गुरुवार, 15 अप्रैल 2010

ताऊ की नजर से : श्री अरविंद मिश्र

प्रिय ब्लागर मित्रों, इस वार्ता मंच पर मुझे देखकर आपको आश्चर्य हो रहा होगा? असल मे शुरुआत से ही श्री ललित शर्मा का आग्रह था कि मैं उनके इस वार्ता मंच से वार्ता करूं. पर मुझे वार्ता करना सहज नही लगता और ना ही मैं इस काबिल हूं कि इस विधा के साथ न्याय कर पाऊं. अत: प्रत्येक गुरुवार को यह स्तंभ "ताऊ की नजर से" शुरु कर रहा हूं. जिसमे मैं आप में से ही किसी ब्लागर मित्र की मेरी पसंद की कुछ पोस्ट्स का जिक्र करुंगा और साथ ही कुछ एक दो छोटे से सवाल जवाब होंगे.
आशा है यह प्रयास आपको पसंद आयेगा. आईये इस स्तंभ की शुरुआत करते हैं श्री अरविंद मिश्र से

-ताऊ रामपुरिया


ताऊ से ब्लागिंग ज्ञान प्राप्त करता हुआ रामप्यारे उर्फ़ "प्यारे"


ताऊ की चौपाल मे आपका घणा स्वागत सै भाई. इब भाई के सुणाऊं...मैं तो कलेवा करके हुक्का पीण लागरया था और म्हारा यो राम का प्यारा "रामप्यारे उर्फ़ प्यारे" मेरे सामने लेपटोप लेके बैठग्या और घणी जिद करण लाग ग्या और नू बोल्या - ताऊ मैं तो इस ब्लाग की दुनिया म्ह नया नया सूं और तू हो लिया पुराणा पापी..तो इब तू मन्नै जरा इसके बारे मे कुछ बता. इब मैं भी लेपटोप खरीद ल्याया और ब्लागिंग शुरु करुंगा.

मैं बोल्या - भाई रामप्यारे तेरी यो बात तो घणी सुथरी सै. तो बूझ भाई प्यारे...तन्नै के बूझणा सै?

प्यारे : ताऊ नू बता अक तेरी पसंद के सै?

ताऊ : अरे...बावलीबूच रामप्यारे....मन्नै तो लाड्डू जलेबी घणै पसंद सै...खुवावैगा के?

प्यारे : अरे ताऊ...वो खाण पीण वाली पसंद नही...ब्लाग की पसंद ...यानि कुणसे ब्लाग तन्नै पसंद सै? बस उणके बारे म्ह ही बताता चल...जिसतैं मैं उनको पढ्या करूंगा...

ताऊ...अरे तो बावली बूच नू बोल ना...अक तन्नै चिट्ठो के बारे मे बूझणा सै? तो भाई मन्नै तो भतेरे चिट्ठे पसंद सैं...पर इब तू बूझले कि .... तन्नै कौण से ब्लागर के बारे म्ह बूझणा सै?

रामप्यारे उर्फ़ "प्यारे" : तो आज सबतैं पहले मन्नै यो अरविंद मिश्र जी के बारे मे बता जो आजकल केरल यात्रा के संस्मरण लिख रहे हैं...

ताऊ : अच्छा...अच्छा...वो अपणे बनारस आले मिसिर जी?

"प्यारे" : हां ताऊ, बिल्कुल वोये..मिसिरजी के बलाग के बारे में बता मन्नै...

तो सुण भई प्यारे.....ये हैं 52 साल के नौजवान अरविंद मिश्र जी, घणे पढे लिखे और अफ़सर आदमी सैं...पर भाई यो आदमी मन का घणाई सुथरा सै..इणकै जो बात मन म्ह रह सै वो ही बात जबान पै रहा करै सै......और आज तन्नै मैं इनकेक्वचिदन्यतोअपि..... ब्लाग की कुछ मेरी पसंद की पोस्टों के बारे मे बताऊंगा. जरा दिमाग लगा के सुण..

