तेज़ाब घुला है ओट दी थी मैंने अपनी मोहब्बत के टीके की पर..

श्रीमद्भगवद्गीता-भाव पद्यानुवाद (४१वीं कड़ी) - दसवां अध्याय (विभूति-योग -१०.१९-२८) श्री भगवान : मेरी दिव्य विभूतियाँ जो हैं, उनका अब करता हूँ वर्णन. मेरे विस्तार का अंत नहीं है, जो विशेष कहता ह..पढ़ते पढ़ते लिखना सीखो - पिछले कई दिनों से पढ़ रहा हूँ, बहुत पढ़ रहा हूँ, कई पुस्तकें पूरी पढ़ी, कई आधी अधूरी चल रही हैं। रात में बच्चों के सोने के बाद पढ़ना प्रारम्भ करता हूँ तो.... साथ-साथ - प्यार करते हो तुम,मुझसे तुमने अनगिन बार ये दोहराया है . मुझमें और तुममें कोई अंतर नहीं बार-बार यह समझाया है. पूर्णता के साथ भूलना कैसे संभव है ? भूलने के ...

बंधकर परिणय-सूत्र में - * बंधकर परिणय-सूत्र में, सहज हि उपजे प्रीत।* *रख पाये प्रेम सहेज के, वही है सच्चा मीत।।"* मनुष्य के सोलह संस्कार...हो तुम जीवन पथ में, मैं अकेला / साथी हो तुम मंजिल को पाने मैं निकला / साहिल हो तुम मेरे हृदय में उठती करुणा / आंसू हो तुम हर शै पर चमकने वाला / सितारा हो तुम . जीवन और जगत में / चेतना हो तुम सोच और कल्पना से परे / ऐसा रहस्य हो तुम सुख और आनंद के बीच / सच्चिदानंद हो तुम दृश्यमान सत्ता की / वास्तविक सत्ता हो तुम  ....मेरे हाथो की ये चूड़ियाँ न जाने क्या गुनगुना रही है....!! - मेरे हाथो की ये चूड़ियाँ न जाने, क्या गुनगुना रही है.... खनक-खनक मेरे हाथो में, याद तुम्हारी दिला रही है.....

मेरी सोच की डायरी के पन्ने - सालों पहले डायरी लिखने का दिल किया तो,एक डायरी हाथ में आते ही मैंने लिखनी शुरू कर दी| डायरी में लिखी अपने दिन-प्रतिदिन की सोच को आप सबके साथ साँझा करने क... भविष्य - भविष्य हर दिन सुबह सवेरे बनाती हूँ जब चाय देखती हूँ गर्म पानी के इशारे पे नाचती चाय की पत्ती उसका दिल जीतने का हर संभव प्रयास करती इतराती, इठलाती, बलखाती,..एक सीली रात के बाद की सुबह...... - नर्म लहज़े में शफ़क ने कहा उठो दिन तुम्हारे इंतज़ार में है और मोहब्बत है तुमसे इस नारंगी सूरज को.... इसका गुनगुना लम्स तुम्हें देगा जीने की एक वजह सिर्फ तुम्हा... 

सूचना प्रौद्योगिकी की सियासत - सूचना प्रौद्योगिकी ने भले ही पूरी धरती को एक गाँव बना दिया हो और हम सूचना समाज की ओर बढ़ चले हों पर भारत के गाँव बदलाव की इस बयार का सुख नहीं ले पाए हैं| ..कांग्रेसियों कि एक और कारगुजारी - घोटालो से घिरे कांग्रेसियों कि एक और कारगुजारी सामने आयी है सरकार ने देश के पहले स्वतंत्रता संग्राम के शहीदों की कर्मभूमि रहे अंडमान तथा निकोबार के ‘वाइपर ... राष्ट्र संरक्षण के लिए नहीं राष्ट्र भक्षण के लिए आरक्षण चाहिए - "इस सदी के दूसरे दशक के शुरुआती दौर में हम ठगे से खड़े हैं ...एक महास्वप्न का मध्यांतर है ....देश के संरक्षण के लिए किसी आरक्षण की जरूरत ही नहीं है यहाँ तो...

