सोमवार, 20 सितंबर 2010

ज़िंदगी के श्वेत पन्नों को न काला कीजिये-जरा अँधेरा होने से रात नहीं---ब्लॉग4वार्ता--ललित शर्मा

नमस्कार मित्रों, पिछले कई दिनों से मैं ब्लॉग पर कम ही पहुँच पा रहा था. क्योंकि ललित कला पर बहुत ज्यादा काम करना पड़ रहा है और ललित डोट कॉम पर पोस्ट भी नहीं लिख पा रहा हूँ. विगत एक सप्ताह से शिवम् और गिरीश दादा ने ब्लॉग4वार्ता पर पोस्ट लगायी. आज वार्ता पर चलिए मेरे साथ और सैर कीजिये कुछ उम्दा चिट्ठों की.......
सबसे पहला चिटठा लेते हैं.याज्ञवल्‍क्‍य जी का ये कहते हैं..चल बता गूरूजी मिलही कि नईमैं हैरान था, मगर यह हैरानी परेशान कम खूश ज्‍यादा कर रही थी, नन्‍हे बच्‍चों की लंबी फौज पूरे रेलमपेल के साथ सात किलोमीटर लंबा सफर पैदल तय कर वहां पहूंची थी जहां सरकारी हुक्‍मरानों का दरबार लगता है। मामल...कुंवर जी कह रहे हैं.अब कैसे मेरे भ्रमो का निवारण हो... मानव मन की प्रकृति है या मेरे मन का कोई षड़यंत्र है मुझे नहीं पता!जब भी मै कुछ सोचता हूँ तो किसी भी नतीजे पर स्पष्ट नहीं पहुँच पाता हूँ!* *आरम्भ आवेश से कर के अन्त को जूझता हूँ,* *जब कुछ सुलझा नहीं पाता त...

“मीडियाः नया दौर, नई चुनौतियां”पत्रकार एवं मीडिया विश्वेषक संजय द्विवेदी की पुस्तक “मीडियाः नया दौर, नई चुनौतियां” का लोकार्पण समारोह 22 सितंबर, 2010 भोपाल स्थित माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के सभागृह...आयोजित किया गया है, कार्यक्रम के मुख्यअतिथि वरिष्ठ पत्रकार एवं सांसद प्रभात झा होंगें तथा कार्यक्रम की अध्यक्षता पत्रकारिता विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बृजकिशोर कुठियाला करेंगें,परछाइयों की दौड़ है ! दिल कि बात पर स्वराज्य करूँ जी कह रहे हैं..प्यार की मंजिल नहीं है तेरे शहर में सरल-सहज दिल नहीं है तेरे शहर में ! ...

यहाँ तो भ्राताश्री से भी बड़े बड़े नाम हैं....आज कुम्भकरण को भी गुस्सा आ गया वो भी ब्रहम्मा जी से टकरा गया बोला मुझे सिर्फ ६ महीने कि महुलत और इनको पूरे ६२ सालों कि सहूलत बोला भगवन मेने तो बर्षों के कठिन तप से ये वरदान पाया है ये कौन लोग हैं भगवन जिन...हे विकराले! हे कटुभाषिणी! हे देवि! हे भार्या!हे आर्यावर्त की आधुनिक आर्या! हे विकराले! हे कटुभाषिणी! हे देवि! हे भार्या! पाणिग्रहण किया था तुझसे सोच के कि तू कितनी सुन्दर है, पता नहीं था मेरी बीबी मेरी खातिर "साँप के मुँह में छुछूंदर है" निगल नहीं पा...