"प्यारे" : हां सुणा ताऊ...मैं लेपटोप पै नोट करता जाऊंगा.

तो ले करले नोट....
परिणय के वर्ष हुए आज उनतीस ना कोई खटपट हुई ना रिश्ते छत्तीस .....
सुधियों के वातायन में उनतीस वर्ष पीछे लौटता हूँ -इलाहाबाद विश्विद्यालय के ताराचंद छात्रावास में था उन दिनों एक शोधार्थी ..पिता जी ने लडकी देखी और शादी तय कर दी बिना मुझसे जाने बूझे ,पूंछे पछोरे ....मैं कुछ स्पष्ट नहीं था इन मामलों में -मुझे महज फोटो दिखाई गयी -न भी दिखाई गयी होती तो भी इनकार थोड़े ही करता -माँ बाप बच्चों के दुश्मन थोड़े ही होते हैं

उनतीस वर्षों के अहसास डिनर के साथ साथ

-और मैं इन बातों को कभी उतनी गंभीरता से लेता भी नहीं था -क्योंकि साधारण सा एक गवईं संस्कार का युवक था -मगर बहुत सांसारिक बातों में मेरा मन न तब लगता था और न आज ही ..आज भी मेरा एक अंतर्जगत है तब भी था ....उसे केवल खुद से ही साझा करना होता है -वही आत्म शक्ति देता है दुनियावी बातों ,रीति रिवाजों ,बिडम्बनाओं और परिस्थितियों से समंजन स्थापित करने का -मेरे जैसे अंतर्जगतीय जीवन में जीने वाले लोग पलायनवादी भी हो जाते हैं मगर तमाम असफलताओं और दुनियावी जीवन के धोखे खाने के बाद भी पलायन मैंने नहीं सीखा -और यहीं भूमिका में अवतरित होती हैं संध्या मिश्र (पहले शुक्ल ) ,मीरजापुर शहर के स्वतन्त्रता सेनानी श्री विद्यासागर शुक्ल की बेटी और मेरी १९८१ से सहचरी ..

और भई प्यारे यो ले अगली पोस्ट भी नोट करले........
जैसे अदाकारा ,शायरा वैसे ब्लागरा/चिट्ठाकारा क्यों नहीं?

तो अब यह विषय खुली चर्चा के लिए रख रहा हूँ -इस ब्लागमानस में तो नीर क्षीर निर्णय हो ही जायेगा . न जाने क्यूं मुझे ब्लागरा शब्द से अचानक ही इतना नेह क्यूं हो गया है -कई उदित और उदीयमान नारी ब्लागरों के नाम के आगे पीछे इसे जोड़कर देखने पर कुछ के साथ तो यह खूब फब भी रहा है ! शायरा शायरा सा कुछ! भले ही व्याकरण के लिहाज से यह गलत हो मगर एक काव्यमय सौन्दर्य तो इसमें निश्चित तौर पर है -विश्वास न हो तो मेरी टेक्नीक इस्तेमाल कर देख लें! अगर हम आगे किसी महिला ब्लॉगर का तआर्रुफ़ करते वक्त यह कहेगें कि लीजिये मिलिए मोहतरमा से.... ये हैं एक मशहूर ब्लागरा ......तो कितना अच्छा लगेगा! हैं ना ?

और भई राम के प्यारे ...रामप्यारे यो एक और पोस्ट पढले जरा मिसिर जी की ई मुई पी एच डी जो जो न कराये !

