शनिवार, 10 अप्रैल 2010

आज सिर्फ़ स्तब्ध रहने का दिन था

महफ़ूज़ अली की पोस्ट पर सब कुछ है शायद सब समझ ही चुके हैं रहा ललित भाई का सवाल सो एक एक मार्मिक अपील पंकज जी कर ही चुके है ललित शर्मा जी से...
हम तो बस इतना कह सकतें है 



आज़ चर्चा का मन बिलकुल नहीं है ब्लाग है कि मछली बाज़ार पर मैं ललित जी इस बारे में आप से कहे देता हूं कि साफ़ साफ़ आपस में बैठ के मशविरा करना बेहतर होगा. आगे लिखा जाना मुझसे संभव नहीं . सभी गज़ब के लिक्खाड है सब पुरोधा हैं बधाइयां 

13 टिप्पणियाँ:

इस अपील में मेरा भी अपील शामिल कर लें

अपील पीली न हो। उसका रंग हरा कीजिए

मेरा निवेदन भी ललित जी तक पहुँचे.

मेरा भी निवेदन उन तक पहुंचे।

इस निवेदन में हम भी अपना स्वर मिताते हैं जी!

मेरा निवेदन भी ललित जी तक पहुँचे....

मेरा निवेदन भी ललित जी तक पहुँचे....


ललित भाई अपनी अनुकरणीय मूँछों का मान रखें,:)
इसे यूँ झुक न जाने दें.. यह सिद्धान्तों के मन का मसला है ।

शुभकामनायें गिरीश भाई !

सतीष भाई
ताज़ा खबर ये है गुरु लौट आये

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