साहेब, इंडिया ले चलो - "जब आप मीरपुर खास के भिटाई कस्बे में पहुंचेंगे तो चौराहे के ठीक बीच में एक तम्बूरा आपका स्वागत करेगा। तंबूरे की विशाल प्रतिमा वाली इस जगह का नाम भी ...हम असली गांधी वादी हैं - हम असली गांधी वादी हैं हमें तो कोई भी लात मार जाए हम पैर पकड़ लेते हैं गुस्सा नहीं करते नरेन्द्र मोदी की तरह .हम शांत रहतें हैं . पाकिस्तान के गृह मंत्री... पाक, मलिक और हम - कहने को दोस्ती का पैग़ाम लेकर भारत आये पाकिस्तान के गृह मंत्री रहमान मलिक ने जिस तरह से सामान्य कूटनीतिक शिष्टाचार को कई...

" भिखारी कौन..........."* **लगभग एक घंटे की लम्बी लाइन में लगे रहने के पश्चात 'खाटू श्याम मंदिर' ,सीकर ,राजस्थान में दर्शन मिलने का नंबर आया | बहुत अच्छे दर्शन हुए प्रभु के | यह मंदिर बहुत सिद्ध मंदिर माना जाता है | इसके बाद हमने दर्शन किये ,'सालासर,बाला जी ,चुरू,राजस्थान ,मंदिर में बाला जी के ...लड़खड़ाते पांव मेरे - जबकि मैं पीता नहीं याद में तेरी जिऊँ, मैं आज में जीता नहीं, लड़खड़ाते पांव मेरे, जबकि मैं पीता नहीं, नाज़ नखरे रख रखें हैं, आज भी संभाल के, मैं नहीं इतिहास फिरभी, सार या गीता नहीं, तोलना है तोल लो तुम, नापना है नाप लो, प्यार मेरा है समंदर.. माँ ... तेरे जाने के बाद ... सब कह रहे हैं तू इस लोक से परलोक की यात्रा पर अग्रसर है कर्म-कांड भी इस निमित् हो रहे हैं पिंड से पिंड का मिलान साल भर रौशनी के लिए दीपक तीन सो पैंसठ नीम के दातुन ओर भी क्या क्या ...


 

आज के लिए इतना ही, इजाज़त दीजिये नमस्कार...

शनिवार, 15 दिसंबर 2012

तुम काबिल हो काबिले तारीफ हो ...ब्लॉग 4 वार्ता ... संगीता स्वरूप

आज की वार्ता में  संगीता स्वरूप  का नमस्कार ....चलिये शुरू करते हैं आज की वार्ता ....

हाय तुम्हारी यही कहानी ( कहानी )कॉल बेल का बटन दबाते समय नीरा के हृदय में बड़ी उथल पुथल हो रही थी – हो सकता है दरवाज़ा सौम्या भाभी ही खोलें या उनके पति विश्वास हों ! अगर कहीं सौम्या भाभी ही हुईं तो कैसे उनसे मिलूँगी ! कस के लिपट जाऊँगी उनसे ।तुम ..से ....तुम्हारे साथ .तुम /अबूझ पहेली थे /मेरे लिए ../जिसे बूझने का प्रयास /दे गया अनेक सवाल ------हो तुम ...जीवन पथ मेंमैं अकेला /  साथी हो तुम/मंजिल को पाने मैं  निकला / साहिल हो तुम /मेरे हृदय में उठती करुणा / आंसू हो तुम हर शै पर चमकने वाला / सितारा हो तुम .हम पर फ़िदा है ...हम पर फ़िदा है सदा -ए- मोहब्बत /की  है   इबादत   हम   करते  रहेंगे- ...साथ-साथ...प्यार करते हो तुम,मुझसे/तुमने अनगिन बार ये/दोहराया है .भानगढ़ के भुतहा किले का सच...राजस्थान मेंजयपुर अलवर के पास स्थित भानगढ़ का में भूत होने की कहानी देश-विदेश में चर्चित है | आज से कोई पांच सौ वर्ष पहले बसा यह समृद्ध नगर उजाड़ पड़ा है निर्माण ध्वस्त हो चुकें है महल भी खंडहर हो चुका है हाँ मंदिरों में मूर्तियाँ गायब होने के अलावा कोई नुकसान नहीं हुआ|...