एक आधुनिक कहावत : किसी भी विश्वविद्यालय के परिसर में एक ढेला -पत्थर ऐसे ही उछाल फेकिये वह किसी कुत्ते को लगेगा या फिर किसी पी एच डी डिग्री धारक को ...
जाकिर :ओह हो हो हो हो .....
मैं : अब इसे भी सुन ही लीजिये -
बात अमेरिका की है ! एक घुड़दौड़ के प्रेमी रईस को उसके दोस्तों ने यह कहकर दुखी कर दिया कि उसके पास समृद्धि ,ऐश्व्यर्य सब कुछ है बस एक पी एच डी की डिग्री की कमी रह गयी है ..और बिना पी एच डी की डिग्री के यह ऐश्वर्य भी कुछ अधूरा अधूरा सा लगता है । यह सुन उस रईस को धक्का सा लगा .मगर उसने तुंरत प्रतिवाद भी किया -" मेरे घोडे को भी तो यह डिग्री नही मिली है ...कितना प्यार करता हूँ मैं उससे ! तो पहले मैं क्यों न उसी को पी एचडी दिलवाऊँ ? "


"रामप्यारे" : वाह ताऊ ...मजा आगया मिसिर जी कि पोस्ट पढके तो...इब और आगे बताओ...

ताऊ : अरे को बावलीबूच...प्यारे...तन्नै मजा तो घणा आरहा है...पर तू सारी की सारी पढकै मन्नै बताईये...और यो संभाल अगली पोस्ट....उर्वशी -पिता जी की एक कविता !

विवशता की इस चिता पर इन्द्रधनुषी स्वप्न जलते
प्रणय के इतिहास मिटते बन्धनों के बंध हसते
रूप यौवन साधना का दुखद परिणति घुटन ही है
प्रेम और श्रृंगार का अभिशप्त संगम जलन ही है (2 )
सर्वगुण संपन्न होकर उर्वशी साधन बनी क्यों
संगीत की देवी न जाने विषय की प्रतिमा बनी क्यों
कोटि उर मे बस रही जो ह्रदय अपना रिक्त रखती
इन्द्र की आराधना में साधना को भ्रष्ट करती (३)


"रामप्यारे" बोला : वाह ताऊ मजा आगया अरविंद मिश्र जी को पढकै तो...इब मन्नै.....(ताऊ बात को बीच मे काटते हुये बोल पडा).....अरे ओ बावलीबूच प्यारे....तन्नै तो मजे आरे सैं...और मेरा हुक्का ठंडा पडा सै..जा जरा जाकै हुक्का भर के ल्या...

रामप्यारे : ताऊ इबी ल्याया...हुक्का भरके...फ़िर मन्नै अगले ब्लागर के बारे मे बता...

ताऊ : अरे "रामप्यारे" इब आज इतना ही घणा सै...अगले ब्लागर के बारे मे इब अगले सप्ताह बात करेंगे.....और इब तू भी रोटी राबडी और घंठी का कलेवा कर ले....और सुणिये जरा...पहले वो अरविंद मिश्र जी को फ़ोन मिला के दे मेरे को...जरा सीधी भिडंत करनी सै....

"रामप्यारे" : ले ताऊ, मिश्रजी लेण पै बाट देख रे सैं...बात करले...


ताऊ से सीधी भिडंत टैलीफ़ून पै

ताऊ : हैल्लो...मिसिरजी रामराम....मैं ताऊ रामपुरिया सपीक रया हूं.... आप मन्नै एक बात बतावो कि "ब्लागजगत के बारे में आपका क्या सोचणा हैं?"

अरविंद मिश्र : ताऊ , सवाल सुनने में तो बहुत सहज सरल हैं लेकिन जवाब देने में में बहुत मुश्किल ..फिर भी यह कहना चाहूंगा कि एक सशक्त अभिव्यक्ति के माध्यम के रूप में ब्लागजगत ज्ञात और अद्यावधि अज्ञात, न जाने कितनी संभावनाओं से भरा पडा है .यह अभिव्यक्ति के आयामों को नयी ऊचाईयां देने को उद्यत है .मैं ब्लॉग जगत को आत्माभिव्यक्ति के एक नए और अब तक के एक सबसे सशक्त और निरंतर समर्थ हो रहे दुतरफा माध्यम के रूप में लेता हूँ .

