गुरुवार, 1 अप्रैल 2010

मेहनत करने पर सहारा में फूल एक मुस्काता है---ब्लाग4वार्ता----ललित शर्मा

मै ललित शर्मा आपको ले चलता हुँ आज की ब्लाग वार्ता पर, चर्चा करेंगें कुछ उम्दा चिट्ठों की-----
सबसे चलते हैं नुक्कड़ पर जहां बंट रहा है खजाना लुट रही है दिल्ली, जितना चाहो लूट लो पर समय है कम फ़िर लगाओ दम आज प्रति टिप्‍पणी 100 का भुगतान किया जाएगा : कौन करेगा भुगतान इसे जान लें आज के दिन नुक्‍कड़ पर किसी भी पोस्‍ट पर टिप्‍पणी करने पर प्रति टिप्‍पणी 100 का भुगतान किया जाएगा। भुगतान के लिए बिल आज मध्‍यरात्रि तक प्राप्‍त हो जाने चाहिए। प्रति टिप्‍पणीकर्ता को एक पोस्‍ट पर एक ही टिप्...काला कोट पहनने से मिलेगी मुक्ति निचली अदालतों में पैरवी करने वाले वकीलों को 1 अप्रैल से 30 जुलाई तक काला कोट पहनने से छूट रहेगी। इस दौरान वे बैंड पहनकर कोर्ट में पैरवी कर सकेंगे। यह सुविधा गर्मी के मौसम को देखते हुए दी जा रही है।

भाड में जाए ब्लोग्गिंग मैं छोड रहा हूं इसे ........अजय कुमार झा .... भाड में जाए ब्लोग्गिंग मैं छोड रहा हूं ........कारण स्पष्ट है बिल्कुल ...... ......................... क्या हुआ जी .............? ?????????? आज के दिन कुछ छोडने के.. शुक्रिया अदालत, एतिहासिक फैसले के लिए खाप की क्रूरता के खिलाफ एक अदालत ही बची थी, जिसे परखा जाना बाकी था। और अदालत की ओर नजरें जमाए बैठे लोगों को निराश नहीं होना पड़ा। मनोज-बबली के हत्यारों का केस अदालत में था। इंसाफ मिलने की उम्मीद थी, 

मेरे शब्दों का पिटारा-शोभना बहुत दिनों से मेरे शब्दों का पिटारा बंद था बहुत से कामों को निपटाने में लगा मेरा मन था बहुत से ख्याल दिल में आते थे पर मेरे हाथ कलम नहीं पकड़ पाते थे अक्सर मेरा दिमाग मेरे दिल से जीत जाया करता है----- जो गिर कर के संभालता है ... *साहित्यिक यात्राओं का अपना सुख है. कुछ नए साथियों से मुलाकातें हो जाती है. मित्र-सम्पदा बढ़ती है. ज्ञान बढ़ता है. दौलत काम नहीं आती लेकिन मित्ररूपी दौलत आपको सदा समृद्ध रखती है. इसलिए जैसे ही कही से बुला...

