शुक्रवार, 24 सितंबर 2010

लाउडस्पीकर होना--तीन तार की चाशनी--बी.बी.सी.--ब्लॉग4वार्ता---ललित शर्मा

ललित शर्मा का नमस्कार, चलते हैं ब्लॉग वार्ता पर

पारुल कह रही हैं 

क्वार की आहटों में
तुम गा रही हो फाग

आबिदा,
मौसम-बेमौसम
एक तुम्हारी ही आवाज़ भली
एक तुम्हारी ही लाग…

जाने
कैसे गुहारती हो
वो
ह़र हाल सुन ही लेता है...

खनन- खन खनकता है
तब ही
तुम्हारा ह़र लफ्ज़ ,
तुम्हारी ह़र बात…

बाक़ी तो

तीन तार की चाशनी ,झूठे बोल पिया के

अरुण राय लिख रहे हैं समय घड़ी के बंद होने से नहीं रुकता समय ना ही आँख बंद कर लेने से समय चलता रहता है अपनी गति से समय के साथ बदलता रहता है परिवेश परिवेश में होते हैं परिवर्तन कुछ सार्थक निरर्थक भी कुछ नहीं भी लेकिन समय...दे्खिए कॉमनवेल्थ का सच दिखाएंगे कार्टूनिस्ट इरफ़ान- मतलब मामला गंभीर है खुशदीप जी कह रहे हैं जरुर देखिए--अगर आप दिल्ली में हैं और रविवार २६ सितंबर को कुछ सार्थक देखना चाहते हैं तो प्रेस क्लब पहुंचे...आपको वहां कार्टूनिस्ट इरफान की कूची से कॉमनवेल्थ गेम्स की गफ़लत, भ्रष्टाचार, सरकारी काहिली का हर रंग देखने को .

बी.बी.सी. को यह क्या हो गया ...... सवाल है धीरु सिंग जी का, हम तो यही कहते हैं ये तो बीबीसी वाले ही जाने उनका क्या इरादा है, हां अवधिया जी जरुर जान सकते हैं भारत में आलू का इतिहास, आलु कचालु कहां गए थे।

जाकिर अली पोयम सुना रहे हैं बच्चों का मन बहला रहे हैं रेनी डे भई रेनी डे।छुट्टी के हैं हथकंडे, रेनी डे भई रेनी डे। बरखा नहीं निगोड़ी है, गरमा गरम पकौड़ी है। इक्के एक, न दुक्के दो सोमू बोले छक्के छे। पानी बरसे छम छम छम छोड़ो भी अगड़म-बगड़म। बड़ी-बड़ी बौछारों के बादल बरसाता डं..रविन्द्र प्रभात जी ने पूछा है,.क्या ठीक हों जाएगा ? हमें तो पता नहीं, ठीक करने वाला ही जाने।जब -* *बीमार अस्पताल की बीमार खाट पर पडी* *मेरी बूढ़ी बीमार माँ खांस रही थी बेतहाशा * *तब महसूस रहा था मैं * *कि, कैसे - मौत से जूझती है एक आम औरत । * *कल की हीं तो बात है * *जब लिपटते हुये माँ से * *मै...

मैं लाउडस्पीकर होना चाहता हूँ हो जाओ भैया-एम्पलीफ़ायर जरा तगड़ा रखना,हे राम, हा राम - चैनलों पर रामभक्तों का प्रस्तुतिकरणहर चैनल पर इस तरह से दिखाया जा रहा है जैसे कि राम का नाम लेना गुनाह हो गया हो. बड़ी शर्मिन्दगी का अहसास कराया जाता है हर राम भक्त को. रामभक्तों की आस्था पर जैसे प्रश्न उठाये जा रहे हैं, क्या किसी अन्य धर्मा..

शुक्ल पक्ष से भी ज़्यादा धवल ये कृष्णपक्ष है सच है अलबेला भाई-न सत्तापक्ष है न प्रतिपक्ष है अब पन्द्रह दिन तक केवल पवित्र पितृपक्ष है ये वो उज्ज्वल मुहूर्त है जब हमारे पुरखे हमें उम्मीद से देखते हैं ये वो पावन पखवाड़ा है जब हम हमारे मूल को करीब से देखते ह...विद्यालय का अर्थ जानिए अंतर सोहिल से, हम तो कभी गए ही नहीं विद्यालय में, हमारे समय में तो पाठशाला थी, उर्वशी दूसरी कक्षा में है। उसकी हिन्दी पाठ्य पुस्तक "बरखा" के एक पाठ में *विद्यालय का अर्थ स्कूल बताया गया है। * क्या यह सही है। क्या *“पाठशाला”* नहीं होना चाहिये? क्या स्कूल शब्द "हिन्दी" का शब्द है? या ...

शुक्र है संकट टला--अच्छा हुआ टल गया कल *24 सितम्बर है. इसे मीडिया की मेहरबानी कहें या सरकारों और नेताओं की कि इसे एक ऐसा कुहासे से आशंकित दिन बना दिया गया है मानों कोई एक बड़ी घटना होने वाली है जिसके होने की सशंक प्रतीक्षा में कई लोग दुबले ...