पढ़ते पढ़ते लिखना सीखो...पिछले कई दिनों से पढ़ रहा हूँ, बहुत पढ़ रहा हूँ, कई पुस्तकें पूरी पढ़ी, कई आधी अधूरी चल रही हैं। रात में बच्चों के सोने के बाद पढ़ना प्रारम्भ करता हूँ तो कब घड़ी को दोनों सुईयाँ तारों की दिशा दिखाने लगती हैं, पता ही नहीं चलता है।....इस बार लिफ़ाफ़े में....हर शब जब कोई करीब नहीं रहता तो कुछ सबब रहते हैं पास....कुछ ख्याल और इक मिरी परछाई....खोजते खोजते उससे ही बतिया लेता हूँ....कितने लोग शैतान से लड़े और याद बन गये..एक बूँद ज़िन्दगी... संध्या शर्मा...........एक आंधी का इंतज़ार है  /एक तूफ़ान की ख्वाहिश है /झुकी आँखें राह तकती हैं /धुंध है, ओस बिखरी सी है........तुम जुदा हुए तो क्या हुआ.......तुम जुदा हुए तो/क्या हुआ/मुझे फर्क नहीं पडा/नुकसान तुम्हारा ही हुआ।


"पीले फूल" ...बेशक..../राहों में/खिले थे फूल/हाँ , "पीले फूल" .....लंदन में नतीज़ा कुछ नहीं निकला..संवैधानिक मोर्चे पर लड़ने के लिए शिष्टमंडल के प्रतिनिधि के रूप में गांधी जी और सेठ हाजी हबीब 10 जुलाई 1909 को लंदन पहुंचे। लंदन पहुंचते ही बिना समय गंवाए गांधी जी अपने काम में जुट गए।....धोबीघाट.......घर के पिछवाड़े एक नदी है छोटी,उथली सी /जिसके पाट पर बिछी हैं तमाम पटिया/रोज तडके आतीं हैं आवाजें वहाँ से/कुछ सपनों के पछीटे जाने की..............सज़ा ...जब से सुनयना को ,डॉक्टर श्री कान्त ने ,विजय और सुमन को उम्र कैद की सजा की खबर सुनायी है तब से उसके मन में  एक अजीब सी हलचल मची हुई है। उसे नहीं मालूम यह बैचेनी है या अजीब सा सुकून है ....


खोये हुए लोग कहाँ चले जाते हैं?.......बहुत साल पहले दूरदर्शन पर एक प्रोग्राम आता था...मैं उसे देख कर हमेशा बहुत उदास हो जाती थी. सोचती थी कि ये दुनिया कितनी बड़ी है कि इतने सारे लोग खो जाते हैं और किसी का पता भी नहीं मिलता............हँसी बोती है बेटी .अँगुली थाम /जो  चलती थी कभी/वो मेरी बेटी/कन्धे तक पहुँची/अब बड़ी हो गई ।............कुछ क्षणिकाएं.........ना तौलो मान मेरा सोने-चांदी से /बड़ी आस से आयी हूँ अपना नैहर छोड़ के। /अपना लो मुझे अपनी बेटी समझ के..............साँवली बिटिया ..रंग सांवला बिटिया का /कैसे ब्याह रचाऊँगा /बेटे जो होते सांवले...माँ तुम्हारा चूल्हा....माँ/बंद होने वाला है/तुम्हारा चूल्हा/जिसमे झोंक कर/पेड़ की सूखी डालियाँ/पकाती हो तुम खाना...लम्हे भर की बात नहीं........सपनों वाली रात नहीं /दिन के उजाले साथ नहीं /एक ज़रा सा दिल टूटे तो /ये दुनिया अपने पास नहीं ...समझौतों की कोई जु़बान नहीं होती !!तल्‍लीन चेहरों का सच /कभी पढ़कर देखना /कितने ही घुमावदार रास्‍तों पर /होता हुआ यह .......देह से परे मन की चाह....देह की सीमा से परे/बन जाना चाहती हूँ/एक ख्याल/एक एहसास ,...तुम काबिल हो, काबिल-ए-तारीफ़ हो..बेहद बेतकल्लुफ़ी वाली शाम थी वो... एक हल्की-सी सर्दी वाली शाम कि जब माहौल का तक़ाज़ा होता है उम्र और अनुभव के अंतर को भुलाकर उस बेतक़ल्लुफ़ी, उस अनौपचारिकता की रौ में बहते हुए वो कहना और सुनना, ..१२-१२-१२ का जादू : ट्रेन में शादी...कहते हैं जादू वो जो सर चढ कर बोलेजैसे बंगाल के काले जादू के बारे में कहा जाता था. पर १२-१२-१२ के जादू ने तो बंगाल क्या अफ्रीका तक के जादू को फेल कर दिया.


