शनिवार, 3 अप्रैल 2010

तुम्हारी बऊ खौं---रोंग नम्बर फ्रेंड-- blog4varta --- (ललित शर्मा)

हिमन पानी राखिए बिन पानी सब सून, पानी गए ना उबरै मोती मानुस चून। गर्मी का भीषण दौर अभी से प्रारंभ हो चुका है, आलम यह है कि लोग सुबह से ही बाल्टी-पीपे लेकर पानी के लिए घुमने लग गए हैं। जहां भी हो जैसे भी हो पानी मिल जाए तो घर का काम चले, सरकारी अमला भी अभी सक्रीय होता है, जब पानी की कमी होती है तो हेंड पम्प और नलों की सुध आती है, उससे पहले तो इनके कानो पर जुँ नहीं रेंगती है। जब जनता त्राहि-त्राहि करती है तब टेंडर निकाले जाते हैं, जब तक टेंडर पर काम शुरु होता है तब तक बरसात आ जाती है। बस बेवकुफ़ बनाने का यही काम बरसों से चल रहा है। मै ललित शर्मा चलता हुँ आज ब्लाग वार्ता पर, कुछ विशेष चिट्ठों के साथ..........

वैशाखनंदन सम्मान प्रतियोगिता मे : श्री समीरलाल "समीर"प्रिय ब्लागर मित्रगणों, हमें वैशाखनंदन सम्मान प्रतियोगिता के लिये निरंतर बहुत से मित्रों की प्रविष्टियां प्राप्त हो रही हैं. जिनकी भी रचनाएं शामिल की गई हैं उन्हें व्यक्तिगत रूप से सूचित कर दिया गया है. त...समेटना बिखरे भावों का- भाग २ अभी १० दिन पहले ही इसका भाग १ प्रस्तुत किया था. देखता हूँ तो पाता हूँ कि अपने भावों को इतना बिखेर चुका हूँ यहाँ वहाँ कि समेटने में भी समय लगेगा. कुछ और समेट लाये बिखरे भावों को और प्रस्तुत है आपके लिए. ...
सिगरेट में सुअर का खून *सावधान.... सिगरेट पीने वालों के लिए एक और खतरनाक खबर है कि यह स्वास्थ्य के लिए तो हानिकारक होता ही है, लेकिन इसी के साथ सिगरेट में सुअर का खून भी होने की बात सामने आई है।* आज सुबह- सुबह एक खबर पर नजरे...धकड़िक फकछक धकड़िक फकछक और सुहानी रात ढल चुकी ...  हम ऑटो में बैठे तो उसमें लगे एफएम रेडियो से गाना सुनाई पड़ा "सुहानी रात ढल चुकी ..."। हम खुश हो गये कि चलो पुराना गाना सुनने को मिलेगा। पर ज्योंही बोल खत्म हुआ कि "धकड़िक फकछक" "धकड़िक फकछक"। ये कौन सा ताल ह...
 गुड फ्राई डे ! आज इस सुअवसर पर दो आड़ी तिरछी कविता की लाइने लोर्ड जीसस के नाम ; *I'm a Hindu, but still I think I'm not much different from the people of your community. Yes Jesus, I respect you and love to read your aut...केन्द्र सरकार को लताड़: सैनिकों के साथ भिखारियों जैसा बर्ताव करना बंद करेंसैनिकों की पेंशन सहित अन्य मामलों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने केन्द्र सरकार को लताड़ते हुए यह टिप्पणी की है कि वह सैनिकों के साथ भिखारियों जैसा बर्ताव करना बंद करें। अदालत ने सरकार से सैनिकों के प्रति अधिक मा...
रोंग नम्बर फ्रेंड *जाने क्यों आज सुबह सुबह ही फिर मूड हुआ आप लोगों से बतियाने का ?* *किसी को बुरा कहना हो तो उसे फिर भी एक बार अवोइड कर भी जाऊं ,पर किसी में कोई विशेषता, अच्छा देखती हूँ तो मन की बात उसे रोक कर कह ही देती हू...ताऊ द्वारा अति गोपनीय ब्लागर्स मीट के भंडाफ़ोड की तैयारी : रामप्यारे आज ना तो पहली अप्रेल बाकी बची है और ना ही मेरा किसी को बेवकूफ़ बनाने का इरादा है. मैं आपको ना तो *महफ़ूज मियां* के बारे मे कोई रिपोर्ट देने वाला हूं और ना ही ताऊ की असली शक्ल दिखाने वाला हूं. और दिखाऊं भी ...
बचपन की यादे : तुम्हारी बऊ खौं .... आज सुबह सुबह जब टहलने निकला जैसे ही एम.आर. सड़क पर पहुंचा उसी समय बचपन के चार मित्र का अचानक आमना सामना हो गया . बीच सड़क पर खड़े होकर काफी देर यहाँ वहां की बाते की और एक दूसरे के हाल चाल जाने . फिर हम पांचो ...वह किताब, वह शास्त्र, वह संदेश सही होना चाहिये मन की यह स्वाभाविक आकांक्षा होती है कि जो मैं मानता हूं, वही दूसरा भी मान ले। यह आकांक्षा क्यों होती है? यह आकांक्षा इसलिये होती है कि मुझे खुद भी भरोसा नहीं है, जो मैं मानता हूं उस पर। जब मैं दूसरे को भी ...
