शुक्रवार, 25 मई 2012

मन समंदर और प्रीत का दीप...ब्लॉग4वार्ता....संध्या शर्मा

संध्या शर्मा का नमस्कार....महंगाई की मार से जूझ रही जनता पर और बड़ी मुसीबत आन पड़ी है. तेल कम्पनियों ने बुधवार की शाम को पेट्रोल की कीमत में 7.50 रुपये की बढ़ोत्तरी की घोषणा कर दी और आधी रात से कीमतें लागू भी हो गई। अटकलें तो यहाँ तक हैं कि कल डीजल और गैस का नंबर है, इससे महंगाई और बढ़ेगी और आम आदमी का जीना पहले से भी अधिक दूभर हो जायेगा. आइये अब चले ब्लॉग नगरी की सैर पर आज की ब्लॉग4वार्ता के साथ ……… प्रस्तुत हैं कुछ उम्दा लिंक……

http://aruncroy.blogspot.in/ पर अरुण चन्द्र रॉय जी लिख रहे हैं रुपया * * १. रुपया गिर रहा है लगातार होकर कमजोर वह रुपया जो आम जनता की जेब में नहीं है, फिर भी रोटी आधी हो रही है नमक कम हो रहा है उसकी थाली से, फिसल रहा है उसकी जेब से २. रुपया से खरीदनी है पेट्रोल, गाड़ि... http://aadhasachonline.blogspot.in/ पर महेन्द्र श्रीवास्तव जी से सुन लीजिये कहानी ऊंचे लोग ऊंची पसंद .... जी हां, आज यही कहानी सुन लीजिए, ऊंचे लोग ऊंची पसंद । मेरी तरह आपने भी महसूस किया होगा कि एयरपोर्ट पर लोग अपने घर या मित्रों से अच्छा खासा अपनी बोलचाल की भाषा में बात करते रहते हैं, लेकिन जैसे ही हवाई जह... http://babanpandey.blogspot.in/ पर बबन पाण्डेय जी की बाल कविता पढ़िए आग उगल रही आकाश ( बाल कविता लिखना भी आसन नहीं होता, मैंने एक प्रयास किया है ) तप रही है सारी धरती आग उगल रही आकाश // क्या पीयेगें , वन के प्राणी कहाँ टिकेगें , सारे नभचर सिकुड़ गयी है पेट सभी की सूख गयी ह...

http://satish-saxena.blogspot.in/ पर  सतीश सक्सेना जी कह रहे हैं फिर भी हम इंसान हैं -सतीश सक्सेना * अब *** *अब हंसीं मुस्कान भी , * *विश्वास के लायक नहीं* *क्या कहेंगे, क्या करेंगे* *कुछ यकीं, इनका नहीं* *नज़र चेहरे पर लगी है, ध्यान केवल जेब पर* *और कहते हैं कि डरते क्यों ?भले इंसान हैं !* *काम गंदे स... http://gatika-sangeeta.blogspot.in/ पर संगीता स्वरुप जी ने बनाया है एक सुन्दर सा मन समंदर लहरें तो आती जाती हैं दुख सुख का भी हाल यही फिर हम इतना क्यों सोचें बस मन समंदर करना है , मोती सीपों में मिल जाते पर गोता खुद लगाना है श्रम से फिर क्यों भागें हम बस तन अर्पण करना है ...  http://pratibhakatiyar.blogspot.in/ पर प्रतिभा कटियार जी कह रही हैं नहीं, इतना एकांत काफी नहीं... दूर-दूर तक फैला एकांत का विस्तार और उसमें चहलकदमी करती खामोशी. एक पांव की आहट दूसरे को सुनाई नहीं देेती. एकांत का हर हिस्सा अंधकार मे डूबा हुआ. इतना घना अंधेरा कि सब कुछ एकदम साफ नजर आ रहा है...सचमुच अं... http://swapnmere.blogspot.in/ परदिगम्बर नासवा जी ने शब्दों में पिरोये हैं, सुन्दर अहसास  मेरी जाना ... रोज सिरहाने के पास पड़ी होती है चाय की गर्म प्याली और ताज़ा अखबार याद नहीं पड़ता कब देखा माँ की दवाई और बापू के चश्मे से लेकर ... बच्चों के जेब खर्च और नंबरों का हिसाब पता नहीं कौन सी ...

