रविवार, 15 जुलाई 2012

कब तक नारी अस्‍मिता को नोचा जाएगा? सोचिए ज़रा?... ब्लॉग4वार्ता...संध्या शर्मा

संध्या शर्मा का नमस्कार... "भगत सिंह पैदा तो हों पर..." बरसों पुरानी शहादत अब कहावत बन कर रह गई है, हर आदमी चाहता है कि भगत सिंह पैदा हों पर अपने घर नहीं, पडोसी के यहां.जब - जब व्यवस्था या समाज की विसंगतियों पर बात होती है और उनमें बदलाव की जरूरत महसूस की जाती है तो हर भारतीय यह जुमला दुहरा देता है. जब हम यह बात कहते हैं तो हमारा भाव दूसरों की खिल्ली उडाने जैसा होता है, पर खिल्ली हम सिर्फ व्यवस्था की ही नहीं, खुद अपनी हिप्पोक्रेसी, सोच व व्यक्तित्व के खोखलेपन और अपनी बेबसी की भी उडा रहे होते हैं. हालांकि दोहरे मूल्यों की यह मजबूरी कोई आज से नहीं, जमाने से चली आ रही है। आप क्या सोचते हैं... आइये चलें वार्ता के सफ़र पर मेरी पसंद के कुछ लिंक्स के साथ... 

अधूरी बातें...१) भूखे बच्चे को थपकियों से बहलाता, सूखा आँचल... (२) लड़ रहा हूँ अपनों में रहकर अपनों से... (३) बढ़ जाती है हर रिश्ते की बोली बुरे वक़्त में... (४) और पिलाओ मुझे दिल खाली है जाम नहीं.मेरा मन पुरवाई मेरे मन की चलती चले - चलती चले गाँव , शहर , गली- गली डगर - डगर पत्तों से लड़ी ,कभी फूलों से मिली समुंदर में गई लहरों को उछाला किसी के आँचल को उड़ाए तो कभी बालों में घुस जाए किसी की खुशबू को ... अक्स दर अक्स जब गुजरे तंग गलियों से ,* *शराफत याद आती है-* * * *पनाहे - दर - रकीबा में * *हिफाजत याद आती है -* * * *चमन का, कर लिया सौदा * *शहादत याद आती है -* * * *बाद जाने के ..

जब जब अन्याय होता है कोई सामने नहीं आता ! मैं तुम्हें नहीं जानती नहीं देखा है तुम्हें नहीं मिली हूँ कभी फिर क्यूँ तुम मेरे अन्दर सिसक रही हो चीख रही हो ! कैसे कैसे दरिन्दे घूम रहे हैं मुझे तो बहुत डर लगता है रास्ते भी मेरे देखे हुए नहीं पर ...बढ़ते चरण महगाई के  सुरसा राक्षसी * *** *बढ़ते चरण मंहगाई के *** *जीना दुश्वार कर रहे *** *आज है यह हाल जब *** *कल की खबर किसे रहे *** *यादें सताती है *** *कल के खुशनुमा दिनों की *** *मन पर अंकुश तब भी था *** *पर हर वस्तु लेना ... ऊषा किरण योजना में ग्यारह हजार शिकायत का निराकरण मध्यप्रदेश में वर्ष 2007 से शुरू हुई ऊषा किरण योजना के बेहतर परिणाम सामने आ रहे हैं। घरेलू हिंसा से पीड़ित महिला को संरक्षण एवं सहायता का अधिकार उपलब्ध करवाने की इस योजना में अब तक 22 हजार 141 शिकायतें दर...