ताऊ : मिश्रजी, एक छोटा और सीधा सा सवाल और है कि "ब्लाग जगत में सामंजस्य स्थापित करने के लिये आप क्या आवश्यक कदम सोचते हैं?"

अरविंद मिश्र : जहां जीवित कौमें अपने झंडे गाड़ चुकी हों वहां नियमन की बात करना थोड़ी मुश्किल है -अभी तो जगह कब्जियाने का शुरुआती कौआ रोर मचा हुआ है -जगह को लेकर छीना झपटी चल रही है -फिर नीड़ निर्माण शुरू होगा और शांति निखरेगी ....हाँ चील -बाज तो रह रह झपटते ही रहेगें क्योकि यह उनका स्वभाव है -अक्सर सामंजस्य बढ़ाने के घोषित उद्येश्य से किया गया प्रयास उलट -प्रभाव ले आता है -हम सब जो भी अपने को इस ब्लॉग -सरोकार से जुडा पाते हैं -चुपचाप अपने तई योगदान देते रहें -हाँ नए लोगों को प्रोत्साहित करने की जरूरत है -उन्हें प्रेरित किया जाना चाहिए .आईये हम यथासंभव नए ब्लागरों को प्रेरित करें जो अच्छा कर रहे हों ....हाँ धर्मिक उन्मादियों को कडाई से कुचलने की भी जरूरत है ....उनका रिफार्म करते करते बहुत देर हो जायेगी ! बस और अधिक क्या ?

ताऊ : धन्यवाद मिश्रजी, आपने हमारे सवालों के सीधे और सहज उत्तर दिये. आपका बहुत बहुत धन्यवाद.

हां तो प्यारे ब्लागर गणों अब अगले सप्ताह फ़िर आपमें से ही किसी एक ब्लागर से हम सीधी भिडंत करेंगे. हमारा यह प्रयास आपको कैसा लगा? अवश्य बतायें. अगले सप्ताह तक के लिये ताऊ और रामप्यारे की तरफ़ से रामराम.

अब अंत में : एक सूचना

सभी पाठको को सूचित किया जाता है कि आज की पोस्ट पर जिसकी भी टिप्पणी सार्थक और विचारोतेजक पायी जायेगी उस चयनित टिप्पणीकर्ता को आज की पोस्ट के चर्चित ब्लागर श्री अरविंद मिश्र के कहानी संकलन "एक और क्रौंच वध" की स्वयं उनके द्वारा -हस्ताक्षरित प्रति भेंट स्वरूप भेजी जायेगी.


22 टिप्पणियाँ:

वाह ताऊ, घणा कठिन साक्षात्कार सरलता से कर लिया. बहुत अच्छा लगा अरविन्द मिश्र जी को आपकी नजरों से जान कर.

अब जरा उनकी किताब भिजवा दो क्यूँकि कोई और टिप्पणी तो आई नहीं है.

बाकी जब आयें तो उनमें से अलग से छांटना. :)

वाह ! चर्चा का यह ताऊ अंदाज भी निराला रहा |

ताऊ नजर से अरविन्द जी के बारे में जानकर भी बहुत बढ़िया लगा |

ताऊ जी ! ह ना सार्थक टिप्पणी ?
तो अब "एक और क्रौंच वध" की प्रति पक्की समझे :)

शाम की बखत ठीक सूँ बाँच कै टीपेंगा। अबाणूँ तो अदालत जाबा को टैम हो रियो छे>

लो भइया हम भी नाइस पर ही आ गये हैं!

ताउ ने पहली चर्चा में ही होल्सेल चर्चा कार को ”नाईस” पे ला दिया ओर जे अच्छा किये कि मिश्रा जी से टेलीफ़ून भिडंत किये वरना वे पाड्कास्ट भिडंत के लिये ”फ़िर कभी” का बोर्ड दिखाते रहते हैं
एक दम झक्कास बधाई का ठेला किधर भेजूं

आप बिल्‍कुल धमाके के साथ उतरे यहां .. और कर दी न असली चिट्ठा चर्चा .. आपकी दृष्टि सबसे पहले डॉ अरविंद मिश्रा जी पर ही पडी .. उनकी अच्‍छी अच्‍छी पोस्‍टों का लिंक लगाया .. मैं तो इस पोस्‍ट पर बहुत अच्‍छी टिप्‍पणी कर सकती थी .. पर 'एक और क्रौंच वध' .. की इजाजत नहीं दे रहा ये मन !!