आज के लिए बस इतना ही .... फिर मिलते हैं......  नमस्कार 

शुक्रवार, 14 दिसंबर 2012

ओ राँझेया ....देख वे तेरी हीर दीवानी होयी !!!...ब्लॉग 4 वार्ता... संध्या शर्मा

संध्या शर्मा का नमस्कार.....ये किनारा भी , मैं तुम्हें दे दूँ... वो किनारा भी , मैं तुम्हें दे दूँ ये गझिन गारा भी , मैं तुम्हें दे दूँ और ये धवल धारा भी , मैं तुम्हें दे दूँ मेट कर अपनी बनावट , मैं ढह जाऊँ तेरे अपरिमित ज्वार को , मैं सह जाऊँ ये तनु तरलता भी , मैं तुम्हें दे दूँ ये मृदु मधुरता भी , मैं तुम्हें दे दूँ ये चटुल चपलता भी , मैं तुम्हें दे दूँ और ये उग्र उच्छ्रिंखलता भी , मैं तुम्हें दे दूँ तेरी हर साँस में , ऐसे मैं बह जाऊँ हर साँस की गाथा , हर किसी से कह जाऊँ ये परिप्लव प्राण भी , मैं तुम्हें दे दूँ ये निवद्द निर्वाण भी , मैं तुम्हें दे दूँ ये अमित अभिमान भी , मैं तुम्हें दे दूँ और ये अमर आत्मदान भी... लीजिये प्रस्तुत है आज की वार्ता इन लिंक्स के साथ...
मुर्दा इंसानों की भीड़ में गुमनाम ज़िंदगी !!! अखबार। इन दिनों दुनिया की सबसे खतरनाक वस्तु जान पड़ता है...जो दिल में एक चुभन सी पैदा करता है और घोर निराशावाद की ओर धकेलता नज़र आता है। ये मैं तब कह रहा हूं जबकि मैं विधिवत् जनसंचार एवं पत्रकारिता में परास्नातक उपाधि ग्रहण कर... के वतन बदर हों हम तुम मनुष्य की बुद्धि में एक दौड़ बैठी हुई है। वह हरदम इसी में बना रहता है। दौड़ने का विषय और लोभ कुछ भी हो सकता है। इस दुनिया की श्रेष्ठ वस्तुओं को प्राप्त करने की इस दौड़ में दौड़ते हुये को देख कर हर कोई मुसकुराता है।  मैं अहंकारअहंकार बोल उठा? 1* पिताजी ने एक दिन कहा तुम मेरी तरह मत बनना अन्यथा मेरी भांति मरने के बाद लोग तुम्हें भी मूर्ख कहेंगे...

ये बिरही सुर कोशिशों साधे नहीं जाते - * * *पारिजात **जिस घड़ी निःशब्द ** झरते हैं धरती की गोद में गोपियां पैर की झांझर उतार कर दबे पाँव लौटती हैं रास से . रात की तारों जड़ी ओढ़नी सिमटती . मात्र एक शब्द मात्र एक 'शब्द' की घनघोर टंकार ने ** उसकी समस्त चेतना को संज्ञाशून्य कर दिया है ! उस एक शब्द का अंगार सदियों से उसकी अन्तरात्मा को पल-पल झुलसा कर राख कर रहा है ! चकित हूँ कि...चाह है उसकी मुझे पागल बनायेचाह है उसकी मुझे पागल बनाये, बेवजह उड़ता हुआ बादल बनाये, लोग देखेंगे जमीं से आसमां तक, रेत में सूखा घना जंगल बनाये, जान के दुखती रगों को छेड़कर, दर्द की थोड़ी बहुत हलचल बनाये, ...