भुवन की मैं हूँ नीली सी धरा  ओ पथिक ...क्या जानते हो ... कौन हो तुम ....? कहाँ से आये हो..? माया में ...क्यों इतना भरमाये हो ...? किस बात की जल्दी है ...? कुछ साथ नहीं जायेगा ... मुझमें ही तो मिलना है ... अरे ...रुको ......रुको ..... " ख़ुशबू बिखर जाए उनकी......."वो मुस्कुरा दें बस इतनी सी चाह है , अपने आंसुओ से बचने की कहाँ कोई राह है | वो पलकें उठा दे बस इतनी सी चाह है , खुली आँखों से सपने देखने की यही एक राह है | वो लब खोल दे, दो बोल बोल दें , बस इतनी सी चाह...बूंद बूंद में वही झरे था बूंद बूंद में वही झरे था एक नदी सागर से उपजी एक नदी सागर से बिछड़ी, पर्वत की चोटी से उतरी गुफा, कन्दरा होती बहती ! जाने कितनी बाधाएं थीं कितने अंध मोड़ आये थे, कितना जल खो गया राह में गहरी...

सोचिए ज़रा *कितनी लिखी गई किताब सोचिए ज़रा, क्या मिल गए सभी जवाब सोचिए ज़रा। काँटों बग़ैर ज़िंदगी कितनी अजीब हो, अब खिलखिला रहे गुलाब सोचिए ज़रा। ज़र्रा है तू अहम विराट कायनात का, भीतर उबाल आफ़ताब सोचिए ज़रा। चले उकेर के ...अनगिनित प्रश्न  चलो में अपनी हथेली काट लेता हूँ निकलते रक्त से हल कर लेता हूँ सारे सवाल दहक रहे जो हमारे ह़ी अप्रायोगिक मस्तिस्क में अनगिनित प्रश्न जो मान लेते है मुझे घोर असफल और बार-बार धकेलते है मुझे कभी रस्सी और... .हमारी चुप्पी ले आई हमें इस मुकाम पर गुवाहाटी में जो कुछ हुआ उस पर काफी कुछ कहा जा चुका है। निजी स्तर मैं खुद को लज्जित और क्षुब्ध अनुभव कर रहा हूँ और कहीं न कहीं खुद को भी ...

पानी गिरा कर मेह के रूप में  पानी गिरा कर मेह के रूप में अन्न उगाते कभी अभिराम हैं ! शोभा दिखाते हमें अपनी जो ऐसी फिर विद्युत रूप कभी वे ललाम हैं ! शब्द सुना कर घन गर्जन का ध्वनि शंख की करते कभी बलभान हैं ! ..आ साथी, अब दीप जलाएँ आ साथी, अब दीप जलाएँ लगी निशा होने है, गहरी घोर तिमिर होगा अब प्रहरी अपनी अभिलाषाओं को फिर से,निंद्रा-पथ की राह दिखाएँ आ साथी, अब दीप जलाएँ है पावस की रात अँधेरी घन-बूँदों की सुन कर लोरी शायद ...ख्वाब नहीं ख्वाहिश है क्यूँ आसमां में एक ही चाँद ? होते कई काश... एक तेरा, एक मेरा..... जितने तारे, उतने चाँद !! टिमटिमाते तारे, मुस्काते चाँद. कभी कोई चाँद पूरा कोई अधूरा... तीजा चौथ का चौथा ईद का... कोई चाँद तुम सा, कोई तुम कह...

ललित गर्ग का आलेख - गुवाहाटी कांड और बागपत फतवा : कब तक नारी अस्‍मिता को नोचा जाएगा? - - ललित गर्ग - गुवाहाटी की एक लड़की के साथ सरेआम तीस लोगों ने जो वीभत्‍स एवं दरिन्‍दगीपूर्ण कृत्‍य किया वह एक बार फिर भरी राजसभा में द्रौपदी को बाल पकड़कर ... जरूरी तो नहीं मानसून की आहटों से सबके शहर का मौसम गुलाबी हो ............ - मानसून आ रहा है मानसून आ रहा है सिर्फ यही तो उसे डरा रहा है कल तक जो रहती थी बेफिक्र आज उसकी आँखों में उतरी है बेबसी ग्रीष्म का ताप तो जैसे तैसे सहन कर ले...गुवाहाटी की उस लड़की के नाम : ब्रह्मपुत्र आज सिसक सिसक कर रो रही है !!! - * **भाग एक :** **हे** **बाला [ श्री भूपेन हजारिका अक्सर **north -east **की लडकियों को बाला कहते** **थे. ] **; **.. 