शाहनवाज भाई कह रहे हैं मंदिर-मस्जिद बहुत बनाया

मंदिर-मस्जिद बहुत बनाया, आओ मिलकर देश बनाए
हर मज़हब को बहुत सजाया, आओ मिलकर देश सजाएं

मंदिर-मस्जिद के झगड़ों ने घायल कर दिए लाखों दिल
अपने खुद को बहुत हंसाया, आओ मिलकर देश हसाएँ

मालिक, खालिक, दाता है वो, सदा बसा है मन-मंदिर में
फिर भी उसका घर है बसाया, आओ मिलकर देश बसाएँ

गाँव, खेत, खलिहान उजड़ते, आँखे पर किसकी नम है?
अपने घर को बहुत चलाया, आओ मिलकर देश चलाएं

अपने घर का शोर मचाया, दुनिया के दिखलाने को
इतना प्यारा देश हमारा, आओ मिलकर देश दिखाएँ

नफरत के तूफ़ान उड़ा कर, देख चुके हैं जग वाले
प्रेम से पार ना कोई पाया, आओ मिलकर प्रेम बढाएँ

मत लूटो अब मंदिर-मस्जिद, जीने दो हर इंसा को
'साहिल' भारत की गलियों में, चलो ख़ुशी के दीप जलाएं

एक हास्य कविताकौन घड़ी में भैया हम घर में टीवी लाये, केबल वाले ने भी आकर झटपट तार लगाये, झटपट तार लगाये , टी वी हो गया चालू, दोसो रुपये में बिक रहा दस रूपये का आलू, दस रूपये का आलू हमने कान लगाये, अंकल चिप्स...

 

शर्म के मायने !भगवान् का शुक्रिया अदा कीजिये कि "कॉमन वेल्थ" के नाम पर आज सुबह से अभी तक भ्रष्टों द्वारा बिछाई गई देश के करदाता के खून पसीने की रकम का कोई हिस्सा सरसरी तौर पर टूटकर या ढह कर बेकार नहीं गया। वो कह रहे है क...जब सिगरेट के कारण मोतीलालजी को फ़िल्म छोड़नी पड़ीपहले के दिग्गज फिल्म निर्देशकों को अपने पर पूरा विश्वास और भरोसा होता था। उनके नाम और प्रोडक्शन की बनी फिल्म का लोग इंतजार करते थे। उसमे कौन काम कर रहा है यह बात उतने मायने नहीं रखती थी। कसी हुई पटकथा और स...

रोटी पहले या खुदानिर्णय जो भी कोर्ट का मिल सब करें प्रणाम। खुदा तभी मिल पायेंगे और मिलेंगे राम।। मंदिर-मस्जिद नाम पर कितने हुए अधर्म। लोग समझ क्यों न सके असल धर्म का मर्म।। हुआ अयोध्या नाम पर धन-जन का नुकसान। रोटी पहले या ...खुश्क हवा तंग नमी फूल कैसे खिलेंसामने मुँह फेरे हुए हैं अपने देखो गैरों से कहाँ किये जाते हैं गिले सवाल नज़रों का है दूर-पास की पहचान न पाए हम जब-जब मिले दरख़्त साँस भी नहीं लेते अब तो शाख जन्मों से स्थिर पल भर न हिले उनके एहसास हो चले ब...

चलते चलते एक पेंटिंग आर्ट गैलरी से

 
अनाज से बनी पैंटिग
ब्लाग वार्ता को देते हैं विराम-- एक वीडियो देखिए

23 टिप्पणियाँ:

सुन्दर चर्चा
धन्यवाद

अच्छी चर्चा बधाई
न जाने क्यूँ किसी एरर के कारण हिंद देश के निवासी नहीं सुन पाए |
फिर से दोपहर में कोशिश करूंगी | आशा

चर्चा के लिये धन्यवाद ललित जी। तस्वीरों के साथ सुन्दर चर्चा तो आप करते ही हैं...

अच्‍छे लिंक्स .. बहुत सुंदर वार्ता !!

धन्यवाद अच्‍छे लिंक्स के लिये, तस्वीरों के साथ सुन्दर चर्चा तो आप करते ही हैं.... बहुत सुंदर

अच्छी चर्चा बधाई ललित जी।

इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

आज की चर्चा का स्टाइल भी पसंद आया। बधाई।

बहुत अच्छी चर्चा पढ़ने को मिलती हे। आपके ब्लॉग पर इसके लिए आपको बहुत बहुत धन्यवाद

सुन्दर चर्चा.. अच्छे लिन्क्स.. मुझे शमिल करने के लिये शुक्रिया...

अछे लिंक्स मिले आभार.

बहुत सुंदर चर्चा जी, धन्यवाद

मस्त वार्ता लगाई है, ललित भाई !

बहुत बढ़िया चर्चा ..........

सदा की तरह.......

बढ़िया चर्चा, बढ़िया लिंक ....आभार

यहाँ भी आये और अपनी बात कहे :-
क्यों बाँट रहे है ये छोटे शब्द समाज को ...?

हम्म सभी पोस्ट ऐसी चुनीं हैं जो चर्चा किये जाने लायक थीं.. आभार सर जी

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