लो..कल्लो बात्! ताऊ के प्रवचन तो यहाँ भी शुरू हो गए...:-)
लाजवाब ! एकदम फर्स्टक्लास चर्चा करी ताऊ...घणा आनन्द आ गया..
धन्यवाद्!

ताऊ जी.....परनाम.....

सबसे पहले तो यह बताइए....कि मेरी रामप्यारी कैसी है? रामप्यारी से.... मेरा आई लव यू.... कहियेगा.... रामप्यारी से कहियेगा कि मैं जल्दी ही आऊंगा और उसे ले जाऊंगा....परेशां ना हो....


श्री. अरविन्द जी...का यह साक्षात्कार बहुत अच्छा लगा.... श्री.अरविन्द जी को नमन....

@ Tau ji- Congratulations for the wonderful post ! Its really unique in its own way.

The language used is interesting to read and it was really a fun knowing Mishra ji through you.

I am quite new here but i have read few posts of Dr Arvind here. He is indeed a Gem of a guy in terms of knowledge and wits.

He speaks fearlessly on any topic. One thing which i like the most in him is his transparency. He doesn't pretend. His inner and outer persona is same.Its indeed an asset.

He is quite inquisitive and he loves to explore the universe. In the process he offends few. Learning is good but not at the cost of anyone.God has blessed us with brains, that's why we are somewhere superior than the tetrapods (4-legged animals), hence one should not take any offence by his writings.

He is a natural admirer of the beauty scattered everywhere in this universe. Who doesn't admire beauty? (irrespective of gender)

He is quite receptive and a good listener as well. He has good control over his anger and EGO.

He is aware of his responsibilities towards Blog and society.

@ Mishra ji-

You have a beautiful wife. Gracefully dressed up in Indian attire . Kindly convey my regards to bhabhi ji .

Thanks !

ताऊ नियमित के बीच अनोखा होना , भीड में खडे होकर भी अलग दिखना , और एक अलग सोच एक अलग विचार लेकर आना ही आज ब्लोग्गिंग की सबसे बडी जरूरत है । आप हमेशा से ही अपने नए नए प्रयोगों के लिए जाने जाते रहे हैं । आज आभासी और वास्तविक दुनिया में भी खुशियां और प्रेम के लिए बहुत ही कम मौके मिल रहे हैं लोगों को इसलिए आपका हर नया प्रयास इस दिशा में मील का पत्थर साबित हो रहा है । इस मंच से आपका जुडना एक इतिहास जो बनने जा रहा है उसकी शुरूआत की तरह है । आपने अपना खाता ही सीधा बांउड्री पार करके खोला । अरविंद जी का चयन अपने ओपनिंग अकाऊंट के लिए करके आपने मास्टर स्ट्रोक भी मार दिया । रही सही कसर पूरी हो गई उनकी चुनिंदा पोस्टों की झलकियां पेश करके । आज हिंदी ब्लोगजगत को भटकाव की दिशा से बचाने के ये बहुत जरूरी हो जाता है कि इस तरह के प्रयोग किए जाएं और हम सब आपस में इसी तरह से एक दूसरे को प्रोत्साहित करते रहें । आपको , इस मंच को , अरविंद मिश्रा जी और हिंदी ब्लोग्गिंग को बहुत बहुत शुभकामनाएं
अजय कुमार झा