वरदान.. आज अचानक वट - वृक्ष बोल पड़ा सुनो कुछ कहना चाहता हूँ अनंत काल से खड़ा हूँ एक ही जगह, तुम्हारे बांधे कच्चे सूत्रों के बंधन से बंधा मजबूती से पाँव जमाये ...वर्षा गीत ! - *वर्षा की रिमझिम बूंदों ने * *मन में नई मिठास भरी,* *नए-नए पौधों से सजकर * *सारी धरती हुई हरी ||* * * *सूरज की कठिन चुभन से* *तन जब अग्नि समान हुआ,* *मेघ-दे..एक ग़ज़ल : वो मुखौटे बदलता रहा उम्र भर - वो मुखौटे बदलता रहा उम्र भर और ख़ुद को भी छलता रहा उम्र भर मुठ्ठियाँ जब तलक गर्म होती रहीं मोम सा वो पिघलता रहा उम्र भर वो खिलौने से ज़्यादा था कुछ ...

सावन में सवनाही सवनाही देवी का स्थान गाँव के सियार मेंरथयात्रा के बाद सावन माह से छत्तीसगढ अंचल में त्यौहारों की झड़ी लग जाती है। छत्तीसगढ के लगभग सभी त्यौहार कृषि कर्म से जुड़े हुए हैं। सावन के महीने में वर्तमान में....क्‍या करें क्‍या न करें 14 , 15 और 16 जुलाई 2012 को ??मेष लग्नवालों के लिए 14 , 15 और 16 जुलाई 2012 को धन की स्थिति मजबूत होगी , इसे मजबूत बनाने के कार्यक्रम भी बनेंगे। संपन्न लोगों से विचार विमर्श होगा। ससुराल पक्ष का महत्व बढेगा , ससुराल पक्ष के किसी कार्.. धरती-धरती चलो चिदंबरम, आसमान की छाती न फाड़ो.कां ग्रेसनीत यूपीए सरकार की स्थिति दलदल में फंसे उस आदमी की तरह हो गई है, जो दलदल से बाहर निकलने के लिए जितना हाथ-पैर मारता है उतना ही दलदल में भीतर धंसता जाता है। सच को स्वीकार करने की जगह उस पर पर्दा...

चलते चलते एक व्यंग्य चित्र

http://1.bp.blogspot.com/_Sp9CvfmAaCQ/SBrWXEpoxYI/AAAAAAAAAmw/TeimTkj6Etc/s1600/cartoon1.jpg



दीजिये इजाजत मिलते हैं अगली वार्ता में तब तक के लिए नमस्कार ..............

11 टिप्पणियाँ:

संध्‍या जी, श्रमपूर्वक सार्थक लिंक्‍स मुहय्या कराये हैं आपने। आभार।

............
ये है- प्रसन्‍न यंत्र!
बीमार कर देते हैं खूबसूरत चेहरे...

आज बहुत कुछ मिला है पढ़ने को..

शुक्रिया संध्या जी....
बहुत बढ़िया लिंक्स खोज कर पेश किये हैं.....
आभार

सस्नेह
अनु

बहुत ही उपयोगी और अध्‍ययन-सहायक है'वार्ता'।
अपने ब्‍लॉग को इसमें पाकर अच्‍छा लगता है। कृपा है आपकी। कोटिश: आभार और धन्‍यवाद।

बहुत सुन्दर वार्ता संध्या जी ! मेरी माँ की रचना के चयन के लिए आपका हार्दिक आभार !

बेहतरीन लिंक्स है
बहुत बढ़िया वार्ता मंच
:-)

लाजबाब लिंक्स सुंदर वार्ता,,,,,

सुन्दर लिंक संयोजन रोचक वार्ता

प्रभावी वार्ता।
मेरी रचना सम्मिलित करने के लिए आभार।

एक टिप्पणी भेजें

टिप्पणी में किसी भी तरह का लिंक न लगाएं।
लिंक लगाने पर आपकी टिप्पणी हटा दी जाएगी।

Twitter Delicious Facebook Digg Stumbleupon Favorites More