बुधवार, 14 अप्रैल 2010

टंकी के दीवाने सब-भला करे इनका रब-ब्लाग 4 वार्ता राजकुमार ग्वालानी

ब्लाग 4 वार्ता  का आगाज करने से पहले सभी ब्लागर मित्रों को राजकुमार ग्वालानी का नमस्कार
आएं मिलकर बांटते चले सबको प्यार

मित्रों आज की ब्लाग जगत में इन दिनों टंकी की चर्चा ज्यादा चल रही है। यार हम सोचते हैं कि टंकी पर चढ़ाना आसान नहीं होता है। वैसे टंकी पर चढ़ाना कोइ नहीं चाहता है, फिर भी उसे चढ़ा दिया जाता है। एक बार किसी के टंकी पर चढ़ने की खबर आने के बाद उसको टंकी से उतारने की कवायद वैसे ही चलती है जैसी वीरू को उतारने की शोले में चली थी। खैर हम चलते हैं आज की चर्चा की तरफ...
अभी तो टंकी चर्चा में है। टंकी की दीवानगी का आलम यह है कि और कोई बात किसी के गले नहीं उतर रही। जहां देखो वहां टंकी चर्चा। जहां देखो वहां टंकी फोड़ चैनल। टंकी नाम ब्‍लॉग शीघ्र आ रहा है। दिल थाम कर बैठिए 
कई साल पहले की बात है । ऐसे ही जब ग्रीष्म का आगमन हुआ एक दिन दफ्तर में एक मित्र से बात चल रही थी । वे कहने लगे “ यार गर्मी के दिनों में दफ्तर जाना बहुत अखरता है ।“ मैने कहा “ क्या करोगे भाई नौकरी तो नौ
 