ज़िंदगी के श्वेत पन्नों को न काला कीजियेग़ज़ल * ज़िंदगी के श्वेत पन्नों को न काला कीजिये आस्तिनों में संभलकर सांप पाला कीजिये। चंद शोहरत के लिए ईमान अपना बेचकर - हादसों के साथ खुद को मत उछाला कीजिये। रोशनी परछाईयों में क़ैद हो जाये अगर - आत्म...मुंह के बल औंधे गिरे हों और लौटरी लग जायेमेरा बेटा अगले महीने के आखिरी से पहले दिन नौ साल का हो जायेगा. तीसरी कक्षा में पढ़ता है. समझदार लोगों से प्रभावित उसकी मम्मा कहती है कि ये एक साल पीछे चल रहा है. मैं कहता हूँ कोई बात नहीं एक साल कम नौकरी ...

उलझन !लगातार बरसती ही जा रही सावन की घटाएं हैं , जो बिखरा पडा, नही मालूम वो प्रकृति की रौद्र लटाएं है या फिर सौम्य छटाएं हैं । मगर इतना तो अह्सास हो ही रहा है कि जिन्दगी बौरा गई है, जीवन की हार्ड-डिस्क...मुख्तसर सी बात है...
कुछ चीजों से कितना भी पीछा छुड़ाओ, वे बाज नहीं आतीं. हरगिज नहीं. इन दिनों मौसम भी ऐसी ही हेठी पर उतर आया है. वक्त अपनी हेठी पर है कोई मौका नहीं देता, मौसम के करीब जाने का. और मौसम अपनी हेठी पर कि पास आने ...

शक्तिशाली ग्रह लाखों किमी तक की दूरी को प्रभावित कर सकते हैं !! ग्रहों और नक्षत्रों का प्रभाव पृथ्‍वी के जड चेतन पर पड सकता है , इसे लेकर लोगों के मन में बडा संशय बना होता है। इतने दिनों से ज्‍योतिष के अध्‍ययन के बाद पृथ्‍वी में घटनेवाली घटनाओं का ग्रहों से संबंध और ग...पढ़िए, गुदगुदाएंगे जरूर, आज सबेरे की अखबार में छपे कुछ चुटकुले गुदगुदा गए। सोचा खुशी बाँट ली जाए। # पति - हमारी शादी को इतने साल हो गये पर तुम्हारा तेरा-मेरा खत्म नहीं हुआ। हर समय यह मेरे पैसे, मेरे गहने, मेरे बच्चे मेरा घर करती...

अनुभव के आकाश में कविता - 3चालीस में जन्मे जगूड़ी ने अब तक की सुदीर्घ काव्य यात्रा में समय के बदलते हुए चेहरे को नजदीक से देखा है। आजादी उनके पैदा होने के सात साल बाद मिली, पर वयस्क होते होते उन्हें आजादी की निरर्... जरा अँधेरा होने से रात नहीं होतीजरा अँधेरा होने से रात नहीं होती, अश्कों के बहने से बरसात नहीं होती. दीपक के बुझ जाने से, ज्योति गरिमा नहीं खोती. दीया खुद जलकर, औरों को रौशनी देता है. खुद तो जलता रहकर , अन्धकार हमारा लेता है. ये देता स...

चलते चलते व्यंग्य चित्र 

 
 

अब वार्ता को देता हूँ विराम आपको ललित शर्मा का राम राम, मिलाते हैं ब्रेक के बाद..................

18 टिप्पणियाँ:

बहुत सुन्दर लिंकों से सजाई है आपने ब्लॉग 4 वार्ता!

नमेस्ते व्यंग्य चित्र बहुत खूब

बहुत बढ़िया वार्ता.

बहुत बढ़िया वार्ता.

बहुत ही बढिया और सार्थक चर्चा की है।

शानदार लिंक्स लिए शानदार वार्ता. धन्यवाद.

बहुत ही सुन्‍दर प्रस्‍तुति ।

ललित भाई, इस बेहद उम्दा ब्लॉग वार्ता के लिए आपका बहुत बहुत आभार !

इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

ललित शर्मा जी ब्लॉग चर्चा आप बहुत अच्छी करते हैं। धन्यवाद।

हमेशा की तरह सुंदर वार्ता.

बधाई.

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