http://hathkadh.blogspot.in/ पर  K C जी ने बना रहे हैं  भुरभुरी चट्टानों के बीच घर एक छोटी कविता और कुछ बेवजह की बातें. मैं एक ख़राब कवि हूँ. मुझे फिलिस्तीन पर लिखना नहीं आता मगर महमूद दरवेश से प्यार है. मैंने उनको पहली बार साल नब्बे में पढ़ा था. उन्हीं दिनों मैंने अंगोला के किसी  कवि... http://jdwcdblog.blogspot.in/ पर गिरीश बिल्लोरे जी का आलेख पढ़िए जन-सहयोग से एक करोड़ 32 लाख 77 हजार 966 की राशि एकत्रित महिला-बाल विकास राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्रीमती रंजना बघेल ने आज अटल बिहारी वाजपेयी बाल आरोग्य एवं पोषण मिशन की गतिविधियों तथा जिलों द्वारा पिछले वित्तीय वर्ष में व्यय की गई राशि की समीक्षा की।मह..... http://dheerendra11.blogspot.in/ पर धीरेन्द्र जी पूछ रहे हैं कौन करेगा निर्माण सुनहरा कल,,,,, सुनहरा कल, सड़क तट पर लिखे हुए अनगिनत नारे हम एक अरसे से पढ़ रहे है, उनमे से एक 'हम सुनहरे कल की ओर बढ़ रहे है'! हमने नारी की पीड़ा को बहुत नजदीक से मौन रह कर देखा है, तंदूर में रोटी की जगह मानव ने एक अबला को ...

http://neelkamalkosir.blogspot.in/ पर Sudheer  Maurya 'Sudhee  ....सुधीर मौर्या जी कह रहे हैं तुम प्रीत का दीप जला देना  जब तेरे शब्दों की दुनिया परिवक्व पल्लवित हो जाये जब तेरे आँचल में खुशियाँ अपार अपिर्मित हो जाये तब चुपके से आकर होले से तुम प्रीत का दीप जला देना जब गंगा तट पर गंगा की लहरें आशीष तुम्हरे ही सर दे जब नील ग.... http://sushma-aahuti.blogspot.in/ पर सुषमा आहुति जी जिन्दगी के गुजरे लम्हों को पलट रही हैं  मेरी डायरी..... !!! से *फिर आज पुरानी डायरी के, * *पन्ने पलट रही हूँ..* ***इन पन्नो के साथ,* *मैं जिन्दगी के गुजरे* *लम्हों को पलट रही हूँ...* *मेरी ख्वाइशों की तरह,* *मेरी डायरी भी जिम्मेदारियों .....http://vandana-zindagi.blogspot.in/ पर है वंदना गुप्ताजी की यादें बाबुल मेरो नैहर छूटो ही जाये यादों की कस्तूरी कैसे छुपाऊँ ज़ेहन में बसी याद कैसे मिटाऊँ जीवन के वो पल कैसे भुलाऊँ जहाँ सफ़र का पहला कदम पड़ा जहाँ रूह को इक जीवन मिला टिमटिमाता दिया बुझने की कगार पर है आ सहेज लूं पलों को रौशनी के कतर...

http://zealzen.blogspot.in/ पर zeel जी का आलेख पढ़िए  पलायमान ब्लॉगर्स - कोई भी क्षेत्र हो,पलायन तभी होता है जब व्यक्ति उस संस्था से, पद्धति से, अनियमितताओं से , गुटबाजियों से अथवा पक्षपाती रवैय्ये से निराश हो चुका होता है। ब्ल...http://www.yuvarocks.com/ पर  जी कह रहे हैं मजबूर हूं, वरना मैं देश बदल देता। - माता पिता के ख्‍वाबों का जिम्‍मा है मेरे महबूब के गुलाबों का जिम्‍मा है मजबूर हूं, वरना मैं देश बदल देता। जॉब से छुट्टी नहीं मिलती विद पे ऐसे उलझे भैया क्‍.. .http://lalitdotcom.blogspot.in/  पर ललित शर्माजी ने आरंभ कर रहे हैं एक युद्ध डायबीटिज से……… ललित शर्मा - डॉ सत्यजीत साहू जब से लोग सुविधाभोगी हुए हैं, तब से भारत में डायबीटिज रोगियों का तेजी से प्रसार हो रहा है। ऐसा नहीं है कि डायबीटिज कोइ नया रोग है, चरक संहि... ....
वार्ता का सफ़र जारी रहेगा,  मिलते हैं, अगली वार्ता में तब तक के लिए नमस्कार............

10 टिप्पणियाँ:

बहुत अच्छी वार्ता संध्या जी...
बढ़िया लिंक्स...

शुक्रिया.

अनु

बहुत अच्छी वार्ता संध्या जी...

पैट्रोल की कीमतों ने तो झुलसा डाला है। मंहगाई बढने के आसार नजर आ रहे है। आज सुबह देखा हमारे डॉक्टर मित्र सायकिल पे चल रहे थे। मतलब मंहगाई के बहाने सेहत बना रहे हैं। बढिया वार्ता एवं उम्दा लिंक्स के लिए आभार संध्या जी।

वार्ता अच्छी लगी,,,,,संध्या जी,,,,मेरी पोस्ट को शामिल करने के लिये आभार,,,,,,,,

बहुत शानदार लिंक्स लगाये हैं।

वाह, बहुत सुंदर लिंक्स
शानदार वार्ता
मुझे स्थान देने के लिए आभार

शानदार लिंक्स

कितना कुछ पढ़ने को है..

mera link shamil karne ke liye dhanywad..

एक टिप्पणी भेजें

टिप्पणी में किसी भी तरह का लिंक न लगाएं।
लिंक लगाने पर आपकी टिप्पणी हटा दी जाएगी।

Twitter Delicious Facebook Digg Stumbleupon Favorites More