शुक्रवार, 16 अप्रैल 2010

मुफ्त में अपने ब्‍लॉग का ट्रैफिक बढाएं- अब ब्लॉगप्रहरी देगा ब्लॉगिंग के लिए पैसा !- ब्लाग 4 वार्ता- राजकुमार ग्वालानी

ब्लाग 4 वार्ता  का आगाज करने से पहले सभी ब्लागर मित्रों को राजकुमार ग्वालानी का नमस्कार
मित्रों हम एक बार फिर से हाजिर हैं  आपके सामने चर्चा  का साजो-सामान लेकर। तो आपका ज्यादा समय न लेते हुए चलते हैं सीधे चर्चा की तरफ--
पिछले दिनों मैंनें अपने इस ब्‍लॉग में एवं दो अन्‍य ब्‍लॉग में विभिन्‍न वेबसाईटों के सहारे लगाए जा रहे चटकों का लेखाजोखा लिया तो पाया कि ब्‍लागवाणीके बाद मेरे ब्‍लॉग में दूसरे क्रम पर गूगल के ईमेज सर्च से...


किसी ने सच ही कहा है, कि अंग्रेजी में अक्सर अपशब्द डाल्यूट हो जाया करते हैं.. अपनी तीव्रता नहीं बनाये रख पाते हैं.. कुछ ऐसा ही फौलोवर शब्द के साथ भी है.. शब्दकोश.कॉम पर फौलोवर शब्द के तरह-तरह के मतलब दे रख...
अब तू मेरी आँख से उतर जाए तो अच्छा है मेरे दिल से तू अपने ही घर जाए तो अच्छा है बड़ा नाज़ुक वो ख्वाब है जो मैंने बचा रखा है ग़र छूटे ये हाथ से फिर बिखर जाए तो अच्छा है ये माना ग़ज़लगोई पेचीदगियों का मसला ...
 
अमेरिका के ‘लाइब्रेरी ऑफ कांग्रेस’ ने फैसला लिया है कि ‘ट्विटर’ के द्वारा भेजे जा रहे ‘ट्विट’ को अब लाइब्रेरी के संकलन का हिस्सा बनाया जाएगा। जिसके आधार पर जनसाधारण की राय के आधार संस्कृति और सभ...