लो !!! टूट के बिखर गई ...मेरी भी माला ... - *मेरा मैला आँचल न देख * *मेरी तुझसे ये दुहाई है ,* *मैंने अपनी साफ़गोई के नीचे * *मखमली चादर बिछाई है ||* --अकेला *न जाने यह जीवन में, आया कैसा... .आईना - ये कैसी कशमकश है कल दिन भर उस से बात नहीं हुई और मैं बार बार उसे ही सोचती रही कि अभी फ्री होगा अब मुझे उसका फोन आएगा, मेरे मोबिल पर अभी उसका कोई sms आएगा,... .कल्पना सी साकार हो रही ...!! - स्निग्ध उज्जवल चन्द्र ललाट पर ..... विस्तृत सुमुखी सयानी चन्द्रिका ....भुवन पर .... निखरी है स्निग्धता .. बिखरी है चन्द्रिका ......... पावस ऋतु की मधु बेला ... बरस रहा है मधुरस ... सरस हुआ है मन .. बादल की घनन घनन ... झींगुर की झनन झनन .. जैसे लगे बाज रही ... ... किंकनी की खनन खनन .. मन करता मनन मनन... धन्य हो रहा जीवन प्रतिक्षण.. चांदनी स्निग्ध स्वर्ग सी ... विभा बिखेर रही .. डाल-डाल झूल रही ... बेलरिया फूल रही.... पात पात झूम रही .... झूम झूम लूम रही .... प्रीति मन चहक रही .. रात रानी महक रही .... शीतल समीर साँय साँय डोले ..

सहकारी सदन में संगोष्ठी आयोजित - छत्तीसगढ़ में सहकारिता आन्दोलन को मिला व्यापक जनाधार - अशोक बजाज मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार के नौ वर्ष पूर्ण होने और उनके ..दो मिनट बस... - * फेसबुक के एक स्टेटस से प्रेरित - "मैं हाउस वाइफ हूं और घर में कुछ काम नहीं होता है।" * उठिये उठिये *परिभाषा : *उठ रही हूं .... पानी नल में आये या ना आये... और ट्रेन छूट गई - नवम्बर में एक ऐसा अदभुत योग बन रहा था कि मुझे अपने खाते से मात्र दो छुट्टियां खर्च करके उनके बदले में आठ छुट्टियां मिल रही थीं। यह योग बीस से सत्ताईस नवम्ब... 

सुख से विनती - रहो रहो सुख कुछ और दिन रहो मेरे साथ कुछ दिन और साथ रहने का दे दो सौगात फिर तो झेलना है दुख जीवन के पचम से यह जो भ्रांति, अकर्म, अविश्वास, अशांति और निजता की ...  एक गीत -शायद मुझसे ही मिलना था - चित्र -गूगल से साभार एक गीत -शायद मुझसे ही मिलना था बहुत दिनों से गायब कोई पंछी ताल नहाने आया | चोंच लड़ाकर गीत सुनाकर फिर -फिर हमें रिझाने आया | ... ओ राँझेया ............देख वे तेरी हीर दीवानी होयी !!! भीगते मौसम की कराहटें जैसे जिस्म की खाल में कोई रेशमी बूंटे टाँग रहा हो तेज़ाब में सुईयाँ डुबा डुबाकर … देख ना कितनी खूबसूरत कशीदाकारी हुई है रोम- रोम पर पड़े फफोलों पर तेरा नाम ही उभर कर आया है अब कौन चीरे उन फोड़ों को जिन पर महबूब का नाम उभरा हो जीने का मज़ा तो अब आएगा जब टीस में भी तेरा अक्स नज़र आएगा मैंने मांग ली है दुआ रब...

एक संगीतमय कहानी - महफि‍ल - एक संगीतमय कहानी दीप्‍ति के साथ......महफि‍ल रचना - वि‍जय ठक्‍कर सोहा और वि‍श्‍वराज दो पुराने साथी जब बरसों बाद मि‍ले, तो यादों का सि‍लसि‍ला थमने क...भ्रम के कुहासे को छांटने का वक्त - *चन्द्रिका प्रसाद चन्द्र* के कुहासे को छांटने का वक्त सं सार इस बात को बिना न-नुकुर के स्वीकारता है कि भारतीय सभ्यता और संस्कृति विश्व की प्राचीनतम संस्कृति...  मलाल है जिंदगी से ,..... - क्यों मिलता है ऐसा हाल, मलाल है , जिंदगी से , क्या पहनने , ओढ़ने को सिर्फ दर्द ही हैं, सवाल है जिंदगी से- भूख, कचरों में ढूंढ़ थ...