एक लोक गायक का गीत राजस्थानी लोकवाद्य रावणहत्था के साथ रावण हत्था राजस्थान का एक लोक वाद्य है जो बांस के एक तने पर नारियल के खोल, चमड़े की मँढ़ाई और तारों की सहायता से निर्मित किया जाता है। पश्चिमी राजस्थान के पर्यटन स्थलों पर इस वाद्य को बजाने वाले आप को आम -------- क्‍या लालू , बालू और कालू की मजेदार कहानी आपको याद है ?? अचानक बचपन में किसी पत्रिका में पढी एक मजेदार कहानी की आज मुझे याद आ गयी। किसी गांव में तीन भाई रहा करते थे .. लालू , बालू और कालू । लालू और बालू खेतों में काम करते , जबकि कालू का काम उस गांव के दारोगा जी
किसी नागरिक को शराब बेचने का कोई मौलिक अधिकार नहीं: सुप्रीम कोर्ट  सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि किसी नागरिक को शराब बेचने का कोई मौलिक अधिकार नहीं है क्योंकि सरकार को जनहित में यह अधिकार है कि वह इसके व्यवसाय का नियंत्रण करे। न्यायाधीश आरवी रवींद्रन और सुरिंदर सिंह निज्जर क...सहज भक्ति का निश्चल आनंद परमात्मा, ईश्वर,देवी देवता ,गुरु के सामने व्यक्ति की कोई बखत नहीं है . ये एक ऐसी प्रतीति है जो महसूस करने वाले को सामान्य जीवन और तमाम प्रगतिशीलता के आयाम से आध्यत्मिक आयाम की ओर ले जाती है 
चिंतन देहाती नहीं है ***लिव इन रिलेशन शिप - एक देहाती चिंतन ** * चिंतन देहाती नहीं है, कटु सत्य है यह, पाश्चात्य की यह संस्कृति उपजी है इस मंशा के साथ कि वासना की पूर्ती हेत समीप सहज दे...  ये कैसा सम्मान... उत्कृष्ठ में निकृष्ठ प्रदर्शनछत्तीसगढ़ विधानसभा में उत्कृष्ठता अलंकरण समारोह में जो कुछ हुआ वह इस प्रदेश को शर्मसार कर देने वाला है। यह मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के सरकारी नुमाईश है या अपमान करने का तरीका यह
स्वास्थ्य विभाग की ये कैसी सेवा? -*एस. स्वदेश* हाल में कुछ खबरिया चैनलों पर ऐसा ही वाक्या फिर दिखा। नागपुर के सरकारी अस्पताल में पांच दिन का एक मासूम नवजात अस्पतालकर्मियों की लापरवाही से जिंदा जला और मर गया। दुर्गा काडे नाम की महिला ने 1. आइए बनाएं एक पानीदार समाज *- संजय द्विवेदी* मीडिया का काम है लोकमंगल के लिए सतत सक्रिय रहना। पानी का सवाल भी एक ऐसा मुद्दा बना गया है जिस पर समाज, सरकार और मीडिया तीनों की सामूहिक सक्रियता जरूरी है। कहा गया है- रहिमन पानी राखिए,
कोई भी प्राकृ्तिक रत्न (real gem-stone) स्वयं अपना प्रभाव दिखाने में सक्षम होता है। क्रियाशीलता प्रकृ्ति के जीवन का गहनतम रहस्य है। जो वस्तु उस संसार में सक्रिय नहीं होती, वो शीघ्र ही नष्ट हो जाती है। इसीलिए ये सम्पूर्ण ब्राह्मंड, नक्षत्र, ग्रह तथा तारे सदैव क्रियाशील रहते हैं। हमारे सौरमंडल के इन ग्रहों, नक्षत्रों की सक्रियता को आप ---- गढ़ के दोष मेरे सर कौन मढ़ रहा कहो ? अदेह के सदेह प्रश्न कौन गढ़ रहा कहोगढ़ के दोष मेरे सर कौन मढ़ रहा कहो ?मुझे जिस्म मत कहो चुप रहो मैं भाव हूँतुम जो हो सूर्य तो रश्मि हूँ प्रभाव हूँ !!मुझे सदा रति कहो ? लिखा है किस किताब में देह पे ही हो बहस कहा है किस जवाब में नारी  बस देह..?
विवाह पूर्व का रहन -शयन  हमारे देश में कुछ बातें शिगूफा की तरह उछलती हैं और धीरे -धीरे पूरे समाज में फ़ैल जाती हैं , पहले -पहल तो कोई यकीन ही नहीं करता कि ऐसा भी होता है क्या ? लेकिन हम लोग उस विषय पर इतनी चर्चा कर लेते हैं कि सब कुछ मामूली सा लगता है --------देखता हूँ कौन सही जवाब देता है !! नीचे का चित्र ध्यान से देखें, और उस पर आधारित कतिपय बिलकुल आसान सवालों के जवाब दें 1. यह महाशय कौन सा आसन कर रहे हैं. 2. यह क्या सोच रहे हैं? सही/श्रेष्ठ जवाब मिलने पर 1 अप्रैल 2010 को शानदार समारोह में जवाबदाता को  ऊपर प्रदर्शित शावक पुरस्कार
  
इसलिए हम आंसू बहाते रहे वह नदी नहीं थी आंसू थे मेरे जिस पर मेरे दोस्त कश्ती चलाते रहे  मंजिल मिले उन्हें यही चाहत थी मेरी चाहत इसलिए हम आंसू बहाते रहे | ----- प्रिये तुम प्रिये ,यह खत नहीं है.यह मेरे हृदय में उठ रहे विचारों का ज्वार है,दिमागी तारों को हिला देनेवाली एक कंपन है,धमनियों में बह रहे रक्त-कणों का आवेग है,एक साथ कई भावनाओं के मिलने से बना एक शब्द है.इसलिये प्रिये तुम मेरे दिल की तरह इसके भी टुकङे कर कूङेदान में
कुछ ..मेरे अपने त्रिशूल ......... त्रिवेणी.....शुरू शुरू में जब गुलजार जी ने त्रिवेणी की फॉर्म बनाई...... तो पता नहीं था यह किस संगम तक पहुँचेगी - त्रिवेणी नाम इसीलिए दिया गया कि इसमें पहले दो मिसरे, गंगा-जमुना की तरह मिलते हैं और एक ख़्या...---होनहार के खेल सन १९५० के दिसम्बर के अंतिम सप्ताह में स्व. श्री तन सिंह जी एक शिक्षण शिविर के सिलसिले में अपने जीवन में पहली बार चितौड़ गए और वहां उन्होंने चितौड़ दुर्ग देखा | लेकिन चितौड़ दुर्ग देखने के दो महीने बाद तक .
चलते चलते आज का कार्टुन कोना


अब देते हैं वार्ता को विराम-----आपको ललित शर्मा का राम राम------------

11 टिप्पणियाँ:

आप को फूल भेंट करने आए थे। प्रसन्न हो कर जा रहे हैं।
फूल छोड़ जा रहे हैं।

मेरी यह टिप्पणी नुक्कड़ तक भिजवा दीजिएगा -बड़ा काम है जी आज !

बेहतरीन प्रस्तुति...

बेहतरीन प्रस्तुति...

बहुत अच्छी प्रस्तुति। सादर अभिवादन।

mere sher ka sheershak banaa diyaa...? isse kahate hai apnapan. itani mehnat kam se kam mai naheen kar sakta. ho kaheen bhi aag lekin aag jalani chahiye....

बहुत अच्छी प्रस्तुति।

बहुत लाजवाब वार्ता है जी.

मुर्खों की रामराम.

बडी ही सुन्दर वार्ता...
धन्यवाद सारी मूर्ख मंडली को......

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