आमीर खान को तो हमारे शहर के कुली तक़ टक्कर दे रहे हैं! आमीर खान को तो हमारे शहर के कुली तक़ टक्कर दे रहे हैं!जी हां बिल्कुल सच कह रहा हूं।क्या?कल की पोस्ट है ये।नही भई अप्रेल फ़ूल वाली पोस्ट नही है ये।मैं श्त-प्रतिशत सच कह रहा हूं।आमीर खान को मेरे शहर मे न केवल ... "गाँव का जोगी जोगड़ा आन गाँव का सिद्ध" कहावतों को चरितार्थ करने के लिए हमारा देश अग्रणी है. मसलन "गाँव का जोगी जोगड़ा आन गाँव का सिद्ध" जरा गौर फरमाइए आज के अखबार में छपी खबर "देश के संस्थान ने की उपेक्षा, सर्न (यूरोपीय ओर्गनाइजेशन फॉर न्यूक्ल...
अभी और जीना है कुछ ख्वाब टूटे हुए कुछ अपने छूटे हुए टूटे को सहेजना है छूटे को टेरना है कुछ खुशबुए बिखरी हुई कुछ लटें उलझी हुई खुशबूं को समेटना है लटों को सवारना है कुछ जख्म रिसते हुए कुछ अश्क छलके हुए जख्मों क... ये किस मोड़ पर ?.............भाग 2 गतांक से आगे .................... निशि उस दिन जैसे ही कंप्यूटर पर चैट करने बैठी तो एक शख्स बार- बार उससे बात करने की कोशिश करने लगा . निशि के मना करने पर भी वो नही माना तो निशि ने सोचा चलो जब चैट ही करनी...
पंछी बनूं उड़ती फिरूं मस्त गगन में पंछी बनूं उड़ती फिरूं मस्त गगन में आज मैं आजाद हूं दुनिया के चमन में...जब भी परिंदों को उड़ते देखता हूं तो ये लाइनें याद आने लगती हैं. कल्पनाओं को पर लग जाते हैं. उस दिन भी जब पिंजरें से करीब पचास गौरैय... भगवान् श्री रजनीश (ओशो ) का निमंत्रण और रजत बोस जी का संन्यास मेरे गुरुदेव स्वामी चिन्मय योगी जी का अपने गुरु भगवान् श्री रजनीश (ओशो ) से 1979 से 1987 के बीच जीवंत गुरु शिष्य संपर्क रहा था . इस जीवंत भावपूर्ण और भक्ति आशीष से भरे सम्बन्ध के प्रमाण है उनके बीच के पत...
जो सब को मारे वह भगवानGOD G :- Generator O :- Operator D :- destroyer कुछ अलग सा :- १, जो किसी एक को मारे - *खूनी * ** सारा समाज, क़ानून, सारे लोग उसके विरुद्ध खड़े होते हैं। २, जो किन्हीं दस को मारे - *पुलिस * उनके काम पर भी ... सीक्रेट ऑफ हैप्पी मैरिड लाइफ़...खुशदीप लो जी आज आपको तमाम उम्र शादी को सुखी बनाए रखकर खुश रहने का राज़ बताता हूं...क्या करूं घर वालों ने न जाने क्या सोच कर नाम खुशदीप रख दिया था...अब नाम को सार्थक तो करना ही है न... हां तो जनाब, ईर्ष्या के मार..
बिना पोस्ट , बिना लिंक्स वाली चर्चा ……हें हें हें हम कुछो कर सकते हैं जी ……हायं … देखिए जी अपनी खोपडी है कि खोपडा ..हमें नहीं पता ..ससुरी धरती की तरह घूमती ही रहती है ..कभी ब्लोग्गर और ब्लोग की आपसी बातें सुन लेती है …तो कभी बिना मतलब उनकी वसीयत तैयार कर देती है ….और कभी ये कर डालत... जब नहीं आये थे तुम... जब नहीं आये थे तुम तब भी तो तुम आये थे... आंख में नूर की और दिल में लहू की सूरत याद की तरह धड़कते हुये दिल की सूरत तुम नहीं आये अभी फिर भी तो तुम आये हो रात के सीने में महताब के खंजर की तरह सुबह के ह...
आज पहना दिया उसके गले में किसी और ने हार आज पहना दिया उसके गले में किसी और ने हार वह गुमसुम सा खड़ा है जिन्दगी को हार !!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!! हर्षित हैं शाख पर पत्ते झूम रही है डाली एक अर्से के बाद तूने फिर से...भावी पीढी के सही विकास के लिए आवश्‍यक मोह ममता की अति ने ही उनका विकास बाधित किया है !! इस विविधता भरी दुनिया में प्रत्‍येक जीव जंतु के विकास के लिए प्रकृति की व्‍यवस्‍था बहुत सटीक है। प्राकृतिक व्‍यवस्‍था के हम जितने ही निकट होते हैं , हर चीज में संतुलन बना होता है। प्रकृति से हमारी दूरी जैस...
अब देते हैं वार्ता को विराम-----सभी को ललित शर्मा का राम-राम ----- मिलते हैं एक ब्रेक के बाद

7 टिप्पणियाँ:

बेहतरीन चर्चा..बधाई इस मेहनत के लिए.

बहुत सुंदर और उत्कृष्ट वार्ता. बहुत शुभकामनाएं.

रामराम.

शुक्रिया आज आपने मेरी कठनाई में जो मदद की आभारी हूं

बढ़िया लिंक्स ललित भाई ! पठनीय सामग्री और प्रभावशाली प्रस्तुतिकरण के लिए शुभकामनायें !

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