रविवार, 21 नवंबर 2010

ब्लागिंग का नशा, शराब से कहीं अधिक है :सतीष सक्सेना @ महफूज़ के अंदर भी है रजनीकांत...खुशदीप

http://3.bp.blogspot.com/_K_VwDAhWmd0/TOe50ewk0PI/AAAAAAAAAS4/wdEg1RoBylI/s1600/Pamela.jpgकल एक और आयोजन भाई राज भाटिया और अमित ( अंतर सोहिल ) द्वारा रोहतक में किया जा रहा है ! स्नेही अमित और राज भाई का आमंत्रण ठुकराया नहीं जा सकता अतः व्यस्तता के बावजूद ,भी रोहतक जाना पड़ेगा  !अपने ढाई साल के ब्लोगिंग काल  का अनुभव बांटू तो यह मानिए कि ब्लोगिंग एक बुरा नशा है, जो आपके सारे कार्यकलापों को उसी तरह प्रभावित करता है जिस तरह कोई और नशा कर सकता है ! शायद इसका नशा, शराब से कहीं अधिक है !(और अधिक पढ़िये )

   
                                                                                                                                     
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    http://3.bp.blogspot.com/_MmC5otPbDv8/SKHYyKpxRxI/AAAAAAAABfM/5pheEglRGcs/s1600/MYDC0345.JPG
    मिसफ़िट पर कानाफ़ूसी सुनाई देती है
     
      देशनामा पर सच तो लिखा है भाई जी =>कभी सुख, कभी दुख, /यही ज़िंदगी है,/ये पतझड़ का मौसम,/घड़ी दो घड़ी है, /नए फूल कल फिर,/डगर में खिलेंगे,
    उदासी भरे ये दिन,/कभी तो हटेंगे... (देखिये )

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     प्रकाश पर्व पर सभी को हार्दिक शुभ-कामनाएं
     आपका स्नेही :- गिरीश  अब चाहता आपसे विदा कल देखिये अन्य चर्चा कार की चर्चा
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      9 टिप्पणियाँ:

      यह क्या गिरीश भाई मेरा ग्लास मेरे पास से हटा कर पामेला.....क्यों तंग करते हो यार ??
      :-)

      बढ़िया अंदाज़ + बढ़िया लिंक्स + गिरीश दादा = एक उम्दा ब्लॉग वार्ता !

      गुरु पर्व दी लख लख बधाइयाँ !

      श्री वाहे गुरु जी दा खालसा ...... श्री वाहे गुरु जी दी फ़तेह !!

      अच्छी लिंक्स और चर्चा के लिए बधाई |
      आशा

      बढिया लिंक्स हैं भाई

      बेहतरीन वार्ता............

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