 सचमुच आदमी नाम का जानवर बहुत खतरनाक है। आदमी की संगत में रहकर जानवर भी अजीबो-गरीब हरकत करने लगता हैं। काफी समय पहले जब फिरोज खान की कुर्बानी नामक फिल्म आई थी तब एक समाचार पढ़ने को मिला था कि राजस्थान इलाके...
आज परिकल्‍पना ब्‍लॉगोत्‍सव 2010 का आगाज हुआ है। पहली पोस्‍ट प्यार के जाने-माने स्तम्भ इमरोज़ के साथ रश्मि प्रभा की एक मुलाकात दूसरी पोस्‍ट प्यार के जाने-माने स्तम्भ इमरोज़ के साथ रश्मि प्रभा की एक मुलाकात ...
बहुत बार किसी खास मौके पर आप किसी पत्रिका या पत्रिकाओं ने कुछ आर्टिकल वगैरह भेज देते होंगे, वे छप भी जाते होंगें। मानदेय मिले या ना मिले इस पर ध्यान नहीं दिया जाता। पर कुछ स्थापित पत्रिकाएं किसी खास विषय य...
आंच-12 -हरीशप्रकाश गुप्त संजय पुरोहित की यह कहानी फिदायीन’सृजन गाथा’*ब्लाग पर 01 अप्रैल 2010 को पोस्ट की गई थी। आज की आंच में इसी ‘फिदायीन’कहानी पर चर्चा की जा रही है। ‘फिदायीन’ कहानी में.
बुधवार, १४ अप्रैल २०१० परिकल्पना ब्लोगोत्सव-2010 का भव्य शुभारंभ मैं समय हूँ , मैंने देखा है वेद व्यास को महाभारत की रचना करते हुए , आदि कवि वाल्मीकि ने मेरे ही समक्ष मर्यादा पुरुषोत्तम की मर्यादा क..
29 मार्च को गर्मी को बढते हुए देख्‍ा मैने 'गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष' के मौसम के सिद्धांतों के आधार पर आनेवाले मौसम का आकलन करते हुए अपने पोस्‍ट में लिखा था कि 29 मार्च से 6 अप्रैल तक पारा उत्‍तरोत्‍तर चढेगा पर...
कुली कर लो केवल बीस रुपए में !
डॉ. मोहनलाल गुप्ता भारतीय रेलवे संसार की चौथे नम्बर की सबसे बड़ी रेलवे है। लाखों यात्री प्रतिदिन भारत भर में फैले रेलवे स्टेशनों पर पहुंचते हैं। परम्परागत रूप से भारतीय लोग घर का बना हुआ खाना और अपने स्वयं...
प्रत्येक आदमी किसी ना किसी का दोस्त होता है और किसी ना किसी का दुश्मन भी होता है। शायद ही कोई ऐसा हो जिसकी न तो किसी से दोस्ती हो और न ही किसी से दुश्मनी। यदि कोई ऐसा बिरला व्यक्ति मिल जाये जिसकी किसी न दो...
एक नया सिलसिला है ये ...की किसी एक शब्द को ही लेकर मैं जितनी शायरी या कविता लिख सकूँ ये आजमाईश कर रही हूँ ...और ये मेरी खुद की परीक्षा है जो मैं खुद ही ले रही हूँ ....इस वक्त में अँधेरा शब्द चुनकर उस पर ही... 
हमारे समाज में पूँजीवाद के सकारात्मक पहलू की समझ ग़ैर-मौजूद है। हम हमेशा पूँजीवाद को पिछले समाज के या वर्तमान समाज के नज़रिये से देखते हैं और हो रही उथल-पुथल के लिए उसे ज़िम्मेदार मानते हैं, और गरियाते हैं। जैसे हम हमेशा ये दुहाई देते हैं कि पूँजीवाद यहाँ 
कच्चे केले के नमकीन कुरकुरे चिप्स और गर्म चाय. आप भी इन्हें पसन्द करते होंगे. कच्चे केले के चिप्स तुरन्त तैयार हो जाते हैं आईये आज केले के चिप्स (Raw Banana Chips) बनायें. 
हमारा देश दार्शनिकों का देश है, दर्शन का देश है. दर्शन यहाँ के जनमानस के अन्तर्मन में समाया हुआ है, जनजीवन में प्रतिबिम्बित होता है. कुछ लोग कर्मवादी हैं, तो कुछ लोग भाग्यवादी. पर समन्वय इतना कि कर्मवादी लोग भी भाग्य पर विश्वास करते हैं…और 
क्या ब्लाग जगत में अशान्ति की जड़ चिट्ठा चर्चाएं हैं? ... क्या चिटठा चर्चाएं अंदरुनी विवादों को जन्म दे रही हैं ? .... इस बात से कतई इंकार नहीं किया जा सकता कि ये चर्चाएं किसी-न-किसी दिन "सिर फ़ुटव्बल" तक की स्थिति पैदा कर सकती हैं .... वो इसलिये, चर्चाओं 
नमस्कार ब्लॉगर बंधुओ ! जैसा की आप जानते हैं ब्लॉगप्रहरी लगातार ब्लॉग जगत को एक सशक्त माध्यम बनाने को लेकर प्रयासरत है. परन्तु हम सब की व्यक्तिगत कोशिशे अपनी जगह है और सामूहिक प्रयास अलग मायने रखता है. हम सब में से कोई भी अगर सच में एक सशक्त मंच खड़ा 
प्रिय ब्लागर मित्रगणों,हमें वैशाखनंदन सम्मान प्रतियोगिता के लिये निरंतर बहुत से मित्रों की प्रविष्टियां प्राप्त हो रही हैं. जिनकी भी रचनाएं शामिल की गई हैं उन्हें व्यक्तिगत रूप से सूचित कर दिया गया है. ताऊजी डाट काम पर हमने प्रतियोगिता में शामिल रचनाओं 
तुमने देखा बस वहीजो आँखों के आगे दिखाकाश देखा होता तुमनेमन के पीछे क्या छुपास्नेह में डूबे हुए मीठे से पलहमने जो सींचा था वो भीगा सा कलदर्द का और प्यार का हर एक लम्हाबन गया था गीत और मीठी ग़ज़लपर तुम्हे क्या तुम वही देखोजो तुमको है पसंदआँख की खिड़की जो 
गूगल अर्थ से लगभग हर कोई परिचित होगा | मात्र अपने घर से पीसी के सामने बैठकर अपनी दुनिया ही क्या अब तो सौर मंडल की सैर कर लो | हैं ना कमाल ……नए वर्जन मे 3डी के जुड जाने से इसकी सैर अब और भी आसान हो गयी है | वैसे आपके पीसी मे ये इंस्टाल भी होगा ….| अगर 
अपनी पुरकशिश आवाज से हिंदी फिल्म संगीत पर छाप छोड़ने वाली श्मशाद बेगम के गीतों में एक अलग मस्ती, रवानगी, और अल्लहड़पन नजर आता है। झरना जैसा अविरल बहता है वैसी ही श्मशाद बेगम की आवाज है। करीब चार दशक तक फिल्मी दुनिया पर राज करने वाली श्मशाद के आज भी उतने ही
अब आपसे लेते हैं हम विदा

8 टिप्पणियाँ:

ग्वालानी भाई,
आपने मेरी पोस्टों को लगातार चर्चा में बनाए रखा है उसके लिए मैं आपका आभारी हूं। क्या है कि आजकल आप लोगों की चर्चा को बहुत ज्यादा लोग पढ़ते हैं। इसका फायदा उनको तो मिलता ही है जिनका लिंक आप देते हैं। वैसे चर्चा शानदार रहती है। आज भी है बधाई स्वीकारें।

बहुत सुंदर और विस्तृत चर्चा.

रामराम.

बिस्तृत चर्चा.....बधाई

बहुत सुंदर और विस्तृत चर्चा।

अपने ब्लॉग के बैकलिंक को फोलो करते हुए यहाँ तक आया हूँ.. बढ़िया लगा यहाँ आना.. अब आता जाता रहूँगा.. :)

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