फिर तो एक और क्रौंच वध कहानी संग्रह को पूरा पढ़ना पढ़ेगा और उस पर प्रत्‍येक कहानी पर सार्थक टिप्‍पणी करनी होगी तो क्‍या उसका पारिश्रमिक मिलेगा रे ताऊ। अक ऐसा है तो फिर बतला दओ कि सार्थक टिप्‍पणी में सार्थक सार्थक सार्थक X 100000000000000000000 इतनी बार लिखने से सार्थक हो जाती है टिप्‍पणी अक इसकै खा‍तर और कुछ भी करणा पड़ेगा। इसे सार्थक न मानो तो कहानी पढ़ने से तो बचेंगे और उतनी देर में कुछ सार्थक टिप्‍पणी पाने के लिए कविताओं के ढेर उपजेंगे।

Zeal,Thanks a lot , I am humbled ..this only affirms my believe in the old dictum which says beauty lie in eyes of the beholder...I can sense the inner beauty of your good self Mam ,please do believe I really do not deserve any admiration as such -an ordinary man I am...but yes your words could cast magical effects on any blessed one to who you so benevolently choose! I shall try to rise to occasion-thanks for praising Sandhya, my wife ,surely convey your message to her ....and i may not deserve your praise but you certainly deserve a copy of my Hindi anthology of science fiction...as the pact goes and as per accordance with the announcement made by Taoo ji.Please write your address here or send it to me ON my mail i.e. drarvind3@gmail.com

अच्छा स्टाईल है,ताऊजी आपका जवाब नही।

सब समझे थे कि मैने कल यूं ही बिगुल बजवाया था
अब समझे न ताउ क्यों सबके ताउ हैं

अरविन्द जी को यहाँ ताऊगिरी करते देख आनंद हुआ

आभार आपका

ताऊ आपकी माया से कोई जीव जंतु बचा भी है भला -रामप्यारे तक को निर्वाण प्राप्त करा दिया -जील ने तो मुझे हतप्रभ सा ही कर दिया ,कम से कम 'एक और क्रौंच वध' की एक प्रति तो उन्ही की हो गयी (प्रशंसा ) और मुझे तो बिना मोल खरीद ही लिया -इतनी प्रशंसा कभी जो सुनी नहीं -बाकी मुझे लगता है की संकलन की प्रतियां मुझे और भी भेजनी है -सगीता जी और अजय जी को -वे अपना पता मुझे मेल कर दें!
पुनः पुनरपि आभार!

यों तो अरविन्द जी से अच्छी मुलाकात है पर इस नयी तरह से मिल कर अच्छा लगा।

परम आदरणीय ताऊ जी,
सबसे पहले तो मैं आपकी इस शैली की प्रसंशा करती हूँ. एक बिल्कुल नये और ताजा ढंग से आपने अपने स्तम्भ की शुरुआत की है. हिन्दी ब्लॉगिंग को ऐसे नये प्रयोगों की बहुत ज़रूरत है. आपने चर्चा अरविन्द जी से आरंभ की, जो कि मेरे भी प्रिय ब्लॉगर हैं. नये ब्लॉगर जो हिन्दी ब्लॉगिंग में कदम रख रहे हैं, उन्हें गम्भीर और समर्पित लोगों के बारे में पता चलना ही चाहिये.
अच्छा ये लगा कि अरविन्द जी के विषय में पूरी तटस्थता से यहाँ परिचय दिया गया है, अगर उनके व्यक्तित्व के विषय में थोड़ा और विस्तार से बता देते, तो और भी अच्छा होता. अरविन्द जी की प्रसंशक मैं तब से हूँ, जब मैंने ब्लॉगिंग शुरू नहीं की थी, पर उनकी पोस्टें नियमित रूप से पढ़ती थी, विशेषतः विज्ञान से सम्बन्धित विषयों पर लिखी.
उनके बारे में सिर्फ़ एक लाइन कहना चाहूँगी कि वे न सिर्फ़ एक अच्छे लेखक हैं, वरन्‌ एक बहुत अच्छे इंसान भी हैं.

आभार मुक्ति ,क्या यह स्नेहाभ्युक्ति प्रत्युतरित हो सकती है ?

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