सच का सामना

लगभग एक वर्ष से हिंदी ब्लॉग जगत के चर्चित ब्लॉगर ललित शर्मा के साथ राजस्थान में अलवर जयपुर के पास प्रसिद्ध भानगढ़ के भुतहा किले की यात्रा पर चलने के कार्यक्रम पर चर्चा होती रही| ललित जी के साथ मैं भी इस चर्चित किले में जाने के लिए वर्षों से उत्सुक था आखिर इतने चर्चित किले में जाने की अभिलाषा कोई कैसे छोड़ सकता है| आखिर ११ दिसंबर को ललित जी के साथ भानगढ़ जाने का मौका मिल ही गया| ललित जी एक शादी समारोह में भाग लेने सीकर आये हुए थे, सो हमने ११ दिसंबर को आपस में जयपुर से एक साथ होकर भानगढ़ जाने का कार्यक्रम बनाया| जयपुर से भानगढ़ जाने की बस सुविधा व रास्ते के बारे में जानकारी लेने के लिए मैंने अपने जयपुर के एक पत्रकार मित्र प्रदीप शेखावत को फोन किया तो इनका जबाब था- “कहाँ बसों में धक्के खायेंगे, सुबह जयपुर पहुँचकर मुझे फोन कर देना मैं आपको अपनी कार से भानगढ़ किले की यात्रा करवा दूँगा साथ ही आपकी कुलदेवी जमवाय माता के दर्शन भी करवा दूँगा|”..


ओ..त्तेरी की...

 

अगली वार्ता तक के लिए दीजिये इजाज़त नमस्कार........ 

गुरुवार, 13 दिसंबर 2012

तुम परे हो, तिथियों से, रहो सदा, 'अ-तिथि' बन कर...ब्लॉग 4 वार्ता... संध्या शर्मा

संध्या शर्मा का नमस्कार.....चुनाव आयोग की आपत्ति के एक दिन बाद पेट्रोलियम मंत्री एम वीरप्पा मोइली ने बुधवार को कहा कि सस्ते एलपीजी सिलेंडरों की संख्या बढ़ाए जाने पर फैसला अभी नहीं किया गया है और यदि ऐसा फैसला होता तो इसकी सूचना निर्वाचन आयोग को जरूर दी गई होती।मोइली ने संवाददाताओं से कहा कि अगर प्रस्ताव तैयार कर लिया गया होता और इसकी घोषणा करनी होती या फैसले ले लिए गए होते तो निश्चित तौर पर मैंने चुनाव आयोग को लिखा होता। मोइली ने कहा कि सरकार बार-बार कहती रही है कि सब्सिडी छह सिलेंडर तक सीमित करने के फैसले की समीक्षा की जा रही है और उन्होंने मंगलवार को सीआईआई [उद्योग मंडल] के एक कार्यक्रम के दौरान अलग से संवाददाताओं द्वारा पूछे गए सवाल पर यही बात दोहराई थी। ...देखिये अब आगे क्या फैसला होता है... आइये अब चलें ब्लॉग नगरिया की सैर पर इन लिंक्स के साथ...
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ममता की मिठास ...... माँ की जगह कोई भी नहीं ले सकता। हर औरत को महसूस होता है कि वह अपनी माँ से बेहतर माँ नहीं सकती।..बस यादें रह जाती हैं - *समय,इंसान,पेड़,पौधे .... कुछ तो नहीं ठहरा है . विधि विधान सही हो तो आत्मा भी मुक्त हो जाती है . यादों के सिवा कुछ नहीं रह जाता और यदि इतिहास गवाह ना बने....समय, मनुष्य और मेरी उलझन - कल जो कुछ हुआ उससे उलझन में हूँ। बड़ा या कि बलवान कौन है - समय या मनुष्य? कल रात ‘वे’ आए थे। बरसों से उन्हें देखता आ रहा हूँ। सम्पन्नता के सहोदर थे। ...
 
आपको 12.12.12 की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं ! - आपको 12.12.12 की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं ! - अशोक बजाज .हृदय हमारा - निर्मलतम था हृदय हमारा, निर्दयता का वृहद ताण्डव, स्वार्थपरक जीवन का मूल्यन । और घृणा के कई बाणों से, छिला सदा ही हृदय हमारा ।। लोलुपता का घृणित ... .. बाहर तकरार देखिये - कैसा अजीब रिश्ता, व्यवहार देखिये लड़ते हैं, झगड़ते हैं मगर प्यार देखिये रहते नहीं जुदा ये कभी बात मजे की दिल में है प्यार, बाहर तकरार देखिये बाहर में कहते ....
 