(अभिषेक, एक पत्रिका में कोई रिपोर्ट लिखने के उद्देश्य से एक कस्बे में आता है.वहाँ उसे शची जैसी ही . आवाज़ सुनायी देती है और वह पुरानी यादों में खो जाता है कि शची नयी नयी कॉलेज में आई थी. शुरू में तो शची उस...
 हम तो जोरदार नंबर लेने के लिए पहुंचे थे  समाचार तंत्र बार बार दिखा सुना रहे हैं कि इस साल गर्मी बहुत ज्यादा पडने वाली है पडने क्या वाली है , पड ही रही है । और इसका प्रभाव सिर्फ़ बाहरी जीवन मे
अप्रैल माह में ही चिलचिलाती भयंकर धूप ,गर्मी के थपेड़ों ने बनारस के जन जीवन को जहां बेहाल कर रखा है -मनरेगा के काम में धूप गर्मी की परवाह किये बिना औरतें भी हाड तोड़ परिश्रम कर रही हैं -मैंने बनारस के हरह
हे देश, तुम्हारे तर्पण में आचार्य परशुराम राय  हे देश, तुम्हारे तर्पण में सूख गयीं सारी नदियाँ संविधान के काम वृक्ष की काट-काट कर सारी डालें मैं तो समिधा बना दिया। हे देश तुम्हारे तर्पण में 
इधर काफी व्‍यस्‍तता चल रही है , एक खास काम में मेरा ध्‍यान संकेन्‍द्रण बना हुआ है , ऐसे में लिख पाना तो संभव नहीं , इसके बावजूद ब्‍लॉग जगत से दूरी नहीं बन पाती। दो चार घंटों में एक बार एग्रीगेटरों को खोलक...
तेरह अप्रैल १९१९. हम भारतीय कभी भी भूल नहीं सकते इस मनहूस तारीख को, जब अमृतसर के जलियावालाबाग में क्रूर जनरल डायर ने सैकड़ों भारतीयों को गोलियों से भून दिया था. उस पर लिखना शुरू करूंगा तो लंबा इतिहास हो ...
पिछले चार दिनों से मेरे एक फीडबर्नर मेल सब्‍सक्राईबर श्री आनंद कुमार भट्ट जी का मेल आ रहा था कि मेरे पोस्‍ट जो उन्‍हें फीडबर्नर के द्वारा प्राप्‍त हो रहे हैं उन्‍हें वे पढ नहीं पा रहे हैं क्‍योंकि मेल से 
  अभी तक पत्रकारिता के श्रेष्ठ पुरस्कार प्रेस में काम करने वाले पाते रहे हैं। लेकिन इसबार रिकॉर्ड टूट गया है। पहलीबार बेव पत्रकारिता को विश्व विख्यात पुलित्जर पुरस्कार मिला है। 
शरद ॠतु के समाप्त होते ही प्रकृति अपना रंग बदलती है । फूल खिलते हैं , पेडों से महक आने लगती है , आम की कोपलें फूटती है । मैदानी भागों में जहां तक नजर डालो , गेहूं की फसल की चादर बिछी दिखाई देती है । धीमी -
नरेश सोनी - छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस ने सोमवार से राज्य की डॉ. रमन सिंह सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। इससे पहले उसने अपनी ही पार्टी की अगुवाई वाली केन्द्र सरकार से मांग की थी कि इस सरकार को बर्खास्त
देश को परिपक्व गृह मन्त्री की दरकार - - - (3) सत्तर फीसदी हिस्से में फैल चुका है नक्सलवाद का कैंसर (लिमटी खरे) नक्सलवाद पर जारी बहस में सरकार का पक्ष चाहे जो भी हो मीडिया पर्सन की हैसियत से जनता जनार...
अजित गुप्‍ता का कोना  में अजित गुप्ता बता रही हैं- बेटा बोला कि माँ मैं आपको मिस कर रहा हूँ
ज्‍योतिष को मैं मानती हूँ लेकिन उसे अपने ऊपर हावी नहीं होने देती। मुझे लगता है कि बस कर्म करो, आपको फल मिलेगा ही। लेकिन पता नहीं क्‍यों इन दो-चार दिनों से मुझे लग रहा है कि दिन अच्‍छे आ गए हैं। इसलिए अच्‍छा 
मैं आभारी हूँ श्री समीर जी का जिन्होंने मेरी ईपुरस्तक "अंग्रेजी कहावतें हिन्दी भावार्थ" पर रिव्ह्यू लिख कर मेरी ईपुस्तक के विषय में अपने विचार प्रकट किया। प्रस्तुत है उनके द्वारा लिखा गया रिव्ह्यूः 
अंधड़ ! में पी.सी.गोदियाल बता रहे हैं- एवरी डॉग हैज इट्स डे !
आज लिखने का कतई मूड नहीं है, एक अपनी पुरानी कविता दोबारा पोस्ट कर रहा हूँ , उम्मीद करता हूँ कि आप लोगो को पसंद आयेगी; इक दिन वो भी दिन आयेगा, जब मेरी भी दाल गलेगी दिल्ली में ! 'साडे ली ते तुसी ही ग्रेट हो...
 अपराध के बजाय अपराधी से घृणा करने वाले नपुसंकों - मासूमों की मुस्कानों को अपनी गंदी रुचि से तहस-नहस करने का नापाक इरादा रखने वाले पांखडियों - चर्बीयुक्त अनिकघी खाने के बाद हर ताजी पत्तल क...
इस जानकारी को अधिक से अधिक ब्‍लॉगरों तक पहुंचाने के लिए अपने ब्‍लॉग पर पोस्‍ट लगा सकते हैं और चर्चाओं में इसका उल्‍लेख किया जा सकता हैआप स्‍वयं को एक सच्‍चा हिन्‍दी ब्‍लॉगर स्‍वीकार करते हैं तो इस प्रतियोगिता में भाग लेकर अपनी भावना को साबित करने का 
राज्य सभा का गठन उच्च सदन के रूप में इस लिए किया गया था की उस क्षेत्र की प्रतिभाओं को देश के सर्वोच्च सदन में स्थान देकर उनके अनुभव का देश हित में उपयोग किया जा सके . काँग्रेस ने यह नियम तोड़ने में देर नहीं की और लोगों को इनाम स्वरूप यह पद बाटना शुरू 
घुमरी परैया (पूर्वी उत्‍तर प्रदेश का एक लोकप्रिय खेल जो अब लुप्‍त हो चला है ) �एक खेल जिसके नाम से फैलती थी सनसनी शरीर में और खेलने से होता गुदगुदी सा चक्‍कर जी हां यही न खेल था घुमरी परैया और वे खेलने वाले बच्‍चे जो अघाते नहीं थे घंटों दोनों यूं ही दो 
सामाजिक क्रांती के अग्रदुत थे डॉ. भीमराव अम्बेडकर डा. भीमराव अम्बेडकर उन्नति एवं उत्थान के लिए शिक्षा को सर्वोपरि मानते थे। स्वयं अम्बेडकर ने एम.ए., पी.एच.डी, एम.एस.सी बार एट ला आदि उपाधियां प्राप्त की थी। वे अपने युग के सबसे अधिक पढ़े लिखे राजनेता एवं 
अपनों के बीच में रहते हुये शायद ही कभी इस बात का एहसास होता हो कि हमें सबसे ज्यादा खुशी कब मिलती है….????  पर कभी-कभी जीवन में कुछ पल ऐसे होते हैं जो हमें इतनी खुशियां देते हैं कि हम इन पलों को कभी भूल नहीं पाते.......ऐसे ही पलों का हमें अपने जीवन 
कल की खुमारी अभी तक दिमाग में एस तरह बसी हुई है जैसे कोई खराब गंध बस जाती है । उस दिन रात को देर से नींद आई और चूँकि अगले दिन ऑफिस की चट्टी थी तो नींद भी जल्दी खुल गयी । क्या ऐसा मेरा ही साथ होता है या सबके साथ साथ होता है मैं इससे अभी तक अनजान हूँ । पर 
हरियाणा के मनोज-बबली की हत्या करने वालों को अदालत फांसी की सजा सुना चुकी है और इन हत्यारों को बचाने के लिए देश भर की खाप पंचायतें एक जगह जुटीं। कुरुक्षेत्र में हुई इस महापंचायत में जो कुछ हुआ, वह इस तरफ संकेत करते हैं कि खाप अब खत्म होने की कगार पर है।
 अब आपसे लेते हैं हम विदा- लेकिन दिलों से नहीं होंगे जुदा 

11 टिप्पणियाँ:

बहुत विस्तृत चर्चा,,,बढ़िया.

बहुत सारे और अच्छे लिंक्स समेट लिए आपने राजकुमार जी ।

बहुत अच्छी और विस्तृत चर्चा। अच्छे लिंक्स मिले।

बढ़िया लिंक्स मिले...धन्यवाद

अच्छे ब्लाग सुझाने के लिए धन्यवाद

बहुत अच्छी और विस्तार लिए हुए चर्चा...

बहुत सुंदर और विस्तृत चर्चा.

रामराम.

बहुत बढ़िया चर्चा...कई सारे लिंक्स मिले
शुक्रिया,राजकुमार जी मेरा लिंक शामिल करने के लिए......मेरे उपन्यास पर किसी की नज़र तो पड़ी...आठवीं किस्त में ही सही ....

विस्तृत बढ़िया चर्चा !

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