हिन्दी ब्लॉगरी का दशकोत्सव: लाटदेश का गणचुनाव और सफेद घर शैली - कालयात्री जी बहुत दिनों से समय ‘में’ यात्रा कर रहे हैं। पुरातन काल के सन्दर्भों और ग्रंथों की खोज में कुछ भी करने पर आमादा रहते हैं। यहाँ तक कि सड़क किनार.जीवन यात्रा को विराम कब मिलेगा? - 10 नवंबर- पूरा दिन जैसे सर्रर्रर्र से बीत गया हो. पूरे हफ्ते की मेहनत का रंग आज दिखा. एक सेमिनार होना था जो खूब अच्छा हो गया. कैम्पस में लोगों से बात करते.....हकीकत ... - उनकी आशिकी में, हमने नाम कमाया है या हुये हैं बदनाम ये जिससे पूंछो,........................ तो वो चुप हो जाता है ? ... उन्हें, फर्जीवाड़े की आदत कुछ.. 
 
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सितार के सरताज ... पंडित रविशंकर नहीं रहे - *पंडित रविशंकर ( April 7, 1920 - **December 11, 2012 )*भारत रत्न पंडित रविशंकर जी को विनम्र श्रद्धांजलि और शत शत नमन ! ..सितार के जादूगर पंडित रविशंकर नहीं रहे - *-: वाईआरएन सर्विस :- * फेफड़ों के संक्रमण से जूझ रहे मशहूर सितार वादक पंडित रविशंकर का अमरीका में निधन हो गया है। वो इस समय 92 वर्ष के थे। भारत रत्‍न ..पंडित रविशंकर नहीं रहे...खुशदीप - पंडित रविशंकर 7 अप्रैल 1920-11 दिसंबर 2012 *सुप्रसिद्ध सितारवादक और संगीतज्ञ पंडित रवि शंकर का 11 दिसंबर को अमेरिका के शहर सैन डिएगो में निधन हो गया...92 सा... 
 
मैं दफ्तर आया था अपने जीवित होने का प्रमाण पत्र देने -- - शनिवार को एक बजे अस्पताल से निकला ही था कि एक फोन आया -- डॉ साहब , मैं आपके अस्पताल से ही बोल रहा हूँ। आप निकल गए क्या ? मैंने पूछा -- आप कौन बोल रहे हैं?...ओ..त्तेरी की... - *ओ..त्तेरी की..*. * **तुम भी बड़े वाले हो...माइंड ब्लोइंग, ओ...त्तेरी की...लग गई वॉट...इट इज हॉट...* *चक्कर क्या है? जिसे देखो वही इन शब्दों को दाग रहा है ...अरे डॉक्टर यह दिल है मेरा - "अरे डॉक्टर यह दिल है मेरा वह और होंगे जिनका दिल मशीन होता है मेरा दिल लोगों के हंसने पर हंसता है लोगों के रोने पर रोता है स्नेह से देख ले कोई तो इसमें भी क...
 
" तिथियों से परे............" - तुम परे हो , तिथियों से , रहो सदा , 'अ-तिथि' बन कर | बाट जोहूँ , आस छोड़ दूं , आ जाओ , तुम आहट बन कर | नींद खो जाए , चैन बिछड़ जाए , आ जाओ तुम , ख़्वाब ....जाड़े की नर्म धूप ...... - बादलों संग खेलते कूदते मंद सूरज की मस्ती में जाड़े की नर्म धूप पूनम के चाँद की बिखरती चाँदनी की तरह बंद आँखों के पार मन के शून्य में अपने क्षणिक एहसास के ...शादी की पहली रात.... - *शादी की पहली रात को नवविवाहित जोड़े ने तय किया की वो सुबह कोई भी बिना कारण दरवाजा खटखटाएगा तो वो दरवाजा नहीं खोलेंगे. सुबह पति के माँ ने दरवाजा खटखटाया. दो.. .
 
 
 
 
 

अगली वार्ता तक के लिए इजाज़त दीजिये नमस्कार........

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